Archive | July 30th, 2010

मक्का की खेती में कीट/रोगों से सुरक्षा के उपाय

Posted on 30 July 2010 by admin

खरीफ में मक्का की ख्ेाती को नुकसान पहुंचाने वाले कीट/रोगों में-तना छेदक कीट, पत्ती लपेटक कीट, टिड्डा एवं मुडली कीट, तुलसितरा रोग, झुलसा रोग, सूत्रकृमि रोग एवं तना सड़न रोग मुख्य है। फसल में लगने वाले कीट/रोगों की सामयिक रोकथाम अति आवश्यक हैं।
कृषि विभाग के प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार तना छेदक कीट अपनी सूड़िया से तने में छेद करके अन्दर ही अन्दर खाती रहती है। इसकी रोक थाम के लिए लिन्डेन या काबोZफ्यूरान, क्यूनाल फास अथवा काबेZरिल इन में से किसी एक का 15-20 दिन में छिड़काव करें।
पत्तीलपेटक कीट अपनी सूड़िया पत्ती के दोनों किनारों को रेशम जैसे सूत से लपेटकर खा जाती है। इसकी रोकथाम के लिए मिथाइल पेराथियान 2 प्रतिशत 20-25 किलोग्राम का प्रति हेक्टेयर बुरकाव करें।
मुडली कीट के शरीर पर रोये होते हैं। यह पत्तियों को बहुत तेजी से खा जाती हैं। इसके लिए मिथाइल पैराथियान, इन्डोसल्फान, क्यूनालफास डाइक्लोरवास, क्लोरपाइरीफास में से किसी भी रसायन का बुरकाव या छिड़काव संस्तुति के अनुसार करें।
तुलसिता रोग में मक्का की पत्तियों पर पीली धारियां पड़ जाती हैंं नीचे की सतह पर सफेद रूई के समान फफून्दी दिखाई देती है, बाद में गहरे लाल, भूरे धब्बे पड़ जाते हैंं। इसके लिए मैगंनीज कार्बमेट या जीरम 80 प्रतिशत 2 किलोग्राम, जीरम 27 प्रतिशत के 3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

पत्तियों के झुलसा रोग में पत्तियों पर बड़े, लम्बे अथवा अण्डाकार भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। रोग उग्र होने पर पत्तियां झुलस जाती हैं। इसमें जिनेबया जिंक मैग्नीज कार्बमेट का छिड़काव करना चाहिये।
सूत्रकृमि की रोकथाम के लिए गहरी जुताई करें, बुवाई के एक सप्ताह पूर्व 10 किलोग्राम फोरट जी फैलाकर मिला दें। तना सड़न रोग अधिक वषाZ वाले क्षेत्र में पत्तियां पीली पड़ कर सूख जाती हैं इसके लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लीन या एग्रीमाइसीन अथवा आक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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05 अगस्त को सर्वदलीय बैठक

लखनऊ : दिनांक 30 जुलाई, 2010
उत्तर प्रदेश विधान मण्डल के दोनों सदनों की बैठक 6 अगस्त से श्री राज्यपाल द्वारा आहूत की गई है। इसके क्रम में विधान सभा तथा विधान परिषद की सर्वदलीय बैठक दिनाकं 05.08.2010 को क्रमश: 12.30 बजे तथा 3 बजे विधान भवन में आयोजित की गई है। इसमें पार्टी के दलीय नेताओं के अलावा मुख्यमन्त्री भी भाग लेंगी।
यह जानकारी संसदीय विभाग के प्रमुख सचिव ने दी है।
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सम्पर्क सूत्र :
सहायक निदेशक-मुरलीधर सिंह (9450067198)

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चार विधान परिषद के सदस्यों का पता परिवर्तित

लखनऊ : दिनांक 30 जुलाई, 2010
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चार नये सदस्यों का पता परिवर्तित हो गया है। अब श्री मंगल सिंह सैनी का पता-51-ए ब्लाक दारूलशफा, श्री राकेश सिंह का 1201-ए-मन्त्री आवास डालीबाग, श्री अक्षय प्रताप सिंह का बी, 5/15 विशाल खण्ड, गोमती नगर तथा श्रीमती अन्नपूर्णा सिंह उर्फ पूनम सिंह का कमरा -1 एवं-2, विधायक निवास मीराबाई मार्ग, लखनऊ हो गया है।
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सम्पर्क सूत्र :
सहायक निदेशक-मुरलीधर सिंह (9450067198)

