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Archive | साहित्य

Kabir Peace Mission celebrated its 27th Foundation Day

Posted on 24 April 2017 by admin

Two books titled ‘Sarthak Jeevan-Tamsoma Jyotirgamay and The Story of my Spiritual Journey’ Released.

· KPM conferred its prestigious award of ‘Kabir Deep’ on its five senior members from various centers.

Kabir Peace Mission celebrated its 27th Foundation Day on 23rd April 2017 (Sunday) in City Montessori School, Vishal Khand, Gomtinagar auditorium. On its Foundation Day, mission organized a discussion on the subject, from ‘Darkness to Light: An Ongoing Journey.’ At this occasion the Chief Guest was Hon’ble Shri Ram Naik Governor of Uttar Pradesh. The keynote speaker was Shri Shambhu Nath, former Chief Secretary of Uttar Pradesh. The program was presided by former Lokayukta of Uttar Pradesh Justice S. C. Verma. On this occasion Shri Krishan Bihari Agarwal President Kabir Peace Mission, Shri Jagdish Gandhi, Shri Rakesh Mittal Chief Coordinator of Kabir Peace Mission and Dr. I.P.S. Bisnik author were also present on the dais. The program was attended by a large number of members and well wishers of the mission.

Two books were launched during the program. One book titled ‘Sarthak Jeevan-Tamsoma Jyotirgamay is written by Dr. I.P.S. Bisnik a senior member of Kabir Peace Mission. He has written several books in the past also. This book explains in detail the fundamental principles of life which makes it meaningful. The explanations given in the book are very convincing. The second book released in the function is a spiritual biography of the author Shri Rakesh Kumar Mittal titled ‘The Story of my Spiritual Journey’. This book describes in detail the association of his spiritual master Swami Bhoomananda Tirth and how it changed the quality of his life. The book is of immense help to all genuine seekers.

Kabir Peace Mission conferred its prestigious award of ‘Kabir Deep’ on its five senior members from various centers. The recipients are Padam Shri Dr. Mansoor Hasan, the renowned cardiologist of Lucknow, Dr. Rajesh Agarwal, Chief Medical Superimtendent of Regency Hospital, Kanpur, Shri Chandra Bhooshan Singh former MP and an enlightened farmer from Farukabad, Dr Hemlata Dikhit an educationist and social worker from Indore and Dr. Ishwar Singh a world known Homeopath from Meerut. All of them have rendered selfless service to the society for a long time and are still doing so.

The program began with the welcome address of Mr.Rakesh Mittal who also introduced the subject of discussion. He told about the progress of Kabir Peace Mission since its establishment. He said that collective optimism is very

important and when large number of people think positive, its collective impact is bound to be positive. In the process, the individual is the first beneficiary.

Speaking on the subject of discussion, Shri Shambhu Nath gave a deep insight into the journey of human life. He said that moving foreward is the only way to live meaningfully. He dwelt in detail on the genesis of words ‘Chareveti-Chareveti’ which have been taken from ancient scriptures. A positive thinker always turns difficulties into opportunities and no difficulty in life can stop his forward march.

The Chief Guest Hon’ble Governor of U.P. Shri Ram Naik Ji spoke at length on this occasion. While appreciating the work done by Kabir Peace Mission, he gave many instances from his own life where the motto of ‘Marching Ahead’ helped him in facing the difficult situation of life. In fact the title of his biography released recently is ‘Chareveti–Chareveti’ (Marching Ahead). He expected that more and more selfless people will come forward and be an example for new generation. He profoundly congratulated the ‘Kabir Deep’ awardees and wished them good health in future.

Kabir Peace Mission was established in April 1990 to develop Positive Thinking in the Society. During this period mission has grown phenomenally and today it has support from all sections of the society. At present there are 2720 life member of the mission spread over 40 centers in India and abroad. Mission also works in association with many likeminded organizations.

The program concluded with the Presidential address by Justice S. C. Verma who also proposed a vote of thanks to Chief Guest, the key note speaker and all the guests for their benign presence. Around 400 enlightened citizens were present in the program.

