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विकास तथा लोगों की समृद्धि के लिए सड़कों का विकास अत्यंत आवश्यक है

Posted on 30 August 2012 by admin

5x10उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्य के चैमुखी विकास तथा लोगों की समृद्धि के लिए सड़कों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रदेश में सड़कों का एक प्रभावी संजाल विकसित हो जाए तो विकास को गति देना आसान हो जाएगा और प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों का त्वरित विकास हो सकेगा। सड़कों का ऐसा नेटवर्क, जिसपर यातायात सुगम हो, प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों, पर्यटन, उद्योगों की स्थापना इत्यादि को बढ़ावा देगा, जिससे प्रदेश में चारों ओर समृद्धि आएगी। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा और खाली हाथों को काम मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह विचार आज यहाँ शास्त्री भवन में आयोजित आगरा इनर रिंग रोड के प्रस्तुतीकरण के लिए आयोजित एक बैठक में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी क्षेत्रों, वर्गों, गरीबों, कमजोर तबकों इत्यादि के विकास के लिए कटिबद्ध है और इस हेतु जो भी प्रयास आवश्यक होंगे, वे अवश्य किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश के विकास के लिए जिन नीतियों, कार्यक्रमों इत्यादि की आवश्यकता होगी, उनका निर्धारण शीघ्र करते हुए उनपर त्वरित गति से अमल किया जाएगा।
आगरा इनर रिंग रोड प्रस्तुतीकरण बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस प्रकार की योजनाओं के विकास के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों के हितों की अनदेखी न हो और उन्हें पूर्ण संरक्षण दिया जाए। उन्होंने एक बार पुनः दोहराया कि प्रदेश सरकार किसी भी कीमत पर किसानों के हितों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं होने देगी।
ज्ञातव्य है कि फरवरी, 2010 में आगरा डेवलपमेण्ट अथाॅरिटी और जे0पी0 ग्रुप के बीच आगरा के चारों ओर पी0पी0पी0 मोड पर 30 किलोमीटर लम्बी रिंग रोड बनाने का समझौता हुआ था। परन्तु योजना में कुछ दिक्कतें आने के कारण जे0पी0 इण्डस्ट्रीज के साथ हुए समझौते को रद्द कर दिया गया है। अब इसे नए सिरे से पी0पी0पी0 मोड पर बिड करके बनाया जाएगा। इस योजना के लिए आगरा विकास प्राधिकरण को नोडल एजेन्सी बनाया गया है। इस योजना के विकास के लिए राज्य सरकार के अवस्थापना विभाग एवं आवास विभाग, आगरा विकास प्राधिकरण की पूरी मदद करेंगे। यह रिंग रोड एलीवेटेड (भूस्तर से उठी हुई) न होकर ग्राउण्डेड (धरातल) होगी। इस रिंग रोड के विकास के लिए विकासकर्ताओं से शीघ्र ही बिड आमंत्रित की जाएगी और इसको शीघ्रता के साथ बनाया जाएगा।
बैठक में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री नवीन चन्द्र बाजपेयी, मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री अनिल कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, आगरा विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी तथा सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी: मुख्यमंत्री

Posted on 26 August 2012 by admin

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद् के अध्यक्ष डाॅ0 सी0 रंगराजन की मुख्यमंत्री के साथ गन्ना एवं चीनी सेक्टर को विनियमन-मुक्त किए जाने के सम्बन्ध में बैठक

up-cm-akhilesh-yadav-with-c-rangrajan-1उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं और गन्ने से जुड़ी अन्य गतिविधियों से बहुत सारे लोगों की आजीविका चलती है। ऐसे में गन्ने से सम्बन्धित कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह बात आज अपने सरकारी आवास 5, कालिदास मार्ग पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद् के अध्यक्ष डाॅ0 सी0 रंगराजन के साथ आयोजित एक बैठक में कही। बैठक गन्ना क्षेत्र को विनियमन-मुक्त किए जाने के सम्बन्ध में थी।
