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Archive | धर्म

Press Note

Posted on 21 May 2013 by admin

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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२१ अप्रैल को सुलतानपुर गांव में विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा

Posted on 20 April 2013 by admin

१९ अप्रैल । सुलतानपुर जिले के जूडापटटी कूडेभार में २१ अप्रैल से होने वाले सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में २६ अप्रैल को बद्रिकाश्रम के जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर वासुदेवानन्द सरस्वती भाग लेगें।
सुलतानपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजक पूर्व शासकीय अधिवक्ता पं० शिव कुमार मिश्र ने बताया कि २१ अप्रैल को गांव में विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा निकलेगी और सायं से कथा प्रवचन शुरु हो जायेगा। २७ अप्रैल को कथा का समापन होगा तथा २८ अप्रैल को हवन, पूर्णाहूति एवं विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया है। कथा के दिनों में २६ अप्रैल को जगद्गुरु  शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर वासुदेवानन्द सरस्वती तथा अन्य तिथियों में पूर्व विधान सभा अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी, रमापति राम त्रिपाठी सहित कई विद्वान भाग लेगें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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लोहरामउहृ मंदिर में भक्तो ने मां भगवती के दर्शन किये

Posted on 20 April 2013 by admin

१९ अप्रैल ।  चैत्र नवरात्र के नवमी को लोगो ने पूजा के बाद छोटी छोटी कन्याओं को पूडी और हलवा खिलाकर अपने व्रत का समापन किया । सुबह ब्र्रह्ममुहूर्त में उठकर भक्तों ने मां भगवती की पूजा अर्चना की तथा लाल चुनरी, नारियल चढाकर हलवे पुडी आदि का भोग लगाकर सुख समृद्धि की कामना की ।
पूजा अर्चना के बाद व्रत रखने वाले लोग छोटी छोटी कन्याओं को आदर सहित घर बुलाकर भोजन कराया । लोहरामउहृ मंदिर में सुबह से ही लम्बी लम्बी कतार लगाकर भक्तो ने मां भगवती के दर्शन किये और पुजारी पं० राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने भक्तो को हवन कराया । अमहट स्थित गायत्री मन्दिर पर सैकडो कन्याओं ने भोज में भाग लिया तथा भक्तों ने सुबह से हवन पूजन व दर्शन किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मां के भक्तो की भीड़ उमड़ पडी ।

Posted on 18 April 2013 by admin

१८ अप्रैल । वासंतीय नवरात्र के अष्ठमी के दिन सभी शक्तिपीठों पर ब्रह्म मुहूर्त से ही मां के भक्तो की भीड़ उमड़ पडी । देर शाम तक मन्दिरो में देवी भक्तो ने मां दुर्गा के पूजन व अर्चन किये ।
नगर के रुद्र नगर स्थित मां नयना देवी के मंदिर, मां काली शक्तिपीठ शाहगंज, काली माई का थान मेजरगंज, मां भगवती का धाम लोहरामउहृ पर भोर से ही जय माता दी के जयकारो के साथ भक्तो ने नारियल चुनरी और प्रसाद चढा कर अपने घर परिवार और समाज की मंगलकामना की प्रार्थना की । दिन भर मन्दिरो में घंटे घडियालो व मां के जयकारो की गूंज से पूरा क्षेत्र अध्यात्मिक हो गया।
मन्दिरों में घंटे शंख की ध्वनि व जगतजननी की जय जयकार के साथ सुबह सायं आरती हुई जिसमे श्रद्धा पूर्वक भाग लिया। बताते है वैसे तो वासंतीय और शरद नवरात्र व दो गुप्त नवरात्रो की उपासना से हमारे सनातन धर्म मे जीवन के हर क्षेत्र मे विजय सुनिश्श्च्ति होती है जिससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से आसुरी शक्तियो एवं जीवन की कठिनाइयो से भक्तो को नवदुर्गा के विभिन्न्न रुप की उपासना से मुक्ति प्राप्त होती है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मां तेरे चरणो में हम शीश झुकाते है

