Posted on 06 May 2012 by admin
Posted on 05 May 2012 by admin
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आतंकवाद निरोधक व्यवस्था कायम करने के लिए केन्द्र और राज्यों के स्तर पर एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि नेशनल काउन्टर टेरेरिज़्म सेन्टर (एन.सी.टी.सी.) जैसी व्यवस्था को मूर्तरूप देने से पूर्व इसके स्वरूप, शक्तियों एवं संचालन पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे कि किसी संस्था की स्वायत्तता क्षीण न हो और प्रस्तावित व्यवस्था समय की कसौटी पर भी खरा उतरे।
यह विचार आज नई दिल्ली में केन्द्र सरकार द्वारा आहूत एन.सी.टी.सी. के सम्मेलन में प्रदेश के पंचायती राज मंत्री श्री बलराम यादव ने मुख्यमंत्री का वक्तव्य पढ़ते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री श्री पी0 चिदम्बरम एवं अन्य सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्री/प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री के विचारों से सम्मेलन को अवगत कराते हुए पंचायती राज मंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था मूलतः राज्य का विषय है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय परिस्थितियों का आंकलन, लोगों की संवेदनाओं तथा स्थानीय परिदृश्यों पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। यह भी अविवादित है कि आतंकवाद निरोधक कार्यवाहियां अक्सर कानून-व्यवस्था के संवेदनशील पहलुओं से भी जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह दायित्व है कि इन सभी पहलुओं के दृष्टिगत वरीयतायें निर्धारित करें तथा राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी सुसंगत कदम उठाए। इसीलिए किसी भी आॅपरेशनल कार्यवाही की जानकारी राज्य सरकार को रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई भी आॅपरेशन स्थानीय पुलिस के परामर्श एवं सहभागिता से ही संचालित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र द्वारा वर्तमान में प्रस्तावित एन.सी.टी.सी. की व्यवस्था इन सिद्धान्तों के अनुरूप नहीं है। उन्होने प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हुए कहा कि इसके अन्तर्गत एन.सी.टी.सी. किसी राज्य में प्रदेश सरकार की जानकारी के बिना, एन.एस.जी. अथवा केन्द्र सरकार के किसी विशेष बल के सहयोग से आपरेशन कर सकती है। उन्हांेने कहा कि इस प्रावधान से कानून-व्यवस्था से जुड़ी असमंजसपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके दुरूपयोग की सम्भावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परम्परागत रूप से किसी भी राज्य में केन्द्र सरकार का कोई बल राज्य सरकार की सहमति के बिना व्यवस्थापित नहीं किया जा सकता। सहमति की दशा में भी आपरेशनल कण्ट्रोल राज्य सरकार के पास ही रहता है। उन्होंने कहा कि इस सिद्धान्त का पालन एन.सी.टी.सी. के परिप्रेक्ष्य में भी किया जाना चाहिए।
श्री यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रत्येक राज्यों ने ए.टी.एस. आदि की स्थापना करके अपने स्तर से आतंकवाद के विरूद्ध प्रतिरोध क्षमता विकसित की है। राज्य एवं केन्द्र की सभी इकाईयों के बीच समन्वय कायम है। अभी तक सभी कार्यवाहियां बिना किसी अवरोध के समन्वित रूप से की जाती रही हैं। इन्टेलीजेन्स ब्यूरो द्वारा इंगित विभिन्न आपरेशनल लीड्स के आधार पर समन्वित रूप से आतंकवादियों के विरूद्ध कई आपरेशन्स सफलतापूर्वक चलाए गए हैं। इन परिस्थितियों में एन.सी.टी.सी. के माध्यम से आपरेशनल शक्तियों की दोहरी व्यवस्था कायम किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एन.सी.टी.सी. के सृजन विषयक आदेश की प्रस्तावना में इस बात पर जोर दिया गया है कि वर्तमान व्यवस्थाओं को ही मजबूत किया जाय तथा किसी प्रकार की दोहरी व्यवस्था कायम न की जाय। इसलिए एन.सी.टी.सी. को स्वतंत्र रूप से आपरेशनल शक्तियां दिए जाने का कोई सुसंगत आधार नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में एन.सी.टी.सी. को इन्टेलीजेन्स ब्यूरो के अधीन करते हुए राज्य की विभिन्न इकाईयों की आपरेशनल प्राथमिकतायें निर्धारित करने के अधिकार दिए गए हैं, जो राज्य के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण है। उन्होंने कहा कि राज्य को अधिकार है कि वह स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनी अधीनस्थ इकाईयों के लिए विभिन्न वरीयतायें निर्धारित करे। दोहरे नियंत्रण से भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी तथा अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने में संदेह रहेगा। उन्होंने कहा कि एन.सी.टी.सी. को राज्य की किसी भी इकाई से कोई भी सूचना प्राप्त करने का अधिकार है, परन्तु राज्य सरकार की इकाईयों को एन.सी.टी.सी. से उसी प्रकार सूचना प्राप्त किए जाने का कोई ठोस प्राविधान नहीं किया गया है। इसलिए ऐसा प्राविधान करने की आवश्यकता है कि यदि राज्य सरकार कोई सूचना चाहे तो एन.सी.टी.सी. प्रदान करने के लिए बाध्य हो। इसी प्रकार यदि कानून-व्यवस्था की दृष्टि से कोई तथ्य जनहित में गोपनीय रखा जाना आवश्यक हो तो राज्य को उसे देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि उनकी सरकार का स्पष्ट मत है कि एन.सी.टी.सी. को मूलतः अभिसूचना संकलन, विश्लेषण तथा आंकलन आदि से सम्बंधित दायित्वों के लिए सशक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि यह एजेन्सी अपना पूरा सामथ्र्य अभिसूचना की गुणवत्ता पर लगाए तो वह ज्यादा कारगर होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्था सामान्य प्रकृति की इन्टेलीजेन्स के बजाये एक्शनेबल इन्टेलीजेन्स विकसित करे। एक्शनेबल इन्टेलीजेन्स के आधार पर आपरेशनल कार्यवाहियां राज्य की इकाईयों द्वारा की जाए। इसके अलावा जहां राज्य द्वारा आवश्यक समझा जाय वहां एन.सी.टी.सी. का सहयोग प्राप्त किया जाय। उन्होंने कहा कि मल्टी एजेंसी सेन्टर की जो व्यवस्था एन.सी.टी.सी. में समाहित की गई है उसमें भी सक्रियता लाये जाने की आवश्यकता है। एन.सी.टी.सी. द्वारा लीड आपरेशनल इनपुट्स को विकसित करके राज्य की इकाईयों को यथाशीघ्र प्रभावी कार्यवाही हेतु सुलभ कराया जाना लाभप्रद होगा। विभिन्न प्रकार के डेटाबेस उदाहरणार्थ पासपोर्ट, इमीग्रेशन आदि भी राज्य की आपरेशनल एजेन्सीज को सुलभ कराया जाय। इंटरनेट टैªफिक पर सीधे सर्विलांस करने के लिए वाॅयस ओवर इन्टरनेट प्रोटोकाॅल की टैपिंग हेतु आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं वित्त पोषण केन्द्र सरकार द्वारा सुलभ कराया जाय। इससे राज्य की आपरेशनल यूनिट्स और अधिक सशक्त होंगी।
