*खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "upnewslive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@upnewslive.com पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | पर्यावरण

पर्यावरण विरोधी नीति और उससे प्रदेश को हुई क्षति की महामहिम राज्यपाल से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जॉच किए जाने की मांग

Posted on 02 July 2010 by admin

लखनऊ -  समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता  राजेन्द्र चौधरी ने एक बयान में कहा है कि प्रदेश की मायावती सरकार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अन्तर है। जनता को बरगलाने के लिए एक जुलाई को मन्त्रिमण्डल की बैठक में पेड़ों की अवैध कटान पर दस हजार रूपए जुर्माने और प्रति हरे पेड़ की कटान के लिए आवेदन के साथ 100 रूपए का लाइसेंस शुल्क लगाने का निर्णय कर  यह दिखाने की कोशिश की है कि उसे प्रदेश के पर्यावरण एवं हरित क्षेत्र की बहुत चिन्ता है जबकि हकीकत यह है कि इनका सर्वाधिक विनाश इसी सरकार में हुआ है। इससे ऋतु  चक्र बदला है और लोगों की जिन्दगी बेहाल हुई है। समाजवादी पार्टी बसपा सरकार की पर्यावरण विरोधी नीति- रीति और उससे प्रदेश को हुई क्षति की महामहिम राज्यपाल से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जॉच किए जाने की मांग करती है।

श्री चौधरी ने कहा है कि जुलाई में वन महोत्सव के तहत वृक्षारोपण का लम्बा चौड़ा कार्यक्रम जारी किया जाना औपचारिक कर्मकाण्ड बन गया है। इस वर्ष वन विभाग ने 3 करोड़ पौध लगाने का ऐलान किया है। कई अन्य विभागों के भी इसमें शामिल होने से इस वर्ष 8.5 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह सब कागजी खानापूरी के अलावा कुछ और नहीं है। दिखावे के ऐसे कार्यक्रमों की हकीकत फारेस्ट सर्वे आफ इण्डिया की रिपोर्ट से खुल जाती है जिसके अनुसार उत्तर प्रदेश में हरित क्षेत्र  में निरन्तर गिरावट आती जा रही है। वन से इतर हरियाली में हाल के वर्षो में गिरावट 9.6 प्रतिशत से नीचे 9.01 प्रतिशत आंकी गई है। राज्य में वर्ष 2005 में, जब श्री मुलायम सिंह यादव की सरकार थी, 3.40 प्रतिशत (8,203 वर्ग किलोमीटर) हरियाली वृद्धि आंकी गई थी, ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र में हरियाली अब 7,381 वर्ग किलोमीटर (3.06 प्रतिशत) रह गई है।       श्री मुलायम सिंह यादव के समय लगाए गए लाखों पेड़ उजाड़ दिए गए जिससे यह गिरावट आई है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में करोड़ों पेड़ मुख्यमन्त्री की निजी महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ा दिए गये हैं। राजधानी सहित पूरे प्रदेश में लगे हरे पेड़-पौधों को बेरहमी से काट डाला गया।  पार्को,स्मारकों के निर्माण के नाम पर वृक्षविनाश कार्यक्रम पूरी गति से चलाया गया। सड़क किनारे लगे वृक्षों की अधाधुंध कटान के फलस्वरूप मीलों तक छाया का नाम नहीं रह गया है।

श्री राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि प्रदेश में हरियाली का विनाश कार्यक्रम चूंकि मुख्यमन्त्री के इशारों पर हुआ है और अब वही घड़ियाली आंसू बहाती हुई वृक्ष कटान के लिए लाइसेंस फीस और जुर्मानें का प्राविधान कर रहीं है तो सर्वप्रथम उनको ही इन अवैध कार्यो के लिए नोटिस दिया जाना उचित होगा। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सनक की भेंट चढ़े करोड़ों  पेड़ों की अवैध कटान के लिए प्रति पेड़ उनसे हर्जाना लिया जाना चाहिए। महामहिम राज्यपाल को भी यह देखना चाहिए कि प्रदेश की वन सपन्दा और हरियाली के विनाश से पर्यावरण में पैदा असन्तुलन और उसके फलस्वरूप ऋतु चक्र बदलने से जो असामान्य जीवन स्थिति बनी है उसका आकलन एक स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष जॉच एजेंसी से कराया जाए और मुख्यमन्त्री ने जो क्षति पहुंचाई है उसके लिए उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

Comments (0)