Posted on 18 April 2013 by admin

१७ अप्रैल  । नवरात्र का पावन महीना चल रहा है श्रद्धा और भक्ति के अनुसार हिन्दू जनमानस इसे मना रहा है । कुछ लोग नौ दिनो का व्रत रखे हुए है । वही कुछ लोग प्रथम दिन और अष्टमी के दिन अर्थात २ दिवसीय व्रत अनुष्ठान करते है । अपनी अपनी सामथ्र्य है मन स्वच्छ एवं पवित्र होना चाहिए ।
प्रथम नवरात्रि में सिर्फ नौ दिनो का व्रत रखकर हम मां भगवती की आराधना करते है । जबकि द्वितीय नवरात्रि में नौ दिनो के व्रत के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध त्योहार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है । दोनो नवरात्रि में हम मां दुर्गा के नौ रुपो की नौ दिनो में पूजा अर्चना करते है और मां को मनाते है । मां भगवती के हर रुप का अलग अलग महत्व है जैसे दुर्गा रुप शक्ति का परिचायक है तो मां शारदा का रुप विद्या का परिचायक है । तो मां शारदा का रुप विद्या का परिचायक है नौ रुपो की आराधना मात्र आराधना ही नही है बल्कि सम्पूर्ण ब्रहमांड की शक्ति का आवाहन इन्ही नौ दिनो में हो जाता है जो समस्त मानव जाति के लिए शुभकारी एवं फलदायी होता है ।
आधुनिकता एवं घोर वैज्ञानिकता के इस युग में ऐसे धार्रि्मक पर्वो में जनमानस की बढती आस्था यह सिद्ध करती है सर्व शक्तिमान सत्त्ता की छाया में सारा विश्व फलफूल रहा है और हम बिना इस सत्ता की अनुकंपा के एक कदम भी नही चल सकते । दूर जाने की जरुरत नही अपने आस पास देखिये छोटे छोटे बच्चे नवरात्रि का व्रत रखे हुए दिख जायेगें जिन्हे दिन भर कुछ ना कुछ खाने की आदत होती है । यह श्रद्धा नही तो और क्या है । अस्तिकता ही एक ऐसा कारण है जिससे मानव समाज अपना  विकास एवं प्रगति कर रहा है ।
कई तरह के धार्रि्मक व्रत हमारे हिन्दू समाज में विद्यमान है जिसमे इस नवरात्रि पर्व के नौ दिवसीय व्रत की महिमा का वर्णन शब्दो में कर पाना सर्वथा असंभव अपने सामथ्र्य के अनुसार हम मां भगवती के नौ रुपो की आराधना करें और मां भगवती हमारी भक्ति स्वीकार करके सारी मानव जाति पर अपनी दया दृष्टि बनायें रखें यही कामना हमें सच्चे मन से करनी चाहिए । नवरात्रि के पावन पर्व पर सच्ची आराधना यही है ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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पावन चिंतन धारा आश्रम द्वारा आपके शहर लखनऊ में दिनांक 9 अप्रैल 2013 से 11 अप्रैल 2013 तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर ‘ध्यान योग क्रिया शिविर’ के कवरेज के संबंध में

