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Archive | सहारनपुर

आज भी साढे सत्तार्इस प्रतिशत महिलायें घरेलू हिंसा का शिकार

Posted on 21 March 2014 by admin

अल्लामा इक़बाल वैलफेयर एण्ड एजूकेशनल सोसायटी बेहट सहारनपुर द्वारा भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा स्वीकृत नर्इ रौशनी योजना के अन्तर्गत हबीबगढ सहारनपुर में चल रहे छ: दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम लीडरशिप ट्रेनिंग फार माइनारिटी वूमेन के अवसर पर महिलाओं को अपने ऊपर सदियों से हो रहे अत्याचारों से बचाने हेतु प्रशिक्षिकाओं ने जागरूक करने हेतु प्रशिक्षार्थियों के समक्ष अपने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर प्रशिक्षिका श्रीमति नसरीन ने कहा कि बडे खेद का विषय है कि इस आधुनिक भारत में आज भी साढे सत्तार्इस प्रतिशत महिलायें घरेलू हिंसा का शिकार हैं। श्रीमति नसरीन ने कहा कि आज भी दहेज प्रथा, बाल विवाह, यौन शोषण, सूनी गोद, कन्या भ्रूण हत्या तथा विधवा शोषण आदि जैसी कुप्रथाएं हमारे समाज को जकडे हुए हैं। श्रीमति नसरीन ने कहा कि आज भी समाज में विधवाओं को उचित सम्मान प्राप्त नही है, उसे पति की यादों के सहारे जीवन गुजारने पर मजबूर किया जाता है। परिवार के लोग सर्वप्रथम तो विधवा को अपने साथ रखना ही नही चाहते यदि वें साथ रहती भी हैं तो उसे घर के शुभ कार्यों से दूर रखा जाता है तथा उसे इस बात के लिये सख्त निर्देश दिये जाते हैं कि वें किसी शुभ काम में हाथ न डाले, किसी से हंसकर बात न करें तथा दूसरे विवाह के विषय में कदापि न सोचें। श्रीमति नसरीन ने कहा कि विधवाओं पर उक्त प्रतिबन्ध अमानवीय है जब भारत सरकार ने सभी महिलाओं को बराबर का सम्मान और बराबर के अधिकार दिये हैं, तब आज के युग में इस प्रकार की कुप्रथा के क्या मायने हैं। श्रीमति नसरीन ने कहा कि हमारी महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पडेगा तथा संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों को पहचान कर हमारी महिलाओं को इन समस्याओं से ऊपर उठना होगा तथा इन कुप्रथाओं को दूर करने एवं कराने हेतु कानून का भी सहारा लेना पडेगा। श्रीमति नसरीन ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली सैंकडों महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति तथा संविधान मेंं प्राप्त अधिकारों के प्रति उन्हे सचेत करते हुए कहा कि हम सबको अपने भविष्य के लिये मिलजुलकर हिम्मत जुटानी पडेगी तथा इन कुप्रथाओं का समापन करना हम सबका कर्तव्य होगा। इधर गत 6 दिन से हयात कालोनी में चल रहे प्रशिक्षण शिविर को सम्बोधित करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग की बीआरसी श्रीमति बाला देवी ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक होना पडेगा। श्रीमति बाला देवी ने कहा कि अनपढ महिलाएं अपने परिवार के लिये अंधकार की मानिन्द हैं। जबकि पढी लिखी महिलाएं अपने परिवार को प्रकाश उपलब्ध कराती हैं। तथा आसपास के क्षेत्र को पढी लिखी महिलाएं अपनी योग्यता एवं गुणों से प्रकाशमय बना देती हैं। श्रीमति बाला देवी ने कहा कि अगर घर की महिला शिक्षित है तो वह अपने बच्चों को अवश्य शिक्षित करेगी तथा शिक्षा के कारण ही उसका परिवार सही मार्ग पर चलेगा और शिक्षित महिला का परिवार ही विकास की ओर कामजन रहते हुए अन्य महिलाओं को भी शिक्षित करने का अहम काम अन्जाम देगा। श्रीमति बाला देवी ने लाभार्थियों को सरकार द्वारा महिला शिक्षा हेतु चलार्इ जा रही समस्त योजनाओं की जानकारी दी तथा साक्षर भारत मिशन एवं सर्वशिक्षा अभियान के विषय में भी उन्होने सभी महिलाओं को विस्तार से बताया। इस अवसर पर प्रशिक्षिका श्रीमति उज़मा फरहत, कुमारी तबस्सुम, कु. नज़राना, कु. नेहा सैनी, श्रीमति सुशीला देवी तथा श्रीमति रेखा काशियान ने उक्त विषय पर अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए उपसिथत महिलाओं को कुप्रथाओं की बुरे प्रभाव से अवगत कराते हुए आज के समय में महिलाओं को जागरूक किया तथा उन्हे विकास हेतु सही दिशा पर चलने का आहवान किया।
इस शानदार कार्यक्रम का संचालन श्रीमति रिहाना हुसैन द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि गत छ: दिवस से जनपद के बहुत से स्थानों पर जारी इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षिकाओं ने अभी तक हजारों महिलाओं को विकास, सुधार, तथा शिक्षा के बाबत जागरूक करने के टिप्स प्रदान किये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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सरकार वितरण प्रणाली में पूर्णतया असफल?

