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Archive | धर्म

शिव पूजा हर सुख देती है

Posted on 09 August 2010 by admin

सावन सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की शास्त्रों में बताई विशेष विधि से पूजा शीघ्र फल देने वाली मानी गई है। जानते हैं क्या है सावन के सोमवार को शिव पूजा की यह विधि -

- श्रावण सोमवार को सूर्योदय के पहले जागें।
- घर का साफ-सफाई कर शरीर शुद्धि के लिए स्नान करें। सफेद वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठें।
- स्नान के बाद गंगा जल, पवित्र नदी या जल स्त्रोत के जल से पूरे घर को पवित्र करें।
- घर में देवस्थान पर भगवान शिव-पार्वती और गणेश की मूर्ति पूजा के लिए स्थापित करें। - इसके बाद सबसे पहले व्रत संकल्प लें। मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्या

भिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये।
- इसके बाद प्रथम पूज्य देवता भगवान श्री गणेश का ध्यान और पूजा करें।
- श्री गणेश ध्यान और पूजा के बाद भगवान शिव ध्यान करने के लिए मंत्र का मन ही मन उच्चारण करें
- ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।
पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैव्र्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम॥
- ध्यान के बाद शिव के पंचाक्षरी या षडाक्षरी मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ से शिवजी का तथा ‘ऊँ नम: शिवायै’ से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें।
- षोडशोपचार में सोलह प्रकार और सामग्रियों से देव आराधना की जाती है।
- शिव आराधना में विशेष रुप से बेल पत्र, भांग, धतूराए जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, जनेऊ , चंदन, रोली, धूप, दीप और दक्षिणा को शामिल कर पूजा की जाती है।
- शिव-पार्वती पूजा के बाद सोमवार व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना चाहिए।
- अंत में पूरी भक्ति और आस्था के साथ शिव आरती करें। प्रसाद वितरण करें। पूजा के दौरान हुए दोष के लिए क्षमा मांगे। अपनी कामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
- सायंकाल प्रदोषकाल में भी शिव पूजा करें और रात्रि में भोजन करें। यथा संभव उपवास करें।
Vikas Sharma
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शिव की तीन आंखें क्यों हैं?

Posted on 09 August 2010 by admin

शिव अनोखेपन और विचित्रताओं का भंडार हैं। शिव की तीसरी आंख भी ऐसी ही है। धर्म शास्त्रों के अनुसार सभी देवताओं की दो आंखें हैं पर शिव की तीन आंखें हैं।
भगवान शिव अपने कर्मों से तो अद्भुत हैं ही; अपने स्वरूप से भी रहस्यमय हैं। भक्त से प्रसन्न हो जाएं तो अप111ना धाम उसे दे दें और यदि गुस्सा हो जाएं तो उससे उसका धाम छीन लें।
दरअसल शिव की तीसरी आंख प्रतीकात्मक नेत्र है। आंखों का काम होता है रास्ता दिखाना और रास्ते में पढऩे वाली मुसीबतों से सावधान करना।जीवन में कई बार ऐसे संकट भी आ जाते हैं; जिन्हें हम अपनी दोनों आंखों से भी नहीं देख पाते। ऐसे समय में विवेक और धैर्य ही एक सच्चे मार्गदर्शक के रूप में हमें सही-गलत की पहचान कराता है। यह विवेक अत:प्रेरणा के रूप में हमारे अंदर ही रहता है। बस जरुरत है उसे जगाने की।

भगवान शिव का तीसरा नेत्र आज्ञाचक्र का स्थान है। यह आज्ञाचक्र ही विवेकबुद्धि का स्रोत है।

Vikas Sharma
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शिव का अभिषेक क्यों करते हैं?

