Archive | July, 2012

शिक्षा मित्रों को दूरस्थ शिक्षा विधि से 02 वर्षीय प्रशिक्षण प्रदान कराकर बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त करने का निर्णय

Posted on 24 July 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश में कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षा मित्रों को दूरस्थ शिक्षा विधि से 02 वर्षीय प्रशिक्षण प्रदान कराकर बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय के अनुसार दिनांक 11 जुलाई, 2011 को शिक्षा मित्रों के प्रशिक्षण के लिए राज्य सरकार ने जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उसके अन्तर्गत 1,24,000 स्नातक अर्हता वाले शिक्षा मित्रों को 02 चरणों में प्रशिक्षित करने के प्रस्ताव के अन्तर्गत पहले बैच में 62 हजार शिक्षा मित्रों का प्रशिक्षण जुलाई 2011 से तथा दूसरे बैच का जुलाई 2013 से प्रशिक्षण प्रस्तावित है। मंत्रिमण्डल ने दूसरे बैच के प्रशिक्षण को जुलाई 2012 से प्रारम्भ करने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। इसी प्रकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की तैनाती के लिए जुलाई 2013 में 62 हजार, जुलाई 2014 में 62 हजार तथा जुलाई 2015 में 48 हजार प्रशिक्षित शिक्षा मित्रों की तैनाती करने का प्रस्ताव भी मंत्रिमण्डल ने स्वीकार कर लिया है। इनमें इण्टरमीडिएट अर्हताधारी शिक्षा मित्र भी शामिल हैं। यह लोग जैसे स्नातक अर्हता प्राप्त करेंगे वैसे-वैसे उन्हें भी शिक्षक के रूप में तैनात किए जाने पर राज्य सरकार विचार करेगी। इन इण्टरमीडिएट अर्हताधारी शिक्षा मित्रों के सम्बन्ध राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से अनुमति प्राप्त कर ली जायेगी। प्रशिक्षण में इनका चिन्हांकन शिक्षा मित्र की प्रथम नियुक्ति तिथि के क्रम में किया जाएगा। यानी कि जिसकी नियुक्ति ग्राम पंचायत में पहले की है, उसको वरिष्ठता क्रम में ऊपर रखा जाएगा। यदि एक ही नियुक्ति के कई शिक्षा मित्र हैं तो उच्च शैक्षिक अर्हता रखने वाले को वरीयता प्रदान की जायेगी। यदि नियुक्ति तिथि तथा शैक्षिक अर्हता भी समान है तो अधिक उम्र के शिक्षा मित्र को वरीयता प्रदान की जाएगी। इस चयन में आरक्षण प्रावधान का पालन सुनिश्चित किया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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वर्तमान बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली को पुनः संशोधित कर पूर्व व्यवस्था बहाल की जायेगी

Posted on 24 July 2012 by admin

मंत्रिपरिषद द्वारा अध्यापक पात्रता परीक्षा-2011 को अर्हकारी परीक्षा बनाने का निर्णय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां लाल बहादुर शास्त्री भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में अध्यापक पात्रता परीक्षा-2011 को अर्हकारी परीक्षा बनाये जाने का निर्णय लिया है।
उल्लेखनीय है कि अध्यापक पात्रता परीक्षा की परिकल्पना के पीछे भारत सरकार की मंशा एक अर्हकारी परीक्षा के रूप में की गयी है। इसलिए अध्यापक पात्रता परीक्षा-2011 को अर्हकारी बनाया जाना विधि की मूल मंशा के अनुरूप है। इस निर्णय के फलस्वरूप राज्य सरकार को तत्काल अध्यापक पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं करनी होगी और अध्यापक पात्रता परीक्षा-2011 के अर्ह अभ्यर्थियों को शिक्षक के रूप में चयनित किया जाना संभव होगा। जो अभ्यर्थी उच्च प्राथमिक स्तर के ही अध्यापक पात्रता परीक्षा 2011 उत्तीर्ण हैं वे बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यापक के पदों के लिए पात्र नहीं होंगे, वरन् वे शासकीय सहायता प्राप्त और अन्य निजी विद्यालयों में रिक्त पदों के लिए ही पात्र होंगे।
यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने अध्यापक पात्रता परीक्षा-2011 को अर्हकारी परीक्षा बनाये जाने की संस्तुति की थी। मंत्रिपरिषद द्वारा समिति की संस्तुति को स्वीकार कर लेने के बाद अध्यापकों के चयन का आधार पूर्व की भांति अभ्यर्थी की शैक्षिक योग्यता तथा विभिन्न स्तरों पर पाये गये अंकों को बनाया जायेगा। इससे अध्यापक पात्रता परीक्षा-2011 की अनियमितता का प्रभाव चयन प्रक्रिया पर न्यून होगा। मंत्रिपरिषद के निर्णय के बाद वर्तमान बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली को पुनः संशोधित कर पूर्व व्यवस्था को बहाल किया जायेगा। वर्तमान में नियुक्ति हेतु जारी विज्ञप्ति को निरस्त कर संशोधित नियमावली के आधार पर पुनः जनपद स्तर से विज्ञप्ति जारी करके नियुक्ति प्रक्रिया को शुरू किया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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मंत्रिपरिषद केे महत्वपूर्ण निर्णय

Posted on 24 July 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां लाल बहादुर शास्त्री भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये:-

