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Archive | साहित्य

सुरेन्द्र अग्निहोत्री को ज्ञानाश्रम सरस्वती शक्ति पीठ सम्मान सम्मानित किया गया

Posted on 22 January 2018 by admin

img-20180122-wa0007झांसी ।मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, डा.रवीन्द्र शुक्ला पूर्व शिक्षा मंत्री तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन के हाथों से झांसी के राजकीय संग्रहालय के सभागार में वसंत पंचमी महोत्सव के अवसर विश्व मानव संघ, ज्ञानाश्रम सरस्वती शक्ति पीठ की ओर से पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योग्यदान के लिए लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हमारे व्यूरो प्रमुख सुरेन्द्र अग्निहोत्री को ज्ञानाश्रम सरस्वती शक्ति पीठ सम्मान सम्मानित किया गया है img-20180122-wa0005

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भाषा परस्पर संवाद का एक सशक्त माध्यम: मुख्यमंत्री

Posted on 19 January 2018 by admin

साहित्य का अर्थ ही सबका हित भाषाएं भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप होती हैं

तकनीकी शिक्षा को मातृ भाषा में उपलब्ध कराने के लिए शोध कार्यों में समयानुरूप परिवर्तन की जरूरत

साहित्य के माध्यम से ही राष्ट्र, समाज व संस्कृति के दृष्टिकोण को जाना जा सकता है

मुख्यमंत्री दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में राष्ट्र, समाज एवं संस्कृति’ के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए

लखनऊ: 19 जनवरी, 2018press-141
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि भाषा परस्पर संवाद का एक सशक्त माध्यम है। भाषा पर मौलिक चिंतन होना आज की आवश्यकता है। आदिकाल से सांस्कृतिक इकाई के रूप में भारत की एक विशिष्ट पहचान रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय एकता की जड़ें भी हमें साहित्य में देखने को मिलती हैं। साहित्य का अर्थ ही सबका हित है। समाज की समस्याओं का निराकरण भी साहित्य में निहित है।
मुख्यमंत्री जी ने यह विचार आज यहां भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान व बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में राष्ट्र, समाज एवं संस्कृति’ के समापन कार्यक्रम के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र, समाज व संस्कृति भारतीय साहित्य के मूल में है। इसलिए भाषा पर मौलिक चिंतन करते हुए भाषाओं पर कार्य योजना बनाकर शोध करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारतीय साहित्य समेकित संस्कृति, सामाजिक संचेतना एवं राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत है। हमारे साहित्य में भारत राष्ट्र का एक विराट भूगोल चित्रित हुआ है। प्रत्येक भाषा-बोली के रचनाकारों ने इस धरती को भारत माता के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने कुम्भ मेले का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां आने वाले श्रद्धालु विभिन्न राज्यों से आते हैं, जिसमें हमें राष्ट्रीय भावना की छवि दिखायी देती है। press-221
योगी जी ने विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों से आह्वान किया कि अब आवश्यकता है कि तकनीकी शिक्षा भी मातृ भाषा में उपलब्ध हो, इसके दृष्टिगत हमें अपने शोध कार्यों में समयानुरूप परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाषाएं भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप होती हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य के माध्यम से ही हम किसी भी राष्ट्र, समाज व संस्कृति के दृष्टिकोण को जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य सुखान्त होता है, जबकि विदेशी साहित्य का केन्द्र बिन्दु दुखान्त होता है। इससे पता चलता है कि हमारी मानसिकता सकारात्मक है।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ0 राज नारायण शुक्ल ने कहा कि भाषा संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं की संचेतना एक है। अध्यक्षीय उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 आर0सी0 सोबती ने किया।
इस अवसर पर विभिन्न भाषाओं के विद्वान, अध्यापकगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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इन्डोनेशिया में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव सम्पन्न, सम्मानित हुईं लखनऊ की दस विभूतियाँ

