Archive | April, 2013

श्री आर0पी0गोयनका के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया

Posted on 14 April 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने वरिष्ठ उद्योगपति श्री आर0पी0गोयनका के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देश के पुराने उद्योगपतियों में शामिल रहे श्री गोयनका के निधन से भारतीय उद्योग जगत को भारी क्षति पहुंची है।
श्री यादव ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना भी व्यक्त की है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यशाला में उत्तर प्रदेश को मिला ‘मोस्ट इम्पू्रव्ड स्टेट’ का पुरस्कार

Posted on 14 April 2013 by admin

प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अभूतपूर्व सफलता एन0एच0आई0एस0 के अन्तर्गत 48 लाख  बी0पी0एल0 परिवारों के लिए स्मार्ट कार्ड बनाए गए

2उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृृत्व में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरन्तर प्रगति हो रही है। उल्लेखनीय है कि विगत वर्षांे स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार एवं नाकामी के लिए विभिन्न समाचार माध्यमों के सुर्खियों में रहा है। वर्तमान सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप अब यह विभाग विभिन्न सेवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कारों से नवाजा जा रहा है। जिसकी पुष्टि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को पुरस्कृत करके की जा रही है। प्रदेश सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री अहमद हसन के सतत् प्रयासों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प हुआ है।
108 एम्बुलेन्स सेवा की सफलता के बाद बी0पी0एल0 परिवारों के निःशुल्क इलाज हेतु संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की सफलता से अन्य क्षेत्रों को भी मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में सराहनीय कार्य करने हेतु गत 08 अप्रैल, 2013 को केन्द्रीय श्रम मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड्गे द्वारा राज्य सरकार को पुरस्कृत किया गया है।
राज्य सरकार की तरफ से सचिव मुख्यमंत्री एवं योजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी
श्री आलोक कुमार द्वारा त्रिवेन्द्रम (केरल) में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में पुरस्कार ग्र्रहण किया गया। इस कार्यशाला में बाराबंकी जनपद की जिलाधिकारी श्रीमती मिनिस्थी एस को भी योजनान्तर्गत उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। जबकि सैफई (इटावा) स्थित यू0पी0आर0आई0एम0एस0 को भी गरीबों को अच्छे इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पुरस्कृत किया गया।
राज्य स्तरीय सर्वर की स्थापना, जनपदों में तकनीकी सहायकों की नियुक्ति, जनपद स्तर पर मोबाइल डी0के0एम0ए0 सर्वर (लैपटाॅप) की स्थापना जैसे निर्णयों से योजना के क्रियान्वयन में काफी सुधार आया है। राज्य एवं जनपद स्तर पर कुशल प्रशिक्षकों द्वारा जनपद स्तरीय अधिकारियों एवं फील्ड स्तर के कर्मचारियों यथा गांव की आशा बहू एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री की गुणवत्तापरक प्रशिक्षण से योजना के संचालन में तेजी आई है। जनपद स्तर पर योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु स्वास्थ्य शिविर एवं कार्यशालाओं को आयोजन किया गया है। लाभार्थियों को निःशुल्क परामर्श हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ (साची) में काॅल सेन्टर की स्थापना की गई है, जिसमें टोल फ्री फोन की सुविधा है। जिसका
नं0-1800 1800 4444 है एवं प्रकोष्ठ में हेल्प लाइन फोन की भी सुविधा है जिसका नं0-9198004444 है।
जिला स्तर पर जिलाधिकारी के नेतृत्व में जिला बीमा समितियों का गठन किया गया ताकि अस्पतालों की सूचीबद्धता में पारदर्शिता लाई जा सके। इस समिति में जिलाधिकारी,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी/डी0के0एम0ए0 तथा चयनित बीमा एजेन्सी के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। समिति द्वारा आपसी विचार-विमर्श के उपरान्त अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की सिफारिश स्टेट एजेन्सी फाॅर कम्प्रीहेन्सिव हेल्थ इंश्योरेन्स (साची) को भेजी जाती है।
प्रक्रिया में आई तेजी और त्वरित निर्णयों के चलते अभी तक 1486 अस्पताल सूचीबद्ध किए जा चुके हैं, जिनमें से 823 निजी क्षेत्र के हैं, जबकि 663 सरकारी क्षेत्र के है तथा आगामी चरण में प्रयास है कि योजना के अन्तर्गत राजकीय चिकित्सालयों की भागीदारी और अधिक बढ़ाई जाए। इस हेतु प्रत्येक जिला अस्पताल में एक जन सम्पर्क अधिकारी (पी0आर0ओ0) की भी व्यवस्था की गई है। समस्याओं के समाधान के दृष्टिकोण से पहली बार वाद निस्तारण पद्धति अपनाई गई, जिसमें असंतुष्ट वादी अपनी अपील पहले जिला स्तर पर फिर राज्य स्तर पर कर सकते हैं।
योजना के अन्तर्गत स्मार्ट कार्ड धारक परिवार एक वर्ष के लिए फ्लोटर आधार पर
30 हजार रुपये के हेल्थ केयर कवर का हकदार है। इसके अन्तर्गत पूर्व निर्धारित
1090 बीमारियां/पैकेजेज, जिनमें रोगी को इंडोर ट्रीटमेन्ट देय होगा, सम्मिलित हैं। इसमें रोगी को भोजन तथा अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर 100 रुपये प्रतिदिन का यातायात खर्च देय है। परन्तु इसकी सीमा अधिकतम 1000 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित है। इस योजना में देय वार्षिक प्रीमियम का 75 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा दिया जाता है, जबकि बचे हुए 25 प्रतिशत का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। लाभार्थी को मात्र 30 रुपये का योगदान देना होता है, जबकि सरकार लगभग 470 रुपये प्रति परिवार की दर से भुगतान करती है।
योजना के विगत चरण से निकाले गए निष्कर्षाें के आधार पर योजना में आधारभूत सुधार किया गया। इस वर्ष जमीनी स्तर पर योजना के संचालन में ठोस निर्णय लिए गए, जिसके उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। गत चरण में अस्पतालों के सुस्त भुगतान प्रक्रिया के चलते सूचीबद्ध अस्पतालों का योजना से मोह भंग होने लगा था। इस स्थिति की समीक्षा करते हुए योजना की खामियों को तकनीक की सहायता से दूर किया गया और राज्य स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करने के साथ-साथ इसके लिए एक सर्वर की भी स्थापना की गई। इन प्रयासों के चलते इस योजना मंें चमत्कारी परिणाम सामने आए और सूचीबद्ध अस्पतालांे के सभी दावों के
74 प्रतिशत का निस्तारण महज 30 दिन के अन्दर कर दिया गया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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UP awarded as ‘Most Improved State’

