Archive | April, 2010

देश विभाजन की ओर बढ़ रहा है कांग्रेस इसकी जिम्मेदार-सूर्य प्रताप शाही

Posted on 06 April 2010 by admin

भारतीय जनता पार्टी के 31वें स्थापना दिवस को लखनऊ महानगर के कार्यकर्ताओंं ने बड़ी धूमधाम के साथ मनाया। आज दिनांक 06 अप्रैल को प्रदेश कार्यालय पर आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर उपाध्यक्ष रमेश तूफानी एवं संचालन नगर महामन्त्री मान सिंह ने किया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं के बीच मिष्ठान वितरित कर स्थापना दिवस पर एक दूसरे को बधाई दी।
 स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि भाजपा के आज 30 वर्ष पूरे हो गये है। विशेष परिस्थतियों में 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुयी। कांग्रेस कभी देश की कसौती पर खरी उतर नही सकी इसलिये भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई। भारतीय जनता पार्टी देश तथ समाज की चिन्ता कर रही  है। अपनी स्वच्छ छवि के कारण पार्टी केन्द्र व प्रदेश की सत्ता तक पहुंची। आज देश की सीमायें असुरक्षित है देश विभाजन की ओर बढ़ रहा हैं और इन सबकी जिम्मेदार केन्द्र में बैठी कांग्रेस सरकार है। पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल में जहां चतुर्मुखी विकास हुये वहीं दूसरी ओर मंहगाई पर उन्होंने नियन्त्रण लगाया था।

 श्री शाही ने कहा कि अटल जी ने पोखरण विस्फोट कर देश को सुरक्षित एवं शक्तिशाली बनाया। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल िक्लंंटन ने अटल जी को फोन कर युद्ध विराम की भी अपील की थी। कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण अंबानी ने भी आरोप लगाय है कि 10 करोड़ का प्रोजेक्ट 40 करोड़ में दिया गया। घोटालों की इस सरकार के मुखिया प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ऐसे आरोपों पर मौन धारण किये हुयें है। उत्तर प्रदेश भाजपा का महत्वपूर्ण प्रदेश है हम कार्यकर्ता स्थापना दिवस के अवसर पर संकल्प लेते हैं कि पार्टी को हम पुन: सत्ता शिखर तक पहुंचायेगें।

 किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद पाण्डेय ने कहा कि देश दूसरी गुलामी बढ़ रहा है मंहगाई एवं आतंकवाद से पूरा देश जल रहा है नक्सल के कारण भारत देश परेशान है परन्तु यूपीए सरकार कोई ठोस कदम उठाने में लाचार है। भाजपा ही इन सब मुद्दों पर गम्भीर से विचार करते हुये कार्यवाही करती है। पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष विभूति नारायण सिंह ने कहा कि अटल जी का सपना विकास का था जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने अमल करते हुये केन्द्र एवं प्रदेश की सत्ता बनायी। जनता ने भी विकास  को हाथों हाथ लिया। स्थापना दिवस के अवसर पर राघवराम मिश्रा, सुरेश श्रीवास्तव, विद्यासागर गुप्ता, गोमती यादव, अमित पुरी, नरेन्द्र सिंह राणा, विजयसेन सिंह, विध्यवासिनी कुमार, सुरेन्द्र सिंह, मान सिंह, राजीव मिश्रा, अंजनी श्रीवास्तव, नीरज गुप्ता, अतुल दीक्षित, रमेश तूफानी, भिखारी सिंह, अभिजात मिश्रा, विजय गुप्ता, गणेश कन्नौजिया, पुरूषोत्तम पुरी, विनोद तिवारी अप्पू, अंजूराम चन्दानी, विजयलक्ष्मी, रूमाना सिद्दीकी, रिति सिंह, पुष्पासिंह चौहान, दीप्ती वर्मा, संयुक्ता भाटिया, पद्मा पिल्लई, बीना गुप्ता, मुन्ना मिश्रा, सुकदेव पाण्डेय, एच0एन0 मिश्रा, पी0एन0 श्रीवास्तव, शफाहत हुसैन, मो0 शमीम, शेख इसराइल, मो0 रिजवान आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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एिशयन बैंकर ने एचडीएफसी बैंक को भारत में “बेस्ट रीटेल बैंक“ घोशित किया