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बंुदेली पुरस्कार के लिये पुस्तकें आमंत्रित

Posted on 08 May 2013 by admin

13 अखिल भारतीय बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषदृ के तत्वावधान में आगामी बंुदेल केसरी छत्रसाल की जयंती वर्ष 2013पर आयोजित होने वाले बंुदेली समारोह-2013 में बंुदेली पुरस्कार हेतु प्रविष्टियाॅं आमंत्रित हैं। इसके लिये बंुदेली भाषा में या बंुदेलखण्ड के किसी विषय पर ,तीन तीन पुस्तकें, 15मई 13बुधवार तक परिषद कार्यालय 75 चित्रगुप्त नगर,कोटरा ,भोपाल-462003 के पते पर लेखक या प्रकाशक मौलिक लेखन के प्रमाणपत्र सहित ,प्रेषित कर सकते हैं। प्रस्तुत पुस्तकें लेखक के परिचय एव फोटो सहित हों।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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दर्भ सूचनाओं का वृहद ग्रन्थ ‘उत्तर प्रदेश-2012’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) अनेक नई सूचनाओं एवं पर्यटन स्थलों के चित्रों के साथ प्रकाशित छात्र-छात्राओं को 10 प्रतिशत छूट पर उपलब्ध

Posted on 30 April 2013 by admin

29 अप्रैल, 2013
उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित किये जाने वाला महत्वपूर्ण वार्षिक संदर्भ ग्रन्थ ‘‘उत्तर प्रदेश-2012’’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) प्रकाशित हो गया है। गत लगभग एक दशक से इस संदर्भ ग्रन्थ ने अपनी सन्दर्भीय उपयोगिता के कारण पाठकों के बीच पहचान हासिल की है। अपनी सारगर्भित महत्वपूर्ण सूचनाओं तथा संदर्भीय दृष्टि से उपयोगी सामग्री को समावेश करने के कारण शोधकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के लिए यह ग्रन्थ इतना उपयोगी हो गया है कि प्रतियोगी छात्र-छात्राएं लगातार इसके प्रकाशन की प्रतीक्षा करते हैं। इसके अलावा इस संदर्भ ग्रन्थ में जनप्रतिनिधियों, लेखकों, पत्रकारों एवं ग्राम स्तर पर प्रधानों एवं ब्लाक प्रमुखों तथा अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में सारगर्भित सूचनाएं देकर अत्यंत उपयोगी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित ऐतिहासिक, भौगोलिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विकासपरक सूचनाओं की अद्यतन एवं वृहद जानकारियां इस पुस्तक में शामिल की गई हैं। इस संदर्भ ग्रन्थ में उत्तर प्रदेश के इतिहास, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन स्थल, सिनेमा, पत्रकारिता, स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास, प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चित्र, साहित्यकारों, चित्रकारों, पत्रकारों, संगीतकर्मी एवं रंगकर्मी तथा उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित सिने कलाकारों के महत्तवपूर्ण चित्रों को शामिल करने से इसकी संदर्भीय उपयोगिता और बढ़ गयी है। संदर्भित प्रकाशन में प्रथम बार डाॅ राममनोहर लोहिया पार्क, गोमती नगर एवं जनेश्वर मिश्र पार्क, लखनऊ का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश के इतिहास से सम्बन्धित जानकारियां विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
‘उत्तर प्रदेश-2012’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण)  में अनेक नई जानकारियों का समावेश किया गया है। इसमें प्रदेश में जन्में प्रशंसित, पुरस्कृत खेल विभूतियों, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री से अलंकृत महानुभावों, साहित्य एकेडमी-ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकारों, परमवीर, महावीर एवं अशोक चक्र से सम्मानित शूरवीर सैनिकों तथा नवीनतम विकसित पर्यटन स्थलों के रंगीन चित्रों को पहली बार सम्मिलित कर पाठकों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। इसमें प्रदेश की संवैधानिक