Posted on 14 April 2013 by admin

48 lakh Smart Card prepared for B.P.L. families under National Health Insurance Scheme

3For the health sector in Uttar Pradesh, the last few years have been mired in controversies and graft during the previous BSP government where a multi crore scam in the National Rural Health Mission (NRHM) caught national headlines. Last week when the state was awarded the ‘Most Improved State’ award by the union government, not only was the infamous past washed away but a new beginning was ushered in.
With Smart Cards made for 48 lakh families under the National Health Insurance Scheme, many feel this was a 360 degree turnaround in the health sector of Uttar Pradesh. Officials say, the success run was largely reached due to the leadership of the Chief Minister Mr. Akhilesh Yadav and the clear cut message of deliverance given from the State’s Health Minister Mr. Ahmad Hasan.
The reward is a huge recognition to the efforts of thousands of workers in the state government who let this milestone happen. Under the scheme, the UPRIMSR in Saifai, Etawah has been rewarded for its good and laudable work as an independent hospital. Compared to the first phase of the scheme, more than 25% of the below poverty line (BPL) population has been assimilated and smart cards for 48, 65,692 families have been made.
As part of course correction, taken as part of the inferences drawn from the first phase of the scheme where the claims were not attended to by listed hospitals due to tardy payment schedules, for the first time the anomalies were weeded out by the help of technique and weekly reviews and a server was established at the state level. The intervention and initiative saw miraculous results and of the claims made by listed hospitals, as many as 74% were settled within 30 days.
To ensure and enhance transparency in listing of hospitals, a district insurance committee was formed under the chairmanship of the district magistrate at district levels. This committee comprised of the district magistrate, the chief medical officer/DKMA and the representatives of the selected insurance company and after due deliberations, the recommendations to list hospitals was sent for approval to SACHI.
Owing to the prompt process and quick decision making, 1486 hospitals have been listed so far, of which 823 are private hospitals while 663 are government hospitals. Aware of road blocks for the first time a two tier complaint redressal system was set rolling in which claimants dissatisfied with decisions could appeal to district and then to the state level committee.
The scheme, kick started to benefit the BPL families, as per the 2002 census provides a smart card at a basic fee of Rs 30 which is used to meet all administrative expenses incurred in the scheme. The field key officer (FKO) is named for the completion of the nomination process in which a family, with considered unit of five, is listed on the smart card. The hitherto used 32 kb card has been replaced by a 64 kb card so that the beneficiaries can avail the benefits of both the state and central schemes.
To smart card holding families a sum of Rs 30,000 is entitled on floater basis for one year and a total of 1090 pre decided diseases/packages is available through indoor patient facilities. The scheme also entails giving of food and Rs 100 per day for transport on discharge from hospital but a maximum of Rs 1,000 in a year. 75% of the annual premium on the scheme is borne by the central government and the remaining 25% by the state government.
The cost of a smart card (Rs 60) is separately borne by the union government. Till March 31, 2013 48 lakh smart cards have been made in Uttar Pradesh and nomination process is underway in 21 districts, by the end of which 58 lakh beneficiary families are likely to be assimilated in the scheme. The scheme is an added benefit for residents of the state who are already availing the 108 ambulance service for emergency services.
The scheme, officials point out has achieved the state where it is in at present largely due to establishing of state level servers, appointment of technical assistants at districts, establishment of DKMA mobile servers (laptops) at district level. The scheme has also been expedited due to the involvement of trained workforce through the Aanganwadi’s. A free call centre at the state level (SACHI) at the state level has also been established and a toll free number 1800 1800 4444 has been created and a helpline 9198004444 also made.

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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मुलायम सिंह यादव परिवारवादी है - डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी

Posted on 14 April 2013 by admin

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह लोहियावादी न होकर, परिवारवादी हैं। सत्ता के कई केन्द्र होने के कारण नौजवान मुख्यमंत्री यह बोलते हैं कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते हैं। प्रदेश में ही कल्याण सिंह व राजनाथ सिंह की सरकारें थी, तब अधिकारी सुनते थे। ऐसा क्यांे ? यह विचार आज प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने भाजपा कानपुर ग्रामीण के कार्यकर्ता सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि राहुल और मोदी की तुलना नहीं की जा सकती है, राहुल देश के असफल नेता हैं और मोदी देश के राष्ट्रवादी और सफल नेता हैं। विश्व के सर्वे में गुजरात प्रदेश केा विश्व का नं0-2 का प्रदेश बताया गया है। उन्होने कहा कि सपा, बसपा के भृष्टाचार को सी.बी.आई. का डर दिखाकर कांग्रेस छिपा रही है क्योंकि उसे सरकार चलानी है। प्रदेश के स्वास्थ्यमंत्री सरकारी डाक्टरों को गुण्डा कह रहे हैं, यह जिम्मेदारी उनकी है कि उनके खिलाफ कार्यवाही करें, उन्हे अमर्यादित भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिये।
कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी जी ने कहा कि व्यक्तिगत नारे लगाने से आपस में भेद बढ़ता है, केवल भाजपा जिन्दाबाद के नारे लगायें। स्वागत  के दौरान पहनाई गई एक-एक माला दायित्व का बोध कराती है। अच्छा कार्य किया तो ठीक वरना फांसी का रूप ले लेती है। कानपुर की बिजली की व्यवस्था को लेकर कहा कि यदि प्रदेश सरकार केवल बिजली चोरी ही रोक दे, तो जनता को बिजली मिल सकती है। बिजली चोरी में बड़े-बड़े अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश भर में जनता से जुड़े मुद्दे पर बड़े- बड़े आन्दोलन करेगी। महिला उत्पीड़न, बलात्कार की घटनाये व बिगड़ी कानून व्यवस्था केा लेकर उन्होंने महिलामोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष से कानपुर केा केन्द्र बनाकर अधिकारियों के घेराव करने का आग्रह करते हुए नारा दिया ”जो अधिकारी करे न काम कर दो उसकी नींद हराम”। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेरेाजगारेां को 8.5 करोड़ भत्ता देती है, और 12.5 करोड़ भत्ता वितरण कार्यक्रमों में खर्च करती है, सरकार बेरोजगारेां को धोखा दे रही है। यह सरकार किसानों के कर्जमाफी में भी गुमराह एवं भृष्टाचार कर रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय अध्यक्ष बालचन्द्र मिश्र ने की तथा आभार भाषण पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्र ने किया कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश मंत्री अनूप गुप्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रदेश मंत्री नीलिमा कटियार, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष कमलावती सिंह, प्रदेश प्रवक्ता मनोज मिश्र, क्षेत्रीय संगठन मंत्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव, हनुमान मिश्र, श्रीकृष्ण दीक्षित, वीरेन्द्र तिवारी, कानपुर के जिलाध्यक्ष देवेश कुमार कोरी, वी.डी. राय, दिनेश अवस्थी, रवि दीक्षित, कौशल अवस्थी, रवि शुक्ला, रामदेव शुक्ला, राजेन्द्र त्रिपाठी, गीता निषाद, अनुराग श्रीवास्तव आदि थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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डा0 भीमराव अम्बेडकर जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन

Posted on 14 April 2013 by admin

