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Archive | वाराणसी

कैथी के किसानो ने सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्रमुख सचिव राजस्व से मिल कर गुहार लगाई

Posted on 16 August 2017 by admin

खतौनी में अवैध आदेशों के चलते भूमिधर किसान कागजों पर बने भूमिहीन

व्यापक फर्जीवाड़े से भूमाफियाओं की चांदी

राजमार्ग 29 के चौडीकरण में मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया लम्बित

अवैध आदेशों को निरस्त कर मूल खतौनी तैयार करने और उसी के आधार पर मुआवजा वितरित करने की मांग की गयी.

वाराणसी की पूर्वी सीमा पर गंगा गोमती संगम पर स्थित कैथी गाँव मार्कंडेय महादेव धाम के कारण सुविख्यात है, संगम स्थल देखने में बहुत ही सुरम्य है और पर्यटन की दृष्टि से इसका महत्व बहुत बढ़ता जा रहा है. जहाँ लेकिन गोमती नदी के इस संगम का वास्तविक स्थान इससे कहीं बहुत आगे है, ऐसा गोमती द्वारा वर्ष 1978 में किये गये धारा परिवर्तन के कारण हुआ है, नदी की कटान के कारण कैथी की सैकड़ों एकड़ भूमि नदी के उस पार चली गयी और गोमती ने कैथी गाँव की आबादी की तरफ अपना रुख करते हुए गंगा में एक नये स्थान पर संगम बना लिया. तभी से आज तक यहाँ के किसान उस कटान का दंश झेल रहे हैं. गाजीपुर जिले के कुसहीं और खरौना गाँव के लोग जमीनों पर अवैध तरीके से काबिज होने कि कोशिश करने लगे आये दिन मारपीट, फौजदारी होने लगी यहाँ तक कि एक किसान की मौत भी भी हो गयी, इस प्रकार उत्पन्न वाराणसी गाजीपुर जनपद के बीच सीमा विवाद के निस्तारण के लिए ग्राम कैथी के सभी राजस्व अभिलेख सन 1979 में रिकार्ड आपरेशन के लिए सहायक अभिलेख अधिकारी बलिया को हस्तांतरित कर दिया गया. इस सम्बन्ध में एक वाद माननीय उच्च न्यायालय में आज भी लम्बित है. उक्त विवाद के कारण कैथी गाँव की चकबंदी नही हो सकी. आज किसानो की दूसरी पीढ़ी न्याय की गुहार लगाते लगाते थक चुकी है.

गोमती नदी की कटान के कारण उत्पन्न गाजीपुर वाराणसी जनपद सीमा विवाद के कारण ग्राम कैथी के राजस्व अभिलेख वर्ष 1979 में सहायक अभिलेख अभिलेख अधिकारी, बलिया को रिकार्ड आपरेशन के लिए हस्तांतरित कर दिए गये थे. उक्त खतौनी पर वहां कतिपय राजस्व कर्मचारियों द्वारा तमाम अनाधिकार एवं अवैध आदेश दर्ज कर दिए गये हैं जिससे अनेक भूस्वामी आज कागजों पर भूमिहीन हो गये हैं वहीँ भूमाफिया प्रकृति के लोग काबिज हो चुके हैं. वर्तमान में खतौनी जीर्णशीर्ण, अस्पष्ट एवं अपठनीय हो गयी है, मूल खतौनी के दर्जनों पन्ने गायब कर दिए गये हैं. जिस कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 29 के चौडीकरण में होने वाले भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले कैथी के किसानो की सूची का प्रकाशन संभव नही हो पा रहा है और मुआवजा लम्बित है.

कैथी के किसानो ने आज प्रमुख सचिव राजस्व श्री रजनीश दूबे से मिल कर उन्हें समस्या बताते हुए गुहार लगाई कि सहायक अभिलेख अधिकारी, बलिया के यहाँ रिकार्ड आपरेशन के लिए रखी गयी कैथी ग्राम की खतौनी (1383-85 फसली) में हुए अवैध एवं अनाधिकार आदेशों को हटाते हुए खतौनी को मूल रूप में तैयार कराने, 35 वर्षो से लम्बित कैथी गाँव की रिकार्ड आपरेशन की प्रक्रिया को तत्काल पूर्ण कराने के साथ ही तहसीलदार सदर, वाराणसी महोदय के अभिलेखागार में उपलब्ध ग्राम कैथी की वर्ष 1380-82 फसली की खतौनी में वैधानिक वरासत, बैनामे और हिस्सेदारी को दर्ज कराते हुए अधिग्रहण से प्रभावित किसानो की सूची का धारा 3 घ के तहत प्रकाशन कराने और प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण कर भूम अधिग्रहण का मुआवजा का वितरण सुनिश्चित कराने की कृपा करें. प्रमुख सचिव ने सहृदयता पूर्वक मामले को सुनते हुए तत्काल कार्यवाही का आश्वासन दिया.

प्रतिनिधिमंडल में श्यामाचरण पाण्डेय, वल्लभाचार्य पाण्डेय, कैप्टन सुरेश प्रताप सिंह, निर्मल सिंह, अशोक कुमार यादव एवं अजीत सिंह शामिल रहे.

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हिँसा नफरत और अशांति के ख़िलाफ़ बनारस में साझा सँस्कृति मंच और जॉइंट एक्शन कमेटी BHU द्वारा आयोजित ‘ धर्म सँसद ‘ में शांति और अमन की की गयी अपील

