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Archive | धर्म

विश्व बन्धुत्व का 70वां तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय निरंकारी संत समागम नई दिल्ली में

Posted on 12 November 2017 by admin

0218 नवम्बर से 20 नवम्बर तक तीन दिवसीय समागम में विश्व के कोने-कोने से पहुंचेगें श्रद्वालु
विश्व बन्धुत्व का 70वां तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय निरंकारी संत समागम मैदान बुराडी रोड नई दिल्ली में अन्तर्राष्ट्रीय संत निरंकारी मण्डल के सानिध्य में 18 से 20 नवम्बर तक सतगुरू माता संविदर हरदेव जी की अध्यक्षता में होगा। विश्व बन्धुत्व के 70वें तीन दिवसीय निरंकारी संत समागम में ललितपुर जनपद सहित उ0प्र0 के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट आदि जनपदों के श्रद्वालु भारी संख्या में पहंुचकर धर्म लाभ लेगें।
निरंकारी संत समागम की जानकारी देते हुए मुखी महात्मा अमान साहू एवं मीडिया प्रभारी मानसिंह ने बताया कि दिल्ली में आयोजित हो रहे तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय निरंकारी संत समागम में देश विदेश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्वालु पहंुचकर धर्म लाभ लेगें। समागम से पहले दिल्ली पहुंचकर सेवा दल के जवानों ने समागम स्थल के सैकडों एकड के मैदान को नगर में परिवर्तित करते हुए रोशनी से जगमग कर दिया है। समागम स्थल में ठहरने, भोजन, दवा, पानी, बिजली आदि की व्यवस्थायें दुरूस्त की जा रहीं हैं। समागम स्थल का शुभारंभ सतगुरू माता संविदर हरेदव जी ने विधिवत रूप से किया तथा उन्होनंे संबांधित करते हुए कहा कि सौहार्दपूर्ण वातावरण के एकत्व जरूरी है। निरंकारी संत समागम अनेकता में एकता का संुदर रूप प्रस्तुत करता है।

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हरे कृष्ण हरे राम पर झूमें श्रद्धालु

Posted on 04 November 2017 by admin

लखनऊ,03 नवम्बर। हरे कृष्ण हरे राम और तेरी करूणा में मुझको नाज है, एक नजर में बेड़ा पार हो जाएगा भजन सुनाकर प्रसिद्ध भजन गायक विनोद अग्रवाल ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा हुआ। अग्रवाल के भजन पर श्रोता न सिर्फ झूमते रहे बल्कि भाव विह्वल होकर नाचते भी रहे।
मौका राजधानी स्थित में मोतीमहल पार्क में गोविन्द चले आओ, गोपाल चले आओ की ओर से भजन संध्या कार्यक्रम रखा गया था।img-20171103-wa0203
विनोद अग्रवाल ने कार्यक्रम के दौरान एक के बाद एक भजन सुनाए। लेकिन उन्होंने जैसे ही श्रोताओं को राधा के उच्चारण से वातावरण को रमणीय कर दिया।
प्यासी है ये अखियां मेरी, बरसाती हैं सावन धारा तान छेड़ी पंडाल में बैठे श्रद्धालु उठ खड़े हुए। इसके बाद उन्होंने तेरी यादों में रोना अच्छा लगता है। अपने दामन को भिगोना अच्छा लगता है। किसको अपना हाल सुनाऊं गिर के घाव किसे दिखाऊं, तन्हाई का कोना अच्छा लगता जैसे भजन सुनाए।
यह सिलसिला शाम को सात बजे शुरू होकर और देर तक जारी रहा। श्रद्धालुओं की मांग में विनोद अग्रवाल ने टूट न जाएं कहीं प्रीत की डोर, रे कान्हा तेरी बांसुरी नींद चुराए भजन सुनाया। इस मौके पर बल्देव कृष्ण जी जगाधरी वाले और धीरज बावरा ने भी मनमोहक भजन सुनाएं।
इस मौके पर उमेश गुप्ता, वीके अरोड़ा, डा. दिलीप अग्निहोत्री,जुगल सचदेवा, संदीप अग्रवाल, सोनू अग्रवाल, विशाल सिन्हा भी उपास्थित रहे।