Posted on 04 August 2010 by admin

4अभिषेक शब्द का अर्थ है स्नान करना या कराना। यह स्नान भगवान मृत्युंजय शिव को कराया जाता है। अभिषेक को आजकल रुद्राभिषेक के रुप में ही ज्यादातर पहचाना जाता है। अभिषेक के कई प्रकार तथा रुप होते हैं। किंतु आजकल विशेष रूप से रुद्राभिषेक ही कराया जाता है। रुद्राभिषेक का मतलब है भगवान रुद्र का अभिषेक यानि कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है। शास्त्रों में भगवान शिव को जलधाराप्रिय:, माना जाता है। भगवान रुद्र से सम्बंधित मंत्रों का वर्णन बहुत ही पुराने समय से मिलता है। रुद्रमंत्रों का विधान ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में दिये गए मंत्रों से किया जाता है। रुद्राष्टाध्यायी में अन्य मंत्रों के साथ इस मंत्र का भी उल्लेख मिलता है।


अभिषेक में उपयोगी वस्तुएं:
अभिषेक साधारण रूप से तो जल से ही होता है। विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में गोदुग्ध या अन्य दूध मिला कर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सब को मिला कर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है।


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मथुरा, वृन्दावन तथा वाराणसी को आदर्ष पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करें-मुख्यमन्त्री

Posted on 20 July 2010 by admin

उत्तर प्रदेष की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने मथुरा, वृन्दावन तथा वाराणसी नगरों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा कराए जा रहे विभिन्न कार्याें को पूरी गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने के कड़े निर्देष दिये हैं। उन्होंने मथुरा, वृन्दावन तथा वाराणसी को आदर्ष पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करने के निर्देष देते हुए कहा है कि इन नगरों में पेयजल, विद्युत, सीवर, सड़क, लाई ओवरों, पािर्कंग आदि की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों एवं इन नगरों के वासियों को कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि विकास कार्याें के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाष्त नहीं किया जायेगा और इस सम्बन्ध में षिकायत मिलने पर दोशी अधिकारी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी।

मुख्यमन्त्री ने यह निर्देष उस समय दिये जब उ0प्र0 राज्य सलाहकार  परिशद के अध्यक्ष श्री सतीष चन्द्र मिश्र ने आज एनेक्सी सभाकक्ष में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मथुरा, वृन्दावन तथा वाराणसी में चल रही विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने के बाद बैठक के निश्कशोंZ से उन्हें अवगत कराया।

मुख्यमन्त्री ने मथुरा तथा वृन्दावन के समग्र विकास हेतु विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए कहा कि जिन निर्मित सड़कों की गुणवत्ता निरीक्षण में ठीक नहीं पायी गई है, उनको तत्काल ठीक कराया जाये। उन्होंने कहा कि मथुरा तथा वृन्दावन में सीवर लाइन, पेयजल, प्याऊ, प्रकाष व्यवस्था, परिक्रमा मागोंZ के सुदृढ़ीकरण एवं चौड़ीकरण का जो कार्य अपने अन्तिम चरण में है उसे यथाषीघ्र पूरा करा कर, पर्यटकों एवं नागरिकों को सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया जाये। उन्होंने कहा कि वृन्दावन में निर्माणाधीन 100 बिस्तर के अस्पताल के निर्माण का कार्य षीघ्र पूरा करने के साथ समय से स्टाफ व उपकरणों की व्यवस्था का कार्य भी पूरा कर लिया जाये।

मुख्यमन्त्री ने वृन्दावन में निर्मित हो चुके वृद्धा आश्रम को षीघ्र संचालित करने के निर्देष दिये। उन्होंने कहा कि आश्रम में आवासित होने वाली जरूरतमन्द एवं गरीब निराश्रित महिलाओं के लिए दक्षता विकास के कार्यक्रम भी संचालित किये जायें। उन्होंने राधाकुण्ड एवं ष्याम कुण्ड के पुनरोद्धार योजना का कार्य पूर्ण हो जाने पर इसके सौन्दयीZकरण के लिए फाउण्टेन आदि लगाने के भी निर्देष दिये। उन्होंने सम्पूर्ण ब्रज क्षेत्र के टूरिज्म डेवलपमेंट हेतु प्लान बनाकर मथुरा-वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना एवं नन्दगांव को इसके दायरे में लाने को कहा। उन्होंने मथुरा में यमुना नदी के किनारे थीम पार्क व वृन्दावन में रोप-वे विकसित करने के भी निर्देष दिये।