Posted on 08 August 2017 by admin

धर्म गुरुओं ने मञ्च से फ़िरकापरस्ती की राजनीती से बचने को चेताया।

whatsapp-image-2017-08-06-at-19महोदय आज दिनांक 6 अगस्त 2017 दिन रविवार को साझा सँस्कृति मंच और जॉइंट एक्शन कमेटी BHU द्वारा आयोजित धर्म सँसद में हिँसा नफरत और अशांति के ख़िलाफ़ बनारस की गँगा जमुनी तहज़ीब को सँजोने की बात करी गयी। धर्म गुरुओं ने मञ्च से फ़िरकापरस्ती की राजनीती से बचने को चेताया। सिगरा स्थित चाइल्ड लाइन अश्मिता संस्थान में आयोजित कार्यक्रम का आधार वैश्विक नफरत और हिंसा का प्रतिनिधि दिन और घटना रही , ‘ आज ही के दिन अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा नामक जापानी शहर पर लिटिल मैन नामक यूरोनियम बम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गिराया था। इस बम के प्रभाव से 13000 किमी में तबाही फ़ैल गयी , साढ़े तीन लाख लोगो में एक लाख चालीस हजार लोग एक झटके में मर गए। ये बूढ़े बच्चे और महिलाए थे कुल मिलाकर आम शहरी थे। 20000 फारेनहाइट का ताप पैदा हुआ था विस्फोट से , जंगल पेड़ मनुष्य घर सब कागज की तरह जल गए थे , पानी के श्रोत भाप बनकर उड़ गए थे। जो पहले झटके में मरे उन्हें अधिक कष्ट नही उठाना पड़ा था, बाकी जो दूर थे वो मर्मान्तक अंत पाए और अगले कई सालों तक वह क्षेत्र अभिशप्त हो गया विकलांगता कैंसर और न जाने किन किन बीमारियों के लिए। और ये दुर्घटना हमें यह स्मरण रखने को कहती है की वैश्विक स्तर पर इतने पाशवी कृत्य से गुजरे है जब इंसान को गाजर मूली की तरह काट के रख दिया गया और इंसानियत तार तार हो गयी थी। वक्ताओं ने कहा की हाल ही में इजराइल यात्रा के दौरान होलोकॉस्ट म्यूजियम में प्रधानमंत्री मोदी ने विजिटर्स डायरी में लिखा है की एक ऐसी दुष्टता की मर्मस्पर्शी याद जिसे बताने के लिए शब्द नहीं।” 1933 से 1939 के बीच 60 लाख लोगो को मारा गया था। नस्ल के नाम पर पहचान को बुरा बताकर लोगो को गैस चैंबरों में ज़िन्दा जलाया गया और इस काम को करने वाला सनकी इंसान का नाम हिटलर था। इतिहास के रक्तरंजित किताबो के पन्ने ऐसे ही सनकियों की गाथाओं से भरे पड़े है। धर्म के नाम पर तो कभी जाती के नाम पर या फिर सम्पत्ति या फिर राजकुमारी प्रेमिका से विवाह के नाम पर भयंकर कत्ले आम किये गए है। इतिहास की महत्वाकांक्षा और स्वार्थ ने मानव सभ्यता की रीढ़ को सीधी करने के बजाय हमेशा झुका झुकाकर विश्व के भूगोल को ही गोल बनाने की कोशिश किया है। सिकंदर की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए न जाने कितने बच्चे अनाथ हुए कितनी स्त्रियाँ बेवा हुई इसका हिसाब सिकंदर महान से कौन लेगा ? मध्य एशिया के आक्रांताओं से उनके लालच और साम्राज्य विस्तार वहशी पँजे की ज़द में दबे कुचले मानवता की बात की जाए तो क्या जवाब होगा ? आश्चर्य है की इतिहास के इन सनकियों को तत्कालीन समाज देवता बनाकर पूजता था, सर पर बैठाता था।

Not In My Name ‘ मुहीम के तहत  आयोजित इस कार्यक्रम में हिँसा, राजनीती और साम्प्रदायिकता के अंतरसंबन्धों की भी पड़ताल की गयी और कहा गया की हिंदुस्तान मे जब हम साम्प्रदायिकता की जड़ो को तलाशते हैं तो हम ये तय नही कर पाते की वो कौन सा वर्ष चुने, जब देश मे साम्प्रदायिक दंगे ना हुए हों। आज़ादी के बाद के सरकारी आंकड़ो के अनुसार मुल्क मे हजारो हजार दंगे हो चुके हैं और कोई भी वर्ग इन दंगों से अछूता नही रहा है. जब हम साम्प्रदायिक दंगों के इतिहास को खंगालते हैं तो पाते हैं की व्यापक स्तर पर पहले साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार आजादी की लड़ाई के अगुआ रहे महात्मा गांधी हुए थे. ताउम्र साम्प्रदायिकता के खिलाफ आगाह करते रहने व लड़ते रहने वाले गाँधी को मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप मे गोली मार दी गई.

कट्टर धार्मिक विचारधारा अगर सत्ता को परिभाषित करने लगे तो उसके लिए एक कट्टर नागरिक किसी साधारण नागरिक से ज्यादा फायदेमंद होता है. वर्तमान समय मे राजनीति का पूरा ध्यान आम नागरिक को एक कट्टर नागरिक मे बदलने की है. इस प्रक्रिया के तहत उनके निशाने पर वो हर चीज है जो आम नागरिकों के रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ती हो. शिक्षा, मीडिया, फौज, पुलिस, विधायिका, न्यायपालिका, अन्य संवैधानिक संस्थान इत्यादि, अलग-अलग तरीके से इन सभी संस्थाओं को साम्प्रदायिक बनाया जा रहा है। धर्म गुरुओं ने बनारस की गंगा जमुनी तहजीब और साहचर्य जीवन के भाव को संजोने पर जोर दिया और कहा की बुराई सबमे होती है हर समय लालची और महत्वकांक्षी दुष्ट विचार समाज में सक्रिय रहते है लेकिन सज्जन व्यक्ति का कर्तव्य है की वह अपने देश समाज के समता सहिष्णुता वाले इतिहास उदाहरणों को याद करे और उन पर चले न की निगेटिव चीजों पर प्रतिक्रिया करे और वैमनष्य फैलाए। संकट मोचन बम कांड के समय महंत वीरभद्र मिश्र और मुफ़्ती ए शहर ने इस शहर को साम्रदायिक तनाव से बचाया था और विस्फोट के तत्काल बाद शन्ति मार्च लेकर सड़को पर उतर आए थे और बनारस किसी बुरी स्मृति की जगह आज गर्व बोध से वह दिन याद करता है। काशी कबीर और रैदास की नगरी रही है यंहा से बढ़ ने संदेश दिया है यंहा बिस्मिल्लाह की शहनाई बजी है। और यही संस्कृति भारतीय संविधान की आत्मा है , जब हम गौरव से कह रहे होते है की हम एक धर्मनिरपेक्ष समाजवादी गणराज्य है और हमारे देश में सभी पंथो मतों सम्प्रदायो और धर्मो को राज्य द्वारा समान भाव से देखा जाएगा। सहिष्णुता और साहचर्य को बढ़ावा देने वाला संविधान ही हमारा प्रकाशपुँज है। भीड़ द्वारा की जा रही हिंसा देश के भाईचारे वाले ताने बाने के लिए नुकसान दायक है और इसके खिलाफ ये समय एकजुटता का है. सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को एक होकर साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी, उसे हराना होगा वर्ना वो समय दूर नही जब हमारी सड़कों पर गाँधी से ज्यादा गोडसे घूमते नजर आएं. गँगा ज़मुनी तहज़ीब के संवाहक शहर पर फिर से ज़िम्मेदारी आन पड़ी है मजहबी और जातीय कट्टर साम्प्रदायिक शक्तियों को हराने के लिए अपने गलियों में खिड़कियों को खोलना होगा और ताज़ी हवा के झोंको के बीच सेवइयों और मिठाइयों को बाँटना होगा। पान की अडियो को गुलजार करना होगा।