मुख्यमंत्री ने एन.सी.टी.सी. की स्टैण्डिंग काउन्सिल की भूमिका एवं कार्यप्रणाली के बारे में राज्यों को सुलभ कराये गये एस.ओ.पी. के ड्राफ्ट की चर्चा करते हुए कहा कि इसपर भी प्रदेश सरकार की कुछ आपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि इस परिप्रेक्ष्य में आतंकवाद निरोधक प्रयासों में सुधार लाए जाने की दृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों एवं विशिष्ट पहलुओं पर विचार हेतु प्रस्तावित फोकस ग्रुप में सम्बंधित राज्यों का प्रभावी प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाई वैल्यू टारगेट अथवा विशिष्ट इन्टेलीजेन्स इन्पुट पर कार्यवाही हेतु जो विशेष टीमें गठित की जाए, उनके कार्य की समीक्षा का अधिकार पूर्णरूपेण काउन्सिल को होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अधिकार किसी भी परिस्थिति में मात्र डायरेक्टर को नहीं दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार एन.सी.टी.सी. के आपरेशनल डिवीजन के लिए बनाई गई एस.ओ.पी. भी स्वीकार योग्य नहीं है। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कमियों की तरफ केन्द्र का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि निदेशक, एन.सी.टी.सी. को यह विकल्प दिया गया है कि विशेष परिस्थितियों में, वह राज्य के पुलिस महानिदेशक अथवा ए.टी.एस. प्रमुख केे परामर्श एवं सहयोग के बिना भी राज्य में तलाशी, बरामदगी एवं गिरफ्तारी आदि की कार्यवाही कर सकता है, यहां तक कि उन्हें सूचित करने की भी आवश्यकता नहीं है। राज्य के पुलिस महानिदेशक एवं ए.टी.एस. प्रमुख अनुभवी एवं जवाबदेह अधिकारी होते हैं। अतएव किसी भी प्रकार की कार्यवाही के पूर्व उनसे परामर्श एवं समन्वित सहयोग आवश्यक होना चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में एन.सी.टी.सी. की जो टीम आपरेशनल कार्यवाहियां करेगी, उसको यह विकल्प दिया गया है कि निकटतम थाने में उसके लिखित अभिकथन को प्रथम सूचना रिपोर्ट के पंजीकरण का आधार बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उचित नहीं कही जा सकती है। उन्होंने कहा कि आपरेशनल टीम के प्रमुख द्वारा विधिवत प्राथमिकी दर्ज करायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एस.ओ.पी. के सम्बन्ध में जो बिन्दु उठाये गये हैं, उनसे साफ है कि प्रस्तावित एस.ओ.पी. के प्राविधान भी राज्य के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण स्वरूप ही हैं। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार की एस.ओ.पी. का पृथक-पृथक सृजन किया जाना आवश्यक है। परस्पर इन्टेलीजेन्स शेयरिंग के लिए विस्तृत एस.ओ.पी. की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न अभियानों के संचालन में भी परस्पर समन्वय एवं उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए एस.ओ.पी. बनाई जानी चाहिए। इसी प्रकार एन.सी.टी.सी. द्वारा सुचारू रूप से डेटा शेयरिंग किए जाने के लिए भी स्पष्ट
एस.ओ.पी. का निर्धारण लाभप्रद होगा। उन्होंने कहा कि एन.सी.टी.सी. द्वारा की गई कार्यवाहियों से सम्बंधित अभियोगों के ट्रायल हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की तर्ज पर स्पेशल कोर्ट्स का सृजन जरूरी है, जिनका वित्तीय भार केन्द्र सरकार द्वारा ही वहन किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व में नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी बनाई जा चुकी है, जिसे सम्पूर्ण भारत हेतु थाने के प्रभारी अधिकारी की शक्तियां प्रदान की गई हैं। एन.सी.टी.सी. के माध्यम से आपरेशनल कार्यवाहियों की शक्तियां भी प्राप्त की जा रही हैं। ऐसा सम्भव है कि एन.सी.टी.सी. आपरेशन करे और उसका अन्वेषण एन.आई.ए. द्वारा किया जाय। इस प्रकार पुलिस व्यवस्था कायम रखने में राज्य की कोई भूमिका ही शेष न रह जाए, जबकि यह राज्य का ही मूल संवैधानिक दायित्व है। केन्द्र सरकार द्वारा
एन.सी.टी.सी. के माध्यम से जिस प्रकार एकतरफा शक्तियां ग्रहण की जा रही हैं, उनमें राज्य की परस्पर सहमति एवं साझेदारी का कोई प्राविधान नहीं रखा गया है। इससे राज्य की व्यवस्थाएं छिन्न-भिन्न हो सकती हंै। इस प्रकार केन्द्र का यह कदम सीधा संघीय प्रणाली पर प्रहार है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद तथा उग्रवाद से जनित बड़े-बड़े संघर्ष स्थानीय क्षमताओं के विकास के उपरान्त ही निष्क्रिय किए जा सके हैं। अतः राज्यों की स्थानीय क्षमताओं में विकास किया जाय। पुलिस बलों के त्वरित एवं सुरक्षित आवागमन हेतु उपयुक्त वाहनों की व्यवस्था, संचार माध्यमों का उच्चीकरण, आतंकवादी तत्वों को निष्क्रिय करने के लिए प्रभावी शस्त्रों की सुलभता, इलेक्ट्रानिक सर्विलान्स हेतु आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था, आधुनिक उपकरणों की सुलभता, अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आतंकवाद निरोधक प्रशिक्षण तथा विशिष्ट परिस्थितियों हेतु अपेक्षित निपुणताओं का विकास इत्यादि इसके महत्वपूर्ण अंश हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह सुविचारित मत है कि आंतरिक सुरक्षा से जुड़े तमाम मुद्दों से निपटने के लिए केन्द्र तथा प्रदेश सरकार की साझेदारी एवं परस्पर सहयोग महत्वपूर्ण है। किसी भी आपरेशनल फंक्शन के लिए राज्य सरकार की जानकारी, सहयोग एवं समन्वय आवश्यक शर्त होनी चाहिए। उन्होने अपेक्षा की कि एक सबल, स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश की ओर से प्रस्तुत बिन्दुओं को अन्य राज्य भी अपनी सहमति प्रदान करेंगे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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Posted on 03 May 2012 by admin
