Archive | February 24th, 2011

पुश्प प्रदशZनी को और भव्य रूप दिया जायेगा- जिलाधिकारी

Posted on 24 February 2011 by admin

पुश्प एवं शाकभाजी प्रदशZनी का पुरस्कार वितरण सम्पन्न

dm-agra-ajay-chauhan-distributing-prizes-to-the-winners-of-flower-and-vegetable-exhibition-participantsमण्डलीय फल, शाकभाजी एवं पुश्प प्रदशZनी के समापन अवसर पर जिलाधिकारी अजय चौहान ने विजेताओं को पुरूस्कार वितरण कर सम्मानित किया । श्री चौहान ने प्रदशZनी के आयोजकों और जनता के प्रतिभाग के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस प्रदशZनी में आने पर सुखद और मनोहारी वातावरण मिलता है जिससे सहज ही सकारात्मक सोच उत्पन्न होती है। पुश्प लोगों के मन को प्रसन्न करते है। उन्होंने भविश्य में प्रदशZनी को भव्य रूप दिये जाने की आशा प्रकट करते हुए उद्यानविदो, होटलों, तथा जनता के सक्रिय प्रतिभाग पर बल दिया।

प्रदशZनी की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ताजमहल, दि ओबेराय अमर विलास एण्ड ट्राईडेन्ट, होटल क्लार्क िशराज, आई.टी.सी. होटल , द मुगल, जे0पी0 पैलेस तथा सरदार कुलदीप सिंह ने अलग-अलग सर्वाधिक अंक प्राप्त कर उत्कृश्ट प्रदशZन किया। प्रदशZनी में विभिन्न प्रकार के फल, शाकभाजी, बहुवशीZय एवं बहुरंगीय पुश्पों के प्रदशZ के साथ-साथ शादी स्टेज आकशZण का केन्द्र रही।

सेना क्षेत्र में बंगला उद्यान एवं ग्रह वाटिकाओं की प्रतियोगिताओं के पुरूस्कार ग्रुप कैप्टन टी. के. सिन्हा, जी.सी. मिश्रा, एस.राय चौधरी, विग्रेडियर जानकी पन्त, एयर कमोडोर के0 राघवेन्द्र, एस.के. कुल्श्रेश्ठ, ग्रुप कैप्टन राजेन्द्र प्रताप सिंह, ब्रिगेडियर आर0 प्रेम कुमार, विग्रेडियर ए.के. धिंगरा, ग्रुप कै0 एस.के. इन्दौरिया, श्रीमती यामिनी पन्त, 7 पैरा आफीसर्स मैस, सेना चिकित्सालय, प्रधानाचार्य केन्द्रीय विद्यालय नं0 1 एयर फोर्स रूटेशन को भिन्न भिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त हुए।

सिविल क्षेत्र के गृह उद्यानों की प्रतियोगिता में राजकीय कार्यालय एवं अन्य संस्थाओं के  उद्यानों में निदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(उद्यान शाखा) ताजमहल आगरा, मानसिक आरोग्यशाला की डा0 कुसुम राय, तथा सचिव आविप्रा उदयीराम ने पुरस्कार प्राप्त किये है।

फार्म हाउस उद्यानों में त्रिवेणी रायल फार्म हाउस अरतौनी, डाबर फुटवीयर इण्ड0 ,धार्मिक संस्थाओं के उद्यान में बाबा प्रीतम सिंह गुरूद्वारा गुरू का ताल, विद्यालय में गोपी चन्द्र िशवहरे कन्या इण्टर कालेज, क्वीन विक्टोरिया इण्टर कालेज, श्रीमती एन0 पद्मजा जिलाधिकारी निवास, डा0 वी.डी. शर्मा, डा0 ज्ञान प्रकाश, डा0 वरूण सरकार, डा0 कुसुमराय, अशोक कुमार जैन, एयर कमोडोर अशोक सरकार, श्रीमती बीना कौल, श्रीमती कंचन आहूजा तथा उपाध्यक्ष आगरा विकास प्राधिकरण निवास को पुरूस्कृत किया गया है।

जिलाधिकारी ने िशशु शो , तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और मालियों को पुररूस्कार प्रदान किये। उप निदेशक उद्यान/सचिव भैरम सिंह ने आभार प्रकट किया। जिला उद्यान अधिकारी एस.सी. गुप्ता ने संचालन किया। इस अवसर कर उप निदेशक सूचना राजगोपाल सिंह वर्मा, निदेशक उद्यान पुरातत्व विभाग डा0 हरवीर सिंह, सहायक निदेशक पर्यटन अनूप श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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अन्तर-विद्यालयी संस्कृत श्लोक प्रतियोगिता में सी.एम.एस. के छात्रों की महत्वपूर्ण सफलता

Posted on 24 February 2011 by admin

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, अलीगंज कैम्पस के 18 छात्रों ने उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित अन्तर-विद्यालयी संस्कृत श्लोक प्रतियोगिता में सफलता अर्जित कर विद्यालय का नाम गौरवािन्वत किया है। यह जानकारी सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने दी है। श्री शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा भावी पीढ़ी के संस्कृत ज्ञान को विकसित करने एवं संस्कृति विषय के प्रति रुचि जागृत करने के उद्देश्य से यह प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें लखनऊ के कई प्रतििष्ठत विद्यालयों के छात्रों ने प्रतिभाग किया। इस प्रतििष्ठत प्रतियोगिता में सी.एम.एस. अलीगंज के मेधावी छात्रों ने न सिर्फ अपने संस्कृत ज्ञान का परचम लहराया अपितु अपनी सांस्कृतिक विरासत का आलोक भी प्रवाहित किया। आयोजकों ने सी.एम.एस. छात्रों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए नगद धनराशि के अलावा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

sanskrit-contestश्री शर्मा ने बताया कि सी.एम.एस. छात्र न सिर्फ शैक्षिक क्षेत्र में अपितु समाज के अन्य बहुतेरे क्षेत्रों में भी विद्यालय का नाम राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं क्योंकि सी.एम.एस. अपने छात्रों के बौद्धिक विकास के साथ उन्हें सामाजिक गतिविधियों एवं रचनात्मक कार्यों के लिए विशेष रूप से प्रेरित करता है। यही कारण है कि सी.एम.एस. छात्र सदैव ही विभिन्न रचनात्मक एवं सृजनात्मक प्रतियोगिताओं में अपनी बहुमुखी प्रतिभा की छाप छोड़कर विद्यालय का गौरव बढ़ा रहे हैं। श्री शर्मा ने बताया कि सी.एम.एस. द्वारा भारतीय संस्कृति के उच्च आदशोZ को पूरे विश्व समाज में प्रचारित व प्रवाहित करने हेतु अश्लील फिल्मों एवं सीरियलों पर रोक लगाने, वैलेन्टाइन डे को पारिवारिक एकता दिवस के रूप में मनाने, यौन शिक्षा के स्थान पर योग शिक्षा देने, धार्मिक भेदभाव के स्थान पर धार्मिक एकता स्थापित करने आदि अभियान समय-समय पर चलाये जाते हैं। इन सामाजिक जागरूकता अभियानों में विद्यालय के छात्र बढ-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं एवं सी.एम.एस. छात्रों ने पढ़ाई में सर्वोच्च कीर्तिमान बनाने के साथ ही साथ सामाजिक जागरूकता की भी अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मिलावटखोरों के विरूद्ध अभियान जारी