Posted on 18 March 2014 by admin

केन्द्र सरकार ने राज्यों पर जो सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के अन्तर्गत गरीब व्यकितयों को कम से कम दर पर राशन उपलब्ध कराने की जो जिम्मेदारी सौंप रखी है, राज्य सरकारें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश सरकार उस वितरण प्रणाली में पूर्णतया असफल साबित हो रही है। सरकार चाहे भाजपा की हो, कांग्रेस की हो, बसपा की हो या फिर वर्तमान समाजवादी पार्टी की सरकार हो, हर सत्तापक्ष के साथ अनाज के माफियाओं का गहरा सम्बन्ध है। जितनी भी सरकारी स्तर से पूरे राज्य में राशन की दुकानें अलाट की गयी हैं, उन सभी में सरकार की ओर से महीने में दो बार ग्राहकोंराशन कार्ड धारकों को देने के लिये जो सामग्री डिपों में आती है, वह गोदामों से डिपो तक पहुंचते-पहुंचते मात्र 60 प्रतिशत ही रह जाती है, 40 प्रतिशत खाधान सामग्री गोदाम से उठने के बाद माफियाओं के कब्जे में चली जाती है। अनाज माफिया 4 रूप्या किलो और 7 रूपया किलों वाला चावल और अनाज 14 रूपये के हिसाब से चक्की वालों तथा बडे व्यापारियों को हाथों हाथ बेच देते हैं। स्थानीय स्तर पर इस गोरख धन्धे को जिलाधिकारी से लेकर सभी प्रशासनिक अधिकारी और सत्ता पक्ष के नेता भली भांति जानते हैं। सबको यह भी मालूम है कि इस गोरख धन्धे का मुखिया स्थानीय स्तर पर जिला पूर्ति अधिकारी होता है। यदि आप किसी डिपो होल्डर की शिकायतें लेकर जिला पूर्ति अधिकारी के पास जाते हैं तो वह सीधे मुंह बात करने को ही तैयार नही होते हैं। यदि आप जिला पूर्ति अधिकारी को अपने प्रभाव में ले लेते हैं, या उन के व्यकितत्व पर आपका दबाव पड जाता है, तो वें सत्ता पक्ष के नेताओं को लाकर आपकी ज़बान खामोश करा देते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय स्तर पर खाधान सामग्री को डिपो से उठाकर बाजार में स्वतंत्र रूप से गैर कानूनी ढंग से बेचने वाले खाधान्न माफियाओं का दबदबा है। आम आदमी की शिकायत सुनने के लिये कोर्इ भी तैयार नही है। इससे भी बडी बात तो यह है कि हर डिपो होल्डर के पास 30 प्रतिशत जाली राशन कार्ड बने हुए हैं जिनका राशन वें स्वयं हज़म कर लेता है। सरकार कितनी भी सख्ती क्यों न करे मगर जबतक सत्ता पक्ष के नेता और खाधान्न माफियाओं की इसी प्रकार सांठ गांठ रहेगी, तबतक केन्द्र से चलकर प्रदेश तथा प्रदेश से चलकर गांव-गांव पहुंचने वाली सरकारी खाधान्न वितरण प्रणाली र्इमानदारी के साथ संचालित नही हो पायेगी?
राशन की कालाबाज़ारी अब आम बात हो चली है और इस घोटालेबाजी से कोर्इ भी अछूता नही है जिसका कारण प्रत्येक नागरिक का राशन कार्ड होना और उसके साथ राशन के नाम पर छल किया जाना अब प्रत्येक माह का मामला है। इस विषय में आम आदमी बेहद परेशान नज़र आता है। सवाल यह नही है कि ऐसा क्यों हो रहा है तथा कब से हो रहा है। सवाल यह है कि इस परेशानी और हकतलफी पर रोक कौन और कब लगा पायेगा।
तहसील सदर सहारनपुर के गांव पटनी निवासी अब्दुल राजि़क ने बताया कि हमारे यहां कर्मवीर और विकास नामक दो व्यकित राशन डिपो का संचालन करते हैं जो तीन महीने में एक बार राशन का पूर्ण वितरण करते हैं, उनका स्पष्ट कहना है कि हम तो अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाते हैं, हमारा कोर्इ कुछ नही बिगाड़ सकता। स्थानीय पक्का बाग निवासी तमसील ने बताया कि कभी भी राशन डिपो पर राशन पूरा नही मिलता और जितना चाहे उतना माल डिपो होल्डर स्वयं रखकर ब्लैक में बेचता है, और विरोध करने पर दबंगर्इ पर उतारू हो जाता है। उधर सदर तहसील के ही गांव लखनौती कलां एवं हीराहेडी निवासी समरेज आलम ने भी यही बताया कि पहली बात तो यह कि हमारे गांव हीराहेडी से लखनौती कलां लगभग 5 किलोमीटर दूर पडता है जहां डिपो होल्डर सुभाष समय पर वितरण की सूचना भी नही देता है तथा अधिकतर माल को ब्लैक करता है।
समाजसेवी एवं पत्रकार नफीसुर्रहमान का कहना है कि उपरोक्त प्रकरणों में जब भी मैं स्वयं शिकायतें लेकर जिला पूर्ति कार्यालय पंहुचा तो जिला पूर्ति अधिकारी ने मेरी शिकायतों को अनदेखा करते हुए स्पष्ट रूप से बताया कि हमारे डिपो होल्डर जिस तरह का कार्य अन्जाम दे रहे हैं, वह सन्तोषजनक है। उनका कहना था कि हम पर भी लखनऊ वालो का दबाव रहता है, इसलिये हम स्थानीय स्तर पर डिपो होल्डरों पर सख्ती नही कर सकते। हमारे स्टाफ और निरीक्षकों को ऊपर पैसा भेजना पडता है तथा बहुत से खर्चे भी हम पर शासन की ओर से लगे हुए हैं।
इस विषय में जब जिलाधिकारी श्रीमति संध्या तिवारी से बात की गयी तो उन्होने कहा कि अच्छा हुआ आपने मेरे संज्ञान में मामला डाल दिया है, अब मैं सख्ती से इस विषय में पूछताछ करूंगी और किसी भी प्रकार से इस प्रकार के मामलों पर रोक लगार्इ जायेगी तथा ऐसा करने वालों के विरूद्व सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लार्इ जायेगी

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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अधिकारियो के विरुद्व कठोर कार्यवाही?…….. संध्या तिवारी

