Archive | March 30th, 2010

जेल बन्दियों का आमरण अनशन जारी, पांच की हालत बिगड़ी

Posted on 30 March 2010 by admin

जेल काण्ड की सीबाआई जांच की मांग को लेकर तीन दिन से कारगार में अनशन पर बैठे दो दर्जन बन्दियों में से पांच की हालत बिगड़ गई है। उन्हें क्वतनहाईं से निकालकर जिला कारागार के अस्पताल ले जाया गया है। बाकी बन्दियों की भूख हड़ताल जारी है।
 कारागार में लगभग दो वर्ष पूर्व हुए कैदियों और बन्दी रक्षकों के बीच हुए खूनी संघर्ष व पांच की मौत के मुकदमें में दो दर्जन अभियुक्त शुरू से मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इन बन्दियों का आरोप है कि जेल प्रशासन बन्दियों से जुर्म स्वीकार करने के लिए दबाव बना रहा है और उनके न मानने पर तरह-तरह के उत्पीड़न बन्दियों के साथ किया जा रहा है। इस बाबत अदालत व प्रशासनक अधिकारियों को कई बार प्रार्थनापत्र दिया किया किन्तु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इन बातों को लेकर बन्दियों ने पन्द्रह दिन पहले आमरण अनशन करने की चेतावनी दी थी। पिछले चार दिनों से बन्दियों ने खाना-पीना छोड़ दिया है। जेल प्रशासन ने छह बन्दियों को 11 नबर बैरक के बगल के कमरे में व बाकी बन्दियों को निष्प्रयोज्य महिला बैरक के बगल डण्डा गैलरी में बन्द कर रखा है।

दो दिन से अनशन पर बैठे बन्दियों में से अच्छेलाल यादव, विनोद सिंह, राजू यादव, संजय वर्मा, गुaå यादव, मकबूल खां, अमर बहादुर सिंह की हालत बिगड़ गई तो रात्रि में ही उन्हें जेल के अस्पताल में भतीü कराया गया। फिलहाल बन्दियों ने अनशन जारी रखा है। इस बारे में जेल प्रशासन ने अनशन की बात से इंकार करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए जेल मैनुअल के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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उ0प्र0 अभियोजन अधिकारी सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली 2009 अनुमोदित

Posted on 30 March 2010 by admin

उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिशद ने बाईसकुZलेशन के माध्यम से उ0प्र0 अभियोजन अधिकारी सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली 2009 को अनुमोदित कर दिया है। ज्ञातव्य है कि उ0प्र0 अभियोजन अधिकारी सेवा नियमावली 1991 में प्रख्यापित की गई थी, जिसमें कतिपय संशोधन उ0प्र0 अभियोजन अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 1994 के माध्यम से किये गये थे। तदोपरान्त अभियोजन शाखा में विद्यमान विभिन्न श्रेणी के पदों के वेतनमानों के साथ पदनाम संशोधित किये गये। उक्त को समाहित करते हुए सेवा नियमावली में द्वितीय संशोधन के प्रस्ताव को मन्त्रिपरिशद द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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2010-11 के लिए गेहूं खरीद नीति मन्जूर

Posted on 30 March 2010 by admin

गेहूं खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1100 रूपये प्रति कुन्तल

किसानों से गेहूं की खरीद किसान बही, किसान क्रेडिट कार्ड तथा साधन सहकारी समितियों की पासबुक के आधार पर होगी

उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिशद ने बाई-सकुZलेशन द्वारा रबी क्रय वशZ 2010-11 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अन्तर्गत गेहूं खरीद नीति को मंजूरी प्रदान कर दी है।

गेहूं खरीद के सम्बन्ध में मन्त्रिपरिशद द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार, भारत सरकार द्वारा घोशित गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 1100 रूपये प्रति कुन्तल के आधार पर गेहूं क्रय किया जाएगा। मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत रबी खरीद वशZ 2010-11 में राज्य सरकार की एजेिन्सयों के लिए 39 लाख मी0टन गेहूं क्रय का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम द्वारा भी एक लाख मी0टन गेहूं क्रय किया जाएगा। गेहूं क्रय की अवधि 01 अप्रैल, 2010 से 30 जून, 2010 तक प्रभावी रहेगी। यदि निर्धारित अवधि में क्रय केन्द्रों पर गेहूं की आवक बनी रहती है तो किसानों के हितों को दृिश्टगत रखते हुए निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूं भी क्रय किया जायेगा।