प्रणाली के साथ-साथ केन्द्रीय मंत्रिमण्डल, प्रदेश मंत्रिमण्डल, भारत के मुख्य न्यायधीश, भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, उ0प्र0 से राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंर्तराष्ट्रीय दिवस, प्रदेश के लोकसभा एवं राज्य सभा सदस्य, भारत रत्न से सम्मानित विभूतियां, भारत के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री प्रदेश के विधायक तथा विधान परिषद सदस्य तथा लोक सभा अध्यक्ष के साथ-साथ समस्त प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री, भारत के नोबेल पुरूस्कार विजेता आदि को सम्मिलित कर पुस्तक की सन्दर्भीय व्यापकता को बढ़ाया गया है।
इस सन्दर्भ ग्रन्थ में समस्त विभागों की वेबसाइटस के अतिरिक्त प्रदेश सरकार के समस्त विभागों के बारे में पर्याप्त जानकारी समाहित की गई है। इस संदर्भ ग्रन्थ मंे विकासपरक ग्राफ, चार्ट तथा उत्तर प्रदेश एवं भारत के मानचित्रों को भी पुस्तक की उपयोगिता बढ़ाने हेतु प्रकाशित किया गया है। प्रदेश के जनपदों के प्रमुख पर्यटक स्थलों के चित्रों को भी जनपदों के गौरव को उद्घाटित करने की दृष्टि से समाविष्ट किया गया है।
‘‘उत्तर प्रदेश-2012’’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) में प्रदेश के समस्त जनपदों की आधारभूत सूचनाओं को समाविष्ट किया गया है, जिससे पाठकों को प्रत्येक जिले के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है। इस पुस्तक में रंगीन ग्राफों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति, विकासपरक सूचनाएं, जनगणना, शिक्षा, उद्योग, कृषि आदि क्षेत्रों में विकास की स्थिति को दर्शाया गया है। पुस्तक में हिन्दी-उर्दू के साहित्यकारों, पत्रकारों, खेल एवं सिनेमा विभूतियों, रंगकर्मियों,पद्म भूषण तथा पद्म विभूषण से सम्मानित विभूतियों के चित्रों को प्रकाशित किए जाने से पुस्तक की संदर्भीय उपयोगिता और बढ़ गई है।
यह पुस्तक इस दृष्टि से भी उपयोगी है कि इसमें प्रदेश की विकास योजनाओं की विभागवार समुचित जानकारी भी दी गई है जिसका लाभ ग्रामीण जनता भी उठा सकती है। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश के बारे में सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ सरकार की भावी योजनाओं और विकास का व्यापक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करती है। उत्तर प्रदेश पर आधारित सूचना विभाग का यह सन्दर्भ प्रकाशन सन्दर्भीय जानकारियों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के बारे में वृहद जानकारी देता है। वार्षिकी उत्तर प्रदेश सूचना विभाग का नियमित प्रकाशन है, जो लगातार प्रतिवर्ष अपनी उपयोगिता को बढ़ाते हुए पाठकों और शोधार्थियों के बीच में उत्तरोतर लोकप्रियता हासिल कर रहा है। इसका प्रकाशन लखनऊ के भारत बुक सेण्टर 17, अशोक मार्ग, लखनऊ द्वारा किया गया है और यह लखनऊ के समस्त प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं के यहां बिक्री हेतु उपलब्ध करायी जायेगी। इसका मूल्य रू0 325/- है, जो छात्र-छात्राओं को दस प्रति छूट पर उपलब्ध होगी। ‘उत्तर प्रदेश-2012’’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) के माध्यम से जनता तक जरूरी सूचनाएं बेहतर ढंग से पहुंचाने का एक सफल प्रयास है।
पुस्तक के संपादन में निदेशक सूचना श्री प्रभात मित्तल, डा0 अनिल कुमार, अपर निदेशक एवं उनके मार्गदर्शन में गठित संपादक मंडल के सदस्य, समन्वय संपादक श्री दिनेश कुमार गर्ग एवं उनके सहयोगी श्री चन्द्रविजय वर्मा, अति0 जिला सूचना अधिकारी का कार्य निःसंदेह श्रमसाध्य एवं सराहनीय है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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राजधानी लखनऊ में 5 अप्रैल को सोन चिरैया बसंती चैती बयार कार्यक्रम का आयोजन - मालिनी अवस्थी

