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Archive | April 6th, 2017

गोमती नदी चैनलाइजेशन परियोजना की गुणवत्ता, परियोजना कार्यों में देरी तथा धनराशि अनियमित रूप से हुये खर्च की

Posted on 06 April 2017 by admin

  • न्यायिक जांच किये जाने हेतु सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन
  • गठित समिति अपनी जांच आख्या 45 दिन में करेगी प्रस्तुत

गोमती नदी चैनलाइजेशन परियोजना की गुणवत्ता, परियोजना कार्यों में देरी तथा
धनराशि अनियमित रूप से हुये खर्च की जांच करने हेतु मा0 उच्च न्यायालय
इलाहाबाद के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में
न्यायिक जांच किये जाने हेतु एक समिति का गठन किये जाने के आदेश निर्गत कर
दिये गये हैं। गठित समिति में रिवराइन इंजीनियरिंग आई0आई0टी0 बी0एच0यू0 के
सेवानिवृत्त प्रोफेसर यू0के0चैधरी एवं आई0आई0एम0 लखनऊ के वित्त संकाय के
प्रोफेसर ए0के0गर्ग को सदस्य नामित किया गया है। गठित समिति अपनी जांच आख्या
45 दिन में प्रस्तुत करेगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राहुल भटनागर ने न्यायिक जांच किये जाने हेतु
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित किये जाने के
अधिसूचना/आदेश निर्गत कर दिये हैं।
गोमती नदी चैनलाइजेशन परियोजना हेतु 656 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गयी
थी, जो बांद में पुनरीक्षित होकर 1513 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गयी
थी। पुनरीक्षित लागत 1513 करोड़ रुपये में से अब तक 95 प्रतिशत धनराशि व्यय हो
जाने के बावजूद भी परियोजना का 60 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हुआ है। इसके
अतिरिक्त गोमती नदी के जल को प्रदूषणमुक्त करने के स्थान पर अनेक गैर जरूरी
कार्यों पर अत्यधिक धनराशि खर्च की गयी है तथा इन कार्यों को करने के लिये
निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किये जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति द्वारा गोमती
नदी चैनलाइजेशन परियोजना के विभिन्न अवयवों की लागत का सत्यापन, परियोजना के
क्रियान्वयन में विलम्ब के कारण लागत राशि के लगभग 95 प्रतिशत खर्च हो जाने के
उपरान्त भी मात्र 65 प्रतिशत कार्य होने के लिये जिम्मेदारी का निर्धारण,
पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से योजना की उपयुक्तता, स्वीकृत मदों के
विरुद्ध नियमानुसार भुगतान की स्थिति तथा परियोजना के क्रियान्वयन में बरती
गयी वित्तीय अनियमितताओं की स्थिति का जांच कर अपनी जांच आख्या 45 दिन में
प्रस्तुत करेगी।

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मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेशों का अनुपालन कड़ाई से सुनिश्चित कराते हुये ऐसी आबकारी दुकानों को शैक्षिक संस्थानों, चिकित्सालयों, धार्मिक स्थलों एवं बस्तियों से नियमानुसार दूरी पर राजस्व, पुलिस एवं आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गठित संयुक्त टीम द्वारा स्थल का निरीक्षण कर ही स्थानान्तरण कराना हो सुनिश्चित: मुख्य सचिव

Posted on 06 April 2017 by admin

  • प्रदेश में शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले अराजक तत्वों के विरुद्ध की जाये कड़ी कार्यवाही: राहुल भटनागर
  • स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराने हेतु  जनपदीय अधिकारी आम लोगों से स्थापित करें सीधा संवाद: मुख्य सचिव
  • मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेशों से आच्छादित न होने वाली तथा  आबकारी नियमों के तहत संचालित आबकारी दुकानों की लूट-पाट एवं  आगजनी की घटनायें कतई नहीं होनी चाहिये: राहुल भटनागर