रबी क्रय वशZ 2010-11 में पूरे प्रदेश में 4406 क्रय केन्द्र खोले जायेगे। खाद्य विभाग की विपणन शाखा 600 केन्द्र, उ0प्र0 सहकारी संघ 2200 केन्द्र, उ0प्र0 राज्य कृशि एवं औद्यो0 निगम 451 केन्द्र, उ0प्र0 उपभोक्ता सहकारी संघ 639 केन्द्र, उ0प्र0 राज्य आवश्यक वस्तु निगम 200 केन्द्र तथा उ0प्र0 राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा 68 केन्द्र संचालित किये जायेगे। इनके अलावा नैफेड द्वारा 200 तथा भारतीय खाद्य निगम द्वारा 48 केन्द्र संचालित किये जायेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा क्रय एजेंसियों के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुसार खाद्य विभाग की विपणन शाखा द्वारा 12.50 लाख मी0टन0, उ0 प्र0 सहकारी संघ द्वारा 12 लाख मी0टन0, उ0 प्र0 राज्य कृशि एवं औद्योगिक निगम द्वारा 04 लाख मी0टन0, उ0प्र0 उपभोक्ता सहकारी संघ द्वारा 05 लाख मी0टन, उ0प्र0 राज्य एवं आवश्यक वस्तु निगम द्वारा 2.50 लाख मी0टन, उ0प्र0 कर्मचारी कल्याण निगम तथा भारतीय खाद्य निगम द्वारा एक-एक लाख मी0टन तथा नेफेड द्वारा दो लाख मी0टन गेहूं की खरीद की जायेगी। इस प्रकार कुल 40 लाख मी0टन गेहूं खरीद का कार्यकारी लक्ष्य रखा गया है।

क्रय केन्द्र सामान्यत: प्रात: 08:00 बजे से संाय 05:00 बजे तक खुले रखे जायेगे, परन्तु सम्बन्धित जिलाधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार क्रय केन्द्र के खुलने व बन्द होने के समय में आवश्यक परिवर्तन कर सकेंगे। किसानों की सुविधा के उद्देश्य से राजपत्रित अवकाशों के अतिरिक्त गेहूं क्रय केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की भान्ति द्वितीय शनिवार तथा रविवार के अवकाश दिवसों में भी खुले रहेंगे। क्रय केन्द्र  का निर्धारण एवं चयन इस प्रकार किया जायेगा कि किसी भी किसान को अपना गेहूं बेचने के लिए 7 कि0मी0 से अधिक दूरी तय न करनी पड़े।  प्रत्येक कांटे पर अधिकतम 600 कुन्तल गेहूं क्रय की सीमा निर्धारित होगी। अधिक गेहूं की आवक होने पर जिलाधिकारी द्वारा केन्द्र पर कांटों की संख्या में वृद्धि की जायेगी। गेहूं की प्रतिस्पर्धा पूर्ण क्रय किये जाने के लिए मण्डी स्थलों पर आवश्यकतानुसार जिलाधिकारी के निर्देश पर क्रय केन्द्र खोले जायेगे। यदि मण्डी में गेहूं की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे लगायी जायेगी तो मण्डी कर्मचारी इसकी सूचना सम्बन्धित क्रय एजेन्सी के केन्द्र प्रभारी को देंगे तथा उक्त एजेन्सी द्वारा गेहूं के समर्थन मूल्य पर क्रय कर लिया जायेगा।

किसानों से गेहूं की खरीद किसान बही, किसान क्रेडिट कार्ड तथा साधन सहकारी समितियों की पासबुक के आधार पर की जायेगी। चकबन्दी के तहत ग्रामों में चकबन्दी सम्बन्धी सुसंगत भूलेख व अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र के आधार पर की जायेगी। प्रत्येक गांव को किसी एक गेहूं क्रय केन्द्र से सम्बद्ध किया जायेगा। बड़े किसानों का गेहूं का क्रय टोकन पर्ची के माध्यम से किया जायेगा। छोटे और मझोले किसानों से खरीद भूलेख के आधार पर बिना किसी टोकन के होगी अर्थात् उन्हें टोकन व्यवस्था से मुक्त रखा जायेगा। प्रत्येक केन्द्र पर प्रत्येक रविवार तथा बुद्धवार केवल छोटे और मझोले किसानों के गेहूं की तौल अनुमन्य होगी। सप्ताह के अन्य दिनों में भी छोटे और मझोले किसानों को क्रय केन्द्र पर प्राथमिकता दी जायेगी। मण्डी स्थल में स्थापित सभी क्रय केन्द्र अनिवार्य रूप से असम्बद्ध रहेंगे, अर्थात् कोई भी कृशक बिना टोकन के ऐसे क्रय केन्द्रों पर कभी भी गेहूं बेच सकता है।

