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Archive | साहित्य

उत्तर प्रदेष सरकार और रुमी फाउण्डेशन, फिल्म निर्माता-चित्रकार मुजफ्फर अली की जहान-ए-खुसरो की लखनऊ के दिलकुशा पैलेस के खण्डहरों में गूँज

Posted on 08 March 2013 by admin

उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री द्वारा हू-द सुफिज आॅफ अवध के पाँचवें संस्करण का विमोचन होगा।
आशा दीक्षित (दिल्ली), चाँद निजामी और साथी (दिल्ली), मर्कन डेडे (इस्तांबुल) और सफकत अली खान के साथ मालिनी अवस्थी की नजीर अकबराबाड़ी की प्रस्तुति

edited-img_3451 7 मार्च, 2013

जहान-ए-खुसरो का 12वाँ पर्व हजरत निजामुद्दीन औलिया के 709वीं उर्स के मौके पर दिल्ली में 1, 2, और 3 मार्च को मनाया गया तथा लखनऊ में 8 और 9 मार्च को मनाया जायेगा जो यहाँ की दूसरी पर्व होगी। उत्तर प्रदेश सरकार और रुमि फाउण्डेशन द्वारा प्रस्तुत, फिल्म निर्माता-चित्रकार मुजफ्फर अली के जहान-ए-खुसरो की गूँज एक बार फिर दिलकुश पैलेस के खण्डहरों में सुनाई पड़ेगी। यह पर्व रहस्यवाद की कविताओं में आत्मिक संगीत व ईश्वरीय नृत्य की शैली में प्रस्तुत किया जायेगा।
समारोह में रहस्यवादी संगीत की मधुरता और वर्तमान पीढ़ी के बीच लगातार चल रहे संवाद की भी झलक दिखायी देगी। इस वर्ष जहान-ए-खुसरो में भाग ले रहे कलाकार एक नये रूप में रहस्यवाद की प्रस्तुती करेंगे।
मालिनी अवस्थी (लखनऊ), आशा दीक्षित (दिल्ली), चाँद निजामी और साथी (दिल्ली), मर्कन डेडे (इस्तांबुल) और सफकत अली खान (लाहौर) के साथ नजीर अकबराबाड़ी पेश करेंगी।
जहान-ए-खुसरो में हर वर्ष सूफी रहस्यवाद के गीत एक नये रूप में पेश किए जाते हैं। पिछले वर्षों में जहान-ए-खुसरो दिल्ली, लन्दन, बाॅस्टन, जयपुर, श्रीनगर और लखनऊ में आयोजित किया गया जिसमें दुनिया के अलग-अलग शहरों जैसे-दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, हैदराबाद, अजमेर, लाहौर, कराची, ढाका, ताशकन्द, तेहरान, जेरूसलम, राबात, ट्यूनिश, इस्तांबुल, रोम, खारतुम, कैरो, एथेन्स, बर्लिन, टोक्यो, न्यूयाॅर्क और टोरन्टो में सूफी गायकों, नृत्यकों तथा संगीतकारों ने अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस पर्व में शुभा मुदगल, शफकत अली खान, ईला अरूण, सुखविन्दर सिंह, मालविका सर्रूकाई, शुजात हुसैन खान और आबिदा परवीन जैसे महान कलाकारों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं।
फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली जो उत्सव के रचनात्मक निदेशक हैं के अनुसार, ‘‘इस उत्सव के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्षों में एक पूर्व एवं पश्चिम के बीच की खाई को पाटना और उपस्थित समुदाय को इसकी सर्वव्यापकता व लोकप्रियता की अनुभूति कराना है। साथ ही उत्सव में भाग लेने वालों, पर्यटकों, निगमित संगठनों तथा स्थानीय निवासियों को सूफी संगीत के माध्यम से आकर्षित करना है।’’