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राहुल भटनागर ने प्रदेश के समस्त
मण्डलायुक्तों, जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों सहित आबकारी अधिकारियों को
कड़े निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु आवश्यक
कार्यवाहियां स्थानीय स्तर पर समय से सुनिश्चित कराने में कोई कोताही न बरती
जाये। उन्होंने कहा कि जनपदीय अधिकारी आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर
स्थानीय स्तर पर उठायी जा रही समस्याओं का समाधान नियमानुसार प्राथमिकता से
कराना सुनिश्चित करें।
श्री भटनागर ने यह भी निर्देश दिये कि मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार
राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों पर स्थित अथवा इनकी सर्विस लेन से 500 मीटर की
दूरी तक स्थित आबकारी दुकानों को शैक्षिक संस्थानों, चिकित्सालयों, धार्मिक
स्थलों एवं बस्तियों से नियमानुसार दूरी पर स्थानान्तरण सुनिश्चित कराने हेतु
राजस्व, पुलिस एवं आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गठित संयुक्त टीम
द्वारा स्थल का निरीक्षण कर ही स्थानान्तरण कराना सुनिश्चित करायें। उन्होंने
कहा कि उपयुक्त स्थान चिन्हित न होने पर स्थानान्तरित न होने की स्थिति पर मा0
उच्चतम न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु ऐसी आबकारी
दुकानों को तत्काल बंद करा दिया जाये।
मुख्य सचिव ने यह निर्देश आज योजना भवन में वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम
से दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेशों से आच्छादित न
होने वाली तथा आबकारी नियमों के तहत संचालित आबकारी दुकानों की लूट-पाट एवं
आगजनी की घटनायें कतई नहीं होनी चाहिये।
श्री भटनागर ने यह भी निर्देश दिये कि किसी भी जनपद में अवैध शराब की तस्करी,
निर्माण एवं बिक्री होने तथा जहरीली शराब पीने से कोई अप्रिय घटना घटित होने
पर सम्बन्धित अधिकारियों की जिम्मेदारी नियत कर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करायी
जायेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनपदीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि
बेहतर शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित
निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने कहा कि मा0
उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में आच्छादित न होने वाली तथा उ0प्र0
आबकारी नियमावली-2008 के नियमों के तहत संचालित होने वाली आबकारी दुकानों की
लूट-पाट एवं आगजनी की घटनायें रोकने हेतु स्थानीय स्तर पर कठोर कदम उठाये
जायें।
वीडियो कान्फ्रेन्सिंग में अपर मुख्य सचिव आबकारी श्री दीपक त्रिवेदी, प्रमुख
सचिव गृह श्री देबाशीष पण्डा, पुलिस महानिदेशक श्री जावीद अहमद, आबकारी आयुक्त
श्री मृत्युंजय कुमार नारायण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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प्रदेश में संचालित अवैध पशु वधशालाओं को बन्द करने एवं यांत्रिक पशु वधशालाओं पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेशों को सख्ती से लागू करने का फैसला