डा0 भीमराव अम्बेडकर जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर कल प्रातः 11ः30 बजे कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के उपरान्त कार्यकर्ता हजरतगंज चैराहे स्थित डा0 अम्बेडकर की प्रतिमा तक जायेगे जहां सामूहिक रूप से माल्यार्पण एवं मिष्ठान वितरण का कार्यक्रम किया जायेगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद लालजी टण्डन, प्रदेश महामंत्री रामनाथ कोविद, दिवाकर सेठ आदि उपस्थित रहेंगे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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हेरिटेज पर्यटन को विकसित करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर किया जाए - कृषि उत्पादन आयुक्त

Posted on 14 April 2013 by admin

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आलोक रंजन ने हेरिटेज पर्यटन को विकसित करने में आने वाली कठिनाइयों के निस्तारण करने एवं इसे और अधिक विकसित करने के लिए सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए।
कृषि उत्पादन आयुक्त आज यहां अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित हेरिटेज टूरिज्म बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में हेरिटेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डाॅ0 संजय सिंह के सुझावों पर विचार किया गया तथा कृषि उत्पादन आयुक्त ने राजस्व, पर्यटन, विद्युत, परिवहन, लोक निर्माण विभागों से हेरिटेज टूरिज्म विकसित करने के सम्बन्ध में शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
श्री आलोक रंजन ने कहा कि हेरिटेज टूरिज्म के लिए सोलर एनर्जी महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। ये ईको फ्रैन्डली है, इसको अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, इसके लिए सरकार हर संभव मदद करेगी। इसके अतिरिक्त कृषि उत्पादन आयुक्त ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन से पर्यटकों को आधुनिक सुविधायुक्त वाहन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने पर्यटकों को लाने ले जाने के लिए आकर्षित सुविधायुक्त बस व कार व गाड़ी की व्यवस्था से सम्बन्धित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि हेरिटेज टूरिज्म के पर्याप्त विकास के लिए अन्य प्रदेशों की तर्ज पर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाय और इसमें चीफ कन्ट्री प्लानर के साथ-साथ अन्य विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाये। पी0डब्ल्यू0डी0 विभाग को हेरिटेज टूरिज्म के लिए पर्यटन स्थल तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत अथवा नई सड़कों से जोड़ने का कार्य किए जाने के निर्देश दिए।
श्री आलोक रंजन ने कहा कि हर वर्ष होने वाले टूरिस्ट मेले में उत्तर प्रदेश भी प्रतिभाग करे। अपना प्रदेश आगरा तक सीमित न रखकर प्रदेश के अन्य पर्यटक स्थल जैसे वाराणसी, झांसी, लखनऊ आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाये। इसके लिए पाॅलिसी एडवाइजरी कमेटी बनाई जाए। टूरिस्ट मेले में प्रदेश के अन्य हेरिटेज प्रस्तावित स्थलों के बारे में भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, तभी हम उ0प्र0 में हेरिटेज टूरिज्म को विश्वस्तर तक पहुंचाने में कामयाब होंगे।
बैठक में श्री बी0एम0मीना प्रमुख सचिव स्टाम्प एवं निबन्धन, श्री सी0बी0पालीवाल प्रमुख सचिव नगर विकास, श्री पवन कुमार सचिव वन, श्री श्याम लाल विशेष सचिव परिवहन, डाॅ0 संजय सिंह अध्यक्ष हेरिटेज टूरिज्म एसोसिएशन व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड द्वारा प्रायोजित कौषल अभिवृद्धि एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम

Posted on 12 April 2013 by admin

edited-haldwara-malihabad-ke-amani-ganj-ki-mahilao-ko-silae-machin-vitaririt-kariti-maya-vishwakarma1हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड द्वारा प्रायोजित एवं उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा मलिहाबाद के अमानीगंज की गरीब महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए कौषल अभिवृद्धि एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत चिकन वस्त्र आधारित प्रषिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। एचएएल द्वारा बुधवार को उक्त प्रषिक्षण कार्यक्रम की प्रतिभागियों को एचएएल के महाप्रबंधक की पत्नी श्रीमती माया विष्वकर्मा, महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट) श्रीमती मधुलिका सक्सेना, श्रीमती मधु पाण्डये, नम्रता माथुर, सोनिया पाण्डेय द्वारा सिलाई मषीन, प्रषिक्षण टूलकिट व प्रषिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किये गये।
इस मौके पर श्रीमती विष्वकर्मा ने कहा कि पढ़ाई के दौरान अभिभावको में बच्चों की देखरेख का जिम्मा महिलाओं के ऊपर ही रहता है। इसके अलावा पुरूषों की तरह महिलाएं भी काम करने में कहीं भी पीछे नहीं हैं, लेकिन बावजूद उनकी पहचान अभी भी पुरूषों की अपेक्षा काफी पीछे है। इस मौके पर मधुलिका सक्सेना ने कहा कि इस प्रतिस्पर्धा व मंहगाई के इस दौर अकेले पति की कमाई पर परिवार चलाना मुष्किल है। इसलिए महिलाओं को घर से बाहर निकल कर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में महिलाओं की संख्या पूरी आबादी की आधी है। लेकिन उन्हें पुरूषों के बराबर न ही सम्मान मिल रहा है और न ही उन्हें उनका हक। समारोह में बोलते हुए नम्रता माथुर ने कहा कि पढ़ाई के दौरान अभिभावको में बच्चों की देखरेख का जिम्मा महिलाओं के ऊपर ही रहता है। इसके अलावा पुरूषों की तरह महिलाएं भी काम करने में कहीं भी पीछे नहीं हैं, लेकिन बावजूद उनकी पहचान अभी भी पुरूषों की अपेक्षा काफी पीछे है। जब बच्चों को अच्छी सुविधाएं देने के लिए पति-पत्नी दोनों को कमाना होगा। समारोह को एचएएल के वरिष्ठ प्रबंधक आरएस मीना, मुख्य प्रबंधक ओपी गौतम, उपप्रबंधक संजीव कुमार सिंह केसी पंत, उद्यमिता विकास संस्थान के एसोसिएट संकाय सदस्य अनिल कुमार तिवारी व प्रषिक्षण समन्वयक आरके पासी ने भी सम्बोधित किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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सुरक्षित मातृत्व के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ तीन वर्षों में 200 प्रतिशत बढ़ा संस्थागत प्रसव, वर्ष 2005-06 मंे 20.6ः के मुकाबले वर्ष 2009 में 62.1ः हुआ