Posted on 24 February 2011 by admin

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत 3309 मुकदमे  एवं 563 एफ0आई0आर0 दर्ज
“एफ.डी.ए. आपके द्वार´´ अभियान में अब तक  3754 घरों के नमूनों की हुई जांच

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती जी के निर्देश पर मिलावटखोरों के विरूद्ध एफ.डी.ए. द्वारा चलाये जा रहे अभियान के तहत खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के अन्तर्गत मिलावटखोरों के विरूद्ध अब तक विभिन्न न्यायालयों में 3309 मुकदमे एवं 563 एफ0आई0आर0 दर्ज करायी गई। अभियान में अनियमितता एवं लापरवाही बरतने पर 19 कर्मचारियों एवं अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करते हुए उन्हें निलिम्बत किया गया है।

यह जानकारी खाद्य एवं औशधि प्रशासन विभाग के प्रवक्ता ने देते हुए बताया कि खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत 3309 मिलावटखोरों के विरूद्ध विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे दाखिल किये गये तथा आई0पी0सी0 की धारा-272 व 273 के अन्तर्गत 563 मिलावटखोरों के विरूद्ध थानों में एफ0आई0आर0 दर्ज करायी गई।  प्रवक्ता ने बताया कि इस अधिनियम के तहत कुल 15,457 नमूने संग्रहीत किये गये जिसमें 3605 नमूनों में मिलावट पायी गई।

प्रवक्ता ने बताया कि खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत बेकरी प्रोडक्ट प्रकरण में 45 मुकदमे एवं 05 आई0पी0सी0 की धारा के अन्तर्गत एफ0आई0आर0, िड्रंकिंग मैटीरियल एवं पैकेज्ड वाटर के तहत 45 मुकदमे और 15 एफ0आई0आर0, काबाZइड एवं इथाफोन के प्रकरण में 27 मुकदमे एवं 79 एफ0आई0आर0, दूध, दही, घी, मक्खन, खोया एवं पनीर  के मामलों में 1589 मुकदमे 126 एफ0आई0आर0, मिठाई एवं मिल्क प्रोडक्ट मामलों में 458 मुकदमे एवं 59 एफ0आई0आर, फ्रूट वेजीटेबिल पिकल जैम प्रकरण में 38 मुकदमे एवं 08 एफ0आई0आर0, अनाज, दाल एवं खेसारी प्रकरण में 187 मुकदमे 51 एफ0आई0आर0, सरसों का तेल, वनस्पति, रिफाइन्ड/एडिबिल ऑयल एवं नान एडिबिल कलर प्रकरण में 213 मुकदमे एवं 48 एफ0आई0आर0, मसाले, नमक एवं चाय/काफी प्रकरण में 146 मुकदमे एवं 41 एफ0आई0आर0, नमकीन, गुटखा, पान मसाला आदि प्रकरण में 459 मुकदमे एवं आई0पी0सी0 की धारा-272 व 273 के तहत 116 एफ0आई0आर0 दर्ज करायी गई।

प्रवक्ता ने बताया कि औशधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत मिलावटखोरों के विरूद्ध चलाये गये अभियान में अनियमितता एवं लापरवाही बरतने पर अब तक 19 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करते हुए उन्हें निलिम्बत किया जा चुका है। प्रवक्ता ने बताया कि मिलावटखोरी के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान में लापरवाही बरतने पर सम्बंधित अधिकारियों के विरूद्ध विधिक कार्यवाही की जायेगी। प्रवक्ता ने बताया कि पी0एफ0ए0 एक्ट के तहत मिलावटखोरों के विरूद्ध चलाये गये अभियान में अब तक  लगभग 4.62 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थ जब्त किये गये।

प्रवक्ता ने बताया कि “एफ0डी0ए0 आपके द्वार´´ के तहत अब तक कुल 3817 घरों में दूध एवं खाद्य पदाथोंZ के नमूनों का परीक्षण किया गया जिसमें अभी तक 17 नमूनों में मिलावट पायी गई। इस अभियान के तहत आज 05 जनपदों-सोनभद्र, मिर्जापुर, सन्त रविदास नगर, गोरखपुर एवं सिद्धार्थनगर के 63 घरों के दूध एवं खाद्य पदार्थों के नमूनों को परीक्षण किया गया जिसमें कोई मिलावट नहीं पायी गई। प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में कहीं भी खाद्य पदार्थों एवं औशधियों में मिलावट करने के विरूद्ध अपनी िशकायत/सुझाव टोल फ्री नम्बर 18001805533 पर दर्ज करा सकते हैं। िशकायतों की जांच विभाग द्वारा तत्काल की जायेगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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डा0 अम्बेडकर ग्रामों के चयन के लिए पूर्व में जारी शासनादेश में आंिशक संशोधन

Posted on 24 February 2011 by admin

प्रदेश सरकार द्वारा वशZ 2011-12 हेतु डा0 अम्बेडकर ग्रामों के चयन एवं कार्ययोजना के सम्बंध में गत 17 जनवरी को जारी शासनादेश में आंिशक संशोधन किया गया है।

यह जानकारी प्रमुख सचिव अम्बेडकर ग्राम श्री बलविन्दर कुमार द्वारा दी गई है। उनके द्वारा समस्त सम्बंधित विभागों के प्रमुख सचिवों तथा मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को भेजे गये परिपत्र में निर्देश दिये गये हैं कि वशZ 2011-12 में डा0 अम्बेडकर ग्रामों का चयन वशZ 2001 की जनगणना के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति/जनजाति की आबादी वाले ग्रामों को अनुसूचित जाति/जनजाति की जनसंख्या के अवरोही क्रम में क्रमबद्ध करते हुए जनपदों को आनुपातिक रूप से आवंटित ग्रामों का चयन किया जाय। यह भी निर्देश दिये गये हैं कि ग्रामों के चयन में इस बात का ध्यान रखा जाय कि उस ग्राम की कुल आबादी 250 से कम न हो।