Posted on 18 January 2018 by admin

विगत विश्व हिन्दी दिवस यानी 10 जनवरी 2018 को इंडोनेशिया की सांस्कृतिक राजधानी बाली में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव का आगाज हुआ, जिसका समापन समारोह 14 जनवरी 2018 को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर पचास साहित्यकारों, पत्रकारों, टेक्नोक्रेटो, संस्कृतिकर्मियों के हुये सरस्वत सम्मान के क्रम में लखनऊ की दस विभूतियों का सम्मान किया गया, जिसमें हिन्दी के प्रमुख ब्लॉगर एवं वरिष्ठ साहित्यकार रवीन्द्र प्रभात, अवधी लोकगायिका कुसुम वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ मिथिलेश दीक्षित, सत्या सिंह हुमैन, समाज सेविका कनक लता गुप्ता, योग विशेषज्ञ डॉ॰ उदय प्रताप सिंह, शिक्षाविद कैलाश चन्द्र जोशी, रेवान्त पत्रिका की संपादक लखनऊ निवासी डॉ॰ अनीता श्रीवास्तव तथा हिन्दी विकिपीडिया की प्रबन्धक माला चैबे प्रमुख रहे। img-20180117-wa0302
बहुत सारे कार्यक्रमों का साक्षी बना यह उत्सव। इस अवसर पर लोकार्पित हुयी 18 हिन्दी पुस्तकों में से लखनऊ की डॉ॰ मिथिलेश दीक्षित की छः पुस्तकें तथा रवीन्द्र प्रभात के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित डॉ॰ सियाराम की शोध पुस्तक ‘‘रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म‘‘ प्रमुख रही।
डॉ॰ राम बहादुर मिश्र के संचालन में इलाहाबाद की रंगकर्मी डॉ॰ प्रतिमा वर्मा द्वारा अभिनीत नाटक ‘‘एकाकीपन‘‘ की भावपूर्ण प्रस्तुति श्रोताओं का मन मोहने में सफल रही। इन्डोनेशिया के कलाकारों तथा इण्डोनेशियाई बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति तथा जकार्ता स्थित जवाहरलाल नेहरू भारतीय सांस्कृतिक परिषद के कलाकारों की हारमोनियम और तबले की युगलबंदी श्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक रही। जकार्ता के श्री केतन गुरु जी, लखनऊ की कुसुम वर्मा और गोंडा के शिव पूजन शुक्ल के द्वारा प्रस्तुत भजन और लोकगीत दुर्लभ प्रस्तुतियों में से एक रही।
हिन्दी उत्सव के दौरान परिकल्पना द्वारा छः भारतीय प्रतिभागियों को विशेष नगद पुरस्कार प्रदान किए गए, जिसके अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ आवाज के लिए अहमदाबाद की सुश्री अंकिता सिंह को डेढ़ लाख रुपये तथा सर्वश्रेष्ठ कविता के लिए आगरा की डॉ॰ सुषमा सिंह, सर्वश्रेष्ठ प्रणय गीत के लिए राय बरेली की डॉ॰ चम्पा श्रीवास्तव, सर्वश्रेष्ठ हास्य कविता के लिए कानपुर के डॉ॰ ओम प्रकाश शुक्ल ‘‘अमिय‘‘, सर्वश्रेष्ठ गजल के लिए बहराइच के डॉ॰ अशोक गुलशन और सर्वश्रेष्ठ लोकगीत के लिए गोंडा के डॉ॰ शिव पूजन शुक्ल को क्रमशः एक-एक लाख रुपये के नगद पुरस्कार प्रदान किए गए।
कवि सम्मेलन के दौरान रवीन्द्र प्रभात, ओम प्रकाश शुक्ल ‘‘अमिय‘‘, सत्या सिंह हुमैन, डॉ॰ अशोक गुलशन, डॉ॰ राम बहादुर मिश्र, डॉ॰ मिथिलेश दीक्षित, डॉ॰ सुषमा सिंह, डॉ॰ पूर्णिमा उपाध्याय, डॉ॰ माला गुप्ता, डॉ॰ पूनम तिवारी, डॉ॰ चम्पा श्रीवास्तव, डॉ॰ रमाकांत कुशवाहा कुशाग्र, डॉ॰ उमेश पटेल श्रीश, शिव पूजन शुक्ल, कुसुम वर्मा, राम किशोर मेहता, कैलाश चन्द्र जोशी आदि की कवितायें खूब सराही गयी।
समारोह की मुख्य अतिथि रहीं 2015 की मिस इन्डोनेशिया-इंडिया सुश्री ग्रेस वालिया तथा विशिष्ट अतिथि इंडो-इंडियन फ्रेंडशिप एसोशिएशन की अध्यक्ष सुश्री पूनम सागर, सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री लवलीन वालिया और जकार्ता स्थित साधु वासवानी सेंटर के प्रतिनिधि श्री केतन गुरु जी, जकार्ता स्थित आत्मा सेल्फ एक्स्प्रेशन की अध्यक्षा सुश्री शिल्पी धीरज शर्मा, इंडोनेशियन-इंडियन फ्रेंडशिप एसोसिएशन की अध्यक्षा सुश्री ऐश्वर्या सिन्हा और समस्त प्रस्तुतियों की संगीत निर्देशक जकार्ता निवासी सुश्री अर्चिता रॉय की प्रस्तुति उल्लेखनीय रही। विविधताओं से भरा यह सम्मेलन जीवन के अपने अलग-अलग रंगों में धड़कता दिखाई दिया दर्शकों को, अपने आप में अद्वितीय और अनुपम रहा यह उत्सव।

