हिन्दी के लोक कवियों में घाघ का महत्वपूर्ण स्थान है

Posted on 03 October 2018 by admin

राष्ट्रीय पुस्तक मेला में संस्था द्वारा ‘महाकवि घाघ’ पर आयोजित विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ साहित्यकार मधुकर अस्थाना ने आयोजकों द्वारा की गयी मांग का समर्थन करते हुये कहा कि घाघ की जन्मस्थली (जन्म ग्राम) पर स्मारक बनवाने से जहां उनके प्रशंसकों की मांग पूरी होगी वहीं भावी पीढ़ी को ऐसे सूक्तिकार कवि के बारे में विस्तृत जानकारी भी मिलेगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हरिओम शर्मा ’हरि‘ ने कहाकि हिन्दी के लोक कवियों में घाघ का महत्वपूर्ण स्थान है। घाघ लोक जीवन में अपनी कहावतों के लिए प्रसिद्ध है। घाघ की कहावतें आज भी जन-मानस में अत्यधिक लोकप्रिय है। ऐसे महान सूक्तिकार को याद कर भावी पीढ़ी के समक्ष उनकी कहावतों को और प्रचलित करने की आवश्यकता है।
img-20181003-wa0038इस अवसर पर कानपुर से पधारे वरिष्ठ कवि एडवोकेट डा. विनोद त्रिपाठी ने स्वास्थ के सम्बन्ध में घाघ की कहावतों के माध्यम से जानकारी देते हुये कहा यदि व्यक्ति अमल करे तो उसका स्वास्थ सदैव उत्तम रहेगा। प्रातःकाल खटिया से उठि कै, पिये तुरतें पानी, कबहूं घर में वैद न अइहै, बात घाघ कै जानी देखिये उपरोक्त पंक्तियां
स्वल्पाहार स्वास्थ के लिये उत्तम होता है आपने इस तथ्य को समझाते हुये कहा- रहै निरोगी जो कम खाय, बिगरै काम जो न गम खाय।
कन्नौज से आये ब्रजेश कुमार बेबाक ने पशुपालन व ग्राम्य जीवन पर घाघ की कहावतों के माध्यम से कहा- सावन घोड़ी भादों गाय- माघ मास जो भैंस वियाय, कहें घाघ यह सांची बात, आप मरे या मालिक खाय। शायर मुफीद कन्नौजी ने घाघ के ऊपर अपने दोहों के माध्यम से उनकी सूक्तियों से सीखने की बात कही। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्री राम शरण वाजपेयी आदि साहित्यानुरागी, उपस्थिति थे।
संचालन संस्था के अध्यक्ष मनोज कुमार शुक्ल ने किया व आभार कार्यक्रम के संयोजक डा. जितेन्द्र वाजपेयी ने किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की गयी कि घाघ के जन्म स्थान कन्नौज में एक स्मारक बनवाया जाये।

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