Posted on 06 April 2010 by admin

एचडीएफसी बैंक, देश के अग्रणी बैंकों में से एक, ने इस वर्ष एशियन बैंकर का “बेस्ट रीटेल बैंक इन इण्डिया“ (भारत का सर्वश्रेष्ठ रीटेल बैंक) अवार्ड जीत लिया है। एचडीएफसी बैंक लगातार चौथे वर्ष इस अवार्ड को जीतने में सफल रहा है। एशियन बैंकर द्वारा यह अवार्ड कई मानदण्डों के मÌेनज़र प्रदान किया जाता है। पिछले वषोZं की तरह इस वर्ष भी इस अवार्ड को पाने के लिये एशिया पैसिफिक, गल्फ कोआपरेशन काउंसिल (जीसीसी) एवं सेंट्रल एशिया क्षेत्र की अनेक वित्तीय संस्थायें प्रतिस्पद्धाZ में शामिल थीं। “ऑटोमोबाइल लेण्डिंग“ (वाहनों की खरीददारी के लिये दिया जाना वाला ऋ़ण) क्षेत्र में भी बैंक को सर्वश्रेष्ठ की श्रेणी में रखा गया है।

विजेता का चयन जिन मानदण्डों के आधार पर किया जाता है उनमें से कुछ इस प्रकार हैं , रीटेल बैंकिंग इकाई का असाधारण वाषिZक प्रदर्शन, सभी आर्थिक परिदृष्य में लंबी अवधि तक फ्रेंचाइजी बना रहना, चुनिन्दा बाजार में पूर्णतया परिभाषित फ्रेंचाइज, व्यावसायिक क्रियाकलापों में पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वाह, नीति परक बैंकिंग, उत्पाद के स्तर पर बिक्री एवं क्रियान्वयन में स्पष्टता, जोखिम प्रबंधन क्षमता का कड़ाई से पालन, उन्नत व्यावसायिक एवं परिचालन प्रक्रिया एवं तकनीकी, गहरी पैठ एवं सक्षम वितरण व्यवस्था, बैंक की रणनीति को समर्थन प्रदान करने के लिये मानव संसाधन के विकास पर ध्यान केिन्द्रत करना।

एशियन बैंकर एक्सीलेंस अवार्ड्स 2009 की घोषणा करते हुये, कंपनी को भेजे गये सन्देश में प्रकाशन ने कहा है कि, “एचडीएफसी बैंक रीटेल फाइनेंसियल सर्विसेज से सम्बंधित सभी कसौटियोंं पर खरा उतरा है और इसलिये इसे अवार्ड प्रदान करने की अनुशंसा की जाती है।“
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मेरठ के वेंकटेश्वर इंजीनियरिंग कालेज में प्रबन्धन द्वारा हमला करने की निन्दा

Posted on 06 April 2010 by admin

समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा मेरठ के वेंकटेश्वर इंजीनियरिंग कालेज में अनियमितताओं की शिकायतों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर प्रबन्धन द्वारा हमला करने के काण्ड की जितनी निन्दा की जाए कम है। यह कालेज मेरठ बाई पास में कंकडखेड़ा में स्थित है।