जहान-ए-खुसरो के इस मौके पर रुमि फाउण्डेशन ने प्रेम और समर्पण के संदेश से ओत-प्रोत कविताओं का एक प्रकाशन ’’हू-दी सूफी वे’’ भी जारी किया। यह प्रकाशन विश्व में अपनी तरह का अकेला है और इसमें एक आत्मा और सहअस्त्वि के विश्वव्यापी संदेश की विश्व में प्रशंसा की गई है।
अब तक के संस्करण:
पहला संस्करण भारत में बहु-संस्कृति अथवा अनेकता की पहचान कराने वाले महान सूफी कवि - संत हजरत अमीर खुसरो की याद में जारी किया गया। दूसरा संस्करण मेवलाना जलालुद्दीन रुमि की 800वीं जन्मतिथि के अवसर पर जारी हुआ। जलालुद्दीन रुमि विश्व के महानतम रहस्यवाद लेखक रहे हैं। यह प्रकाशन कश्मीर के सूफियों और ऋषियों के उन सूफी कवियों को समर्पित है जिन्होंने आपसी मेलजोल वाले समाज के लिए महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार की। पंजाब के सूफियों से संबंधित प्रकाशन अपने पूर्व वैभव और विभाजन से पूर्व पाँच नदियों की पुण्यभूमि प्रस्तुत करती है। इस प्रकाशन में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला गया है।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ’’हू-दी सुफीज आॅफ अवध’’ के पाँचवें संस्करण का विमोचन जहान-ए-खुसरो के दौरान 8 मार्च 2013 को करेंगे।
जहान-ए-खुसरोः
यह अन्तर्राष्ट्रीय वार्षिक सूफी संगीत समारोह ’’हृदय के साम्राज्य में’’ के तौर पर नई दिल्ली में 2001 में प्रारम्भ किया गया। रुमि फाउण्डेशन द्वारा प्रस्तुत और फिल्म निर्माता-चित्रकार मुजफ्फर अली द्वारा निर्देशित और डिजायन किया गया जहान-ए-खुसरो देश के सांस्कृतिक कार्यक्रमों नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। उत्सव में विश्व भर से सूफी परंपरा के विख्यात कलाकार भाग लेते रहे हैं। यह उभरते गायकों सुफियाना संगीत सहित क्लासिकल और माॅडर्न डान्स कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता रहा है। जहान-ए-खुसरो विश्व भर के संगीतप्रेमियों को संगीत से मंत्रमुग्ध करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
निमंत्रण उपलब्ध हैं: यूनिवर्सल बुक डिपो, हजरतगंज और गोमती नगर
रुमि फाउण्डेशन ने डाॅ. मंसूर हसन के संयोजन में एक कार्यदल गठित किया है जिसे मुमताज अली खान, जयन्त कृष्णा, डाॅ. कमर रहमान, परवीन ताल्हा, मालिनी अवस्थी, ज्योति सिन्हा और तारीक खान जैसे योग्य और कर्मठ व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त है। दो वर्ष पूर्व गठन के पश्चात इन्होंने जश्न-ए-बेदम, जश्न-ए-वारिस, बाज-ए-दिलबारान और मार्च 2012 में लखनऊ में जश्न-ए-खुसरो के प्रथम उत्सव का आयोजन किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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वसन्तोत्सव में विद्वानों ने किया संस्कृत भाषा को पढ़ने का आहवान