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इन्डोनेशिया में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव, लखनऊ की नौ सख्शियतें सम्मानित होंगी

Posted on 10 January 2018 by admin

आगामी विश्व हिन्दी दिवस यानी 10 जनवरी 2018 को इंडोनेशिया की सांस्कृतिक राजधानी बाली में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव का आगाज होने जा रहा है, जिसका समापन समारोह 14 जनवरी 2018 को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में सम्पन्न होगा। जकार्ता की संस्था साधू वासवानी सेंटर, इंडोनेशियन-इंडियन मैत्री संघ तथा आत्मा सेल्फ एक्स्प्रेसन के सह आयोजन में भारतीय संस्था परिकल्पना के सौजन्य से 10 से 14 जनवरी 2018 को बाली एवं जकार्ता में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में भारत तथा अन्य देशों के हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के आधिकारिक विद्वान, अध्यापक, लेखक, भाषाविद्, पत्रकार, टेक्नोक्रेट, हिंदी प्रचारक एवं संस्कृतिकर्मी भाग लेने जा रहे हैं। इस अवसर पर नगर की संस्कृतिकर्मी एवं अवधी लोकगायिका कुसुम वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ मिथिलेश दीक्षित, सत्या सिंह हुमैन, हिन्दी के प्रमुख ब्लॉगर लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात, समाज सेविका कनक लता गुप्ता, योग विशेषज्ञ डॉ॰ उदय प्रताप सिंह, शिक्षाविद कैलाश चन्द्र जोशी, रेवान्त पत्रिका की संपादक लखनऊ निवासी डॉ॰ अनीता श्रीवास्तव तथा हिन्दी विकिपीडिया की प्रबन्धक लखनऊ निवासी माला चैबे का इस मंच से सारस्वत सम्मान किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ‘‘विश्व हिन्दी दिवस‘‘ प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था तथा पहली बार 10 जनवरी 2006 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ॰ मनमोहन सिंह ने यह दिवस मनाया था। इसी कड़ी का अनुसरण करते हुये पूरे विश्व में 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस तथा इस सप्ताह को विश्व हिन्दी सप्ताह मनाया जाता है।
जकार्ता स्थित आत्मा सेल्फ एक्स्प्रेशन की संचालिका सुश्री शिल्पी धीरज शर्मा ने सूचित किया है, कि इस आयोजन में जवाहरलाल नेहरू इंडियन कल्चरल सेंटर के निदेशक श्री मकरंद शुक्ल, जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन श्री मनीष, जकार्ता स्थित इंडिया क्लब के चेयर परसन श्री राकेश जैन, इन्डोनेशियन-इंडियन मैत्री संघ की अध्यक्ष सुश्री ऐश्वर्या सिन्हा, खुश रहो जकार्ता संस्था के श्री तेज और साधु वासवानी सेंटर के प्रवक्ता श्री राकेश केतन मिश्र की उपस्थिती मात्र से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह आयोजन कितना भव्य और आकर्षक होगा। साथ ही इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव के सांस्कृतिक इवेंट्स की मुख्य अतिथि होंगी सुश्री ग्रेस वालिया। उल्लेखनीय है कि जकार्ता की सुश्री ग्रेस वालिया वर्ष 2015 की मिस इंडिया इंडोनेशिया रह चुकी हैं। पंजाबी मूल की यह युवती भारतीय और इन्डोनेशियाई समुदायों के बीच एक पुल के निर्माण की दिशा में सदैव अग्रणी रहती हैं।