आठ जिलों के नाम परिवर्तित

मंत्रिपरिषद ने जनपद प्रबुद्धनगर का नाम शामली, जनपद भीमनगर का नाम संभल तथा जनपद पंचशीलनगर का नाम बदलकर हापुड़ करने का निर्णय लिया है।
इसी प्रकार जनपद महामाया नगर का नाम हाथरस, जनपद ज्योतिबाफुलेनगर का नाम अमरोहा, जनपद कांशीराम नगर का नाम कासगंज, जनपद छात्रपति शाहूजी महाराज नगर का नाम अमेठी तथा जनपद रमाबाई नगर का नाम परिवर्तित कर कानपुर देहात रखने का फैसला किया गया है।
गौरतलब है कि इन जनपदों के निवासियों एवं जनप्रतिनिधियों की ओर से इस आशय की मांग की जाती रही है कि विषयगत जनपदों के नाम से कोई शहर नहीं है, जिससे इन जनपदों की स्थिति की जानकारी नहीं हो पाती। इसके अलावा प्रदेश व प्रदेश से बाहर के लोगों को अपनी पहचान बताने, गंतव्य स्थान बताने तथा शासकीय अभिलेख बनवाने में अनेकों समस्याओं का सामना भी करना पड़ता था। इसलिए मंत्रिपरिषद ने आठ जनपदों के नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया।
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छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ का नाम
परिवर्तित कर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय करने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, उ0प्र0 लखनऊ का नाम परिवर्तित कर ‘किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, उ0प्र0 लखनऊ’ किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2002 में संशोधन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिपरिषद ने छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2012 के आलेख को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि किंग जार्ज मेडिकल कालेज केवल प्रान्तीय या राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं वरन् अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लगभग 105 वर्षाें से चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त है। इस मेडिकल कालेज ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विद्वानों और महान चिकित्सकों को उद्भूत किया और यहां से अध्ययन प्राप्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सक आज भी अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड तथा अन्य पश्चिमी देशों में कार्यरत हैं और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी ख्याति बनाये हुए हंै। इस संस्था की ख्याति अभी तक प्रदेश के अन्य भागों एवं विदेशों में ‘किंग जार्ज मेडिकल कालेज’ के नाम से है। संस्था का नाम छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय करने से इसकी ख्याति प्रभावित हुई है तथा देश के अन्य भागों एवं विदेशों में इस संस्था का नाम छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय बताये जाने के साथ-साथ इसके पूर्व नाम ‘किंग जार्ज मेडिकल कालेज’ बताये जाने की आवश्यकता होती है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय अधिनियम-2002 द्वारा किंग जार्ज मेडिकल कालेज, लखनऊ को उच्चीकृत करते हुए छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ की स्थापना की गयी थी। तत्पश्चात 17 दिसम्बर, 2003 को प्रख्यापित उ0प्र0 छत्रपति शाहू जी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) अधिनियम-2003 द्वारा छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ का नाम परिवर्तित करके किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ कर दिया गया। तत्पश्चात वर्ष 2007 में उ0प्र0 छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम-2007 द्वारा इसका नाम परिवर्तित कर छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, उ0प्र0 लखनऊ कर दिया गया।
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बाढ़ के कारण विस्थापित व्यक्तियों/परिवारों को पुनस्र्थापित
करने हेतु खरीद कर निःशुल्क भूमि आवंटित की जायेगी

मंत्रिपरिषद ने तीव्र बाढ़ के कारण नदियों के प्रवाह बदलने से ग्रामों में स्थित/नदियों के तट पर रिहायशी भूमि के अधिकांश भू-भाग नष्ट हो जाने की स्थिति में विस्थापित व्यक्तियों/परिवारों को पुनस्र्थापित करने हेतु भूमि खरीद कर निःशुल्क आवंटन करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके लिये उपयुक्त निकटतम ग्रामीण क्षेत्र में ही भूमि क्रय की जायेगी।
मंत्रिपरिषद द्वारा इसके लिये लाभार्थियों की पात्रता तथा प्राथमिकता भी निर्धारित कर दी गयी है। ग्राम सभा में निवास करने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले सामान्य श्रेणी के खेतिहर मजदूर या ग्रामीण शिल्पकार को अधिमान क्रम में भूमि आवंटित की जायेगी। इसी प्रकार गांव मंे निवास करने वाले किसी अन्य खेतिहर मजूदर या ग्राम के कारीगर के अलावा ग्राम सभा में निवास करने वाले, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले सामान्य श्रेणी के व्यक्ति को अधिमान क्रम में वरीयता दी जायेगी। गांव में निवास करने वाले विकलांग व्यक्ति तथा विस्थापित सामान्य श्रेणी के सभी व्यक्ति/परिवार को निःशुल्क भूमि आवंटित की जाएगी।
इस सम्बन्ध में फैसला लिया गया है कि प्रभावित व्यक्तियों/परिवारों को 250 वर्ग मीटर से अधिक भूमि का आवंटन नहीं किया जाएगा। इस भूमि को लगान से मुक्त रखा गया है। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को छोड़कर शेष अन्य लाभार्थियों को स्थल आवंटन की तिथि से 03 वर्ष के भीतर मकान बनाकर उसका उपयोग शुरू कर देना होगा। भूमि का प्रयोग प्रयोजन के अनुसार न करने पर उसका अधिकार समाप्त हो जायेगा और भूमि प्रबन्ध समिति अपने अधिकार क्षेत्र में ले लेगी।
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विधि परामर्शी निर्देशिका के विभिन्न प्रस्तरों में संशोधन