Posted on 16 February 2013 by admin

‘‘संस्कृत भाषा संस्कार, नैतिकता, प्रेम और सदाचार की भाषा है। संस्कृत का अध्ययन करने वाला व्यक्ति भविष्य में जीविका का साधन तो प्राप्त कर ही लेगा साथ ही उसे सुख एवं शान्ति भी प्राप्त होगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 ओम प्रकाश पाण्डेय ने ये विचार उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा वसन्त पंचती के अवसर पर आयोजित समारोह में व्यक्ति किये। इस अवसर पर विद्यान्त डिग्री कालेज के डा0 विजय कर्ण ने कहा कि प्राचीनतम होते हुए भी संस्कृत में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के मूल सूत्र विद्यमान हैं। कानपुर से आई डा0 नवलता वर्मा ने कहा कि संस्कृत की लिपि देवनागरी है, इसमें शब्दों को जैसा लिखते हैं वैसा ही बोलते भी हैं। संस्थान के निदेशक श्री डी0 एस0 श्रीवास्तव ने भी संस्कृत भाषा के महत्व के बारे में अपने विचार व्यक्त किये।
इस अवसर पर कक्षा 6 से इण्टर अथवा समकक्ष तक के छात्र/छात्राओं की बालकथा कौमुदी पुस्तक से संस्कृत वाचन तथा बी0 ए0 एवं एम0 ए0/समकक्ष छात्र/छात्राओं की शिवराज विजय एंव कादम्बरी के शुकनाशोपदेश से संस्कृत श्रुत लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शाम्भवी कर्ण को प्रथम, आदर्श विद्यामन्दिर  की छात्रा जया सिंह को द्वितीय तथा आदर्श विद्या मन्दिर के ही छात्र अविरल सिंह को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सैट डोमनिक के उत्कर्ष सिंह को सान्त्वना पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार स्वरूप क्रमशः 1000 रूपये, 800 रूपये, 500 रूप्ये तथा 300 रूपये की धनराशि के साथ प्रमाण पत्र एवं संस्थान द्वारा प्रकाशित बाल साहित्य की चार-चार पुस्तकें संस्थान के निदेशक श्री डी0 एस0 श्रीवास्तव द्वारा पुरस्कृत छात्रों को प्रदान की गई।
इस अवसर पर संस्थान के अधिकारियों सहित प्रो0 ओम प्रकाश पाण्डेय, डा0 नवलता वर्मा, डा0 ब्रज भूषण ओझा तथा डा0 अशोक शतपथी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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जबसे पतवारों ने मेरी नाव को धोखा दिया मुझे भंवर में तैरने का हौसला आ गया-उदय प्रताप सिंह

Posted on 09 February 2013 by admin

आॅसू से आनन्द तक की यात्रा है कविता। कविता प्रयास से आती है व्याकरण से नहीं। कविता से कोई न कोई संदेश लोगों तक अवश्य पहुॅचना चाहिये। यह उद्गार श्री उदय प्रताप सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की पावन स्मृति को समर्पित कविता लेखन पर केन्द्रित दो दिवसीय कार्यशाला एवं महाप्राण निराला की पावन स्मृति को समर्पित काव्य गोष्ठी के समापन सत्र के दौरान निराला साहित्य केन्द्र एवं सभागार, हिन्दी भवन, लखनऊ में व्यक्त किये।
कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि अपने भावनाओं का उदात्तीकरण करने का भाव है कविता। दुनिया में कविता पहले शुरू हुई व्याकरण बाद में।
इस अवसर पर वाराणसी से पधारे श्री श्रीकृष्ण तिवारी ने कहा कि काव्य लेखन एक चक्रव्यूह है। तुक काव्य का काव्यात्मक पक्ष है। उन्होंने तुक व मात्रा तथा कविता की बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया।
समापन सत्र के दौरान श्री कुंवर बेचैन ने कहा कि शब्दों को भावपूर्ण ढंग से कहा जाये वही कविता है। उन्होंने कविता लिखने के ढंग को बेहद सरल शब्दों में बताया तथा कविता लेखन को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर डा0 बुद्धिनाथ मिश्रा ने भी कविता लेखन पर अपने विचार प्रस्तुत किये। समापन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को संस्थान द्वारा प्रमाण पत्र भी वितरित किया गया।
समापन सत्र के तृतीय सत्र में महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला को समर्पित कविता पाठ किया गया। इस अवसर पर श्री आत्म प्रकाश शुक्ल, कानपुर, डा0 कुंवर बेचैन गाजियाबाद, श्री श्रीकृष्ण तिवारी, वाराणसी, डा0 बुद्धिनाथ मिश्र, देहरादून, श्री रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी, आगरा, श्री सतीश आर्य, गोण्डा, डा0 मधुरिमा सिंह, श्री रमेश रंजन, श्री देवल आशीष (लखनऊ) आदि कवियों द्वारा कविता पाठ किया गया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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कविता लेखन एवं काव्य गोष्ठी पर कार्यशाला 07 व 08 फरवरी को

