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Archive | कला-संस्कृति

कार वर्सेज़ वाइल्ड

Posted on 11 September 2013 by admin

बियाबान की दक्षता से ज्यादा खतरनाक और कोई चीज नहीं होती। इस सितम्बर में डिस्कवरी चैनल एक बिल्कुल नई रोमांचक श्रृंखला,

कार वर्सेज़ वाइल्ड पेश कर रहा है जो मैक्सिको के मनोहारी मगर बेहद बेरहम भूदृश्यों को पेश करती है। दर्शक ब्रिटिश स्पैशल फोर्सेज के एक पूर्व सैनिक गैरी हम्फ्री के साथ एक रोमांच से भरे सफर पर चलेंगे, बिल वू कारों के शौकीन एक अमरीकी नागरिक हैं और रूबी उनकी भरोसेमंद और रोमांच के लिए हमेशा तैयार फोर व्हील ड्राइव वाली कार है। कार्यक्रम में ये लोग इंसान और मशीन, दोनों की सीमाओं का पूरा इम्तिहान लेते हैं क्योंकि ये ऐसी मुश्किल जगहों पर जाते हैं जहां पहले कभी कोई कार नहीं गई।

10 भाग वाली इस श्रृंखला कार वर्सेज़ वाइल्ड को केवल डिस्कवरी चैनल पर 16 सितम्बर से हर रात 10 बजे दिखाया जाएगा।  edited-car-vs-wild-discovery-channel-1

हर एपिसोड में बिल और गैरी एक बेहद चरम पर्यावरण में रूबी नामक एक कार के साथ जाते हैं जिसे ऐसे भूदृश्यों के लिए सज्जित नहीं किया गया है। इन तीनों को वेराक्रूज के ज्वालामुखीय इलाके और क्रेटरों से होकर अपनी आखिरी मंजिल ओरिजाबा तक पहुंचना है जहां के जंगल दम घोटने वाले और बेहद घने हैं। इनका सामना खतरनाक प्राकृतिक बाधाओं से होता है जो इनकी शारीरिक सीमाओं का इम्तिहान लेती हैं। इन्हें अपने डर पर काबू पाते हुए सांपों, चमगादड़ों से भरी गुफाओं और गहरे लगूनों का सामना करना है या इन्हें 70 मीटर गहरी एक कैन्यन में भी उतरना है। इस बियाबान में समय की कोई सीमा नहीं है। लेकिन धीमे चलने से इस निडर टीम को नुकसान ही होगा। आखिरकार बिल और गैरी को अपने सामने मौजूद चुनौतियों का सामना करने के लिए रफ्तार और रणनीति, दोनों के बीच ही संतुलन बनाना होगा।

इस कार्यक्रम का मुख्य तत्व है मानव, मशीन और प्रकृति के बीच मौजूद पेचीदा रिश्ता। दर्शक बिल और गैरी को प्रेरणाप्रद जोखिम उठाते और व्यावहारिक विकल्प ढूंढते देखेंगे जो हरे-भरे जंगलों में से रूबी को टारजन के अंदाज में आगे बढ़ाने के लिए लताओं और पेड़ों का इस्तेमाल करते हैं। दर्शक दक्षिण-पूर्व में मौजूद 14 हजार फुट ऊंचे पिको डे ओरिजाबा माउंटेन पर चढ़ाई करने के एक संभावित रेकाॅर्ड कीर्तिमान को भी देखेंगे। ये पहाड़ मैक्सिको में सबसे ऊंचा है और ये अपनी चट्टानों के बीच खोजियों को निगलता रहता है। सबसे आखिर में ये तीनों कुछ ऐसी जगहों पर से सफर करने की कोशिश करते हैं जहां पहले कभी कोई कार नहीं गई। इनमें एक ज्वालामुखीय क्रेटर में बनी झील भी है, और कहा जाता है कि यहां मानव बलि दी जाती थी।

इस सफर को पूरा करने के लिए महारतों और तुरत-फुरत लिए जाने वाले फैसलों के अलावा भी बहुत कुछ चाहिए होगा। क्या ये तीनों बिना कोई नुकसान उठाए ये काम कर पाएंगे? जीत किसकी होगी - कार की या बियाबान की? दर्शक 16 सितम्बर, 2013 से, हर रात 10 बजे दिखाए जाने वाले कार्यक्रम कार वर्सेज़ वाइल्ड में दिल की धड़कन बढ़ा देने वाले एक्शन को देखेंगे।

एपिसोडों की सुखिऱ्यांः

स्काई प्लेटफाॅर्मः बिल, गैरी और रूबी दक्षिणी मैक्सिको के सिएरा हुआरेज पहाड़ों में जाते हैं जिनकी ऊंचाई समुद्र की सतह से 1800 मीटर है, और ये पूर्व की ओर फैले हुए हैं। ये पत्थर से बने एक पवित्र मंच की ओर बढ़ते हैं और वहां तक जाने के लिए स्थानीय अमरीकियों के पैदल मार्ग को अपनाते हैं। यहां हमारे नायकों का सामना ग्रेनाइट पत्थरों की भूलभुलैया से होता है, हर मोड़ पर ऐसा लगता है जैसे ये पलट जाएंगे या उन्हें कुचल देंगे। बाद में जब बिल और गैरी घने पहाड़ी जंगल में भटक जाते हैं तो उन्हें वहां से निकलने का रास्ता प्राकृतिक संसाधनों को इस्तेमाल करके ढूंढना होता है। आखिरकार ये लोग स्काई प्लेटफाॅर्म के आधार तक पहुंच जाते हैं, लेकिन पांच सौ मीटर ऊंची इस प्राकृतिक चट्टानी सीढ़ी पर चढ़ना इनके लिए कुछ ज्यादा ही मुश्किल चुनौती साबित हो सकता है।

