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चौथे दिन भी जारी रहा बी0एस0ए0 के खिलाफ धरना…..

Posted on 25 February 2010 by admin

114उ0प्र0 जूनियर हाईस्कूल पू0मा0 िशक्षक संघ के तत्वाधान में संगठन के पदाधिकारियों द्वारा बी0एस0ए0 कार्यालय पर चौथे दिन भी धरने पर डटे रहे। संगठन के द्वारा विभिन्न मांगों के अन्तर्गत प्रधानाध्यापक पर पर प्रोन्नत, प्रधानाध्यापक विहिन विद्यालयों की सूची, महिला वरियता सूची, पिछड़े विकास क्षेत्रों में काम करने वाले अध्यापकों की वरियता सूची प्रकािशत न करने पर िशक्षिकों में धरनारत् िशक्षिकों में बी0एस0ए0 के प्रति विरोध जताया है। िशक्षिको के आभाव में जनपद के सभी हाईस्कूल अस्त-व्यस्त चल रहे है। कृपाशंकर उपाध्याय ने बताया कि बी0एस0ए0 बात करने के बाद भी प्रोन्नत वेतनमान के प्रकरण पर कोई कार्यवाही नही किया। जबकि अधिकारी द्वारा जनवरी माह में ही प्रकरण निस्तारण की बात कही गई थी। योग्यता छात्रवृत्ति के भुगतान के सम्बन्ध में व संगठन के खातों को उपलब्ध कराने में कोताही दिखायी जा रही है, जिससे बच्चों की योग्यता छात्रवृत्ति का भुगतान अधर में लटका हुआ है। रामअकबाल द्विवेदी ने बताया कि जूनियर हाई स्कूल अभियाकलां में मीना कक्ष निर्माण कार्य के बारे में वार्ता करने के बावजूद भी इस प्रकरण का निस्तारण नही करने में हिला हवाली की जा रही है। विभाग संगठन को संघशZ के लिये विवश कर रहा है। समस्याओं को समाधान न होने पर धरना अनवरत जारी रहेगा। धरने को महामन्त्री रामशब्द वर्मा सहित कई िशक्षकों ने सम्बोधित किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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सरकारी डाक्टरों द्वारा मरीजो का हो रहा शोशण..

Posted on 25 February 2010 by admin

कमीशन के चक्कर में मरीजों को डा0 प्राइवेट नर्सिग होमों में भेजे जा रहे है। मामला शुकुल बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का जहॉं पर सारी सुविधाएंं उपलब्ध है। उसके बाद भी मरीजों को दो घण्टे तक अस्पताल में रखकर आशा बहु और कर्मचारियों की मिली भगत से प्राइवेट नर्सिग होम को मरीज को भेज दिया जाता है। उस नर्सिग होम को सीधे आशा बहु के द्वारा 2000 रूपया कमीशन आ जाता है, जो पूरा स्टाफ बन्दर बाट कर लेता है। जैसा कि 24 फरवरी को लवलेश निवासी मवई रहमतगढ़ शुकुलबाजार व खलीकुम निशा महूपुर को दिन में शुकुल बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भर्ती कराया और अंधेरा होते ही कमीशन के चक्कर में डाक्टरों ने प्राइवेट नर्सिग होम जगदीशपुर सिफा नर्सिग होम में भेज दिया गया। इतना ही नही जो डाक्टर आपरेशन किया वह भी सरकारी सेवा में कार्यरत है। ये वही नर्सिग होम है जहॉं लगभग 2 वशZ पूर्व दो बच्चों की मौत लापरवाही से हो चुकी है। यहॉं पर कौन डा0 है और कौन सा डा0 है और कौन सा डा0 आपरेशन करता है। इसका भी पता नही इतना जरूर पता है कि कमीशन के बल पर ये नर्सिग होम जोरो पर आगे बढ़ता जा रहा है और जैसा कि भगवान का दूसरा रूप डाक्टरों को कहा जाता है था परन्तु कमीशन के चक्कर में अपने पेशे को शर्मसार कर गरीबों का खून चूसने में लगे है। मरता क्या न करता जहॉं पर मरीज परेशान रहता है वही पर डाक्टर भर्ती के लिये कहते है वही प मरीज भर्ती हो जाता है और सीधे मरीजों का खून चूस लिया जाता है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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बढ़ायी गई फीस के विरोध में निकाला जुलूस……ज्ञापन दिया