Posted on 07 February 2013 by admin

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में जयशंकर प्रसाद एवं सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की पावन स्मृति को समर्पित कविता लेखन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन आगामी 07 व 08 फरवरी को निराला साहित्य केन्द्र एवं सभागार हिन्दी भवन में किया जायेगा। इसकी अध्यक्षता हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष, उदय प्रताप सिंह करेंगे।
यह जानकारी हिन्दी संस्थान के निदेशक डा0 सुधाकर अदीब ने दी है। उन्होंने बताया कि कविता लेखन विषय पर केन्द्रित कार्यशाला चार सत्रों में होगी। 07 फरवरी को पूर्वाह्न 11ः30 बजे आयोजित उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डा0 कुॅवर बेचैन, होंगे। बीज वक्तव्य श्री मूलचन्द्र गौतम का होगा।
डा0 अदीब ने बताया कि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की स्मृति को समर्पित कार्यशाला के 08 फरवरी को आयोजित तृतीय सत्र में देश के प्रख्यात कवियों द्वारा कविता पाठ किया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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अंग्रेज विद्वान वैदिक ज्ञान को कमतर बताकर भारतीय संस्कृति नष्ट करना चाहते थे

Posted on 03 September 2012 by admin

हजारों वर्ष प्राचीन वैदिक काल के समाज, ज्ञान-विज्ञान और दर्शन पर पत्रकार विधान परिषद सदस्य हृदयनारायण दीक्षित की किताब ‘मधुविद्या’का विमोचन उ0प्र0 हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में पूर्व केन्द्रीय मंत्री, संसद की लोकलेखा समिति के सभापति डाॅ0 मुरली मनोहर जोशी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उ0प्र0 विधानसभा के अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने की।
madhuvidya-7 डाॅ0 जोशी ने कहा कि अंग्रेज विद्वान वैदिक ज्ञान को कमतर बताकर भारतीय संस्कृति नष्ट करना चाहते थे। मैक्समूलर ने अपनी पत्नी को लिखे पत्र में भारतीय संस्कृति और दर्शन को नष्ट करने की बात कही थी। लेकिन दयानंद, सायण, सातवलेकर आदि विद्वानों ने ऋग्वेद और वैदिक साहित्य के भाष्य किये। वेदों में विश्व को मधुमय बनाने की स्तुतियां हैं। श्री दीक्षित ने सरल, सुबोध भाषा में वेदों की मधुविद्या को पुस्तक रूप में तैयार किया है। उन्होंने दीक्षित की किताब ‘मधुविद्या’ को पढ़े जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान विज्ञान के सनातन प्रवाह के कारण ही भारत की प्रतिष्ठा है।
अध्यक्षीय भाषण में विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि श्री दीक्षित पहले लड़ाकू विधायक थे। तमाम विषय उठाते थे। अब भारतीय संस्कृति व ज्ञान विज्ञान पर निरंतर लिख रहे हैं। ‘मधुविद्या’ के वैदिक ज्ञान को उन्होंने व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया है। उम्मीद है कि यह पुस्तक खूब लोकप्रिय होगी और वे इसी प्रकार लगातार लिखते रहेंगे।
मुख्य वक्ता वेद विद्वान लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश पाण्डेय ने ऋग्वेद से लेकर उपनिषद् काल तक विस्तृत समाज को मधुमय प्रीतिमय बनाने का इतिहास बताया और कहा कि वैदिक मधुज्ञान, मधुगान को सरल शब्दों में लिख श्री दीक्षित ने बड़ा काम किया है।
लेखक हृदयनारायण दीक्षित ने बताया कि वैदिक समाज मधुप्रेमी था। मधुप्रिय था। मधुवाणी बोलता था। भारत मधुमय था। लेकिन आधुनिक समाज मधुहीन सुगर फ्री हो रहा है। समाज में प्रीति प्रेम और मधुमय एकात्मकता नहीं है। वैदिक ऋषि विश्व को मधुमय बनाने की हजारों गतिविधियां बता गए हैं। इसी का नाम मधुविद्या है और यह नाम ऋग्वेद में आया है। पुस्तक में दैनिक जीवन से जुड़े, विवाह, काम-सेक्स, राजनीति, पर्यावरण, समाज संगठन आदि विषयों पर 36 निबंध हैं। पुस्तक का उद्देश्य समाज को रागद्वैषविहीन मधुमय बनाना है।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रधर्म प्रकाशन के प्रबंधक पवन पुत्र बादल ने किया। प्रकाशन वी0एल0 मीडिया सोल्यूशन्स नई दिल्ली के प्रोपराइटर नित्यानंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर सदस्य विधान परिषद डाॅ0 महेन्द्र सिंह, रामू द्विवेदी, पूर्व सांसद सत्यदेव सिंह, भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन राकेश जैन, दयाशंकर सिंह, विजय पाठक, राजेन्द्र तिवारी, दिलीप श्रीवास्तव, मनीष दीक्षित, बार काउंसिल आॅफ यू0पी0 के सदस्य अखिलेश अवस्थी एडवोकेट, समाजसेवी जयपाल सिंह, रामप्रताप सिंह एडवोकेट, रामप्रताप सिंह चैहान एडवोकेट, प्रेमशंकर बाजपेयी एडवोकेट, अतुलेश सिंह एडवोकेट, प्रेमशंकर त्रिवेदी एडवोकेट, डाॅ0 उदयवीर सिंह एडवोकेट, सौरभ लवानिया एडवोकेट, संदीप दुबे आदि मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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जो जन-गण के मन बसे का भव्य लोकार्पण यूपी प्रेस क्लब के प्रांगण में हुआ