अनएक्सप्लोर्ड वैलीः बाहा, मैक्सिको में गैरी और बिल एक बेहद दूरदराज घाटी का ट्रैक करते हैं। इसका न तो कोई नाम है, और रूबी के यहां पहुंचने से पहले यहां कोई वाहन आया भी नहीं है। यहां पहुंचने के लिए इन तीनों को बेहद खतरनाक और अप्रत्याशित रियो हार्डी को पार करना पड़ता है, जो मैक्सिकाली वैली के साथ-साथ 26 किलोमीटर की लम्बाई में मौजूद है। यहां पानी बहुत गहरा है और ये लोग केवल उम्मीद और दुआ ही कर सकते हैं कि रूबी आंशिक रूप से पानी में डूब कर इस दूरी को पार कर लेगी। अगर ये लोग इस पानी में न भी बहे तो भी 10 लाख एकड़ में फैला नमक वाला मैदान लगूना सलाडा उनकी इस चुनौती की आखिरी बाधा तक पहुंचने का रास्ता तो फिर भी बाधित किए ही रहेगा। यानी 35 मीटर ऊंची एक चट्टान। बेहद गर्म लगूना सलाडा के बाजू में सिएरा डे हुआरेज पहाड़ मौजूद है।

बिहाइंड द सीन्सः दो भाग वाले इस विशेष एपिसोड में बिल और गैरी मैक्सिको के अपने चरम एडवैंचर के बारे में अपना नजरिया पेश करेंगे। वे एक झरने से छलांग लगाते हैं, और जंगल में चमगादड़ों वाली एक गुफा में भी जाते हैं। हम इन तीनों के साथ एपिसोड-1 से, इनकी यात्रा की शुरूआत से ही रहेंगे और ऐसी फुटेज देखेंगे जो पहले कभी देखी ही नहीं गई। रूबी जंगल के एक ढलान पर से नीचे आने के लिए जूझती है, और बिल और गैरी ये साबित कर देते हैं कि आप जैसा सोचते हैं, वैसा हमेशा होता नहीं है। आखिर में दर्शक फिल्म क्रू को भी देखेंगे जो मैक्सिको में सबसे नम, सबसे गर्म और सबसे खतरनाक जगहों पर टीम के साथ बने रहने और तमाम हालात को झेलने की कोशिश करते रहते हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

agnihotri1966@gmail.com

sa@upnewslive.com

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सहारा वन के नये धारावाहिक ‘’आखि़र बहू भी तो बेटी ही है‘’ पर शुरू होगी एक ज्वलंत बहस

Posted on 05 September 2013 by admin

  • सोमवार, 16 सितम्बर रात 9 बजे से होगा प्रसारण

समाजशास्त्री इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि आखि़र संयुक्त परिवार एकल परिवारों में क्यों टूटते जा रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन एक मुख्य कारण सास और बहू के बीच एक-दूसरे के प्रति अपेक्षाओं में मतभेद होना है। इसी विषय को ध्यान में रखते हुए सहारा वन पर आगामी सोमवार 16 सितम्बर से रात 9 बजे एक नये धारावाहिक ‘आखि़र बहू भी तो बेटी ही है‘ का प्रसारण शुरू किया जा रहा है, जो शुक्रवार तक प्रति सप्ताह जारी रहेगा।

edited-aakhir-bahu-bhi-toh-beti-hee-haiसहारा वन का ‘आखि़र बहू भी तो बेटी ही है‘ ऐसी कहानी है जिसमें बहू और बेटियों से अलग-अलग व्यवहार किया जाता है। कहानी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की रूढि़वादी परिवार की है, जहां सास ‘नौलखा देवी‘ (प्राची पाठक) बहुत सख्त, दूसरों पर हावी होने वाली और बेहद रूढि़वादी महिला हैं। वह अपनी बहुओं को दकियानूसी विचारों के अनुसार रखती हैं। उनका विश्वास है कि घर की बहू पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए और इसमे कोई भी बदलाव पूरे घर को तोड़ सकता है।

इसके विपरीत, सिया (पायल राजपूत) युवा, जोश से भरी, चंचल और बहिर्मुखी स्वभाव की है। वह युवा महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली आज के दौर की निडर एवं आत्मसम्मान वाली युवती है। वह बुद्धिमान, आत्मविश्वासी भी है, जिसके खुद के विचार हैं और सही के साथ खड़े होने का जिसमें साहस है। उसका दृढ़ विश्वास है कि उसका ससुराल उसके मायके से अलग नहीं होगा