Posted on 25 February 2010 by admin

स्टूडेन्ट फेडरेशन ऑंफ इण्डिया (एस0एफ0आई0) नेे महात्मा गॉंधी स्मारक इण्टर कालेज और राजकीय इण्टर कालेज व जिले के अन्य इण्टर कालेजों के छात्रों ने नगर में जुलूस निकालकर व कलेक्ट्रेट के सामने सड़क जाम कर इण्टर कालेजों में बढ़ायी गई फीस वसूली का विरोध किया तथा ज्यादा वसूली की गई फीस की वापसी की मॉंग की। छात्रों का नेतृत्व एस0एस0आई0 के प्रदेश अध्यक्ष शशांक पाण्डेय ने किये तथा जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र नाथ तिवारी ने किया। एस0एफ0आई0 के जिला सचिव रामकृश्ण मिश्र ने बताया कि छात्रों का जुलूस एस0एफ0आई0 कार्यालय से निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंंचा जहॉं किसी अधिकारी के उपस्थित न होने पर छात्र आक्रोिशत होकर कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर बैठ गये और सड़क जाम कर दी जहॉं पर क्षेत्राधिकारी नगर आर0के0सिंह ने छात्रों को समझा कर जाम हटवाया, तथा पॉंच सद्स्यीय प्रतिनिधि मण्डल से बातचीत की प्रतिनिधि मण्डल में शशांक, बृजेन्द्र, रामकृश्ण, बृजेश व अजय शामिल थे। क्षेत्राधिकारी नगर ने छात्रों की समस्याओं को निस्तारित करने हेतु तत्काल जिलाधिकारी को मामले से अवगत कराया तथा ठोस कार्यवाही तथा फीस वसूली रूकवाने के ठोस आश्वासन पर छात्र वापस जिला कार्यालय पर लौट आये। जुलूस में मुख्य रूप से अवधेश तिवारी, भूपेन्द्र पाण्डेय, कर्मजीत, सत्य कुमार, अनुराग, अल्फास खॉंन, अल्ताफ खॉ सचिन यादव, कुलदीप, आसिफ, मोइद खान व अंकुर गुप्ता आदि सैकड़ो छात्र मौजूद थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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होली त्यौहार पर घटिया खोवा व मिठाइयों की बाजार में हो रही है, धडल्ले से बिक्री

Posted on 25 February 2010 by admin

स्वास्थ्य विभाग के लाख प्रयास के बाद भी सिन्थेटिक खोवा मिल्क केक व पनीर की बाजारों में धडल्ले से बिक्री हो रही है। हलाकि 24 फरवरी की रात्रि में स्वाथ्य विभाग की टीम ने रोडवेज पर छापामार कर पनीर व मिल्क केक पकड़ा। आपको बताते चले की घटिया खोवा, मिल्क केक, पनीर, इमरती, बुदिंया आदि के कुछ चुनिन्दा चालक परिचालक अपनी बसों से रात्रि में कानपुर व लखनऊ से लाते है। इनका सहयोग परिवहन विभाग से जूड़े कुली व कुछ रिक्शे वाले करते है। ये सारा दो नं0 का काला कारोबार परिवहन निगम के परिचालक व कुली तथा रिक्शे वाले जो मोबाइल्स से लैस होकर संचालित कर रहे है। परिवहन निगम ऐसे परिचालकों पर अंकुश लगाने में काफी असेZ से असफल साबित हो रहा है। जिले के नामी मिश्ठान भण्डार इस नं0 दो के काले कारोबार से जूड़े है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब भी रोडवेज बस स्टाप पर छापा मारा तथा एक बस को पकड़ा फौरन कुली व रिक्शे वाले मोबाइल से परिचालकों का सूचित कर आने वाले नं0 दो के माल को रास्ते में ही उतरवा देते है। परिवहन निगम के चन्द परिचालको के कारण पूरे जनपद में `जानलेवा´ मिल्क केक, पनीर, खोवा, बुदिंया, इमरती आदि सामानों की बिक्री धडल्ले से हो रही है। इसमें भी ए0आर0एम0 लोहानी असफल साबित हो रहे है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पकड़े गये नं0 दो के सामानो का क्या परिणाम निकलता है। ये पता नही चल पाता, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी शंका के दायरे में आता है। वर्तमान में खाद्यय तेलों में जैसे हवाई जहाज वो मानक पर खरा नही है। फिर भी उसकी बिक्री जोरों पर है। बीते वशZ पूर्व फूड इन्सपेक्टर संजय ने 150 टीन हवाई जहाज ब्राण्ड का तेल पकड़ा था। परन्तु उनकी कार्यवाही से पूरी जनपद अनभिज्ञ है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे कार्यों में पारदिशZता नही रख रही है। शायद यही वजह है कि अच्छा कार्य करने के बाद भी शक की सुई उन पर भी जा अटकती है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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पुलिस भर्ती में जबरदस्त अनियमितताएं