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Posted on 30 July 2010 by admin

शुल्क प्रतिपूर्ति में 2325864 विद्यार्थियों तथा शादी-बीमारी योजना में 81647 व्यक्ति लाभािन्वत

वर्तमान प्रदेश सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ग के व्यक्तियों को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए सरकार के गठन होते ही अनेक नवीन योजनायें शुरू की गई। इस वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे व्यक्तियों की पुत्रियों की शादी के लिए 10 हजार रूपये तथा बीमारी में प्रति व्यक्ति पांच हजार रूपये देकर, गरीबों के आंसू पोंछने का प्रयास किया गया। छात्रवृत्रि में प्रतिवर्ष लाखों रूपये की बढ़ोत्तरी के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रावास निर्माण के माध्यम से आवासीय सुविधायें प्रदान करायी गई।
राज्यमन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) श्री अवधेश कुमार वर्मा ने ये बातें विभागीय उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए कहीं। उन्होंने बताया कि 2007-08 से शुरू की गई शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में तीन वषोZं में 481.62 करोड़ रूपये से 2325864 छात्र/छात्राओं को लाभािन्वत किया गया। एक लाख रूपये तक वाषिZक आय वाले परिवार के छात्र पहले शुल्क के अभाव में उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में प्रवेश नहीं ले पाते थे। इस योजना से उनके आगे पढ़ने  का रास्ता प्रशस्त हुआ। इस वर्ष 2010-11 में इस मद में 179.29 करोड़ रूपये की धनराशि है, इससे 1361218 विद्यार्थी लाभािन्वत होंगे। जो विगत वर्ष की तुलना में 1.81 लाख ज्यादा है।  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घर से शिक्षण संस्था के दूर होने के कारण, उन्हें आवासीय समस्या होती थी। 50 छात्र प्रति हास्टल आवासीय क्षमता वाले 45 छात्रावास बनकर छात्रों के रहने किए तैयार है। इस समय 18 छात्रावास निर्माणधीन है तथा चालू वित्तीय वर्ष में 11.72 करोड़ रूपये सेे 14 छात्रावास और बनाये जायेंगे।
श्री वर्मा ने कहा कि 2006-07 की तुलना में 2007-08 में 53 लाख अधिक छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्रि दी गई। वर्ष 2008-09 में 2007-08 की तुलना में 23.13 लाख अतिरिक्त छात्रों को छात्रवृत्रि दी गई तथा वित्तीय वर्ष 2009-10 में पिछले वर्ष की अपेक्षा 10.60 लाख ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्रि मिली। छात्रवृत्रि में प्रतिवर्ष लाखों विद्यार्थियों की बढ़ोत्तरी की जा रही है। छात्रवृत्ति के सुचारू एवं त्रुटि रहित ढंग से वितरण हेतु कम्यूटरीकरण एवं नोशनल बैंक खाते की व्यवस्था करके कक्षा 9 से ऊपर के छात्रों की छात्रवृत्रि उनके खाते में पहुंचायी जा रही हैं। विद्यार्थी अपनी पाठ्य पुस्तके ड्रेस तथा अन्य आवश्यक सामग्री समय से खरीद सके इसके लिए जुलाई एवं अगस्त में छात्रवृत्रि की प्रथम किश्त का पूर्ण वितरण कराने के निर्देंश अधिकारियों को दिये गये हैं। विगत वित्तीय 2009-10 में छात्रवृत्ति एवं प्रवेश शुल्क से वंचित रहे विद्यार्थियों के लिए, चालू वित्तीय वर्ष में 88.12 करोड़ रूपये की धनराशि जिलों को भेजी जा चुकी है। पिछड़े वर्ग के बी0 पी0 एल0 परिवार पहले धनाभाव में इलाज नहीं करा पाते थे, और गम्भीर रोगों के शिकार हो जाते थे। वर्तमान सरकार ने तीन साल में 79.84 करोड़ रूपये व्यय करके शादी एवं बीमारी योजना में 81647 व्यक्तियों को लाभािन्वत किया। चालू वित्तीय वर्ष में 40 करोड़ रूपये व्यय करके 42 हजार लोगों को लाभािन्वत किया जायेगा।
इस वर्ग के बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए `ओ´ लेवल कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत 4000 लाभार्थी प्रशिक्षित किये जा चुके है। चालू वित्तीय वर्ष में 2000 बेरोजगारों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य इनको रोजगार-स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने का है। उ0 प्र0 पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम से बेरोजगारों को विभिन्न ट्रडों में स्व उद्यम एवं व्यवसाय के लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। विगत वर्ष में 524 लोगों को ऋण उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा इच्छुक छात्रों को सस्ते ब्याज पर शैक्षिक ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा हैं।
राज्यमन्त्री ने बताया कि क्रीमी लेयर की सीमा प्रदेश सरकार ने 3 लाख रूपये से बढ़ाकर 5 लाख रूपये वाषिZक आय कर दी है जब कि केन्द्र की क्रीमी लेयर की सीमा 4.50 लाख रूपये वाषिZक तक ही है। हमारी सरकार ने 15 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किये जाने, प्राइवेट सेक्टर में पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने तथा क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ाने के लिए प्रधान मन्त्री को पत्र लिखा हैं। पिछड़ी जाति उत्पीड़न मामलों का निराकरण भी तत्परता से किया जा रहा है। सरकार ने सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग के बैकलाग को पूरा करने का प्रयास किया है।
श्री वर्मा ने कहा कि विभिन्न योजनाओं की 50 प्रतिशत अवमुक्त धनराशि जिलों में भेजी जा चुकी है। सभी अधिकारियों  को जून माह में आयोजित बैठक में विस्तृत निर्देंश दिये गये थे कि योजनाओं को लागू करने में कोताही न बरतें। सरकार की मन्शा के अनुरूप योजनाओं का लाभ इस वर्ग के पात्र व्यक्तियों को सुचारू रूप से समय पर पहुंचायें।
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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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प्रदेश के आलिया स्तर के 61 मदरसों को अनुदान सूची पर लिये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव

Posted on 30 July 2010 by admin

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिशद् की बैठक में मन्त्रिपरिशद् द्वारा आज प्रदेश के आलिया स्तर के स्थायी मान्यता प्राप्त 61 मदरसों को अनुदान सूची पर लिये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
अनुदान सूची में आ जाने पर एक वशZ में इन मदरसों पर आने वाला व्यय भार 11 करोड़ 18 लाख 22 हजार 516 रूपये अनुमानित है। यह मदरसे 01 जुलाई, 2010 से चालू िशक्षा सत्र से अनुदान सूची पर रखे गये हैं।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने प्रदेश के कुल 100 मदरसों को अनुदान सूची में लिये जाने की पूर्व में घोशणा की थी, जिसमें से 39 मदरसों को अनुदान सूची में ले लिया गया था। शेष 61 मदरसों को वरीयता के क्रम में अनुदान पर लिए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को आज उनकी अध्यक्षता में सम्पन्न मन्त्रिपरिशद् की बैठक में लिए जाने का निर्णय लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश में अल्पसंख्यकों की आबादी प्रदेश की कुल आबादी का 18 प्रतिशत से अधिक है। इसे दृिश्टगत रखते हुए अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास का सम्पूर्ण प्रदेश के समग्र विकास में विशेश महत्व है। प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय में सर्वाधिक जनसंख्या मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय की है। मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय शैक्षणिक एवं आर्थिक दृिश्ट से अत्यधिक पिछड़ा हुआ है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव न केवल राज्य के मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय पर, वरन् पूरे प्रदेश के विकास पर पड़ना स्वाभाविक है। मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षणिक विकास में प्रदेश में स्थापित मदरसों का भी विशेश योगदान है। वर्तमान में प्रदेश में आलिया स्तर के स्थायी मान्यता प्राप्त 1306 मदरसे हैं, जिनमें 360 मदरसे अनुदानित हैं तथा 946 मदरसा गैर अनुदानित हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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निजी प्रबन्ध तन्त्र द्वारा संचालित मान्यता प्राप्त अनुसूचित जाति बाहुल्य प्राथमिक विद्यालयों को प्रतिवर्ष एक मुश्त छ: लाखरूपये की आर्थिक सह