Posted on 12 April 2013 by admin

edited-dsc01775सुरक्षित मातृत्व के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ
तीन वर्षों में 200 प्रतिशत बढ़ा संस्थागत प्रसव, वर्ष 2005-06 मंे 20.6ः के मुकाबले वर्ष 2009 में 62.1ः हुआ
लगातार बेहतर होती स्वास्थ्य सुविधाओं से प्रदेश में  मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 1997 में 707 के मुकाबले वर्ष 2010 में यह दर 345 हो गयी है। इस तरह पिछले 13 वर्षों में यह 49 प्रतिशत घटी है। आशा है, आने वाले दिनों में और मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं और जन जागरूकता की वजह से इसमें तेजी से कमी आएगी।
कस्तूरबा गाँधी के जन्मदिन 11 अप्रैल को सुरक्षित मातृत्व दिवस के तौर पर मनाते हुए इस अवसर पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में डाॅ. नीरा जैन, महाप्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वस्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश ने बताया कि प्रसव के दौरान या फिर गर्भावस्था के 42 दिनों के अन्दर यदि गर्भपात, गर्भ की किसी जटिलता  अथवा प्रसव की वजह से माँ की मृत्यु होती है तो उसे मातृ मृत्यु की श्रेणी में रखा जाता है।  इसकी गणना प्रति एक लाख जीवित जन्म प्रति वर्ष के हिसाब से की जाती है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-3 के आंकड़े बताते हैं कि संस्थागत प्रसव में तीन वर्षों में 200 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह वर्ष 2005-06 मंे 20.6ः के मुकाबले वर्ष 2009 में 62.1ः हो गयी है।
मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार द्वारा कई योजनायें चलायी गयी हैं जिनका सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। विशेषतः जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रमों को प्रोत्साहन मिलने से संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ी है और इस कारण से मातृ-मृत्यु और नवजात-मृत्यु की संख्या भी कम हुयी है।
गर्भावस्था की समस्याओं के बारे में बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश में प्रति वर्ष लगभग 55 लाख महिलायंे गर्भवती होती हैं और उनमे से 15 प्रतिशत गर्भावस्थाओं में समस्याएं होने की संभावनाएं होती हैं, इनमे से कई समस्याएं ऐसी होती हैं जिनका पूवानुमानुमान नहीं किया जा सकता और उन्हें साधारण रूप से दूर भी नहीं किया जा सकता लेकिन यदि सही समय पर उचित देख भाल न मिले तो इनमंे से ज्यादातर की मृत्यु की संभावना होती है। सही समय पर उचित इलाज से इन्हें बचाया जा सकता है। इनमंे 5 से 8 प्रतिशत महिलाओं को आपरेशन द्वारा प्रसव की आवश्यकता होती है।
प्रदेश में होने वाले कुल प्रसवों के 43 प्रतिशत प्रसव जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत राजकीय स्वास्थ्य इकाइयों पर हो रहे हैं, 2 प्रतिशत प्रसव सरकार सहायतित अस्पतालों में एवं 16 प्रतिशत प्रसव निजी क्षेत्र के अस्पतालो ंमें हो रहे है। प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख बच्चों की मृत्यु हो जाती है जिनमें से 1.25 लाख की मृत्यु अपने जन्म के पहले ही सप्ताह में हो जाती हैं । इसकी प्रमुख वजह भी प्रसव पश्चात उचित सुविधाएँ समय से न मिल पाना ही है।
मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में रक्त स्राव, असुरक्षित गर्भपात, एक्लैम्पसिया, उच्च रक्तचाप और बाधित प्रसव हैं। वार्षिक स्व्ास्थ्य सर्वे-2010 के अनुसार मातृ मृत्यु अनुपात में 345 के आंकड़े के साथ उत्तर प्रदेश भारतीय राज्यों में दूसरे स्थान पर था जबकि 381 के साथ असम का स्थान पहला था। राजस्थान में यह 331, मध्य प्रदेश में 310, बिहार में 305, झारखण्ड में 278, उड़ीसा में 277, छत्तीसगढ़ में 275 और उत्तराखंड में 188 था।
मृत्यु के कारणों और और इसे रोकने के सरकार के प्रयासों के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मामले में पहली देरी होती है खतरे की समय पर पहचान न हो पाना और दूसरी देरी होती है स्वास्थ्य सेवाओं तक समय से पहुँच न पाना। मातृ मृत्यु अनुपात में कमी लाने में 108 की एम्बुलेंस सेवा सहायक होगी, जो सही समय पर गर्भवती को अस्पताल तक पहुचने में कामयाब हो रही है। साथ ही आशा बहुओं द्वारा गर्भवती की देखरेख के दौरान ही यह तय कर लिया जाना कि प्रसव के समय पर उसे किस अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर किस वाहन से ले जाना है मातृ मृत्यु अनुपात में और अधिक कमी लाने में सहायक होगी। वर्तमान में 1,30,000 आशा बहुएं इस काम में लगी हैं और वे गर्भवती को उचित सलाह और शिक्षा दे रही हैं। तीसरी देरी यानि स्वास्थ्य सेवाओं में कमी, को दूर करने के लिए ए0एन0एम0/स्टाफ नर्सों का क्षमता वर्धन कार्यक्रम चलाया जा रहा है और महिला डाक्टरों की नियुक्ति की जा रही है। साथ ही साथ 1001 ग्रामीण केन्द्रों को 24ग7 प्रसव इकाइयों के रूप में सक्रिय किया गया है।
अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार द्वारा सुदृढ़ की जा रही सुविधाओं का सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार होना बहुत जरुरी है जिससे वे वास्तविक रूप से इन सेवाओं का लाभ ले सकें।
वर्ष 2012 के लिए राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस की थीम ‘सुरक्षित मातृत्व के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ’’ था और उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे ही वर्ष 2013 के लिए थीम बनाने का निर्णय लिया है। सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर सभी बिन्दुओं पर जानकारी व कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु कई कार्यक्रम प्रदेश के सभी जनपदों पर आयोजित किये जा रहे हैं ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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लखनऊ में आज पार्थ इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड का शानदार लाॅन्चिंग समारोह आयोजित हुआ।