Posted on 10 April 2013 by admin

पावन चिंतन धारा एक आध्यात्मिक संगठन है, जो बच्चों और युवाओं के मानसिक व चारित्रिक विकास के लिए कार्य करती है, साथ ही , धर्म की वैज्ञानिकता के प्रचार-प्रसार के लिए कटिबद्ध है।
इस संस्था के संस्थापक श्री पवन सिन्हा जी, जो जन-जन में एस्ट्रªो अंकल के रूप में विख्यात हैं, का मानना है कि जब तक व्यक्ति का मन नाथा नहीं जाएगा तब तक समाज व देश का उत्थान असंभव है।
मन को नाथने का व अन्य किसी भी समस्या का पहला और अंतिम समाधान है-ध्यान। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए पावन चिंतन धारा की लखनउ इकाई द्वारा तीन दिवसीय ध्यान योग क्रिया शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
ध्यान योग क्रिया शिविर के प्रथम दिन प्राख्यात आध्यात्मिक चिंतक श्री पवन सिन्हा जी ने व्यावहारिक ध्यान पद्धतियों की विवेचना बहुत वृहद तरीके से की जिसमें ध्यान के सही प्रकार, ध्यान हमारे जीवन को सफल बनाने में किस प्रकार सहायक है, ध्यान से किस प्रकार मानसिक शांति, जीवन का उद्देश्य प्राप्त करने में मदद, ईष्ट प्राप्ति और किस प्रकार हमारे संस्कारों को ईच्छा-शक्ति के द्वारा मजबूत करता है, आदि बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
साथ ही उन्होंने कृष्ण-क्रिया का भी गूढ़ रहस्य बताया जिसमें मन को एकाग्र व शांत करते का अभ्यास भी कराया।
कार्यक्रम के अगले चरण में पावन पुस्तक श्रृंखला-11, शीर्षक- ईष्ट साधना पुस्तक का विमोचन हुआ। यह पुस्तक विभिन्न एस्ट्रªो अंकल कार्यक्रम के एपिसोड का संग्रह है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में लोगों के प्रश्नों का समाधान करते हुए ध्यान, अध्यात्म, योग आदि विषयों से संबंधित लोगों की जिज्ञासाओं को शांत किया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन के कार्यक्रम का समापन हनुमान चालीसा का संगीतबद्ध पाठ करके किया गया। इस शिविर कार्यक्रम में लगभग 450 लोगों ने हिस्सा लिया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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कैलाश-मानसरोवर की यात्रा से लौटे प्रदेश के मूल निवासियों को सम्मानित किया

Posted on 09 April 2013 by admin

press-1उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर कैलाश-मानसरोवर की यात्रा से लौटे प्रदेश के मूल निवासियों को सम्मानित किया और उन्हें क्रमशः 25 हजार रुपए का चेक अनुदान के रूप में प्रदान किया। कैलाश-मानसरोवर के यात्रियों को पहली बार दिए गए अनुदान को राज्य सरकार की तरफ से एक छोटा सहयोग बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की पहल से अन्य नागरिकों को इस दुर्गम यात्रा के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने तथा जाने की प्रेरणा मिलेगी।
श्री यादव ने कहा कि डाॅ0 राम मनोहर लोहिया कैलाश-मानसरोवर के महत्व को समझते हुए ही इससे सम्बन्धित प्रकरण को पहली बार संसद में उठाया था। कैलाश-मानसरोवर को एक भव्य धार्मिक स्थल बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति ने यहां पहुंचने के रास्ते को अत्यन्त दुर्गम एवं कठिन बनाया है। उन्होंने कहा कि यात्री यहां अपनी अदम्य इच्छा शक्ति तथा श्रद्धा की भावना से ही पहुंच पाते हंै। उन्होंने कहा कि जो लोग यहां की यात्रा कर आए हैं, वास्तव में वे साहसी एवं प्रकृति प्रेमी हैं।
मुख्यमंत्री ने धर्मार्थ कार्य विभाग के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि कैलाश-मानसरोवर जैसी जगह कदाचित पृथ्वी पर और कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थान की यात्रा के लिए यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। उन्हांेने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान देने से अन्य लोग भी उत्साहित होकर यात्रा के लिए प्रेरित होंगे।
press-3इस मौके पर मानसरोवर निष्काम सेवा समिति के अध्यक्ष श्री उदय कौशिक ने राज्य सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उन चन्द राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जो मानसरोवर यात्रा के लिए आर्थिक मदद प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, चेन्नई तथा आन्ध्र प्रदेश से आए कैलाश-मानसरोवर के यात्रियों ने मुख्यमंत्री का परम्परागत ढंग से स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
इससे पूर्व, धर्मार्थ कार्य मंत्री श्री आनन्द सिंह ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विगत एक वर्ष में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर गए प्रदेश के 31 मूल निवासियों को क्रमशः 25 हजार रुपए का चेक देकर पहली बार सम्मानित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में मंत्रिमण्डल के सहयोगियों के अलावा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य श्री नवनीत सहगल, अन्य अधिकारी तथा कैलाश-मानसरोवर के यात्री भी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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कथा ब्यास श्री पवन नन्दन जी दवारा श्रीमदभागवत कथा का महात्म्य श्रवण