Posted on 30 July 2010 by admin

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज सम्पन्न हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश में निजी प्रबन्ध तन्त्र द्वारा संचालित मान्यता प्राप्त अनुसूचित जाति बाहुल्य प्राथमिक विद्यालयों को प्रतिवर्ष एक मुश्त छ: लाख रूपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की योजना को अनुमोदित कर दिया है।
राज्य सरकार का मानना है कि प्रदेश में सीमित संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को एक मुश्त आर्थिक सहायता प्रतिवर्ष प्रदान कर उनके सुचारू संचालन एवं विकास की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए इन विद्यालयों को 06 लाख रूपये प्रतिवर्ष एक मुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। यह धनराशि विद्यालय के संचालन एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु व्यय की जायेगी और यह सहायता वर्ष में एक बार एक मुश्त अनुदान के रूप में दी जायेगी। यह अनुदान नियत रहेगा और इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन वेतन आदि में वृद्धि के कारण अनुमन्य नहीं होगा।
अत: इसे दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार ने 200 ऐसे प्राथमिक विद्यालयों की सहायता हेतु चयनित करने का निर्णय लिया है, जो गुणवत्ता के न्यूनतम मानकों को पूरा करेंगे। इस नई योजना के अन्तर्गत चयनित विद्यालयों हेतु नये मानक व सीमित अनुदान राशि लागू होगी। इसमें से पांच लाख की धनराशि शिक्षकों के वेतन पर तथा एक लाख रूपये की धनराशि भवन निर्माण पर व्यय की जायेगी। इस आशय के प्रस्ताव को मन्त्रिपरिषद ने अनुमोदित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार पिछड़े क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु अनेक योजनाओं एवं कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा के विकास को उच्च प्राथमिकता देते हुए समाज के पिछड़े वर्गों विशेषकर अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रसार हेतु निरन्तर प्रयासरत है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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्रदान किय नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने पर स्टाम्प शुल्क सपे छूट की सुविधा 31 मार्च, 2011 तक े जाने का प्रस्ताव मंजूर

Posted on 30 July 2010 by admin

ज्ञातव्य है कि नजूल पट्टागत भूमि के फ्रीहोल्ड अधिकारों में परिवर्तन की नीति को व्यवहारिक एवं आकर्षकमन्त्रि परिषद ने नजूल पट्टागत भूमि को फ्री होल्ड किये जाने के प्रकरण में, विधिक डीड के निष्पादन पर स्टाम्प शुल्क से छूट की सुविधा दिनांक 31 मार्च, 2011 तक प्रदान किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह छूट इस सम्बंध में निर्गत की जाने वाली अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी परन्तु नजूल भूमि में नीलाम या निविदा आमन्त्रण के द्वारा स्वामित्व अधिकार स्वीकृत करने सम्बंधी मबनाये जाने के उद्देश्य से नजूल पट्टागत भूमि के अधिकारों में परिवर्तन की विधिक डीड के निश्पादन पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क से राज्य सरकार द्वारा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-9 के अन्तर्गत प्रतिवर्ष छूट प्रदान की जाती रही है। तत्क्रम में अन्तिम बार दिनांक 30 अक्टूबर 2009 से दिनांक 31 मार्च 2010 की अवधि के लिए यह छूट अधिसूचना दिनांक 30 अक्टूबर 2009 द्वारा प्रदान की गई। इस प्रकार नजूल भूमि के फ्रीहोल्ड विलेख के निष्पादन पर स्टाम्प शुल्क में छूट की अवधि दिनांक 31 मार्च 2010 को समाप्त हो गई है।    यह भी उल्लेखनीय है कि नजूल फ्रीहोल्ड नीति एक स्वैच्छिक नीति है। पट्टाधारकों को फ्रीहोल्ड के लिए प्रेरित करने हेतु नजूल नीति को आकर्षक बनाने से राज्य को राजस्व की प्राप्ति होती है। इसलिए मन्त्रिपरिषद नें राजस्व हित में पट्टेदारों को स्टाम्प शुल्क से देने का यह निर्णय लिया।

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मन्त्रिपरिशद् द्वारा बागपत, औरेया व जौनपुर में मौसम आधारित फसल बीमा योजना को पायलट आधार पर लागू करने सम्बन्धी प्रस्ताव स्वीकृत