श्री बलविन्दर कुमार ने कहा है कि संशोधित सूची विभागीय वेबसाइट hittp://agvv.up.nic.in पर उपलब्ध है उसका भलीभान्ति परीक्षण कर यह देख लिया जाय कि चिन्हाकित ग्रामों में से कोई ग्राम शहरी क्षेत्र की सीमा के अन्दर तो नहीं आ गया है अथवा पूर्व वशोZं में सन्तृप्त तो नहीं किया जा चुका है या किसी कारणवश असाध्य घोशित किया जाना है। ऐसे ग्रामों की सूचना एक सप्ताह के अन्दर शासन को उपलब्ध कराई जाय।

प्रमुख सचिव अम्बेडकर ग्राम ने निर्देश दिये हैं कि चयनित डा0 अम्बेडकर ग्रामों में संचालित कार्यक्रमों की कार्ययोजना 15 मार्च तक विभागीय ई-मेल agvvlko@yahoo.com पर उपलब्ध करा दी जाय।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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उत्तरप्रदेश में आर आई एन एल-आर डी एस (ग्रामीण डीलरशिप योजना) का शुभारंभ

Posted on 24 February 2011 by admin

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र (आर आई एन एल-वी एस पी), जो भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधीन एक अग्रणी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम, ‘वाइजाग स्टील’ के रूप में प्रसिद्ध ‘नवरत्न’ कंपनी है, देश में आधुनिक प्रौद्योगिकी वाला पहला तटीय समग्र इस्पात संयंत्र है|

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र 3 मिलियन टन द्रव इस्पात की वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ करीबन 11,000 करोड़ का कारोबार करते हुए टी एम टी सरिया, वॉयर रॉड, राउण्ड, स्ट्रक्चरल, स्क्वेयर आदि जैसे विविध श्रेणियों के लंबे उत्पादों का उत्पादन करता है, जिन्हें मूलसंरचना परियोजनाओं एवं आम जनता की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु व्यापक रूप से प्रयोग में लाया जाता है|

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र नई प्रौद्योगिकी को अपनाने हेतु जाना जाता है और यह देश में ऐसा पहला संयंत्र है, जहाँ 100% सतत ढलाई प्रौद्योगिकी, 3200 घनमीटर वाली बृहद धमन भट्ठियाँ, कोक शुष्क शीतलन से लैस ऊँचे कोक ओवेन, विश्व में सर्वश्रेष्ठ ‘स्टेलमोर व टेंपकोर’ प्रक्रियाओं से युक्त रोलिंग मिल्स, वर्तमान 3 मिलियन टन हेतु व्यर्थ ऊष्मा से 40 मेगावॉट का उच्चतम विद्युत उत्पादन, जो विस्तारीकरण पश्चात 90 मेगावॉट तक बढ़ेगा, आदि सुविधाएँ मौजूद हैं|

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र अपने गुणवत्तापूर्ण इस्पात एवं उपयुक्त आकार तथा आंतरिक कुशलताओं के साथ विशेष श्रेणी के इस्पात का उत्पादन कर रहा है, और इससे कुल उत्पादन के 78% तक राष्ट्रीय महत्व, अर्थात मेट्रो, भारतीय रेलवे, विद्युत क्षेत्र, न्यूक्लियर कांप्लेक्स तथा अन्य कई परियोजनाओं के लिए विशेष श्रेणी इस्पात की आवश्यकता की पूर्ति होती है|

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड अभी 12,500 करोड़ रुपये की लागत पर अपनी उत्पादन क्षमता को 6.3 मिलियन टन प्रति वर्ष तक दुगुना कर रहा है, जो 2011-12 तक प्रचालित होगा| राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड ने उच्च गुणवत्तापूर्ण शुद्ध इस्पात के उत्पादन हेतु फिर एक बार तीव्र गति वाली वॉयर रॉड मिल, इस्पात गलन शाला में आर एच डीगैसर व इलेक्ट्रो मेग्नेटिक स्टिर्रर जैसी अद्यतन प्रौद्योगिकी को अपनाया|

प्रमुख कच्चे माल की संरक्षा की दिशा में ईस्टर्न इन्वेस्टमेंट लिमिटेड में, जिनके पास उड़ीसा खनिज विकास निगम (ओ एम डी सी) और बिसरा स्टोन लाइम कंपनी (बी एस एल सी) जैसी सहायक कंपनियाँ हैं, 51% हिस्से का अधिग्रहण किया|

फिलहाल, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र का व्यापक विपणन वितरण नेटवर्क है, जिसमें देश भर में व्याप्त पाँच क्षेत्रीय कार्यालय, 23 शाखा बिक्री कार्यालय व स्टॉकयार्ड, 4 परेषण बिक्री अभिकर्ता और 120 जिला स्तरीय डीलर शामिल हैं|

उत्तरप्रदेश में आर आई एन एल-आर डी एस (ग्रामीण डीलरशिप योजना) का शुभारंभ

राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र देश के सुदूर प्रदेशों में पहुँचकर वास्तविक प्रयोक्ताओं को वाइजाग स्टील उपलब्ध कराने हेतु सभी संभावित प्रयास कर रहा है| इस प्रयास में, ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण इस्पात उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई ग्रामीण डीलरशिप योजना (आर आई एन एल-आर डी एस) का शुभारंभ किया जा रहा है|

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री प्रदीप कुमार बिश्नोई औपचारिक रूप से उत्तर प्रदेश में इस योजना का शुभारंभ करेंगे और लाभार्थियों को ‘ग्रामीण डीलरशिप योजना का पंजीकरण प्रमाणपत्र’ प्रदान करेंगे|

आर आई एन एल-आर डी एस की प्रमुख विशेषताएँ :

निदेशक (वाणिज्य) श्री तपन कुमार चाँद ने इस योजना की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘आर आई एन एल-आर डी एस ग्रामीण डीलरों के पंजीकरण हेतु अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़े वर्ग/महिला एवं अल्पसंख्यकों को प्रोत्साहित करनेवाली एक उच्चतम व्यापक योजना है|’ आवेदक को डीलरशिप लेने हेतु अपनी वित्तीय क्षमता की पुष्टि में सिर्फ एक शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा| यह योजना मौजूदा खुदरे व्यापारियों, परेषण अभिकर्ताओं, जिला स्तरीय डीलरों (डी एल डी) को छोड़कर सबके लिए लागू है| राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड/विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र, इस्पात पर 1,000/- रुपये प्रति मेट्रिक टन का मार्जिन रखते हुए कंपनी द्वारा निर्धारित सिफारिश किए गए अधिकतम खुदरे दर (एम आर आर पी) पर अथवा उससे कम दर पर, जैसे डीलरों को उपलब्ध किया जाता हो, वैसे ही ग्रामीण ग्राहकों को इस्पात उत्पादों की आपूर्ति को सुनिश्चित करता है| इस्पात की आपूर्ति नि:शुल्क परिवहन के आधार पर की जाएगी| ग्रामीण डीलरों के पंजीकरण की अवधि 2 वर्ष की है, जो आपसी समझौते के आधार पर नवीकृत किया जा सकता है| ग्रामीण डीलरों के रूप में पंजीकरण हेतु प्रतिभूति जमा का कोई प्रावधान नहीं है|