मुख्यमन्त्री ने वाराणसी जनपद में सड़कों के चौड़ीकरण, पेयजल, सीवर, घाट निर्माण, लाई ओवरों, सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लांट, ठोस कूड़ा प्रबन्धन, विद्युतीकरण आदि विभिन्न कायोंZ को निर्धारित समय सीमा के अन्दर पूरा करने के कड़े निर्देष दिये। उन्होंने कहा कि वाराणसी षहर के आबादी क्षेत्र में संकरी सड़कों एवं गलियों को देखते हुए सीवर व पेयजल योजना हेतु पाइप डालने के कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से तेजी के साथ किया जाये, जिससे पर्यटकों एवं नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा आवष्यकता पड़ने पर रात के समय भी कार्य किया जाये। उन्होंने कहा कि पाण्डेपुर लाईओवर का निर्माण कार्य दिसम्बर, 2010 तक तथा चौकाघाट पुल के निर्माण का कार्य दिसम्बर 2011 तक प्रत्येक दषा में पूर्ण कर लिया जाये।

मुख्यमन्त्री ने वाराणसी के एस0टी0पी0, ठोस कूड़ा प्रबन्धन योजना, बहुमंजली पािर्कंग के निर्माण का कार्य भी तेज गति से क्रियािन्वत करने के निर्देष दिये। उन्होंने नगर के विकास के लिए प्रस्तावित 58 किलोमीटर लम्बी रिंग रोड तथा घाटों के निर्माण एवं सौन्दयीZकरण के कायोंZ को भी तेजी से क्रियािन्वत करने को कहा। उन्होंने वाराणसी में बड़ी संख्या में आने वाले देषी-विदेषी पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वाराणसी-सारनाथ-रामनगर पर्यटन विकास परियोजना तैयार कर क्रियािन्वत करने के निर्देष दिये।

मुख्यमन्त्री ने प्रदेष के षहरी क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु नगर निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए षत-प्रतिषत भवनों को आच्छादित करने के निर्देष दिये। उन्होंने कहा कि इसके लिए जी0आई0एस0 सर्वे का सहारा लिया जाये। उन्होंने कहा कि नगर निकायों के आर्थिक रूप से सषक्त होने पर वे नागरिकों को बेहतर सुविधायें मुहैया कराने में समर्थ होगी। उन्होंने कहा कि नगर निकायों के गृहकर समेत विविध करों के आनलाइन भुगतान की व्यवस्था का विस्तार कर सुदृढ़ बनाया जाये तथा समय से करों का भुगतान करने वाले नागरिकों को छूट प्रदान करने तथा विलम्ब से भुगतान करने वालों पर अर्थदण्ड भी लगाया जाये। उन्होंने इण्टरनेट के माध्यम से गृह कर के भुगतान के सम्बन्ध में नागरिकों को जागरूक करने के भी निर्देष दिये।

बैठक में मुख्य सचिव श्री अतुल कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव वित्त श्री अनूप मिश्र, प्रमुख सचिव नगर विकास श्री आलोक रंजन, प्रमुख सचिव आवास श्री जे0एन0 चेम्बर, प्रमुख सचिव मुख्यमन्त्री श्री आर0पी0 सिंह व श्री दुगाZषंकर मिश्रा व अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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हे मेरे राम ! इच्छधारी जैसे पापियों से बचाओ अपनी तपस्थली को

Posted on 19 March 2010 by admin

बुन्देली सेना ने हवन यज्ञ करके ईश्वर से की प्रार्थना

चित्रकूट -  हे मेरे प्रभु श्री राम ! अब दोबारा किसी ढोंगी बाबा को अपनी पवित्र तप स्थली चित्रकूट में न भेजना। नहीं तो तुम्हारा नाम लेकर यहां तपस्या करने वाले सच्चे साधु सन्तों का कोई ठिकाना नहीं रह जाएगा। भगवान से यह प्रार्थना करते हुए बुन्देली सेना के लोगों ने गायत्री परिवार के साथ मिल कर मन्दाकिनी नदी के किनारे शुक्रवार को हवन यज्ञ किया। जिसमें इच्छाधारी ढोंगी बाबा जैसे लोगों को उनके किए का दण्ड देने के लिए ईश वन्दना की गई।