Posted on 30 July 2010 by admin

मन्त्रिपरिशद् ने प्रदेश के चयनित बागपत, औरेया एवं जौनपुर में जनपदों में मौसम आधारित फसल बीमा योजना को पायलट आधार पर लागू करने सम्बन्धी प्रस्ताव को आज मंजूरी प्रदान कर दी।
मन्त्रिपरिशद् द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य के बागपत, औरेया एवं जौनपुर में खरीफ 2010 में मौसम आधारित फसल बीमा योजना को पायलट आधार पर क्रियािन्वत किया जायेगा। इस योजना के अन्तर्गत अधिकृत बीमा कंपनियों द्वारा कम व अधिक वशाZ से फसल नश्ट होने की संभावनाओं के आधार पर किसानों को बीमा कवर के रूप में क्षतिपूर्ति प्रदान की जायेगी ।जनपद औरैया में धान, मक्का, बाजरा, अरहर, उर्द, तिल व मोमफली, जनपद जौनपुर में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, उर्द एवं तिल तथा जनपद बागपत में धान बाजरा, अरहर एवं उर्द फसल को कवर किया जायेगा।
इस योजना के अन्तर्गत ऋणी कृशक योजना में अनिवार्य रूप से तथा गैर-ऋणी कृशक स्वैच्छिक आधार पर सम्मिलित किये जायेंगे। गैर-ऋणी किसानों को राश्ट्रीय कृशि बीमा योजना तथा मौसम आधारित फसल बीमा योजना में से किसी एक योजना में अपनी ईच्छानुसार सम्मिलित होने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। इस योजना को एग्रीकल्चर इन्श्योरेन्स कम्पनी ऑफ इण्डिया लि0 एवं निजी बीमा कम्पनी-आई0सी0आई0 सी0आई0-लाम्बार्ड जनरल कम्पनी लि0 व इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस कम्पनी के सहयोग से चलाया जायेगा। जनपद बागपत में इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लि0, औरैया में एग्रीकल्चर इन्श्योरेन्स कम्पनी ऑफ इण्डिया लि0 तथा जौनपुर में आई0सी0आई0सी0आई0-लाम्बार्ड जनरल कम्पनी लि0 द्वारा ऋणी एवं गैर-ऋणी सभी किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए अधिकृत किया जायेगा।
अधिकृत बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम की वास्तविक दर आंकलित की जायेगी। भारत सरकार द्वारा अधीसूचित की जाने वाली सभी फसलों के लिए वास्तविक प्रीमियम दर की अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है, परन्तु किसानों वही प्रीमियम देय होगा, जो राश्ट्रीय कृशि बीमा योजना के अन्तर्गत देय है। किसानों द्वारा देय प्रीमियम दरों तथा वास्तविक दर के अन्तर की धनरािश को केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बराबर-बराबर वहन किया जायेगा। कृशक केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा अपने-अपने देय प्रीमियम के अंश पर 10.30 प्रतिशत की दर से सर्विस टैक्स अलग से वहन किया जायेगा।
इस योजना में किसानों की फसलों के उत्पादन लागत के बराबर की धनरािश का बीमा किया जायेगा। योजनान्तर्गत क्षतिपूर्ति के आंकलन के लिए प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर बीमा कम्पनी द्वारा मौसम केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। इन मौसम केन्द्रों में फसल उपज के प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण में कम व अधिक वशाZ के वास्तविक आंकड़ों में बीमा कम्पनी द्वारा तैयार की गई फसल व टर्मशीट पर दिये गये प्राविधानों के अनुसार क्षति का आंकलन किया जायेगा। किसानों को देय समस्त क्षतिपूर्ति बीमा कम्पनियों द्वारा वहन करते हुए निर्धारित समय के भीतर बीमा धारक किसान को की जायेगी। खरीफ 2010 में प्रदेश के बागपत, औरैया एवं जौनपुर जिलों में इस योजना को पायलट आधार पर क्रियान्वयन में 410.60 लाख रूपये का राज्य सरकार का व्यय संभावित है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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क्रय अनिवार्यता की अवधि 31 मार्च, 2011 तक बढ़ी