Posted on 06 April 2017 by admin

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में संचालित अवैध पशु वधशालाओं को बन्द करने एवं यांत्रिक पशु वधशालाओं पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेशों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। इस सम्बन्ध में शासनादेश संख्या-760/नौ-8-2017-29ज/2017 दिनांक 22 मार्च, 2017 तथा शासनादेश संख्या-838/नौ-8-2017-29ज/2017 दिनांक 27 मार्च, 2017 पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं।
प्रदेश के समस्त जनपदों में स्थित पशु वधशालाओं का निरीक्षण किए जाने तथा अवैध रूप से संचालित पशु वधशालाओं को तत्काल प्रभाव से बन्द किए जाने तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत प्राविधानों के अनुसार दण्डात्मक कार्रवाई के आदेश 22 मार्च, 2017 के शासनादेश के माध्यम से राज्य के सभी मण्डलायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, जिलाधिकारियों, पुलिस उप महानिरीक्षकों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक तथा नगर आयुक्तों को दिए गए थे। इसी सम्बन्ध में 27 मार्च, 2017 के शासनादेश द्वारा प्रदेश में संचालित यांत्रिक पशु वधशालाओं के सम्बन्ध में यह आदेश भी दिया गया था कि ‘यांत्रिक पशुवधशालाओं पर प्रतिबन्ध’ का आशय उन यांत्रिक पशु वधशालाओं से है, जो 22 मार्च, 2017 के शासनादेश में उल्लिखित विभिन्न अधिनियमों एवं प्राविधानों में वर्णित निर्धारित मापदण्डों को पूरा नहीं करती हैं।
आज मंत्रिमण्डल की बैठक के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों से वार्ता करते हुए ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री श्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश में अभी तक कुल 26 अवैध वधशालाएं बन्द की गई हैं। अधिकारियों द्वारा अति उत्साह में बन्द की गई वधशालाओं को वस्तुतः बन्द नहीं किया गया है। राज्य सरकार अवैध वधशालाओं के विषय में सुप्रीम कोर्ट और एन0जी0टी0 के आदेशों को लेटर एण्ड स्प्रिट में लागू करेगी। उन्होंने कहा कि जिन वधशालाओं के लाईसेन्स रिन्यू के आवेदन आएंगे, उन्हें रिन्यू किया जाएगा।

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रबी विपणन वर्ष 2017-18 में मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं क्रय नीति को मंजूरी

Posted on 06 April 2017 by admin

मंत्रिपरिषद ने रबी विपणन वर्ष 2017-18 में मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं क्रय नीति को मंजूरी प्रदान कर दी है। कृषकों को मूल्य समर्थन योजना के माध्यम से अधिकतम लाभ उपलब्ध कराने के लिए 31 मार्च, 2017 को इस सम्बन्ध में शासनादेश जारी करके 1 अप्रैल, 2017 से गेहूं की खरीद प्रारम्भ की जा चुकी है।
मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार भारत सरकार द्वारा घोषित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1625 रुपए प्रति कुन्तल की दर पर रखा गया है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश के लिए राज्य सरकार द्वारा 40 लाख मी0टन गेहूं क्रय का न्यूनतम लक्ष्य रखा गया है, किन्तु किसानों को मूल्य समर्थन योजना का अधिकाधिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से निर्धारित न्यूनतम लक्ष्य को बढ़ाकर 80 लाख मी0टन गेहूं क्रय का कार्यकारी लक्ष्य प्राप्त करने के सार्थक एवं प्रभावी प्रयास किए जाएंगे। 09 क्रय संस्थाओं द्वारा गेहूं क्रय किया जा रहा है। गेहूं क्रय हेतु प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 5000 क्रय केन्द्र स्थापित किए गए हैं।
गेहूं क्रय के तहत आ रही कठिनाईयों के निवारण हेतु मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। गेहूं क्रय के अनुश्रवण हेतु आयुक्त, खाद्य एवं रसद के कार्यालय में नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। जारी शासनादेश में दिनांक 1 अप्रैल, 2017 से 15 जून, 2017 तक गेहूं क्रय किए जाने का प्रावधान किया गया है।

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प्रत्येक जनपद में एण्टी रोमियो, स्क्वायड के गठन और संचालन सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी

Posted on 06 April 2017 by admin

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एण्टी रोमियो, स्क्वायड के गठन और संचालन सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
एण्टी रोमियो स्क्वायड को केवल ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध कार्य करने के निर्देश हैं, जो राह चलते बालिकाओं/महिलाओं को किसी भी प्रकार से परेशान करते हैं। ऐसे जोड़ों या व्यक्तियों, जो सामाजिक परम्पराओं के दायरे में रहते हुए पारस्परिक सहमति से पार्क/माॅल/काॅफी हाउस/सिनेमाघर इत्यादि में मिल-जुल रहे हैं, के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करने के निर्देश हैं।
सार्वजनिक स्थानों (स्कूल, काॅलेज, बाजार, माॅल, पार्क, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन आदि) पर आपत्तिजनक हरकत करने वाले तत्वों पर निगरानी रखने के लिए सादे वस्त्रों में महिला पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है तथा ऐसे तत्वों को चिन्ह्ति करने के बाद उनके विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। यह स्क्वायड क्षेत्राधिकारी के निकट पर्यवेक्षण में कार्य कर रहे हैं तथा जनपद के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके कार्य-कलापों का अनुश्रवण किया जा रहा है। प्रतिदिन अभियान हेतु निकलने से पूर्व एण्टी रोमियो स्क्वायड की ब्रीफिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती है।
किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बैठे हुए जोड़ों से अनायास आई0कार्ड मांगना, पूछताछ करना, तलाशी लेना, उठक-बैठक करवाना, मुर्गा बनवाना जैसी कार्यवाही न किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में संलग्न टीमों द्वारा इस कार्यवाही में प्राईवेट व्यक्तियों को शामिल नहीं किया जाएगा। आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों को कड़ी हिदायत देते हुए प्राथमिक रूप से उनके विरुद्ध सुधारात्मक कार्यवाही के निर्देश हैं।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश के नागरिकों को, विशेष रूप से महिलाओं, कमजोर एवं वंचित वर्ग को, सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निकट अतीत में प्रदेश में महिलाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में अध्ययरन छात्राओं, नव युवतियों एवं कामकाजी महिलाओं के साथ अश्लील व्यवहार करने, अश्लील टिप्पणियां करने एवं उनके साथ छेड़छाड़ करने की घटनाएं दैनन्दिन जीवन का अंग बनती जा रही थी, जो भारतीय सामाजिक परिवेश, परम्पराओं साथ ही सामान्य सुरक्षा तथा कानून एवं व्यवस्था के मापदण्डों के विपरीत तो थीं ही साथ ही, राज्यतंत्र के लिए एक चुनौती भी थीं।
सरकार के बागडोर संभालने के साथ ही इस चुनौती का सामना करने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर प्रदेशव्यापी अभियान संचालित करने की आवश्यकता का अनुभव किया गया तथा इसको मूर्तरूप देने के लिए सभी सार्वजनिक स्थलों, चैराहों, बाजारों, शाॅपिंग माॅल, पार्क एवं अन्य स्थानों को महिलाओं/बालिकाओं के लिए सुरक्षित करने हेतु जनपदों में ‘एण्टी रोमियो स्क्वायड’ बनाए गए हैं। इन स्क्वायड में उपलब्धता के अनुसार अधिक से अधिक संख्या में महिला काॅन्सटेबल की ड्यूटी सादे वस्त्रों में लगाई गई है।

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जनपद गाजीपुर में नवीन स्टेडियम की स्थापना में उच्च विशिष्टियां के प्रयोग को मंजूरी

Posted on 06 April 2017 by admin

मंत्रिपरिषद ने जनपद गाजीपुर में नवीन स्टेडियम की स्थापना में स्ट्रक्चर ग्लेजिंग एवं मैटालिक फाॅल्स सीलिंग उच्च विशिष्टियां के प्रयोग को मंजूरी प्रदान कर दी है।
प्रस्तावित स्टेडियम के अन्तर्गत एक बास्केट बाॅल कोर्ट तथा दर्शक दीर्घा का निर्माण कराया जाना है। नवीन स्टेडियम की स्थापना के लिए उ0प्र0 राजकीय निर्माण निगम लि0, वाराणसी ईकाई-2 द्वारा 826.19 लाख रुपए लागत का आगणन उपलब्ध कराया गया था। पी0एफ0ए0डी0 द्वारा इस कार्य की लागत 470.44 लाख रुपए आकलित की गई है।
ज्ञातव्य है कि जनपद गाजीपुर में स्पोट्र्स स्टेडियम का निर्माण वर्ष 1972 में लगभग 3 एकड़ भूमि पर किया गया था, जिस पर प्रशासनिक भवन एवं बहुउद्देशीय क्रीडा हाॅल निर्मित है। परन्तु वर्तमान स्टेडियम में भूमि की कमी के कारण मानक के अनुसार एथेलेटिक्स टैªक, फुटबाॅल एवं हाॅकी मैदान नहीं बन सकता। इसलिए जनपद गाजीपुर में उदीयमान खिलाड़ियों को खेल अवसर उपलब्ध कराए जाने के लिए नवीन स्टेडियम की स्थापना कराया जाना आवश्यक है।