बुन्देली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि देह व्यापार के आरोप में दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए इच्छाधारी उर्फ शिवमूरत उर्फ शिवा ने भगवान राम की तप स्थली चित्रकूट को कलंकित किया है। उसकी करतूतों की वजह से यहां की गरिमा तार-तार हुई है। इतना ही नहीं ढोंगी बाबा की वजह से देश भर के साधु-सन्तों को भी अपमानित होना पड़ रहा है। उसके कारनामों के लिए उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जिससे फिर
दोबारा कोई ढोंगी साधु-सन्त का वेष धारण कर इस तरह की हरकत न कर सके।

श्री सिंह ने कहा कि इसके बावजूद भी यदि उसे उसकी करतूतों की सजा नहीं मिलती तो भी यहां के लोग उसे माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इच्छाधारी उर्फ शिवमूरत उर्फ शिवा के काले कारनामों से इस क्षेत्र की जो बदनामी हुई है उसको दूर करने के लिए ही बुन्देली सेना ने मन्दाकिनी किनारे हवन यज्ञ आयोजित किया। जिसमें प्रभु श्री राम से ऐसे पापियों को अब कभी दुबारा  अपनी कर्मभूमि में न भेजने की भी प्रार्थना की गई।

उन्होंने बताया कि गायत्री शक्तिपीठ की महिला मण्डल प्रभारी सुधा तिवारी ने अपनी 9 सदस्यीय महिला टीम के साथ हवन यज्ञ विधिविधान के साथ पूरा करवाया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष लवकुश चतुर्वेदी, हेमन्त प्रताप सिंह, चन्द्र प्रकाश खरे, पंकज अग्रवाल, रघुनाथ जायसवाल, पुष्पेन्द्र पटेल, सुनील गर्ग, भानु श्रीवास्तव, गणेश मिश्रा, पवन सिंह, राम अनूप, पुष्पराज, वीरेन्द्र पटेल, शानू गुप्ता, दीनबंधु, गायत्राी तिवारी, सविता तिवारी, प्रमिला शर्मा, रंजना गुपता, अर्चना मिश्रा, मंजू गुप्ता, सरेाज शर्मा सहित लगभग आधा सैकड़ा लोगों ने डेढ़ घंटे तक चले हवन में अपनी आहुन्तियां डाली।

संदीप गौतम

8052582234

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महाशिवरात्रि दिन शिवलिंग की उत्पत्ति…

Posted on 11 February 2010 by admin

शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी, इसीलिए इस दिन किया गया शिव पूजन, व्रत और उपवास अनंत फल दायी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रध्दालु भक्त अपनी राशि के अनुसार भी भगवान शिव की आराधना और पूजन कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं । महाशिव रात्रि के दिन किसी भी राशि का जातक पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक कर सफेद अर्क के फूल चढ़ाकर चंदन से प्रणव (ॐ) बनाकर भी उपासना कर सकते हैं ।

तिल स्नान कर करें शिव पूजा- फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिव रात्रि महोत्सव मनाया जाता है । त्रयोदशी को एक बार भोजन करके चतुर्दशी को दिन भर अनन नहीं ग्रहण करना चाहिए । इसके अलावा यह भी मान्यता है कि काले तिलों से स्नान करके रात्रि में विधिवत शिव पूजन करना चाहिए । भगवान शिव के सबसे प्रिय पुष्पों में कनेर, बेल पत्र तथा मौलसिरी है । लेकिन पूजन विधान में बेलपत्र सबसे प्रमुख है । शिवजी पर पका आम चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होता है ।

लोक मंगलकारी है रूद्र शिव- शिवलिंग पर चढ़ाए गए पुष्प, फल तथा जल को नहीं ग्रहण करना चाहिए । भघवान ब्रह्मा जी की तीन शक्तियों में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का नाम उल्लेखनीय है। इन्हीं शक्तियों मे ंएक रूलाने के कारम रूद्र तथा दूसरा जगत कल्याण करने के कारण शिवके नाम से जाना जाता है। सामान्यत: देखने में दोनों नाम परस्पर विरोधी लगते हैं मगर सृष्टिक्रम के अनुसार लोक मंगलकारी है ।