रबी विपणन वशZ 2010-11 में गेहूं क्रय का भुगतान केवल एकाउन्ट पेयी चेक द्वारा एक लाख रूपये की सीमा तक कृशकों को क्रय केन्द्र प्रभारी द्वारा किया जायेगा। एक लाख रूपये से अधिक धनरािश का भुगतान एकाउन्ट पेयी चेक द्वारा ही क्षेत्रीय लेखा कार्यालय अथवा अस्थायी भुगतान कार्यालय द्वारा किया जाएगा। समस्त क्रय एजेिन्सयां यह सुनििश्चत करेंगी कि किसानों को तत्परतापूर्वक एवं सुविधाजनक ढंग से भुगतान मिल सके। सम्बन्धित क्रय एजेन्सी के जिला स्तरीय अधिकारी/प्रबन्धक यह सुनििश्चत करेंगे कि क्रय केन्द्रों पर प्रयोग में लायी जाने वाली चेकबुक के प्रत्येक पेज पर केवल एकाउण्ट पेयी चेक की मोहर पहले से ही लगी हुई है।
क्रय एजेिन्सयों द्वारा स्थापित क्रय केन्द्रों पर किसानों के लिए सुविधायें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य कृशि उत्पादन मण्डी परिशद की है। क्रय केन्द्रों पर कृशकों का बैठने के लिए शामियाना तख्त, दरी, पेयजल और कृशकों के जानवरों के लिए पानी क्रय केन्द्रों पर प्रकाश हेतु पेट्रोमैक्स, गेहूं साफ करने के लिए पर्याप्त संख्या में दो जाली वाले छन्ने, वशाZ से खाद्यान्नों को बचाने हेतु त्रिपालों आदि की व्यवस्था मण्डी समितियों द्वारा की जायेगी। मण्डी समिति द्वारा किसी केन्द्र पर उपयुZक्त व्यवस्था नहीं किये जाने की स्थिति में क्रय एजेिन्सयों द्वारा उपरोक्त की व्यवस्था स्वयं की जायेगी और इस पर व्यय की गई धनरािश की प्रतिपूर्ति पूरे जनपद के गेहूं खरीद पर देय मण्डी शुल्क की धनरािश से कर ली जायेगी।

प्रदेश में इस वशZ गेहूं की फसल की अच्छी सम्भावना को दृिश्टगत रखते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सभी सम्भव प्रयास किये जाने की व्यवस्था की गई है। इसी उद्देश्य से बल्क परचेजर्स को कतिपय शतोंZ के साथ प्रदेश में गेहूं खरीद की अनुमति दी गई है। आई0टी0सी0 लि0 एवं अन्य सम्भावित बल्क परचेजर्स द्वारा किसानों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 1100 रूपये प्रति0 कुन्तल की दर से न्यूनतम भुगतान किया जायेगा। यह भुगतान प्रत्येक किसान को अनिवार्य रूप से एकाउंट पेयी चेक के द्वारा किया जायेगा। बल्क परचेजर्स केवल अपने स्वयं के प्रयोग के लिए गेहूं क्रय करेंगे। वे इस आशय का शपत-पत्र भी देंगे कि वे इस गेहूं को अन्य संस्थाओं को नहीं बेचेंगे। पूर्व में जारी अधिसूचना दिनांक- 01 जून, 2008 द्वारा गेहूं की स्टाक सीमा निर्धारित की गई है। इसके अन्तर्गत थोक विक्रेता एवं कमीशन एजेंट एक-एक हजार कुन्तल गेहूं की स्टाक सीमा रख सकेंगे। आई0टी0सी0 एवं अन्य सम्भावित बल्क परचेजर्स को एक हजार कुन्तल की स्टाक सीमा से छूट प्रदान करते हुए उन्हें 50 लाख कुन्तल गेहूं का स्टाक रखने की अनुमति होगी।

राज्य सरकार ने गेहूं क्रय के प्रभावी अनुश्रवण की व्यवस्था भी की है। जिलाधिकारी द्वारा जनपद के किसी वरिश्ठ अधिकारी, जो अपर जिलाधिकारी स्तर के हों, उन्हें जिला खरीद अधिकारी नामित किया जायेगा। इसी प्रकार प्रत्येक उप जिलाधिकारी द्वारा तहसील/परगना के किसी वरिश्ठ अधिकारी को गेहूं क्रय पर्यवेक्षक नामित किया जायेगा। मण्डिया एवं उप-मण्डियों को गेहूं क्रय का मुख्य केन्द्र बिन्दु बनाया जायेगा। जिला स्तर पर जिला खरीद अधिकारी के पर्यवेक्षण में एक गेहूं खरीद नियन्त्रण प्रकोश्ठ की स्थापना होगी, जिसमें क्रय एजेंसियों द्वारा गेहूं क्रय कार्य की समीक्षा की जायेगी। इसके साथ ही क्रय के सम्बन्ध में प्राप्त िशकायतों पर प्रभावी रूप से कार्यवाही सुनििश्चत की जायेगी। नियन्त्रण प्रकोश्ठ कार्य दिवसों में कार्यालय समय में सक्रिय रहेगा, इसके अलावा अवकाश दिनों में यह प्रकोश्ठ प्रात: 10 बजे से अपराह्न 01 तक कार्य करेगा।