अवैध बालू खदानों की गोपनीय जांच होने पर ही लग सकेगी लगाम

Posted on 14 March 2010 by admin

चित्रकूट - जिले में अवैध बालू खनन का कारोबार रुकने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। जिसके कारण लीज पर खदान लेने वालों को तो घाटा हो ही रहा है साथ ही साथ सरकार को भी अच्छी खासी चपत लग रही है। फिर भी प्रशासनिक अधिकारी इस ओर से अपनी आंखे मून्दे हुए है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय जांच करा बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में जिले में मन्दाकिनी, पयस्वनी व यमुना नदी के किनारे बसे लगभग एक सैकड़ा  गांवों में बालू माफियाओं का अवैध कारोबार दिनोदिन जोर पकड़ता जा रहा है। सूत्रो की माने तो सरकारी विभागों द्वारा ग्रामीण विकास के निर्माण कार्यों में सम्बंधित लोग सस्ती दर पर लोकल बालू का प्रयोग करने में जुटे हुए हैं। जिससे  इस अवैध करोबार को बढ़ावा मिल रहा है। बिना किसी परेशानी के अच्छी कमाई होने के कारण बाहुबली इस धंधे में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं इस अवैध कारोबार के चलते जहां एक ओर  खदानों को सरकारी पट्टे में लेने वाले ठेकेदारों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार को भी लाखों रुपये की चपत लग रही है। सूत्र बताते हैं कि अवैध कारोबारियों के हौसले तो इतने बुलन्द है कि वे अवैध खनन कर निकाली गई बालू का बाकायदा डम्प कर अच्छी खासी रकम कमा रहा है। सूत्रो की माने तो पहाड़िया के पास बागै नदी की अवैध बालू, मऊ में, ओबरी के पास, सेमराड़ी नाले के पास, भैसोधा गांव में कई बीघे जमीन में अवैध बालू डम्प है। इसी तरह दहिनी, कुल्लू खेड़ा आदि स्थानों मे भी अवैध रूप से निकाली गई बालू डम्प है।

सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि इन सबकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को है इसके बावजूद भी किसी प्रकार की कार्रवाई न होना सम्बंधित अधिकारियों की सन्दिग्ध भूमिका को दर्शाता है। समाज वादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राज बहादुर यादव तो यहां तक कहते हैं कि कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद भी जिले में अवैध बालू खनन का कारोबार दिनोदिन फलफूल रहा है। इतना ही सम्बंधित अधिकारी खुद भी मानते हैं कि इस कारोबार में कई राजनेता और रसूख वाले लोगों का हाथ होता है जिससे कार्रवाई करने में मुश्किल होती है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्री यादव ने  प्रदेश सरकार से इस अवैध कारोबार में लगे लोगों की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की है।

संदीप गौतम

080525834

Comments (0)

उपेक्षित हैं क्रेशर उद्योग में काम करने वाले मजदूर

Posted on 09 March 2010 by admin

बिना मास्क लगाए ही करते हैं मशीनों में काम

चित्रकूट - जिले के भरतकूप और उसके आसपास इलाके में संचालित क्रेशर उद्योग से जहां पूरे क्षेत्रा का वातावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं दूसरी ओर मशीनों में काम करने वाले मजदूर भी तमाम तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। लेकिन मालिकों को बस अपनी जेबें भरने की फिक्र रहती है। जबकि नियमत: इस तरह के उद्योगों में काम करने वाले लोगों की पूरी जिम्मेदारी मालिकानों पर होती है। और मजदूरों का समय-समय पर चिकित्सीय परीक्षण भी कराया जाना आवश्यक होता है।

गौर तलब है कि जिले में मौजूद छोटी-छोटी पहाड़ियों पर ग्रेनाइट पत्थर का अच्छा खासा भण्डार होने के चलते भरतकूप और आसपास इलाके में  क्रेशर उद्योग भली प्रकार से फलफूल रहा है।  स्थानीय लोगों के  अलावा अन्य जनपदों से आकर कई उद्यमियों ने  भी यहां  क्रेशर उद्योग लगाया और मोटी कमाई करने लगे।  वर्तमान समय में लगभग दो दर्जन से अधिक क्रेशर संचालित हो रहे हैं। परन्तु इन उद्योग पतियों द्वारा नियमों की अनदेखी की खुलेआम की जा रही है। सूत्रो की माने तो पट्टे की खदानों से महंगे दामों  में पत्थर खरीदने के बजाए ज्यादातर क्रेशर उद्योग मालिक क्षेत्र में चल रही अवैध खदानों से निकलने वाले पत्थरों को खरीदते हैं। जिससे यहां अवैध पत्थर खदानों को बढ़ावा तो मिल ही रहा है साथ ही  पहाड़ भी खोखले होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि  मशीनो गिट्टी व बालू बनाते समय निकली धूल से आसपास इलाके का पूरा वातावरण को  प्रदूषित हो जाता है। लोग बताते हैं कि जब क्रेशर मशीने चलती हैं उस समय सांस लेना भी दूभर हो जाता है। इसके अलावा इन मशीनों मे काम करने वाले  मजदूर को मास्क भी नहीं उपलब्ध कराया जाता। जिसके कारण धूल व गन्दगी से उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। जबकि सूत्र बताते हैं कि इस प्रकार के धंधों मे काम करने वाले मजदूरों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाना अति आवश्यक है। लेकिन क्रेशर उद्योग मालिक  मशीनों में काम करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लोगों ने जिलाधिकारी से इस ओर ठोस कदम उठाने की मांग की है।

श्री गोपाल

09839075109

Comments (0)


www.internationalnewsandviews.com
Advertise Here

Advertise Here
-->

"Cancer Healer Center"
                                         "Care for Patient , Concern for Life"
www.cancerhealercenter.com

 Type in