श्री शरद राज, प्रोग्रामिंग और कान्टेट प्रमुख, सहारा वन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड ने धारावाहिक के बारे में कहा, ‘‘बदलते समय के साथ सामाजिक एवं पारिवारिक ýझान भी बदलने की आवश्यकता है और हम अपने नये धारावाहिक ‘‘आखि़र बहू भी तो बेटी ही है‘‘ में इसी बात को दर्शकों के सामने रखेंगे। हमारे देश की उभरती युवा महिलाओं के दिमाग में एक सवाल है कि यदि लड़की अपना परिवार छोड़कर पति के परिवार को अपने परिवार की तरह अपनाती है और अपने सभी कर्तव्य निभाती है, तो फिर क्यों सास-ससुर, खासकर सास उनके साथ एक बेटी की तरह व्यवहार नहीं करतीं? क्यों उसे ठेठ बहू बनना पड़ता है जिस पर कई प्रतिबंध हो, और शेष परिवार से अलग-थलग हो, जबकि उसके पास ‘‘संस्कार‘‘ लाने का अधिकार है? आखि़र बहू भी तो बेटी ही है धारावाहिक का प्रयास वर्तमान समय की महिलाओं के इसी सवाल को सामने लाना है… यह आज की प्रत्येक ‘बहू‘ की भावनात्मक महत्वाकांक्षा है और अब समय आ गया है कि इस मुद्दे पर खुलकर बहस हो।‘‘

भारतीय टेलीविजन पर अपने पहले शो के साथ एंट्री करने वाले भारत श्रीवास्तव, निर्माता, इम्पैक्ट टेली नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड, ने कहा, ‘‘आखि़र बहू भी तो बेटी ही है भारतीय शादी की परम्परा से जुड़े विभिन्न रंगों को प्रस्तुत करता है, जहां एक लड़की मासूमियत से परिपक्वता, बेफिक्र जिन्दगी से जिम्मेदारी उठाने की भूमिका और एक लड़की से महिला में परिवर्तित होती है। इस प्रक्रिया में, लड़की को बहुत कुछ खोना पड़ता है, लेकिन समाज इसे सही तरीके से नहीं लेता। उसकी सबसे बड़ी चुनौती नये परिवार में सामंजस्य बिठाना होता है। निस्संदेह उसकी सासू मां, खासकर संयुक्त परिवार में मुख्य केन्द्र बन जाती है। हमारी कहानी इन दोनों चरित्रों के इर्दगिर्द घूमती है कि किस तरह से दिलचस्प घटनाएं इन दो अजनबियों को मजबूती से बांधती है कि एक बहू को बेटी के तौर पर और सासू मां को मां के रूप में स्वीकारा जाए।‘‘ बताते चलें कि ‘आखि़र बहू भी तो बेटी ही है‘ सास नौलखा देवी, उसकी बहू सिया और अलग-अलग सोच के दो भिन्न लोगों के मिलने से उनके बीच पैदा हुए विवाद की कहानी है। शो में सास और बहू के बीच सम्बन्धों को दिखाया गया है। पूरी अवधारणा हमारे समाज में बहू और बेटियों से किये जाने वाले अलग-अलग व्यवहार पर आधारित है। शो की समाजवादी कहानी में पायल राजपूत, प्राची पाठक, सीमा पांडे, आर्यन पंडित और पारितोष सैंड जैसे प्रतिभाशाली कलाकार नजर आएंगे।

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें:

तिशम घटक/हेमन्त शुक्ल

सहारा काॅर्पोरेट कम्युनिकेशन्स, लखनऊ

मोबाइल नं0 - 9838072633/9838689871

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

agnihotri1966@gmail.com

sa@upnewslive.com

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घर की चार दिवारी में कैद विवाद को उजागर करेगा सहारा वन का नया धारावाहिक

Posted on 22 August 2013 by admin

edited-akhir-logoभारतीय परिवारों में पुरानी पीढि़यां परंपराओं से बंधी हुयी है, जबकि युवा पीढ़ी प्राचीन रीति-रिवाजों और मान्यताओं को तोड़ना चाहती है जिसे लोग अपने ही परिवार में इसे महसूस कर रहे हैं। बरसों से, समाज का आईना रहे टेलीविजन ने संबंधों में बदलते रूख पर ध्यान केन्द्रित किया है। अब जल्द ही सहारा वन ऐसा कार्यक्रम प्रसारित करने जा रहा है, जो सास और बहू के रिश्तों पर आधारित होगा। दोनों ही भारतीय परिवार की मुख्य कडि़यां होती हैं।

सास और बहू के बीच सम्बन्धों और उनके बीच होने वाली बातचीत में अच्छा-खासा बदलाव आया है। हालांकि, दोनों के मतों में काफी मतभेद भी होता है, लेकिन उसे बेहद संवेदनशीलता और धैर्य के साथ सुलझाना चाहिये। सहारा वन का आगामी शो इन सभी को एक कहानी के रूप में प्रस्तुत करेगा, जो कि न सिर्फ मनोरंजनात्मक होगा बल्कि लाइव बहस भी प्रारंभ करेगा। दर्शकों को बेहतरीन कहानी, चरित्र और परिस्थितियां देखने को मिलेंगी, जिनके साथ वे अपना जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।