हिरोशिमा के लिए 2 मिनट का मौन भी रखा गया और युद्धेष बेमिसाल के जनगीत और प्रेरणा कला मञ्च के गीत हुए कार्यक्रम में।

कार्यक्रम का सञ्चालन जागृति राही , स्वागत सतीश सिंह ,धन्यवाद सुरेन्द किशोर एडवोकेट ने किया सभा मे प्रमुख रूप से अग्रलिखित लोग मौजूद रहे ज्ञान प्रकाश जी कबीर कीर्ति मंदिर, मैडम मार्था बहाई धर्म प्रतिनिधि, भंते प्रियदर्शी बुद्ध मंदिर सारनाथ, मुफ़्ती हसन नक्शबंदी, मुफ़्ती ए शहर बातिन साहब, भाई अमरप्रीत जी सिख गुरु द्वारा साहिब नीचीबाग, प्रोफेसर प0 सुधाकर मिश्र विभागाध्यक्ष वेदांत विभाग सम्पूर्णनाद सँस्कृत विवि , फादर दिलराज वल्लभाचार्य पांडेय, प्रोफेसर महेश विक्रम सिंह प्रो0 स्वाति, चिंतामणि सेठ, डॉ लेनिन रघुवंशी, अनुप श्रमिक, डॉ आनंद प्रकाश तिवारी, रवि शेखर, दिवाकर सिंह, रामजनम भाई, एस0पी0 राय, संजय भट्टाचार्य एडवोकेट , फादर दयाकर, एकता शेखर, धनञ्जय, गजेंद्र सिंह, मुकेश उपाध्याय, डॉ नीता चौबे, विनय सिंह, दीनदयाल, संजीव सिंह, एजाज भाई, प्रेम सोनकर, आकाश सिंह राजेश्वरी देवी आदि प्रमुख रहे।

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मनुष्यों की लाशों के साथ मरे हुए पशुओं का भी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हो रहा विसर्जन

Posted on 04 August 2017 by admin

सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण विनिश्चय में लगाया है रोक। सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजभूषण दुबे ने शासन व एनजीटी को भेजी शिकायत। ( वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर फेकी गई बकरी)

गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने के लिए भारत सरकार चाहे जितनी भी बड़ी बड़ी घोषणाएं करें, उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय व राष्ट्रीय हरित अधिकरण अक्सर सरकारों को गंगा सफाई के नाम पर फटकार लगाए करते हैं किंतु जमीनी हकीकत बदलने का नाम नहीं लेती। बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजभूषण दुबे वाराणसी के मणि कर्णिका घाट पर शव जल प्रवाह के अलावा मरी हुई बकरी को भी प्रवाहित करते देखा तो चौंक गए। उन्होंने आपत्ति जताया तो वहां के लोग विरोध पर उतर आए। तर्क दिया गया कि गंगा मुक्ति दायिनी है इसमें कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैंस, पड़वा, बकरी सभी प्रवाहित किए जाते हैं। ब्रज भूषण दूबे ने मनुष्यों की लाशों के प्रवाहित होने का वीडियो व चित्र तथा नाव के सहारे मरी हुई बकरी को गंगा में प्रवाहित करने का चित्र शासन तथा एनजीटी को भेजा।

सर्वोच्च न्यायालय का महत्व पूर्ण आदेश-
ब्रज भूषण दुबे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे गए मेल में इस बात का उल्लेख किया  की एम सी मेहता बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण खंडपीठ ने जो विनिश्चय प्रतिपादित किया है उसके आधार पर उत्तरांचल से लेकर पश्चिम बंगाल तक जहां से होकर गंगा गुजरती हैं कहीं भी मनुष्यों की लाशें व मरे हुए पशुओं को प्रवाहित नहीं किया जा सकता। किंतु वाराणसी जो स्वयं प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है तथा विश्व की पौराणिक व धार्मिक शहर के रूप में जिसकी मान्यता है, वहां की गंगा नदी में मनुष्य की लाशों का प्रवाह तो होता ही है पशुओं को भी बिना किसी रोक-टोक के प्रवाहित किया जाता है। जिस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगानी चाहिए तथा जिम्मेदार नगर निगम वह अन्य लोकसेवकों पर सुसंगत धाराओं में अपराध पंजीकृत कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा है यदि ऐसा नहीं होता है तो हम पूरे वीडियो फुटेज के साथ माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

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मुख्यमंत्री ने वाराणसी में शहर के 10 गरीब परिवारों को निःशुल्क घरेलू विद्युत संयोजन प्रमाण पत्र वितरित किए

Posted on 03 July 2017 by admin

press-61काशी के प्रत्येक घर में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन
करने वाले शत-प्रतिशत परिवारों को निःशुल्क
विद्युत कनेक्शन दिया जाए: मुख्यमंत्री

समय निर्धारित कर युद्वस्तर पर अभियान चलाकर बी0पी0एल0
परिवारांे को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिए जाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने ग्राम सभा ककरहिया में सौर ऊर्जा से चलने वाले गांधी चरखे
को 5 महिलाओं को प्रदान किया, चरखे से 350 लोग लाभान्वित किए गए