मंत्रिपरिषद ने विधि परामर्शी निर्देशिका के विभिन्न प्रस्तरों में संशोधन करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। आज जिन प्रस्तरों में संशोधन का निर्णय लिया गया, उनमें प्रस्तर-7.03, 7.06, 7.08, 8.02, 8.03, 8.04, 8.05 व 8.06 सम्मिलित हैं।
उल्लेखनीय है कि शासकीय वादों की अधीनस्थ न्यायालयों में शासन की ओर से पैरवी करने हेतु फौजदारी/दीवानी एवं राजस्व पक्ष में जिला शासकीय अधिवक्ताओं/अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं/सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तथा उप जिला शासकीय अधिवक्ता एवं नामिका वकील की व्यवस्था विधि परामर्शी निर्देशिका में वर्णित है। संशोधित प्रस्तर 7.03 व 7.06 आवेदन पत्र तथा योग्यतायें, 7.08 पदावधि का नवीनीकरण, 8.02 नामिका वकीलों के आवेदन पत्र, 8.03 श्रम नामिका वकील, 8.04 जिलाधिकारी तथा जिला न्यायाधीश की सिफारिशें, 8.05 नियुक्ति की अवधि तथा 8.06 नवीकरण की प्रक्रिया से सम्बन्धित हैं।
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उत्तर प्रदेश प्रसंस्कृत तिल निर्यात नीति (2012-17) लागू

मंत्रिपरिषद ने राज्य में प्रसंस्कृत तिल के निर्यात को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश प्रसंस्कृत तिल निर्यात नीति (2012-17) लागू करने का निर्णय लिया है।
इस नीति के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाईयों के निवारण हेतु प्रमुख सचिव/सचिव कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग की अध्यक्षता में समिति गठित होगी, जो समय-समय पर तिल उत्पादकों/निर्यातकों तथा तिल के निर्यात में आने वाली व्यवहारिक कठिनाईयों का निराकरण करेगी। समिति में प्रमुख सचिव/सचिव खाद्य एवं रसद विभाग अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी, प्रमुख सचिव/सचिव कर एवं निबन्ध विभाग अथवा उनके द्वारा नामिति अधिकारी, उ0प्र0 तिल निर्यात एसोसियेशन के प्रतिनिधि तथा निदेशक मण्डी परिषद सदस्य के रूप में होंगे। निदेशक कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार को सदस्य/संयोजक बनाया गया है।
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उ0प्र0 सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली-2011 में
लिवर प्रत्यारोपण पर होने वाले व्यय के प्राविधान का प्रस्ताव अनुमोदित

प्रदेश के बाहर कराये गये उपचार पर चिकित्सा दावे की प्रतिपूर्ति
14 लाख रूपये तक के सम्पूर्ण पैकेज के तहत होगी

मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली-2011 में लिवर प्रत्यारोपण पर होने वाले व्यय का प्राविधान किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। लिवर प्रत्यारोपण के संबंध में प्रदेश के बाहर कराये गये उपचार पर चिकित्सा दावे की प्रतिपूर्ति 14 लाख रूपये तक के सम्पूर्ण पैकेज के तहत की जायेगी।
इस पैकेज में प्रत्यारोपण कराने वाले रोगी की आॅपरेशन से पूर्व की जांच हेतु 50 हजार रुपये, रोगी की आॅपरेशन से पूर्व स्वास्थ्य तैयारी के लिए 02 लाख रुपये, लिवर दान करने वाले व्यक्ति की जांच आदि के लिए 50 हजार रुपये का प्राविधान सम्मिलित है। इसके साथ ही पैकेज में आॅपरेशन हेतु रक्त की जांचे तथा रक्त अवयव के मूल्य के लिए 50 हजार रुपये से 01 लाख रुपये तथा प्रत्यारोपण आॅपरेशन के पैकेज हेतु 10 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति का प्राविधान भी शामिल है।
पैकेज में चार सप्ताह की रोगी की भर्ती फीस और 15 दिन का डोनर का भर्ती शुल्क औषधियों तथा अन्य सर्जिकल सामग्री का खर्च, थिएटर, बेहोशी आदि का शुल्क चिकित्सालय शैय्या शुल्क आई0सी0यू0 भर्ती एवं दो बार आवश्यक पेट के आॅपरेशन का शुल्क सम्मिलित है। इस अवधि के अतिरिक्त जो भी खर्चें होंगे उनका शुल्क बेड की कैटेगरी के अनुसार अग्रिम जमा करना पड़ेगा। रक्त एवं रक्त अवयव की आवश्यकता पड़ने पर 50 हजार रुपये से 01 लाख रुपये का खर्च वास्तविक खर्च के अनुसार देय होगा। लिवर डायलिसिस, आॅपरेशन से पूर्व अथवा आॅपरेशन के पश्चात, आवश्यकता पड़ने पर 02 लाख रुपये के खर्च पर अलग से देय होगा। उक्त खर्च में मेन्टीनेन्स इम्यूनो सप्रेसिव औषधियों का खर्च सम्मिलित नहीं है। इन औषधियों की खुराक रोगी के वजन के अनुसार तय की जाती है और इनका खर्च अतिरिक्त देय होगा।
ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार के कार्मिकों, पंेशनरों एवं उनके आश्रितों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु उनके चिकित्सा उपचार में हुए व्यय की प्रतिपूर्ति किये जाने की व्यवस्था हेतु उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली-2011 प्रख्यापित है। राज्य कार्मिकों एवं उनके आश्रितों द्वारा प्रदेश के बाहर लिवर संबंधी उपचार कराया  जा रहा  है क्योंकि  एस0जी0पी0जी0आई0 लखनऊ में लिवर प्रत्यारोपण के उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उ0प्र0 सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली-2011 के नियम-11 में यह प्राविधान है कि उपचार की लागत, राज्य के भीतर उपचार कराने की दशा में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज एण्ड रिसर्च, लखनऊ (एस0जी0पी0जी0आई0) की तथा राज्य के बाहर उपचार कराने की दशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली की दरों पर प्रतिपूरणीय होगी।
लिवर प्रत्यारोपण की व्यवस्था वर्तमान एस0जी0पी0जी0आई0 तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में उपलब्ध नहीं न होने के कारण इंस्टीट्यूट आॅफ लिवर एण्ड बाइलियरी साइंसेज, नई दिल्ली से लिवर प्रत्यारोपण पर होने वाले व्यय की सूचना  प्राप्त की गयी। इसके साथ ही एस0जी0पी0जी0आई0 लखनऊ के सर्जिकल गैस्ट्र इन्टेरोलाॅजी एवं लिवर प्रत्यारोपण इकाई के विभागाध्यक्ष से लिवर प्रत्यारोपण पर होने वाले व्यय की सूचना भी प्राप्त की गयी।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में लिवर प्रत्यारोपण की व्यवस्था तथा उस होने वाले व्यय की दरों का जब तक निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक प्रदेश के बाहर कराये गये उपचार पर एस0जी0पी0जी0आई0 द्वारा उपलब्ध करायी गयी दरों के अनुसार चिकित्सा दावे की प्रतिपूर्ति करायी जायेगी।
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कैंसर डायबिटीज हृदयवाहिका और स्ट्रोक नियंत्रण कार्यक्रम तथा
राष्ट्रीय वृद्ध स्वास्थ्य परिचर्या कार्यक्रम के क्रियान्वयन का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने कैंसर डायबिटीज हृदयवाहिका और स्ट्रोक नियंत्रण कार्यक्रम (एन0पी0सी0डी0सी0एस0) तथा राष्ट्रीय वृद्ध स्वास्थ्य परिचर्या कार्यक्रम (एन0पी0एच0सी0ई0) का प्रदेश में क्रियान्वयन कराये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। आय-व्ययक पर प्राविधान के माध्यम से इन राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर होने वाले व्यय का केन्द्र द्वारा वहनीय 80 प्रतिशत अंश तथा राज्य सरकार द्वारा वहनीय 20 प्रतिशत अंश को व्यय करने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद ने मंजूरी प्रदान करते हुए इस संबंध में निष्पादित किये जाने वाले एम0ओ0यू0 के आलेख को भी स्वीकृति प्रदान कर दी।
ज्ञातव्य है कि एन0पी0सी0डी0सी0एस0 तथा एन0पी0एच0सी0ई0 के प्रथम चरण में देश के 21 राज्यों के 100 जिलों को चयनित किया गया। इनमें प्रथम चरण में वर्ष 2010-11 के दौरान रायबरेली एवं सुल्तानपुर तथा द्वितीय चरण में वर्ष 2011-12 में झांसी, लखीमपुर खीरी, फर्रूखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, ललितपुर एवं जालौन जिलों को चयनित किया गया। इस प्रकार इन कार्यक्रमों के तहत अब तक प्रदेश के कुल 09 जिले चयनित कर लिये गये तथा इससे 12वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत इन कार्यक्रमों से सभी जिलों को चरणबद्ध ढंग से आच्छादित किया जाना सम्भावित है।
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यू0पी0 इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को
पंचम वेतन आयोग की संस्तुति के तहत पुनरीक्षित वेतनमान देने का निर्णय