इकोफ्रैंडली रिवर फ्रंट डेवलप्मेण्ट के लिए योजनाएं प्रस्तावित करें-मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के तटों पर बसे नगरों में निर्माणाधीन एस0टी0पी0 को शीघ्र पूरा कर इन्हें संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन शहरों में सीवर लाइन पड़ गयी है, ऐसे शहरों के मकानों को सीवर लाइन से जोड़ा जाए, ताकि इन नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
मुख्यमंत्री आज यहां सचिवालय एनेक्सी में उ0प्र0 राज्य गंगा नदी संरक्षण अभिकरण की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इकोफ्रैंडली रिवर फ्रंट डेवलप्मेण्ट की योजनाएं फीजिबिल्टी के आधार पर प्रस्तावित की जायें। इस अवसर पर अभिकरण द्वारा एक प्रस्तुतिकरण किया गया, जिसमें अभिकरण के गठन के उद्देश्य तथा इसके दायित्वों की जानकारी दी गयी।
बैठक में नगर विकास मंत्री श्री मो0 आजम खां, राज्य मंत्री प्रोटोकाल श्री अभिषेक मिश्रा, उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग श्री एन0सी0 बाजपेई, मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव नगर विकास श्री प्रवीर कुमार, सचिव मुख्यमंत्री श्रीमती अनीता सिंह सहित सिंचाई, जल निगम, उ0प्र0 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अभिकरण के अधिकारी उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 02 May 2012 by admin
लगभग 20 हजार पुरूष और महिलाएं, नौजवान और अल्पसंख्यक 5-कालिदास मार्ग लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनता से भेंट कार्यक्रम में आज सम्मिलित हुए। प्रदेश के कोने-कोने से जहाॅ फरियादी उम्मीदें बांधकर अपने आवेदन लाए थे वहीं उनकी भी तादाद कम नहीं थी जो प्रदेश में बसपा कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए श्री अखिलेश यादव को बधाई देने और कुछ सिर्फ उन्हें देखने और मिलने आए थे।
प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री जी से मिलनेवालों में बसपा की सरकार के दबंगों से पीडि़त, बेकारी का दंश झेल रहे, नौजवान पढ़ाई और बीमारी में इलाज की मदद के लिए भी लोग आए थे। मुख्यमंत्री जी ने सबको आश्वस्त किया कि उनके आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। सोनभद्र की कावेरी घोष एक दलित बच्चे के इलाज के लिए मिली तो बेरोजगार फार्मेसिस्ट विवेक पाण्डेय, कामता प्रसाद, बृृजेश सिंह, संदीप सेंगर, बालेन्द्र शुक्ला एवं हरिशंकर पाठक ने अपनी व्यथा सुनाई। फिरोजाबाद की गुडिया, जैतपुर की नीलिमा और इलाहाबाद की निर्मला यादव की भी समस्याएं मुख्यमंत्री जी ने सुनी। मिड डे मील की रसोइयां परमशीला के साथ एक प्रतिनिधि मण्डल मिला, जिन्होने एक वर्ष से वेतन न मिलने की शिकायत की।
तमिलनाडु से आये समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री इंलग्गो यादव एवं उनके साथियों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक शाल ओढाकर सम्मान किया और उन्हें बहुमत की सरकार बनाने के लिए बधाई दी।
हुसैनगंज, लखनऊ की षषि मिश्रा और बहेड़ी से आए सरदार सतनाम को पुलिस उत्पीड़न की शिकायत थी तो श्रीमती शकुन्तला शुक्ला, केराकत जौनपुर को रास्ते पर दबंगों के कब्जे से परेशानी थी। हरिओम कुमार (संतरविदास नगर) को पढ़ाई के लिए मदद चाहिए थी। फुटबाल खिलाड़ी नेहाखान और फरजाना खाॅ (हुसैनाबाद), उन्नाव के समरजहाॅ हाशमी तथा मुस्ताक भली को नौकरी चाहिए थी। ब्रह्मानन्द महाविद्यालय, राठ हमीरपुर के श्री श्याम नारायण शुक्ला विनियमितीकरण की समस्या को लेकर आए थे। फिरोजाबाद, शिकोहाबाद की आमना पाल बन्नू को भी मुख्यमंत्री को अपनी बात बतानी थी। लखीमपुर खीरी के चन्द्रहास पुलिस से पीडि़त थे।
लखनऊ की शिक्षिका शाहबानू, कानपुर की रामधारी, सोनभद्र के लालजी पाण्डेय, अलीगढ़ के महावीर सिंह और देवा शरीफ के हाजी दिलावर शाह भी मुख्यमंत्री को अपनी फरियाद सुनाकर संतुष्ट दिखाई दिए। औरैया के इकबाल मोहम्मद कब्रिस्तान की समस्या लाए है। लखनऊ के केके वैश्य, कुमार वैश्य और पूनम वैश्य को जानमाल पर खतरे का अंदेशा था। नानपारा, बहराइच की मंजू अपने बेटे रोहित के ब्रेन टयूमर के इलाज के लिए परेशान थी। डा0 अनुराग मिश्र अनुदानित महाविद्यालयों की समस्या लेकर आए थे। कुछ गम्भीर मामलों में मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को तत्काल कार्यवाही के निर्देश भी दिए।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 02 May 2012 by admin
Posted on 29 April 2012 by admin
उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कर एवं करेत्तर विभागों का वर्ष 2012-13 के लिए 73 हजार 762 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने इसका अनुमोदन कर दिया है।
मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने सचिवालय एनेक्सी में आज कर एवं करेत्तर राजस्व से सम्बन्धित विभागों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राजस्व प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सम्बन्धित विभाग एक कार्य योजना तैयार कर लें। इस कार्य योजना पर अमल करने और राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए उसकी मासिक रूप से गहन समीक्षा भी करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के त्वरित विकास के लिए संसाधनों में वृद्धि जरुरी है। उन्होंने कहा कि प्राप्त होने वाले राजस्व का इस्तेमाल प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं जैसे-बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक सेवाओं में किया जाएगा।