मुख्यमंत्री ने 5 स्कूली बच्चों को ड्रेस एवं जूते-मोजे का वितरण भी किया

जयापुर, नागेपुर के बाद तीसरे ग्राम सभा के रूप में प्रधानमंत्री जी द्वारा ग्राम सभा ककरहिया का चयन सांसद आदर्श ग्राम के रूप में किया गया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने काशी के प्रत्येक घर में बिजली पहुंचाए जाने पर जोर देते हुए कहा कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले शत-प्रतिशत परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिया जाए। उन्होंने इसके लिए समय निर्धारित कर युद्वस्तर पर अभियान चलाकर बी0पी0एल0 परिवारांे को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने 2 अक्टूबर तक काशी को खुले में शौचमुक्त किए जाने के अभियान की भांति ही, काशी के गरीबों सहित शत-प्रतिशत घरों में विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित कराने जाने पर जोर दिया। press-3
मुख्यमंत्री जी आज सर्किट हाउस वाराणसी में शहर के 10 गरीब परिवारों को निःशुल्क घरेलू विद्युत संयोजन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 7 लाख परिवारों के पास विद्युत कनेक्शन नहीं हैं, जो किसी भी दशा में उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश के शत-प्रतिशत परिवारों के घरों में विद्युत की उपलब्धता हो, यह उनकी सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे गरीब परिवार जो विद्युत कनेक्शन लेने में असमर्थ रहे, उन गरीब परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने विद्युत चोरी करने वालो पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह वैध विद्युत कनेक्शन प्राप्त कर विद्युत बिलों का नियमित भुगतान करने वाले लोगों के अधिकार पर डाका है।
योगी जी ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में 48 एवं शहरी क्षेत्र में 24 घण्टे में जले एवं खराब ट्रांसफाॅर्मरो को बदलने के निर्देश विद्युत विभाग को दिए गए हैं। साथ ही, वर्तमान सरकार के 100 दिनों में प्रदेश में 8000 से अधिक विद्युत ट्रांसफाॅर्मर निर्धारित 48 एवं 24 घण्टे में बदले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग में नई कार्य संस्कृति स्थापित की जा रही है। गरीब परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन विद्युत अधिभार का भुगतान उन्हें ही करना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने अपने 100 दिनों के कार्यकाल में विद्युत आपूर्ति एवं व्यवस्था में हुए सुधार पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकांत शर्मा सहित विद्युत विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। उत्तर प्रदेश के उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने विद्युत विभाग के वर्तमान सरकार की 100 दिनों में किये गये उपलब्धि पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने इन्द्रपुर शिवपुर के कांशीराम आवास निवासिनी आशा देवी, इन्द्रपुर शिवपुर के कांशीराम आवास निवासिनी पनामा देवी, इन्द्रपुर शिवपुर के कांशीराम आवास निवासिनी समुन्द्रा देवी, इन्द्रपुर शिवपुर के कांशीराम आवास निवासिनी मीना देवी, सलारपुरा निवासिनी भागीरथी सोनकर, राजघाट निवासिनी निर्मला देवी, घसियारी टोला निवासिनी शंकर यादव, रेवड़ी तालाब निवासिनी रानी अंसारी, शिवदासपुर निवासिनी माला देवी एवं हरिजन बस्ती शिवदासपुर निवासिनी शीला देवी को निःशुल्क घरेलू विद्युत संयोजन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया।
योगी जी द्वारा रविवार को सर्किट हाउस में गरीबों को निःशुल्क घरेलू विद्युत संयोजन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराये जाने के दौरान शिवदासपुर निवासिनी माला देवी के गोद का बच्चा अचानक तेज-तेज रोने लगा। तभी अधिकारी हलकान होने लगे और अधिकारियों को परेशान देख मुख्यमंत्री ने बच्चे को अपने पास बुला लिया और जेब से निकालकर एक टाॅफी बच्चे की ओर बढ़ाई। फिर क्या था, बच्चा अचानक चुप हो गया और यह घटना लोगों में कौतुहल और आश्चर्य का विषय बन गई।
मुख्यमंत्री जी ने काशी विद्यापीठ विकास खण्ड के ग्राम सभा ककरहिया में हथकरघा विभाग द्वारा आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में सौर ऊर्जा से चलने वाले गांधी चरखे को 5 महिलाओं को प्रतीक स्वरूप वितरित किया। इससे 350 लोगों को लाभान्वित किया गया। साथ ही, उन्होंने 5 बच्चों को भी प्रतीकात्मक रूप से स्कूली ड्रेस एवं जूते-मोजे का वितरण किया तथा अन्य सभी बच्चों को वितरित किए जाने के निर्देश भी दिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री जी ने पौधरोपण भी किया।
इस अवसर पर योगी जी ने बताया कि गांवों के स्वावलम्बन के लिए प्रधानमंत्री जी ने देश के सभी सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में तीन-तीन गांवों को गोद लेने के लिए कहा था। इसी क्रम में जयापुर, नागेपुर के बाद तीसरे ग्राम सभा के रूप में देश के प्रधानमंत्री जी एवं वाराणसी के सांसद श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा काशी विद्यापीठ विकास खण्ड के ग्राम सभा ककरहिया का चयन सांसद आदर्श ग्राम के रूप में किया गया है। इसके लिए उन्होंने ग्रामवासियों को बधाई दी और प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जी ने गांवों में शहर की तरह सुविधा मुहैया कराकर स्मार्ट गांव की परिकल्पना साकार करने का सपना देखा है।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकांत शर्मा, नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अनिल राजभर, सूचना राज्य मंत्री डाॅ0 नीलकंठ तिवारी, जनप्रतिनिधिगण, प्रमुख सचिव सूचना एवं पर्यटन श्री अवनीश कुमार अवस्थी सहित शासन-प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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सड़क के किनारे कट रहे हजारों वृक्षों का प्लांटेशन कराएं

Posted on 20 June 2017 by admin

सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर कैथी  व चद्रावती के बीच बरगद के वृक्ष में रस्सी बांधकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक फांसी लगाया। प्रदेश और केंद्र सरकार को चेतावनी दिया कि सड़क के किनारे कट रहे हजारों वृक्षों का प्लांटेशन कराएं।
प्रतिकात्मक फांसी लगाने के साथ हुई सामाजिक कार्यकर्ता व पर्यावरण प्रेमी ब्रज भूषण दुबे ने कहा की उनके द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोर्टल पर इस आशय का निवेदन किया गया था कि वाराणसी से लेकर गोरखपुर तक सड़क के फोरलेन होने में जो वृक्ष बाधा उत्पन्न कर रहे हैं उनकी हत्या न करते हुए उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाए इस प्रकार की मशीनें आंध्रा केरल सहित अन्य प्रांतों में मौजूद ह ब्रज भूषण दुबे की शिकायत को पीएमओ पोर्टल पर दर्ज कर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजा गया जहां से निस्तारण हेतु वाराणसी के डीएफओ  को  शिकायत  भेज दी गई।  वाराणसी के प्रभागीय वनाधिकारी ने शासन को लिखा कि वृक्षों को प्रत्येक दशा में बचाया जाना चाहिए किंतु हमारे पास इस प्रकार की मशीनें नहीं हैं। यह शासन का नीतिगत मामला है। मशीनें उपलब्ध होने पर प्लांटेशन करा दिया जाएगा।
बट वृक्ष को रोपित करने वाले मान बाबा ने कहा कि एक वृक्ष की हत्या 100 मनुष्यों की जान लेने जैसे अपराध के बराबर है। सरकार पर्यावरण का संरक्षक न कर प्रदूषक की भूमिका निभा रही है।
आज प्रतिकात्मक तो एक महीने बाद सत्य रूप में लगाएंगे फांसी-
सामाजिक संस्था समग्र विकास इंडिया के कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि 20 जुलाई तक NH 29 के पेड़ों का प्लांटेशन नहीं कराया जाता है तो वाराणसी व गोरखपुर के बीच कहीं भी किसी वृक्ष की  डाली के बीच लटककर फांसी लगाया जा सकता है। शायद हमारे इस कृत्य से प्रदेश व केंद्र सरकार की आंखें खुल जाए।
उक्त अवसर पर अंशु पांडे, मनोज तिवारी,  मान बाबा, शिवचरण यादव आदि लोग थे।