मण्डल स्तर पर मण्डलायुक्त द्वारा पाक्षिक रूप से गेहूं खरीद की समीक्षा की जायेगी। समीक्षा बैठक में गेहूं खरीद की प्रगति एवं उत्पन्न क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान भी सुनििश्चत किया जायेगा। सम्भागीय खाद्य नियन्त्रक एवं सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी एवं जिला खाद्य विपणन अधिकारी द्वारा गेहूूं खरीद की नियमित समीक्षा किये जाने के साथ ही क्रय केन्द्रों का निरीक्षण भी किया जायेगा। इसके साथ ही यह भी सुनििश्चत किया जायेगा कि डिस्ट्रेस सेल की स्थिति उत्पन्न न हो  और क्रय केन्द्रों पर गेहूं खरीद की समुचित व्यवस्था का अनुश्रवण होता रहे। वे यह भी सुनििश्चत करेंगे कि किसानों को गेहूं विक्रय उपरान्त मूल्य का पूरा भुगतान प्राप्त हो रहा है।

राज्य स्तर पर गेहूं खरीद की स्थिति के अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए जवाहर भवन लखनऊ में खाद्य नियन्त्रण कक्ष स्थापित किया गया है। खाद्य आयुक्त, नियन्त्रण कक्ष का दूरभाश व फैक्स न0- 0522-2286046 तथा विभागीय वेबसाइट ूूूण्बिेण्नचण्दपबण्पद है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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अन्तर्जातीय/अन्तर्धार्मिक विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार की स्वीकृति का अधिकार मण्डल स्तर पर प्रतिनिधानित

Posted on 30 March 2010 by admin

उत्तर प्रदेश सरकार ने अन्तर्जातीय/अन्तर्धार्मिक विवाह प्रोत्साहन के लिए वर्तमान में लागू प्रोत्साहन योजना को और सुगम बनाने के उद्देश्य से पुरस्कार इत्यादि की स्वीकृति के अधिकार मण्डल स्तर पर प्रतिनिधानित करने का फैसला लिया है।

 प्रदेश मन्त्रिपरिशद द्वारा परिचालन के माध्यम से उत्तर प्रदेश अन्तर्जातीय/ अन्तर्धामिक विवाहित दम्पत्ति को प्रोत्साहन देने की नियमावली, 1976 के नियम 7(2) को संशोधित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। मन्त्रिपरिशद के फैसले के अनुसार अन्तर्जातीय एवं अन्तर्धार्मिक प्रोत्साहन पुरस्कार योजना का विकेन्द्रीकरण करते हुये मण्डलायुक्तों को प्रोत्साहन पुरस्कार की नियमानुसार स्वीकृति हेतु अधिकृत किया गया है। सम्बन्धित जिला मजिस्ट्रेट प्राप्त आवेदन-पत्र की आवश्यक संवीक्षा करने के पश्चात्, पुरस्कार प्राप्त करने के लिए पात्र दम्पत्ति के प्रस्ताव को अपने स्तर से नियमानुसार पूर्ण करके अपनी सिफारिश सम्बन्धित मण्डलायुक्त को भेजेंगे। पुरस्कार की धनरािश एवं प्रशस्ति-पत्र मण्डलायुक्त द्वारा अपने हस्ताक्षर से सम्बन्धित दम्पत्तियों को प्रदान किया जायेगा। वर्तमान में लागू व्यवस्था के अनुसार जिला मजिस्ट्रट अपनी संस्तुति शासन के राश्ट्रीय एकीकरण विभाग को नियमानुसार स्वीकृति हेतु प्रेशित करते हैं।

ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय एकता की भावना को जागृत रखने, समाज में एकता बनाए रखने जाति-पात तथा धर्म का भेद-भाव मिटाते हुए भिन्न-भिन्न परिवारों में एकता की भावना का सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेश में अन्तर्जातीय/अन्तर्धामिक विवाह के लिए प्रोत्साहन योजना लागू है। इस योजना के तहत कतिपय शर्ताें के अधीन रहते हुए अन्तर्जातीय/अन्तर्धार्मिक विवाह सम्पन्न करने वाले दम्पत्ति को प्रोत्साहन देने के लिए 10,000 रूपये का पुरस्कार, एक पदक व प्रमाण-पत्र तथा लघु उद्योग लगाने के लिए 15,000 रुपये और मकान बनाने के लिए भूमि आवंटन में प्राथमिकता दिए जाने की व्यवस्था है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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उ0प्र0 सहभागी सिंचाई प्रबंधन नियामावली 2010 मंजूर

Posted on 30 March 2010 by admin

समितियों की कार्यकारिणी का कार्यकाल 6 वर्ष के लिए निर्धारित

सामान्य सभा द्वारा निर्वाचित सदस्य अपने में से ही पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे

 उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिषद ने बाई सकुZलेशन द्वारा उत्तर प्रदेश सहभागी सिंचाई प्रबंधन नियामावली 2010 को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्तावित नियमावली गजट में प्रकाशित होने के दिन से प्रवृत्त होगी। ज्ञातव्य है कि राज्य जल नीति-1999 में राज्य सरकार द्वारा संकल्प लिया गया था कि सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी। जल नीति के संकल्प को कार्यरुप देने के दृष्टिगत उ0प्र0 सहभागी सिंचाई प्रबंधन अधिनियम-2009 को 20 फरवरी, 2009 में अधिसूचित किया गया था। इसमें प्राविधान किया गया कि नहरों के कुलाबा, अल्पिका, राजवाहा, शाखा एवं परियोजना आदि के स्तर पर जल उपभोक्ता समितियों का गठन कृषकों द्वारा किया जायेगा। इस प्रकार गठित जल उपभोक्ता समितियों की सहभागिता सिंचाई प्रबंधन के प्रत्येक स्तर एवं सिंचाई प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर की जायेगी। अधिनियम की धारा 51 के अन्तर्गत राज्य सरकार को नियमावली बनाने की शक्ति प्रदान की गई है। जिसके तहत मन्त्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सहभागी सिंचाई प्रबंधन नियमावली 2010 को मंजूरी दी।

 नियमावली में समितियों की कार्यकारिणी का कार्यकाल 6 वर्ष के लिए रखा गया है परन्तु कार्यकारिणी के पदाधिकारियों (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) का कार्यकाल 2 वर्ष रखा गया है। प्रत्येक 2 वर्ष बाद कार्यकारिणी के सदस्य, पदाधिकारियों को बदल सकते है अथवा उन्हीं को पुन: रख सकते है। कार्यकारिणी के सदस्यों का निर्वाचन सामान्य सभा द्वारा किया जायेगा। निर्वाचित सदस्य अपने में से ही पदाधिकारियों का चुनाव अपनी प्रथम बैठक में कैनाल अधिकारी की उपस्थिति में करेगें। जल उपभोक्ता समितियों को प्रशिक्षण उनका अनुश्रवण एवं मूल्यांकन तथा अन्य आवश्यकताओं हेतु सिंचाई विभाग के प्रत्येकस्तर पर सहभागी सिंचाई प्रबंधन प्रकोष्ठ के गठन का प्राविधान किया गया है। सींच दर्ज करने का कार्य सिंचाई विभाग के कर्मी तथा जल उपभोक्ता समिति द्वारा संयुक्त रुप से किये जाने का प्राविधान नियमावली में है।

 नियमावली में यह भी व्यवस्था की गई है कि अल्पिका समिति सिंचाई शुल्क वसूल कर कैनाल अधिकारी के माध्यम से राज्य के कोषागार में जमा करायेगी। राज्य सरकार द्वारा वसूली गई राशि का 60 प्रतिशत अंश सम्बंधित जल उपभोक्ता समिति को बजट के माध्यम से वापस करेगी। समिति के सामान्य सभा द्वारा अपने पदाधिकारियों को मानदेय देने का प्राविधान किया गया है। नियमावली में समिति द्वारा अल्पिका एवं राजवाहा के सिविल कार्य, अनुरक्षण एवं मरम्मत आदि कार्य में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया निर्धारित की गई है। अल्पिका एवं राजवाहा का प्रबंधन समितियों को हस्तान्तरण करने हेतु अनुबंध की शर्तो का विवरण नियमावली में दिया गया है। समिति के कार्यकारिणी के सदस्यों की निर्वाचन प्रक्रिया, जल उपभोक्ता समिति द्वारा कृषको के मध्य जल वितरण हेतु वारबन्दी बनाये जाने तथा उसके क्रियान्वयन की व्यवस्था भी की गई है। नियमावली में समिति द्वारा जल बजट एवं जल लेखा तैयार किये जाने की व्यवस्था की गई है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मनरेगा के अन्तर्गत हुए घपले और घोटालों के आरोप

Posted on 30 March 2010 by admin

उ0प्र0 सरकार द्वारा मनरेगा के अन्तर्गत हुए घपले और घोटालों के आरोप में प्रदेश के 29जिलों में 40मामले दर्ज करवाने, 42अधिकारियों को निलंबित करने, 69 कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और 51कर्मचारियों की गोपनीय रिपोटोZं में बैड इण्ट्री करने के फैसले से केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना में लगातार गम्भीर भ्रष्टाचार होने के उ0प्र0 कंाग्रेस कमेटी द्वारा लगाये जा रहे आरोपों की पुष्टि हो गई है।

 उ0प्र0 कंाग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुबोध श्रीवास्तव ने आज यहां जारी बयान में कहा कि कंाग्रेस पार्टी सप्रमाण कई जिलों में इस योजना के अन्तर्गत हो रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करती रही है। गोण्डा, बलरामपुर में 50लाख के खिलौने, 2करोड़ का टेण्ट, 45लाख के कैलेण्डर छपवाने का, महोबा में 45लाख का टेण्ट लगवाने का, कानपुर देहात में 2.5करोड़ के हाईब्रिड बीज और लोहे की बेंच और इसी प्रकार सुलतानपुर, चित्रकूट एवं मथुरा में फर्जी एन.जी.ओ. को धन देने के अलावा लखीमपुर सहित कई अन्य जिलों में भी सप्रमाण भ्रष्टाचार को उजागर किया गया, परन्तु प्रदेश सरकार सदैव अपने को पाक-साफ बताती रही।