मंत्रिपरिषद द्वारा यू0पी0 इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन लिमिटेड (यू0पी0एल0सी0) के पूर्णकालिक/नियमित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पंचम वेतन आयोग की संस्तुति के तहत पुनरीक्षित वेतनमान देने का निर्णय लिया गया है। पुनरीक्षित वेतनमान सार्वजनिक उद्यम अनुभाग-1 के शासनादेश दिनांक 18 जनवरी, 1999 के साथ संलग्न तालिका ‘अ’ एवं ‘ब’ के अनुसार दिनांक 01 जनवरी, 1996 से प्रकल्पित आधार पर पुनरीक्षण करते हुए वास्तविक लाभ शासनादेश निर्गत करने की तिथि से अनुमन्य किया गया है। इस सम्बन्ध में कोई एरियर नहीं दिया जायेगा। यह भी निर्णय लिया गया है कि पुनरीक्षित वेतनमान लागू किये जाने से आने वाले सम्पूर्ण अतिरिक्त व्ययभार को निगम ही वहन करेगा, इस हेतु राज्य सरकार द्वारा कोई सहायता नहीं दी जायेगी।
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मंत्रिपरिषद को वर्ष 2012-13 की वार्षिक योजना
के सम्बन्ध में अवगत कराया गया

वार्षिक योजना वर्ष 2012-13 के 57,800 करोड़ रूपये के अब तक के सर्वाधिक वृहद आकार पर केन्द्रीय योजना आयोग के अनुमोदन के फलस्वरूप मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में प्रदेश की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्बन्ध में नियोजन विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के सूचनार्थ एक टिप्पणी प्रस्तुत की गयी।
नियोजन विभाग की टिप्पणी के अनुसार 18 जुलाई, 2012 को मुख्यमंत्री तथा उपाध्यक्ष योजना आयोग भारत सरकार के मध्य हुई बैठक में वर्ष 2012-13 की वार्षिक योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रदेश के विकास के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार के प्रयासों से प्रभावित होकर केन्द्रीय योजना आयोग द्वारा योजना का आकार 57 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 57,800 करोड़ रुपये के स्तर पर निर्धारित किया गया। महाकुम्भ इलाहाबाद के आयोजन हेतु योजना आयोग द्वारा गत वर्ष मात्र रु0 200 करोड़ रुपये का अनुदान इस शर्त के साथ उपलब्ध कराया गया था कि 70 प्रतिशत धनराशि राज्य द्वारा भी लगायी जायेगी।
इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री द्वारा यह तर्क किया गया कि महाकुम्भ राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अन्तराष्ट्रीय स्तर का आयोजक है, इसके नाते केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान स्वीकार किया जाना चाहिए। इस तर्क को स्वीकार करते हुए महाकुम्भ हेतु स्वीकृत 1318 करोड़ रुपये की लागत के कार्यों के लिए 90 प्रतिशत अनुदान हेतु सहमति दी गई। इसके लिए वर्ष 2012-13 में उपलब्ध 195.30 करोड़ रुपये के अनुदान के अतिरिक्त, केन्द्रीय योजना आयोग द्वारा 800 करोड़ रुपये की एकमुश्त विशेष सहायता अनुमन्य की गई। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
बैठक में राज्य सरकार द्वारा केन्द्रीय योजना आयोग का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकृष्ट किया गया कि वर्ष 2012-13 में प्रदेश के कर राजस्व में 22 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 62 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाया जायेगा। वित्तीय अनुशासन बनाये रखते हुए एफ.आर.बी.एम. एक्ट में निर्धारित  लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। पिछले वर्ष राज्य के स्वयं का कर-राजस्व सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत था, जिसे इस वर्ष बढ़ाकर 8.5 प्रतिशत तक ले जाया जा रहा है।
योजना आयोग को यह जानकारी भी दी गई कि राज्य के सामने अनेक चुनौतियां हैं जिनके आलोक में राज्य द्वारा विकास दर को बढ़ाने, विषमताओं को कम करने, प्रति-व्यक्ति आय में वृद्धि करने, कृषि को बढ़ावा देने, अवस्थापना विकास, निजी क्षेत्र के विनियोजन, अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य तथा लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाना मुख्य उद्देश्य है।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम वर्ष 2016-17 में 10 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त किया जाना लक्षित है। इस प्रकार पंचवर्षीय योजना की औसत विकास दर 8.5 प्रतिशत प्राप्त किये जाने का लक्ष्य है जिसमें कृषि की विकास दर 5 प्रतिशत, पशुधन, दुग्ध, मत्स्य तथा उद्यान में 10 प्रतिशत से अधिक की विकास दर प्राप्त किया जाना लक्षित है।
यह भी उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम आधारित मदों में वर्ष 2011-12 में राज्य को 5567 करोड़ रुपये की सहायता अनुमन्य हुई थी, जिसे वर्ष 2012-13 के लिए बढ़ाकर 9200 करोड़ रुपये के स्तर पर निर्धारित कराया गया है। इस प्रकार 65.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस प्रकार वर्ष 2012-13 की योजना का प्रस्तावित आकार 57,000 करोड़ रुपये को बढ़ाकर 57,800 करोड़ रुपये के स्तर पर निर्धारित कराया गया है, जो गत वर्ष के योजना आकार 47,000 करोड़ रुपये से लगभग 23 प्रतिशत अधिक है। यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-13 हेतु उत्तर प्रदेश की योजना का आकार देश में सबसे बड़ा है। राज्य के 57,800 करोड़ रुपये के योजनागत व्यय के ऊपर भारत सरकार से लगभग 20,000 करोड़ रुपये से अधिक केन्द्रीय अंश भी उपलब्ध कराये जाने का आश्वासन दिया गया। इस प्रकार राज्य के विकास हेतु योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2012-13 में लगभग 77,800 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध होगी, जो अपने आप में एक मिसाल होगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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Sahara India Pariwar announces the picking up of Lucknow Franchisee of the soon to be launched “Hockey India League”

Posted on 24 July 2012 by admin

To become one of the prime franchises of the ‘Hockey India League’

Sahara India Pariwar, a major business conglomerate and the prime promoter & patron of sports in India, has created another milestone today by announcing to become one of the prime franchisee of the ‘Hockey India League’ (HIL), which is to be started by Hockey India. The Hockey India League (HIL) will initially comprise of 6 teams which will play amongst each other (both home and away matches). Sahara India Pariwar, the Lucknow based business conglomerate, will be the owner of the Lucknow franchise. Moreover, by taking up this franchisee, Sahara India Pariwar intends to encourage young talents of this great game of skill and energy, thereby giving them a platform to nurture their skills under the supervision of talented sportsmen.

Speaking on the occasion, ‘Saharasri’ Subrata Roy Sahara, Managing Worker & Chairman, Sahara India Pariwar, said “We are proud to associate ourselves with this great game, which has created legends in the past. By taking up this franchise we are sure that fresh talent will be identified at city and regional level, who in turn will bring laurels to our beloved nation. We are also hopeful, that following our efforts to encourage Hockey, other corporate entities will also come forward to support this league which will eventually benefit the game and its exponents”.

Mr. Narendra Batra, Secretary General, Hockey India, said, “I am grateful to ‘Saharasri’ and Sahara India Pariwar, for again coming forward in support of Hockey. The Group has always come forward and supported the sport of hockey at all times by providing it the much needed support.”

Apart from being sponsor to the Indian Hockey Team, Sahara India Pariwar had also joined hands with Federation Internationale De Hockey (FIH) in 2004, the World’s apex Body for Hockey, and became the 4th Global Partner of the Federation for a period of 3 years. Sahara India Pariwar has felicitated the entire Indian Hockey Team, including both the players and the officials, on numerous occasions when Indian team has registered historic wins including the recent FIH Olympic Qualifiers.

ABOUT SAHARA INDIA PARIWAR
Sahara India Pariwar is a major business conglomerate in India with operations in multiple sectors, including financial services, life insurance, mutual funds, housing finance,  infrastructure & housing, print and television news media, entertainment channels, cinema production, consumer merchandise retail, healthcare, hospitality, manufacturing, sports, and information technology.