 छात्रों की बात सुनने के बजाए उनके प्रदर्शन पर प्रबन्धन के दुव्र्यवहार का जब प्रेस के छायाकार चित्र खींच रहे थे तो उन पर भी हमला किया गया। इसमें अमर उजाला, दैनिक जागरण एवं हिन्दुस्तान के छायाकार घायल हो गये हैं। क्षोभ की बात तो यह है कि एस0पी0 और एडीएम सिटी ने पत्रकारों को संरक्षण देने के बजाए खुद भी उनके साथ दुव्र्यवहार किया। बताते हैं कि कालेज प्रबन्धन को एक बसपा मन्त्री का संरक्षण प्राप्त है। इस घटना की उच्चस्तरीय जॉच होनी चाहिए और निर्दोष छात्रों तथा प्रेस छायाकारों की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों को तत्काल निलिम्बत कर उनके विरूद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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अग्निदेव का कहर, जिले में सैकड़ो आशियाने खाक

Posted on 06 April 2010 by admin

थाना गोसाईगंज अन्तर्गत ग्राम मलवा निकट पलिया इण्टर कालेज गुण्ड पकाते समय 12बजकर 15 मि0 लगी आग से करीब 60 घर जलकर खाक हो गये।  जिसमें पांच मवेिशयों के जलने से मृत्यु व एक व्यक्त के झुलसने के समाचार है। जीवन मृत्यु से जूझ रहा झुलसा व्यक्ति जिला चिकित्सालय में शय्या पर पड़ा है। आग की चपेट में आने से मरे पाचं भैस व गृहस्थी के स्वाहा होने से पचास लाख रूपये की सम्पत्ति क्षति होने का अनुमान है। विलम्ब से पहुंचे दमकल लगभग 1,30 घण्टे बाद आग पर काबू पाने का प्रयास किया। किन्तु असफल होने पर तीसरी दमकल अमेठी से व अम्बेडकर नगर से अग्नि शमन  बुलाई गई तब लेकिन  आग पर काबू नही पाया गया।

 प्राप्त सूचना के अनुसार जिले भर में दर्जनो जगह लगी आग में लगभग सौ घर जलकर राख हो गये। अमेठी क्षेत्र ताला ग्राम सभा में 15 घर, पीथी पुर 02 घर, लखारा 04 घर, दत्ता मिश्र का पूरा 07 घर, टीकर मांफी धोएं 05घर, पीपर पुर थाना क्षेत्र सिण्ठी में 05 घर, जयसिंहपुर थाना क्षेत्र मलवा मेंं 60 घर जल कर राख होगये। उक्त मौके पर एडीएम प्रशासन, एसडीएम जयसिंहपुर, तहसीलदार जयसिहंपुर, एडिशनल एस0पी0, बीडीओ जयसिहंपुर एंव कूरेभार एसओ गोसाईंगंज सहित प्रशासनिक तबका मलवा गांव में मौजूद रहा। आग मे एक आदमी झुलस गया। चार गाय, एक बछड़ा, पाचं भैंस आग में जलकर मर गये। सूत्रों के द्वारा ज्ञात हुआ है कि आग शीतला प्रसाद रावत के घर से लगी। मौके पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रत्याशी जयसिंहपुर के सन्तबक्श सिंह ने सरकार से प्रत्येक परिवार को 05-05 लाख रूपये देने की मांग की।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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पानी के लिए बेहाल देश………

Posted on 06 April 2010 by admin

बूंद-बूंद पानी को तरसता देश कोई लेकिन पानी की राजनीति ने प्रक्रति के इस स्वभाव को भुलाने की अक्षम्य गलती की है। इसलिए लोग बूंद-बूंद पानी के लिए बेहाल है। एक बड़ी गलती हमसे यह हुई कि हमने पानी रोकने के समय सिद्ध और स्वयं सिद्ध तरीकों को पुराना या परम्परागत कहकर छोड़ दिया।

