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Archive | कृषि

प्रदेश सरकार किसानों के समग्र विकास के लिए कृतसंकल्प

Posted on 22 February 2013 by admin

  • वर्ष 2013-14 के बजट में किसानों से सीधे गेहूं और धान की खरीद किए जाने के लिए 9010 करोड़ रु0 की व्यवस्था
  • लगभग 8 लाख किसान ऋण मुक्त होंगे
  • बजट में ग्रामीण सम्पर्क मार्ग तथा पुलों के निर्माण पर  1877 रु0 व्यय करने की व्यवस्था
  • कृषि सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कार्याें के लिए 7061 करोड़ रु0 का प्राविधान

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के समग्र विकास के लिए कृतसंकल्प है। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार ने वर्ष 2013-14 के बजट में विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से अनेक प्राविधान किए हैं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के किसानों को ऋण के जाल से मुक्त कराने हेतु ऋण माफी योजना के अन्तर्गत वर्ष 2012-13 में 900 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। वर्ष 2013-14 में इस योजना के लिए 750 करोड़ रुपये व्यय किए जाने की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार से कुल 1650 करोड़ रुपये ऋण माफी के लिए उपलब्ध होंगे, जिससे प्रदेश के 08 लाख किसानांे को ऋण मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों को उनकी उपज की विपणन सुविधाओं हेतु ग्रामीण सम्पर्क मार्ग तथा सेतुओं के निर्माण के लिए 1877 करोड़ रुपये व्यय करने की व्यवस्था बजट में की गई है। इसके अतिरिक्त कृषि सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण से संबंधित निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों हेतु 7061 करोड़ रुपये व किसानों से सीधे गेहूं और धान की उपज की खरीद किये जाने हेतु 9010 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था की गई है।
प्रवक्ता ने बताया कि गन्ना किसानों के गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए 400 करोड़ रुपये, किसान दुर्घटना बीमा हेतु 375 करोड़ रुपये, आधारिक बीज भण्डारण योजना के अन्तर्गत खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, कपास आदि बीजों के भण्डारण हेतु 390 करोड़ रुपये तथा प्रमाणित बीजों, संकर बीजों, संकर मक्का बीजों तथा मूंगफली के संकर बीजों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 121 करोड़ रुपये की बजट में व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त किसानों को मुफ्त सिंचाई सुविधा हेतु 200 करोड़ रुपये, कृषकों के निजी नलकूपों को विद्युत आपूर्ति हेतु 240 करोड़ रुपये की सब्सिडी, किसानों के निजी नलकूपों के ऊर्जीकरण हेतु 170 करोड़ रुपये, व लघु एवं सीमान्त कृषकों को बोरिंग तथा पम्प सेट के लिए अनुदान देने हेतु      70.80 करोड़ रुपये की धनराशि 2013-14 के बजट में प्राविधानित की गई है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार प्रदेश के वर्ष 2013-14 के बजट में सोडिक लैण्ड रीक्लेमेशन हेतु 176.70 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना हेतु 771 करोड़ रुपये, फसल बीमा के प्रीमियम के भुगतान हेतु 60 करोड़ रुपये, प्रारम्भिक सहकारी कृषि ऋण समितियोें के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध कराने के लिए अनुदान हेतु 53.74 करोड़ रुपये, बीज ग्राम योजना हेतु अनुदान के लिए 12.12 करोड़ रुपये, किसानों को जिंक सल्फेट खाद पर सब्सिडी के लिए 13 करोड़ रुपये, रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम भण्डारण योजना के अन्तर्गत सब्सिडी हेतु 100 करोड़ रुपये, डाॅ. राम मनोहर लोहिया सामूहिक नलकूप योजना हेतु 5 करोड़ रुपये तथा भूमि सेना योजना हेतु 79 करोड़ रुपये व्यय करने का प्राविधान किया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु टोल फ्री नम्बर सहित कन्ट्रोल रूम स्थापित किया जाय