Posted on 30 July 2010 by admin

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मन्त्रिपरिशद् ने सरकारी विभागों एवं शासकीय नियन्त्रणाधीन उपक्रमों/निगमों/ प्राधिकरणों/परिशदों एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं में शासकीय संस्थाओं द्वारा उत्पादित वस्त्रों की क्रय अनिवार्यता की अवधि को 31 मार्च, 2011 तक के लिए बढ़ा दी है।
मन्त्रिपरिशद् द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार इन वस्त्रों का क्रय उ0प्र0 राज्य हथकरघा निगम लि0, यूपिका, उ0प्र0 खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा वित्तपोशित एवं प्रमाणित संस्थाओं तथा गांधी आश्रम एवं उत्तर प्रदेश हस्तिशल्प विकास एवं विपणन निगम के माध्यम से किया जायेगा।
राज्य के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में लघु एवं कुटीर इकाइयों के महत्व तथा हथकरघा से जुड़े बुनकरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लघु एवं कुटीर हथकरघा इकाइयों द्वारा उत्पादित 11 प्रकार के वस्त्रों का क्रय सरकारी विभागों एवं शासकीय नियन्त्रणाधीन उपक्रमों/निगमों/प्राधिकरणों/परिशद्ों एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं द्वारा अनिवार्य रूप से की गई है।
जिन वस्त्रों का क्रय उिल्लखित संस्थाओं से किये जाने की अनिवार्यता की गई है, उनमें-सूटिंग एवं शर्टिंग (खाकी, नेवी ब्ल्यू, ग्रे, सफेद आदि सभी रंगों में), कॉटन बेड दरी (सभी किस्म एवं रंगों में), हक्का बैक/हनी कोम्ब/टेरी टावेल, साड़ी एवं धोती, बेड सभी प्रकार के), फशीZ दरी, ऊनी वदीZ का कपड़ा, गाज बैण्डेज क्लाथ, दो सूती क्लाथ हैं। -शीट एवं पिलो कवर, परदे के कपड़े एवं टेपेस्ट्री (सोफा इत्यादि के प्रयोग हेतु), ऊनी कम्बल

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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यूनीक आइडेन्टीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इण्डिया

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एवं राज्य सरकार के बीच एम0ओ0यू0 निष्पादित

मन्त्रिपरिषद ने प्रदेश में यू0आई0डी0 नम्बर की योजना को क्रियािन्वत किए जाने हेतु यूनीक प्रमुख सचिव नियोजन को हस्ताक्षर करने हेतु अधिकृत किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। आइडेन्टीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इण्डिया द्वारा उपलब्ध कराये गये एम0ओ0यू0 को दो अतिरिक्त प्राविधान सहित स्वीकार करते हुए उस पर प्रदेश सरकार की ओर से

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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उत्तर प्रदेश मूल्य संविर्धत कर अधिनियम-2008 में संशोधन

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मन्त्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश मूल्य संविर्धत कर (संशोधन) विधेयक-2010 के आलेख को अनुमोदित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में व्यापार कर व्यवस्था के स्थान पर 01 जनवरी, 2008 से वैट व्यवस्था लागू की गई है। इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश मूल्य संविर्धत कर अधिनियम-2008 अधिनियमित हुआ है। पूर्व व्यवस्था में प्रदेश की सीमाओं पर जांच चौकियां स्थापित थी। प्रदेश के बाहर से प्रदेश में होते हुए अन्य प्रदेश को जाने वाले करयोग्य माल के सम्बन्ध में पारगमन प्राधिकार पत्र (बहती) जारी व खारिज किये जाने का कार्य भी जांच चौकियों पर सम्पादित होता था। जांच चौकियों से व्यापारियों एवं उद्यमियों को होने वाली असुविधा को दूर करने तथा अबाध व्यापार एवं वाणिज्य को सुगम बनाने की दृष्टि से दिनांक 30/31-07-2009 की मध्य रात्रि से वाणिज्य कर विभाग की जांच चौकियों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पारगमन प्राधिकार पत्र की व्यवस्था भी समाप्त हो गई। इस क्रम में अधिनियम की कतिपय धाराओं में संशोधन किये जाने, व्यापारियों की कुछ समस्याओं के समाधान हेतु कतिपय धाराओं में संशोधन किये जाने तथा राजस्व हित में कतिपय धाराओं में संशोधन किये जाने के लिए कमिश्नर, वाणिज्यकर, उ0प्र0 द्वारा प्रस्ताव किया गया

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश विधेयक-2010 पुर:स्थापित किए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित

Posted on 30 July 2010 by admin

मन्त्रिपरिषद ने बाबू बनारसी दास एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा निजी क्षेत्र में बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय की स्थापना से सम्बन्धित बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश विधेयक-2010 पुर:स्थापित किए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित कर दिया है।
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में निजी क्षेत्र के माध्यम से उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मन्त्रिपरिषद के आदेश से निजी क्षेत्र में विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु शासन के आदेश 06 फरवरी, 2008 द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शासन के जारी दिशा-निर्देश में प्राविधानित व्यवस्था के आलोक में बाबू बनारसी दास एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा निजी क्षेत्र में बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय की स्थापना सम्बन्धित प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार करने के उपरान्त शासन द्वारा गठित समिति की संस्तुतियों के आधार पर नियमानुसार पृथक अधिनियम द्वारा बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है।
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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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