भारत के पास विश्व की 2.45 प्रतिशत् धरती है और लगभग 17 प्रतिशत् आबादी। 1947 में देश के 223 गाव में पानी कम था। अब उनकी संख्या लगभग 90 हजार हो गई है। 90 प्रतिशत् ग्रामीण आबादी गहरे या उथले भूमिगत जल पर निर्भर है। देश की 80 प्रतिशत् आबादी भू-जल का अनियन्त्रण दोहन कर रही है। भारत वर्ष की आबादी दिन भर दिन बढ़ती ही जा रही है। परन्तु पानी के लिए आज तक सटीक कदम नहीं उठाया गया। जिससे आने वाले संकट से बचा जा सके।

हमारा देश कभी तो पानी की मार झेलता है तो कभी पानी की किल्लत को। अगर सही योजनाबद्ध तरीके से नदियों को एक-दूसरे से जोड़ा जाए तो ना पानी की मार और न ही किल्लत का सामना करना पड़ेगा परन्तु हमारे देश के कई राजनीतिज्ञ ही विकास में सबसे बड़ी बाधा डालने वाले है जो काम 2 वर्ष मे पूरा होना चाहिए उसे 4 वर्ष से पहले पूरा होने ही नहीं देते। हमारे देश की विकास दर बहुत धीमी गति से चल रही है। अगर राजनीतिज्ञ विकास में रोड़ा न बने तो यह देश बहुत तेज गति से विकास करे। जिस तरह अन्य देश बहुत तेज गति से विकास कर रहे है। उदाहरणार्थ चीन की विकास दर भारत देश के मुकाबले में बहुत ज्यादा है परन्तु चीन का बहुत सारा भू-भाग लगभग 2/3 भाग जो कि निर्जन है कहने का तात्पर्य है कि वह भाग जहां पर लगभग सारा वर्ष बर्फ पड़ी रहती है जहां पर जीवन व्यतीत करना काफी कठिन है। लेकिन फिर भी चीन अपने विकास का झण्डा फहराये हुए है। पता नहीं कि हमारा देश भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की मार कब तक झेलेगा।
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Vikas Sharma
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केन्द्रों पर बच्चे नही फिर भी, आल इज बेल

Posted on 05 April 2010 by admin

rt-11दास्ताने-ए-दूबेपुर, बाल बिकास परियोजना की कुछ इस तरह दिखी जब पत्रकारों की एक टीम दूबेपुर बाल विकास परियोजना के सच को जानने के लिए निकली, लगभग 20 केन्द्रों की हकीकत कैमरे की नज़र में कैद किया तो परिणाम चौकाने वाला निकला। दूबेपुर बाल-विकास-परियोजना के मात्र 02 केन्द्रों की हकीकत कुछ इस तरह दिखीर्षोर्षो दादूपुर प्रार्थमिक विद्यालय में दो आगनबाड़ी केन्द्रों में मात्र 09 बच्चे, यानी प्रति केन्द्र साढ़े चार बच्चे, दो कार्यकत्री व एक सहायिका मौजूद मिली-पूछने पर कार्यकत्रियों ने अपनी भड़ास मुख्य सेविका व बाल विकास अधिकारी पर उतारना शुरू कर दिया यानी पिछले बशोZ में क्या बीता और आज क्या बीत रहा है। कार्यकत्रिया खुलकर पत्रकारों से वार्ता में अपनी व्यथा बतायी। बाकी बचे 18 केन्द्रों की हकीकत अगले अकों में दिखाई पड़ेगी। पोशाहार के एवज में प्रति केन्द्रों से वसूली होती है, कौन कौन वसूलता है, उन्ही कार्यकत्रियों की आवाजों में रिकार्ड किया गया। विभाग का आडिट कैसे होता है, पोशाहार कैसे मिलता है, हाट-कुक्ड में क्या करना पडता है आदि जानकारी अगले अंको मेें पढ़ने केा मिलेगा।rt-21

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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कैबिनेट सचिव श्री शशांक शेखर सिंह 05 अप्रैल, 2010 को लाल बहादुर शास्त्री भवन, एनेक्सी स्थित मीडिया सेन्टर में पे्रस प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए।