उत्तर प्रदेश में गन्ना क्षेत्र सुरक्षण की वर्तमान व्यवस्था का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों द्वारा गन्ना क्षेत्र को सुव्यवस्थित व प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने हेतु उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम-1953, उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) नियमावली-1954 एवं उ0प्र0 गन्ना पूर्ति एवं खरीद आदेश-1954 में व्यवस्था निहित है। चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्र के सुरक्षण में जो व्यवस्थाएं प्रभावी हैं, उनके अनुसार उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) अधिनियम-1953 की धारा-14 में प्रदत्त व्यवस्था के अन्तर्गत गन्ने की सर्वेक्षण नीति जारी करके गन्ने का सर्वेक्षण कराया जाता है। उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) अधिनियम-1953 की धारा 12 के अन्तर्गत चीनी मिलों की गन्ने की आवश्यकता निर्धारित की जाती है।
श्री यादव ने कहा कि गन्ना क्षेत्र सुरक्षण के अन्तर्गत सहकारी गन्ना समितियों के प्रतिनिधियों, गन्ना किसानों एवं चीनी मिल प्रतिनिधियों की खुली बैठक करके उनके विचार प्राप्त किए जाते हैं। तदोपरान्त उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) अधिनियम-1953 की धारा 15 एवं उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) नियमावली-1954 के नियम -22 के अन्तर्गत चीनी मिलवार क्षेत्र का निर्धारण किया जाता है। उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति तथा खरीद आदेश-1954 के प्राविधानों के अन्तर्गत चीनी मिल व गन्ना समिति के मध्य गन्ने की मात्रा तथा गन्ने की दर का फार्म-सी पर अनुबन्ध कराया जाता है।
गन्ना क्षेत्र को विनियमन मुक्त (डी-रेगुलेशन) किए जाने के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा करने से चीनी मिलों द्वारा मनमानी किए जाने की संभावना है। जिसके चलते मिलें वाह्य क्षेत्र/गेट, ग्राम, क्रय केन्द्रों से गन्ना खरीद सकती हैं, जिससे क्षेत्रीय मिल के कृषकों में आक्रोश उत्पन्न हो सकता है। इस बात की भी संभावना है कि किसी एक ग्राम में कई चीनी मिलें अपने-अपने क्रय केन्द्र स्थापित कर लें तथा किसी ग्राम में क्रय केन्द्र स्थापित न भी करें।
श्री यादव ने आगे कहा कि गन्ना क्षेत्र को विनियमन मुक्त करने पर छोटे व साधारण गन्ना किसानों के शोषण की पूरी संभावना है। ऐसे में प्रभावशाली लोग छोटे व साधारण गन्ना किसानों से मनमाने ढंग एवं दर से गन्ने की खरीद कर मिलों को ऊँची दरों पर गन्ने की आपूर्ति कर मुनाफा कमाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से गन्ना मूल्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, जिसका अनुचित लाभ बड़ी पेराई क्षमता वाली चीनी मिलें उठाएंगी।
up-cm-akhilesh-yadav-with-c-rangrajan-meetingमुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि भारत सरकार द्वारा चीनी मिल स्थापना को लाइसेंस मुक्त कर दिया गया है, फिर भी लेटर आॅफ़ इण्टेण्ट में दो चीनी मिलों के बीच की न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि गन्ना क्षेत्र आरक्षण के समय प्रत्येक चीनी मिलों पर यह प्रतिबन्ध रहता है कि वह सम्पूर्ण पेराई योग्य गन्ने की आपूर्ति करके सम्बन्धित गन्ना समिति, जिला गन्ना अधिकारी एवं क्षेत्रीय उप गन्ना आयुक्तों से ‘नो केन’ प्रमाण पत्र प्राप्त करके मिलों में पेराई समापन करेंगी। उन्होंने इंगित किया कि यदि डि-रेगुलेशन करके विधिक व्यवस्थाएं समाप्त करने पर विचार किया जाएगा तो चीनी मिल चलने एवं बन्द होने पर कोई नियंत्रण न होने की स्थिति में कठिन स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
