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मनरेगा के नाम पर केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार का मिलीभगत खेल

Posted on 30 March 2010 by admin

मनरेगा के नाम पर उत्तर प्रदेश में केन्द्र की कांग्रेस सरकार और प्रदेश की बसपा सरकार मिलीभगत का खेल खेल रही है और जनता को विकास का झूठा सपना दिखा रही है। दोनो सरकारें मनरेगा के नाम पर चन्द अफसरों और ठेकेदारों की झोलियां भर रही है, समाजवादी पार्टी की मांग है कि झूठे सब्जबाग वाली यह योजना बन्दकर श्री मुलायम सिंह यादव द्वारा प्रारम्भ भूमि सेना एवं बेकारी भत्ता योजना ‘ाुरू की जाए।

 मनरेगा ने दो तरह से आम जनता से छल किया है। केन्द्र सरकार ने महात्मा गांधी का नाम जोड़कर उन्हें अपमानित किया है। गांधी जी अत्न्योदय के हामी थे, अफसरी भ्रश्टाचार के नही। केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने मनरेगा बनाकर उनके विचारों की हत्या की हैं।
 जहां तक प्रदेश की मायावती सरकार का सम्बन्ध है, उसे तो किसी भी योजना से उगाही का धन्धा ही चलाना होता है। मनरेगा के तहत बेकारों को, गरीबों को न तो निर्धारित अवधि का काम मिल रहा है और न उन्हें मजदूरी के सौ रूपये मिल पाते हैं। ठेकेदारों के जरिये काम में ऊपर तक कमीशन बंटता है। मनरेगा कार्यक्रम के तहत खर्च की गई धनराशि के दावों का जब आडिट होगा तब पता चलेगा कि कितना भारी घपला बसपा सांसदों, विधायकों और मन्त्रियों के संरक्षण में हो रहा हैं। प्रदेश सरकार अपने झूठे आंकड़ों के बल पर देश में दूसरें स्थान पर अपने को बता कर झूठी वाह-वाही बटोर रही है।

 प्रमुख सचिव ग्राम विकास मनरेगा ने महिलाओं की भागीदारी की भी बात की है जबकि हकीकत कुछ और है। 6 जिले ऐसे हैं जहां एक भी महिला को काम नही मिला। उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत पंजीकृत 2,56,737 परिवारों को आज तक जाबकार्ड हासिल नही हुए हैं। मस्टर रोलों में भारी गड़बड़ी की शिकायतें आम है।

 दरअसल मनरेगा अपने चहेतों को उपकृत करने की एक और योजना है जिसमें जनता की गाढ़ी कमाई लुटाई जा रही है। जनता को भ्रमित किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी मनरेगा की विशेश जांच कराये जाने की मांग करती हैं और इस तरह के घटिया पब्लिक स्टंट को बन्द कर श्री मुलायम सिंह यादव सरकार की शिक्षित बेरोजगारों को 500 रूपए प्रतिमाह की बेकारी भत्ता योजना एवं भूमि सेना योजना को फिर से जारी करने की जरूरत पर बल देती हैं। श्री मुलायम सिंह यादव ने कृिश क्षेत्रफल में विस्तार, ऊसर-बंजर भूमि का सुधार एवं गांव में रोजगार दिलाने के लिए भूमि सेना योजना लागू की थी। इसमें लघु एवं सीमान्त कृशक तथा भूमिही खेतिहार मजदूरों को जो ऐसी भूमि पर खेती को तैयार हों, पात्र माना गया। हर भूमि सैनिक को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी गई। एक वशZ में 192575 भूमि सैनिक सूचीवद्ध किए गए थे। इसके लिए बजट 40 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ रू0 किया गया था। इससे वास्तव में प्रदेश फैल रही अराजक प्रवृतियों नक्सलवाद, माओवाद से भी लड़ने में मदद मिलेगी।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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