श्री उस्मानी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कृत संकल्प है और प्रदेश के विकास के लिए संसाधनों में बढ़ोत्तरी भी आवश्यक है। उन्होंने कर एवं करेत्तर राजस्व से सम्बन्धित विभागों को निर्देश दिए कि वार्षिक राजस्व प्राप्तियों के लक्ष्यों का जो निर्धारण किया गया है उसे प्रत्येक दशा में पूरा किया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव के अलावा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री अनिल कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव वित्त श्रीमती वृन्दा स्वरूप तथा सम्बन्धित विभागों के प्रमुख सचिव/सचिव मौजूद थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 27 April 2012 by admin
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां शास्त्री भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये:-
वर्ष 2012-13 में यूरिया एवं फास्फेटिक उर्वरकों के अग्रिम भण्डारण एवं उर्वरकों के परिवहन सम्बन्धी प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने किसानों को समय से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये वर्ष 2012-13 हेतु यूरिया एवं फास्फेटिक उर्वरकों के अग्रिम भण्डारण एवं उर्वरकों के परिवहन सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार यूरिया एवं फास्फेटिक उर्वरकों की प्री-पोजिशनिंग योजना के अंतर्गत औसतन 06 माह की अवधि हेतु पी0सी0एफ0 को उनके द्वारा निवेश की गयी धनराशि पर देय ब्याज, जो 11.25 प्रतिशत से अनधिक होगा, की प्रतिपूर्ति शासन द्वारा की जायेगी। इस मद में अधिकतम 44.31 करोड़ रूपये की धनराशि अनुमन्य होगी। इसके अलावा पी0सी0एफ0 को भंडारित फास्फेटिक उर्वरकों पर ‘भंडारण निगम से न्यूनतम संभव दरों पर’ देय भण्डारण शुल्क की प्रतिपूर्ति की जायेगी। इस मद में अधिकतम 10.11 करोड़ रूपये की धनराशि अनुमन्य होगी।
पी0सी0एफ0 बफर गोदाम से समितियों तक पूर्वभंडारित फास्फेटिक एवं यूरिया उर्वरक के परिवहन व्यय की प्रतिपूर्ति हेतु अनुदान की व्यवस्था की जायेगी। इसके तहत प्री-पोजिशनिंग व्यवस्था के अंतर्गत पी0सी0एफ0 को आपूर्ति की गयी यूरिया एवं फास्फेटिक उर्वरक पर औसतन 150 रूपये प्रति मीट्रिक टन की दर से अथवा वास्तविक व्यय की धनराशि, जो भी कम हो, इस प्रतिबन्ध के साथ उपलब्ध करायी जायेगी कि उर्वरक का परिवहन जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत दर से अधिक न हो। इस प्रकार 8 लाख मीट्रिक टन फास्फेटिक उर्वरक एवं 03 लाख मीट्रिक टन यूरिया हेतु इस वर्ष इस मद में अधिकतम
16.50 करोड़ रूपये की धनराशि अनुमन्य होगी।
सामान्य उर्वरकों (17.40 लाख मीट्रिक टन यूरिया एवं 7.07 लाख मीट्रिक टन फास्फेटिक) के परिवहन पर प्रदायकर्ता से प्राप्त होने वाली धनराशि को कम करते हुए, परिवहन पर हुए वास्तविक व्यय की औसत अंतर धनराशि अधिकतम 150 रूपये प्रति मीट्रिक टन की दर से अथवा वास्तविक व्यय की धनराशि जो भी कम हो, इस प्रतिबन्ध के साथ उपलब्ध करायी जायेगी कि उर्वरक का परिवहन जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत दर से अधिक न हो। इस प्रयोजन के लिए उर्वरकों के परिवहन हेतु अधिकतम 36.70 करोड़ रूपये की धनराशि प्रतिपूर्ति हेतु अनुमन्य होगी।
इसके अलावा प्रदायकर्ता से क्रय की गयी पूर्व भण्डारित उर्वरक के सम्बन्ध में भविष्य में इस स्थिति की संभावना हो सकती है कि पूर्व भंडारित उर्वरकों के बिक्री मूल्य में कमी हो जाए। चूंकि तब किसानों को घटे मूल्य पर ही उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करना होगा, जिसके परिणामस्वरूप संस्थाओं/सहकारी संस्थाओं को हानि उठानी पड़ेगी। इसलिए संस्था/सहकारी समितियों को होने वाली इस संभावित हानि की प्रतिपूर्ति सरकार से कराया जाना अभीष्ट होगा। इसकी प्रथमतः प्रतिपूर्ति प्रस्तावित बजट की बचत की धनराशि से या बचत की अनुपलब्धता की दशा में अतिरिक्त मांग के माध्यम से सुनिश्चित करायी जायेगी।
मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया कि निबन्धक, सहकारी समितियां, उ0प्र0 एवं उ0प्र0कोआपरेटिव फेडरेशन लि0 इन व्ययों के मद तथा व्ययों को बेहतर वित्तीय/ प्रशासकीय प्रबन्धन से सीमित करने का प्रयास करेंगे तथा बाजार व्यवस्था के कारकों का गम्भीरता से अध्ययन कर प्री-पोजिशनिंग का निर्णय लेंगे, ताकि अनावश्यक व्यय न हो। साथ ही बैंको से ऋण भी इसी तरह निगोशिएट करेंगे कि यह ब्याज दर सीमित रहे। यूरिया एवं फास्फेटिक उर्वरकों के अग्रिम भण्डारण पर ब्याज मद, भण्डारण मद एवं परिवहन मद में व्यय होने वाली धनराशि की स्वीकृति वित्त विभाग की सहमति से प्रदान की जायेगी।
उ0प्र0 अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लि0 के अधिकारियों/कर्मचारियों को वेतन समिति (वेतन समिति 2008) के सातवें प्रतिवेदन की संस्तुतियों के आधार पर पुनरीक्षित वेतन संरचना में वेतन बैण्ड एवं ग्रेड वेतन तथा अन्य भत्ते एवं सुविधायें देने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्णकालिक/नियमित कार्मिकों को वेतन समिति (वेतन समिति 2008) के सातवें प्रतिवेदन की संस्तुतियों पर लिये गये निर्णय के अनुसार पुनरीक्षित वेतन संरचना में वेतन बैण्ड एवं ग्रेड वेतन तथा अन्य भत्ते एवं सुविधायें स्वीकृत करने का फैसला लिया है। यह सुविधा तात्कालिक प्रभाव से अनुमन्य होगी, पूर्वगामी अवधि के लिए प्रकल्पित आधार पर पुनरीक्षण किया जायेगा। पुनरीक्षित वेतन संरचना में वेतन बैण्ड एवं ग्रेड वेतन, अन्य भत्ते एवं सुविधायें अधिकृत समिति की 03 जनवरी, 2012 की बैठक की संस्तुतियों के आधार पर अनुमन्य की जायेंगी। यह भी निर्णय लिया गया कि पुनरीक्षित वेतन/भत्तों के भुगतान से आने वाले अधिकृत व्ययभार को निगम द्वारा स्वयं के स्रोतों से वहन किया जाएगा। इसके लिए कोई राजकीय अनुदान/सहायता देय नहीं होगी।