इस उत्सव में भारत से राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ॰ राम बहादुर मिश्र, बहराइच के गजलकर डॉ॰ गुलशन, हॉलीवूड, बॉलीवूड तथा गढ़वाली फिल्म अभिनेता एवं वरिष्ठ रंगकर्मी श्री विमल प्रसाद बहुगुणा, अवधी लोक गायन से सजे लखनऊ दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले श्माटी के बोलश् कार्यक्रम की संचालिका और नृत्यांगना कुसुम वर्मा, समाजसेवा और साहित्य को समर्पित लखनऊ की सुपरिचित हस्ताक्षर सत्या सिंह हुमैन, समाजसेवा को समर्पित लखनऊ की सुपरिचित हस्ताक्षर कनक लता गुप्ता, अहमदावाद (गुजरात) से सुश्री अंकिता सिंह, वाराणसी से श्री सचीन्द्र नाथ मिश्र और लखनऊ से उदय प्रताप सिंह, गोरखपुर आकाशवाणी के उद्घोषक, कंपियर तथा भोजपुरी भाषा के जाने माने गीतकार डॉ॰ उमेश कुमार पटेल ष्श्रीशष्, हिमालय यानी उत्तराखंड से हिन्दी साहित्य के सुपरिचित मर्मज्ञ धीरेन्द्र सिंह रांघर, पूर्वाञ्चल के रंगकर्मी डॉ रमाकांत कुशवाहा, शिक्षविद डॉ॰ विजय प्रताप श्रीवास्तव, अवधी के कवि व लोकगायक गोंडा निवासी श्री शिव पूजन शुक्ल, लखनऊ से प्रकाशित रेवान्त पत्रिका की संपादक डॉ॰ अनीता श्रीवास्तव, हिन्दी के वरिष्ठ कवि व साहित्यकार अहमदाबाद निवासी श्री राम किशोर मेहता, हिन्दी के वरिष्ठ कवि व साहित्यकार कानपुर निवासी डॉ॰ ओम प्रकाश शुक्ल ‘‘अमिय‘‘, हिन्दी में हाईकू की सर्जक व वरिष्ठ साहित्यकार लखनऊ निवासी डॉ॰ मिथिलेश दीक्षित, हिन्दी की वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवियत्री रायबरेली निवासी डॉ॰ चम्पा श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षाविद आगरा निवासी डॉ॰ सुषमा सिंह, प्रमुख शिक्षाविद सृजनधर्मी एवं साहित्यकार आगरा निवासी डॉ॰ प्रभा गुप्ता, प्रमुख शिक्षाविद सृजनधर्मी एवं साहित्यकार आगरा निवासी डॉ॰ माला गुप्ता, प्रमुख शिक्षाविद सृजनधर्मी एवं साहित्यकार आगरा निवासी डॉ॰ पूनम तिवारी, प्रमुख शिक्षाविद सृजनधर्मी एवं साहित्यकार आगरा निवासी डॉ॰ प्रमिला उपाध्याय , वरिष्ठ पत्रकार रायबरेली निवासी डॉ राजेन्द्र बहादुर श्रीवास्तव, प्रमुख शिक्षाविद लखनऊ निवासी श्री कैलाश चन्द्र जोशी, प्रमुख समाजसेवी इलाहाबाद निवासी श्री अजय कुमार, प्रमुख समाजसेवी एवं हिन्दी के यायावर साहित्यकार ऋषिकेश निवासी श्री धीरेंद्र सिंह रांगढ़ तथा इलाहाबाद के रामायण मर्मज्ञ कवि डॉ॰ बाल कृष्ण पांडे आदि भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर लगभग दो दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण और एक शाम अवध के लोकगायकों के नाम होगा। विशिष्ट अतिथि होंगे अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच श्री एस0एन0 मिश्र। साथ ही श्रीमती कुसुम वर्मा की कला प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
विविधताओं से भरा यह सम्मेलन जीवन के अपने अलग-अलग रंगों में धड़कता दिखाई देगा दर्शकों को, ऐसी उम्मीद है।