श्री यादव ने कहा कि प्रदेश की सहकारी गन्ना समितियों का मुख्य दायित्व सदस्य गन्ना किसानों की गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित कराने का होता है। डी-रेगुलेशन से चीनी मिलें स्वछन्द हांेगीं तथा गन्ना समितियों का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा। गन्ना समितियां अपने क्षेत्र गन्ना कृषक सदस्यों को उर्वरक, गन्ना बीज, कीटनाशक एवं कृषि यंत्र आदि ऋण पर वितरित करते हैं तथा गन्ना मूल्य भुगतान से उक्त ऋण को समायोजित कर लेते हैं। यही नहीं गन्ना विकास परिषदों द्वारा सड़क निर्माण/सम्पर्क मार्ग बनाए जाते हैं। इन व्यवस्थाओं का अनुपालन न होने पर परिणामतः गन्ना विकास कार्य पूर्ण रूप से अवरुद्ध हो जाएंगे, क्योंकि चीनी मिलें अपने सुरक्षित क्षेत्र में गन्ना विकास कार्य में अपना सहयोग अंशदान का भुगतान करती हैं व क्षेत्र निर्धारण न होने से चीनी मिलों द्वारा विकास कार्य बन्द कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदत्त अधिनियम, नियम एवं आदेश के अन्तर्गत वर्षभर गन्ना आपूर्ति एवं गन्ना मूल्य भुगतान व्यवस्था का अनुश्रवण करके गन्ना किसानों के हितों के दृष्टिगत व्यापक कार्यवाहियां की जाती हैं। डि-रेगुलेशन से उक्त व्यवस्था पर कुप्रभाव पड़ेगा, अतः डि-रेगुलेशन जनहित, कृषक हित एवं कानून व्यवस्था के दृष्टिगत उचित नहीं है।
केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित एफ0आर0पी0 तथा राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित किए जाने वाले एस0ए0पी0 के सम्बन्ध में श्री यादव ने कहा कि गन्ना कृषकों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य व उनके हितों के दृष्टिगत राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1971-72 से निरंतर राज्य परामर्शित गन्ना मूल्य का निर्धारण किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार द्वारा घोषित सांविधिक न्यूनतम मूल्य/उचित एवं लाभकारी मूल्य के सापेक्ष गन्ना कृषकों के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिक मूल्य का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित गन्ना मूल्य के सम्बन्ध में मा0 उच्चतम न्यायालय में योजित सिविल अपील संख्या-460/1997 यू0पी0 केन यूनियन फेडरेशन बनाम वेस्ट यू0पी0 शुगर मिल्स एसोसिएशन में मा0उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2004 में दिए गए निर्णय में राज्य सरकार को गन्ना मूल्य निर्धारण किए जाने के अधिकार को वैध ठहराया गया है, जिसके अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा गन्ना कृषकों के हितों को दृष्टिगत रखते हुए प्रत्येक पेराई सत्र से पूर्व उ0प्र0 गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम-1953 की धारा-16 के अन्तर्गत राज्य परामर्शित गन्ना मूल्य निर्धारित किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि पेराई सत्र 2011-12 में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित राज्य परामर्शित गन्ना मूल्य को मा0 उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 20-04-2012 द्वारा वैध ठहराया है। इस प्रकार राज्य सरकार को गन्ना मूल्य निर्धारण का अधिकार यथावत है। तद्क्रम में गन्ना मूल्य निर्धारण की जो प्रक्रिया चल रही है, वह पूर्णतः उचित है, इसमें किसी प्रकार के बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
लेवी शुगर के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रकरण भारत सरकार से सम्बन्धित है। वर्तमान में चीनी मिलों से 10 प्रतिशत लेवी रेट पर चीनी ली जाती है। यदि भारत सरकार लेवी चीनी की व्यवस्था लागू रखना चाहती है तो चीनी मिलों से बाजार भाव पर चीनी क्रय करे, ताकि चीनी मिलों की गन्ना मूल्य भुगतान क्षमता बढ़ सके। खुली बिक्री के लिए नाॅन-लेवी चीनी की माहवार उपलब्धता के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था यथावत रहनी चाहिए अन्यथा चीनी मिलें विक्रय हेतु अपनी आंतरिक व्यवस्था करेंगी, जो उपभोक्ता के खिलाफ होगा।
