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Archive | December 9th, 2017

व्यवस्था के प्रति अनास्था न उत्पन्न होने दें युवा- राजनाथ सिंह

Posted on 09 December 2017 by admin

students-with-medals-and-degrees-with-distinguished-guests-at-convocation-of-lucknow-universitythree-books-were-released-on-60th-convocation-of-lucknow-universityगृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि स्वतंत्रता के बाद राजनीति ने अपने अर्थ और भाव को खोया है॰ लखनऊ विश्वविद्यालय के 60वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा कि युवाओं को खुद को राजनीतिक व्यवस्था से अलग नहीं रखना चाहिए।
उन्होने कहा कि संकल्प के बल पर जीवन में कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है। उन्होने युवा शक्ति का आहवाहन किया कि वह व्यवस्था के प्रति अनास्था न उत्पन्न होने दें। व्यवस्था के प्रति अनास्था की समाज को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ms-anjali-singh-conferred-with-gold-medals-during-convocation-of-lucknow-university
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के साहित्य और संस्कृति में ज्ञान का भंडार छिपा है। इसका उपयोग वर्तमान संदर्भों में सफलता पूर्वक किया जा सकता है। उन्होने लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्वानों से आग्रह किया कि वे भारतीय ज्ञान पर शोध कर उसे दुनिया के समक्ष लाएं।
श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा चरित्र का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि राम की तुलना में कहीं अधिक धनवान, बलवान और ज्ञानवान होने के बावजूद रावण का विनाश इसलिए हुआ क्योंकि उसका चारित्रिक पतन हो गया था। union-home-minister-delivering-the-keynote-address-at-lucknow-university-convocation-on-satuday
प्रदेश के राज्यपाल और कुलाधिपति राम नाईक ने कहा कि वैश्विक स्तर पर स्पर्धा बढ़ने के कारण शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने की आवश्यकता है। नई खोजों पर बल देते हुए श्री नाईक ने कहा कि इससे शिक्षा का लाभ समाज को मिलेगा। इससे पहले अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि आज शिक्षा के व्यवसायीकरण की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के बाद छात्रों को रोजगार मिलना चाहिए। union-home-minister-shri-rajnath-singh-honoured-with-honorary-dsc-degree-at-60th-convocation-of-lucknow-university
दीक्षांत समारोह के मौके पर श्री मेहंदी अग्रवाल और सुश्री अंजली सिंह सहित 192 छात्र छात्राओं को डिग्रियों और पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 32 छात्र और 159 छात्राएं। यानि पदक पाने वाली छात्राओं का प्रतिशत 83 रहा। इस मौके पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह को डी०एस०सी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

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व्प्रदेश अध्यक्ष डाॅ0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय 10 दिसम्बर को वाराणसी, गाजीपुर एवं चंदौली में

Posted on 09 December 2017 by admin

लखनऊ 09 दिसम्बर 2017, भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डाॅ0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय 10 दिसम्बर को अपरान्ह 3ः30 बजे नई दिल्ली से वाराणसी पहुॅचेंगे। वाराणसी में ग्राम ईसीपुर बड़ागांव, शिवपुर बाबतपुर रोड, पहड़िया में विभिन्न कार्यक्रमों में उपस्थित रहेंगे। श्री पाण्डेय ख्यालगढ लांैदा चन्दौली, नई बस्ती अलीनगर चन्दौली, रामनगर कटेसर वाराणसी, गहुरा गाजीपुर तथा पक्खनपुर गाजीपुर में विभिन्न कार्यक्रम में भी उपस्थित रहेंगे।
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लखनऊ 09 दिसम्बर 2017, केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा 10 दिसम्बर को गाजीपुर एवं वाराणसी में विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मलित होगें।
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लखनऊ 09 दिसम्बर 2017, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 10 दिसम्बर को वाराणसी में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

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गुजरात के दावे छोड घर संभाले अखिलेश - राकेश त्रिपाठी