विज्ञापन कर की दरों में संशोधन सम्बन्धी प्रस्ताव अनुमोदित
प्रदेश में विज्ञापन दर के संशोधन के लिए मंत्रिपरिषद ने दो अधिसूचनाओं के आलेखों में प्रस्तावित विज्ञापन कर की संशोधित दरों को अनुमोदित कर दिया है। संशोधित दरें अधिसूचनाओं के निर्गत होने की तिथि से प्रभावी होंगी।
ज्ञातव्य है कि मनोरंजन कर विभाग राज्य के राजस्व प्राप्ति के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2012-13 हेतु निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु शासन द्वारा अभी से प्रभावी कदम उठाये जा रहे हैं। वर्तमान में सिनेमा के पर्दे पर प्रदर्शित विज्ञापन ही कर के दायरे में है। वर्ष 2009 में पारित अधिनियम द्वारा राज्य सरकार को विज्ञापन कर की दरों के निर्धारण की प्राप्त शक्ति के क्रम में वीडियो एवं विज्ञापन कर नियमावली में संशोधन के उपरान्त सिनेमा के पर्दे के अतिरिक्त केबिल टी0वी0, वीडियो सिनेमा व अन्य डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पर्दे पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापन को कर के दायरे में लाया गया। वर्तमान में सिनेमा के पर्दे पर विज्ञापन कर की विज्ञापनवार दरें वर्ष 1983 एवं वैकल्पिक एकमुश्त दर वर्ष 1989 से लागू है, जो 25 वर्ष से अधिक पुरानी है।
मंत्रिपरिषद के निर्णय द्वारा सिनेमा के पर्दे पर लागू विज्ञापन कर की दरों को पुनरीक्षित किया गया है तथा केबिल टी0वी0, वीडियो सिनेमा व अन्य डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पर्दे पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापन पर विज्ञापन कर की दरें निर्धारित की गयी हैं। यह दरें तीन श्रेणियों यथा-नगर निगम व नोएडा/गे्रटर नोएडा, नगर पालिका तथा अन्य स्थानीय क्षेत्रों में विभाजित करते हुए शार्ट, स्लाइड्स, फिल्म का ट्रेलर व अन्य विज्ञापनों के लिए अलग-अलग नियत की गयी है तथा विकल्प के रूप में सिनेमा व मल्टीप्लेक्स सिनेमा, केबिल टी0वी0, वीडियो तथा अन्य डिजिटल उपकरणों हेतु एकमुश्त दरें भी निर्धारित की गयी हैं। सिनेमा पर्दे पर विज्ञापन कर की दरों में संशोधन एवं केबिल टी0वी0 आदि के माध्यम से पर्दे पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापन कर की दरों के निर्धारण से लगभग 11.00 करोड़ रूपये की अतिरिक्त आय की संभावना है।
जनता जर्नादन हायर सेकेण्ड्री स्कूल, रग्घुपट्टी, अम्बेडकरनगर को अनुदान सूची पर लेने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने जनता जर्नादन हायर सेकेण्ड्री स्कूल, रग्घुपट्टी, अम्बेडकरनगर को अनुदान सूची पर लेने सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार मा0 न्यायालय के आदेशों के क्रम में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति एवं वित्त विभाग की अनापत्ति को दृष्टिगत रखते हुए शासनादेश निर्गत होने की तिथि से कुल 27 अध्यापकों/कर्मचारियों हेतु पद सृजित करते हुए जनता जर्नादन हायर सेकेण्ड्री स्कूल, रग्घुपट्टी, अम्बेडकरनगर को अनुदान सूची पर लिया जाएगा।
मा0 सर्वोच्च न्यायालय में योजित विशेष अनुज्ञा याचिका (सिविल) - 78/2011 को वापस लेने का प्रस्ताव अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने मा0 सर्वोच्च न्यायालय में योजित विशेष अनुज्ञा याचिका (सिविल) संख्या - 78/2011 उत्तर प्रदेश राज्य तथा अन्य प्रति राम सेवक तथा अन्य को वापस लिए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया।
ज्ञातव्य है कि लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश द्वारा सम्पादित किये जाने वाले विभिन्न चयनों के सम्बन्ध में प्राप्त शिकायती पत्रों के आधार पर प्रकरण की जांच सतर्कता अधिष्ठान से कराये जाने के सम्बन्ध में सतर्कता विभाग द्वारा 27 जून, 2008 को आदेश निर्गत किये गये थे। लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, श्री राम सेवक तथा कतिपय अन्य सदस्यगण द्वारा सतर्कता विभाग के आदेश के विरूद्ध मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में रिट याचिका संख्या-46110/2008 राम सेवक तथा अन्य प्रति उत्तर प्रदेश राज्य तथा अन्य योजित की गयी। शासन द्वारा उक्त रिट याचिका में प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया गया।
रिट याचिका संख्या-46110/2008 में 23 सितम्बर, 2010 को पारित आदेश में आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण के विरूद्ध सतर्कता जांच को अननुज्ञेय पाते हुए, उक्त जांच को संविधान के प्राविधानों के विपरीत बताया गया। साथ ही तत्कालीन अध्यक्ष, लोक सेवा आयोग के समस्त सेवानैवृत्तिक देयों का भुगतान करने के आदेश दिये गये। मा0 उच्च न्यायालय के आदेश के विरूद्ध मा. सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका (सिविल) संख्या-78/2011 उत्तर प्रदेश राज्य तथा अन्य प्रति राम सेवक तथा अन्या योजित कर दी गयी।
वर्तमान में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा 23 सितम्बर, 2010 को पारित आदेश का परीक्षण/अध्ययन करने पर यह समीचीन पाया गया कि मा0 उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाय तथा मा0 सर्वोच्च न्यायालय में योजित की गयी विशेष अनुज्ञा याचिका (सिविल) संख्या-78/2011 को वापस लिया जाए।
विधि परामर्शी निर्देशिका में संशोधन के विरूद्ध दायर रिट याचिकाओं के क्रम में शासन द्वारा योजित विशेष अनुज्ञा याचिका को वापस लिये जाने को कार्योत्तर स्वीकृति