Posted on 18 March 2014 by admin

जिला निर्वाचन अधिकारीजिलाधिकारी संध्या तिवारी ने विकास भवन में सभी प्रभारी, सह प्रभारी अधिकारियो, पुलिस विभाग के अधिकारियो तथा थानाध्यक्षो को सम्बोधित करते हुए कहा कि चुनाव सभी अधिकारियोकर्मचारियो की सहभागिता से ही सम्पन्न होता है और प्रत्येक व्यकित का योगदान अत्यंत आवश्यक है। सभी को लोेक सभा निर्वाचन शानितपूर्ण, निष्पक्ष व निर्विघन्ता के साथ सम्पन्न कराना है। सभी को आचार संहिता का पालन करना और कराना है। इसमें लापरवाही किसी भी दशा में क्षम्य नही होगी।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियो से कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी सरकारी भूमि, भवन विशेष रुप से पी0डब्लू0डी0, स्कूलो, जल निगम, सरकारी कार्यालयो आदि पर बैनर व पोस्टर आदि नही लगने चाहिये। अगर कही भी बैनर या पोस्टर लगे पाये गये तो सम्बनिधत विभाग के अधिकारियो के विरुद्व कठोर कार्यवाही की जायेगी।
उप जिला निर्वाचन अधिकारीअपर जिलाधिकारी दिनेश चन्द्र ने कहा कि प्रत्याशियो के द्वारा जो भी चुनाव प्रचार हेतु सभाएं व प्रचार सामग्री आदि पर व्यय किया जायेगा उनकी वीडियो ग्राफीफोटोग्राफी टीम द्वारा की जायेगी। सभा करने के लिये अनुमति लेनी होगी। जिस अवधि के लिये प्रत्याशियो द्वारा अनुमति ली जायेगी उसी समयांर्तगत ही सभा होनी चाहिये। रात्रि 10 बजे के उपरान्त कोर्इ सभा आयोजित नही करने दी जायेगी। एस0ओ0 व मजिस्ट्रेट इसके लिये उत्तरदायी होंगे।
प्रत्याशियो द्वारा निर्धारित सीमा 40 लाख रु0 तक ही व्यय कर सकेगे। चुनाव के दौरान कोर्इ भी व्यकित निर्धारित धनराशि से अधिक धनराशि लेकर अपने साथ नही चलेगा। अगर कोर्इ अधिक धनराशि लेकर जा रहा है तो उसको साक्ष्य देना होगा, टीम को उसकी तुरन्त वीडियोग्राफी करानी होगी तथा उसकी सूचना आयकर विभाग के अधिकारियो को दी जाये।
दिनेश चन्द्र ने बताया कि किसी भी पार्टी के स्टार प्रचारक का व्यय पार्टी खाते में जायेगा। प्रत्याशी के साथ उतने ही वाहन चलेगे जितनो की उसके द्वारा अनुमति प्राप्त होगी।
पूर्वान्ह में विकास भवन में ट्रेनरो को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें 95: ट्रेनर उपसिथत हुए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मोनिका रानी, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डा0 धर्मवीर सिंह, ए0डी0एम0एफ0निजामुद्वीन, सी0ओ0 चरण सिंह, एस0डी0एम0 राजेश कुमार सिंह, भानु प्रताप यादव, हवलदार यादव, हीरा लाल सिंह तथा मुख्य कोषाधिकारी अवधेश कुमार सिंह सहित सभी व्यवस्थाओ के प्रभारीसहप्रभारी अधिकारी उपसिथत थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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देश की 42 फीसद आबादी बच्चों पर आधारित ?