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भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की पावन स्मृति को समर्पित संगोष्ठी

Posted on 06 January 2018 by admin

उत्तर प्रदेष हिन्दी संस्थान, लखनऊ

भारतेन्दु जी ने भारतवासियों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया - डाॅ0 सदानन्दप्रसाद गुप्त
moj_0041लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की पावन स्मृति के अवसर पर ‘नवजागरण की चेतना और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र‘ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन शनिवार, 06 जनवरी, 2018 को निराला सभागार, हिन्दी भवन, लखनऊ में किया गया।
डाॅ0 सदानन्दप्रसाद गुप्त, मा0 कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो0 सुरेन्द्र दुबे, कुलपति, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी, प्रो0 सूर्य प्रसाद दीक्षित, पूर्व प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ0 हरिशंकर मिश्र, पूर्व आचार्य, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ आमंत्रित थे।
दीप प्रज्वलन, माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्पण के उपरान्त प्रारम्भ हुए कार्यक्रम में वाणी वन्दना संगीतमयी प्रस्तुति डाॅ0 पूनम श्रीवास्तव द्वारा की गयी। मंचासीन अतिथियों का उत्तरीय द्वारा स्वागत श्री सुनील कुमार सक्सेना, उपनिदेशक, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान ने किया।
मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ0 हरिशंकर मिश्र ने ‘नवजागरण की चेतना और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र‘ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र साहित्य जगत के युगप्रवर्तक थे। उन्नसवी शताब्दी में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी ने भारतवासियों के हृदय में नवजागरण पैदा किया। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी में राज्यभक्ति और राष्ट्रभक्ति समान रूप से थी। उनमें बालपन से ही समझने की शक्ति थी। उन्होंने अंगे्रजो के अत्याचार को काफी निकट से देखा था। उनके समय में समाज में बड़ी विडम्बना थी। वे अपने मन की बात को बड़ी दृढ़ता से कहते थे। उन्होंने अंगे्रजी भाषा का विरोध किया। हिन्दी भाषा के उन्नयन में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का योगदान अतुलनीय रहा है, उनका रचना संसार व्यक्तित्व और कृतित्व व्यापक था।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे प्रो0 सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा - उन्नसवीं शताब्दी का जागरण आर्थिक जागरण पर केन्द्रित था। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी दूरदर्शी व्यक्ति थे। उन्होंने साहित्य की प्रत्येक विधा पर अपनी रचनाएं रची। उनके अन्दर नैसर्गिक लेखन की क्षमता थी। उन्हें यह क्षमतायें विरासत में मिली थी। जगत का उन्हें व्यापक अनुभव था। अंग्रेजो के शोषण के खिलाफ उन्होेंने एक आन्दोलन चलाया था। वे अपनी रचना आम बोल-चाल की भाषा में लिखते थे। जनता द्वारा दी गयी पहली उपाधि ‘भारतेन्दु‘ हरिश्चन्द्र जी को मिली। उन्होंने व्यंग्य के माध्यम से जनजागरण किया। हिन्दी के प्रथम गजलकार भारतेन्दु जी थे।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रो0 सुरेन्द्र दुबे, कुलपति, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी ने अपने सम्बोधन में कहा - भारतेन्दु जी हिन्दी के श्लाका पुरुष थे। नवजागरण पुनर्जागरण ही है। भारतेन्दु जी के समय का जागरण लोक का पुनर्जागरण है। भारतेन्दु जी भारत भक्त विचारक थे। विदेशी वस्तुआंे के प्रबल विरोधी थे। राष्ट्र के निर्माण के मूलतत्वों की खोज भारतेन्दु जी ने की। वे स्त्री-पुरुष की समानता के पक्षधर थे। उनका युग सजीव व चेतना का युग था। उन्होंने अपने नाटकों में समाज का चित्रण किया है। नाटक को ‘पंचमवेद‘ कहा गया है।
अध्यक्षीय सम्बोधन में डाॅ0 सदानन्दप्रसाद गुप्त, मा0 कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने कहा - भारतेन्दु जी ने हमें भारत की स्वतंत्रता का सूत्र दिया। उन्होंने ‘स्वत्व‘ का महत्व हम भारतवासियों का बताया। उनका साहित्य हमारे अन्दर नयी चेतना का संचार करती है। वे आर्थिक सम्पन्नता के पक्षधर थे। उनका स्वच्छता का अभियान था कि उन्नति में आने वाली बुराइयों को कांटों को निकाल कर फेंकने की आवश्यकता है। वे स्वदेशी चेतना के पक्षधर थे। उन्होंने साहित्य को दरबारी परम्परा से हटाकर जनता के बीच का साहित्य बनाया। भारतेन्दु जी ने भारतवासियों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया।
समारोह का संचालन, अभ्यागतों का स्वागत एवं आभार डाॅ0 अमिता दुबे, सम्पादक, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान ने किया।

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डाॅ0 विद्याविन्दु सिंह एवं डाॅ0 अमिता दुबे की कृतियों को अखिल भारतीय सम्मान

Posted on 14 December 2017 by admin

साहित्य अकादमी (मध्य प्रदेश) द्वारा कृति पुरस्कार योजना के अन्तर्गत वर्ष 2015 के ‘पं0 भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार‘ से डाॅ0 विद्याविन्दु सिंह की काव्य कृति ‘हम पेड़ नहीं बन सकते‘ तथा वर्ष 2016 के ‘गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार‘ से डाॅ0 अमिता दुबे के कहानी संग्रह ‘सुखमनी‘ को पुरस्कृत किया गया।
amita-1 हरियाणा के महामहीम राज्यपाल प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी के करकमलों द्वारा मानस भवन, भोपाल में गणमान्य अतिथियों एवं साहित्यकारों के सम्मुख मंगलवार, 12 दिसम्बर, 2017 को उत्तरीय, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न एवं रु0 51,000=00 से डाॅ0 विद्याविन्दु सिंह एवं डाॅ0 अमिता दुबे को सम्मानित किया गया। इस अवसर श्री सुरेन्द्र पटवा, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मध्य प्रदेश सरकार, श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश एवं श्री उमेश कुमार सिंह, निदेशक, साहित्य अकादमी विशेष रूप से उपस्थित रहे। यहाँ उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय स्तर के 10 पुरस्कार में से उपर्युक्त 02 पुरस्कार लखनऊ, उत्तर प्रदेश के दो साहित्यकारों को प्रदान किये गये।