मेष - गुड़ के जल से अभिषेक करे । मीठी रोटी का भोग चढ़ाएं लाल चंदन व कनेर की फूल से पूजा करें ।
वृष- दही से अभिषेत करे। शक्कर, चांवल, सफेद चंदन सफेद फूल से पूजा करे ।
मिथुन - गन्ने के रस से भगवान का अभिषेक करें. मुंग , दूब और कुशा से पूजा करे ।
कर्क - घी से अभिषेत कर चावल, कच्चा दूध, सफेद आक व शखपुष्पी से शिवलिंग की पूजा करें ।
सिंह - गुड़ के जल से अभिषेक कर गुड़ व चावल से बनी खीर का भोग लाकर गेहूं के चूरे और मंदार के फूल से पूजा करें ।
कन्या - गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेत करे । भगवान शंकर को भांग, दूब व पान अर्पित करे ।
तुला - सुगंधित तेल या इत्र से भगवान का अभिषेक कर दही, मधुरस व श्रीखंड का भोग लगाएं । सफेद फूल से भगवान की पूजा करें ।
वृश्चिक - पंचामृत से अभिषेत करे । लाल गोझिया फूल से भगवान की पूजा करें ।
धनु - हल्दी युक्त दूध से अभिषेत कर केश्री और बेसन से बनी मिठाई से भगवान का भोग लगाएं । गेंदे के फूल से उनकी पूजा करें ।
मकर - नारियल पानी से अभिषेक कर उड़द से बनी मिठआई का भगवान को भोग लगाएं । नीलकमल के फूल उनकी पूजा करे ।
कूंभ - तिल के तेल से अभिषेक कर उड़द से बनी मिठआई का भोग लगाए । शमी के फूल से भगवान की पूजा करे ।
मीन - केसरयुक्त दूध से भगवान का अभिषेक कर दही भात का भोग लगाएं । पीली सरसों और नागकेसर से भगवान की पूजा करें ।

‘स्मृत्यंतर’ में कहा गया है कि शिवरात्रि में चतुर्दशी प्रदोषव्यापिनी ग्रहण करें। यहां प्रदोष शब्द से मतलब ‘रात्रि का ग्रहण’ है। अत: रात्रि में जागरण करें और उसमें उपवास करें। उत्तरार्ध में उसका कारण बताया गया है। ‘कामिक’ में भी कहा गया है कि सूर्य के अस्त समय यदि चतुर्दशी हो, तो उस रात्रि को ‘शिवरात्रि’ कहते हैं। यह उत्तमोत्तम होती है। आधी रात के पहले और आधी रात के बाद यदि चतुर्दशी युक्त न हो, तो व्रत को न करें, क्योंकि ऐसे समय में व्रत करने से आयु और ऐश्वर्य की हानि होती है। माधव मत से ‘ईशान संहिता’ में कहा गया है कि जिस तिथि में आधी रात को चतुर्दशी की प्राप्ति होती है, उसी तिथि में मेरी प्रसन्नता से मनुष्य अपनी कामनाओं के लिए व्रत करें।

विधि-विधान

महाशिवरात्रि का व्रत सभी वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) और प्रत्येक समुदाय के स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्ध के लिए मान्य है। अत: आवश्यक नहीं कि प्रत्येक व्यक्ति मंत्रों और पूजा विधि का ज्ञान रखता हो। अपने भक्ति भाव और श्रद्धा के अनुसार शिव पूजन कर सकते हैं। धन का सार्मथ्य हो, तो किसी ब्राह्मण से विधि-विधान से पूजन कराएं। रुद्राभिषेक, रुदी पाठ, पंचाक्षर मंत्र का जाप आदि कराएं। व्रत करने वाली स्त्री को इस दिन प्रात: स्नानादि के बाद दिनभर शिव का स्मरण करना चाहिए। सायंकाल में पुन: स्नान करके भस्म का त्रिपुंड और रुदाक्ष की माला धारण करें। इसके बाद धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री सहित शिव के समीप पूर्व या उत्तर की तरफ मुख करके बैठें। शिवजी का यथाविधि पूजन करें। रात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके दूध से स्नान तथा ‘ओम हीं ईशानाय नम:’ का जाप करें। द्वितीय प्रहर में दधि स्नान करके ‘ओम् हीं अधोराय नम:’ का जाप करें। तृतीय प्रहर में घृत स्नान एवं मंत्र ‘ओम हीं वामदेवाय नम:’ तथा चतुर्थ प्रहर में मधु स्नान एवं ‘ओम् हीं सद्योजाताय नम:’ मंत्र का जाप करें।