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों में जन्में महान सन्तों, गुरूओं व महापुरूषों के ‘‘प्रेरणादायी‘‘ नाम बदलने का उत्तर प्रदेश की सपा सरकार का फैसला अत्यन्त दुःखद व निन्दनीय

Posted on 24 July 2012 by admin

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री माननीया सुश्री मायावती जी ने कहाकि बी.एस.पी. के उनके शासनकाल के दौरान बनाये गये नये जिलों का नामकरण दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों (ओ.बी.सी.) में जन्में महान सन्तों, गुरूओं व महापुरूषों के नाम पर रखे गये थे ताकि वे समाज के लिये आगे भी हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहें, परन्तु उत्तर प्रदेश की वर्तमान सपा सरकार इनका नाम बेवजह बदलकर और ऐसा नाम रख जिसकी कोई गम्भीर अर्थ नहीं है, महापुरूषों का अपमान कर रही है, जिसके लिये समाज और इतिहास उन्हें कभी भी माफ नहीं करेगा।
माननीया सुश्री मायावती जी ने आज यहाँ अपने एक बयान में कहाकि जिलों का नाम बदले जाने की चर्चा मीडिया में काफी पहले से आ रही थी, किन्तु उनको विश्वास नहीं था कि दुर्भावना के तहत् काम करते हुये दलित व अन्य पिछड़े वर्गों में जन्में महान् सन्तों, गुरूओं व महापुरूषों के प्रति विरोध व नफरत में उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार इस हद तक आगे चली जायेगी कि उनके नाम पर रखे गये जिलों आदि का नाम तक बदल कर उनका अपमान करने पर उतारू हो जायेगी। इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश की सपा सरकार का आज का फैसला अत्यन्त दुःखद है एवं इसकी जितनी भी निन्दा की जाये कम है। मैं समझती हूँ कि ऐसा करके सपा प्रमुख श्री मुलायम सिंह यादव एवं उनके मुख्यमंत्री पुत्र श्री अखिलेश यादव ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम काले अक्षरों में दर्ज करा लिया है। जाति-व्यवस्था से पीडि़त भारतीय समाज में ‘‘सामाजिक परिवर्तन‘‘ के तहत् देश में जाति-विहीन समतामूलक समाज व्यवस्था स्थापित करने के लिये अपना पूरा जीवन कठिन संघर्ष व बेमिसाल त्याग को समर्पित करने वाले इन महापुरूषों को अपमानित करने वालो को समाज ने काफी कड़ा सबक पहले भी सिखाया है और निश्चय ही आने वालों दिनों में इस प्रकार के लगातार अपमानों को यह समाज कतई बर्दास्त नहीं करेगा, ऐसा मेरा अनुभव व विश्वास है।
माननीया सुश्री मायावती जी ने कहाकि आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की विशाल व कुव्यवस्था से त्रस्त सर्वसमाज की गरीब जनता को बेहतर प्रशासन व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही उनके सभी चार शासनकालों में नयी तहसील, नये जिले, नये मण्डल व नये पुलिस रेंज इत्यादि बनाये गये थे। मेरी सरकार ने कभी भी किसी जिले का नामांतरण नहीं किया, बल्कि नया जिला बनाकर उसका नया ‘‘प्रेरणादायी‘‘ नाम रखा। इतना ही नहीं, बल्कि नये जिलों की स्थापना हेतु काफी ज्यादा स्थान व समुचित धन भी उपलब्ध कराया गया है एवं यथासम्भव नये जिलों के मुख्यालयों हेतु उसी तहसील को चुना गया जो सर्वाधिक उपयुक्त थे तथा उनका नाम भी वही रखा गया है जो पहले से प्रचलित थे। इसके बावजूद भी इन फैसलों का विरोध करना और उन्हें बदलना सपा सरकार का पूर्णरूप से दुर्भावना से ग्रसित कदम है जो उसकी तुच्छ मानसिकता का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश की सपा सरकार को उसकी इस प्रकार की करतूतों का खामियाजा भुगतने के लिये तैयार रहने की चेतावनी देते हुये बहन कुमारी मायावती जी ने कहाकि उनकी सरकार में कभी भी ‘‘सस्ती लोकप्रियता‘‘ हासिल करने के लिये काम नहीं किया है जिस कारण ही उनकी पार्टी व सरकार की एक अलग पहचान बनी हुई है, परन्तु ‘‘दुर्भावना के साथ-साथ विरोध के लिये विरोध‘‘ करने वाली पार्टी सपा को कभी भी माफ नहीं किया जा सकता है।
वर्तमान सपा सरकार की घोर दलित व पिछड़ा वर्ग एवं सर्वसमाज के गरीब-विरोधी नीति के खिलाफ बी.एस.पी. अपने संघर्ष व मूवमेन्ट को और ज्यादा तीव्र करेगी एवं समय आने पर इन ज्यादतियों का पूरा-पूरा हिसाब-किताब जरूर लिया जायेगा।
आत्म-सम्मान के मूवमेन्ट को बढ़ावा देने वाले दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों में जन्में महान सन्तों, गुरूओं व महापुरूषों का तिरस्कार करने वालों को जब ‘‘बी.एस.पी. मूवमेन्ट‘‘ ने जब कभी माफ नहीं किया है और उसका सूद सहित समुचित राजनीतिक बदला लिया है, तो उनका अपमान करने वालों को कैसे माफ किया जा सकता है। हमारी  सरकार ने अच्छे व युग-परिवर्तनीय काम करके इतिहास में अपने आपको अमर कर लिया है, अब हमारे विरोधी लोग अपना नाम इतिहास के काले पन्नों में दर्ज कराने पर उतारू हैं तो हम उनका स्वागत तो नहीं ही कर सकते हैं। अर्थात् बी.एस.पी. सरकार द्वारा बनाये गये नये जिलों के ‘‘प्रेरणादायी‘‘ नाम को बदले के उत्तर प्रदेश के सपा सरकार के फैसले की कड़ी निन्दा व भत्र्सना की जाती है। साथ ही, बी.एस.पी. को पूरा-पूरा विश्वास है कि दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों में जन्में इन महान सन्तों, गुरूओं व महापुरूषों में आस्था रखने वाली विशाल आबादी सही वक्त आने पर इस प्रकार के अपमान का जरूर मुँहतोड़ जवाब देगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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अवस्थापना विकास निधि के बिलों आदि के भुगतान हेतु स्थानीय नगर निकाय पुनः अधिकृत