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श्री त्रिपाठी के काव्य संग्रहों का लोकार्पण

Posted on 06 December 2017 by admin

साहित्य यानि सकारात्मक सोच - राज्यपाल

जयपुर, 6 दिसम्बर। राज्यपाल श्री कल्याण सिंह ने कहा है कि सकारात्मक सोच बनाने वाला लेखन ही साहित्य होता है। उन्होंने कहा कि जीवन की टेड़ी-मेड़ी राहों से सुगम मार्ग बनाने में साहित्य सहयोगी होता है।photo-1-6

राज्यपाल श्री सिंह ने बुधवार को यहां राजभवन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी की कृतियां ‘‘खयालों का सफर‘‘ और ‘‘जख्मों पर शबाब‘‘ के राजस्थानी में अनुदित काव्य संग्रहों का लोकार्पण किया।

राज्यपाल श्री सिंह ने कहा कि श्री त्रिपाठी पचास वर्षों से उनके मित्र हैं। हमारे मत व मन में कभी भिन्नता नही आई। सदैव मधुर सम्बन्ध रहे। बहुमुखी प्रतिमा के धनी श्री त्रिपाठी की कविताओं में जीवन की गहराइयां हंै। राज्यपाल ने कहा कि इन काव्य संग्रहों का अनुवाद सम्यक है। उन्होंने कहा कि श्री त्रिपाठी ने राजनीति, वकालात, कविता और मित्रता में मिशाल कायम की है।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि श्री कल्याण सिंह से उनके सम्बन्ध हाथ की लकीरों की तरह हैं। उन्होंने कहा कि यह कविताएं थल, नभ, जल में रचित हुई हैं। कविताएं अनायास ही बन जाती हैं। कविता का स्रोत कैसे व कहां से उत्पन्न होता है, उसका पता ही नही चलता है।
श्री कला नाथ शास्त्री, काव्य संग्रहों की अनुवादक डाॅ. जेबा रशीद व श्री सुन्दरम शांडिल्य ने काव्य संग्रहों के बारे में चर्चा की। राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने उनके कार्य में सहयोग के लिए श्री रामेश्वर लाल गोयल, डाॅ. रणजीत सिंह चैहान व श्री विवेक बैद का सम्मान किया। संचालन व स्वागत उद्बोधन डाॅ. प्रकाश त्रिपाठी ने किया।

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उपन्यास ‘मदारीपुर जंक्शन’ का विमोचन

Posted on 06 December 2017 by admin

दिनांक 04.12.2017 को सांय 7 बजे इरम गल्र्स इ0का0 इन्दिरा नगर, लखनऊ में श्री बालेन्दु कुमार द्विवेदी द्वारा लिखित उपन्यास ‘मदारीपुर जंक्शन’ का विमोचन श्री बृजेश पाठक व श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी, मा0 कैबिनट मंत्री उ0प्र0 सरकार तथा अन्य सम्मानित व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। श्री अरुण माहेश्वरी, श्री ओम निश्चल, श्री अशोक चक्रधर आदि ने उपन्यास पर परिचर्चा की।whatsapp-image-2017-12-05-at-12
श्री अशोक चक्रधर ने उपन्यास पर बोलते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया और कुल मिलाकर अत्यन्त पठनीय उपन्यास बन पड़ा है लगता ही नहीं है कि किसी उपन्यासकार का पहला उपन्यास है। इसके अतिरिक्त विभिन्न समीक्षकों ने उपन्यास पर अपनी प्रतिक्रिया भेजी जिसे कवि रतिनाथ योगेश्वर ने पढ़कर उपस्थित लोगों को सुनाया। श्री काशीनाथ सिंह ने उपन्यास की सराहना करते हुए कहा है कि यह उपन्यास अपनी लोकप्रियता के शिखर को छुए और बालेन्दु द्विवेदी को हिन्दी साहित्य जगत में एक युवा समर्थ साहित्यकार के रूप में वह स्वागत व स्वीकार्यता मिले, जिसके वे वास्तव में हक़दार हैं। श्री नित्यानन्द तिवारी का कहना है कि गाँव की विविध स्थितियों और व्यक्तियों की कथा कहने वाला अच्छा उपन्यास है। श्री विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि बालेन्दु जी ने गाँव को बहुत नज़दीक से और बड़ी आत्मीयता से देखा है उन्होंने ग्रामीण जीवन की वैविध्य को बहुत डूबकर देखा और लिखा है। श्री रामदरश मिश्र के शब्दों में होरी और बावनदास की मृत्यु में जैसी सृजनशील संभावनाएं हैं वैसी ही संभावना मेघा की मृत्यु में है। इस दृष्टि सम्पन्न रचना के लिये आपको बहुत बहुत बधाई।
उक्त मौके पर मदारिसे अरबिया, लखनऊ व बाराबंकी की तरफ से एक मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें देश के नामी शयरों एवं कवियों सर्व श्री अशोक चक्रधर, राहत इंदौरी, ओम निश्चल, खुशबीर सिंह शाद, रतीनाथ योगेश्वर, मनीष शुक्ला, शबीना अदीब, सबा बलरामपुरी, जौहर कानपुरी, कुँवर रंजीत सिंह चैहान, श्रीरंग, अज़्म शाकिरी, वक़ार बाराबंकवी, सग़ीर नूरी आदि ने प्रतिभाग कर अपनी शायरी व रचनाऐं प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरी।