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काशी की धरोहर असि नदी के पुनर्जीवन में प्रशासन को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे जन संघटन

Posted on 09 May 2017 by admin

काशी की धरोहर असि नदी की मुक्ति और पुनर्जीवन के लिए जनता की तरफ से कुछ व्यवहारिक सुझाव लेकर साझा संस्कृति मंच एवं असि नदी मुक्ति अभियान के कार्यकर्ताओं ने आज मंडलायुक्त को एक सुझाव पत्र दिया. गत दिनों इन प्रतिनिधियों से एक मुलाकात के दौरान मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने सुझाव आमंत्रित किये थे. पत्रक में कहा गया कि काशी के पर्यावरणीय मुद्दों पर आपसे दिनांक 24 अप्रैल को हुयी मुलाक़ात के दौरान आपने असि नदी के पुनर्जीवन के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव आमंत्रित किये थे, उस क्रम में निम्न सुझाव है

1. ‘असि’ में मलजल और औद्योगिक अवजल का गिरना तत्काल रोका जाय, केवल शोधित किया हुआ जल ही असि में जाने दिया जाय.

2. उद्गम स्थल कन्दवा तालाब से असि संगमेश्वर तक सभी जलस्रोतों (कुएं और तालाब) को पुनर्जीवित किया जाय. कर्दमेश्वर तालाब,कंचन पुर ताल,कन्दवा पोखरा,और अन्य असि नदी के प्रवाह क्षत्र के कूप,बावली ,तालाब की सफाई करा दी जाय तो उसमें स्वच्छ जल प्रवाह का संकट स्वतः समाप्त हो जायेगा ।

3. जिस स्थान पर असि की चौड़ाई अधिक है वहां किनारे पर हरित पट्टी एवं पार्क का विकास किया जाय.

4. गंगा से लिफ्ट पम्प से पानी उठाकर असि उद्गमस्थल पर नियमित सप्ताह में कम से कम दो बार छोड़ा जाय.

5. असि में स्थान स्थान पर चेक डैम बना कर पानी को क्रमशः उतरने दिया जाय.

6. असि में अस्थायी अतिक्रमण हटाया जाय तथा नया अतिक्रमण न होने दिया जाय.

प्रतिनिधिमंडल ने असि के पुनर्जीवन की दिशा में किये जा रहे प्रत्येक सार्थक प्रयास का भरपूर सहयोग करने का भी आश्वासन दिया.

इस क्रम में ज्ञातव्य है कि इन संगठनों द्वारा विगत कई रविवार को प्रातः असि नदी के प्रवाह क्षेत्र में साप्ताहिक श्रमदान कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है इस क्रम में 7 मई रविवार को अस्सी के निकट सहोदर वीर पुलिया के पास श्रमदान किया जाएगा.

प्रतिनिधिमंडल में डा आनंद प्रकाश तिवारी, जागृति रही, वल्लभाचार्य पाण्डेय, डा अनूप श्रमिक, रवि शेखर, धनज्जय त्रिपाठी, विनय सिंह, महेंद्र कुमार, दिवाकर, मुकेश उपाध्याय, लक्ष्मण, दीन दयाल, फादर दयाकर आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे.

भवदीय

साझा संस्कृति मंच

वाराणसी

सम्पर्क : 9839058528 (डा आनंद तिवारी)

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वाराणसी में फेरी पटरी व्यवसायियों का उत्पीडन रोकने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल द्वारा एसएसपी से अपील की गयी

Posted on 09 May 2017 by admin

पथविक्रेता आजीविका संरक्षण अधिनियम 2014 की व्यवस्था के अनुरूप कार्यवाही की मांग की गयी

आज साझा संस्कृति मंच से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेशनल हाकर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आज वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच कर प्रभारी अधिकारी से मिला और उन्हें इस छोटे व्यापारियों की समस्या से अवगत कराते हुए इनके साथ क़ानून की व्यवस्था के अनुरूप न्याय की गुहार की.

ssp-officeज्ञापन में कहा गया कि देश मे 4 मार्च 2014 को पथविक्रेता ( आजीविका का संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम 2014 लागू कर रेहडी पटरी खोमचे वालो के आजीविका की सुरक्षा एवं पुलिस के उत्पीड़न से निजात दिलाते हुए सम्मान पूर्वक रोजगार का अधिकार दिया गया है।

उक्त अधिनियम के अनुपालन मे परियोजना अधिकारी (डूडा) के अध्यक्ष जिलाधिकारी महोदय एवं नगर आयुक्त महोदय के संयुक्त प्रयास से 12 नवम्बर 2014 को टाउन वेन्डिग कमेटी बनाई गयी है, उक्त कमेटी के अध्यक्ष, नगरायुक्त महोदय नामित है। उक्त कानून के परिप्रेक्ष्य मे नगरनिगम एवं डूडा के माध्यम से वाराणसी मे 24472 वेन्डरो का सर्वे भी हो चुका है। उक्त अधिनियम मे स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सर्वे किये गये वेन्डरो को व्यवस्थित किया जाय और जब तक व्यवस्थित नही किया जाता तब तक उनको बेदखल /स्थानांतरित नही किया जायेगा।

पुलिस लंका थाना ने 23 मार्च को 150 सर्वे वेन्डरो को लंका-बीएचयू मुख्य रोड व लंका-ट्रामा सेंटर बीएचयू रोड से हटा दिया जिससे इन दुकानदारो के घर मे चुल्हे नही जल रहे है उनके बच्चे भूख से बिलबिला रहे है तथा उनके बच्चो की पढाई लिखाई बन्द है, वे सपरिवार भूखमरी के कगार पर है।