Posted on 16 February 2013 by admin

चालू वित्तीय वर्ष में स्वीकृत धनराशि का शीघ्र   उपयोग करने के निर्देश  - पारस नाथ यादव
प्रदेश के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री पारस नाथ यादव ने किसानों को आलू की फसल का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए  विभागीय अधिकारियों को सतर्कता से कार्य करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को आलू भण्डारण एवं आलू के विपणन के लिए विभिन्न मण्डियों के दैनिक बाजार भाव की जानकारी उपलब्ध करायी जाय तथा किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु कन्ट्रोल रूम स्थापित किया जाय, जिसमें टोल फ्री नम्बर की सुविधा भी उपलब्ध हो। उन्होंने चालू वित्तीय वर्ष की समस्त स्वीकृत धनराशि का शीघ्र उपयोग करने के निर्देश दिये हैं।
उद्यान मंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा संचालित योजनायें प्रदेश के किसानों की आर्थिक उन्नति में सहायक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अन्तर्गत 2245 हेक्टेर फलों के बाग रोपण लक्ष्य के सापेक्ष 2093 हे0 में नये बागों का रोपण, 1190 हे0 में फूलों की खेती के लक्ष्य के सापेक्ष 747 हे0, 1700 हे0 में मसाला की खेती के सापेक्ष 1480 हे0 में कार्य कराया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय कार्य परिषद द्वारा बागवानी में मशीनीकरण के 981 प्रस्ताव, पौधशाला स्थापना के 17 प्रोजेक्ट, ग्रीन हाउस व शेडनेट हाउस के 109 हजार वर्ग मीटर के प्रोजेक्ट, प्लाण्ट हेल्थ क्लीनिक के तीन प्रोजेक्ट, बीज विधायन केन्द्र की स्थापना के तीन प्रोजेक्ट, मशरूम इकाई के पांच प्रोजेक्ट, फ्रण्ट लाइन डिमाॅस्ट्रेशन के आठ प्रोजेक्ट, कोल्ड स्टोरेज  निर्माण के आठ प्रोजेक्ट, राइपेनिंग चैम्बर की स्थापना के तीन प्रोजेक्ट स्वीकृत किये गये हैं।
श्री यादव ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अन्तर्गत 54.61 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भारत सरकार को स्वीकृति के लिए भेजे जाने के निर्देश दिये  हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत फल, पुष्प मसाला के क्षेत्र विस्तार के लिये 6506 हे0 क्षेत्रफल के लक्ष्य के सापेक्ष 4676 हे0 में तथा बीज उत्पादन के अन्तर्गत 190 हे0 के सापेक्ष 105.6 हे0 पूर्ति की गयी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिर्च, कद्दूवर्गीय फसलें, पातगोभी, टमाटर, प्याज की ख्ेाती के 3968 हे0 लक्ष्य के सापेक्ष 3101 हे0 में पूर्ति की गयी है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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कीट एवं रोगों का उचित समय में प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है