Posted on 05 March 2013 by admin

edited-d_7176-copyजीवन में मां का स्थान सर्वोपरि होता है । श्री मद भागवत कथा सुनने व सुनाने दोनो से इच्छित फल की प्राप्ति होती है । यह बातें अलीगंज बाजार के निकट लंगड़ी गांव मे आयोजित श्रीमदभागवत कथा के दौरान कही ।
अलीगंज के लंगड़ी गांव में आयोजित ७ दिवसीय संगीतमय कथा के प्रथम दिन कथा ब्यास श्री पवन नन्दन जी ने कथा का महात्म्य श्रवण कराया जिसमें धुंधकारी और गोकर्ण दोनो भाइयो के चरित्र पर प्रकाश डाला ।
कथा ब्यास ने बताया कि श्रीमदभागवत कथा सुनने व सुनाने दोनो से फल की प्राप्ति होती है कहा कि धुंधकारी ऐसे भाई को गोकर्ण जैसे भाई ने श्रीमदभागवत की कथा सुनाकर प्रेत योनि से मुक्ति दिला दिया । आगे कहते हुए आचार्य जी ने बताया कि माता पिता का सर्वोपरि स्थान है । उन्होने कहा कि एक मां अपने पुत्र को चोट लगने पर अपनी एक आंख पुत्र को देकर कुरुपवती हो गयी जिससे पुत्र अपनी मां को जीवन भर कुरुप मानता रहा और माता की मृत्यु के पश्श्चात जब उसे यह बात मां द्वारा लिखे पत्र के माध्यम से जानकारी मिली तो उसने बहुत प्रायश्श्च्ति किया ।
कथा के पश्श्चात उपस्थित लोगो ने भगवान की आरती उतारी और प्रसाद ग्रहण किया ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मेले में ऐसी प्रर्दर्शनियां लगें, जिनसे कम पढ़े-लिखे तथा अशिक्षित व्यक्तियों को भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिले: मुख्य सचिव