टीवी धारावाहिकों की महिला दर्शक नारी-केन्द्रित कार्यक्रम देखना चाहती हैं। उनका यह रवैया हमेशा बरकरार रहा है। बहरहाल, अब चीजों में थोड़ा बदलाव आया है। अब वे महत्वहीन और ओछे विषय की बजाय ऐसे कार्यक्रम देखना चाहती हैं, जो चर्चा प्रारंभ करें और ऐसे मुद््दो को सामने लायें, जिन पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती। यही कारण है कि सहारा वन जल्द ही अपने एकदम नये धारावाहिक के साथ कुछ नयापन लाने की कोशिश करेगा।

आखिर बहू भी तो बेटी ही है- क्या आप सहमत हैं? https://www.facebook.com/aakhirbahubhi  पर लाॅग आॅन कर इस वाद-विवाद में भाग लें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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फिल्म ’’बात बन गई’’ की पहली झलक

Posted on 19 July 2013 by admin

edited-back-1जेपिको इन्फोटेंमेंट व ए एस आर मीडिया की फीचर फिल्म ’’बात बन गई’’ 30 अगस्त 2013 को प्रदर्शन के लिए तैयार है। इस फिल्म के प्रस्तुतकर्ता हैं विभु अग्रवाल तथा जेपिको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, निर्माता सैय्यद आसिफ जाह और निर्देशक शुजा अली की यह फिल्म ’’बात बन गई’’ शेक्सपियर की थ्योरी की एक ही चेहरे के सात इंसान होते है, पर आधारित एक हास्य पारिवारिक फिल्म है।
फिल्म ’’बात बन गयी’’ हमशक्लों की कहानी है, जिनके बजह से कई तरह की ग़लतफहमी कहानी में पैदा होती है। इस फिल्म का नायक ’कबीर’ (अली फज़ल) एक लेखक हैं जो हसीन व जवान ’रचना’ (अनीसा) से दीवानावार मोहब्बत करता है, रचना के बडे भाई ’लक्ष्मी निवास’ (गुलशन ग्रोवर) और उनकी पत्नी ’सुलोचना’ (अमृता रायचंद) रचना के लिए एक पढे लिखे प्रोफेसर जैसे वर की तलाश में है। कबीर, लक्ष्मी निवास को अपने गुणों से प्रभावित करता है, पर कहानी में दिलचस्प मोड तब आता है जब कबीर का हमशक्ल रसिया बिहारी जो कि एक माफिया पाशा के लिए काम करता है, रचना के घर संयोग से आ जाता है, लोग उसे ही कबीर समझ बैठते हैं, वो भी रचना का दीवाना बन जाता है। दूसरी तरफ लक्ष्मी निवास का भी एक हमशक्ल आ धमकता है। इस फिल्म की भूमिकाओं को लेकर दोहरी भूमिका वाली फिल्म भी नहीं कही जा सकती, क्योंकि फिल्म का नायक भारत में है, उसी शक्ल का दूसरा इंसान बैंकाक में है। इसी तरह फिल्म के अन्य पात्रों की शक्ल वाले अन्य इंसान कहीं न कहीं मौजूद है जो भाग्यवश भारत के मुंबई जैसे शहर में आ जाते हैं और घटनायें, दुर्घटनायें होती हैं। सभी पात्र किसी न किसी रूप में पारिवारिक माहौल से जुडे हैं जो घटनाओं और व्यवहारों के कारण हास्य पैदा करते हैं।
फिल्म का नायक अली फजल एक उपन्यासकार है, उसी तरह का दूसरा इंसान रसिया बिहारी है, इसी तरह गुलशन ग्रोवर प्रोफेसर है, जबकि उसकी शक्लवाला दूसरा इंसान एक गे है, इन पात्रों को लेकर एक नई कहानी की कल्पना निर्माता सैय्यद आरिफ जाह की है। पटकथा संवाद शुजा अली और अक्षय सिंह की है, संगीत हरप्रीत सिंह की है तो गाने लिखे हैं ए एम तारिफ ने, छायाकार दीपक पाण्डे, नृत्य रेंजू वर्गिस, संपादन मदन सागर, कला महेश कुडालकर की है। edited-gulshan-grover-amrita-raichand
फिल्म ’बात बन गई’ के मुख्य कलाकार हैं अली फजल (फिल्म ’3 इडियट्स’ व ’फुकरे’ फेम), अनीसा, गुलशन ग्रोबर, अक्षय सिंह, अमृता रायचंद, रज्जाक खान। फिल्म में अनेक कलाकार होने पर भी हर पात्र पूरा मनोरंजन करने में सफल रहेगी। निर्माता सैय्यद आसिफ जाह पिछले कई सालों से फिल्म और पत्रकारिता क्षेत्र से जुडे हुए है। सुप्रसिद्ध निर्माता निर्देशक सुल्तान अहमद के सहायक रह चुके निर्माता आसिफ जाह लगभग एक हजार घंटों की अलग अलग धारावाहिकों का निर्माण, विज्ञापन, कार्पोरेट फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं, कुछ समय तक पत्रकारिता से भी जुडे रहे हैं और जुडे हुए हैं।
निर्देशक शुजा अली लगभग बीस वर्षों से धारावाहिकों और आकाशवाणी के कार्यक्रमों से जुडे हुए है, लगभग अðारह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषओं में काम कर चुके वाले शुजा अली ने कई धारावाहिकों का निर्देशन किया है, इसके साथ ही वह अमरीकन टीवी और अफगान टीवी से भी जुडे रहे हैं।
उनकी फिल्म ’बात बन गई……।’ एक नई और अनोखी प्रस्तुति होगी जो नए कलाकारों के साथ भी दर्शकों का पूरा मनोरंजन करेगी…….।

edited-director-shuja-ali-with-lead-actress-anisa-along-with-gulshan-grover-amrita-raichand