Posted on 09 February 2013 by admin

आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय में प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है, क्योंकि बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यन्त ही संवेदनशील होती है। वर्तमान में आम की फसल को मुख्य रूप से भुनगा एवं मिज कीट तथा खर्रा रोग से क्षति पहंुचने की ज्यादा सम्भावना बनी रहती है।
यह जानकारी निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री ओम नारायण सिंह ने दी है। उन्होंने बताया कि आम की फसल में लगने वाले भुनगा कीट बौर, कोमल पत्तियों एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहंुचाते हैं जिससे प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है। यह कीट मधु की तरह का पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूॅद जम जाती है, इसके फलस्वरूप पत्तियों द्वारा हो रही प्रकाश संश्लेशण की क्रिया भी मंद पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि मिज कीट मंजरियों एवं तुरन्त बने फलों तथा मुलायम कोपलों में अण्डे देती हैं, जिसकी सूॅडी अन्दर ही अन्दर खाकर क्षति पहुंचाती हैं, प्रभावित भाग काला पड़ कर सूख जाता है। भूनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली0 प्रतिलीटर पानी में या क्लोरपाइरीफास 2.0 मिली0  प्रतिलीटर पानी या डायमेथोएट 2.0 मिली0 प्रतिलीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
श्री सिंह ने बताया कि खर्रा रोग के प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठलों पर सफेद चूर्ण के समान फफूॅद की वृद्धि दिखाई देती है। प्रभावित भाग पीले पड़ जाते हैं तथा मंजरियां सूखने लगती हैं। उन्होंने कहा कि खर्रा रोग से बचाव हेतु ट्राइडोमार्फ 1.0 मिली0 दवा प्रतिलीटर पानी में या डायनोकेप 1.0 मिली  प्रतिलीटर पानी के घोल को भुनगा कीट के नियत्रंण हेतु प्रयोग किये जा रहे घोल के साथ मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए।
संयुक्त निदेशक (उद्यान) श्री राणा प्रताप सिंह ने भी बागवानों को सलाह दी है कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिल रही हो तो उस अवस्था में कम से कम रसायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाये जिससे पर-परागण क्रिया प्रभावित न हो सकें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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किसान राई/सरसों की फसल को झुलसा रोग, माहूॅ, आरा मक्खी एवं बालदार सूड़ी आदि कीटों से बचायें

Posted on 09 February 2013 by admin

राई/सरसों की फसल में झुलसा रोग होने पर पत्तियों तथा फलियों पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं। गोल-गोल छल्ले पत्तियों पर स्पष्ट दिखायी देते हैं। इस रोग के होने पर मैंकोजेब 75 प्रतिशत 2 किग्रा0 प्रति हे0 अथवा कापर आक्सीक्लोराइड रसायन 50 प्रतिशत 3 किग्रा0 प्रति हे0 का प्रयोग करें।
आरा मक्खी चमकदार काली तथा घरेलू मक्खी के आकार से छोटी, 4-5 मि0मी0 लम्बी होती है। मादा मक्खी का अण्डरोपक आरी के आकार का होने के कारण इसे आरा मक्खी कहा जाता है। इस कीट की सूडि़यां काले स्लेटी रंग की होती हैं। ये पत्तियों को किनारों से अथवा विभिन्न आकार के छेद बनाती हुयी बहुत तेजी से खाती हैं। भयंकर प्रकोप होने पर पूरा पेड़ पत्ता विहीन हो जाता है।
बालदार सूॅड़ी पीले, नारंगी अथवा काले सिर वाली होती हैं। इसका पूरा शरीर घने काले बालों से ढका रहता है। इसकी सूडि़याॅ फसल को नुकसान पहुॅचाती हैं। यह प्रारम्भ में झुण्ड में, बाद में एकल रूप में रहकर पेड़-पौधों की कोमल पत्तियों को खाकर नुकसान पहुॅचाती हैं। आरा मक्खी एवं बालदार सूड़ी के उपचार के लिये मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20-25 किग्रा0 या मैलाथियान 50 ई0सी0 1.5 लीटर या डी0डी0वी0पी0 76 एस0 एल0 0.5 लीटर 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
माहूॅ कीट पंखविहीन अथवा पंखयुक्त हल्के स्लेटी या हरे रंग के 1.5 से 3 मि0मी0 लम्बे चुभाने, चूसने मुखांग वाले छोटे कीट होते हैं। ये पौधों के तनों, पत्तियों, फूलों एवं फलियों से रस चूसकर मधुóाव भी करते हैं, जिससे काले कवक का प्रकोप हो जाता है। इससे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित होती है। इस कीट का प्रकोप दिसम्बर से लेकर मार्च तक होता है। इस कीट के रोकथाम के लिये डाइमेथोएट 30 ई0सी0 1 लीटर या मिथाइल ओ-डेमेटान 25 ई0सी0 1 लीटर प्रति हे0 की दर से 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर सांयकाल छिड़काव करना चाहिये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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विशेषज्ञों की सलाह घर बैठे मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं

Posted on 07 February 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के किसान कृषि, बागबानी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य संबंधित समस्याओं पर विशेषज्ञों की सलाह घर बैठे मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर में मध्यान्ह 1 से 3 बजे, दूरभाष संख्या 0512-2555444 अथवा 0512-2555666 पर शनिवार एवं रविवार को छोड़कर संपर्क करें। इसी तरह इलाहाबाद विश्वविद्यालय, नैनी (इलाहाबाद) से सलाह पाने के लिए 10 बजे से 3 बजे के मध्य दूरभाष संख्या 18001805309 अथवा 0532-2684291 पर शनिवार एवं रविवार को छोड़कर फोन कर सुझाव पाया जा सकता हैं।
मण्डी परिषद के निदेशक प्रो0 राजेन्द्र कुमार से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसान हेल्प लाइन के माध्यम से किसान, अपने खेत की मिट्टी की जाॅच, क्षेत्र के अनुसार कौन सी फसल बोये, कौन-कौन से उर्वरक एवं कितनी मात्रा में डालें, इन सबसे संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही बीज बोने, सिंचाई करने, वैज्ञानिक तरीके जानने के साथ-साथ नये कृषि यंत्रों, बागबानी, उन्नत किस्म के पौधों, फसल उत्पादन आदि से संबंधित सभी तरह की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
मण्डी परिषद के निदेशक ने बताया कि किसान हेल्प लाइन से पशु पालन, उनकी नयी प्रजातियों, बीमारियों, दवाओं आदि की सम्पूर्ण जानकारी कृषि विशेषज्ञों से निर्धारित समय में मुफ्त में पायी जा सकती है। किसान इस सेवा का पूरा लाभ उठायें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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जैव उर्वरक व जैव नियंत्रक का प्रयोग अत्यन्त लाभदायक होगा

Posted on 07 February 2013 by admin

प्रदेश के औद्यानिक फसलों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए पौधों को कैटरपिलर (सूड़ी/लर्वा) से बचाना अति आवश्यक है। पौधांे में कीटों व रोगों की रोकथाम के लिए समय से जैव उर्वरक व जैव नियंत्रक का प्रयोग अत्यन्त लाभदायक होगा।
यह जानकारी निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण  श्री ओम नारायण सिंह ने दी है। उन्होंने बताया कि औद्यानिक फसलों को सम-सामयिक कीटों व रोगों से बचाकर किसान अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एन0पी0वी0 (न्यूक्लीयर पाली हिड्रोसिस वायरस) कैटरपिलर (सूड़ी) के रोकथाम के लिए अत्यन्त प्रभावी जैवनाशी है। जब लर्वा छोटेे हांे तभी इसके घोल को सायंकाल संक्रमित पौधों पर छिड़काव करना चाहिए।
श्री सिंह ने बताया कि एजाडिरेक्टिन (नीम का तेल) हानिरहित वानस्पतिक कीटनाशक है। इसका प्रयोग किसान औद्यानिक फसलों में कीटों के नियंत्रण हेतु कर सकते हैं। एक लीटर नीम के तेल को 200 से 300 लीटर पानी में घोलकर पौधों में छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जैव उर्वरक (बायो फर्टिलाइजर) मिट्टी की उर्वरकता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है। किसान जैव उर्वरक का प्रयोग करके यूरिया की बचत कर सकते हैं तथा इससे बीज शोधन, मृदा उपचार एवं बेहन उपचार भी किया जा सकता है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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पेयजल स्रोतों की जी0पी0एस0 आधारित मैपिंग तथा जल गुणवत्ता परीक्षण पर कार्यशाला कल