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मनकामेश्वर घाट पर मनी देवोत्थानी एकादशी

Posted on 31 October 2017 by admin

गन्ने के विशाल मंडप में तुलसी संग लिया गया बेटी बचाओ का संकल्प
लखनऊ, मंगलवार 31, अक्टूबर 2017

2-vishnu-bhagwan-aur-mata-tulsi-ki-pooja-bhi-hui-3चार महीने क्षीर सागर में सोने के बाद भगवान विष्णु 31 अक्टूबर को जागे। देवोत्थानी महापर्व पर मंगलवार को डालीगंज स्थित मनकामेश्वर उपवन घाट पर खासतौर से गन्ने का भव्य मंडप तैयार किया गया। इस आकर्षक मंडप में तुलसी विवाह के पावन अवसर पर डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मठ मंदिर की श्रीमहंत देव्यागिरि ने तुलसी के बीज बांटकर लोगों को बेटी बचाओ का संकल्प करवाया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे ही समाज में बेटियों की संख्या घटती रही तो वह दिन दूर नहीं जब विवाह के लिए लड़कियां ही नहीं मिलेंगी। ऐसे में समाज का पतन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देवोत्थानी एकादशी और तुलसी विवाह लोगों को संदेश देते हैं कि हर व्यक्ति अपने में सोये हुए देवत्व को जगाए और विवाह व्यवस्था को कायम रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करे।

गन्नों से सजा मंडप

देवोत्थानी पर ही किसान गन्ने की फसल कांटते हैं। चूंकि गन्ना एकादशी पर काटा जाता है इसलिए उसे सबसे पहले भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि एकादशी के बाद ही गन्ना खाना चाहिए। गन्ने से सूप और बर्तन बजाकर भगवान विष्णु को जगाने की भी परंपरा है। इसलिए गन्ने का इस पर्व पर खास महत्व है। इसे देखते हुए देवोत्थानी एकादशी पर खासतौर से सैकड़ों गन्नों से आकर्षक मंडप तैयार करवाया गया। उस भव्य मंडप में प्रथम देव गणेश की अराधना के बाद भगवान विष्णु की पूजा की गई। आदि गंगा मां गोमती के जल से अभिषेक करने के बाद देश और देशवासियों के कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। पूजन के बाद गन्ने से तैयार आकर्षक मंडप भक्तों के बीच सेल्फी प्वाइंट भी बना।

तुलसी बीज बांटकर कराया संकल्प

देवोत्थानी एकादशी पर तुलसी विवाह का अनुष्ठान भी सम्पन्न कराया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो इस अनुष्ठान को करता है उसे न केवल कन्यादान का पुण्य मिलता है बल्कि उसकी सारी विध्न बाधाएं दूर होती हैं। उसके सारे कष्ट दूर होते हैँ और जीवन सुखमयी होता है। शास्त्रों के अनुसार राक्षस जालंधर के वध के लिए भगवान विष्णु ने पतिव्रता वृंदा से छल किया था। यह बात जब वृंदा को मालूम पड़ी तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दे दिया। इस पर भगवान विष्णु ने वृंदा के सम्मान में घोषणा की कि उनका एक स्वरूप शालिग्राम के रूप में में रहेगा। तुलसी के रूप में वृंदा हमेशा पूज्यनीय रहेंगी। जो मनुष्य तुलसी और शालिग्राम का विवाह करवाएगा उसका कल्याण होगा। इस परंपरा को और भी वृहद स्तर पर ले जाते हुए श्रीमहंत देव्यागिरि ने तुलसी के सैकड़ों बीज कन्याओं के हाथों बंटवाकर संकल्प करवाया कि लोग न केवल कन्याओं को बचाएंगे बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए भी कार्य भी करें। भक्तों ने भी बड़ी संख्या में इस अनुष्ठान में शामिल होकर संकल्प लिया कि वह तुलसी के बीजों को घरों में बोएंगे। बीजों से तुलसी के पौधे निकल आने पर पौधे में रोज पानी डालते हुए वह बेटी बचाओ के संकल्प को याद करेंगे। इस आयोजन में प्राथमिक विद्यालय बरौलिया प्रथम स्कूल के प्रधानाचार्य शमशाद अहमद, शिक्षिका लक्ष्मी रस्तोगी, उमा तिवारी, उपमा पांडेय,जगदीश, संजय सोनकर, अमित, गायत्री, विधि, श्यामू जादौन, ममता, पूनम, पूजा, तुलसी, रेखा, रेनु, खुशबू, पूजा पाल, ऋतु समेत स्कूल के बच्चे शामिल हुए।