ज्ञातव्य है कि गुमटी व्यवसायी कल्याण समिति और नेशनल हॉकर्स फेडरेशन ने इस सम्बन्ध में दिनॉक 24 मार्च वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी, नगर आयुक्त नगर निगम, साँसद जनसम्पर्क कार्यालय, कमिश्नर वाराणसी, आईजी. पुलिस वाराणसी और माननीय नगर विकास मंत्री यूपी को पत्रक देकर वेंडरों की आजीविका सुनिश्चित और नियोजित करने की मॉग भी की है किन्तु कोई न्याय नही मिला

विगत 2 मई 2017 को गुमटी व्यवसाइयों के संदर्भ में एक बैठक अपर नगर आयुक्त नगर निगम, एसीएम-प्रथम, डूडा परियोजना अधिकारी और सीओ भेलूपुर, लंका थानाध्यक्ष, स्थानीय पार्षद श्री सोनू सेठ, बीएचयू छात्रों और टाउन वेंडिंग कमिटी सदस्य वेंडर चिंतामणि सेठ के साथ हुई है। इस बैठक में भी पटरी दुकानदारों की आजीविका के प्रति संवेदना और राष्ट्रीय फेरी पटरी कानून 2014 को संदर्भ लिया गया और सम्मानित अधिकारियो द्वारा सुझाव दिया गया कि वेंडरों और शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से कोई प्रतिनिधिमंडल आदरणीय एसएसपी साहब से मिले तो ही इस समस्या का कोई समुचित हल निकल पाएगा

उक्त आलोक में आज सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एसएसपी कार्यालय में उनके प्रतिनिधि से मिल कर पटरी दुकानदारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति और उनकी पारिवारिक जरूरतों और विकल्पहीनता को ध्यान में रखते हुए उनके स्वावलम्बी होने को न्यायोचित और मानवीय रास्ता राष्ट्रीय फेरी नीति कानून के आलोक में निकालने का अनुरोध किया.

प्रतिनिधिमंडल में डा आनंद प्रकाश तिवारी, दिवाकर, फादर आनंद, धनञ्जय त्रिपाठी, चिंतामणि सेठ, वल्लभाचार्य पाण्डेय, जागृति राही, ड़ा अनूप श्रमिक, राम जनम भाई, लक्ष्मण प्रसाद, रविशेखर आदि शामिल रहे.

भवदीय

साझा संस्कृति मंच

वाराणसी

संपर्क 7376848410 (धनंजय)

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फेरी पटरी कानून 2014 के उल्लंघन और दुकानदारों के उत्पीड़न के खिलाफ नगर निगम सिगरा कार्यालय का हुआ घेराव। उत्पीड़न बंद करो और वेंडर कानून लागु करने के लगे नारे

Posted on 21 April 2017 by admin

बनारस के ठेला पटरी दुकानदारों ने फेरी पटरी कानून 2014 लागु न होने एवं उत्पीड़न के प्रतिरोध में नगर निगम कार्यालय सिगरा वाराणसी का जोरदार घेराव किया। पूर्व सुचना के अनुसार सुबह 9 बजे से नगर निगम मुख्यद्वार पर पटरी दुकानदार जमा होने लगे और 10 बजते बजते अच्छी संख्या में पथ विक्रेता नगर निगम गेट पर घेराव कर दिए। घेराव के साथ ही दुकानदारों ने सभा शुरू किया और कहा की 2014 में एक लम्बे क़ानूनी और जमीनी लड़ाई के बाद आया हुआ फेरी पटरी कानून हम वेंडरों के लिए आशा की किरण लेकर आया था बाकि कानून बनने के बावजूद न तो हमारी कोई व्यवस्था हुई और न ही कोई सरकार हमें पूछने आई। बाकी पुलिस और नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते के अधिकारी उसी तरह दबाव , धमकी और उत्पीड़न करते रहे। यूपी चुनाव के कुछेक महीनो पहले कोई कम्पनी अख़बार के माध्यम से सामने आई की उसे सरकार की ओर से सर्वेक्षण के लिए नामित किया गया है और यह संस्था डूडा के सहयोग से काम करेगी। आनन् फानन में शहर में वेंडिंग जोन भी कागज़ी खाना पूर्ति कर बना दिए गए।  शहर के प्रबुद्ध समाजसंघर्ष कर्ताओ और फेरी पटरी दूकान समितियो के आपत्ति दर्ज कराने पर पथ विक्रेता समिति ( टाउन वेंडिंग कमिटी ) की बैठक करके सब काम लीपापोती किया गया।  जबकि कानून कहता है जिले के आला अधिकारियो की उपस्थिति में नगर निगम के नेतृत्व में शहर के चुने हुए पथ विक्रेता और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से बनी टाउन वेंडिंग कमिटी सर्वे लाइसेंसिकरण पहचानपत्र देने से लेकर वेंडिंग जोन से लेकर नो वेंडिंग जोन का निर्धारण करेगी। बाकी पैसो का  अनाप शनाप खर्च ( जिसके बारे में नगर निगम और डूडा दोनों ही आरटीआई के तहत भी जवाब नहीं दे रहे है) किया गया है। पथ विक्रेता समिति सदस्य (TVC ) बतौर लंका फेरी पटरी समिति की ओर से चिंतामणि सेठ लगातार इस काम में धांधली का अंदेशा जता रहे थे बाकी उनकी सुनी नहीं गयी। सरकार बदली और पूर्व में हुए सर्वे और सभी कवायदों को ताक पर रखते हुए पुलिस भेज कर लाठी के जोर पर बाजारों को साफ़ करवाया जाने लगा। नगर विकास मंत्री,  मंडलायुक्त , जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान से लेकर नगर निगम आदि सभी सम्भव दरवाजो पर एडिया रगड़ के पथ विक्रेता तंग आ चुके है और पिछले 23 मार्च से लँका पर दुकाने बंद होने की वजह से सपरिवार बी भुखमरी के कगार पर है और इन वजहों से सिवाय आंदोलन के कोई विकल्प शेष नहीं है और यह घेराव उसी प्रतिरोध दर्ज करने की , अपना   आक्रोश व्यक्त करने की एक जुगत मात्र है। पूर्वसूचना के साथ पंहुचे पटरी व्यवसाइयों के पास नगर आयुक्त स्वयं मिलने नहीं आए और अचानक से बीच सभा में अपने कार्यालय से निकले और बिना बात किए ही जाने को हुए तो मुख्यद्वार फेरी पटरी दुकानदारों द्वारा जाम किए जाने से खफा भी हो गए और फिर लगातार वेंडर कानून लागू करो ! हम अपना अधिकार माँगते नहीं किसी से भीख माँगते ! आवाज़ दो ! हम एक है !!  और लड़ेंगे जीतेंगे के नारो के बीच कार से निकलकर धरना स्थल पर आए और ज्ञापन लिया। प्रतिवादी स्वर की उग्रता भाप कर हम सब के बीच आये,लेकिन तेवर वही था । पटरी दुकानदारों , साझा संस्कृति मञ्च के समाजसंघर्ष कर्मियों और बीएचयू छात्रों के तेवर को देख बातचीत के स्तर पर आए और जटिल व्यवस्था का हवाला देकर नगर आयुक्त जी कहे की ” पटरी दुकानदारों को हटाने में नगर निगम की कोई भूमिका नहीं है और न ही हम लोगो से कोई सलाह भी लिया गया है।  घेराव कर रहे लोगो में आस्चर्य था की शहर के संचलन को मुख्य जिम्मेदार संस्था नगर निगम से बिना बात किए इतना बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान और वेंडरों का उत्पीड़न एक केंद्रीय कानून को ताक कर शहर में कैसे चल रहा है ? डीएम मंडलायुक्त के साथ महत्वपूर्ण बैठक का हवाला देते हुए जाने की अनुमति चाहे साथ ही मण्डलायुक्त,जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियो से समस्या समाधान की बात कर कल तक सूचित करने की बात कही ।