Posted on 04 April 2013 by admin

edited-malini-awasthiलोक साहित्य के साथ लोकगायकी के उत्थान के लिऐ ढाई वर्ष पूर्व सोन चिरैया संस्था की स्थापना कर लोक से महानगरों को परचित कराने तथा विलुप्त होने की ओर पहुच रही लोकविधा के संरक्षण में लगी सुप्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने बताया कि राजधानी लखनऊ में 5 अप्रैल को सोन चिरैया बसंती चैती बयार कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक आकादमी परिसर के खुले मंच पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल बीएल जोशी तथा विशिष्ट अतिथि सुधीर दुबे मुख्यमहाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक होगें। कार्यक्रम का शुभारम्भ सर्व मंगला देवी सुमिरन के पचरा गीतों से होगा। वीरों के मन में उमंग जगाने वाले वीर काव्य आल्हा का गायन केन्द्रीय विद्यालय लखनऊ के 150 बच्चों द्वारा किया जायेगा। इस कार्यक्रम का सयोजन अवधी आल्हा गायक फौजदार सिंह के द्वारा किया जायेगा। राजधानी की कामकाजी गृहणियों को उनके हुनर को मंच पर दिखाने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से दादी और नानी के साथ बालिकाओं को मिलाकर 50 महिलाओं का एक ग्रुप बनाया गया। इस ग्रुप को लोकगायिका मालनी अवस्थी ने होली और चैती गीतों को गाने का ढंग सिखाया। उनके माध्यम से घर आंगन 50 महिलायें सामूहिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी। प्रहलाद कुर्मी के नेतृत्व में बुन्देलखंड से आये लोक कलाकारों द्वारा बुन्देली राई नृत्व तथा ईसुरी की फांगे गायी जायेगी। थारू जनजाति के लोक नृत्य तथा ब्रज होरंगा दाऊजी की आरती तथा महाआरती के साथ-साथ गाजीपुर के मोहन राठौर द्वारा कचरा गायन तथा शीलू सिंह राजपूत नये प्रयोग के साथ पुरूष गायकी को चुनौती देती हुई वीर रस की महाकाव्य आल्हा गायन प्रस्तुत करेगी। इस अवसर पर लोक साहित्यकार  डा0 सूर्यप्रसाद दीक्षित-अवधी , डा0 अर्जन दास केसरी-सोनांचली, अयोध्या प्रसाद कुमुद-बुन्देली को सम्मानित किया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 22 मार्च, 2013 को हिन्दी संस्थान, लखनऊ में सम्मानित किए गए साहित्यकारों के साथ।

Posted on 22 March 2013 by admin

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव 22 मार्च, 2013 को हिन्दी संस्थान, लखनऊ में साहित्यकार डाॅ0 महीप सिंह को भारत-भारती सम्मान प्रदान करते हुए।

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रचनाधर्मी राज्य कर्मचारी पुरस्कृत उर्दू के भी दो कलमकार सम्मानित

Posted on 10 March 2013 by admin

संस्थान की पत्रिका सहित कई पुस्तकों का विमोचन
राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान का पुरस्कार एवं सम्मान समारोह आयोजित
राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित पुरस्कार एवं सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आलोक रंजन ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसा समझा जाता है कि सरकारी कार्य करने वाले लोग साहित्य के बारे में उतनी समझ नहीं रखते जितनी कि आम साहित्यकार रखते हैं। लेकिन इस समय यहाॅं पर कई ऐसे साहित्यकार मौजूद हैं जो राज्य कर्मचारी भी हैं और उनमें असीमित सृजन क्षमता भी है।
श्री आलोक रंजन आज यहाॅं हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रचनाधर्मी राज्य कर्मचारियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों में भी साहित्य लेखन की क्षमता होती है और उन्होंने भी उत्कृष्ट रचनाऐं पेश की हैं। उन्होंने राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान के महामंत्री डा0 दिनेश चन्द्र अवस्थी की प्रशंसा करते हुए कहा कि डा0 अवस्थी हर माह हिन्दी साहित्य एवं विकास के लिए रचनात्मक माहौल बनाते हैं और हर प्रकार की बाधाओं को पार कर सकारात्मक कार्य करके हिन्दी साहित्य के उत्थान का प्रयास करते है।
इस अवसर पर कृषि आयुक्त ने श्री अनन्त प्रकाश तिवारी, श्री विनय कुमार बाजपेयी, श्री सी0एल0 सोनकर, श्री पवन कुमार, श्री राम नरेश पाल, श्री हरि प्रकाश हरि, श्री सुहेल वहीद तथा श्री मनीष शुक्ल को 51,000 रूपये की धनराशि, प्रशस्ति पत्र एवं शाल भेंटकर उन्हें सम्मानित किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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उत्तर प्रदेष सरकार और रुमी फाउण्डेशन, फिल्म निर्माता-चित्रकार मुजफ्फर अली की जहान-ए-खुसरो की लखनऊ के दिलकुशा पैलेस के खण्डहरों में गूँज