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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आनंद मिलिंद लाएंगे वापस लोरियों का जमाना

Posted on 15 May 2013 by admin

edited-rajuचाहे गरीब की बस्ती में रोता एक बच्चा होए या अंबानी के पैलेस में रोता हुआ राजकुमार इन दोनों को चुप कराने का मीठा सा तरीका है उनको लोरी सुनाना। यह लोरी मैंने भी सुनी है आपने भी सुनी है और हिंदुस्तान के उन करोड़ों बच्चों ने सुनी है जिन्हें रातो को नींद नहीं आती है। लेकिन पिछले कुछ सालों से संगीत की दुनिया में ढंग बेढंग के गाने आ रहे हैं जिससे बच्चे सोने के बजाय डर जाते हैं। ऐसे माहौल में लोरी के गायक कपिल रौनक ने बरसों बाद लोरियों को वापस लाने की ठान रखी है। और उन्होंने लोरियों की महारानी अलका याज्ञिक के साथ में श्लोरीश् नाम से एक अलबम तैयार किया है जिसमें आठ गाने उन्होंने गाएं हैं। इन गानों को मधुर संगीत दिया है जाने माने संगीतकार आनंद मिलिंद ने।
लोरियों से भरे श्लोरीश् इस अलबम का विमोचन वरली के एक होटल में पूर्व राष्ट्रपती श्रीमती प्रतिभाताई पाटील के सुपुत्र श्रीण् राजेंद्र शेखावत के हाथों संपन्न हुआ। इस विमोचन समारोह के लिए बॉलीवुड के प्रख्यात प्रचारक राजू कारिया ने हमें आमंत्रित किया था। इस शुभ अवसर पर संगीतकार आनंद मिलिंद का राजेंद्र शेखावत के हाथों शाल और नारियल देकर सम्मान किया गया क्योकि उन्होंने भी इंडस्ट्री में अपने कैरिअर के २५ साल पूरे कर लिए हैं। इस शुभ अवसर पर कई धारावाहिकों के नायक अंकित पाटीदार और सुप्रसिद्ध मॉडल नीतू सिंह भी हाजिर थे।
इस मौके पर संगीतकार आनंद मिलिंद ने बतायाए मुझे भी लोरियों का शौक बचपन से रहा। मेरे पिताजी संगीतकार स्वर्गीय चंद्रगुप्त ने कई फिल्मों में लोरियां रिकार्ड की है। और खुशकिस्मती से मैंने भी करिश्मा कपूर की फिल्म अनाड़ी में एक लोरी रिकार्ड की थी जो बहुत ही लोकप्रिय हुई थी।
बरसों बाद जब कपिल ने मुझे अपना कॉन्सेप्ट सुनाया तो मुझे अपना बचपन याद आ गया कहते हुए आनंद मिलिंद ने बतायाए और इस आठ गाने के अलबम को मैंने तैयार किया। यह सभी गीत लिखे हैं निदा फाजलीए शब्बीर अहमद और आज जो गाना हम पिक्चराईज कर रहे हैं वह लिखा है खिलेश शर्मा ने। खिलेश शर्मा ने इसके पहले सुलतान खान के पिया बसंती काहे जलाए आजा को लिखा था।
एक मजबूत टीम के साथ में आठ गानों को लेकर लोरियों की टीम मदर्स डे के दिन यह म्यूजिक अलबम और सीडी रिलीज करने जा रहा है। इसे रिलिज कर रहा है टाइम्स म्यूजिक और जॉन्सन बेबी बेड टाइम इसे प्रेजेंट कर रहे हैं। इस अलबम के निर्माता है वेलेंसिया एंटरटेनमेंट प्राण् लिण्
यह अलबम मदर्स डे के दिन उन करोड़ों मांओं के अर्पित किया जाएगा जो अपने बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखना चाहती है। इस अलबम में मशहूर मॉडल नीतू सिंह पहली बार मां के रूप में नजर आएगी। इसके पहले नीतू सिंह ने क मशहूर और बड़ी एड फिल्में की है जैसे कीए जॉन्सन एंड जॉन्सनए कोलगेटए रसनाए तनिष्क तथा अन्य कई। अलबम में नीतू सिंह के अपोजिट हैं अंकित पाटीदार। कई धारावाहिकों में प्रमुख भूमिका निभा चुके अंकित का यह पहला म्यूजिक अलबम है। नीतूए अंकित यह अलबम करके अपने आप को बहुत खुशनसीब मान रहे हैं।
इस अलबम के मुख्य गायक कपिल ने कहाए मैं बड़ा खुशकिस्मत हूं कि मुझे आनंद मिलिंद जैसे महान संगीतकार और अलका याज्ञिक जैसी मशहूर गायिका के साथ में काम करने का मौका मिला। भगवान से मैं प्रार्थना करता हूं कि हर साल मदर्स डे पर मैं इसी तरह एक के बाद एक अलबम बनाते जाऊं जो लोरियों पर आधारित हो। यह लोरियों का अलबम मैं अपनी परमपूज्य मां और करोड़ों माताओं को अर्पित करता हूं। अलबम के प्रचारक हैं राजू कारिया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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छः दिवसीय प्रदषर्नी का आज हुआ समापन समापन में उपस्थित थे पूर्व वनमंत्री फतेह बहादुर सिंह, कलाकार व कला प्रेमी