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डाॅ. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ जन्मशताब्दी समारोह सम्मान समारोह, संगोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी

Posted on 29 October 2017 by admin

डाॅ0 उपेन्द्र को निशंक साहित्य सम्मान-2017 से समादृत किया गया।

dsc_7612लखनऊ। आज दिनांक 28 अक्टूबर, 2017 को डाॅ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक‘ जन्मशताब्दी समारोह के शुभ अवसर पर उत्तर प्रदेश हिन्दी के निराला सभागार में डाॅ0 सूर्य प्रसाद दीक्षित की अध्यक्षता में डाॅ0 उपेन्द्र को डाॅ0 लक्ष्मी शंकर मिश्र ‘निशंक‘ साहित्य सम्मान से समादृत करते हुए ग्यारह हजार रूपये की धनराशि, मानपत्र, स्मृति चिह्न उत्तरीय भंेट की गयी।
इस अवसर पर गणेश वन्दना व डाॅ0 लक्ष्मी शंकर मिश्र ‘निशंक‘ जी द्वारा रचित वाणी वन्दना माँ मुझको अपना वर दो की संगीतमयी प्रस्तुति श्रीमती रंजना दीवान द्वारा की गयी। तबले पर रीतेश ने सहयोग किया। मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण द्वारा स्वागत डाॅ0 मुकुल मिश्र द्वारा किया गया। अभ्यागतों का स्वागत डाॅ0 कमला शंकर त्रिपाठी जी ने किया। डाॅ0 उपेन्द्र का परिचय श्री योगीन्द्र द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर सम्मानित डाॅ0 उपेन्द्र ने कहा - ऐसी संस्थाएँ और बड़ा काम करें महत्वपूर्ण कार्य करें। यह उम्र मान-सम्मान से निष्पेक्ष होने की उम्र है। निशंक जी ने सनेही जी को गुरू मान उनका आशीर्वाद मुझे भी मिला। सत्पुरुषों के साथ बैठने में महापुरुषों के साथ बैठने में आपको अनुभव होगा की आपने जो कुछ किताबों में पढ़ा उससे अधिक जीवन से सीखा जा सकता है। हिन्दी के स्वरूप को सुधारने का कार्य ऐसी संस्थाएँ कर सकती है।
अध्ययन संस्थान की ओर से प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘निशंक सुरभि‘ तथा डाॅ. निशंक की काव्य कृति ‘ब्रज-जीवन’ का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि डाॅ0 सदानन्दप्रसाद गुप्त, कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने अपने सम्बोधन में कहा - डाॅ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक‘ का स्मरण एक परम्परा का स्मरण है। कविता में विचार तत्व की प्रधानता आयी है। राग तत्व की कमी आयी है। आज मंच की कविता और पढ़ी जाने वाली कविता में दूरी आ गयी है। निशंक जी ने उत्तरछायावादी काव्यधारा के दौर में अपने को वाद मुक्त रखा। उन्होंने कवित्त और सवैया की परम्परा को आगे बढ़ाया। उन्होंने छन्द विरोध की चुनौती को स्वीकार किया। हिन्दी भाषा के प्रति उनकी गहरी निष्ठा थी, वह स्तुत्य है। निशंक जी ऐसे रचनाकार थे जो हाट में बिकने वाले नहीं थे।
सभाध्यक्ष प्रो0 सूर्य प्रसाद दीक्षित जी ने कहा - निशंक जी ने आधुनिक युग में कवित्त और सवैया छन्द को जिन्दा करने का कार्य किया। यति, गति, स्वर, ताल का नमूना निशंक जी की कविताओं में मिलता है। उन्होेंने मंच की पवित्रता को जीवित रखने का प्रयास किया। आज कविता की पवित्रता को जीवित रखने की आवश्यकता है। निशंक जी ने कई संस्थाएँ स्थापित कीं और उनमें सक्रियता से गतिशीलता प्रदान की। उनकी हिन्दी सेवा भी उल्लेखनीय है।
डाॅ0 जितेन्द्र कुमार सिंह संजय के संचालन में प्रारम्भ हुए प्रथम सत्र में - डाॅ0 निशंक: सृजन के विविध आयाम’ विषय पर सार्थक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसके अध्यक्ष आजमगढ़ से पधारे डाॅ0 कन्हैया सिंह थे।
कानपुर से पधारी डाॅ0 दया दीक्षित ने कहा- निशंक जी सृजन के साथ हिन्दी भाषा, हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए कृत संकल्प रहे। ‘साहित्यकारों के पत्र मेरे