Posted on 08 March 2013 by admin

उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री द्वारा हू-द सुफिज आॅफ अवध के पाँचवें संस्करण का विमोचन होगा।
आशा दीक्षित (दिल्ली), चाँद निजामी और साथी (दिल्ली), मर्कन डेडे (इस्तांबुल) और सफकत अली खान के साथ मालिनी अवस्थी की नजीर अकबराबाड़ी की प्रस्तुति

edited-img_3451 7 मार्च, 2013

जहान-ए-खुसरो का 12वाँ पर्व हजरत निजामुद्दीन औलिया के 709वीं उर्स के मौके पर दिल्ली में 1, 2, और 3 मार्च को मनाया गया तथा लखनऊ में 8 और 9 मार्च को मनाया जायेगा जो यहाँ की दूसरी पर्व होगी। उत्तर प्रदेश सरकार और रुमि फाउण्डेशन द्वारा प्रस्तुत, फिल्म निर्माता-चित्रकार मुजफ्फर अली के जहान-ए-खुसरो की गूँज एक बार फिर दिलकुश पैलेस के खण्डहरों में सुनाई पड़ेगी। यह पर्व रहस्यवाद की कविताओं में आत्मिक संगीत व ईश्वरीय नृत्य की शैली में प्रस्तुत किया जायेगा।
समारोह में रहस्यवादी संगीत की मधुरता और वर्तमान पीढ़ी के बीच लगातार चल रहे संवाद की भी झलक दिखायी देगी। इस वर्ष जहान-ए-खुसरो में भाग ले रहे कलाकार एक नये रूप में रहस्यवाद की प्रस्तुती करेंगे।
मालिनी अवस्थी (लखनऊ), आशा दीक्षित (दिल्ली), चाँद निजामी और साथी (दिल्ली), मर्कन डेडे (इस्तांबुल) और सफकत अली खान (लाहौर) के साथ नजीर अकबराबाड़ी पेश करेंगी।
जहान-ए-खुसरो में हर वर्ष सूफी रहस्यवाद के गीत एक नये रूप में पेश किए जाते हैं। पिछले वर्षों में जहान-ए-खुसरो दिल्ली, लन्दन, बाॅस्टन, जयपुर, श्रीनगर और लखनऊ में आयोजित किया गया जिसमें दुनिया के अलग-अलग शहरों जैसे-दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, हैदराबाद, अजमेर, लाहौर, कराची, ढाका, ताशकन्द, तेहरान, जेरूसलम, राबात, ट्यूनिश, इस्तांबुल, रोम, खारतुम, कैरो, एथेन्स, बर्लिन, टोक्यो, न्यूयाॅर्क और टोरन्टो में सूफी गायकों, नृत्यकों तथा संगीतकारों ने अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस पर्व में शुभा मुदगल, शफकत अली खान, ईला अरूण, सुखविन्दर सिंह, मालविका सर्रूकाई, शुजात हुसैन खान और आबिदा परवीन जैसे महान कलाकारों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं।
फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली जो उत्सव के रचनात्मक निदेशक हैं के अनुसार, ‘‘इस उत्सव के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्षों में एक पूर्व एवं पश्चिम के बीच की खाई को पाटना और उपस्थित समुदाय को इसकी सर्वव्यापकता व लोकप्रियता की अनुभूति कराना है। साथ ही उत्सव में भाग लेने वालों, पर्यटकों, निगमित संगठनों तथा स्थानीय निवासियों को सूफी संगीत के माध्यम से आकर्षित करना है।’’
जहान-ए-खुसरो के इस मौके पर रुमि फाउण्डेशन ने प्रेम और समर्पण के संदेश से ओत-प्रोत कविताओं का एक प्रकाशन ’’हू-दी सूफी वे’’ भी जारी किया। यह प्रकाशन विश्व में अपनी तरह का अकेला है और इसमें एक आत्मा और सहअस्त्वि के विश्वव्यापी संदेश की विश्व में प्रशंसा की गई है।
अब तक के संस्करण:
पहला संस्करण भारत में बहु-संस्कृति अथवा अनेकता की पहचान कराने वाले महान सूफी कवि - संत हजरत अमीर खुसरो की याद में जारी किया गया। दूसरा संस्करण मेवलाना जलालुद्दीन रुमि की 800वीं जन्मतिथि के अवसर पर जारी हुआ। जलालुद्दीन रुमि विश्व के महानतम रहस्यवाद लेखक रहे हैं। यह प्रकाशन कश्मीर के सूफियों और ऋषियों के उन सूफी कवियों को समर्पित है जिन्होंने आपसी मेलजोल वाले समाज के लिए महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार की। पंजाब के सूफियों से संबंधित प्रकाशन अपने पूर्व वैभव और विभाजन से पूर्व पाँच नदियों की पुण्यभूमि प्रस्तुत करती है। इस प्रकाशन में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला गया है।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ’’हू-दी सुफीज आॅफ अवध’’ के पाँचवें संस्करण का विमोचन जहान-ए-खुसरो के दौरान 8 मार्च 2013 को करेंगे।
जहान-ए-खुसरोः
यह अन्तर्राष्ट्रीय वार्षिक सूफी संगीत समारोह ’’हृदय के साम्राज्य में’’ के तौर पर नई दिल्ली में 2001 में प्रारम्भ किया गया। रुमि फाउण्डेशन द्वारा प्रस्तुत और फिल्म निर्माता-चित्रकार मुजफ्फर अली द्वारा निर्देशित और डिजायन किया गया जहान-ए-खुसरो देश के सांस्कृतिक कार्यक्रमों नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। उत्सव में विश्व भर से सूफी परंपरा के विख्यात कलाकार भाग लेते रहे हैं। यह उभरते गायकों सुफियाना संगीत सहित क्लासिकल और माॅडर्न डान्स कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता रहा है। जहान-ए-खुसरो विश्व भर के संगीतप्रेमियों को संगीत से मंत्रमुग्ध करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
निमंत्रण उपलब्ध हैं: यूनिवर्सल बुक डिपो, हजरतगंज और गोमती नगर
रुमि फाउण्डेशन ने डाॅ. मंसूर हसन के संयोजन में एक कार्यदल गठित किया है जिसे मुमताज अली खान, जयन्त कृष्णा, डाॅ. कमर रहमान, परवीन ताल्हा, मालिनी अवस्थी, ज्योति सिन्हा और तारीक खान जैसे योग्य और कर्मठ व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त है। दो वर्ष पूर्व गठन के पश्चात इन्होंने जश्न-ए-बेदम, जश्न-ए-वारिस, बाज-ए-दिलबारान और मार्च 2012 में लखनऊ में जश्न-ए-खुसरो के प्रथम उत्सव का आयोजन किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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वसन्तोत्सव में विद्वानों ने किया संस्कृत भाषा को पढ़ने का आहवान