Posted on 07 March 2014 by admin

हमारे राज्यों के मुख्यमंत्री और उच्च न्यायालयों की चुप्पी से एक सवाल उत्पन्न होता है कि आप सर्वगुण सम्पन्न हैं कि जब आप अपने परिवार की बेहतरी के लिये सोचते हैं शेष बच्चों के विषय में आपकी ये रायसोच क्यों नही? हम केवल आज अपने राज्य उत्तर प्रदेश की बात करते हैं। लेबर एक्ट बन जाने के बाद तथा बच्चा मज़दूरी को प्रतिबनिधत किये जाने के बाद भी केवल पशिचमी उत्तर प्रदेश के पांच जनपदों में लगभग दो लाख बच्चे विभिन्न उधोगों, दुकानों, प्रतिष्ठानों तथा रेहडी व ठेली आदि पर कार्य करते देखे जा रहे हैं। यहां तक कि कूडा उठाने से लेकर आतिशबाजी का सामान बनाने के खतरनाकजोखिम भरे कार्यों में भी 8 साल से लेकर 18 साल तक के बच्चे कार्य कर रहे हैं। इन बच्चों को मजदूरी के नाम पर 50 रूप्या से 100 रूपया रोज तक मिलता है तथा जब यें किसी दुर्घटना का शिकार होते हैं तो इनके इलाज का खर्च इनके माता पिता या पडौसी उठाते हैं। हमारा स्थानीय प्रशासन बच्चों के संरक्षण के मामले में पूर्णतया विफल है। केवल जग दिखावे को लम्बे-लम्बे भाषण और विज्ञपितयां, बाल दिवस 14 नवम्बर के अवसर पर स्थानीय स्तर पर व राज्य स्तर पर जारी किये जाते हैं परन्तु अमल मात्र उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत भी नही है। हमारे पशिचमी उत्तर प्रदेश की जेलों में जो बाल अपराधी कैद हैं, उनके साथ भी व्यस्क आदमियों जैसा व्यवहार किया जाता है, उनसे भी जेल में मेहनत करायी जाती है। हमारी जेलों में बच्चों के स्तर को सुधारने के लिये प्रशिक्षण की सुविधाएंशिक्षा की सुविधा उपलब्ध नही है। यदि कोर्इ कैदी बच्चा बीमार होता है या वो मानसिक रूप से कमजोर है तो उसके इलाज के लिये भी जेल प्रशासन के पास उचित बन्दोबस्त नही है। जिला प्रशासन समय-समय पर जेल का निरीक्षण कराता है परन्तु बालकों की दुर्दशा पर जिला प्रशासन के जिम्मेदारों की कभी नजर नही जाती। यदि हालात ऐसे ही रहे और पूरे उत्तर प्रदेश के बच्चों पर और जो बच्चे श्रम के कार्यों मेंजेल में कैद हैं, उनके सुधार के लिये उचित कदम नही उठाये जाते तो माननीय पूर्व चीफ जसिटस अल्तमश कबीर के मुताबिक देश में अफरा तफरी का माहौल पैदा होने में कोर्इ देर नही लगेगी। हमें अपने देश के सर्वोच्च पद पर आसीन रहे माननीय पूर्व चीफ जसिटस अल्तमश कबीर के सन्देश को दिल की गहरार्इयों से लेना चाहिये था तथा पूर्व में दिये गये उस सम्मानित और गम्भीर वक्तव्य पर ठोस कार्यवाही अपने स्तर से शुरू कर देनी चाहिये थी? परन्तु हमें यहां यह लिखते हुए शर्म महसूस हो रही है कि बैठक में मौजूद किसी भी सम्मानित पदाधिकारी ने इस ओर एक साल बाद भी नज़र नही दौडार्इ? अगर हमारे देश में होन वाली महत्वपूर्ण व्यकितयों की महत्वपूर्ण बैठकों के परिणाम इसी प्रकार जनता के सामने आयेगें तो आप खुद नतीजा निकाले कि इस देश का भविष्य क्या होगा?
पिछले साल बच्चों से सम्बनिधत मामलात के निज़ाम को चुस्त दुरूस्त बनाने के अपने मकसद को जनता के सामने ज़ाहिर करते हुए देश के पूर्व चीफ जसिटस आली जनाब अल्तमश कबीर ने प्रदेश के मुख्यमंत्रियों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीशों के एक अहम सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा था कि देश की 42 फीसदी आबादी बच्चों पर आधारित है तथा हमें बच्चों के इन्साफी निज़ाम को मज़बूत बनाने की बेहद ज़रूरत है। जनाब कबीर ने कहा कि बच्चों की देखभाल और उनको बेहतर संरक्षण प्राप्त नही हो पा रहा है। इन हालात में बच्चों का भविष्य हमारे देश में दुखदायी बनने लगा है। आपने कहा कि अगर बच्चों की देखभाल और उनको बेहतर संरक्षण नही दिया जायेगा तो देश में अफरातफरी का वातावरण उत्पन्न हो जायेगा। उन्होने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि जो बच्चे देश का भविष्य हैं उनपर ध्यान नही दिया जा रहा है। आपने कहा कि हम नशीले पदार्थों की आदतों से दो चार हैं तथा इस गम्भीर समस्या पर हमने कोर्इ बेहतर कदम आज तक नही उठाया है। आपने कहा कि हममे से कितने हैं कि जिन्होने बच्चों की वर्तमान हालत पर गौर किया है और जो गौर कर रहे हैं। आपने कहा कि ये समस्या भविष्य की एक बहुत बडी शकित और आबादी का एक तिहायी से ज्यादा है। आपने कहा कि हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद ज्यादातर बच्चे उचित सुविधाओं से वंचित हैं। आपने कहा कि बच्चों का इनसाफ निज़ाम दुनियाभर के देशों की ओर से एक बडी डील का परिणाम है और उस पर पूरी शकित के साथ अमल किया जाना बेहद जरूरी है। पूर्व चीफ जसिटस अल्तमश कबीर ने कहा कि हमारे बच्चे अच्छी तालीम से सरफराज हैं और वें इलियट क्लास से हैं लेकिन बाकी मान्दा (बाकी हिन्दुस्तान के बच्चे) के बारे में क्या किया गया है? उन्होने कहा कि दस से पद्रंह साल की उम्र इस वक्त नयी नस्ल के लिये अधिक अफरा तफरी का कारण होगी अगर बच्चों की परवरिश का खास ख्याल नही रखा गया और उनको सही संरक्षण नही दिया जाता तो देश के हालात दुखदायी हो सकते हैं।
हमारे देश के चीफ जसिटस प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित सात अप्रैल 2013 की महत्वपूर्ण बैठक में अपने सम्बोधन में देश के पूर्व चीफ जसिटस उपरोक्त बातें कहते सुने गये। बैठक में मौजूद सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायधीशों व उनके प्रतिनिधियों ने पूर्व चीफ जसिटस के सम्बोधन को गम्भीरता पूर्वक सुना तथा उनपर अमल करने का वचन दिया। परन्तु खेद की बात है कि एक साल बीत जाने के बाद भी देश के किसी भी राज्य ने इस ओर ध्यान नही दिया। देश के न्यायालयों में बालकों के सम्बन्ध में जो अपराधिक मामले दर्ज हैं और जेलों में बन्द बालकों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है उस पर भी प्रदेश सरकारोंउच्च न्यायालयों ने कोर्इ ध्यान अभी तक नही दिया है। होना यह चाहिये था कि एक माह के भीतर माननीय पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर के सम्बोधन को सभी राज्योें के मुख्यमंत्रीउच्च न्यायालय गम्भीरतापूर्वक लेते और तीस दिन के भीतर न्यूनतम 20 प्रतिशत सुधार कार्य बालकों को इन्साफ दिलाने के मामले में कर के दिखाते। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे सम्मानित पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली में आयोजित उपरोक्त बैठक में जो वक्तव्य दिया है, उस वक्तव्य पर देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए और रिटायरमेन्ट के बाद भी कायम रहेगें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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अपराधियों में खलबली, मनोज कुमार ने अपराधों पर अंकुश लगाने को कहा

Posted on 07 March 2014 by admin

अपराधिक घटनाओं को देखते हुए आर्इपीएस अधिकारी तथा जनपद के कप्तान मनोज कुमार ने सभी जिला स्तर के थानों में तैनात अपने थाना प्रभारियों को सीनीयर दारोगाओं को तथा हैड कान्सटेबलों को सीधे तौर पर निर्देश जारी किये हैं कि तुरन्त अपराधों पर कन्ट्रोल करें तथा अपराधियों को घेरने की कार्यवाही तेजी के साथ अन्जाम दें। यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि जनपद में प्रतिदिन छ: वारदातें लूटपाट, हत्या और संघर्ष की होने लगी हैं। जो भी अधिकारी यहां आया है, वह राजनीतिक दबाव में रहकर कार्य करता है। नतीजे के तौर पर अपराधों पर कन्ट्रोल करना असंभव रहता है। परन्तु जबसे शासन ने आर्इपीएस अधिकारी डाक्टर मनोज कुमार को सहारनपुर में पुलिस कप्तान बनाकर भेजा है और यहां आने के बाद जिस तरह से डा. मनोज कुमार ने थाना प्रभारियो को निर्देश देकर अपराधों पर अंकुश लगाने को कहा है, उसके परिणाम बेहतर आने लगे हैं। सुबह से शाम तक पुलिस कप्तान के कैम्प कार्यालय और निवास पर जो शिकायत कर्ता पहुंचते हैं, उनकी शिकायतों का निस्तारण भी समय से किया जाना डा. मनोज कुमार की योग्यता को साबित करता है। डा. मनोज कुमार के आने से माफियाओं तथा अपराधिक प्रवृतित वाले असामाजिक तत्वों में खलबली मची है। एक जनपद को छोडकर दूसरे जनपद में जाकर अपराध करने वालों पर भी पुलिस ने एसएसपी के चलते शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस गश्त बढा दी गयी है। पुलिस बल जहां भी रहता है, मुस्तैदी के साथ रहता है। छोटी से छोटी घटना को डा. मनोज कुमार अपने संज्ञान में लेकर स्वयं अपने स्तर से कार्यवाही करने के आदेश जारी कर रहे हैं। कोर्इ भी थाना प्रभारी अब अकारण थाने से नदारद नही मिलता बलिक काम के समय प्रभारी थाने पर मौजूद मिलते हैं। सहारनपुर में एक दशक से यह परम्परा चली आ रही थी कि थाना प्रभारी सुबह एक घण्टे के लिये थाने पर आते थे और उसके बाद नदारद हो जाते थे लेकिन डा. मनोज कुमार की कार्यशैली देखकर सभी थाना प्रभारी थाने पर या थाने के आसपास ही अपनी डयूटी पर मुस्तैद नजर आते हैं। समाचार पत्र कुछ भी लिखें तथा विपक्षी कुछ भी कहें परन्तु जबसे डीआर्इजी रघुवीर लाल और पुलिस कप्तान डा. मनोज कुमार सहारनपुर मुख्यालय पर आये हैं, तबसे अपराधिक घटनाओ में बहुत कमी आयी है तथा पुलिस के सभी अंग सक्रिय हैं। किसी भी तरह की घटना होने पर पुलिस बल तथा पुलिस के कुछ अधिकारी तुरन्त घटना स्थल पर पहुंच जाते हैं। खबर के लिखे जाने तक यहां डीआर्इजी अच्छे कामों के लिये मशहूर हैं वहीं हमारे पुलिस कप्तान आर्इपीएस अधिकारी डा. मनोज कुमार भी अपराधियों के विरूद्व अभियान छेडने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। डा. मनोज कुमार की अपराधों को रोकने के लिये जिस कदर भी प्रशंसा की जाये वह कम हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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फसलो को खरपतवारो से मुक्त कराना होगा।