Posted on 15 April 2012 by admin

वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव रचित पुस्तक ‘जो जन-गण के मन बसे’ का भव्य लोकार्पण यूपी प्रेस क्लब के प्रांगण में हुआ। पुस्तक का लोकार्पण लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा एवं विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने संयुक्त रूप से किया। लोकार्पण समारोह में लेखक के विक्रम राव के साथ ही नगर के तमाम वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखकों की उपस्थिती रही। के.विक्रम राव द्वारा लिखित इस पुस्तक में आधुनिक परिवेश में शिव, कृष्ण, गणेश, राम और हनुमान पर विश्लेषणात्मक लेख है। कांची पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरू जयेन्द्र सरस्वती ने इस पुस्तक की भूमिका में लिखा हैं कि ‘‘इन अवतारों पर विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करना अपने आप में ही विशिष्टता है। राज्यपाल बनवारीलाल जोशी ने अपनी टिप्पणी में लिखा कि सभी महापुरूषों का जीवन प्रसंग प्रेरणास्पद है। पुस्तक की समीक्षा महेश चन्द्र द्विवेदी, डा. उषा सिन्हा, डा. योगेश मिश्र, श्री देवकीनन्दन शान्त आदि ने की है। साहित्यकार देवकी नन्दन शांत ने पुस्तक की काव्यात्मक समीक्षा करते हुये जो गन गण के मन बसे है वे हैं, भोलेनाथ, पांच देव रक्षा करे, रहते सबके साथ जैसी पंक्तियों को लोकार्पण समारोह में प्रस्तुत कर पुस्तक की महत्वता से पाठकों को परिचित कराने का सफल प्रयास किया।

पुस्तक के लेखों के विषय में पुस्तक का सम्पादन करने वाले आनन्द मिश्र ने कहा कि इन ललित लेखों की मनोहरता और हृदयग्राहिता के कारण किसी भी पाठक का मन इन्हें पढ़ते-पढ़ते ही प्रमुदिम उठे बिना न रहेगा। लेखक ऐसी रसमयी, विलक्षण तथा चुटीली शैली है कि पढ़ने में चाव आता है। इसकी रोचकता दर्शकों को सम्मोहित करने में समर्थ है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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विधि एवं विधायन क्षेत्र में हिन्दी का और प्रयोग किया जाय - प्रमुख सचिव न्याय