Posted on 06 February 2013 by admin

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रलाय भारत सरकार द्वारा निर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की मार्ग-निर्देशिका के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित समस्त पेयजल स्रोतों की जी0पी0एस0 आधारित मैंपिग, सैनिटरी सर्वे तथा जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य कराया जाना है। इस निर्मित पेयजल स्रोतों की जी0पी0एस0 आधारित मैपिंग तथा जल गुणवत्ता परीक्षण पर कार्यशाला का शुभारम्भ कल 07 फरवरी को उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरविन्द कुमार सिंह ‘गोप’ द्वारा सचिवालय स्थित तिलक हाल में किया जायेगा। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास श्री राजीव कुमार भी उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त लखनऊ जोन में यह कार्य सम्पादित करने हेतु मेसर्स ए0डी0सी0सी0 इ-फोकैड, नागपुर तथा गोरखपुर जोन में सम्पादित करने हेतु रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर उ0प्र0 लखनऊ के साथ अनुबन्ध हस्ताक्षर किया जायेगा। इस कार्यक्रम से संबंधित जनपदों के लिये विकास अधिकारियों तथा जल निगम के अभियन्ता एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों/विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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गन्ना किसानो को इस साल पहले से ज्यादा लाभ

Posted on 06 February 2013 by admin

समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री राजेन्द्र चैधरी ने कहा है कि गन्ना किसानो को इस साल पहले से ज्यादा लाभ हुआ है और चीनी उत्पादन भी ज्यादा हुआ है। चीनी मिलों ने 37 लाख टन चीनी का उत्पादन कर लिया है जो 40 लाख टन तक हो जाने का अनुमान है। राज्य में गन्ने से चीनी प्राप्ति की दर 8Û86 प्रतिशत है।

7 दिसम्बर,2012 को मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने 2012-13 लिए गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) घोषणा की थी। इसके तहत सामान्य किस्म के लिए एसएपी 280 रूपए प्रति कुंतल है जबकि बसपा राज में यह 240 रूपए प्रति कुंतल थी। यह मूल्य 2011-12 की तुलना से 17 प्रतिशत अधिक था। इसके अतिरिक्त शुरूआती और अस्वीकृत किस्मों की कीमतें 250 रूपए प्रति कुंतल और 235 रू0 प्रति कुंतल से बढ़ाकर क्रमशः 290 और 275 रूपए प्रति कुंतल कर दी गई।

समाजवादी पार्टी की सरकार किसानों की अपनी सरकार है। इसलिए प्रति कुंतल दाम बढ़ोत्तरी से किसानों को इस पेराई सत्र में 21,500 करोड़ रूपए की प्राप्ति होगी जो 2011-12 में 18,200 करोड़ रूपए थी। प्रदेश में अब 24 जिलों में नई शुगर मिलों की स्थापना, उनके साथ सह उत्पादन प्लांट और डिस्टलरी प्लांट लगाने की सुविधाएं होगी। उम्मीद है कि इससे प्रदेश चीनी उत्पादन में फिर देश में अव्वल नम्बर पर आ जाएगा। इससे पूर्व जब श्री मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे तब सकल चीनी उत्पादन का 40 प्रतिशत अंश उत्पादित कर देश में कुल चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा। कुल उत्पादन तब 50,32 लाख टन रहा था।

सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण 6 महीने के अंदर किसानों को 17812,37 करोड़ रूपए का गन्ना मूल्य भुगतान कराया गया। पिछली सरकार के समय के बकायों के भुगतान पर कार्यवाही करते हुए इसी अवधि में गन्ना किसानों को सहकारी, निगम क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र की चीनी मिलों पर पेराई सत्र 2006-07 व 2007-08 का देय बकाया अंतर गन्ना मूल्य भुगतान क्रमशः 123,68 करोड़ रूपए और 759,76 करोड़ रूपए, कुल 883,64 करोड़ रूपए का भुगतान भी कराया गया।