Posted on 07 March 2014 by admin

उपनिदेशक (कृषि रक्षा) सहारनपुर मण्डल सहारनपुर ने किसानो को अवगत कराया है कि फसलो में प्रतिवर्ष कीट रोग, खरपतवारो तथा चूहो आदि द्वारा लगभग 15 से 20 प्रतिशत की क्षति होती है। जिसमें लगभग 33 प्रतिशत खरपतवारो से, 26 प्रतिशत रोगो से, 20 प्रतिशत कीटो से, 7 प्रतिशत भण्डार के कीटो से, 6 प्रतिशत चूहो से तथा 8 प्रतिशत जिसमें अन्य कारक समिमलित है।
इस प्रकार प्रतिवर्ष फसलो को लगभग 15 से 20 प्रतिशत होने वाली क्षति में सर्वाधिक एक तिहार्इ क्षति खरपतवारो द्वारा होती है। खरपतवारो द्वारा मृदा में डाले गये उर्वरको, पोषक तत्वो का सीधे उपयोग करने से मुख्य फसल को इसकी उपलब्धता कम हो जाती है जिससे न केवल फसल उत्पादन में कमी आती है बलिक उत्पादन लागत में अधिक वृद्वि हो जाती है। यदि कृषि उत्पादन बढाना है तथा किसानो की उत्पादन लागत में कमी लाते हुए आय में वृद्वि करनी है तो प्रत्येक दशा में फसलो को खरपतवारो से मुक्त कराना होगा।
उन्होने सभी किसानो को निम्न संस्तुतियो के अनुसार रबी-2013-14 में खरपतवार नियन्त्रण करने हेतु सलाह दी है कि गेहूं और जौ की फसलो में खरपतवारो के नियन्त्रण हेतु आर्इसोप्रोटूरान 75 प्रतिशत डब्लू0पी 1.25 कि0ग्रा0हैक्टेअर अथवा सल्फोसल्फयूरान 75 प्रतिशत डब्लू0जी0 3.3 ग्राम(2.5 यूनिट)हैक्टेअर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवार्इ के 20 से 25 दिन बाद छिडकाव करें तथा चना, मटर व मसूर की फसल में खरपतवारो के नियन्त्रण हेतु पैण्डामैथलीन 30 प्रतिशत 3.3 लीटर प्रति हैक्टेटर अथवा एलाक्लोर 50 प्रति0 र्इ0सी0 4 लीटर प्रति हैक्टेअर बुवार्इ के 3 दिन के अन्दर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रयोग करे। इसके अतिरिक्त रार्इसरसो की फसल में खपतवार नियन्त्रण हेतु पैण्डामैथलीन 30 प्रतिशत 3.3 लीटर प्रति हैक्टेअर बुवार्इ के तीन दिन के अन्दर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।
कीटरोग से सम्बनिधत प्रत्येक जानकारी के लिये विकास खण्ड में सिथत कृषि रक्षा इकार्इ जिला स्तर पर विकास भवन में जिला कृषि रक्षा अधिकारी तथा मण्डल स्तर पर उप निदेशक कृषि रक्षा बेरीबाग सहारनपुर कार्यालय में सम्पर्क कर सकते है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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भारत सरकार के सहयोग से अब पासपोर्ट बनवाना होगा आसान