नगर आयुक्त के आश्वाशन पर आंदोलन /घेराव एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। लेकिन वेंडरों के बीच सवाल वैसे ही पड़ा हुआ रहा की 2014 के कानून पर अमल क्यों नहीं हुआ आज तक और गत 23 मार्च सेलँका पर जो पटरी व्यवसायी गैर क़ानूनी प्रशासनिक गुंडई से हटाए गए है उनका पेट कैसे भरेगा उनकी रोजी रोटी कैसे चलेगी ?
घेराव व जनसभा में मुख्य रूप से चिंतामणि सेठ,सोनू सोनकर पार्षद ,एस पी राय, डॉ.आनन्द प्रकाश तिवारी,संजीव सिंह,धनन्जय त्रिपाठी,प्रेम सोनकर,अनूप श्रमिक,दिवाकर,विनय सिंह , रामजन्म, राजेश्वरी देवी, मुन्नी , बसंत , रिंकू सेठ, बाबू सोनकर ,सूरज ,राजेश, रेशमी,हीरावती रामजी अदि शामिल थे ।

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वाराणसी को स्वच्छ सुन्दर और हरा भरा बनाने के लिए सचेत सामाजिक संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से श्भू सेवा जल सेवा अभियान 2015श् का संचालन किया जा रहा

Posted on 17 July 2015 by admin

वाराणसी को स्वच्छ सुन्दर और हरा भरा बनाने के लिए सचेत सामाजिक संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से श्भू सेवा जल सेवा अभियान 2015श् का संचालन किया जा रहा हैण् इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न सरकारी विभागों से लगातार संपर्क कर उन्हें वाराणसी को प्रदूषणमुक्त किये जाने की दिशा में सुझाव दिए जा रहे हैं
साथ ही शहर के विभिन्न इलाकों में जन चेतना रलियों का आयोजन किया जा रहा है इस क्रम में आज वाराणसी शहर में नदेसर इलाके में पर्यवरण चेतना रैली के द्वारा जन संपर्क किया गयाण् रैली के प्रारंभ होने से पूर्व वरुनापुल के निकट पर हुयी नुक्कड़ सभा में आयोजको ने कहा काशी नगरी में हो रहे विकास के क्रम में एक तरफ
तेजी से यहाँ की हरियाली गायब होती जा रही है वहीँ दूसरी ओर बढती जनसंख्या के कारण प्रदूषण भी बढ़ता ही जा रहा हैए आज वाराणसी में बहने वाली नदियांए कुंडए तालाब आदि संकट के दौर से गुजर रहे हैंए ऐसे में धीरे धीरे यहाँ का वातावरण स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल होता जा रहा हैण् इस भयानक स्थिति को सुखद बनाने के
लिए नगर निगमए जिला प्रशासनए वन विभाग उद्यान विभाग के साथ साथ  आम नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगाण्  वक्ताओं ने बताया की विभिन्न विभागों से संपर्क कर उन्हें कुछ महत्व पूर्ण सुझाव दिए गए हैं जिनमे एक प्रमुख सुझाव यह है कि फ्लाई ओवर के नीचे की खली पड़ी झग को नर्सरी संचालकों को
आसान शर्तों पर उपलब्ध करा कर वहां शोभाकार पौधों की बिक्री के लिए प्रेरित किया जाय इससे लोग स्वयं भी घरों में पौधे लगाने के लिए आगे आयेंगे और इस स्थान पर स्वाभाविक हरियाली हो जायेगीण् वक्ताओं ने कहा की बड़ी दुखद बात है की आज हम घरों में भी प्लास्टिक के पौधे गमले में लगा कर रख रहे हैं यह पर्यावरण
के लिए निराशाजनक संकेत हैण् घरों में तुलसी ए गुलाबए बेलाए कामिनी आदि के पौधे गमलों में बड़ी सुलभता से लगाये जा सकते हैंण्

इस अवसर पर स्थान स्थान पर आयोजित नुक्कड़ सभा  और पर्यावरण चेतना रैली में  अभियान  के संयोजक फादर आनंद ने लोगों से अपील की  कि  गंगाए वरुणा और असि नदियोंए कुंडों और तालाबों में किसी भी प्रकार का प्रदूषण न करें और दूसरों को भी इसके लिए रोकेंण् सडकों के किनारेए पार्कए मैदानए विद्यालयए
कालोनी आदि में खाली स्थानो पर पौधरोपण करें और पौधों को सुरक्षित रखेंए इस कार्य के लिए इच्छुक लोगों को जो पोधों की सुरक्षा करने में सक्षम होंगे अभियान की तरफ से पौधरोपण के लिए पौधे और टेरेस और बालकनी में सब्जियां उगाने के लिए मार्गदर्शन निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा हैण् पर्यावरण के प्रतिकूल पोलीथिन और
प्लास्टिक का उपयोग करना बंद करें बाजार से सामान लाने के लिए कपड़े का झोला साथ लेकर जाएँण् रैली के दौरान नदेसर पर स्वामी विवेकानंद स्मारक के सामने वाले पार्क को पालीथीन और कचरा मुक्त करके उसमे खाली स्थान पर शोभाकार पौधे लगाये गयेए कुछ पौधे इच्छुक लोगो और दुकानदारों को भी वितरित किये गयेण्