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पहली कैबिनेट बैठक में प्रदेश सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला

Posted on 06 April 2017 by admin

31 मार्च, 2016 तक लघु व सीमान्त किसानों को जितना भी
फसली ऋण दिया गया है, उसका 31 मार्च, 2017 को
अचुकता अवशेष माफ करने का निर्णय

फसली ऋण माफी की अधिकतम सीमा प्रति किसान एक लाख रु0 होगी

योजना की कुल लागत लगभग 36 हजार करोड़ रु0

योजना से 86 लाख से अधिक लघु व सीमान्त किसानों को लाभ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज यहां लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में 31 मार्च, 2016 तक लघु व सीमान्त किसानों को जितना भी फसली ऋण दिया गया है, उसका 31 मार्च, 2017 को अचुकता अवशेष माफ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। फसली ऋण माफी की अधिकतम सीमा प्रति किसान एक लाख रुपए होगी।
इसके अलावा, एन0पी0ए0 ऋणों को एकमुश्त समाधान (ओ0टी0एस0) के तहत राज्य सरकार की वित्तीय सहायता से राइट आॅफ किया जाएगा, जिस पर अनुमानित वित्तीय भार लगभग 6000 करोड़ रुपए होगा। इस पूरी योजना में 86 लाख से अधिक लघु व सीमान्त किसानों को लाभ होगा, जिन्होंने बैंकों से फसली ऋण ले रखा है।
योजना की कुल लागत लगभग 36 हजार करोड़ रुपए होगी, जिसमें एकमुश्त समाधान योजना की लागत लगभग 6000 करोड़ रुपए होगी। एकमुश्त समाधान योजना से ऐसे लगभग 7 लाख किसान पुनः बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकेंगे, जिन्हें ऋणग्रस्तता के कारण बैंकों ने फसली ऋण देना बन्द कर दिया था।
प्रदेश के एक हेक्टेयर अर्थात 2.5 एकड़ तक के सभी किसान सीमान्त किसान की श्रेणी में आएंगे। इस प्रकार 2 हेक्टेयर अर्थात 5 एकड़ तक के सभी किसान लघु किसान की श्रेणी में आएंगे। योजना का लाभ प्रदेश के सभी लघु व सीमान्त कृषकों को मिलेगा। प्रारम्भिक गणना के अनुसार प्रदेश में ऐसे कुल 86.68 लाख लघु व सीमान्त किसान हैं, जिन्होंने बैंकों से फसली ऋण लिया हुआ है।
फसली ऋण माफी योजना हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 8 अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, वित्त, संस्थागत वित्त/कृषि/सहकारिता व राज्य बैंक समन्वयक सदस्य हैं। यह समिति सभी पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत फसली ऋण माफी योजना तैयार करेगी व उसका मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेकर क्रियान्वयन करेगी। साथ ही, समिति योजना के वित्त पोषण हेतु भी अपनी संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर सरकार द्वारा इस हेतु वित्तीय व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। क्रियान्वयन के अतिरिक्त समिति की इस योजना के सतत् अनुश्रवण में भी सक्रिय भूमिका होगी।
प्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र के अनुसार मंत्रिमण्डल की पहली बैठक में लघु एवं सीमान्त किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के क्रम में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश की लगभग 78 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, जिसमें 68 प्रतिशत परिवार कृषि पर निर्भर हैं। किसानों की संख्या का लगभग 93 प्रतिशत लघु व सीमान्त किसान हैं। इसी से स्पष्ट है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था लघु व सीमान्त किसानों पर काफी हद तक निर्भर है। गत तीन वर्षों में सूखा, बाढ़ व ओलावृष्टि का सर्वाधिक कुठाराघात लघु व सीमान्त किसानों पर हुआ है, जिससे वे फसली ऋण की अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं तथा उनकी सूदखोरों व साहूकारों के ऋण के भंवरजाल में फंसने की प्रबल आशंका है। इससे कृषि सेक्टर व प्रदेश के विकास की गति भी अवरुद्ध होने की सम्भावना है।
2016-17 में जहां राज्य के सकल घरेलू उत्पादन की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत अनुमानित है, वहीं कृषि एवं पशुपालन सेक्टर में यह 5.3 प्रतिशत ही रहने का अनुमान है। 2011-12 से 2014-15 के मध्य जहां प्रदेश में प्रति व्यक्ति कुल आय में 3.2 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर रही, वहीं कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में यह वृद्धि मात्र 1.2 प्रतिशत रही। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार की यह प्रतिबद्धता है कि पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं के दंश को झेल रहे इन सभी लघु एवं सीमान्त किसानों के फसली ऋण माफ किए जाएं।
इसी आशय से लोक कल्याण संकल्प पत्र के माध्यम से उद्घोषित अपनी प्रतिबद्धता ‘कृषि विकास का बने आधार’ के क्रियान्वयन का राज्य सरकार द्वारा अपनी पहली मंत्रिमण्डलीय बैठक में निर्णय लिया गया। इससे लघु एवं सीमान्त किसानों को इस हेतु सक्षम बनाया जाएगा कि वे बैंकिंग व्यवस्था का लाभ लेकर कृषि में निवेश करें, ताकि वे न केवल स्वयं स्वावलम्बी हों, अपितु राज्य के कृषि सेक्टर के उत्पादन व उत्पादकता में भी वृद्धि हो।