ग्रामीण डीलरों का देश के विविध जिलों के प्रदेशों में मंडल स्तर एवं पंचायत स्तर पर पंजीकरण किया जाता है|

ग्रामीण डीलरशिप योजना के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में विपणन हेतु ग्रामीण डीलरों को राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड/विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र द्वारा उत्पादित एफ ई 500 और एफ ई 550 श्रेणियों के श्रेष्ठ गुणवत्ता युक्त टी एम टी सरिया उपलब्ध किये जाते हैं|

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के कानपुर एवं गाजियाबाद स्थित शाखा बिक्री कार्यालय राज्य में पहले नियुक्त जिला स्तरीय डीलरों के अतिरिक्त इस योजना के अधीन 200 ग्रामीण डीलरों से अधिक डीलरों का पंजीकरण करेंगे| राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड ग्रामीण डीलरशिप योजना और जिला स्तरीय डीलरों के अधीन शामिल प्रदेशों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, सामुदायिक विकास आदि क्षेत्रों में निगमित सामाजिक दायित्व (सी एस आर) से संबंधित विविध कार्य करने की योजना बना रहा है| आर आई एन एल-आर डी एस योजना के शुभारंभ के अवसर पर, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री प्रदीप कुमार बिश्नोई ने गरीब विद्यार्थियों को ‘अध्ययन सामग्री’ वितरित की और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड द्वारा 5 छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी की घोषणा की| राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, इन छात्राओं को मेट्रिक्युलेशन की परीक्षा में उत्तीर्ण होने तक सभी प्रकार के खर्चे का वहन करेगा| निदेशक (वाणिज्य) श्री तपन कुमार चाँद ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड सशक्त ग्रामीण डीलरों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस्पात उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा और युवा उद्यमों को आगे बढ़कर डीलरों के रूप में पंजीकरण करने हेतु आमंत्रित किया| राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री प्रदीप कुमार बिश्नोई ने यह भी सूचित किया कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘ऑपरेशन ज्योति’ (मोतियाबिंद से राहत) की शुरुआत जैसे अधिकाधिक निगमित सामाजिक दायित्व कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहा है|