Posted on 03 March 2014 by admin

भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पासपोर्ट सेवा केन्द्र की सकि्रयता के चलते भविष्य में नागरिकों के लिये पासपोर्ट बनवाना सरल हो जायेगा। आज प्रदेश भर के नागरिकों को एलआर्इयू, पुलिस और तहसील स्तर की जांच के अतिरिक्त आवेदन के साथ संलग्न प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रकि्रया के कारण पासपोर्ट आवेदन करने के छ: माह पश्चात बडी मशक्कत के बाद प्राप्त हो रहा है जिसकारण नागरिकों को अनावश्यक रूप से कठिनार्इ का सामना करना पड रहा है। पिछले चार सालों से लखनऊ क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी एवं गाजियाबाद क्षेत्रीय पासपोर्ट के कार्यालयों के दर्जनो चक्कर काटने के बाद भी हज पर जाने वाले हाजियों को समय पर पासपोर्ट न मिलने के कारण प्रदेश के सैेंकडों लोग हज न कर पाने से वंचित रह गये थे। इसी प्रकार लेबर या अन्य कार्यों के लिये विदेश जाने वाले भारतीय नागरिक पासपोर्ट समय पर जारी न होने के कारण विदेश नही जा पाते जिस कारण उनके परिवार को हर तरह से जबरदस्त आर्थिक हानि उठानी पडती है। पशिचम उत्तर प्रदेश व मध्य उत्तर प्रदेश के अधिकतर नागरिक लेबरवाहन चालकपेन्टरफीटरशिक्षा तथा टैकिनकल स्टाफ के रूप में खाडी के देशों में नौकरी के लिये जाना पसन्द करते हैं। हर माह खाडी के देशों से उक्त कार्यों में संलिप्त ठेकेदार एडवांस वीजा लेकर देश में आते हैं तथा उपरोक्त लेबर से या आवेदकों से साक्षात्कार के पश्चात पासपोर्ट तलब करते हैं। आवेदकसाक्षात्कार देने वाले नागरिक पासपोर्ट जल्दी बनवाने की शर्त पर इन्टरव्यू पास कर लेते हैं तथा ठेकेदारों को एडवांस भी अदा कर  देते हैं। परन्तु जब वह पासपोर्ट के लिये आवेदन करते हैं तथा समस्त वांछित प्रमाणपत्र आवेदन के साथ  क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत करते हैं तो प्रमाण पत्रों की जांच के उपरान्त उनकी एलआर्इयू जांच तथा पुलिस जांच करार्इ जाती है। स्थानीय स्तर पर जहां का आवेदक निवासी होता है जांच वहीं भेजी जाती है। दो दो जांचों से निकलकर आवेदक एक माह बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से सम्पर्क करता है तो मालूम होता है कि  जांच अभी प्राप्त नही हुर्इ है। भारत सरकार ने इसी कठिनार्इ को मददेनजर रखते हुए ड्रीम प्रोजेक्ट पासपोर्ट सेवा योजना शुरू करके आवेदकों को लाभ पहुंचाने का जो कार्य किया है उससे आवेदकों को पासपोर्ट बनवाना अब आसान हो जायेगा। इस स्कीम के तहत अब पासपोर्ट कार्यालयों को रिपोर्ट आनलाइन पुलिस प्रशासन द्वारा प्राप्त हुआ करेगी। इन हालात में जो लम्बा समय डाक द्वारा जांच रिपोर्ट आने में लगता है वह बच जायेगा तथा तहसील स्तर से एमरजेन्सी पासपोर्टतत्काल पासपोर्ट बनवाने हेतु जो पत्ररिपोर्ट एसडीएमपुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा क्षेत्रीय पासपोर्ट विभाग को डाक से भेजी जाती है तथा बाद में इसका सत्यापन भी होता है इस योजना के तहत वें काम भी अब आन लार्इन हो जायेगा जिस कारण पासपोर्ट आवेदकों को पासपोर्ट मिलना सरल होगा।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयो से जोडने का कार्य शुरू हो चुका है फिलहाल लखनऊ हैडक्वार्टर से पांच पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों को आनलार्इन कर दिया गया है कुल 54 जनपदों को आनलाइन किया जाना है जिसके ऊपर कार्य तेजी के साथ शुरू कर दिया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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आर्इपीसी की धारा 498 की तरह ही आर्इपीसी की धारा 376 का गलत इस्तेमाल