Posted on 16 February 2013 by admin

‘‘संस्कृत भाषा संस्कार, नैतिकता, प्रेम और सदाचार की भाषा है। संस्कृत का अध्ययन करने वाला व्यक्ति भविष्य में जीविका का साधन तो प्राप्त कर ही लेगा साथ ही उसे सुख एवं शान्ति भी प्राप्त होगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 ओम प्रकाश पाण्डेय ने ये विचार उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा वसन्त पंचती के अवसर पर आयोजित समारोह में व्यक्ति किये। इस अवसर पर विद्यान्त डिग्री कालेज के डा0 विजय कर्ण ने कहा कि प्राचीनतम होते हुए भी संस्कृत में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के मूल सूत्र विद्यमान हैं। कानपुर से आई डा0 नवलता वर्मा ने कहा कि संस्कृत की लिपि देवनागरी है, इसमें शब्दों को जैसा लिखते हैं वैसा ही बोलते भी हैं। संस्थान के निदेशक श्री डी0 एस0 श्रीवास्तव ने भी संस्कृत भाषा के महत्व के बारे में अपने विचार व्यक्त किये।
इस अवसर पर कक्षा 6 से इण्टर अथवा समकक्ष तक के छात्र/छात्राओं की बालकथा कौमुदी पुस्तक से संस्कृत वाचन तथा बी0 ए0 एवं एम0 ए0/समकक्ष छात्र/छात्राओं की शिवराज विजय एंव कादम्बरी के शुकनाशोपदेश से संस्कृत श्रुत लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शाम्भवी कर्ण को प्रथम, आदर्श विद्यामन्दिर  की छात्रा जया सिंह को द्वितीय तथा आदर्श विद्या मन्दिर के ही छात्र अविरल सिंह को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सैट डोमनिक के उत्कर्ष सिंह को सान्त्वना पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार स्वरूप क्रमशः 1000 रूपये, 800 रूपये, 500 रूप्ये तथा 300 रूपये की धनराशि के साथ प्रमाण पत्र एवं संस्थान द्वारा प्रकाशित बाल साहित्य की चार-चार पुस्तकें संस्थान के निदेशक श्री डी0 एस0 श्रीवास्तव द्वारा पुरस्कृत छात्रों को प्रदान की गई।
इस अवसर पर संस्थान के अधिकारियों सहित प्रो0 ओम प्रकाश पाण्डेय, डा0 नवलता वर्मा, डा0 ब्रज भूषण ओझा तथा डा0 अशोक शतपथी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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जबसे पतवारों ने मेरी नाव को धोखा दिया मुझे भंवर में तैरने का हौसला आ गया-उदय प्रताप सिंह