समाजवादी पार्टी ने किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने और उनको खाद, बीज की किल्लत न होने देने का पूरा प्रबंध कर रखा है। इस सरकार ने खाद संकट का पहले से अंदाजा लगाते हुए पहली बार बफर गोदाम के साथ-साथ सहकारी समिति स्तर पर उर्वरक का अग्रिम भंडारण (प्रिपोजिशनिंग) करने का निर्णय लिया और इस हेतु वर्ष 2012-13 के बजट में 100,00 करोड़ रूपए का प्राविधान किया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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आम की फसल को खर्रा रोग एवं भुनगा कीट से बचायें

Posted on 06 February 2013 by admin

बचाव हेतु दवा का समय से करे छिड़काव-ओम नारायण सिंह

प्रदेश में आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय से प्रबंधन नितान्त आवश्यक है। इस समय  आम के पौधों को खर्रा रोग एवं भुनगा कीट से क्षति पहंुचने की ज्यादा सम्भावना है। अतः बागवान आम के पौधों को कीटों व रोगों से अवश्य बचायें।

यह जानकारी निदेशक उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री ओम नारायण सिंह ने दी है। उन्होंने बताया कि भुनगा कीट के रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफास की एक मिली0 दवा प्रति लीटर या फास्फेमिडान 0.6 मिली0 दवा प्रतिलीटर पानी में घोल कर पौधों पर छिड़काव करें। खर्रा रोग से बचाव हेतु इस माह के प्रथम सप्ताह में घुलनशील गंधक 0.2 प्रतिशत तथा द्वितीय सप्ताह में (12-14 दिन बाद) डाइनोकैप अथवा ट्राइडेमार्क 0.1 प्रतिशत की एक मिली0 दवा प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।

श्री सिंह ने बताया कि आम की नई फसल को एन्थ्रेकनोज रोग से बचाव के लिए कापर आक्सीक्लोराइड 0.3 प्रतिशत की एक मिली0 दवा प्रतिलीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि सिंचित क्षेत्रों में नया बाग लगाने हेतु कृषक पौधों की रोपाई करें तथा पौधशाला में पौधों की निराई-गुड़ाई भी करें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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आभार व्यक्त किया

Posted on 02 February 2013 by admin

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गन्ने का मूल्य 40रूपया प्रति कुन्तल बढ़ाये जाने एवं लखनऊ स्थित भारत सरकार के उपक्रम स्कूटर्स इंडिया के पुनरूद्धार के लिए 200 करोड़ रूपये आर्थिक पैकेज दिये जाने पर यूपीए चेयरपरसन श्रीमती सोनिया गांधी जी, प्रधानमंत्री डाॅ0 मनमोहन सिंह जी एवं कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी का आभार व्यक्त किया है।
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया कोआर्डिनेटर अशोक सिंह ने आज यहां जारी बयान में कहा कि केन्द्र सरकार ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर एक ओर जहां कंाग्रेस पार्टी की सच्ची किसान हितैषी होने की एक बार पुनः पुष्टि हुई है वहीं दूसरी ओर स्कूटर्स इण्डिया को 200 करोड़ का पैकेज देने से यह बात भी स्पष्ट हो गयी है कि कंाग्रेस पार्टी उद्योग धंधों को बढ़ावा देने के साथ ही नौजवानों को रोजगार देने के लिए भी कटिबद्ध है।
श्री सिंह ने कहा कि गन्ने का मूल्य बढ़ाने के लिए उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डाॅ0 निर्मल खत्री जी ने बार-बार प्रदेश की सपा सरकार से अनुरोध किया था किन्तु राज्य सरकार अपने किसान विरोधी रवैये पर अड़ी रही। अब केन्द्र सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य 40 रूपये प्रति कुंतल बढ़ाये जाने से किसानों को काफी राहत मिलेगी। स्कूटर्स इण्डिया को आर्थिक पैकेज देने से इस कम्पनी में कार्यरत हजारों कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को लाभ मिलेगा, साथ ही हजारों की संख्या में बेरोजगार नौजवानों को नौकरी भी मिल सकेगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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