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निराश करता नरेश

Posted on 24 February 2011 by admin

आशावादी देश निराशावादी नरेश कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहा है अपना भारत देश। ´´गुण सागर नागर नर जोऊ-अल्प लोभ भल कह न कोऊ´´ अर्थात व्यक्ति चाहे गुणों का सागर हो और अत्यन्त बुद्धिमान चतुर ही क्यों न हो थोड़े से लोभ के कारण उसे कोई भला नही कहता है। यह शाश्वत सत्य कहावत और भारत के खुद के लिये ईमानदार कहे जाने वाले मा0 प्रधानमन्त्री डा0 मनमोहन सिंह पर फिट बैठती है। यह चौपाइ्रZ महान सन्त पूज्य गुरूदेव गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस में लिखी है। दि0 16 फरवरी दिन बुधवार को देश की राजधानी नई दिल्ली मा0 प्रधानमन्त्री ने मीडिया से रूबरू होकर टी0वी0 चैनलों के सम्पादकों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मीडिया के लिये मेरा विशेष सन्देश यह है कि वे नकारात्मक मुद्दों पर ज्यादा फोकस न करे,ं मैं प्रधानमन्त्री का पद त्यागने वाला नहीं हंू, भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जायेगा, हम गठबंधन सरकार चला रहे हैं और गठबंधन की कुछ मजबूरियां होती हैं आदि अनेक स्पष्ट प्रश्नों का गोल मोल अस्पष्ट जवाब दिया। याद दिलाते चलें इसके पूर्व प्रधानमन्त्री जी ने संसद के शीतकालीन सत्र की समाप्ति के दो दिन पूर्व विदेश जाते समय हवाई जहाज में पे्रस के बंधुओं से वार्ता की थी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि विपक्ष की जे0पी0सी0 की मांग अनुचित है और जे0पी0सी0 गठित नहीं की जायेगी। हवाई जहाज में हुई पे्रस से बातचीत को कल उन्होंने जे0पी0सी0 की मांग मानकर खुद ही अपनी बात से पलटकर अपनी कमजोरी को साबित किया है। उस बात को अगर अब हवा हवाई बात कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा। जग जाहिर है कि आपको श्रीमती सोनिया गांधी ने प्रधानमन्त्री चुना है किसी चुनाव में जनता ने नहीं चुना है। कांग्रेसी लीला में श्रीमती गांधी ही सब कुछ तय करती है वह सर्वशक्तिमान है आपको उनकी ही बात को मानना, बोलना व स्वीकारना पड़ता है। जैसे हमारे देश में हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत के त्यौहार के रूप में दशहरा, दीपावली, होली और गांव-गांव में रामलीला का आयोजन होता है। रामलीला का आयोजन कराने वाले अच्छे-अच्छे कलाकारों को अभिनय हेतु बुलाते हैं उनका अभिनय देखने के लिये भारी भीड़ जुटती है, कलाकारों को डायलाग लिखकर दिये जाते हैं जिन्हें वह बोलते हैं। स्टेज पर पर्दे के पीछे प्रमुख कर्ता धर्ता रहता है ताकि बताए गए डायलाग बोलने में कलाकार से कहीं चूक न होने पाये इसलिए पर्दे के पीछे से पहले डायलाग बोला जाता है फिर मंच पर बोला जाता है। यही स्थिति कांग्रेसी लीला में गांधी परिवार को छोड़कर लगभग शेष सभी की है। आपको मैडम ने चुना इसीलिए आपने सदा ईमानदारी पूर्वक मैडम को सुना। आपका पूरा-पूरा लाभ कांग्रेसी उठा रहे हैं। बुराड़ी में आयोजित कांग्रेस के महाधिवेशन में श्रीमती गांधी ने डा0 सिंह को एक गरिमामय, कर्तव्यनिष्ठ, क्षमतावान बताकर उनके हटने हटाने के कयासों पर विराम लगा दिया था। घपलों, घोटालों के लगातार सामने आने और उनमें आपके मन्त्रियों, मुख्यमन्त्रियों के नाम होने से पूरी कांग्रेस सहित आपकी हालत भी पतली है। भ्रष्टाचार के उभरते मामलों को न रोक पाने के कारण राजनीतिक अनिश्चितता सरकार की लाचार छवि के कारण बनी है। जाहिर है कि जब तक यह सरकार रहेगी तब तक गठबंधन की मजबूरी बनी ही रहेगी ओैर सत्ता का पावर हाउस श्रीमती गांधी ही रहेंगी। भ्रष्टाचारियों पर सरकार के प्रहार की फिक्स मैच जैसी कार्रवाई की गूंज सुनाई पड़ती रहेगी। गठबंधन को मजबूरी बताने वाले प्रधानमन्त्री को यदि कोई निराश करने वाला नरेश कह रहा है तो उसे गलत कैसे कहा जा सकता है। जहां वाणी में सामर्थ न हो और शब्दों का कोई अर्थ न हो वहां स्थिति चिन्ताजनक बनी रहती है। वर्तमान यूपीए सरकार हर मुद्दे के लिये बहाने ढूढने और दोष किसी और के ऊपर मढ़ने के मूढ में काम  कर रही है। सात साल से जो व्यक्ति देश का प्रधानमन्त्री हो और सुधार कुछ न हो तो उन्हें क्या कहा जायेगा। एक अमरीकन एजेन्सी के अनुसार अभी भी प्रतिवर्ष काले धन के रूप में एक लाख पैतीस हजार करोड़ रू0 से अधिक का धन विदेशों में जमा हो रहा है। जन साधारण के खून पसीने की कमाई बुरी तरह लुट रही है। सरकारी योजनाओं पर खरबों रू0 का व्यय भ्रष्टाचार के कारण अपव्यय हो रहा है। भ्रष्टाचार जब शीर्ष स्तर पर हो तो नीचे के स्तर पर होगा ही। दागदार अतीत के अधिकारी की नियुक्ति मुख्य सर्तकता आयुक्त के पद पर करना, बोफोर्स तोप सौदे में करोड़ों डकारने वाले क्वात्रोची के बैंक खातों पर लगी रोक को विदेश भेजकर सीबीआई से हटवाना, जमा धन को निकालने देना, भ्रष्टाचारी मन्त्रियों का बचाव करने से आपकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पर प्रश्न चिन्ह लगना स्वाभाविक है। वैसे आपने अपनी मजबूती का परिचय हैदराबाद में न्यायपालिका को अपनी हद में रहे, मीडिया घपले, घोटालों को ही न छाप,े विपक्षी दल सरकार से दुश्मनी मानता है तथा प्रधानमन्त्री पद से इस्तीफा नहीं दूंगा कहकर दिया है। मुक्त पुरूष संसार में कैसे रहते हैं जैसे आंधी से उड़ी हुई पत्तल उसकी अपनी इच्छा या अभिमान नहीं रहता हवा उसको जिस ओर उड़ा ले जाती है वह उसी ओर चली जाती है, कभी कुड़े के ढेर के तो कभी अच्छी जगह पर। दूसरा उदाहरण जहाज किसी भी दिशा में क्यों न जाए कम्पास (दिग्दर्शक यन्त्र) की सुई उत्तर दिशा ही दिखाती है इस कारण जहाज को दिशा भ्रम नहीं होता। सत्ता की आंधी हो या भ्रष्टाचार का तूफान उठा हो अथवा पूरा देश सरकार पर आरोप लगा रहा हो आपको कम्पास की उत्तर दिशा की तरह (10 जनपथ) ही दिखाई देता है। चाहे आन्तरिक एवं बाह्य सुरक्षा, कश्मीर में अलगाववादियों की हरकतें, बढ़ता हुआ नक्सलवाद और माओवाद, कमरतोड़ महंगाई, अराजकता, बेरोजगारी, गरीबी, राष्ट्र भाषा और राष्ट्र ध्वज का अपमान हो आप उसको न रोक पाने में गठबंधन की मजबूरी ही बतायेंगे। भारत में त्याग और सेवा की सत्ता का ही सम्मान रहा है अन्य सत्ता पतझड़ के पत्तों की भान्ति आती जाती रहती हैं उनकी गणना भारतीय जनमानस ने कभी नहीं की, ´´जथा गगन घन पट निहारी-झापहूं भानु कहहि कुबिचारी´´ अर्थात आकाश में बादलों को छाया देखकर अज्ञानी लोग यह समझते हैं कि बादलों ने सूर्य का ढक लिया है। आकाश जैसे निर्मल और निर्लेप है उसको कोई मलिन या स्पर्श नहीं कर सकता उसी प्रकार मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के द्वारा स्थापित भारत की सत्य सत्ता भी नित्य निर्मल और निर्लेप है उसको कोई सरकार मिटा नहीं सकती। जो सनातन नहीं झुका रावण और कंस के अत्याचारों से- वह क्या झूकेगा इन लंगड़ी लूली गठबंधन सरकारों से। जो कहते थे दुनिया को खाक कर देंगे जहां दफन हैं हमने वो जमीं देखी है। सच कहते हैं हमने जिन्दगी देखी है

नरेन्द्र सिंह राणा
(मो0 9415013300)
लेखक-   उ0प्र0 भाजपा के मीडिया प्रभारी हैं।
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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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व्यापारी स्वाभिमान चेतना यात्रा

Posted on 24 February 2011 by admin

भारतीय जनता पार्टी व्यापार प्रकोष्ठ द्वारा निकाली जा रही ´व्यापारी स्वाभिमान चेतना यात्रा´ का उद्घाटन आज सहारनपुर जनपद के मॉं शाकुम्बरा देवी धाम से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं हिमांचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी सांसद कलराज मिश्र ने किया। यात्रा 23 फरवरी से 9 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों से होकर जायेगी। प्रदेश मीडिया प्रभारी नरेन्द्र सिंह राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा में जलता प्रदेश, चौपट व्यापार, जंगलराज, जुल्म, घोटाले, मंहगाई, भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दे होंगे। यात्रा का नेतृत्व प्रदेश संयोजक अशोक गोयल कर रहे हैं। उद्घाटन के अवसर पर व्यापार प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक श्यामबिहारी मिश्रा, कार्यालय सचिव गोपाल सिंह सहित पार्टी के स्थानीय प्रमुख नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे। मॉं के धाम से सहारनपुर तक यात्रा का भव्य स्वागत हुआ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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घबड़ायें व हड़बड़ायें नहीं, परीक्षा भवन में!