Posted on 15 May 2013 by admin

बाघ व प्राकृतिक संरक्षण विषय पर इनके प्रति जागृत हेतु एक अखिल भारतीय प्रदषर्नी का आयोजन केन्द्रीय ललित कला अकादमी, अलीगंज, लखनऊ में आज शाम 5 बजे मुख्य अतिथि के रूप में पधारे पूर्व वनमंत्री उ0प्र0 फतेह बहादुर सिंह के करकमलों द्वारा पानी में पुष्प डाल कर समापन हुआ।  प्रदषर्नी में बाघ की विभिन्न मुद्रओं में पेन्टिंग देखर मुख्य अतिथि भी अंचंम्भित हो गये। पूरे भारतवर्ष से आये 28 कलाकारों में से कुछ कलाकारों ने समक्ष अपनी कला का प्रदषर्न भी किया, किसी ने भी रंग-ब्रुष के पेन्टिंग करने का तरीक़ा बताया, तो किसी ने रंग का अलग तरह से प्रयोग करने, किसी ने ब्रुष व नाइफ का पेन्टिंग बनाने में कैसे प्रयोग करें ताकि पेन्टिंग और अच्छी बने। उपस्थित कलाकारों का बुके देकर सम्मान किया गया जिनमें उपस्थित कलाकार शेखर विसवास, राजेष हर्ष, मो शाकिर स्वाभिमानी, डा. कुमुद सिंह, डा. जूही, शुभाषिष चक्रवर्ती, अरूनिमा कपूर, नाबा प्रितिम दास, अनुभा सिंह, मोहम्मद इसाक, विजय कुमावत, श्रुति सालवन, अनीता महावर, स्मिता सैनडलवाला, रीना चैधरी, अजय वर्मा, संतोष कुमार, तबस्समुम फात्मा, डा. फरहा खान, सैय्यद ज़ाकिर हुसैन, स्तुति पाण्डेय, फैज़ फात्मा नक़वी, सुहानी जैन, मौसवी चैहान, रूना शैलिना बाबू, शाजि़या अनवर, आषा देबर्मा, मधू सिंह व सुषमा कुमार थी। की लगभग 70 पेन्टिंग प्रदर्षित की गयी है। इन पेन्टिंगों में अलग-अलग माध्यम प्रयोग किया गया है कही नाइफ का तो कहीं लालटैन की कालक का, इन माध्यमों का कलाकारों द्वारा बखूबी प्रयोग करके पेन्टिंग को सजीव बना दिय है। इस प्रदषर्नी की मुख्य बात यह कि इसमें 85 प्रतिषत भाग लेने वाले कलाकार महिलायें हैं, इसमें अधिकतम कलाकारों ने अपनी पेटिंग का मुख्य विषय बाघ एवं प्रकृति का संरक्षण ही रखा है।
सुषमा आर्ट फैमिली की सचिव सुषमा कुमार ने बाघ व प्राकृतिक संरक्षण विषय पर लगी प्रदषर्नी के बारे में जानकारी दी कि इस में 70 पेन्टिंग प्रदर्षित की गयी थी। उन्होंने आगे बताया कि इस विशय पर आगे भी काम करते रहेंगे और 2014 अक्टूबर में ये प्रदषर्नी दिल्ली व कारबेट नेषनल पार्क में लगाने का इरादा है जिसके लिए कार्यवाही षुरु हो चुकी है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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बंुदेली पुरस्कार के लिये पुस्तकें आमंत्रित

Posted on 08 May 2013 by admin

13 अखिल भारतीय बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषदृ के तत्वावधान में आगामी बंुदेल केसरी छत्रसाल की जयंती वर्ष 2013पर आयोजित होने वाले बंुदेली समारोह-2013 में बंुदेली पुरस्कार हेतु प्रविष्टियाॅं आमंत्रित हैं। इसके लिये बंुदेली भाषा में या बंुदेलखण्ड के किसी विषय पर ,तीन तीन पुस्तकें, 15मई 13बुधवार तक परिषद कार्यालय 75 चित्रगुप्त नगर,कोटरा ,भोपाल-462003 के पते पर लेखक या प्रकाशक मौलिक लेखन के प्रमाणपत्र सहित ,प्रेषित कर सकते हैं। प्रस्तुत पुस्तकें लेखक के परिचय एव फोटो सहित हों।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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दर्भ सूचनाओं का वृहद ग्रन्थ ‘उत्तर प्रदेश-2012’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) अनेक नई सूचनाओं एवं पर्यटन स्थलों के चित्रों के साथ प्रकाशित छात्र-छात्राओं को 10 प्रतिशत छूट पर उपलब्ध