Posted on 24 February 2010 by admin

समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्रचौधरी ने विज्ञप्ति के माध्यम से कहा उत्तर प्रदेश में इन दिनों हो रही पुलिस भर्ती में जबरदस्त अनियमितताएं हो रही हैं। चयन में कुछ जातियों के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। प्रदेश की बसपा सरकार के इशारे पर नौजवानों की भर्ती के दौरान शरीर मापन में मनमानी बरती जा रही है। इसका उद्देश्य भर्ती की जॉच प्रक्रिया में अपूर्णता के बहाने नौजवानों को पहले ही चयन से बाहर कर देने का है। नौजवानों में इससे क्षोभ है। उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है।

बसपा सरकार की नई भर्ती का हाल यह है कि जॉच के लिए नौजवानोें को सुबह से रात तक बिठाया जाता है और आधीरात के बाद तक नाप जोख की जाती है। मापन मनमाने तरीके से होतो है।

सरकारी कामकाज में बसपा सरकार का शुरू से ही पक्षपातपूर्ण व्यवहार दिखाई देता रहा है। श्री मुलायम सिंह यादव के मुख्यमन्त्रित्वकाल में 20 हजार नौजवानों की पुलिस पीएसी में भर्ती की गई थी। इनमें पिछड़े वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के नौजवानों की समुचित तादात थी। मुख्यमन्त्री मायावती ने सत्ता में आते ही 18 हजार नौजवानों को बखाZस्तकर दिया। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद उन्हेें राहत मिली यद्यपि इस सरकार ने उसमें भी काफी हीलाहवाली और देरी की। समाजवादी पार्टी का मानना है कि नौजवानों के साथ शासन-प्रशासन का रवैया निहायत अमानवीय ओर निन्दनीय है। नौजवानों को रोजगार से वंचित करना और उनके साथ पक्षपात का व्यवहार करना लोकतन्त्र की भावना की अवमानना है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मनोरंजन विभाग मे विभिन्न अनियमितताओं

Posted on 24 February 2010 by admin

मनोरंजन कर विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम 10 महीनों में करापवंचन पर अंकुश लगाने हेतु चलाये गये विशेष अभियान के अन्तर्गत 292 आकिस्मक निरीक्षण किये गये। निरीक्षण के दौरान पायी गई विभिन्न अनियमितताओं में 05 मनोरंजन कर निरीक्षक निलिम्बत किये गये। इसके अतिरिक्त 19 सिनेमाघरों के लाइसेन्स भी निलिम्बत किये गये।

मनोरंजन कर विभाग से प्राप्त सूचना के अनुसार विभाग के 20 अधिकारियों/मनोरंजन कर निरीक्षकों के विरूद्ध विभिन्न अनियमितताये प्रकाश में आने के फलस्वरूप विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। निरीक्षण के दौरान प्रकाश में आयी विभिन्न अनियमितताओं में आमोद के स्वामियों के विरूद्ध 11.63 लाख की शास्ति अधिरोपित की गई है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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रेल बजट में उत्तर प्रदेश की पूरी तरह से उपेक्षा

Posted on 24 February 2010 by admin

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने आज संसद में पेश किये गये रेल बजट में उत्तर प्रदेश की पूरी तरह से उपेक्षा किये जाने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रदेश के लिए कोई नई रेलगाड़ी अथवा परियोजना न दिये जाने से प्रदेश की जनता को घोर निराशा हुई है। इस तरह `आम आदमी´ और `समावेशी´ विकास का दावा करने वाली यू0पी0ए0 सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि रेल बजट में कुछ राज्यों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की अनदेखी की गई है।