Posted on 14 September 2010 by admin

लखनऊ- उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सचिव न्याय एवं विधायी श्री के0 के0 शर्मा के कक्ष में आज यहॉं “हिन्दी दिवस´´ के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर श्री वर्मा ने कहा कि विधि एवं विधायन के क्षेत्र में हिन्दी का प्रयोग बढ़ा है, इसको और बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि न्याय क्षेत्र में न्यायालयों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ा है।

कार्यक्रम का संचालन विशेष सचिव विधायी श्री अलख नारायण ने करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में विधि एवं विधायन में पहले से ज्यादा हिन्दी का प्रयोग हो रहा है इसमें और तेजी की आवश्यकता है।

इस अवसर पर विशेष सचिव न्याय एवं विधायी सर्वश्री एन0 एस0 रावल, महबूब अली एवं रंग नाथ पाण्डेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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मार्कण्डेय के निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति - मुलायम सिंह

Posted on 19 March 2010 by admin

लखनऊ - समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव तथा राष्ट्रीय महासचिव श्री मोहन सिंह ने प्रख्यात कथाकार श्री मार्कण्डेय के निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा है कि उनके निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। सिंह ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि ग्रामीण जीवन का उन्होंने यथार्थ चित्रण किया था। श्री मार्कण्डेय ने मुंशी प्रेमचन्द की कथा परम्परा को नई दिशा दी थी। उनकी कहानियां भारत ही नहीं, विदेशों में भी अनूदित होकर खूब पढ़ी जाती थीं। उनके निधन से हिन्दी साहित्य जगत में जो सूनापन हो गया है उसका भर पाना सम्भव नहीं।

प्रख्यात साहित्यकार मार्कण्डेय ने बृहस्पतिवार को नई दिल्ली से आजमगढ़ जाने से पूर्व रोहिणी सेक्टर स्थित आवास पर उन्होंने अन्तिम सांस ली। इलाज के लिए वह परिवार सहित यहीं रुके थे। वे करीब अस्सी वर्ष के थे।
उनके परिवार में पत्नी विद्यावती सिंह, एक बेटा और दो बेटियां हैं। बीते दिनों दोबारा कैंसर से पीड़ित होने पर इलाज के लिए उन्हें नई दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर अस्पताल ले जाया गया था।

सिंह नें कहा कि श्री मार्कडेय प्रगतिशील उपन्यासकारों- कथाकारों में गिने जाते थे। नई पीढ़ी को उनकी कृतियों से विशे प्रेरणा मिलेगी। कितने ही युवा लेखकों को उन्होंने प्रोत्साहित किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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लखनऊ में टोयोटा क्यू वल्र्ड देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी

Posted on 23 January 2010 by admin

•    टोयोटा `क्यू´ वल्र्ड कार्यक्रम का लखनऊ में आयोजन
•    टोयोटा `क्यू´ वल्र्ड का देश के 10  शहरो में आयोजन होगा
•    4 माह का यह कार्यक्रम जनवरी से अप्रैल तक चलेगा
•    ग्राहक टोयोटा कांसेप्ट `एटियोस´ देख पाएंगे
•    टोयोटा कारों की रोमांचक श्रंखला पेश, टोयोटा की गुणवत्ता और तकनीक की शानदार प्रदर्शनी
•    टोयोटा कार श्रंखला को छूने और महसूस करने के साथ ग्राहकों का आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीक से परिचय

लखनऊ- टोयोटा किलोश्कर मोटर के टोयोटा क्यू वल्र्ड का आज लखनऊ में शुभारंभ हुआ। मोती महल गार्डन में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम को देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी वर्गो से यहां आए लोगों में टोयोटा की चिर प्रतीक्षित कॉम्पैक्ट कार `एटियोस´ के कांसेप्ट मॉडल को देखने का उत्साह देखते ही बनता था। पूरे लखनऊ में कार्यक्रम की चर्चा रही। कार के शौकीन लोगों और संभावित ग्राहकों ने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