 मुख्य प्रवक्ता ने कहाकि विगत दिनों केन्द्रीय ग्रामीण विकास मन्त्रालय द्वारा प्रदेश के प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को पत्र भेजकर यह हिदायत दी गई थी कि उ0प्र0 को मनरेगा का अगले वित्त वर्ष का बजट तभी दिया जायेगा जब इन घपलों, घोटालों पर कृत कार्यवाही रिपोर्ट(एक्शन टेकेन रिपोर्ट) केन्द्र सरकार को प्राप्त होगी। लगता है केन्द्र सरकार के इसी पत्र के कारण ही राज्य सरकार को अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए विवश होना पड़ा। जबकि मनरेगा में धांधली, भ्रष्टाचार का कारोबार विगत 3 सालों से लगातार चल रहा है।

 श्री श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही वस्तुत: समुद्र में एक बून्द के समान है। मनरेगा सहित सभी केन्द्रीय योजनाओं में जो भ्रष्टाचार और धांधली हो रही है इसमें केवल कर्मचारी ही नहीं वरन बड़े-बड़े बसपा के नेताओं की भी हिस्सेदारी है।
 मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि यद्यपि यह देर से की गई अत्यन्त सूक्ष्म स्तर की कार्यवाही है परन्तु फिर भी मनरेगा की योजनाओं में व्यापक धांधली की स्वीकारोक्ति के बाद उ0प्र0 के ग्रामीण विकास मन्त्री को अविलम्ब इस्तीफा दे देना चाहिए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मुख्यमन्त्री ने मनरेगा में अनियमितता करने वाले के विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिये

Posted on 30 March 2010 by admin

लखनऊ :: दिनांक 30 मार्च, 2010

मुख्यमन्त्री ने मनरेगा में अनियमितता करने वाले चित्रकूट और सुल्तानपुर के तत्कालीन जिलाधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिये

महोबा और चित्रकूट के तत्कालीन सी0डी0ओ0 निलिम्बत,
सुल्तानपुर के तत्कालीन सी0डी0ओ0 के विरूद्ध विभागीय जांच के निर्देश

20 अन्य दोशी अधिकारी/कर्मचारी भी तत्काल प्रभाव से निलिम्बत

अब तक मनरेगा में अनियमितता के दोशी 42 अधिकारी निलिम्बत, 69 अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय जांच

51 अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रवििश्ट दी गई

29 जनपदों में 40 मामलों पर प्राथमिकी दर्ज कर 38 ग्राम प्रधानों, 30 ग्राम विकास/ग्राम पंचायत अधिकारियों तथा 48 अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही

 उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने मनरेगा के क्रियान्वयन में अनियमितता की िशकायतों पर कड़ा रूख अपनाते हुए चित्रकूट और सुल्तानपुर जनपदों के तत्कालीन जिलाधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने तथा जनपद महोबा एवं चित्रकूट के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारियों को निलिम्बत करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने जनपद सुल्तानपुर के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी को आरोप पत्र देकर विभागीय कार्यवाही करने तथा जनपद गोण्डा, बलरामपुर, महोबा, सुल्तानपुर तथा चित्रकूट के अन्य दोशी अधिकारियों को निलिम्बत करते हुए जांच के निर्देश भी दिये हैं।

सुश्री मायावती ने कहा है कि मनरेगा के क्रियान्वयन में भ्रश्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि मनरेगा के तहत अवस्थापना एवं विकास कार्यों को पूरी ईमानदारी से अंजाम दें। उन्होंने कहा कि गरीबों के रोजगार से जुड़ी इस योजना में प्रदेश सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही को गम्भीरता से लेगी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। इसी प्रकार ग्राम्य विकास विभाग के अन्य कार्यक्रमों में भी दोशी पाये जाने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी एवं कर्मचारी बख्शे नहीं जायेगे।

 ज्ञातव्य है कि मुख्यमन्त्री के आदेश पर प्रत्येक तहसील स्तर पर मनरेगा के अन्तर्गत किये जा रहे कार्यों के अनुश्रवण के लिए निगरानी समिति गठित की गई थी। इसके अलावा समय-समय पर उच्चाधिकारियों द्वारा भी स्थलीय भ्रमण करके मनरेगा के अन्तर्गत कराये जा रहे कार्यों के निरीक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमन्त्री ने मनरेगा एवं अन्य विकास कार्यों का थर्ड पार्टी सत्यापन के भी आदेश दिये हैं।