Posted on 24 July 2012 by admin

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 12वें/13वें वित्त आयोग एवं अवस्थापना विकास निधि से कराये जाने वाले कार्यों का आगणन, निविदाओं की स्वीकृति एवं बिलों के भुगतान हेतु दिनांक 07 मार्च 2010 को जारी शासनादेश को पुनः बहाल कर दिया गया है। इस शासनादेश के अनुरूप अब स्थानीय नगर निकाय इन कार्यों के आगणन, निविदाओं की स्वीकृति एवं बिलों के भुगतान के लिये पुनः सक्षम हो गये हंै। पूर्व में इस कार्य के लिये मण्डलायुक्त/जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति अधिकृत थी।
प्रमुख सचिव, नगर विकास श्री प्रवीर कुमार द्वारा जारी एक शासनादेश में कहा गया है कि पूर्व में प्रचलित व्यवस्था के कारण आ रही कठिनाइयों के मद्देनज़र दिनांक 7 मार्च, 2010 को जारी शासनादेश की व्यवस्था को बहाल किया गया है। मण्डलायुक्तों व जिलाधिकारियों द्वारा अब केवल विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने हेतु प्रभावी कार्यवाही की जायेगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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नदी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के तहत् सृजित परिसम्पत्तियों के रख-रखाव हेतु धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश

Posted on 24 July 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग द्वारा नदी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत विद्युत देयों के भुगतान हेतु 32 करोड़ रुपये एवं इस कार्यक्रम के तहत सृजित परिसम्पत्तियों के संचालन एवं रख-रखाव हेतु 3.92556 करोड़ रुपये की धनराशि उत्तर प्रदेश जल निगम को उपलब्ध कराने के निर्देश निदेशक, स्थानीय निकाय को दिये गये हैं।
विशेष सचिव, नगर विकास, श्रीप्रकाश सिंह ने बताया कि नदी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत सृजित परिसम्पत्तियों के संचालन एवं रख-रखाव हेतु 35.92556 करोड़ रुपये की धनराशि निदेशालय स्तर पर संरक्षित/अवशेष थी। इसी धनराशि को निदेशक स्थानीय निकाय द्वारा उ0प्र0 जल निगम को उपलब्ध कराई जायेगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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फसली ऋण के लिए सूदखोरों के जाल में छोटे किसानों को जाने से बचाने के लिए सरकार का एक बड़ा कदम

Posted on 24 July 2012 by admin

सभी किसानों को क्रेडिट कार्ड आगामी 30 नवम्बर तक दिया जायेगा-कृषि उत्पादन आयुक्त
सीमान्त और पट्टा किसानों को भी उनके संयुक्त समूह बनाकर   फसली ऋण की सुविधा किसान क्रेडिट कार्ड से मिलेगी-आलोक रंजन
जिलाधिकारी, संबंधित बैंक और कृषि विभाग कैम्प लगाकर किसान क्रेडिट कार्ड बांटेंगे

उ0प्र0 के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आलोक रंजन ने आज यहां बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में मौजूद छोटे किसानों और पट्टे पर खेती करने वाले अत्यन्त गरीब किसानों की फसली ऋण की जरूरत को देखते हुए सरकार ने सभी किसानों को अभियान चलाकर किसान क्रेडिट कार्ड देने का एक बड़ा कदम उठाया है।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि इस संबंध में आज एक शासनादेश के माध्यम से जिलाधिकारियों, जनपद स्तरीय उप निदेशक कृषि और बैंकर्स को निर्देश दिया गया है कि राज्य के सभी गांवों के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड 30 नवम्बर तक उपलब्ध कराये जाॅंय। उन्होंने कहा कि खेती में गुणवत्तायुक्त उपादान (इनपुट) की आवश्यकता की पूर्ति के लिए किसानों को खासकर गरीब व छोटे किसानों को फसली ऋण के महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की पहल पर सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि सीमान्त किसानों व मालिकाना हक के बिना पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को भी फसली ऋण के महत्व को देखते हुए नाबार्ड गाइड लाईन्स के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा फसली ऋण मिलने की व्यवस्था की जायेगी।
श्री आलोक रंजन ने बताया कि सभी किसानों को आगामी 30 नवम्बर तक किसान क्रेडिट कार्ड देने के लिए एक समयसारिणी बनाई गयी है जिसे सभी मण्डलायुक्तों, कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायती राज विभाग, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग, संस्थागत वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों, कृषि निदेशक, संस्थागत वित्त एवं सर्वहित बीमा निदेशालय के निदेशक तथा समन्वयक महा प्रबन्धक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (बैंक आफ बड़ौदा, लखनऊ) को प्रेषित किया गया है और निर्देश दिया गया है कि किसानों के हित में इस समयसारिणी का अक्षरशः पालन किया जाय। उन्होंने कहा कि समयसारिणी के अनुसार 31 जुलाई तक पात्र पाये गये किसानों के फार्मों को बैंकों में जमा कराया जायेगा और आगामी 31 अगस्त तक उन किसानों के फार्मों को संबंधित बैंकों में जमा कराने का अभियान चलाया जायेगा, जिनका सर्वेक्षण किसी कारण नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आगामी 31 अक्टूबर तक अपात्र (डिफाल्टर) पाये गये किसानों का पुनः सर्वेक्षण कराकर संबंधित बैंकों में उनके आवेदन जमा कराये जायेंगे जिसके बाद आगामी 30 नवम्बर तक जमा कराये फार्मों पर किसान क्रेडिट कार्ड निर्गत कराया जाना सुनिश्चित किया जायेगा।
श्री आलोक रंजन ने बताया कि सीमान्त श्रेणी के काश्तकारों एवं खेतों के मालिक न होते हुए भी पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को फसली ऋण की राहत देने के लिये सरकार ने तय किया है कि संयुक्त देयता समूह बनाये जायेंगे जिनमें 4 से 10 व्यक्तियों के औपचारिक समूह होंगे जोे एकल या समूह प्रक्रिया के द्वारा परस्पर गारन्टी पर बैंक ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य से एक ग्रुप बनाते है। उन्होंने कहा कि इन ग्रुपों को भी नाबार्ड की गाईडलाईन्स के अनुसार ऋण की सुविधा किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से दी जायेगी। उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड को कृषि विभाग के थ्रस्ट एरिया (अत्यन्त महत्व के क्षेत्र) में शामिल किया गया ताकि उसकी प्रगति की समीक्षा विभिन्न स्तरों पर होती रहे। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त किसान क्रेडिट कार्ड वितरण की प्रगति की समीक्षा के लिए संयुक्त कृषि निदेशक मण्डल स्तर पर समीक्षा करने के लिए तय किये गये हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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इस वर्ष 3560 बंधुओं श्रमिकों की पुनर्वासित कराया जायेगा