Posted on 05 April 2010 by admin

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कैलास मानसरोवर यात्रा

Posted on 05 April 2010 by admin

विश्व प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर तीर्थयात्रा केवल हिन्दुओं के लिए ही नहीं बल्कि अन्य धर्मावलंबियों के लिए भी आस्था व श्रद्धा का पावन केन्द्र है। दिल्ली से 865 किलोमीटर की यह यात्रा सदियों से चल रही है। आलौकिक अनुभूति कराने वाली इस यात्रा में प्रतिवर्ष पूरे भारत वर्ष से लोग शामिल होते हैं।

05_2009_9-kailashman-1_1243011005जून से शुरू होने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा की तैयारी छह महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा इसका संचालन किया जाता है। 30 दिन की इस यात्रा की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा की जाती है। कठिन मार्ग और लंबी दूरी के बाद भी तीर्थयात्री हिमालय की श्रृंखलाबद्ध चोटियों और नैसर्गिक सौन्दर्य का लुत्फ उठाते हुए आगे बढ़ते रहते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मारी जाने वाली यह यात्रा अत्यंत रमणीक है। इस वर्ष एक जून से कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू हो रही है। इसमें प्रतिवर्ष की तरह 16 दल जायेंगे। प्रत्येक दल में अधिकतम 44 यात्री होते हैं। भारत सरकार की ओर एक उच्च अधिकारी को प्रत्येक दल में लाइजन आफिसर के रूप में भेजा जाता है। 18 वर्ष से अधिक उम्र का भारत का नागरिक ही इस यात्रा में शामिल हो सकता है। 30 दिन की इस यात्रा में तीन दिन दिल्ली में रुकना होता है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही यात्रा में जाने की अनुमति मिलती है। दिल्ली से यात्रा शुरू करने के बाद कुमाऊं में यात्री केएमवीएन के पर्यटक आवासगृहों में ठहरते हैं। रास्ते में मंदिरों के दर्शन करते हुए बम-भोले के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। काठगोदाम, अल्मोड़ा, चौकोड़ी, धारचूला, बूंदी, गुंजी, कालापानी, नावीढांग, लिपुलेख, ताकलाकोट से दारचिन, डेराफू व कुगूमठ, जुटुलपुक, दारचिन व छ्युगोम्पा, कुगुमठ से कैलाश की परिक्रमा की तैयारी शुरू हो जाती है। 22 वें दिन दारचिन से छयुगोम्पा होकर ताकलाकोट में दोनों दल एक होकर यज्ञ, स्नान के बाद दोपहर में राकसताल और पीछे कैलाश के दर्शन करते हैं। कैलाश की परिक्रमा में 55 किलोमीटर चलना पड़ता है। 23 वें दिन ताकलकोट से खोजरनाथ और 25 किलोमीटर दूर करनाली घाटी में स्थित खोजरनाथ मठ के दर्शन कराये जाते हैं। यहां पर बुद्ध मंदिर है। इसमें राम-लक्ष्मण व सीता की मूर्तियां विद्यमान हैं। 24 वें दिन ताकलकोट से लीपुपास व नावीढांग से कालापानी को वापस लौटते हैं। फिर गुंजी, बूंदी, धारचूला होते हुए वापस आ जाते हैं।

मानसरोवर के उत्तर में कैलास पर्वत माला और कैलाश शिखर है। दक्षिण में गुरला पर्वत माला और गुरला शिखर है। इस क्षेत्र से उत्तर की चार बड़ी नदियां करनाली, सतलज, ब्रह्मापुत्र, सिन्ध निकलती है। पश्चिम तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर भारतीय मन से कभी अलग नहीं हुये। इस मानसरोवर के कारण ही कुमाऊं को मानस खंड कहा जाना प्रारंभ हुआ। मान्यता के अनुसार मानसरोवर को ब्रह्मा के मस्तिष्क से रचा हुआ माना जाता है। इसकी खोज राज गुरला मान्धाता ने की। जिनके नाम से सर्वाधिक ऊंचा पर्वत गुरला है। तीर्थयात्रा के सफल संचालन के लिए तैयारी जोरशोर से चल रही हैं।