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Press Note

Posted on 21 May 2013 by admin

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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२१ अप्रैल को सुलतानपुर गांव में विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा

Posted on 20 April 2013 by admin

१९ अप्रैल । सुलतानपुर जिले के जूडापटटी कूडेभार में २१ अप्रैल से होने वाले सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में २६ अप्रैल को बद्रिकाश्रम के जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर वासुदेवानन्द सरस्वती भाग लेगें।
सुलतानपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजक पूर्व शासकीय अधिवक्ता पं० शिव कुमार मिश्र ने बताया कि २१ अप्रैल को गांव में विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा निकलेगी और सायं से कथा प्रवचन शुरु हो जायेगा। २७ अप्रैल को कथा का समापन होगा तथा २८ अप्रैल को हवन, पूर्णाहूति एवं विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया है। कथा के दिनों में २६ अप्रैल को जगद्गुरु  शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर वासुदेवानन्द सरस्वती तथा अन्य तिथियों में पूर्व विधान सभा अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी, रमापति राम त्रिपाठी सहित कई विद्वान भाग लेगें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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लोहरामउहृ मंदिर में भक्तो ने मां भगवती के दर्शन किये

Posted on 20 April 2013 by admin

१९ अप्रैल ।  चैत्र नवरात्र के नवमी को लोगो ने पूजा के बाद छोटी छोटी कन्याओं को पूडी और हलवा खिलाकर अपने व्रत का समापन किया । सुबह ब्र्रह्ममुहूर्त में उठकर भक्तों ने मां भगवती की पूजा अर्चना की तथा लाल चुनरी, नारियल चढाकर हलवे पुडी आदि का भोग लगाकर सुख समृद्धि की कामना की ।
पूजा अर्चना के बाद व्रत रखने वाले लोग छोटी छोटी कन्याओं को आदर सहित घर बुलाकर भोजन कराया । लोहरामउहृ मंदिर में सुबह से ही लम्बी लम्बी कतार लगाकर भक्तो ने मां भगवती के दर्शन किये और पुजारी पं० राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने भक्तो को हवन कराया । अमहट स्थित गायत्री मन्दिर पर सैकडो कन्याओं ने भोज में भाग लिया तथा भक्तों ने सुबह से हवन पूजन व दर्शन किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मां के भक्तो की भीड़ उमड़ पडी ।

Posted on 18 April 2013 by admin

१८ अप्रैल । वासंतीय नवरात्र के अष्ठमी के दिन सभी शक्तिपीठों पर ब्रह्म मुहूर्त से ही मां के भक्तो की भीड़ उमड़ पडी । देर शाम तक मन्दिरो में देवी भक्तो ने मां दुर्गा के पूजन व अर्चन किये ।
नगर के रुद्र नगर स्थित मां नयना देवी के मंदिर, मां काली शक्तिपीठ शाहगंज, काली माई का थान मेजरगंज, मां भगवती का धाम लोहरामउहृ पर भोर से ही जय माता दी के जयकारो के साथ भक्तो ने नारियल चुनरी और प्रसाद चढा कर अपने घर परिवार और समाज की मंगलकामना की प्रार्थना की । दिन भर मन्दिरो में घंटे घडियालो व मां के जयकारो की गूंज से पूरा क्षेत्र अध्यात्मिक हो गया।
मन्दिरों में घंटे शंख की ध्वनि व जगतजननी की जय जयकार के साथ सुबह सायं आरती हुई जिसमे श्रद्धा पूर्वक भाग लिया। बताते है वैसे तो वासंतीय और शरद नवरात्र व दो गुप्त नवरात्रो की उपासना से हमारे सनातन धर्म मे जीवन के हर क्षेत्र मे विजय सुनिश्श्च्ति होती है जिससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से आसुरी शक्तियो एवं जीवन की कठिनाइयो से भक्तो को नवदुर्गा के विभिन्न्न रुप की उपासना से मुक्ति प्राप्त होती है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मां तेरे चरणो में हम शीश झुकाते है