मंत्रिपरिषद ने रिट याचिका संख्या- 7851 (एम/बी)/2008 उ0प्र0 शासकीय अधिवक्ता कल्याण समिति बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य में पारित मा0 उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 6-1-2012 के विरुद्ध मा0 उच्चतम न्यायालय में लम्बित विशेष अनुज्ञा याचिका संख्या-4160/2012 तथा रिट याचिका संख्या-8246 (एम/बी)/2011 विशन पाल सक्सेना बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य में पारित मा0 उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 12-1-2012 के विरुद्ध योजित सभी विशेष अनुज्ञा याचिकाओं को वापस लिये जाने को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन के पश्चात इन सभी विशेष अनुज्ञा याचिकाओं को वापस लिये जाने के आदेश 18 अपै्रल, 2012 को निर्गत कर दिये गये हैं।
सेवानिवृत्त मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त मंत्रिमण्डलीय सचिव को आकस्मिक कार्यों के संपादन हेतु एक घरेलू सेवक व वाहन चालक की अनुमन्य सुविधा निरस्त
मंत्रिपरिषद ने सेवानिवृत्त मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त मंत्रिमण्डलीय सचिव को दिन प्रतिदिन के आकस्मिक कार्यों के संपादन हेतु एक घरेलू सेवक व वाहन चालक की सुविधा अनुमन्य कराने का औचित्य न पाये जाने पर इस सम्बन्ध में 05 मार्च, 2012 को जारी शासनादेश को निरस्त कराने का निर्णय लिया है।
उ0प्र0 क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (संशोधन) विधेयक, 2011 को वापस लेने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (संशोधन) विधेयक, 2011 को वापस लेने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि उ0प्र0 क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 में क्षेत्र पंचायत के प्रमुख और जिला पंचायत के अध्यक्ष को निर्वाचित सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उनके पद से हटाने की व्यवस्था की गयी है। इस अधिनियम की धारा-15 एवं धारा-28 की उपधारा (13) में प्राविधान है कि इस धारा के अधीन किसी प्रस्ताव का नोटिस यथास्थिति प्रमुख या अध्यक्ष के पद ग्रहण करने के एक वर्ष के भीतर ग्रहण नहीं की जाएगी।
इस प्रकार क्षेत्र पंचायत प्रमुख/अध्यक्ष जिला पंचायत के विरूद्ध इस धारा के अधीन सामान्य बहुमत से एक वर्ष के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, किन्तु प्रमुख/अध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव पद ग्रहण करने के दो वर्ष के बाद लाये जाने का विभागीय मत स्थिर हुआ। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए उ0प्र0 क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-15 की उपधारा (13) और धारा-28 की
उपधारा (13) में संशोधन करने की दृष्टि से उ0प्र0 क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (संशोधन) विधेयक, 2011 विधानमण्डल के दोनों सदनों से पारित किये जाने के बाद 19 अगस्त, 2011 को राज्यपाल को भेजा गया, जिस पर अनुमति प्रतीक्षित है।
इसी बीच प्रदेश में विधानसभा का सामान्य चुनाव सम्पन्न हुआ, जिसमें नई सरकार को जनादेश प्राप्त हो गया है। क्षेत्र पंचायतों एवं जिला पंचायतों के गठन हुए भी एक वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है और कतिपय क्षेत्र पंचायतों/जिला पंचायतों में अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस प्राप्त होने की सूचनायें मिल रहीं हैं। ऐसे में बदली हुई परिस्थितियों में प्रश्नगत अधिनियम की वर्तमान व्यवस्था ही उचित प्रतीत होती है। इसको दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार ने संशोधन विधेयक को वापस लेने का निर्णय लिया है।
‘मान्यवर श्री कांशीराम वन, वन्य जीव एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार’ योजना का नाम बदलकर ‘वीर अब्दुल हमीद वन एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार’ करने का फैसला
मंत्रिपरिषद ने वीर अब्दुल हमीद को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान देने के लिए ‘मान्यवर श्री कांशीराम वन, वन्य जीव एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार’ योजना का नाम बदलकर ‘वीर अब्दुल हमीद वन एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार’ करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पूर्व में अधिसूचित पुरस्कार से सम्बन्धित समस्त प्राविधान यथावत रखने तथा इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी करने का भी निर्णय लिया है।
मा0 उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ के आदेश के अनुपालन हेतु स्वास्थ्य सहायक संवर्ग का स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के पद पर की गयी नोशनल पदोन्नति पर वेतन निर्धारण वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-02 भाग-02 से 4 के मूल नियम-27 के अधिकारों का प्रतिनिधायन
मंत्रिपरिषद ने परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य सहायक संवर्ग की रिट याचिका में पारित आदेश दिनांक 19 जुलाई, 2007 के अंतर्गत नोशनल प्रोन्नति प्राप्त स्वास्थ्य सहायकों को पदोन्नति की तिथि से एवं नोशनल पदोन्नति प्राप्त सेवारत स्वास्थ्य सहायकों का वेतनमान वास्तविक रूप से प्रोन्नत के पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मूल नियम-27 के अन्तर्गत विभागाध्यक्ष की हैसियत से पुनर्निधारित किये जाने के अधिकारों को प्रतिनिधानित्व किये जाने के प्रस्ताव को इस शर्त के अधीन अनुमोदित किया है कि विभागाध्यक्ष प्रत्येक मामले में वित्त विभाग के प्रतिनिधि के रूप में विभाग में तैनात वित्त नियंत्रक की सहमति प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही मूल नियम-27 के अंतर्गत अधिकारों का प्रयोग केवल मा0 उच्च न्यायालय के संदर्भित आदेश दिनांक 19 जुलाई, 2007 के अनुपालन हेतु ही किया जाएगा।
मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 सचिवालय अनुदेश-1982 में संशोधन का निर्णय लिया
अब मुख्य सचिव ही मंत्रिपरिषद के सचिव होंगे
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सचिवालय अनुदेश-1982 के अनुदेश संख्या-5 के प्राविधान में संशोधन करते हुए ‘‘कोई अन्य अधिकारी’’ अंश को हटाने का निर्णय लिया है, जिसके फलस्वरूप अब भविष्य में मुख्य सचिव ही मंत्रिपरिषद के सचिव होंगे।
पूर्व में उ0प्र0 सचिवालय अनुदेश-1982 में यह व्यवस्था थी कि मुख्य सचिव के अलावा कोई अन्य अधिकारी भी मंत्रिपरिषद का सचिव हो सकता है। इसी प्राविधान के तहत पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा कैबिनेट सेक्रेटरी के पद पर अन्य अधिकारी की नियुक्ति की गयी थी। आज मंत्रिपरिषद के निर्णय से इस प्राविधान में संशोधन करके ‘‘कोई अन्य अधिकारी’’ अंश को हटाने का निर्णय लिया गया।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 27 April 2012 by admin
रोजगार कार्यालय में भी इन्टरनेट द्वारा हो सकेगा पंजीयन
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नेशनल ई-गवर्नेन्स प्लान के अन्तर्गत स्टेट पोर्टल, ई-फाॅम्र्स एवं स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे योजनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में 01 जुलाई, 2012 से वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, बीमारी एवं विवाह के लिए अनुदान, उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत सम्बन्धी आवेदन, कुटुम्ब रजिस्टर की कापी के लिए आवेदन, दहेज उत्पीड़न सम्बन्धी कानूनी सहायता के लिए आवेदन, निराश्रित महिला की पुत्री के विवाह का आवेदन जैसे कुल 26 कार्य अब इन्टरनेट के माध्यम से सीधे किये जा सकेंगे। इसी क्रम में रोजगार कार्यालयों में पंजीयन भी इन्टरनेट के माध्यम से किया जा सकेगा। साथ ही रोजगार कार्यालयों में पंजीयन के नवीनीकरण के लिए इन्टरनेट से ही आवेदन भी किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने आज सचिवालय एनेक्सी में नेशनल ई-गवर्नेन्स प्लान के अन्तर्गत कार्यान्वित की जा रही स्टेट पोर्टल, ई-फाॅम्र्स एवं स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे (एस0एस0डी0जी0) योजनाओं की समीक्षा के दौरान, एन0आई0सी0 के प्रतिनिधियों तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता के लिये लाभकारी इस योजना को त्वरित गति से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 01 जुलाई, 2012 से समस्त जनपदों में जन सेवा केन्द्रों के माध्यम से योजना के अन्तर्गत चिन्हित सभी 26 सेवायें उपलब्ध कराई जाएं।
योजना में जिन आठ विभागों की योजनाओं को सम्मिलित किया गया है, वे हैं:- खाद्य एवं रसद, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन (श्रम), नगर विकास, विकलांग कल्याण, समाज कल्याण, पंचायती राज, राजस्व तथा महिला एवं बाल विकास। खाद्य एवं रसद विभाग के अन्तर्गत नये राशन कार्ड, राशन कार्ड के नवीनीकरण, राशन कार्ड के संशोधन एवं राशन कार्ड के समर्पण हेतु आवेदन किया जा सकेगा, जबकि प्रशिक्षण एवं सेवायोजन (श्रम) विभाग के अन्तर्गत रोज़गार कार्यालय में पंजीयन तथा नवीनीकरण की सुविधा प्रदान की जायेगी। इसी प्रकार नगर विकास विभाग नगरीय क्षेत्रों में जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र हेतु आवेदन स्वीकार करेगा, जबकि विकलांग कल्याण विभाग के अन्तर्गत विकलांग व्यक्ति को ऋण, उनसे विवाह करने पर प्रोत्साहन पुरस्कार तथा उनके द्वारा प्रयोग किये जाने वाले संयंत्रों आदि के क्रय हेतु सहायता के लिए आवेदन किया जा सकेगा।
इसी प्रकार समाज कल्याण विभाग वृद्धावस्था पेन्शन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, सामान्य, अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति, बीमारी एवं विवाह हेतु अनुदान तथा उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत सम्बन्धी आवेदन की सुविधा प्रदान करेगा, जबकि पंचायती राज विभाग कुटुम्ब रजिस्टर की कापी तथा ग्रामीण क्षेत्र के जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र की सुविधा उपलब्ध करायेगा। राजस्व विभाग द्वारा प्रदत्त की जाने वाली सेवाओं में निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र तथा खतौनी सम्मिलित होंगी, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं को पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला (विधवा) पेन्शन योजना, दहेज योजना के अन्तर्गत महिलाओं को वित्तीय सहायता, दहेज उत्पीड़न में महिलाओं को कानूनी सहायता, पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला (विधवा) की पुत्री के विवाह हेतु अनुदान तथा दम्पत्ति पुरस्कार योजना के अन्तर्गत 35 वर्ष से कम आयु की विधवा महिला के विवाह हेतु आवेदन स्वीकार करेगा। इस प्रकार यह आठ विभाग एस0एस0डी0जी0 योजना के अन्तर्गत कुल मिलाकर 26 सेवायें उपलब्ध करायेंगे।
बैठक में सचिव आई0टी0 एवं इलेक्ट्रानिक्स श्री जीवेश नन्दन द्वारा योजना की पृष्ठभूमि से अवगत कराते हुये सेवाओं से सम्बन्धित विभागों के उपस्थित समस्त अधिकारियों को इस योजना के सफलतापूर्वक लागू किये जाने हेतु उनके अपेक्षित सहयोग के लिये आग्रह किया गया। उनके द्वारा अवगत कराया गया कि यह योजना राज्य में आम जनमानस को उनके द्वार के समीप सुगमता से विभिन्न शासकीय सेवायें जन सेवा केन्द्रों के माध्यम से इलेक्ट्राॅनिक डिलीवरी से उपलब्ध कराने के लिये क्रियान्वित की जा रही है। योजना के लागू होने से शासकीय सेवायंे त्वरित गति एवं पारदर्शिता के साथ प्रदान की जा सकेंगी तथा नागरिकों को सेवाओं को प्राप्त करने में लगने वाले समय एवं व्यय में कमी आयेगी। बैठक में प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री अनिल कुमार गुप्ता तथा नेशनल इन्फारमेटिक्स सेन्टर के उप महानिदेशक श्री एस0बी0 सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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Posted on 24 April 2012 by admin