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नई उद्योग नीति के निर्माण तथा अवैध खनिज व्यापार पर अंकुश के सम्बन्ध में नीति बनाने के लिए मंत्री समूहों के गठन का निर्णय

Posted on 06 April 2017 by admin

  • आलू उत्पादक किसानों को राहत देने के उपायों पर विचार करने के लिए कमेटी के गठन का फैसला
  • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किए जाने के फैसले के लिए मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री को बधाई दी, इस भावना से उन्हें अवगत कराने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिमण्डल की बैठक में नई उद्योग नीति के निर्माण तथा अवैध खनिज व्यापार पर अंकुश के सम्बन्ध में नीति बनाने के लिए मंत्री समूहों के गठन तथा आलू उत्पादक किसानों को राहत देने के उपायों पर विचार करने के लिए एक कमेटी के गठन का फैसला लिया गया है।

मंत्रिमण्डल की बैठक के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान यह जानकारी देते हुए ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री श्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश में बड़ी मात्रा मंे पूंजी निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने तथा प्रदेश के नौजवानों को राज्य में ही रोजगार के समुचित अवसर उपलब्ध कराने के लिए नई उद्योग नीति बनाने का फैसला लिया गया है। इसके लिए उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह का गठन किया गया है। वित्त मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, औद्योगिक विकास मंत्री श्री सतीश महाना, स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क मंत्री श्री नन्द गोपाल नन्दी तथा ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा इस मंत्री समूह के सदस्य होंगे।

मंत्रिगण ने बताया कि मंत्री समूह बेहतर उद्योग नीतियों वाले राज्यों जैसे-गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि भ्रमण कर, इन नीतियों की बारीकियों का अध्ययन करेगा तथा सिंगल विण्डो सिस्टम के माध्यम से प्रदेश के लिए एक अच्छी उद्योग नीति बनाई जाएगी। इस कार्य के लिए 15 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है।

अवैध खनिज व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए गठित मंत्री समूह की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य करेंगे। संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश खन्ना तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री दारा सिंह चैहान इस मंत्री समूह के सदस्य होंगे। यह मंत्री समूह एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों को राहत देने के उपायों पर विचार करने के लिए गठित कमेटी में उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री दारा सिंह चैहान शामिल हैं।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किए जाने के फैसले के लिए मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को बधाई देते हुए अपनी इस भावना से उन्हें अवगत कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को अधिकृत करने का निर्णय भी लिया है।

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