*खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "upnewslive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे info@upnewslive.com पर या 09415508695 फ़ोन करे , मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415508695 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | गुजरात

गांधी जी के गुजरात में अखिलेश यादव -राजेन्द्र चौधरी

Posted on 09 December 2017 by admin

akhilesh-yadav-in-gujaratगुजरात की चर्चा आते ही इतिहास के कई पृष्ठ स्वतः खुलने लगते हैं। अतीत के पांच हजार साल पहले का दृश्य जब भगवान श्री कृष्ण रण छोड़ बनकर मथुरा से द्वारिका पहुंच गए थे। द्वारिका तो समुद्र में विलीन हो गई किन्तु द्वारिकाधीश का मन्दिर आज भी भव्यता के साथ खड़ा है। वर्तमान में कुछ पीछे चलकर मोहनदास करम चंद गांधी का त्यागलोक दिखाई देने लगता है। स्वतंत्रता आंदोलन की अनुगूंज सुनाई पड़ने लगती है। 1909 में गांधी जी ने विलायत से लौटते हुए जहाज पर ‘हिन्द स्वराज‘ नाम से एक पुस्तक लिखी थी। जिसमें विभिन्न विषयों पर उनके विचार हैं। गांधी जी ने हिन्दुस्तान में आकर पहले तो अपने गुरू गोखले जी के कहने पर भारत की यात्रा की। सन् 1917 से गांधी जी ने गुजरात में साबरमती नदी के किनारे अपने एक आश्रम की स्थापना की जहां से उनके राजनीतिक और वैयक्तिक प्रयोग भी शुरू हुए। 1930 में इसी आश्रम से उन्होंने नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी मार्च किया था। गांधी जी 1933 तक साबरमती आश्रम में रहे। इस चर्चा में सरदार बल्लभभाई पटेल को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा जिन्होंने भारत को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया।
तो उसी गुजरात में इन दिनों बड़ी हलचल है। राजनीति के नए प्रयोगों की यह एक नई प्रयोगशाला भी बन रही है। गांधी जी राजनीति को सामाजिक और नैतिक संदर्भ में देखते थे और यह चेतावनी भी देते थे कि ताकत (राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक) किसी भी व्यक्ति को अंधा और बहरा बना देती है। जो लोकतंत्र पक्षपातपूर्ण, अंध विश्वासी और अराजकता में रहेगा वह एक दिन स्वयं नष्ट हो जाएगा। लोकतंत्र में केवल और केवल जनता का राज होना चाहिए।akhilesh-yadav-in-gujrat
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश 5,6,7, और 8 दिसम्बर 2017 को गुजरात की यात्रा पर थे। संदर्भ चुनाव प्रचार का था किन्तु मंतव्य था गुजरात को नजदीक से जानने का, रिश्ते बनाने का और भविष्य को मजबूती देने का। स्वाभाविक था कि गुजरात की धरती पर भगवान श्री कृष्ण की ओर अखिलेश यादव जी का खिंचाव होता। सर्वप्रथम वे द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने इष्टदेव का आशीर्वाद लिया। अपने संक्षिप्त प्रवास में उन्होंने समाज के सभी वर्गो के लोगों से मुलाकात की और गुजरात के ताजा हालात की भी जानकारी ली। लेकिन सबसे ज्यादा उनका चिन्तन गांधी जी के नेतृत्व में चलनेवाले स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों-आदर्शों के इर्दगिर्द और राजनीति में आ रहे क्षरण पर ही केन्द्रित रहा।
गुजरात और सरदार बल्लभभाई पटेल की याद परस्पर जुड़ी हैं। न केवल स्वतंत्रता आंदोलन अपितु किसान आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। चैधरी चरण सिंह अक्सर गांजी जी की आर्थिक नीतियों की चर्चा करते रहते थे और उन्हीं विचारों को लेकर वे आजीवन संघर्ष करते रहे।
आज राजनीति के चाल चरित्र में जिस कदर बदलाव आया है और मूल्यों की विश्वसनीयता भी प्रश्नों के घेरे में आती जा रही है वह चिंताजनक है। श्री अखिलेश यादव जी ने यह प्रश्न उठाया कि क्योंकर लोकतंत्र का अवमूल्यन होता जा रहा हैं राजनीति में संकीर्ण स्वार्थों का बोलबाला होता जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को तहस नहस कर विकास को धता बताकर सांप्रदायिकता की आड़ में राजनीतिक स्वार्थों की प्राप्ति उचित नहीं। श्री यादव मानते हैं कि विकास के नाम पर धोखा नेतृत्व की साख को बट्टा लगाती है। बेरोजगार नौजवानों के सपनों को तोड़ा गया तो एक बड़े विश्वास के साथ छल होगा। किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गुजरात में उनकी बदहाली देखकर दुःख हुआ। मूंगफली और कपास के किसान अपने उत्पाद का लाभप्रद एवं उचित मूल्य भी नहीं पा रहे हैं। भाजपा ने कपास के दाम 15 सौ रूपये कुन्तल दिलाने का वादा किया किन्तु वे 800 रूपए में ही फसल बेचने को मजबूर हैं।
गुजरात जाने के पीछे यह देखना भी था कि बहुप्रचारित गुजरात माॅडल की वास्तविकता क्या है? गुुजराती लोग मानते हैं कि गुजरात में कहीं भी विकास नहीं दिखाई देता है। गुजरात के द्वारिकाधीश मंदिर में ही तीन दिन बिजली नहीं आई थी। स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा सभी क्षेत्रों में अफरातफरी मची दिखाई दी। विकास माॅडल की बात करने वाले गुजरात के विकास पर भी नजर डाल लेते तो अच्छा होता। स्वच्छ भारत का नारा देने वालों को गुजरात में जगह-जगह गंदगी दिखाई क्यों नहीं देती है।
श्री अखिलेश यादव ने चर्चा में प्रदूषण का प्रश्न भी उठाया और कहा कि वैचारिक प्रदूषण के कारण भी भाईचारे और विकास का संकट है। सामाजिक सौहार्द और परस्पर विश्वास के आधार पर ही समाज का सर्वतोमुखी विकास व सद्भाव का माहौल हो सकता है। श्री यादव ने अहमदाबाद में एक पत्रकार वार्ता को भी सम्बोधित किया जिसमें कुछ बुनियादी प्रश्न भी उठाए गए। इस वार्ता के समय राश्ट्रीय सचिव श्री राजेन्द्र चैधरी भी उपस्थित थे। श्री अखिलेश यादव ने यहां गिरि के जंगलो में शेरो के बीच भी कुछ समय बिताया।
श्री अखिलेश यादव की चिंता आजादी के मूल्यों को बचाने की है और यही समाजवादी विचारधारा का आधार है। गांधी जी ने सत्य, अहिंसा और सहिष्णुता का जो संदेश साबरमती के तट से दिया था आज भी वह प्रासंगिक है। साबरमती आश्रम में गांधी जी के जीवन से सम्बन्धित वस्तुओं की प्रदर्शनी है जहां उकेरा गया उनका यह संदेश आज भी मार्ग दर्षक बन सकता है। गांधी जी का मत था कि ‘‘ लोकतंत्र को ऊपर से बीस तीस लोग नहीं चला सकते हैं लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसमें हर व्यक्ति की भागीदारी न हो‘‘।

Comments (0)

Advertise Here

Advertise Here

 

January 2018
M T W T F S S
« Dec    
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
293031  
-->









 Type in