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Vikas Sharma
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“यह तो नोटों की एक और माला की चाहत है´´

Posted on 04 April 2010 by admin

शिक्षा के मौलिक अधिकार की व्यवस्था लागू करने के मामले में केन्द्र सरकार के सामने पैसे की कमी का रोना रोकर उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री ने अपनी बेबसी का ही नहीं बल्कि नकारेपन का सबूत दिया है।

एक तरफ राजधानी में सख्त और तंगदिल पत्थरों के शहर में तब्दील करने पर 6हजार करोड़ रूपये से भी ज्यादा रकम खर्च किये जा चुके हैं और अभी भी जनता की जेब से भरे जाने वाले सरकारी खजाने का मुंह पत्थरों के शहर के विस्तार के लिए लगातार खुला हुआ है। वहीं एक मजबूत और सक्षम देश व प्रदेश के निर्माण के लिए जरूरी “शिक्षा के मौलिक अधिकार´´ को सार्थक बनाने के मामले में प्रदेश की मुख्यमन्त्री पैसे की कमी का रोना रो रही हैं।
उ0प्र0 सरकार की मुखिया का शिक्षा का मौलिक अधिकार बनाने के प्रति यह अफसोसजनक रवैया निश्चित तौर पर संविधान निर्माता डॉ0 बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की आत्मा को अत्यन्त कष्ट पहुंच रहा होगा, आखिर वह बाबा साहब ही थे जिन्होने देश के तमाम वंचितों, दलितों, निर्धनों केा सक्षम और समृद्ध बनाने के इरादे से संविधान की रचना करते वक्त “शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया था´´। इसमें कोई शक नहीं कि शिक्षा के मौलिक अधिकार की श्रेणी में शामिल करने से समाज के उसी वर्ग को सबसे ज्यादा लाभ होगा जिस वर्ग का सबसे बड़ा हिमायती होने का दावा बहुजन समाज पार्टी करती है। इससे एक बात और स्पष्ट होती है कि मुख्यमन्त्री की न तो संवैधानिक मूल्यों में आस्था है और न ही बाबा साहब अम्बेडकर की उन नीतियों के प्रति विश्वास है जिन नीतियों के बलबूते बाबा साहब ने दलितों और वंचितों के उत्थान का सपना देखा था।

प्रदेश कंाग्रेस के प्रवक्ता द्विजेन्द्र त्रिपाठी ने आज यहंा जारी बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी ने एक बार यह साबित कर दिया है कि वह संविधान निर्माताओं के संकल्प और दलितों, वंचितों के उत्थान के प्रति पूरी तरह संकल्पबद्ध है। कंाग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और प्रधानमन्त्री डा0 मनमोहन सिंह विपक्ष के द्वारा खड़ी की जा रही तमाम बाधाओं के बावजूद समाज के सबसे निचले तबके को ऊंचा उठाने के लिए जो प्रयास कर रहे हैं उनमेें मनरेगा, इिन्दरा आवास योजना, किसानों की कर्जमाफी और शिक्षा के मौलिक अधिकार के साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना तथा जवाहर लाल नेहरू अर्बन डेवलपमेंट योजना जैसी योजनाएं जगजाहिर हैं और यह भी जगजाहिर है कि केन्द्र सरकार द्वारा मनरेगा जैसी योजनाओं के लिए उपलब्ध करायी गई राशि को सुश्री मायावती के नेतृत्व में सूबे के अधिकारियों ने जिस तरह लूट-खसोट मचायी है वह किसी से छुपा नहीं है। मनरेगा के तहत गरीबों, दलितों और वंचितों को जो पैसा मिलना था प्रदेश की मुख्यमन्त्री उसी पैसे से बनी नोटों की माला पहन रही हैं। इस बात की क्या गारण्टी है कि सबको शिक्षा के लिए मुख्यमन्त्री केन्द्र सरकार से जिस राशि की मांग कर रही हैं वह रूपया आगामी रैली में नोटों की एक और माला के रूप में नज़र आये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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किसानों, गरीबों और दलितों के लिए सहकारिता अत्यन्त जरूरी