Posted on 18 April 2013 by admin

१७ अप्रैल  । नवरात्र का पावन महीना चल रहा है श्रद्धा और भक्ति के अनुसार हिन्दू जनमानस इसे मना रहा है । कुछ लोग नौ दिनो का व्रत रखे हुए है । वही कुछ लोग प्रथम दिन और अष्टमी के दिन अर्थात २ दिवसीय व्रत अनुष्ठान करते है । अपनी अपनी सामथ्र्य है मन स्वच्छ एवं पवित्र होना चाहिए ।
प्रथम नवरात्रि में सिर्फ नौ दिनो का व्रत रखकर हम मां भगवती की आराधना करते है । जबकि द्वितीय नवरात्रि में नौ दिनो के व्रत के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध त्योहार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है । दोनो नवरात्रि में हम मां दुर्गा के नौ रुपो की नौ दिनो में पूजा अर्चना करते है और मां को मनाते है । मां भगवती के हर रुप का अलग अलग महत्व है जैसे दुर्गा रुप शक्ति का परिचायक है तो मां शारदा का रुप विद्या का परिचायक है । तो मां शारदा का रुप विद्या का परिचायक है नौ रुपो की आराधना मात्र आराधना ही नही है बल्कि सम्पूर्ण ब्रहमांड की शक्ति का आवाहन इन्ही नौ दिनो में हो जाता है जो समस्त मानव जाति के लिए शुभकारी एवं फलदायी होता है ।
आधुनिकता एवं घोर वैज्ञानिकता के इस युग में ऐसे धार्रि्मक पर्वो में जनमानस की बढती आस्था यह सिद्ध करती है सर्व शक्तिमान सत्त्ता की छाया में सारा विश्व फलफूल रहा है और हम बिना इस सत्ता की अनुकंपा के एक कदम भी नही चल सकते । दूर जाने की जरुरत नही अपने आस पास देखिये छोटे छोटे बच्चे नवरात्रि का व्रत रखे हुए दिख जायेगें जिन्हे दिन भर कुछ ना कुछ खाने की आदत होती है । यह श्रद्धा नही तो और क्या है । अस्तिकता ही एक ऐसा कारण है जिससे मानव समाज अपना  विकास एवं प्रगति कर रहा है ।
कई तरह के धार्रि्मक व्रत हमारे हिन्दू समाज में विद्यमान है जिसमे इस नवरात्रि पर्व के नौ दिवसीय व्रत की महिमा का वर्णन शब्दो में कर पाना सर्वथा असंभव अपने सामथ्र्य के अनुसार हम मां भगवती के नौ रुपो की आराधना करें और मां भगवती हमारी भक्ति स्वीकार करके सारी मानव जाति पर अपनी दया दृष्टि बनायें रखें यही कामना हमें सच्चे मन से करनी चाहिए । नवरात्रि के पावन पर्व पर सच्ची आराधना यही है ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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पावन चिंतन धारा आश्रम द्वारा आपके शहर लखनऊ में दिनांक 9 अप्रैल 2013 से 11 अप्रैल 2013 तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर ‘ध्यान योग क्रिया शिविर’ के कवरेज के संबंध में