चेतना रैली में ष्किरण सेंटरष् के बच्चों और राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े छात्रों ने बढ़ चढ़ का हिस्सा लिया और स्टीकरए प्ले कार्डए पर्चे और गीतों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए चैतन्य होने की अपील कीण् प्रेरणा कला मंच के कलाकारों ने पर्यावरण को समृद्ध करने का सन्देश देते
हुए गीतों को प्रस्तुत कियाण् इस अभियान में प्रमुख रूप से विश्व ज्योति जन संचार समितिए आशा ट्रस्टए विकास एवं शिक्षण समितिए देव एक्सेल फाउन्डेशनए किरण संसथान और जन विकास समिति आदि संस्थाएं सहयोग कर रही है कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विनय सिंहए शिवांग शेखर ए शुभम
सिंहए जनार्दन राय ए फादर मारिया दासए पिंटूए  वल्लभाचार्य पाण्डेयए  डा राजेश श्रीवास्तवए नन्दलाल मास्टरए सूरज पाण्डेयए प्रदीप सिंहए राजकुमार पटेलए मुकेश झांझरवाला ए दिनेशए प्रज्ञान सिंहए विजयए उषाए ममता आदि सहित किरन संस्था के विशेष योग्यता वाले लगभग 35 बच्चे शामिल थेण्

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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आचार्य नरेन्द्र देव स्मृति भू-अधिग्रहण बिल 2015 विरोधी पदयात्रा

Posted on 23 March 2015 by admin

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से काशी विद्यापीठ तक छात्रों-प्रोफेसरों-नागरिकों की पदयात्रा
नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा अपने विवादास्पद भू-अधिग्रहण अध्यादेश, 2014, में नौ संशोधनों के तथा 13 ऐसे कानूनों को भू-अधिग्रहण बिल के अंतर्गत लाना जिनके तहत भू-अधिग्रहण हो सकता है लेकिन वे पहले बाहर रखे गए थे के बावजूद इस बिल का मूल चरित्र किसान विरोधी ही बना हुआ है। इसलिए हम तमाम जन संगठन, राजनीतिक दल व छात्र, प्रोफेसर व नागरिक इसका विरोध करते हैं और मांग करते हैं निम्न कारणों से इसे अस्वीकृत किया जाए।

ऽ    भले ही सरकार अपने लिए ही भूअर्जन करे किंतु 70 प्रतिशत किसानों की सहमति के प्रावधान को खत्म करना गलत है।
ऽ    बिना सामाजिक प्रभाव आंकलन के भू-अधिग्रहण नहीं होना चाहिए।
ऽ    स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा रहा है कि सिंचित बहुफसली जमीन अधिग्रहित नहीं की जाएगी, जो खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है।
ऽ    प्रत्येक विस्थापित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात पहले भी रही है किंतु भारत में अभी तक किस परियोजना में ऐसा हुआ है? जो बात कही नहीं जाती वह है कि योग्यता होने पर हीे नौकरी मिलेगी।
ऽ    पांच साल तक भूमि का कोई उपयोग न होने पर वह किसान को लौटा दी जाएगी को संशोधन में शामिल नहीं किया गया है।
ऽ    औद्योगिक गलियारे के नाम सड़क या रेल लाइन के दोनों तरफ 1 कि.मी. भूमि जो कितना भी लम्बा हो सकता है ली जा सकती है।
ऽ    सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश कि मुआवजा न्यायालय में या बैंक खाते में दिया जाए अब अनिवार्य नहीं है।
ऽ    यदि कोई अधिकारी कुछ गलत करता है तो उसके विभाग की अनुमति के बगैर उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो सके इस प्रावधान को भी शामिल नहीं किया गया है।

यानी सरकार ने अधिनियम में सुधार के नाम पर इसे और जन विरोधी बना दिया है। यदि सरकार को जमीन चाहिए ही तो पहले से अधिग्रहित जमीन, विशेष आर्थिक क्षेत्र के नाम पर अधिग्रहित जमीन, बंद पड़े उद्योगों की जमीन, रेल, सेना व अधिकारियों के अंग्रेजों के जमाने में बने बंगलों की अतिरिक्त जमीनें पहले ली जाएं।

किसान विरोधी भू-अधिग्रहण बिल को वापस करवाने की मांग को लेकर आचार्य नरेन्द्र देव, जो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय व काशी विद्यापीठ दोनों के ही कुलपति रहे, की स्मृति में एक पदयात्रा का आयोजन किया गया।

इस यात्रा में गुमटी व्यवसायी कल्याण समिति, साझा संस्कृति मंच, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय, लोक समिति, प्राकृतिक कृषि अभियान, इंडियन पीपुल्स फ्रंट, भगत सिंह छात्र मोर्चा, समाजवादी जन परिषद, सोशलिस्ट छात्र सभा, सोशलिस्ट किसान सभा व सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के सदस्यों और आम छात्र, प्रोफेसरों व नागरिकों ने भाग लिया। उन्नाव जिले से सोशलिस्ट किसान सभा के प्रदेष संयोजक अनिल मिश्र विषेष रूप से इस यात्रा में भाग लेने आए थे।

अनिल मिश्र ने कहा कि किसान की जिदंगी बद से बदत्तर होती जा रही है। उसकी जमीन को छीनना उसकी आजादी के साथ खिलवाड़ है। वर्तमान सरकार अंग्रजों के जुल्म को भी पीछे छोड़ना चाहती है। किसान तो पहले से ही पीडि़त है। उसको अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलता, खाद, पानी मिलने में दिक्क्त आती है, प्रकृति के प्रकोप का शिकार बनता है और कर्ज न चुका पाने पर आत्महत्या भी कर लेता है। जिस विकास में किसान की भागीदारी होनी चाहिए वह उसकी कीमत पर क्यों किया जाना जरूरी है?

काषी विद्यापीठ के प्रोफेसरों राम प्रकाष द्विवेदी, अनिल उपाध्याय, संजय, रमन पंत व काषी हिन्दू विष्वविद्यालय से डाॅ. संदीप पाण्डेय ने इस आयोजन में भाग लिया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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