मुख्यमन्त्री ने रेल बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विकास के मामले में राजनीति नहीं की जानी चाहिए, लेकिन यू0पी0ए0 सरकार ने रेल बजट में भी उत्तर प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार अपनाया है। उन्होंने कहा कि रेल बजट में प0 बंगाल और मुम्बई का विशेष ध्यान रखा गया है। इस तरह की सोच ने यू0पी0ए0 सरकार के समावेशी (इन्क्लूसिव) विकास के खोखले नारे की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि रेल बजट में उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों की उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि इस बार भी बजट में दूर-दराज के इलाकों में गरीबी और पिछड़ेपन की मार झेल रहे क्षेत्रों के विकास के लिए कोई विशेष परियोजना प्रस्तावित नहीं की गई है।

सुश्री मायावती ने कहा कि बजट में `समर्पित यात्री कोरिडोर´, हाईस्पीड रेल ऑथारिटी, रेलवे स्टेशनों का उच्चीकरण, कुछ रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने, नई रेलवे लाईन बिछाने, पुरानी लाईनों का दोहरीकरण, स्कूल, अस्पताल, नवोदय विद्यालय, डायग्नोस्टिक सेन्टर, हब तथा टुरिस्ट व नई गाड़ियों का संचालन, नई दुरन्तों गाड़ियां चलाने व मानव रहित रेलवे क्रांसिग को समाप्त करने आदि अनेक घोषणाएं की गई हैं। लेकिन इसमें उत्तर प्रदेश के हिस्से में कुछ नाम मात्र की परियोजनाएं ही आयी हैं। इस तरह आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि यू0पी0ए0 सरकार ने दूसरी बार सत्ता में आते ही पिछले साल 03 जुलाई, 2009 को रेल बजट पेश करते हुए तमाम परियोजनाओं एवं सुविधाओं की घोषणा की थी। लेकिन इनकी सारी घोषणाएं हवा हवाई साबित हुईं। अब भी रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। अधूरी परियोजनाएं पूरी नहीं की गईं हैं। उन्होंने कहा कि रेल यात्रा को सुरक्षित भरोसेमन्द और दुघZटना रहित बनाने के लिए किसी तरह के उपायों की जानकारी नहीं दी गई है। इसके साथ ही रेलों के विस्तार के साथ ही आम आदमी की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की कोई पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि रेल मन्त्री बजट में रेलों के माध्यम से सामाजिक उत्तदायित्व निर्वहन करने तथा आम आदमी की बात कर रहीं हैं, जबकि सच्चाई यह है कि रेलवे के एजेण्डे में आम आदमी के लिए कोई जगह नहीं दिखायी नहीं दे रही है।

सुश्री मायावती ने कहा कि रेल बजट में नई रेलवे लाईने बिछाने की जोर-शोर से घोषणा की गई है और प्रतिवर्ष 1000 किलोमीटर नई रेलवे लाईन का लक्ष्य रखा गया है। जबकि रेलवे के आंकड़े कुछ और कहते हैं। वर्ष 1947 से अब तक सिर्फ 10 हजार किलोमीटर ही नई रेलवे लाईन बिछायी गई है, जबकि आजादी के बाद से लगभग 50 वर्ष तक कांग्रेस का ही राज रहा है। उन्होंने कहा कि बजट में इटावा-मैनपुरी, अमेठी-शांहगंज,  अमेठी-सुल्तानपुर तथा सम्भल-गजरौला के लिए ही नई रेलवे लाईन की घोषणा की गई है, इस तरह प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009-10 के रेल बजट में की गई अधिकांश घोषणाओं को जमीन पर अब तक उतारा नहीं जा सका है। उन्होंने कहा कि रेलवे बजट 2010-11 का भी यही हश्र होने वाला है।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि रेल बजट में प्रदेश को देश के अधिकांश भागों से सम्पर्क मुहैया कराने तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को एक महत्वपूर्ण पहलू बताया गया है और यह भी कहा गया है कि यदि विकास की प्रक्रिया में सभी को शामिल नहीं किया गया तो पूरी कवायत मात्र आंकड़ों पर टिक कर रह जाएगा। लेकिन रेलबजट में ठीक इसके विपरीत व्यवस्था करके दोहरी नीति अपनायी गई है। रेलवे में लम्बे समय से रिक्त अनुसूचित जाति/जनजाति के बैकलॉग कोटा भरने के लिए कोई बात नहीं कही गई है। उन्होंने इस रेल बजट को एक आंकड़ों का पुलिन्दा बताते हुए कहा है कि यू0पी0ए0 सरकार ने तमाम नई परियोजनाओं की बात कही है, लेकिन इसके लिए संसाधनों का खुलासा नहीं किया गया है, जिससे पूरी आशंका है कि यह सब कागज के बाहर नहीं आ सकेंगी।