Posted on 30 April 2013 by admin

29 अप्रैल, 2013
उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित किये जाने वाला महत्वपूर्ण वार्षिक संदर्भ ग्रन्थ ‘‘उत्तर प्रदेश-2012’’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) प्रकाशित हो गया है। गत लगभग एक दशक से इस संदर्भ ग्रन्थ ने अपनी सन्दर्भीय उपयोगिता के कारण पाठकों के बीच पहचान हासिल की है। अपनी सारगर्भित महत्वपूर्ण सूचनाओं तथा संदर्भीय दृष्टि से उपयोगी सामग्री को समावेश करने के कारण शोधकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के लिए यह ग्रन्थ इतना उपयोगी हो गया है कि प्रतियोगी छात्र-छात्राएं लगातार इसके प्रकाशन की प्रतीक्षा करते हैं। इसके अलावा इस संदर्भ ग्रन्थ में जनप्रतिनिधियों, लेखकों, पत्रकारों एवं ग्राम स्तर पर प्रधानों एवं ब्लाक प्रमुखों तथा अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में सारगर्भित सूचनाएं देकर अत्यंत उपयोगी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित ऐतिहासिक, भौगोलिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विकासपरक सूचनाओं की अद्यतन एवं वृहद जानकारियां इस पुस्तक में शामिल की गई हैं। इस संदर्भ ग्रन्थ में उत्तर प्रदेश के इतिहास, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन स्थल, सिनेमा, पत्रकारिता, स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास, प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चित्र, साहित्यकारों, चित्रकारों, पत्रकारों, संगीतकर्मी एवं रंगकर्मी तथा उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित सिने कलाकारों के महत्तवपूर्ण चित्रों को शामिल करने से इसकी संदर्भीय उपयोगिता और बढ़ गयी है। संदर्भित प्रकाशन में प्रथम बार डाॅ राममनोहर लोहिया पार्क, गोमती नगर एवं जनेश्वर मिश्र पार्क, लखनऊ का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश के इतिहास से सम्बन्धित जानकारियां विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
‘उत्तर प्रदेश-2012’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण)  में अनेक नई जानकारियों का समावेश किया गया है। इसमें प्रदेश में जन्में प्रशंसित, पुरस्कृत खेल विभूतियों, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री से अलंकृत महानुभावों, साहित्य एकेडमी-ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकारों, परमवीर, महावीर एवं अशोक चक्र से सम्मानित शूरवीर सैनिकों तथा नवीनतम विकसित पर्यटन स्थलों के रंगीन चित्रों को पहली बार सम्मिलित कर पाठकों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। इसमें प्रदेश की संवैधानिक प्रणाली के साथ-साथ केन्द्रीय मंत्रिमण्डल, प्रदेश मंत्रिमण्डल, भारत के मुख्य न्यायधीश, भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, उ0प्र0 से राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंर्तराष्ट्रीय दिवस, प्रदेश के लोकसभा एवं राज्य सभा सदस्य, भारत रत्न से सम्मानित विभूतियां, भारत के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री प्रदेश के विधायक तथा विधान परिषद सदस्य तथा लोक सभा अध्यक्ष के साथ-साथ समस्त प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री, भारत के नोबेल पुरूस्कार विजेता आदि को सम्मिलित कर पुस्तक की सन्दर्भीय व्यापकता को बढ़ाया गया है।
इस सन्दर्भ ग्रन्थ में समस्त विभागों की वेबसाइटस के अतिरिक्त प्रदेश सरकार के समस्त विभागों के बारे में पर्याप्त जानकारी समाहित की गई है। इस संदर्भ ग्रन्थ मंे विकासपरक ग्राफ, चार्ट तथा उत्तर प्रदेश एवं भारत के मानचित्रों को भी पुस्तक की उपयोगिता बढ़ाने हेतु प्रकाशित किया गया है। प्रदेश के जनपदों के प्रमुख पर्यटक स्थलों के चित्रों को भी जनपदों के गौरव को उद्घाटित करने की दृष्टि से समाविष्ट किया गया है।
‘‘उत्तर प्रदेश-2012’’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) में प्रदेश के समस्त जनपदों की आधारभूत सूचनाओं को समाविष्ट किया गया है, जिससे पाठकों को प्रत्येक जिले के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है। इस पुस्तक में रंगीन ग्राफों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति, विकासपरक सूचनाएं, जनगणना, शिक्षा, उद्योग, कृषि आदि क्षेत्रों में विकास की स्थिति को दर्शाया गया है। पुस्तक में हिन्दी-उर्दू के साहित्यकारों, पत्रकारों, खेल एवं सिनेमा विभूतियों, रंगकर्मियों,पद्म भूषण तथा पद्म विभूषण से सम्मानित विभूतियों के चित्रों को प्रकाशित किए जाने से पुस्तक की संदर्भीय उपयोगिता और बढ़ गई है।
यह पुस्तक इस दृष्टि से भी उपयोगी है कि इसमें प्रदेश की विकास योजनाओं की विभागवार समुचित जानकारी भी दी गई है जिसका लाभ ग्रामीण जनता भी उठा सकती है। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश के बारे में सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ सरकार की भावी योजनाओं और विकास का व्यापक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करती है। उत्तर प्रदेश पर आधारित सूचना विभाग का यह सन्दर्भ प्रकाशन सन्दर्भीय जानकारियों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के बारे में वृहद जानकारी देता है। वार्षिकी उत्तर प्रदेश सूचना विभाग का नियमित प्रकाशन है, जो लगातार प्रतिवर्ष अपनी उपयोगिता को बढ़ाते हुए पाठकों और शोधार्थियों के बीच में उत्तरोतर लोकप्रियता हासिल कर रहा है। इसका प्रकाशन लखनऊ के भारत बुक सेण्टर 17, अशोक मार्ग, लखनऊ द्वारा किया गया है और यह लखनऊ के समस्त प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं के यहां बिक्री हेतु उपलब्ध करायी जायेगी। इसका मूल्य रू0 325/- है, जो छात्र-छात्राओं को दस प्रति छूट पर उपलब्ध होगी। ‘उत्तर प्रदेश-2012’’ (हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण) के माध्यम से जनता तक जरूरी सूचनाएं बेहतर ढंग से पहुंचाने का एक सफल प्रयास है।
पुस्तक के संपादन में निदेशक सूचना श्री प्रभात मित्तल, डा0 अनिल कुमार, अपर निदेशक एवं उनके मार्गदर्शन में गठित संपादक मंडल के सदस्य, समन्वय संपादक श्री दिनेश कुमार गर्ग एवं उनके सहयोगी श्री चन्द्रविजय वर्मा, अति0 जिला सूचना अधिकारी का कार्य निःसंदेह श्रमसाध्य एवं सराहनीय है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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अनीता सहगल सहित कई महान विभूतियां अस्तित्व सम्मान-2013 से सम्मानित।