Posted on 24 February 2011 by admin

new-hoपरीक्षा भवन उस इमारत का नाम है जहां आपके सपनों की आधारशिला रखी जाती है। अत: परीक्षा भवन का जीवन में वह स्थान है जो अन्य किसी का नही है। इस इमारत में अच्छे-अच्छे छात्रों को पसीना आ जाता है जो छात्र अपने को सभांल ले जाते हैं, अपना आत्मविश्वास बनाये रखते हैं, हडबड़ाते नहीं है, उनकी नींव अच्छी तैयार हो जाती है और फिर उस पर खड़ी होती है गगनचुम्बी इमारत! जिस पर खड़े होकर आप सफलता की पताका फहराते हैं और कहलाये जाते हैं सफल व्यक्ति! सफल व्यक्ति कहलाने के लिए आवश्यक है कि परीक्षा भवन में अपना धैर्य बनाये रखें, हड़बड़ायें नहीं क्योंकि हड़बड़ में गड़बड़ होती है यदि आप परीक्षा में अंको की गड़बड़ाहट से बचना चाहते हैं तो फिर आप परीक्षा भवन में हड़बड़ाये नहीं बल्कि पूरे विश्वास के साथ परीक्षा दे परीक्षा भवन में अपना आत्मविश्वास बनाये रखें फिर आप देखेंगे कि परीक्षा की कसौटी में खरा उतरते हुए आप उच्च अंको के साथ परीक्षा उत्तीर्ण करेंगे इसके लिए केवल आपको इन बिन्दुओं पर अमल करना है।

परीक्षा भवन में उपयोग में आने वाली सामग्री पहले ही रख लें : परीक्षा भवन में परीक्षा देते समय आपको किन उपयोगी वस्तुओं की आवश्यकता होगी इसका प्रबन्ध परीक्षा समय से 12 घंटे पहले ही कर लें। जैसे पेन, रबर, स्केल, ज्योमेट्री बाक्स, नीली स्याही का पेन, काली स्याही का पेन, प्रवेश पत्र आदि पहले ही व्यवस्थित कर रख लें वरना चलते समय अगर आप कुछ भूल गये तो फिर आपका हड़बड़ा जाना स्वाभाविक ही है।

परीक्षा समय से पहले ही परीक्षा भवन पहुंच जायें : परीक्षा समय से पहले ही परीक्षा भवन पहुंचना हमेशा उपयोगी होता है। कभी-कभी परीक्षा रूम व आपका परीक्षा स्थान भी बदल दिया जाता है ऐसी स्थिति में ऐन वक्त पर आपका परीक्षा भवन पहुंचना हड़बड़ाहट का कारण बन सकता है। अत: परीक्षा भवन पहुंचकर सुनिश्चित कर लें कि आपका परीक्षा रूम या परीक्षा टेबिल तो नहीं बदल दी गई है। यदि बदल गई है तो आप हड़बड़ायें नहीं क्योंकि आपके पास पर्याप्त समय है जाकर अपना कमरा व सीट देख लें।

अपनी परीक्षा टेबिल व कुर्सी को चेक कर लें : अपनी परीक्षा टेबिल को भली-भांति चेक कर लें और सुनिश्चित कर लें कि कोई उल्टा सीधा कागज तो टेबिल के आसपास नहीं है, यदि ऐसा है तो तुरन्त कक्ष निरीक्षक महोदय को सूचित करें अन्यथा यह गैर उपयोगी व अनावश्यक कागज ही आपको मुसीबत में डाल सकता है। कुर्सी को भी चेक कर लें, कहीं कुर्सी गन्दी या टूटी फूटी तो नहीं है, यदि ऐसा कुछ है तो नि:संकोच कक्ष निरीक्षक महोदय को सूचित कर तुरन्त कुर्सी बदलवादें।

परीक्षा भवन में अनावश्यक वस्तु कदापि न ले जायें : परीक्षा भवन में केवल वही वस्तुयें लेकर जायें जिनकी परीक्षा समय में आपको आवश्यकता है। अनावश्यक वस्तु उस समय आपको अनावश्यक रूप से परेशान कर सकती है और यदि गलती से कोई कागज का टुकड़ा आदि है तो वह आपको मुसीबत में डाल सकता है।

नकल करना तो दूर उसके बारे में सोचें भी नहीं : नासमझ लोगों का कहना है कि नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत होती है। मैं कहता हूं नकल वह छात्र करते हैं जिनके पास अक्ल नहीं होती है। अगर इन गैर समझदार लोगों की बात मान भी लें तो भी नकल से गिरते पड़ते परीक्षा तो उत्तीर्ण की जा सकती है किन्तु उच्च अंक प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं और आज के प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में गिरते पड़ते अंको के परीक्षा उत्तीर्ण करने से अनुत्तीर्ण होना ही श्रेयस्कर है इसलिए नकल करने के बारे में कदापि न सोचें, ईश्वर पर व अपने परिश्रम पर भरोसा करें।

आत्मविश्वास बनाये रखें : आप परीक्षा भवन में बैठे हैं किसी हवालात में नहीं! आपके समक्ष कक्ष निरीक्षक है जो आपके गुरू है कोई पुलिस का दरोगा नहीं तो घबराहट व हड़बड़ाने की क्या आवश्यकता हैर्षोर्षो अत: अपना आत्मविश्वास बनाये रखें, ईश्वर का स्मरण करें और पूरी तन्मयता से परीक्षा दें।

कापी पेपर मिलते ही चेक कर लें : कापी मिलते ही एक बार पलट कर अवश्य देख लें, कहीं ऐसा तो नहीं है कि कापी के बीच में कोई पन्ना फटा हुआ या बिना लाइन का तो नहीं है। कभी-कभी प्रिटिंग की गलती से ऐसा हो जाता है। यदि ऐसा है तो तुरन्त कक्ष निरीक्षक महोदय को कापी दिखाकर कापी बदल लें। पेपर को मिलते ही ईश्वर का स्मरण अवश्य करें, पेपर को भी एक बार गौर से देख लें कहीं मिसप्रिंट या कटा-फटा तो नहीं है, यह सब चेक करने के बाद ही कापी पर अपना रोल नं0 लिखें।

सर्वप्रथम कापी पर अपना रोल नम्बर आदि लिखें : प्रश्नों का उत्तर लिखने से पहले कापी के निर्धारित स्थान पर रोल नं0 व अन्य विवरण पूर्ण रूप से लिखें, तब प्रश्नों का उत्तर लिखना प्रारम्भ करें। कापी पर बांयी ओर खाली स्थान अवश्य छोड़ें, बीच में कोई भी पेज खाली न छोड़े। यदि रफ कार्य हेतु आपको जगह की आवश्यकता है तो रफ कार्य हमेशा बांये पेज पर ही करें और उसके ऊपर मोटा-मोटा रफ कार्य अवश्य लिख दें।