Posted on 24 February 2014 by admin

केन्द्र सरकार के मन्त्री कपिल सिब्बल द्वारा तहलका के एडीटर तरूण तेजपाल के पक्ष में दिया गया बयान कि महिलाओं की अस्मत से सम्बनिधत आर्इपीसी की धारा 376 का दहेज उत्पीडन से सम्बनिधत आर्इपीसी की  धारा 498 की तरह ही गलत इस्तेमाल हो रहा है पर खासा बवाल हुआ है। इसमें कोर्इ दो राय नही कि कपिल सिब्बल का बयान अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। जिन लोगों ने न्याय की गरिमा को बनाये रखा तथा जिनकी वजह से न्यायपालिका आज भी स्वतन्त्र एवं विश्वसनीय स्तम्भ के रूप में पूरे विश्व में लोहे के सतून की मानिन्द नजर आ रही है। भारत की उस न्यायपालिका के पूर्व मुख्य न्यायधीश सर्वोच्च न्यायालय (नर्इ दिल्ली)  जसिटस अलतमश कबीर ने भी जसिटस ए. के. गांगुली के खिलाफ एक युवती द्वारा लगाये गये आरोप को गम्भीरता से लेते हुए प्रेस को निर्भिकता पूर्वक यह बयान दे डाला कि मुझे यह विश्वास नही होता कि एके गांगुली जैसा काबिले एहतराम जसिटस ऐसा कुकृत्य करने का साहस भी कर सकता है। न्यायपालिका में अल्तमश कबीर का नाम एक ऐसा नाम है कि जो वास्तव में न्याय से जुडा है। आपने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद को सुशोभित करते हुए जो निर्णय दिये उनका एक महत्व है। अल्तमश कबीर ने दिग्गज राजनेताओं तथा केन्द्र सरकार के दबाव को न मानकर संविधान में उल्लेखित धाराओं का शत प्रतिशत पालन किया तथा अपने आदेश ठीक उसी प्रकार जारी किये कि जो आर्इपीसी और सिविल धाराओं के अन्तर्गत किया जाना अत्यन्त जरूरी था। हम जब कपिल सिब्बल की बात करते हैं तो हमे जसिटस अल्तमश कबीर के विचारों को भी सामने रखना होगा।केन्द्र सरकार ने महिलाओं तथा सामाजिक संगठनों के दबाव में आकर एक दशक पूर्व दहेज से सम्बनिधत वादों के सख्ती से निपटारे हेतु आर्इपीसी में एमेन्डमेन्ट करके जिस तरह से दहेज की धाराओं को सख्त किया उसका नतीजा यह हुआ कि 12 साल से लेकर 90 साल का बूढा भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिये गये। छोटे-छोटे घरेलू झगड़ों पर भी 498 का प्रयोग होने लगा तथा समाज में सम्बन्ध विच्छेद एवं परिवार बंटवारे के मामलों में तेजी से बढोतरी हुर्इ और आपसी समझौतों में कमी महसूस की गयी। लगातार दहेज से सम्बनिधत उक्त धारा का दुरूपयोग होने का अहसास जब केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं नेताओंं को होने लगा और जनता में हाहाकार मचा तब माननीय सुप्रीेम कोर्ट को पुन: एक आदेश जारी करना पडा जिसके अनुसार दहेज से सम्बनिधत मामालों पर कार्यवाही जांच के बाद ही सुनिशिचत की गयी। पुलिस को निर्देशित किया गया कि बिना छानबीन के एवं ठोस शहादतों के बाद ही दहेज की धाराओं में गिरफ्तारी की जाये। तब जाकर मनगढन्त दहेज की घटनाओं में बेतहाशा कमी आयी। उक्त कथन से साबित हुआ कि जिस प्रकार दहेज प्रकरण के मामलों में आर्इपीसी की धाराओं का दुरूपयोग किया गया उसी प्रकार महिलाओं की अस्मत से जुडे मामलों में भी किसी हद तक नही बलिक दामिनी काण्ड 2012 के बाद से बहुत हद तक दुरूपयोग होना आम बात हो गया है। जब तहलका के चीफ एडीटर तरूण तेजपाल के साथ कार्य करने वाली सहकर्मी जो लगातार दो साल से तरूण तेजपाल के साथ काम कर रही थी, यह इल्जाम लगाती है कि काफी समय पूर्व उसके साथ तथा उसकी अस्मत के साथ खेला गया उसी बात से यह साबित हो गया है कि यह केवल षडयन्त्र है। यदि किसी महिला के साथ छेडछाड अथवा कुकृत्य किया जाता है तो उसकी रिपोर्ट पीडिता द्वारा एक सप्ताह के भीतर सम्बनिधत थाने को की जानी जरूरी है। यही चलन अंग्रेजों के कार्यकाल से चला आ रहा है परन्तु आर्इपीसी की धाराओं में लचक होने के कारण तथा अधिवक्ताओं को न्यायालयों द्वारा छूट दिये जाने के परिणामस्वरूप कोर्इ भी व्यकितमहिला अपने साथ किये गये दुव्र्यवहार एवं अत्याचार से सम्बनिधत शिकायत सम्बनिधत थाने अथवा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में तीन माह पश्चात भी प्रस्तुत करके प्रतिवादी को प्रताडित करने का कार्य करती है तो उससे यह झलकने लगता है कि इस शिकायत में कहीं न कहीं झोल अवश्य है। जिस व्यकित कोमहिला को किसी से शिकायत है तो वह एक सप्ताह के भीतर अपनी शिकायत क्यूं दर्ज नही करा रही है? और   यदि एक सप्ताह के पश्चात शिकायत की जा रही है तो उससे साबित होता है कि यह किसी षडयन्त्र का हिस्सा है। तरूण तेजपाल जैसे व्यकित को जो कि धन, सैलिब्रेटी और शकित में देश के 50 लोगों की लिस्ट में शामिल हैं वह ऐसा करेगा यह हर बुद्विजीवी की समझ से बाहर की बात है। अभी मामला अखबारों की सुर्खियों में ही है कि तरूण तेजपाल के बाद एक और अधिवक्ता इन्टर्न ने सम्बनिधत काबिले एहतराम और अपने आप में व्यवहार कुशल होने के साथ साथ न्याय प्रिय जसिटस एके गांगुली पर यह आरोप मढ दिया कि जब वें इन्टर्न का कार्य गत वर्ष दिसम्बर 2012 में दामिनी काण्ड के दौरान दिल्ली में कर रही थी तो उस समय जसिटस एके गांगुली ने उसको भी अपनी बाहों में भर लिया था और अब उसको इस बात का अहसास हुआ कि उसके साथउसकी अस्मत के साथ खिलवाड किया गया। जिसकी बाबत उसने एक ब्लाग पर अपनी शिकायत प्रस्तुत की तथा टवीटर पर जनता को अपनी बाबत परिचित कराया। सवाल यह पैदा होता है कि जब एके गांगुली जैसा व्यकित कि जिसकी बाबत पूर्व मुख्य न्यायाधीश जसिटस अल्तमश कबीर यह कह चुके हैं कि इस शिकायत पर मैं किसी भी सूरत में यकीन नही कर सकता उसके अतिरिक्त एके गांगुली स्वयं सख्ती से इन आरोपों का खण्डन कर चुके हैं। स्वयं इस मामले को हार्इप्रोफार्इल परिसिथतियों में मुख्य न्यायाधीश जसिटस सदाशिवम ने तीन जजों की एक कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं उसके बावजूद भी चन्द राजनेताओं द्वारा और सामाजिक संगठनों द्वारा एके गांगुली के विरूद्व माहौल तैयार करना इस तथ्य को उजागर करता है कि एके गांगुली भी उसी तरह साजिश का शिकार हुए हैं कि जिस तरह से पिछले माह तरूण तेजपाल को शिकार बनाया गया है। यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि देश के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन तथा समाज में सम्मानित कहे जाने वाले उधोगपतियों तथा राजनेताओं को कठघरे में खडा करके जो तहलका तरूण तेजपाल ने पूरे विश्व में मचाया। जिसके विरूद्व वें प्रमाण जनता के सामने लाये गये वें व्यकित हर हाल में तरूण तेजपाल से बदला लेने की फिराक में था। तरूण तेजपाल के यहां जिस सहकर्मी को पच्चीस हजार रूपये मासिक तनख्वाह मिलती हो यदि देश का कोर्इ राजनेताउधोगपति उस महिला को पांच करोड का लालच दे दे तो वह अपने भविष्य की चिंता को देखते हुए चिन्तामुक्त होकर किसी के भी विरूद्व कोर्इ भी शिकायत दर्ज कराने से नही हिचकिचायेगी? ठीक इसी प्रकार जसिटस एके गांगुली ने भी  दर्जनों ऐसे मुकदमात में आदेश दिये हैं कि जो उधोगपतियोंराजनेताओं से सम्बनिधत थे भला ये कैसे भूल सकते हैं कि जिनके खिलाफ जसिटस एके गांगुली ने निर्णय सुनाया हो वह जसिटस गांगुली को भूल जाये। परिणामस्वरूप इस तरह की जितनी भी घटनाएं सेलिब्रेटियों के साथ घट रही हैं उनके पीछे एक घिनौनी साजि़श काम कर रही है। हमारी माननीय सर्वोच्च न्यायालय से विनती है कि जिस प्रकार दहेज के मामलों में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकारराज्य सरकारों तथा पुलिस को निर्देशित किया है और जिस प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सख्त निर्देशोें के बाद दहेज प्रकरणों के मामलों में कमी आयी है उसी तरह महिलाओं की अस्मतछेडछाड से सम्बनिधत प्रकरणों के बाबत भी माननीय सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकारराज्य सरकार और सम्बनिधत पुलिस को सख्त दिशा निर्देश जारी करने चाहियें ताकि बिना जांच किये तथा बिना ठोस सबूत जुटाये मात्र शिकायत कर्ता की शिकायत पर किसी की भी गिरफ्तारी को प्रतिबनिधत किया जाये। दिसम्बर 2012 दामिनी काण्ड के बाद सामाजिक संस्थाओं नेराजनेताओं ने वाबेला मचाकर केन्द्र सरकार को महिलाओं की अस्मत से सम्बनिधत शिकायतों पर जिस ठोस कानून बनाने पर विवश किया है आज वही कानून भारत के सम्मानित नागरिकों के लिये और सम्मानित नागरिकों की आनबान के लिये भारी आफत बना हुआ है। कल को केन्द्र सरकार में ऊंचे पदों पर आसीन किसी भी व्यकित के विरूद्व कोर्इ भी स्वार्थी तत्व इसी तरह का आरोप किसी भी महिला द्वारा लगवा सकता है। उल्लेखनीय है कि दो दशक पूर्व एक केन्द्रीय मंत्री पर भी एक महिला ने भी इसी प्रकार आरोप लगाकर उन्हे अपमानित करने का काम अन्जाम दिया था। कठिन छानबीन के उपरान्त यह मालूम पडा कि यह सब षडयन्त्र माफियाओं ने केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ रचा था। इतना सबकुछ होने के बावजूद यदि अभी भी केन्द्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के सम्मानित न्यायाधीश इस ओर से सचेत नही हुए तो जिस तरह से दहेज की धाराओं का दुरूपयोग होता रहा है ठीक उसी तर्ज पर बलिक उससे भी खतरनाक परिसिथतियों में धारा 376 का प्रयोग जारी रहेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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राष्ट्रीय लोक अदालत से अधिक से अधिक लाभ उठायें :