Posted on 18 April 2013 by admin

edited-p1020609विकल्प सोसाइटी लखनऊ द्वारा आयोजित दक्षिण लखनऊ महोत्सव में मुख्य अतिथि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी एवं उपाध्यक्ष उ0प्र0 महिला आयोग सुरभि शुक्ला द्वारा उत्तर प्रदेश की महान विभूतियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अस्तित्व सम्मान-2013 प्रदान किया गया। शिक्षाविद् डा0 ए.पी. तिवारी, प्रशासनिक क्षेत्र के सी.एम. सिंह, पूर्व डी.जी.पी. एम.सी. द्विवेदी, पूर्व जनरल मैनेजर देना बैंक- एस.के. तिवारी, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तरू सक्सेना एवं सुचित्रा सिंह को, कला क्षेत्र में प्रसिद्ध नृत्यांगना मनीषा मिश्रा एवं बहुप्रतिष्ठित एंकर अनीता सहगल को, खेल के क्षेत्र में हाकी खिलाड़ी- सैयद अली तथा रचना गोविल, समाज सेवा क्षेत्र में सपना उपाध्याय, डा0 विवेक कुमार एवं सुधीर हलवासिया को सम्मानित किया गया। दक्षिण लखनऊ महोत्सव के मुख्य आयोजक आर.डी. द्विवेदी को सामजिक कार्यों के लिये विकल्प सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सरोजनी नगर विधायक मा0 शारदा प्रताप शुक्ल, विकल्प सोसाइटी के अध्यक्ष एस.एन. अवस्थी, रश्मि अवस्थी, मुरलीधर आहूजा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी एवं राजनेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विकल्प सोसाइटी के महासचिव शेखर त्रिपाठी ने सफलतापूर्वक किया। अस्तित्व सम्मान के साथ-साथ ‘महिसासुर मर्दिनी’ नृत्य ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के रोंगटे खड़े कर दिये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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निर्माता खालिद किदवई का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को धन्यवाद!

Posted on 18 April 2013 by admin

edited-khalid-kidwai-zakirअप्रैल, 2013: फिल्म ’’रामभजन जिंदाबाद’’ के निर्माता खालिद किदवई ने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने फिल्म उद्योग को बढावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2001 में बनी फिल्म नीति में संशोधन का निर्णय लेकर सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश सरकार के कलाकारों, तकनीकी पक्ष के लोगों को व पर्यटन उद्योग को बढावा देने की कोशिश की है, जो कि सराहनीय है, इस फिल्म नीति के कारण हिन्दी भाषा के साथ ही अवधी, ब्रज, बुन्देली, और भोजपुरी जैसे क्षेत्रीय भाषा की उन्नति होगी।
कुछ दिनों पहले हिंदी फिल्म ’’रामभजन जिंदाबाद’’ की पूरी शूटिंग बाराबंकी के आस पास ही लगभग 45 दिनों में हुई भी, जिसमें उत्तर प्रदेश के सरकारी महकमें से भरपूर सहयोग मिला। इस फिल्म में ओम पुरी, कुलभूषण खरबंदा, जगदीप, नवोदित कलाकार अभय जोशी, श्वेता भारद्वाज, सीमा आजमी (चक दे इंडिया फेम), जाकिर हुसैन व राम सेठी जैसे अभिनेता हैं।
खालिद जी ने कहा कि भविष्य में भी अखिलेश जी के सहयोग से फिल्म जगत को बढावा मिलता रहेगा जिसके कारण प्रदेश के कलाकारों व तकनीकी विशेषज्ञ लोगों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही साथ पर्यटन उद्योग भी विकसित होगा। निर्माता ने अखिलेश जी को तहे दिल से धन्यवाद दिया।

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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