Posted on 10 April 2013 by admin

पावन चिंतन धारा एक आध्यात्मिक संगठन है, जो बच्चों और युवाओं के मानसिक व चारित्रिक विकास के लिए कार्य करती है, साथ ही , धर्म की वैज्ञानिकता के प्रचार-प्रसार के लिए कटिबद्ध है।
इस संस्था के संस्थापक श्री पवन सिन्हा जी, जो जन-जन में एस्ट्रªो अंकल के रूप में विख्यात हैं, का मानना है कि जब तक व्यक्ति का मन नाथा नहीं जाएगा तब तक समाज व देश का उत्थान असंभव है।
मन को नाथने का व अन्य किसी भी समस्या का पहला और अंतिम समाधान है-ध्यान। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए पावन चिंतन धारा की लखनउ इकाई द्वारा तीन दिवसीय ध्यान योग क्रिया शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
ध्यान योग क्रिया शिविर के प्रथम दिन प्राख्यात आध्यात्मिक चिंतक श्री पवन सिन्हा जी ने व्यावहारिक ध्यान पद्धतियों की विवेचना बहुत वृहद तरीके से की जिसमें ध्यान के सही प्रकार, ध्यान हमारे जीवन को सफल बनाने में किस प्रकार सहायक है, ध्यान से किस प्रकार मानसिक शांति, जीवन का उद्देश्य प्राप्त करने में मदद, ईष्ट प्राप्ति और किस प्रकार हमारे संस्कारों को ईच्छा-शक्ति के द्वारा मजबूत करता है, आदि बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
साथ ही उन्होंने कृष्ण-क्रिया का भी गूढ़ रहस्य बताया जिसमें मन को एकाग्र व शांत करते का अभ्यास भी कराया।
कार्यक्रम के अगले चरण में पावन पुस्तक श्रृंखला-11, शीर्षक- ईष्ट साधना पुस्तक का विमोचन हुआ। यह पुस्तक विभिन्न एस्ट्रªो अंकल कार्यक्रम के एपिसोड का संग्रह है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में लोगों के प्रश्नों का समाधान करते हुए ध्यान, अध्यात्म, योग आदि विषयों से संबंधित लोगों की जिज्ञासाओं को शांत किया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन के कार्यक्रम का समापन हनुमान चालीसा का संगीतबद्ध पाठ करके किया गया। इस शिविर कार्यक्रम में लगभग 450 लोगों ने हिस्सा लिया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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कैलाश-मानसरोवर की यात्रा से लौटे प्रदेश के मूल निवासियों को सम्मानित किया

Posted on 09 April 2013 by admin

press-1उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर कैलाश-मानसरोवर की यात्रा से लौटे प्रदेश के मूल निवासियों को सम्मानित किया और उन्हें क्रमशः 25 हजार रुपए का चेक अनुदान के रूप में प्रदान किया। कैलाश-मानसरोवर के यात्रियों को पहली बार दिए गए अनुदान को राज्य सरकार की तरफ से एक छोटा सहयोग बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की पहल से अन्य नागरिकों को इस दुर्गम यात्रा के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने तथा जाने की प्रेरणा मिलेगी।
श्री यादव ने कहा कि डाॅ0 राम मनोहर लोहिया कैलाश-मानसरोवर के महत्व को समझते हुए ही इससे सम्बन्धित प्रकरण को पहली बार संसद में उठाया था। कैलाश-मानसरोवर को एक भव्य धार्मिक स्थल बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति ने यहां पहुंचने के रास्ते को अत्यन्त दुर्गम एवं कठिन बनाया है। उन्होंने कहा कि यात्री यहां अपनी अदम्य इच्छा शक्ति तथा श्रद्धा की भावना से ही पहुंच पाते हंै। उन्होंने कहा कि जो लोग यहां की यात्रा कर आए हैं, वास्तव में वे साहसी एवं प्रकृति प्रेमी हैं।
मुख्यमंत्री ने धर्मार्थ कार्य विभाग के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि कैलाश-मानसरोवर जैसी जगह कदाचित पृथ्वी पर और कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थान की यात्रा के लिए यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। उन्हांेने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान देने से अन्य लोग भी उत्साहित होकर यात्रा के लिए प्रेरित होंगे।
press-3इस मौके पर मानसरोवर निष्काम सेवा समिति के अध्यक्ष श्री उदय कौशिक ने राज्य सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उन चन्द राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जो मानसरोवर यात्रा के लिए आर्थिक मदद प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, चेन्नई तथा आन्ध्र प्रदेश से आए कैलाश-मानसरोवर के यात्रियों ने मुख्यमंत्री का परम्परागत ढंग से स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
इससे पूर्व, धर्मार्थ कार्य मंत्री श्री आनन्द सिंह ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विगत एक वर्ष में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर गए प्रदेश के 31 मूल निवासियों को क्रमशः 25 हजार रुपए का चेक देकर पहली बार सम्मानित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में मंत्रिमण्डल के सहयोगियों के अलावा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य श्री नवनीत सहगल, अन्य अधिकारी तथा कैलाश-मानसरोवर के यात्री भी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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sa@upnewslive.com

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