सुश्री मायावती ने कहा कि ऐसा लगता है प0 बंगाल के आसन्न चुनाव को देखते हुए रेल बजट सिर्फ प0 बंगाल के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सस्ती रेल एवं सुखद यात्रा का नारा यू0पी0ए0 सरकार का छलावा मात्र है, क्योंकि गाड़ियों में बढ़ती भीड़ तथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई कारगार रणनीति की बात बजट में नहीं कही गई है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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रेल बजट पर प्रतिक्रिया

Posted on 24 February 2010 by admin

संसद में आज प्रस्तुत रेलवे बजट 2010-11 निराशाजनक है। आम आदमी की उम्मीदों पर वह खरा नहीं उतरने वाला है। यह बजट सम्पूर्ण भारत नहीं, पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को दृष्टि में रखकर बनाया गया है। रेलमन्त्री ने देश के सबसे बड़े प्रदेश के साथ नाइंसाफी की है। यू0पी0 के मायने सुश्री ममता बैनर्जी ने सिर्फ अमेठी-रायबरेली को मान लिया है। वह सोनिया-राहुल के प्रति उनका कृतज्ञता ज्ञापन है, जो खासकर पं0 बंगाल में उन्हें पूरी मनमानी की छूट दिए हुये है और केन्द्र सरकार में उनकी घोैसपट्टी की अनदेखी करती रहती है।

रेल बजट में ज्यादातर पुरानी घोषणाएं ही दुहराई गई हैं। इटावा-मैनपुरी रेल लाइन की बात बेमानी है जो श्री मुलायम िंसंह यादव के जोर देने पर शुरू हुई थी पर उस पर काम बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। रेलमन्त्री ने घोषणाएं तो बहुत की हैं किन्तु ऐसा लगता नहीं कि उनके रेलमन्त्री रहते वे पूरी भी हो पाएंगीं।  वह इच्छाशक्ति केन्द्र सरकार और रेल मन्त्रालय में दिखाई ही नहीं देती जो समग्र विकास की गारंटी देती है। नया रेलमन्त्री पुराने रेलमन्त्री के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय बनने की चाहत में ऐसी ही घोषणाएं करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। सुश्री ममता बैनर्जी ने भी उसी परम्परा का पालन किया है। मन्दी -महंगाई की मार से पीड़ित अर्थ व्यवस्था में उनकी घोषणाओं का हश्र क्या होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है।
रेल मन्त्री ने एक घंटे 50 मिनट के लम्बे भाषण में न तो यह भरोसा दिलाया कि वे ट्रेनों की लेट लतीफी पर रोक लगाएगी और न हीं यात्री सुरक्षा और सुविधाओं की खस्ता हालत में सुधार की कोई बात की। रेलवे के हादसों से उन्होंने कोई सबक लिया ऐसा दिखता नही । रेलवे में सफाई, प्लेटफार्मों पर अव्यवस्था तथा प्रतीक्षालयों की दिक्कतों पर वे मौन रह गई हैं। स्वतन्त्रता सेनानियों  को कोई राहत देने के बजाए उन्होंने स्टेशनों के नाम शहीदों के नाम पर रखने की बात करके उनसे मजाक किया हेै। उनकी महिला वाहिनी कब बनेगी और कब सुरक्षा देगी, यह भी साफ नहीं है। वे वायदे तो पहले भी कर चुकी हैं जो आज भी पूरे नहीं हुए हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि रेलमन्त्री ने वास्तविकता की पड़ताल किए बिना ऐटलस सामने रखकर योजनाएं घोषित कर दी है। तमाम योजनाओं के लिए पैसा कहॉ से आएगा, इनका कोई उल्लेख रेल बजट में नहीं है। संसाधनों के बढ़ाने पर बजट में कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ऐसे में यही आशंका होती है कि जैसी कि अब नई परम्परा चल पड़ी है, बजट के बाद कर लगाए जाएंगे और जनता की जेब पर अप्रत्यक्ष रूप से डाका डाला जाएगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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महिला समाख्या अधिकारी के साथ हुये दुव्र्यवहार का तीव्र विरोध व निन्दा