Posted on 09 February 2013 by admin

आॅसू से आनन्द तक की यात्रा है कविता। कविता प्रयास से आती है व्याकरण से नहीं। कविता से कोई न कोई संदेश लोगों तक अवश्य पहुॅचना चाहिये। यह उद्गार श्री उदय प्रताप सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की पावन स्मृति को समर्पित कविता लेखन पर केन्द्रित दो दिवसीय कार्यशाला एवं महाप्राण निराला की पावन स्मृति को समर्पित काव्य गोष्ठी के समापन सत्र के दौरान निराला साहित्य केन्द्र एवं सभागार, हिन्दी भवन, लखनऊ में व्यक्त किये।
कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि अपने भावनाओं का उदात्तीकरण करने का भाव है कविता। दुनिया में कविता पहले शुरू हुई व्याकरण बाद में।
इस अवसर पर वाराणसी से पधारे श्री श्रीकृष्ण तिवारी ने कहा कि काव्य लेखन एक चक्रव्यूह है। तुक काव्य का काव्यात्मक पक्ष है। उन्होंने तुक व मात्रा तथा कविता की बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया।
समापन सत्र के दौरान श्री कुंवर बेचैन ने कहा कि शब्दों को भावपूर्ण ढंग से कहा जाये वही कविता है। उन्होंने कविता लिखने के ढंग को बेहद सरल शब्दों में बताया तथा कविता लेखन को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर डा0 बुद्धिनाथ मिश्रा ने भी कविता लेखन पर अपने विचार प्रस्तुत किये। समापन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को संस्थान द्वारा प्रमाण पत्र भी वितरित किया गया।
समापन सत्र के तृतीय सत्र में महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला को समर्पित कविता पाठ किया गया। इस अवसर पर श्री आत्म प्रकाश शुक्ल, कानपुर, डा0 कुंवर बेचैन गाजियाबाद, श्री श्रीकृष्ण तिवारी, वाराणसी, डा0 बुद्धिनाथ मिश्र, देहरादून, श्री रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी, आगरा, श्री सतीश आर्य, गोण्डा, डा0 मधुरिमा सिंह, श्री रमेश रंजन, श्री देवल आशीष (लखनऊ) आदि कवियों द्वारा कविता पाठ किया गया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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कविता लेखन एवं काव्य गोष्ठी पर कार्यशाला 07 व 08 फरवरी को

Posted on 07 February 2013 by admin

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में जयशंकर प्रसाद एवं सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की पावन स्मृति को समर्पित कविता लेखन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन आगामी 07 व 08 फरवरी को निराला साहित्य केन्द्र एवं सभागार हिन्दी भवन में किया जायेगा। इसकी अध्यक्षता हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष, उदय प्रताप सिंह करेंगे।
यह जानकारी हिन्दी संस्थान के निदेशक डा0 सुधाकर अदीब ने दी है। उन्होंने बताया कि कविता लेखन विषय पर केन्द्रित कार्यशाला चार सत्रों में होगी। 07 फरवरी को पूर्वाह्न 11ः30 बजे आयोजित उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डा0 कुॅवर बेचैन, होंगे। बीज वक्तव्य श्री मूलचन्द्र गौतम का होगा।
डा0 अदीब ने बताया कि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की स्मृति को समर्पित कार्यशाला के 08 फरवरी को आयोजित तृतीय सत्र में देश के प्रख्यात कवियों द्वारा कविता पाठ किया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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