Posted on 10 April 2013 by admin

ऐतिहासिक और सांस्कृति धरोहर के शहर लखनऊ में आज पार्थ इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड का शानदार लाॅन्चिंग समारोह आयोजित हुआ। इसकी स्थापना लगभग बीस वर्षो से शहरी नियोजन और भवन निर्माण के क्षेत्र में संलग्न दूरदर्शी उद्यमी प्रदीप मिश्रा ने की है। मशहूर शहरी नियोजन परामर्शी कंपनी, मेसर्स आरईपीएल को कामयाबी की ऊँचाई तक पहुँचाने में भी श्री मिश्रा का ही योगदान रहा है। पार्थ का अर्थ होता फोकस (ध्यान केंद्रण) और अपने नाम मे अनुरूप् ही यह कंपनी ग्राहकों को उपेक्षाओं से ज्यादा उन्नत सेवा उपलब्ध कराती है। इस अवसर पर प्रदीप मिश्रा (निदेशक) ने कहा, उत्तर भारत और खासकर उत्तर प्रदेश के निवासियों और व्यावसायियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने की दूरदर्शिता के साथ पार्थ इन्फ्राबिल्ड प्रावेट लिमिटेड विगत 4 वर्षो के दौरान चार मिलिमयन वर्गफीट के भवन निर्माण में 1,400 करोड़ रूपये निवेश कर चुका है और आगे नोएडा, कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में भी कदम बढ़ा रहा है। सुभम रस्तोगी निदेशक ने कहा, सुदंर घर की चाहत रखने वाले लोगों के लिए आवासीय भूखंडों की मांग में बेतहाशा वृद्धि हुई है। पार्थ इन्फ्राबिल् ऐसे लोगों के सपनों को साकार करने और समय पर शानदा निर्मित मकानसौंपने के लिए वचनबद्ध है। इससे बाजार में ग्राहकों के बीच अन्य कंपनियों की अपेक्षा हमारी साख में बढ़ोत्तरी होगी। अतुल सक्सेना मुख्य परिचालन अधिकारी ने कहा, हमारा ध्यान ग्राहकों के लिए बेहतर वास्तुशिल्प और निर्माण पर कें्रद्रित है जो पार्थ इन्फ्राब्ल्डि की कामयाबी का मुख्य आधार है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रेशम एवं वस्त्र उद्योग विभाग को जनता एवं बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश दिए