Posted on 24 February 2010 by admin

इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एण्ड डाक्यूमेंटेशन इन सोशल साइन्सेंस आई0आर0डी0एस0, लखनऊ के लोग महिला समाख्या की महिला अधिकारी के साथ गोमतीनगर स्थित कार्यालय में हुये दुव्र्यवहार तथा छेड़खानी जैसी घटिया हरकत का तीव्र विरोध तथा निन्दा करते हैं। साथ ही हम यह मांग भी करते हैं कि उक्त आरोपों के अभियुक्त मृदुल तिवारी के विरूद्ध विधि के अनुसार कठोरतम कार्यवाही की जाये। हम यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि जब एक सम्मानित महिला अपनी सामाजिक प्रतिश्ठा के क्षरण होने के भय के बावजूद आगे बढ़ कर किसी सहकर्मी के खिलाफ आरोप लगा सकने की हिम्मत कर रही हैं तो फिर ऐसे मामले में भी कार्यवाही किये जाने में विलंब क्यों हो रहा है। साथ ही यह बात भी हमें दुखद लग रही है कि इन अभियुक्त को बचाने के प्रयास भी शुरू हो गये दिखाई देते हैं।

अत: हम आई0आर0डी0एस0 के कार्यकर्ता इस मामले में तत्काल न्याय करने तथा अभियुक्त के खिलाफ नियमानुसार कठोरतम कार्यवाही करने हेतु पुलिस से मांग करती है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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छात्रों के साथ अभिभावकों की भी काऊिन्सलिंग का होना जरूरी

Posted on 24 February 2010 by admin

जरूरत से ज्यादा अपेक्षाओं और पढ़ायी के बोझ तले छात्रों में बढ़ रहे तनाव और आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी लाने के लिये छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों की भी काऊिन्सलिंग का होना जरूरी है, ताकि बेहतर षिक्षा और भविश्य के लिये छात्रों एवं उनके अभिभावकों के बीच तारतम्य स्थापित हो सके और एक-दूसरे की मनोस्थिति को समझ कर अपने बच्चों के बेहतर भविश्य के रास्ते का निर्माण कर सकें। यहां जानकीपुरम विस्तार योजना में सोसायटी ऑफ कैरियर टेक्नोलॉजी (सोक्ट) के सेन्टर में `अभिभावकों की अपेक्षायें और छात्र´ विशय को लेकर हुयी संगोश्ठी में यह बातें संस्था के चेयरमैन व काऊन्सलर डा0 अगम दयाल ने व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभिभावकों की अपेक्षाओं और दबाव के आगे छात्र अपनी इच्छाओं को दबाकर अरूचि विशयों में पढ़ायी करते है और जब आषानुरूप परिणाम सामने न आते देख छात्र या तो तनावग्रस्त हो जाते है और कुछ इस कदर अवसाद में पहंुच जाते है कि वह अपनी जीवन लीला तक समाप्त कर लेते है, तब अभिभावकों के लिये बहुत देर हो चुकी होती है। श्री दयाल ने संगोश्ठी को सम्बोधित करते हुये कहा कि छात्रों के तनावग्रस्त होने या आत्महत्या जैसी घटनाओं को अंजाम देने की स्थितियां उत्पन्न हो इससे पहले अभिभावकों को चाहिए कि अपने छात्र बच्चों की मनोस्थिति को समझ कर उसके भविश्य के लिये कोई कदम उठाये न कि जबरन अपनी इच्छाओं को थोपना चाहिए। तनाव प्रबन्धन पर पुस्तकें लिख चुके संस्था के संस्थापन चेयरमैन श्री दयाल ने माना कि अधिकतर मामलों में अभिभावक और छात्र एक-दूसरे की मनोस्थिति को समझ नहीं पा रहे है, नतीजा षिक्षा में विफलता मिलने पर छात्रों में आत्महत्याओं की घटनायें निरन्तर बढ़ रही है, ऐसी स्थिति में जरूरी हो गया है कि बढ़ते तनाव और अवसादों में कमी लाने के लिये छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों की एक साथ काऊिन्सलिंग की आवष्यकता है। संगोश्ठी में सोक्ट के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के अलावा अन्य कई लोग भी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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