Posted on 04 April 2010 by admin

उ0प्र0 कंाग्रेस सहकारिता प्रकेाष्ठ के सभी प्रदेश पदाधिकारियों की एक आवश्यक बैठक आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रकोष्ठ के चेयरमैन-पूर्व मन्त्री बच्चा पाठक की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रकोष्ठ के चेयरमैन-पूर्व मन्त्री बच्चा पाठक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के जो लोग सहकारिता से जुड़े हैं उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जायेगी, जिसके माध्यम से अधिकाधिक लोगों को सहकारिता से जोड़ा जा सके। उन्होने कहाकि वर्तमान सरकार द्वारा सहकारिता का मखौल बनाकर उसमें अपने-अपने व्यक्तियों केा अपने तरीके से सहकारिता कानूनों के विरूद्ध लाभािन्वत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होने कहाकि उ0प्र0 कंाग्रेस कमेटी सहकारिता प्रकोष्ठ कोआपरेटिव एक्ट की विसंगतियों को दूर करने के लिए एवं सहकारिता को मजबूत करने के लिए शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमण्डल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन देगा।

उन्होने कहा कि सहकारिता के माध्यम से सरकार और जनता के बीच सामंजस्य स्थापित करके ही प्रदेश का विकास किया जा सकता है। किसानों, गरीबों और दलितों के लिए सहकारिता अत्यन्त जरूरी है। किन्तु प्रदेश की मुख्यमन्त्री को किसानों, गरीबों, वंचितों और दलितों से कोई लेना-देना नहीं रह गया है। सहकारी संस्थाओं को गैर कांग्रेसी सरकारों द्वारा कई बार हाईजैक करने की कोशिश की गई।आजादी की लड़ाई के दौरान देश को सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने हेतु राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पं. जवाहर लाल नेहरू ने सहकारिता आन्दोलन की शुरूआत की थी। गैर कंाग्रेसी सरकारों के बनने के बाद सहकारिता को गम्भीरता से नहीं लिया गया एवं सहकारिता आन्दोलन को कमजोर करने की साजिश की जाती रही है। लोकतन्त्र की मजबूती में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करने वाला सहकारिता आन्दोलन उत्तर प्रदेश सरकार के षडयन्त्र का शिकार हो गया है।

अन्त में श्री पाठक ने बताया कि बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि पूरे प्रदेश में जनपद स्तर पर सहकारिता प्रकोष्ठ की इकाइयां गठित करने एवं मण्डल स्तर पर कोआर्डिनेटर नियुक्त कर सहकारिता प्रकोष्ठ को और अधिक सुदृढ़ किया जायेगा। बैठक में आम सहमति बनी कि सहकारिता का केन्द्रीय स्तर पर भी एक प्रकोष्ठ का गठन किया जाय ताकि प्रदेश के साथ ही साथ देश में भी सहकारिता का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा सके।

बैठक में मुख्य रूप से श्री दिग्विजय सिंह, श्री सुरेश चन्द्र वर्मा, श्री नरेन्द्र सिंह, श्री शिवभूषण मिश्र, श्री रणजीत ओझा, श्री इन्द्रजीत, श्री के.के.श्रीवास्तव, श्री शैलेन्द्र कुमार, श्री राम सागर उपाध्याय, श्री दयानन्द पाण्डेय, श्री इन्द्रजीत यादव, श्री एम.पी.त्रिपाठी, श्री अशोक श्रीवास्तव, श्री इन्द्रजीत सिंह आदि सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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