प्रश्नों के उत्तर देने की कला सीखें : प्रश्नों का उत्तर तो सभी छात्र देते हैं लेकिन उच्च अंक वही छात्र अर्जित करते हैं जो छात्र प्रश्नोत्तर की कला में निपुण होते हैं। अत: प्रश्नों के उत्तर देने की कला सीखें। उत्तर लिखना भी एक कला है कि आप उत्तर को कितनी खूबसूरती व अच्छी तरह से परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करते हैं इसके लिए आपकेा कापी पर बांयी तरफ खाली स्थान के साथ उत्तर में महत्वपूर्ण लाइनों को या तो अण्डरलाइन करना है या फिर काली स्याही से लिखना है, जिससे परीक्षक की निगाह बरबस ही उन महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चली जाये।

प्रश्नों को उनके अंको के अनुसार ही समय दें : परीक्षा भवन में अगर सबसे कीमती कोई है तो वह है समय! इसका अवश्य ध्यान रखें। प्रश्नों का उत्तर उनकी हैसियत के अनुसार ही दें अर्थात कम अंक वाले प्रश्नों को कम समय व अधिक अंक वालें प्रश्नों को अधिक समय दें। कहीं ऐसा न हो कि कम अंक वाले प्रश्न के उत्तर में ही आप समय व्यतीत कर दें और अधिक अंक वाले प्रश्नों के उत्तर के लिए समय ही न बचे। अत: समय के बंटवारे में ध्यान रखना अतिआवश्यक है। समय के बंटवारे में आप कितने निपुण हैं परीक्षाफल आते ही स्पष्ट हो जायेगा।

राइटिंग अच्छी व साफ सुथरी रखें : राइटिंग का अच्छे अंको पर विशेष प्रभाव पड़ता है यदि आपकी राइटिंग अच्छी है और आपके उत्तर उच्च अंको के नहीं है तो भी आप परीक्षक की प्रशंसा के पात्र बनेंगे और परीक्षक द्वारा दी गई यह प्रशंसा ही आपको उच्च अंको के द्वार पर ले जायेगी। दूसरी ओर यदि आपकी राइटिंग खराब है और उत्तर उच्च कोटि के हैं तब आपकी राइटिंग देखकर परीक्षक की नाक भौं सिकुड़ जायेगी और परीक्षक की नाक भौं का सिकुड़ना आपके हित में नहीं होगा। अत: राइटिंग का परीक्षा में विशेष महत्व है इस बात को गांठ बांध लें और परीक्षा में इसका विशेष ध्यान रखें।
एक प्रश्न के उत्तर देने के बाद थोड़ी जगह अवश्य छोड़े : एक प्रश्न का उत्तर देने के बाद दूसरे प्रश्न का उत्तर प्रारम्भ करने के पूर्व थोड़ी जगह बीच में अवश्य छोड़े, साथ ही इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि किन लाइनों को मोटे अक्षरों में लिखना है और किनको छोटे अक्षरों में।

न तो कोई प्रश्न छोड़े और न ही अनावश्यक प्रश्न का उत्तर दें : जितना पूछा गया है वही उत्तर दें, न तो अधिक प्रश्नों का उत्तर दें न ही कम प्रश्नों का। परीक्षा समय समाप्ति से 15 मिनट पूर्व ही अपने कार्य पूरा कर लें और इन 15 मिनटों का उपयोग अपने प्रश्नों के उत्तर को देखने व पढ़ने में लगा दें। इससे आपको छोटी-मोटी हुई गलतियों को सुधारने का मौका मिल जायेगा। इससे निश्चित रूप से आपके अंको में वृद्धि होगी।

अच्छी तरह याद प्रश्नों का उत्तर पहले दें : जिन प्रश्नों का उत्तर आप सर्वश्रेष्ठ ढंग से दे सकते हैं, पहले उन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें। इससे दो लाभ होंगे एक तो आपके ऊपर से काम का बोझ कम होगा, आप प्रसन्नचित होंगे, साथ ही परीक्षक पर अच्छे उत्तर का प्रभाव भी जमेगा जो आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
प्रश्नों का उत्तर देते समय प्रश्न संख्या अवश्य डालें : आप जिस प्रश्न का भी उत्तर लिख रहे हों, उसी प्रश्न के उत्तर नं0 अवश्य डालें जिससे परीक्षक को आपके उत्तर देखने में आसानी हो। परीक्षक को हुई आसानी आपके लिए रास्ता आसान बना सकती है।

अनिवार्य प्रश्नों का उत्तर अवश्य दें : प्रश्नपत्र में कुछ प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य होता है। अत: ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना न भूलें, याद रखें अनिवार्य प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य ही होता है तभी आप उच्च अंको के साथ परीक्षा उत्तीर्ण कर सकते हैं।

`बी´ कापी को `ए´ कापी के साथ मजबूती से बांधे : परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए आवश्यक है अधिक लिखना। अत: `बी´ व `सी´ कापी की आवश्यकता तो अवश्य पड़ेगी। अत: `बी´ व `सी´ कापी अवश्य लिखें, याद रखें कि `बी´ व `सी´ कापी को `ए´ कापी के साथ `नथ्थी´ अवश्य कर दें अर्थात अच्छी तरह बांध दे साथ ही `बी´ व `सी´ कापी पर भी अपना रोल नं0 अवश्य डाल दें।

परीक्षा भवन में रूमाल व पानी की बोतल अवश्य ले जायें : परीक्षा भवन में एक रूमाल अवश्य रखें व पानी की बोतल भी उपयोगी है। अधिकांस देखा गया है कि परीक्षा रूम में प्यास लगती है और बाहर जाने पर समय बबाZद होता है। अत: समय की बचत के लिए पीने हेतु पानी व हाथ मुंह पोछने हेतु रूमाल अवश्य रखें। इससे आपके समय की बचत होगी और समय के बचत का अर्थ है आपके अंको की बढ़ोत्तरी।

यह बातें देखने में भले ही आपको छोटी लग रही होगी किन्तु यह छोटी-छोटी बातें ही आपकेा दिलायेंगी बड़ी सफलता। यदि आप बड़ी सफलता प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं कि आप परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करें तो परीक्षा भवन व परीक्षा समय में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान अवश्य रखें। सच मानिये! आप परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करेंगे।

“छोटी-छोटी बातों से ही हमारी योग्यता की परीक्षा होती है´´– महात्मा गांधी

पण्डित हरि ओम शर्मा `हरि´
12 स्टेशन रोड, लखनऊ।
मोबाइल : 9415015045, 9839012365
ईमेल : hosharma12@rediffmail.com

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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हाल ही में प्रकाशित चर्चित पुस्तक “जड़, जमीन, जहान´´ की समीक्षा