Posted on 26 October 2012 by admin

  • कुम्भ मेला में प्रचार-प्रसार कन्टेन्ट के लिए खुली प्रतियोगिता आयोजित हो: जावेद उस्मानी
  • आठ स्थानों से अनवरत निःशुल्क मीडिया कवरेज, पत्रकारों के लिए अत्याधुनिक मीडिया सेन्टर और फूड कोर्ट
  • कुम्भ मेला के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु रणनीति बनाने के निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने निर्देश दिए है कि कुम्भ मेला-2013 के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु एक कार्य योजना बना ली जाए। इलाहाबाद कुम्भ में इस बार मुख्य घाटों पर स्थापित आठ एच0डी0 कैमरों के माध्यम से मेला अवधि में प्रतिदिन की गतिविधियों का स्ट्रीमिंग कवरेज टेलीविजन चैनलों को तथा हाई रिजोल्यूशन के फोटोग्राफ निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान कराया जाए। कुम्भ मीडिया सेन्टर में इस बार अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय मीडिया हेतु निःशुल्क और सःशुल्क दो तरह की आवासीय व्यवस्थाएं की जाए। मीडिया सेन्टर में आने वाले पत्रकारों की व्यवस्था इस प्रकार से की जाएगी कि प्रतिदिन 24 घण्टे मीडिया को सुविधाएं उपलब्ध रहें।
मुख्य सचिव अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में कुम्भ मेला के प्रचार-प्रसार कार्य की समीक्षा गुरुवार को देर शाम कर रहे थे। उन्होंने सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग को कुम्भ मेला-2013 के शासकीय प्रचार-प्रसार और आगन्तुक अन्तर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय मीडिया प्रबन्धन व्यवस्था हेतु उत्तरदायी बनाते हुए मीडियाकर्मियों के लिए पूर्णतः शाकाहारी फूड कोर्ट के निर्माण के आदेश देते हुए कहा कि टी0वी0 चैनलों पर जारी किये जाने वाले विज्ञापनों की अवधि एक मिनट से अधिक न रखी जाए और उनका अनुमोदन मुख्यमंत्री स्तर से होने के बाद ही प्रसारण हेतु जारी किया जाए। उन्होंने कुम्भ मेला के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाले प्रचार नारों (स्लोगन), पोस्टरों, डाक्यूमेन्टरी फिल्मों तथा अन्य सामग्री तैयार करने के लिए प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
श्री उस्मानी ने निर्देश दिये कि विभागों द्वारा लगाई जाने वाली प्रदर्शनियों का आयोजन इस प्रकार से किया जाए कि उनमें कम पढ़े-लिखे और अशिक्षित व्यक्तियों को भी शासकीय योजनाओं की जानकारी और उनसे लाभ पाने के अवसर प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि मेला अधिकारी कुम्भ मेला में आयोजित विभिन्न विभागों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पण्डाल अलग-अलग सेक्टरों में लगवाएं। कैमरामैन और फोटोग्राफरों के लिए स्थापित किये जाने वाले वाच टावरों की मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाए। कुम्भ मेला में 25 ओ0बी0 वैन की व्यवस्था इस प्रकार से की जाए कि स्नान करने वालों को असुविधा का सामना न करना पड़े।
बैठक में प्रमुख सचिव सूचना श्री संजीव मित्तल, प्रमुख सचिव नगर विकास श्री प्रवीर कुमार मण्डलायुक्त इलाहाबाद श्री देवेश चतुर्वेदी, निदेशक सूचना श्री प्रभात मित्तल, कुम्भ मेला अधिकारी श्री मणि प्रसाद मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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Great joy and rejoicing marks birth anniversary of Prophet Bab

Posted on 20 October 2012 by admin

The 193rd birth anniversary of Prophet Bab, Founder Prophet of Baha’i Faith, was celebrated with great joy and rejoicing by the Area Baha’i Teaching Committee, Alambagh, Lucknow at CMS Kanpur Road auditorium. On this occasion, a huge gathering of Baha’is offered their prayers to Prophet Bab and filled the auditorium with spiritual light. Several events such as reading of Holy Writings, hymns and prayers dedicated to Prophet Bab marked the function and cultural events like music and dance were also orgnaized. Eminent Baha’i followers were present on this occasion.
Baha’i follower and renowned educationist, Dr Bharti Gandhi, Founder-Director of City Montessori School, while addressing the gathering on the occasion, said that Baha’i Faith stands on the foundation of unity and love. The Faith is fully focussed on the establishment of a peaceful world by ending all wars and is working to knit the whole world with the thread of unity, love and spiritualism. She further said that golden era of human history will dawn when feelings of hatred, jealousy and greed are removed from human hearts and brotherhood, love and understanding prevail. For this, a firm determination and an iron will were needed. Strong world visionaries are destined to play an important role in bringing peace, order and unity in the world. The other Baha’i speakers who came on the stage said that Baha’i means to be ready to love the entire humanity and to serve it whenever required. They unanimously said that human development has been obstructed by wars, exploitations, injustice and prejudices but instead of getting affected by these we must move ahead towards progress with our mutual maturity.
Some of the main teachings of the Baha’is are - God is One, all religions are one and the whole humanity is one, all false beliefs and prejudices should be removed, man should search for the truth himself, a universal language should be developed, man and woman are equal, education should be universal and compulsory, religion and science should go hand in hand, excessive wealth disparity should be abolished, a world government should be formed and the diversity in cultures should be maintained. The main idea of the Baha’i faith is to unite mankind into a single global unit taking actions as removal of prejudices, broadening the outlook, establishing a new world order and creating a world government which would ensure that all the citizens of the world receive food, clothing, shelter, water and make provisions for the comfort of all humankind residing on this planet. The whole world will thus be rid of poverty, hunger and starvation. A new world society will flourish in a peaceful and harmonious atmosphere.

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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