सम्पूर्ण पूजा विधि के दौरान ‘ओम नम: शिवाय’ एवं ‘शिवाय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए। ध्यान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, पय: स्नान, दधि स्नान, घृत स्नान, गंधोदक स्नान, शर्करा स्नान, पंचामृत स्नान, गंधोदक स्नान, शुद्धोदक स्नान, अभिषेक, वस्त्र, यज्ञोपवीत, उवपसत्र, बिल्व पत्र, नाना परिमल दव्य, धूप दीप नैवेद्य करोद्वर्तन (चंदन का लेप) ऋतुफल, तांबूल-पुंगीफल, दक्षिणा उपर्युक्त उपचार कर ‘समर्पयामि’ कहकर पूजा संपन्न करें। कपूर आदि से आरती पूर्ण कर प्रदक्षिणा, पुष्पांजलि, शाष्टांग प्रणाम कर पूजन कर्म शिवार्पण करें। चारों प्रहर का पूजन अवश्य करें।

शिवरात्रि के व्रत की विशेषता है कि इस व्रत का पारण चतुर्दशी में ही करना चाहिए। यह पूर्वाद्धि (प्रदोषनिशीथी) चतुर्दशी होने से ही हो सकता है, जो महाशिवरात्रि पर होती है। जो व्यक्ति संपूर्ण विधि से व्रत करने में असमर्थ हों, वे रात्रि के आरंभ में तथा अर्द्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। यदि इस विधि से भी व्रत नहीं कर सकें, तो पूरे दिन व्रत करके सायंकाल में भगवान शंकर की यथाशक्ति पूजा-अर्चना करके भी व्रत पूर्ण कर सकते हैं। इस तरह भी भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।

कथा और मान्यताएं
नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादि ऋषियों ने सूत जी को प्रणाम कर शिवरात्रि व्रत के संबंध में प्रश्न किया, ‘हे सूत जी! पूर्व काल में किसने इस उत्तम शिवरात्रि व्रत का पालन किया था और अनजान में भी इस व्रत का पालन करके किसने कौन-सा फल प्राप्त किया था? इसका उत्तर उन्हें ऐसे मिला -’एक धनवान मनुष्य शिवरात्रि के दिन शिव मंदिर में गया। एक सौभाग्यवती स्त्री वहां पूजन में लीन थी। धनिक ने उसके आभूषण चुरा लिए। लोगों ने उसके कृत्य से क्षुब्ध होकर उसे मार डाला, किंतु चोरी करने के लिए धनिक आठों प्रहर भूखा-प्यासा जागता रहा था, इसी कारण स्वत: व्रत हो जाने से शिवजी ने उसे सद्गति दी।

फल
‘स्कन्दपुराण’ में कहा गया है, ‘हे देवी, मेरा जो भक्त शिवरात्रि में उपवास करता है, उसे क्षय न होने वाला दिव्य गण बनाता हूं। वह सब महाभोगों को भोगकर अंत में मोक्ष पाता है।’

‘ईशान संहिता’ के अनुसार, यह व्रत सब पापों का शमन करने वाला है। यह 12 से 24 वर्ष के पापों का नाश करता है। यह मनुष्यों को भक्ति-मुक्ति देने वाला है। जो मनुष्य शिवरात्रि पर अखंडित व्रत करता है, उसकी सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं तथा वह शिव के साथ आनंद करता है। जो पुरुष व्रत से हीन होकर भी किसी विशेष उद्देश्य से शिवरात्रि में जागरण करता है, वह रुद्र के बराबर होता है।