एटियोस - वल्र्ड फस्र्ट, इण्डिया फस्र्ट, के साथ टोयोटा मॉस वाल्यूम सेगमेंट में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ग्राहकों तक अधिकतम पहुंच कायम करने के लिए टोयोटा 2010 के अन्त तक अपने डीलर/सर्विस नेटवर्क में लगभग 150 नए डीलरों को जोड़ेगी। वर्तमान में यूपी में टोयोटा के 9 डीलर हैं और ग्राहकों तक बेहतर पहुंच के द्रष्टिकोण से 3 नए डीलर नेटवर्क से जोड़े जाएंगे। वर्तमान में इनोवा और कोरोला अल्टीस का यूपी बाजार पर क्रमश: 21 प्रतिशत, 34 प्रतिशत अधिकार है जबकि 44 प्रतिशत के साथ फाच्युर्नर बाजार का नेतृत्व कर रही है।

इस अवसर पर टोयोटा के वरिष्ठ अधिकारीगण भी शामिल थे जिनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं मैनेजिंग कॉर्डिनेटर श्री मसातो कुरियामा, महाप्रबंधक (विपणन) श्री आशीश कुमार और महाप्रबंधक (विक्रय) श्रीशैलेश शेट्टी।dealer-principal-mr-sandeep-singh-deputy-managing-director-tkm-mr-sailesh-shetty-general-manager-sales-and-mr1

इस अवसर पर टोयोटा किलोश्कर मोटर के उप महाप्रबंधक (विपणन) श्री सन्दीप सिंह ने कहा, हम पूरे देश के कार के शौकीन लोगों और ग्राहकों को टोयोटा की गुणवत्ता और तकनीक से रू-ब-रू रखना चाहेंगे। इस अनुभव को महज एक महानगर के लोगों तक सीमित नहीं रखेंगे। हमारे लिए यह सुनहरा अवसर होगा जबकि हम पूरे देश के ग्राहकों की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया जान पाएंगे और उसके आधार पर मौजूदा उत्पादों एवं सेवाओं को बेहतर बना पाएंगे। इससे, जाहिर है, ग्राहकों को भी बेहतर सेवा मिल पाएगी। लखनऊ हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार है और हम यहां भावी विस्तार के लिए उत्सुक हैं। एटियोस कांसेप्ट मॉडल को पेश करने के साथ हमें उम्मीद है कि बहुत कम समय के अन्दर भारतीय बाजार के बड़े हिस्से पर हमारा अधिकार होगा।

हाल में आयोजित दिल्ली ऑटो एक्सपो में टोयोटा एटियोस के वल्र्ड प्रीमियर की शानदार सफलता के बाद टोयोटा की विश्व प्रसिद्ध गुणवत्ता और तकनीक को लखनऊ में पेश किया गया है। एटियोस के कांसेप्ट मॉडल पेश करने को लेकर उत्साहित ग्राहक अब अपने ही हर में इस कार के कांसेप्ट मॉडल को देख पाएंगे।

गौरतलब है कि एटियोस के वल्र्ड प्रीमियर और उसकी नवीनतम तकनीक देखने दिल्ली ऑटो एक्सपो में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी और अब टोयोटा क्यू वल्र्ड के जरिये कम्पनी ग्राहकों तक पहुंच कर उन्हें एटियोस का प्रत्यक्ष अनुभव देगी।

प्रदर्शनी में 11 गाड़ियों की एक शानदार श्रंखला शामिल थी। मजे की बात यह कि लोगों को टोयोटा कारों को छूने और महसूस करने का अभूतपूर्व अनुभव मिला। इस अवसर पर एटियोस की चर्चा रही। प्रदर्शनी में पेश गाड़ियां तीन थीम की प्रतीक दिखीं : पर्यावरण अनुकूल और भावी कार,कांसेप्ट कार और `टोयोटा कार श्रंखलाप्रदर्शनी में हाल में पेश एटियोस कांसेप्ट के अतिरिक्त टोयोटा की मौजूदा और भावी कार श्रंखला की कई मजेदार और रोमांचक गाड़ियां देखने को मिलीं जैसे :
•    हाल में पेश प्रायस - दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली हाइब्रीड कार
•    हाल में पेश प्रादो डीज़ल
•    एमपीवी सेगमेंट में सबसे पसन्दीदा कार - फाच्युर्नर और एसयूवी का हंशाह - लैण्ड क्रूज़र