Posted on 24 February 2011 by admin

book_jad-jameen-jahanजहान की बुलिन्दयों पर पहुंचने को प्रेरित करती है पुस्तक `जड़, जमीन, जहान´

प्रख्यात साहित्यकार पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ द्वारा लिखित पुस्तक `जड़, जमीन, जहान´ का विमोचन अभी हाल ही में लखनऊ
हिन्दी साहित्य जगत में वैसे तो कहानियों की पुस्तकों की भरमार है परन्तु आज के वर्तमान परिवेश में सामाजिक व्यवस्था को जोड़े रखने व मजबूती प्रदान करने हेतु जिस लेखन की आवश्यकता है, उस पर पुस्तक `जड़, जमीन, जहान´ खरी उतरती है। इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि आजकल प्रकाशित होने वाली तमाम कहानियां जहां भौतिकतावादी पृष्ठभूमि लिए लेखक की कपोल कल्पना पर आधारित होती हैं, वहीं पं. शर्मा की कहानियां यथार्थ के धरातल से पाठकों को रूबरू कराती है। पं. शर्मा की कहानियां जहां पाठकों को हंसाती है, गुदगुदाती हैं तो वहीं आवश्यकतानुसार संवाद की कठोरता पाठक को झिड़कती भी महसूस होती है जो यह सोचने पर मजबूर करती है कि संस्कारों व जीवन मूल्यों के अभाव में हम किधर जा रहे हैं। दरअसल 176 पृष्ठों में सिमटी पं. शर्मा की 33 कहानियां में ग्रामीण व शहरी संस्कृति के अनूठे रंग समाये हैं जो पाठकों को बरबस ही आकषिZत करते हैं। यह कहना अनुचित न होगा कि साहित्यजगत की अनुपम कृति पुस्तक `जड़, जमीन, जहान´ अपने लालित्य, सरल-सहज भाषा, पारिवारिक व सामाजिक परिवेश का यथार्थ शब्द-चित्रण व आकर्षक साज-सज्जा से जहां बरबस ही पाठकों के दिल को छू जाती है तो वहीं दूसरी ओर पुस्तक की विषय वस्तु पाठकों के `अन्तरमन´ को झकझोरती है।

खास बात यह है कि पुस्तक का नाम `जड़, जमीन, जहान´ अपने आप में तमाम विशेषताएं समेटे हुए है। पुस्तक की शुरुआत में ही पाठकों से अपनी बात कहते हुए पं. शर्मा लिखते हैं कि “`जड़, जमीन और जहान´, यह मात्र तीन शब्द ही नहीं हैं अपितु इन तीन शब्दों में हमारी तीन पीढ़ियों की दास्तान के साथ हमारा पूरा जीवन, हमारी अपेक्षाएं, हमारी सफलता, हमारी असफलता, हमारी औलाद, हमारी औलाद के संस्कार, हमारी मंजिल, हमारा भूत, हमारा वर्तमान व हमारा भविष्य निहित है। जो भी इन्सान जहान तक पहुंचे हैं, जिन इन्सानों ने ऊंचाइयों को छुआ है, अपनी मंजिल प्राप्त कर जहान में अपनी सफलता का परचम लहराया है, उन इन्सानों ने अपनी जड़ को अहमियत दी है, जड़ के महत्व को समझा है। ऊंचाइयों पर कितने भी पहुंच गये हों, मगर उन्होंने अपनी जमीन को मजबूती से पकड़ा है, अपनी जड़ों को सींचा है, संवारा है, उनमें खाद-पानी दिया है, तभी उनका जीवनरूपी वृक्ष हरा-भरा व फलों से लबालब रहा है।´´

पूरी पुस्तक में लेखक ने कठिन शब्दों से बचने का भरपूर प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में उन शब्दों का प्रयोग किया गया है जो बहुतायत से आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग होते रहते हैं और मध्यमवर्गीय किशोरों व युवाओं को आसानी से समझ में आने वाले हैं। इस पुस्तक का मुख्य आकर्षण व वृहद उद्देश्य बच्चों, किशारों व युवाओं का `चरित्र निर्माण´ ही है किन्तु खास बात यह है कि सामाजिक व पारिवारिक जीवन का शायद ही कोई ऐसा पहलू हो जो लेखक की लेखनी से अछूता रहा हो। प्राय: सभी पारिवारिक विषयों पर लेखक ने निर्विवाध रूप से अपनी लेखनी चलाई है। पुस्तक में प्रस्तुत कहानियों के कुछ शीर्षक देखने लायक है जो अपने आप में ही पुस्तक के नाम को ही सार्थकता प्रदान करते हैं यथा औलाद का सुख, बेटी का बाप, बुढ़ापा, गोबर-गनेश, करोड़पति भिखारी, सूनी सड़क, नानी मां, सरकारी मुलाजिम, धार्मिक कौन, कलयुगी कौन, बुजुर्ग भगवान, मेरी मां, लव मैरिज, सम्पत्ति की सीमा एवं औरत आदि आदि।

जहां तक पुस्तक की साज-सज्जा व पृष्ठ संख्या का प्रश्न है तो इस मामले में भी पुस्तक कसौटी पर खरी उतरती है। जहां एक तरफ पुस्तक की साज-सज्जा पाठकों को आकषिZत करती है तो वहीं दूसरी ओर 176 पेज की मोटाई ठीक-ठाक कही जा सकती है। जहां तक इसकी कीमत का सवाल है तो मात्र 150 रूपये की धनराशि लगभग सभी वर्गो की पहुंच के अन्दर है और उस पर उत्तम कागज क्वालिटी, उच्च क्वालिटी की बाइण्डिग, मोटा रंगीन कवर पृष्ठ आदि विशेषताएं इसकी कीमत को तर्कसंगत बनाते हैं। इस पुस्तक में लेखक ने जीवन के विविध पहलुओं पर विहंगम दृष्टि डालने के साथ ही कहानियों के बीच-बीच में उदहरणों व संस्मरणों के माध्यम से ग्रामीण व शहरी परिवेश की भीनी-भीनी महक से ऐसा अद्भुद मिलाप कराया है जो भुलाये नहीं भूलता। इसके साथ ही शहरी जीवन की भागमभाग व बैचेन मानसिकता की एक झलक भी इस पुस्तक में देखने को मिलती है। कुल मिलाकर `जड़, जमीन, जहान´ जीवन के विविध आयामों पर अपनी अमिट छाप छोड़ती है एवं युवा पीढ़ी को संस्कारों व जीवन मूल्यों से लबालब कर कुछ कर गुजरने व जहान की बुलिन्दयों को छूने के लिए प्रेरित करती है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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