 मुख्यमन्त्री के निर्देश पर मनरेगा कार्यक्रम के अन्तर्गत विभिन्न स्रोतों से प्राप्त िशकायतों की गम्भीरता से जांच करायी गई। जांच के फलस्वरूप जनपद गोण्डा के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्री राज बहादुर को निलिम्बत कर विभागीय कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। इसके अतिरिक्त परियोजना निदेशक श्री जी0पी0 गौतम, नाजिर/सहायक लेखाकार श्री सुधीर कुमार सिंह, लेखाकार श्री अवधेश कुमार िंसंह तथा संख्या सहायक श्री दुर्गेश मिश्रा को तत्कालिक प्रभाव से निलिम्बत कर दिया गया है।

 इसी प्रकार जनपद बलरामपुर में परियोजना निदेशक श्री अमरेश नन्द राय, तत्कालीन परियोजना निदेशक श्री भगवती प्रसाद वर्मा और तत्कालीन प्रभारी लेखा अधिकारी सम्प्रति परियोजना अर्थ शास्त्री श्री बृज किशोर लाल श्रीवास्तव को निलिम्बत करके विभागीय कार्यवाही करने के आदेश दिये गये हैं। जनपद महोबा में मनरेगा में अनियमितताओं के आरोप में श्री जयराम लाल वर्मा तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी, श्री हर नारायण परियोजना निदेशक के अलावा तत्कालीन खण्ड विकास अधिकारी श्री लाल सिंह, श्री आदित्य कुमार तथा श्री राजेश कुरील को भी निलिम्बत कर दिया गया है।

जनपद सुल्तानपुर में मनरेगा क्रियान्वयन में गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन जिलाधिकारी श्री आर0के0 सिंह और तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्री बी0राम के विरूद्ध आरोप पत्र देकर विभागीय कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं। इनकेे अलावा परियोजना निदेशक श्री छोटे लाल कुरील, वरिश्ठ लिपिक श्री मनोज कुमार, सहायक लेखाकार श्री देवकी नन्दन यादव और लेखाकार श्री विजय शंकर दुबे को निलिम्बत कर दिया गया है।

 जनपद चित्रकूट में मनरेगा की धांधलियों के लिए जिम्मेदार तत्कालीन जिलाधिकारी श्री हृदेश कुमार और तत्कालीन जिला विकास अधिकारी (सेवा निवृत्त) श्री गया प्रसाद सिंह को मुख्यमन्त्री के निर्देश पर आरोप पत्र देकर विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है। साथ ही, श्री प्रमोद चन्द श्रीवास्तव तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी, श्री राम किशुन तत्कालीन परियोजना निदेशक, श्री मुन्नू लाल सहायक लेखाकार और श्री अतुल कान्त खरे कनिश्ठ लिपिक को निलिम्बत कर दिया गया है।

 ज्ञातव्य है कि विकास कार्यों में भ्रश्टाचार के लिए जिम्मेदार अधिकारियों/ कर्मचारियों के विरूद्ध मुख्यमन्त्री के कड़े रूख को देखते हुए पूरे प्रदेश में अब तक 42 अधिकारियों के विरूद्ध निलम्बन की कार्यवाही की गई और 69 अधिकारियों के विरूद्ध आरोप पत्र देकर विभागीय कार्यवाही सुनििश्चत की गई है। इसके अतिरिक्त विभागीय कार्यवाही में जांच पूरी कराकर अब तक 51 अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रवििश्ट दी गई और 4 अधिकारियों/ कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोक दी गई है।

 इसके अलावा प्रदेश के 29 जनपदों में 40 मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गई है, जिसके अन्तर्गत 38 ग्राम प्रधानों, 30 ग्राम विकास/ग्राम पंचायत अधिकारियों तथा 48 अन्य विभाग के अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही सुनििश्चत की जा चुकी है। मुख्यमन्त्री ने ऐसे प्रकरणों में मण्डलायुक्तों को व्यक्तिगत ध्यान देकर प्राथमिकता के आधार पर विवेचना पूर्ण कराने और न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल कराने के निर्देश दिये हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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मनरेगा के नाम पर केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार का मिलीभगत खेल

Posted on 30 March 2010 by admin

मनरेगा के नाम पर उत्तर प्रदेश में केन्द्र की कांग्रेस सरकार और प्रदेश की बसपा सरकार मिलीभगत का खेल खेल रही है और जनता को विकास का झूठा सपना दिखा रही है। दोनो सरकारें मनरेगा के नाम पर चन्द अफसरों और ठेकेदारों की झोलियां भर रही है, समाजवादी पार्टी की मांग है कि झूठे सब्जबाग वाली यह योजना बन्दकर श्री मुलायम सिंह यादव द्वारा प्रारम्भ भूमि सेना एवं बेकारी भत्ता योजना ‘ाुरू की जाए।