Posted on 10 April 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रेशम एवं वस्त्र उद्योग विभाग को जनता एवं बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश एवं देश के विभिन्न शहरों में वस्त्र उद्योग विभाग के स्थापित शोरूम को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने तथा बाजार की प्रतियोगिता में टिके रहने के लिए आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ संस्थाओं से भी सलाह लेने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री आज यहां शास्त्री भवन में रेशम एवं वस्त्र उद्योग विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग विभाग के शोरूम/दुकानें विभिन्न नगरों में व्यवसायिक दृष्टिकोण से अच्छे स्थानों पर स्थापित हैं। इन्हें आधुनिक स्वरूप प्रदान कर तथा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को व्यवसायिक बनाकर वित्तीय घाटे से उबारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्पादों की मांग बढ़ने से बुनकरों और इस कार्य में लगे लोगों के साथ-साथ विभाग की आमदनी में भी बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि मांग बढ़ने से इस कार्य में लगे लोग अच्छे उत्पाद की आपूर्ति करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। श्री यादव ने वस्त्र उद्योग क्षेत्र के वाणिज्यिक विशेषज्ञ/संस्थाओं से सलाह प्राप्त कर तद्नुरूप कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में स्थापित शोरूम को भी यदि ठीक कर लिया जाए तो विभाग को काफी लाभ होगा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम एवं वस्त्र उद्योग विभाग आम जनता से जुड़ा विभाग है। इसलिए इन विभागों को आवश्यकतानुसार राज्य सरकार आर्थिक मदद उपलब्ध कराएगी, जिससे ये विभाग जनता के लिए फायदेमंद साबित हो सकें।  इसी प्रकार रेशम विभाग की वर्तमान कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक एवं तमिलनाडु को रेशम के कीड़े पालने और इनके उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने में सफलता मिली है, जिसके फलस्वरूप इन प्रदेशों में रेशम उत्पाद में लगे लोगों को काफी लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को दक्षिण भारत के इन प्रदेशों की तर्ज पर उ0प्र0 में भी 02 जनपदों में पाइलेट प्रोजेक्ट शुरु करने हेतु विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभाग को आम जनता से जुड़कर उनके लिए फायदेमंद बनाने हेतु अलग से योजना बनाने के लिए भी कहा है। उन्होंने कहा कि रेशम विभाग के पास पूरे प्रदेश में लगभग 216 जगहों पर फार्म हैं, जिनमें वन विभाग के सहयोग से वृक्षारोपण कराने तथा कोकून के कीड़ों को पालने वाले किसानों के लिए उचित बाजार की व्यवस्था करने हेतु योजना तैयार कर प्रस्तुत की जाए, जिससे इस कार्य में लगे किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाया जा सके। जनपद सोनभद्र में टसर उत्पादन को आदिवासियों के बीच लोकप्रिय बनाने हेतु विशेष कार्य करने के भी निर्देश दिए हैं।  बैठक में रेशम एवं वस्त्र उद्योग मंत्री श्री शिव कुमार बेरिया, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग श्री हरिराज किशोर, प्रमुख सचिव रेशम उद्योग श्री नवतेज सिंह, सचिव मुख्यमंत्री श्रीमती अनीता सिंह, मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री आमोद कुमार एवं अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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