Posted on 09 December 2017 by admin

लखनऊ 09 दिसम्बर 2017, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के गुजरात में चुनावी पर्यटन करने पर तंज कसा। श्री त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव गुजरात के पर्यटन स्थलों से प्रभावित होकर कुछ दिन गुजरात में गुजारने गए थे। गुजरात में चुनाव लड़कर जीतना समाजवादी पार्टी के लिए शेखचिल्ली के हसीन सपने जैसा है। अखिलेश यादव के पांच सीटों पर लड़ने और जीतने पर उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने ही प्रश्न उठाए हैं। अखिलेश यादव पहले अपना घर सम्भालेे। गुजरात में पांच सीटंे लड़ने में सारी ऊर्जा व्यर्थ कर देंगे तो बची-खुची पांच सीटें भी आगामी लोकसभा चुनाव में गंवा बैठेगें, इसके संकेत निकाय चुनावों के परिणामों से मिल चुके है।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी और अखिलेश यादव दो अच्छे लड़के बनकर साथ लडे़ थे लेकिन गुजरात में तीन अच्छे लडकों का साथ पाकर राहुल गांधी ने पुराने साथी अखिलेश यादव को प्रचार तक के लिए नहीं बुलाया। इसी हताशा में बिना संगठन व जनसमर्थन के अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी घोषित कर चुनाव लड़ाने गुजरात जा पहुॅचे हैं। गुजरात में कांग्रेस की जातीय राजनीति से उत्साहित होकर अखिलेश यादव अपने लिए स्थान तलाश रहे है।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में जनता ने जातीय व मजहबी राजनीति को दरकिनार कर विकास के मुद्दे पर भाजपा को भरपूर समर्थन दिया था। गुजरात चुनावों में भी जनता जातीय व मजहबी राजनीति करने वालों को सबक सिखाएगी।

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गांधी जी के गुजरात में अखिलेश यादव -राजेन्द्र चौधरी