Posted on 24 February 2014 by admin

जिला जज श्रीेण् चण्ेपदहीण्एचजेएस ने विशेष भेंट में बताया कि आगामी 12.4.14को जनपद के सभी न्यायालयों, क्लैक्ट्रेट न्यायालयों, तहसील न्यायालयों तथा अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोकअदालत में बडे पैमाने पर सरकार की ओर से पूरे भारतवर्ष में एक दिन के कार्यकाल मेें आपसी सुलह समझौते के आधार पर लाखों मामले निपटाये जाने की वृहद योजना है। हमारे योग्य जनपद न्यायाधीशेण् चण्ेपदहीण्एचजेएस ने बताया कि यदि जनता चाहे तो इस राष्ट्रीय लोकअदालत से लाभ अर्जित करते हुए अपने वादों का निपटारा आगामी 12.4.14को राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाने के लिये प्रार्थना पत्र सम्बनिधत न्यायालय में प्रस्तुत करे ताकि प्रार्थी के वाद का निपटारा उक्त अदालत में सम्मानपूर्वक किया जा सके। हमारे योग्य जनपद न्यायाधीश ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों तथा केन्द्र एवं राज्य सरकारों की हमेशा यह मंशा रहती है कि न्यायालयों से वादों का बोझ लगातार कम होता रहे और आम व्यकित को बिना पैसा खर्च किये सुलभ और समुचित न्याय समय से प्राप्त हो। इसी को मददेनजर रखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय और केन्द्र सरकार ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सुबह 10 बजे से शाम के 5 बजे तक करने का निर्णय लिया है। पक्षकारों से जनपद न्यायाधीश महोदय ने आशा जतार्इ है कि समय ये अपने वादों को राष्ट्रीय लोक अदालत में रखने की दरख्वास्त प्रस्तुत कर सरलता पूर्वक अपने वादों का निपटारा उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में कराकर लाभ अर्जित करें। उल्लेखनीय है कि उक्त वृहद स्तर पर आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को जिला स्तर पर सफल बनाने हेतु जिला जज महोदय के साथ साथ लघुवाद न्यायाधीशसचिव लोक अदालत भी लगातार भरकस प्रयास कर रहे हैं। पक्षकारों के लिये यह सुनहरा अवसर है, यदि पक्षकार चाहते हैं तो वें इस अवसर पर लाभ उठायें और वर्षों से लमिबत पडे अपने वादों को निपटवाने की कार्यवाही पूरी करें। जनपद न्यायाधीशेण् चण्ेपदहीण् ने सभी अधिवक्ताओं एवं जनता के गणमान्य व्यकितयों से अनुरोध किया है कि वें अपने स्तर से 12.4.14को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का अपने स्तर से प्रचार एवं प्रसार करें ताकि जनता इस लोक अदालत से अधिक से अधिक लाभ अर्जित कर सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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27 मृतकों के बीच 2.75 करोड़ रू0 की धनराशि वितरित

Posted on 16 September 2013 by admin

सहारनपुर के मण्डलायुक्त श्री भुवनेश कुमार ने कहा कि राहत शिविरों में सुविधाओं की कमी नहीं आने दी जायेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस व प्रशासन दंगार्इयों के विरूद्ध और अधिक सख्ती करेगी। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर व शामली जनपदों में कुल 47 राहत शिविर लगाये गये है, जिनमें लगभग 43 हजार लोग शरण लिये हुए हैं। उन्होंने बताया कि दंगों में 27 मृतकों के परिजनों को दो करोड़ 75 लाख रुपये तथा गम्भीर व साधारण रूप से घायल पीडि़तों के बीच 10.50 लाख रुपये की धनराशि वितरित की गयी है।
श्री भुवनेश कुमार ने आज राहत शिविरों का जायजा लेने के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद शामली की शामली तहसील में 06 कैम्पों में लगभग 12859 लोग तथा कैराना तहसील के 11 कैम्पों में 3501 व्यकित शरण लिये हुए है। इसी प्रकार मुजफ्फरनगर जनपद में 27,208 व्यकित राहत शिविरों में शरण लिये हुए है।
मण्डलायुक्त ने बताया कि राहत शिविरों में साफ-सफार्इ का समुचित ख्याल रखे जाने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये हैं। 05 कैम्पों में मोबाइल टायलेट तथा 02 मेें स्थार्इ टायलेट का व्यवस्था करार्इ गयी है। उन्होंने बताया कि राहत शिविर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की समुचित देख-रेख के लिए चिकित्सकों की टीम नियुक्त की गयी है तथा प्रत्येक दो या तीन शिविरों के बीच एक एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गयी है। उन्होंने बताया कि राहत शिविरों की देखरेख करने के लिए प्रत्येक राहत शिविर पर एक-एक नोडल अधिकारी भी नामित किया गया है।
श्री भुवनेश कुमार ने बताया कि हिंसा में 26 मृतकों को 10-10 लाख रूपये तथा पत्रकार स्वर्गीय राजेश वर्मा के परिवारजनों को 15 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गयी है। इसी प्रकार 20 साधारण रूप से घायल व्यकितयों को 20-20 हजार रूपये तथा 13 गम्भीर रूप से घायल व्यकितयों को 50-50 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गयी है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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