प्रदर्शनी में आए ग्राहकों के लिए विशेश तौर पर मौज-मस्ती और मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

चण्डीगढ़ और लखनऊ के बाद टोयोटा क्यू वल्र्ड देश के 8 अन्य हरों में देखने को मिलेगा जिनमें शामिल हैं मुम्बई, अहमदाबाद, पुणे, कोचीन, बंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता। टोयोटा क्यू वल्र्ड कार्यक्रम 4 माह तक चलेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मजदूरों को रोजगार की गारन्टी का प्रकाशन

Posted on 17 January 2010 by admin

भारत सरकार ने नरेगा (रोजगार गारन्टी अधिनियम) लागू करके भले ही सोंच लिया हो कि इससे गांव के लोगों की रोजी-रोटी की समस्या दूर की जा सकेगी सरकार की यह सोंच भी सम्भवत: सच होती यदि प्रदेश सरकारें अपने-अपने यहां नरेगा योजना ईमानदारी से लागू करती। वास्तव में नरेगा का भी वही हाल हुआ है जैसा कि अन्य सरकारी योजनाओं का होता आया है।

नरेगा में अधिकतर जगहों पर रोजगार के इच्छुक सभी ग्रामीणों का पंजीकरण नहीं हुआ जिनका पंजीकरण हुआ है उनमें से अधितर को निर्धारित 100 दिन का रोजगार नहीं मिला जिन्हें रोजगार मिला है पूरा भुगतान नहीं मिला है अनेक मजदूरों के जॉब कार्ड प्रभावशाली लोगों ने अपने यहां रख रखे हैं।

इन सब बाधाओं के अलावा योजना का बेहतर लाभ न उठा पाने का मुख्य कारण योजना की बारीक जानकारी न होना है। भले ही किसी परिवार को जॉब कार्ड मिल गया हो किन्तु उन्हें लिखित में रोजगार मांगना जरूरी हैं। जब तक काम नहीं मांगेगें, तब तक नरेगा में काम नहीं मिलेगा। बारीक जानकारी न होने के कारण मजदूर इस बात को नहीं जानते हैं। जिसका सरकारी कर्मचारी फायदा उठाते हैं और शिकायत होने पर काम न मांगने की बात कह कर बच जाते हैं। इसी प्रकार नरेगा में अनेक बारीकियां हैं जिन्हें ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों, निगरानी पर्यवेक्षकों, सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ मजदूरों को जानना आवश्यक हैं।

इस कमी को श्री शिव प्रसाद भारती ने मजदूरों को रोजगार की गारन्टी पुस्तक लिखकर दूर किया है। जिसका प्रकाशन रोजगार सूचना एवं मार्ग दर्शन गाजियाबाद ने किया है। पुस्तक में नरेगा के अन्र्तगत ग्रमीणों के रोजगार पाने के अधिकार व अन्य जानकारी सामान्य भाषा में विस्तार से दी  गई है। पंजीकरण के बाद जॉब कार्ड के आधार पर सौ दिन रोजगार की मॉग 15  दिन में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता की मांग तथा यदि अभी तक किसी परिवार का पंजीकरण नहीं हुआ तो कैसे कराया जा सकता है जैसी अनेक उपयोगी जानकारी पुस्तक में दी गई हैं। nrega1narega2

पुस्तक मजदूरों के अलावा नरेगा लागू करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों, ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों, निगरानी पर्यवेक्षकों के लिये विशेष उपयोगी होगी । पुस्तक का मूल्य मात्रा 25/-रू0 मजदूरों को ध्यान में रख कर निर्धारित किया गया है जो उचित प्रतीत होता है।

लेखक                      -    श्री शिव प्रसाद भारती
प्रकाशक                   -    रोजगार सूचना एवं मार्गदर्शन
32, सुचिता काम्पलेक्स, अम्बेडकर रोड, गाजियाबाद    201001
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695

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Vikas Sharma
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E-mail :editor@bundelkhandlive.com
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