Posted on 09 December 2017 by admin

akhilesh-yadav-in-gujaratगुजरात की चर्चा आते ही इतिहास के कई पृष्ठ स्वतः खुलने लगते हैं। अतीत के पांच हजार साल पहले का दृश्य जब भगवान श्री कृष्ण रण छोड़ बनकर मथुरा से द्वारिका पहुंच गए थे। द्वारिका तो समुद्र में विलीन हो गई किन्तु द्वारिकाधीश का मन्दिर आज भी भव्यता के साथ खड़ा है। वर्तमान में कुछ पीछे चलकर मोहनदास करम चंद गांधी का त्यागलोक दिखाई देने लगता है। स्वतंत्रता आंदोलन की अनुगूंज सुनाई पड़ने लगती है। 1909 में गांधी जी ने विलायत से लौटते हुए जहाज पर ‘हिन्द स्वराज‘ नाम से एक पुस्तक लिखी थी। जिसमें विभिन्न विषयों पर उनके विचार हैं। गांधी जी ने हिन्दुस्तान में आकर पहले तो अपने गुरू गोखले जी के कहने पर भारत की यात्रा की। सन् 1917 से गांधी जी ने गुजरात में साबरमती नदी के किनारे अपने एक आश्रम की स्थापना की जहां से उनके राजनीतिक और वैयक्तिक प्रयोग भी शुरू हुए। 1930 में इसी आश्रम से उन्होंने नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी मार्च किया था। गांधी जी 1933 तक साबरमती आश्रम में रहे। इस चर्चा में सरदार बल्लभभाई पटेल को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा जिन्होंने भारत को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया।
तो उसी गुजरात में इन दिनों बड़ी हलचल है। राजनीति के नए प्रयोगों की यह एक नई प्रयोगशाला भी बन रही है। गांधी जी राजनीति को सामाजिक और नैतिक संदर्भ में देखते थे और यह चेतावनी भी देते थे कि ताकत (राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक) किसी भी व्यक्ति को अंधा और बहरा बना देती है। जो लोकतंत्र पक्षपातपूर्ण, अंध विश्वासी और अराजकता में रहेगा वह एक दिन स्वयं नष्ट हो जाएगा। लोकतंत्र में केवल और केवल जनता का राज होना चाहिए।akhilesh-yadav-in-gujrat
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश 5,6,7, और 8 दिसम्बर 2017 को गुजरात की यात्रा पर थे। संदर्भ चुनाव प्रचार का था किन्तु मंतव्य था गुजरात को नजदीक से जानने का, रिश्ते बनाने का और भविष्य को मजबूती देने का। स्वाभाविक था कि गुजरात की धरती पर भगवान श्री कृष्ण की ओर अखिलेश यादव जी का खिंचाव होता। सर्वप्रथम वे द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने इष्टदेव का आशीर्वाद लिया। अपने संक्षिप्त प्रवास में उन्होंने समाज के सभी वर्गो के लोगों से मुलाकात की और गुजरात के ताजा हालात की भी जानकारी ली। लेकिन सबसे ज्यादा उनका चिन्तन गांधी जी के नेतृत्व में चलनेवाले स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों-आदर्शों के इर्दगिर्द और राजनीति में आ रहे क्षरण पर ही केन्द्रित रहा।
गुजरात और सरदार बल्लभभाई पटेल की याद परस्पर जुड़ी हैं। न केवल स्वतंत्रता आंदोलन अपितु किसान आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। चैधरी चरण सिंह अक्सर गांजी जी की आर्थिक नीतियों की चर्चा करते रहते थे और उन्हीं विचारों को लेकर वे आजीवन संघर्ष करते रहे।
आज राजनीति के चाल चरित्र में जिस कदर बदलाव आया है और मूल्यों की विश्वसनीयता भी प्रश्नों के घेरे में आती जा रही है वह चिंताजनक है। श्री अखिलेश यादव जी ने यह प्रश्न उठाया कि क्योंकर लोकतंत्र का अवमूल्यन होता जा रहा हैं राजनीति में संकीर्ण स्वार्थों का बोलबाला होता जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को तहस नहस कर विकास को धता बताकर सांप्रदायिकता की आड़ में राजनीतिक स्वार्थों की प्राप्ति उचित नहीं। श्री यादव मानते हैं कि विकास के नाम पर धोखा नेतृत्व की साख को बट्टा लगाती है। बेरोजगार नौजवानों के सपनों को तोड़ा गया तो एक बड़े विश्वास के साथ छल होगा। किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गुजरात में उनकी बदहाली देखकर दुःख हुआ। मूंगफली और कपास के किसान अपने उत्पाद का लाभप्रद एवं उचित मूल्य भी नहीं पा रहे हैं। भाजपा ने कपास के दाम 15 सौ रूपये कुन्तल दिलाने का वादा किया किन्तु वे 800 रूपए में ही फसल बेचने को मजबूर हैं।
गुजरात जाने के पीछे यह देखना भी था कि बहुप्रचारित गुजरात माॅडल की वास्तविकता क्या है? गुुजराती लोग मानते हैं कि गुजरात में कहीं भी विकास नहीं दिखाई देता है। गुजरात के द्वारिकाधीश मंदिर में ही तीन दिन बिजली नहीं आई थी। स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा सभी क्षेत्रों में अफरातफरी मची दिखाई दी। विकास माॅडल की बात करने वाले गुजरात के विकास पर भी नजर डाल लेते तो अच्छा होता। स्वच्छ भारत का नारा देने वालों को गुजरात में जगह-जगह गंदगी दिखाई क्यों नहीं देती है।
श्री अखिलेश यादव ने चर्चा में प्रदूषण का प्रश्न भी उठाया और कहा कि वैचारिक प्रदूषण के कारण भी भाईचारे और विकास का संकट है। सामाजिक सौहार्द और परस्पर विश्वास के आधार पर ही समाज का सर्वतोमुखी विकास व सद्भाव का माहौल हो सकता है। श्री यादव ने अहमदाबाद में एक पत्रकार वार्ता को भी सम्बोधित किया जिसमें कुछ बुनियादी प्रश्न भी उठाए गए। इस वार्ता के समय राश्ट्रीय सचिव श्री राजेन्द्र चैधरी भी उपस्थित थे। श्री अखिलेश यादव ने यहां गिरि के जंगलो में शेरो के बीच भी कुछ समय बिताया।
श्री अखिलेश यादव की चिंता आजादी के मूल्यों को बचाने की है और यही समाजवादी विचारधारा का आधार है। गांधी जी ने सत्य, अहिंसा और सहिष्णुता का जो संदेश साबरमती के तट से दिया था आज भी वह प्रासंगिक है। साबरमती आश्रम में गांधी जी के जीवन से सम्बन्धित वस्तुओं की प्रदर्शनी है जहां उकेरा गया उनका यह संदेश आज भी मार्ग दर्षक बन सकता है। गांधी जी का मत था कि ‘‘ लोकतंत्र को ऊपर से बीस तीस लोग नहीं चला सकते हैं लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसमें हर व्यक्ति की भागीदारी न हो‘‘।

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