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नाम’ शीर्षक पुस्तक निशंक जी की अमूल्य कृति है। इन पत्रों के माध्यम से साहित्य की एक परम्परा सामने आती है। वे कहा करते थे कि मैं अनायास लिखता हूँ सध्यास नहीं लिखता। वे कहते थे मैं सदैव राममय रहा न काममय न नाममय। उनके द्वारा लिखे गये सम्पादकीय उनके मुखर और प्रखर व्यक्तित्व के प्रमाण है।
डाॅ0 गोपाल कृष्ण शर्मा ‘मृदुल’ ने कहा- ‘डाॅ0 निशंक राम चरित मानस का पाठ सुनकर बड़े हुए। उनका परिचय राष्ट्रीय संस्कृति काव्यधारा से हुआ। परम्परा की परिधि मे रहते हुए उन्होंने सदैव नवीन बात कहने का प्रयास किया।
इस अवसर पर डाॅ0 निशंक अध्ययन संस्थान द्वारा प्रकाशित ‘लखनऊ के दिवंगत हिन्दी कवि’ खण्ड-एक पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ।
श्री आदित्य मिश्र ने कहा - निशंक जी ने गद्य साहित्य में कविता को जिया है। निशंक जी स्वाभिमान और सिद्धान्त के साथ काव्य साधना करने की प्रेरणा देते हैं। निशंक जी के संस्मरण स्वतः ही काव्यमय हो जाते हैं। उनके संस्मरण जीवन के यथार्थ को जोड़ने वाले हैं। अपने पत्र लेखन और संग्रहण के माध्यम से निशंक जी कविता के रस को जीवन धन मानते हैं।
सभाध्यक्ष डाॅ0 कन्हैया सिंह ने कहा - डाॅ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक‘ अध्ययन संस्थान साहित्य की टूटी हुई कड़ी को जोड़ने का काम करते हैं। निशंक जी रसिक कवि-रसिक अध्यापक और आचार्य रहे हैं। उन्होेंने सनातन परम्परा में रूढ़ियों का विखड़न करते हुए कविता-कर्म किया। नये प्रतिमान स्थापित किये।
इस अवसर पर एक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में किया गयसा। वाणी वन्दना सुश्री सतरूपा पाण्डेय ने पढ़ी- लेखनी करती नमन है/शब्द के भण्डार दो/वीणा पाणी सरस्वती माँ!।
श्री अतुल वाजपेयी जी ने पढ़ा- है नवीन युग का ज्वलन्त उद्गांक्ष मुक्त/देश भक्ति भाव का संवाद वंदेमातरम्।
श्री रमेश रंजन मिश्र ने पढ़ा - मन ने पद्मावत पढ़ा जग कर सारी रैन/अक्षर-अक्षर तुम दिखे नैन हुए बैचेन/मन के मंगल भवन में पूर्ण हुए संस्कार/आँखों-आँखों भाँवरें पड़ी हजारों बार।
श्री दीनमोहम्मद दीन ने पढ़ा- हम रखे सम्मान देश का/और बढ़ाये मान देश का। सहन नहीं हम कर सकते हैं/पल भर को अपमान देश का।
श्री सरस कपूर, डाॅ0 शिवओम अम्बर, श्री राधाकृष्ण पथिक, श्री सतीश आर्य, डाॅ0 ओम निश्चल, सुश्री रूपा पाण्डेय ‘सतरूपा‘ ने भी काव्य पाठ किया। काव्य गोष्ठी का संचालन डाॅ0 शिव ओम अम्बर ने किया।
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पुस्तक मन का पंछी यादो का सफर का लोकर्पण

Posted on 14 September 2017 by admin

बागपत के ओमवीर सिंह तोमर की पुस्तक मन का पंछी यादो का सफर का लोकर्पण सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया।कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ,प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम भी मौजूद थे।
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