Posted on 24 July 2012 by admin

वर्तमान वित्तीय वर्ष में बंधुआ श्रमिकों को पुनर्वासित किये जाने के लिए 712 लाख रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इस धनराशि से 3560 श्रमिकों को पुनर्वासित किया जायेगा।
यह जानकारी प्रदेश के श्रम मंत्री श्री वकार अहमद शाह ने दी है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष प्रदेश में 3394 बंधुआ श्रमिकों को पुनर्वासित किया गया था। इस कार्य 678.80 लाख रुपये व्यय किये गये थे।
श्रम मंत्री ने बताया कि बंधुआ श्रम प्रथा के उन्मूलन कार्यक्रम का क्रियान्वयन प्रदेश में पूरी संवेदनशीलता के साथ कराया जा रहा है। उन्होंने बताया चिन्हित/अवमुक्त कराये गये बंधुआ श्रमिक को बीस हजार रुपये प्रदान किये जाते हैं जिसमें दस हजार केन्द्रांश तथा दस हजार राज्यांश के रूप में सम्मिलित हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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डिम्पल यादव के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती

Posted on 24 July 2012 by admin

आमतौर पर सभी लोगों को यही मालूम है कि उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री अखिलेष यादव की पत्नी डिम्पल यादव कन्नौज की लोकसभा सीट से र्निविरोध चुनाव जीतीं हैं। किन्तु 21 जुलाई को हाई कोर्ट इलाहाबाद में दाखिल याचिका को देखने पर स्पस्ट है कि कन्नौज का उपचुनाव र्निविराध नहीं हुआ था, अपितु चुनाव लड़ने वाले प्रत्याषियों का अपहरण किया गया था। वोटर्स पार्टी इन्टरनेषनल के नाम से एक नई पार्टी ने अमेठी के एक वकील श्री प्रभात पाण्डे को अपना प्रत्यासी बनाया था। कन्नौज की कचहरी के अंदर से उनका अपहरएा कर लिये जाने के कारण वह नामांकन दाखिल नहीं कर पाये थे।  श्री प्रभात पाण्डे ने अपने अपहरण की जानकारी पार्टी मुख्यालय, नई दिल्ली व चुनाव आयेग को समय रहते दे दिया था और अपने नामांकन पत्र को आयोग के कार्यालय में समय रहते फैक्स कर दिया था। पार्टी मुख्यालय ने अपहरण करके चुनाव लड़ने से रोकने के मामले की जांच करने के लिए भारत सरकार व उत्तर प्रदेष सरकार को लिखा था किन्तु कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हुई तो कल हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करके डिम्पल यादव के चुनाव का रद्द करके कन्नौज में नये सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई है।
वोटर्स पार्टी इन्टरनेषनल के नीति निर्देषक श्री भरत गांधी ने प्रभात पाण्डे व उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री अखिलेष यादव - दोनो से अपील की है कि इस घटना को निजी लड़ाई न बनाकर राजनीतिक व प्रषासनिक सुधार की लड़ाई बनायें। उन्होंन ऐसे सुधारों पर बल दिया है जिससे कि आने वाले दिन में कोई भी सत्ताधारी पार्टी चुनावी धांधली न करने पाये।
यह दिलचस्प होगा कि अगर यह साबित हो जाता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अखिलेष यादव की पत्नी डिम्पल यादव र्निविरोध चुनाव जीतने के लिए अन्य प्रत्याषियों का अपहरण कर लिया था और नामांकन नहीं करने दिया था तो कन्नौज का चुनाव रदद हो सकता है और वहां दोबारा चुनाव कराये जा सकते है।ं इससे समाजवादी पार्टी की आपराधिक छवि एक बार फिर चर्चा का विशय बनेगी। अगर उच्च न्यायानय अपहरण करने वालों को कठोर दण्ड की सिफारिष भी करता है तो राजनीति के अपराधिकरण को रोकने के अभियान में यह घटना एक मील का पत्थर साबित होगी।
यह याचिका हाई कोर्ट के रजिस्टार के कार्यालय में 21 जुलाई, 2012 के अपराह्न 3 बजे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 81 के अंतर्गत प्रभात पाण्डे बनाम डिम्पल यादव के नाम से चुनाव याचिका के रूप में दर्ज की गई है। पार्टी ने पूरी याचिका को सुबूतों के साथ वेबाइट पर आॅन लाइन भी किया है, जिसे कोई भी पढ़ सकता है। वेबसाइट है www.politicalreforms.org

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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