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां एनेक्सी में सम्पन्न मण्डी परिषद के संचालक मण्डल की 141वीं बैठक में लोहिया ग्राम योजना को पुनः संचालित करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही वर्ष 2012-13 के लिए मण्डी परिषद के बजट को भी मंजूरी प्रदान की गयी। मुख्यमंत्री मण्डी परिषद के अध्यक्ष भी हैं।
मुख्यमंत्री ने मण्डी परिषद द्वारा कराये जा रहे विकास कार्याें की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि इस वर्ष नवीन मण्डी स्थल के निर्माण/विकास के लिए 887.88 करोड़ रूपये, सम्पर्क मार्गाें के निर्माण हेतु 740.98 करोड़ रूपये, लोहिया ग्रामों के विकास हेतु 250 करोड़ रूपये तथा अधिष्ठान व्यय के लिए 190 करोड़ रूपये की धनराशि की व्यवस्था की गयी है।
श्री यादव ने लोहिया ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि योजना के अन्तर्गत 250 या इससे अधिक आबादी वाले राज्य के 1000 गांवों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के प्रत्येक चयनित गांव में 25 लाख रूपये की लागत से सी0सी0 रोड, नाली, विद्युतीकरण, पेयजल हेतु हैण्डपम्प की स्थापना तथा सौर ऊर्जा प्रकाश की व्यवस्था की जाये। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद से इस वर्ष कम से कम 05 गांव का चयन करते हुए चयनित ग्रामों में कार्य शीघ्र प्रारम्भ किया जाए।
मुख्यमंत्री ने मण्डी परिषद के भविष्य के कार्यकलापों को प्रभावी एवं परिणामपरक बनाने के उद्देश्य से आगामी 05 वर्षों का विजन डाॅक्यूमेन्ट किसी ख्याति प्राप्त संस्था से कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विजन डाॅक्यूमेन्ट के अन्तर्गत मण्डी परिषद/समितियों में कम्प्यूटरीकरण की व्यवस्था, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के मण्डी स्थलों का विकास तथा कृषि उत्पाद के निर्यात को बढ़ावा देने जैसे विषयों का वार्षिक रोड मैप तैयार कराया जाये। इसी प्रकार उन्होंने प्रबन्धकीय सूचना प्रणाली (एम0आई0एस0) विकसित करने का निर्देश देते हुए कहा कि मण्डी परिषद के समस्त कार्यकलापों का कम्प्यूटराईजेशन करने के अलावा वर्तमान में चल रही कम्प्यूटराईजेशन परियोजनाओं एवं आगामी परियोजनाओं को एक प्रबन्धकीय सूचना प्रणाली के अन्तर्गत लाया जाये। उन्होंने कहा कि प्रबन्धकीय सूचना प्रणाली के विकास से मण्डी परिषद तथा मण्डी समितियों को समस्त सूचनाएं एक ही पोर्टल से प्राप्त होने लगेंगी, जिससे उच्च स्तरीय विश्लेषण सहज एवं सटीक हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं की चर्चा करते हुए ताज ब्राण्ड आलू के निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने आलू निर्यातकों को भाड़े में दी जाने वाली अनुदान धनराशि 1.50 रूपये प्रति कि0ग्रा0 से बढ़ाकर 02 रूपये प्रति कि0ग्राम0 करने का निर्णय लिया, ताकि निर्यातकों की संख्या में वृद्धि हो सके। इसके अतिरिक्त उन्होंने इस्लाम नगर जनपद भीमनगर में एक नई स्वतंत्र मण्डी की स्थापना तथा नवीन मण्डी स्थल बिल्सी (बदायूं) में निरीक्षण भवन के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। उन्होंने बुन्देलखण्ड पैकेज के अन्तर्गत कराये जाने वाले निर्माण कार्यों हेतु ठेकेदारों की कार्यक्षमता का पुनर्निर्धारण करते हुए लोक निर्माण विभाग की शर्तों एवं दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही करने के निर्देश भी दिये।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आलोक रंजन, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव वित्त सुश्री वृन्दा स्वरूप, प्रमुख सचिव कृषि श्री राजीव कपूर, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद श्री बलविन्दर कुमार, निदेशक मण्डी परिषद श्री सत्येन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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Posted on 24 April 2012 by admin
उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मध्य प्रदेश में राष्ट्रद्रोही तत्वों पर निगाह रखने में मदद मिलेगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेन्सी (एन0आई0ए0) के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना में राज्य सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिए जाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि लखनऊ में क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित हो जाने से उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मध्य प्रदेश में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त राष्ट्रद्रोही तत्वों पर निगाह रखने में काफी मदद मिलेगी।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री से एन0आई0ए0 के महानिदेशक श्री एस0सी0 सिन्हा ने आज यहां एनेक्सी में मुलाकात कर अपने संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना में प्रदेश सरकार के सहयोग का अनुरोध किया। इस अवसर पर श्री सिन्हा ने मुख्यमंत्री को एन0आई0ए0 के कार्यकलापों की जानकारी देते हुए बताया कि एन0आई0ए0 अतिशीघ्र लखनऊ में क्षेत्रीय कार्यालय खोलना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि एन0आई0ए0 पहले ही हैदराबाद तथा गुवाहाटी में अपना क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित कर चुका है।
बैठक में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग तथा प्रमुख सचिव गृह श्री आर0एम0 श्रीवास्तव उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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