 मनरेगा ने दो तरह से आम जनता से छल किया है। केन्द्र सरकार ने महात्मा गांधी का नाम जोड़कर उन्हें अपमानित किया है। गांधी जी अत्न्योदय के हामी थे, अफसरी भ्रश्टाचार के नही। केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने मनरेगा बनाकर उनके विचारों की हत्या की हैं।
 जहां तक प्रदेश की मायावती सरकार का सम्बन्ध है, उसे तो किसी भी योजना से उगाही का धन्धा ही चलाना होता है। मनरेगा के तहत बेकारों को, गरीबों को न तो निर्धारित अवधि का काम मिल रहा है और न उन्हें मजदूरी के सौ रूपये मिल पाते हैं। ठेकेदारों के जरिये काम में ऊपर तक कमीशन बंटता है। मनरेगा कार्यक्रम के तहत खर्च की गई धनराशि के दावों का जब आडिट होगा तब पता चलेगा कि कितना भारी घपला बसपा सांसदों, विधायकों और मन्त्रियों के संरक्षण में हो रहा हैं। प्रदेश सरकार अपने झूठे आंकड़ों के बल पर देश में दूसरें स्थान पर अपने को बता कर झूठी वाह-वाही बटोर रही है।

 प्रमुख सचिव ग्राम विकास मनरेगा ने महिलाओं की भागीदारी की भी बात की है जबकि हकीकत कुछ और है। 6 जिले ऐसे हैं जहां एक भी महिला को काम नही मिला। उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत पंजीकृत 2,56,737 परिवारों को आज तक जाबकार्ड हासिल नही हुए हैं। मस्टर रोलों में भारी गड़बड़ी की शिकायतें आम है।

 दरअसल मनरेगा अपने चहेतों को उपकृत करने की एक और योजना है जिसमें जनता की गाढ़ी कमाई लुटाई जा रही है। जनता को भ्रमित किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी मनरेगा की विशेश जांच कराये जाने की मांग करती हैं और इस तरह के घटिया पब्लिक स्टंट को बन्द कर श्री मुलायम सिंह यादव सरकार की शिक्षित बेरोजगारों को 500 रूपए प्रतिमाह की बेकारी भत्ता योजना एवं भूमि सेना योजना को फिर से जारी करने की जरूरत पर बल देती हैं। श्री मुलायम सिंह यादव ने कृिश क्षेत्रफल में विस्तार, ऊसर-बंजर भूमि का सुधार एवं गांव में रोजगार दिलाने के लिए भूमि सेना योजना लागू की थी। इसमें लघु एवं सीमान्त कृशक तथा भूमिही खेतिहार मजदूरों को जो ऐसी भूमि पर खेती को तैयार हों, पात्र माना गया। हर भूमि सैनिक को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी गई। एक वशZ में 192575 भूमि सैनिक सूचीवद्ध किए गए थे। इसके लिए बजट 40 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ रू0 किया गया था। इससे वास्तव में प्रदेश फैल रही अराजक प्रवृतियों नक्सलवाद, माओवाद से भी लड़ने में मदद मिलेगी।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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उत्तराचंल सरस मेला लखनऊ मे

Posted on 30 March 2010 by admin

01सरस मेले में उत्तराचंल के दुलर्भ अनाज और मसाले के साथ पहाड़ी लहसुन तथा अनेक जड़ी बूटी लेकर आई स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कमला बिश्ट तथा रिश्म बिश्ट ने बताया कि खटीमा की कुछ बेरोजगार महिलाओं एकत्र करके स्वयं सहायता समूह का गठन करके ग्राम्य विकास से प्रिशक्षण लिया। पहाड़ पर प्राकृतिक रूप से बिना खाद के पैदा हो रही विभिन्न प्रकार की दुर्लभ दाले तथा मसालों एवं जड़ीबूटी का संग्रह करके विक्रय की प्रक्रिया को भारी सफलता मिल रही है। विभिन्न शहरों में सरस मेले में भाग ले चुकी रिश्म बिश्ट बताती है लखनऊ के लोग बहुत अच्छे है पहाड़ी राजमा, सफेद पहाड़ी मिर्च, धन्ताशा, जखिया, सोयाबीन, सफेद तथा पीला सरसों,चिरंगादाल, पहाड़ी सफेद कलीमिर्च, लाल मिर्च, हल्दी खूब खरीद रहे है। लखनऊ में  ग्राम्यविकास विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों को बाजार देने हेतु सरस मेला लगाकर स्वयं सहायता समूह के लेागों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने तथा विपणन की सुविधा देने में महत्वपूर्ण भागीदारी की है। कम कीमत पर दैनिक उपयोग की चीजे मिलने के कारण सरस मेला में उमड़ रही भीड़ से स्वयं सहायता समूहो को अपने उत्पाद बेचने में सरलता हो रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम खूब मनोरंजन कर रहे है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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