सम्पूर्ण शास्त्रों में शिवरात्रि व्रत को सबसे उत्तम बताया गया है। कहा गया है कि यह व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है। इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में यह व्रत ‘व्रतराज’ के नाम से विख्यात है और चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। संभव हो, तो उक्त व्रत को जीवन पर्यंत करें, अन्यथा 14 वर्ष के बाद पूर्ण विधि-विधान के साथ इसका उद्यापन कर दें।

यह व्रत प्राप्त काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त करना चाहिए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने से जागरण, पूजा और उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है और भगवान शिव की विशेष अनुकम्पा और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


Vikas Sharma
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मकर संक्रांति: 1033 साल बाद आयेगा ऐसा योग…

Posted on 11 January 2010 by admin

मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और कंकण सूर्य ग्रहण इस बार एक ही दिन पड़ रहे हैं। मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी से प्रारंभ होकर 15 जनवरी सुबह 5 बजे तक है। वहीं 14 जनवरी को सुबह 10:11 बजे से मौनी अमावस्या शुरू हो जाएगी, जो 15 जनवरी को दोपहर 12.41 बजे तक रहेगी। तीनों पर्व का योग करीब एक हजार साल बाद बन रहा है। 15 जनवरी को कंकण संक्रांति भी है। इन तीनों का योग और कंकण सूर्य ग्रहण शुक्रवार को पड़ने तथा अन्य ग्रह के वक्री चलने से एक माह के भीतर तेज हवा के साथ वर्षा और ओले गिरने की संभावना है। 15 जनवरी को तीनों का यह दुर्लभ योग एक हजार साल बाद बन रहा है। इसके बाद अगला योग 1033 साल बाद यानी 24 दिसंबर 3043 को पड़ेगा। पितृदोष शांति तथा तंत्र, मंत्र की सिद्धि के लिए भी यह दिन अति महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। आमतौर पर मकर संक्रांति तथा मौनी अमावस्या में लगभग एक पखवारे का अंतर होता रहा है, लेकिन इस बार दोनों का योग साथ-साथ है। यह योग 20 साल बाद आया है पिछला योग 14 जनवरी 1990 को था। अब दोनों का अगला योग 14 जनवरी 2028 को बनेगा। संयोग से इसी दिन कंकण सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है। ये तीनों एक हजार साल बाद एक ही दिन पड़ रहे हैं। खगोल शास्त्रियों के लिए यह दिन काफी महत्वपूर्ण रहता है, इस दिन तीनों के योग से वातावरण पर असर डालने वाले तत्वों पर वे शोध करते हैं। ज्योतिषाचार्य विजय भूषण वेदार्थी ने बताया कि कंकण सूर्य ग्रहण के लिए ग्वालियर-चंबल संभाग में सूतक 14 जनवरी की रात्रि 11 बजे लग जाएगा। ग्वालियर में सूर्य ग्रहण का स्पर्श 15 जनवरी की सुबह 11:50 बजे और मोक्ष दोपहर 3:14 बजे होगा। परम ग्रास 59 प्रतिशत होगा। यह ग्रहण उत्तराषाढ़ नक्षत्र एवं मकर राशि में घटित होने के कारण इस नक्षत्र एवं मकर राशि वाले व्यक्तियों को विशेष कष्टकारक रहेगा।

ज्योतिर्विद का कहना है कि यूं तो हर माह सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है और इस प्रवेश के समय को संक्रमण काल कहते हैं। इसी से संक्रांति शब्द बना है। कर्क, तुला और मकर तीन बड़ी संक्रांति होती है जिसमें मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण है। इस बार 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 12:36 बजे मकर राशि में संक्रमण कर रहा है। निर्णय सिंधु में कहा गया है कि यदि दिन में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करे तो पूरा दिन और 16 घंटे तक मकर संक्रांति का पर्व काल रहता है।

सबसे बड़ा कंकण सूर्य ग्रहण

ज्योतिर्विद का कहना है कि 22 जुलाई 2009 को सदी का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण था। इसके सात माह बाद ही 15 जनवरी को इसी सदी का सबसे बड़ा कंकण सूर्य ग्रहण होने जा रहा है। इसके बाद इतना लंबा कंकण सूर्य ग्रहण 1033 वर्ष बाद यानी 24 दिसंबर 3043 को दिखाई देगा।


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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