चीनी के आयात-निर्यात के सम्बन्ध में श्री यादव ने कहा कि मांग एवं आपूर्ति सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए निर्यात की सुविधा दी जाए। बन्दरगाह के निकट होने के कारण चीनी के निर्यात का अधिकतम लाभ बन्दरगाह के निकट की चीनी मिलें उठाती हैं। उत्तरी राज्यों की चीनी मिलों को बन्दरगाह तक चीनी पहुंचाने के लिए यातायात में अनुदान दिया जाए, ताकि निर्यात की सुविधा का लाभ उत्तर भारत की चीनी मिलें भी उठा सकें।
गन्ने से बनने वाले बाई प्रोडक्ट यथा शीरे के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में शीरे से एथनाॅल बनाकर 5 प्रतिशत पेट्रोल में ब्लेण्डिंग होती है, जिसको बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जाए और एथनाॅल का रेट जो 27 रुपए प्रति लीटर चीनी मिलों को दिया जा रहा है, उसमें बढ़ोत्तरी की जाए। बगास के उपयोग से को-जेनरेशन के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि वर्तमान में निजी क्षेत्र की 101 चीनी मिलें संचालित हैं, जिसमें 58 चीनी मिलों में सह-उत्पादन स्थापित है। शेष चीनी मिलों में भी को-जेनरेशन स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए।
बैठक में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद् के सदस्य, सर्वश्री नन्द कुमार, सदस्य राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण, श्री अशोक गुलाटी अध्यक्ष कृषि लागत एवं मूल्य आयोग, श्री सुधीर कुमार सचिव खाद्य एवं रसद विभाग भारत सरकार, राज्य सरकार की ओर से प्रोटोकाॅल राज्य मंत्री श्री अभिषेक मिश्रा, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री एन0सी0 बाजपेयी, मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग श्री राहुल भटनागर, गन्ना आयुक्त श्री कामरान रिज़वी, विशेष सचिव मुख्यमंत्री श्री जुहैर बिन सगीर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघों के चुनाव लिंगदोह समिति की संस्तुतियों के अनुसार कराना सुनिश्चित किया जाए

Posted on 24 August 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघों के चुनाव लिंगदोह समिति की संस्तुतियों के अनुसार कराना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी छात्रसंघों के चुनाव की तारीख भी घोषित नहीं हुई है और पोस्टर, बैनर लगे वाहन दौड़ते दिखने लगे हैं। यही नहीं जगह-जगह होर्डिंग्स लग गईं हैं। इस प्रकार की गतिविधियों को तत्काल सख्ती से रोके जाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और स्थानीय प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा कि छात्रसंघ चुनाव के नाम पर इस प्रकार की गतिविधियां आगे न बढ़ने पाएं।
श्री यादव ने कहा कि छात्र राजनीति में ऐसे युवकों को सामने आना चाहिए जो पूरे छात्र समुदाय के साथ-साथ समाज में रोल माॅडल के रूप में देखे जाते हों। इस परिप्रेक्ष्य में सम्बन्धित अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे लिंगदोह समिति की संस्तुतियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं।
गौरतलब है कि वर्तमान सरकार ने कार्यभार ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघों को पुनर्जीवित करने का फैसला किया था। इस क्रम में 21 मार्च, 2012 को लिंगदोह समिति की संस्तुतियों के अनुसार छात्रसंघ चुनाव कराए जाने सम्बन्धी एक शासनादेश भी जारी कर दिया गया था।
लिंगदोह समिति ने छात्रसंघ चुनावों के लिए मुख्य रूप से जो संस्तुतियां की हैं उनके अनुसार किसी भी प्रत्याशी को मुद्रित पोस्टर, पैम्फलेट अथवा अन्य कोई मुद्रित सामग्री अपने प्रचार के लिए प्रयोग करने की अनुमति नहीं होगी। वह केवल हस्तनिर्मित पोस्टरों का ही प्रयोग कर सकेगा। प्रत्याशी द्वारा चुनाव के लिए अधिकतम 05 हजार रुपए व्यय किए जाने का प्रावधान है। प्रचार के लिए लाउडस्पीकर, वाहनों एवं जानवरों का प्रयोग प्रतिबन्धित होगा। किसी प्रत्याशी द्वारा ऐसी कोई गतिविधि अथवा प्रचार नहीं किया जाएगा, जिससे विभिन्न जातियों, समुदायों एवं धार्मिक समूह के मध्य तनाव उत्पन्न हो।
इस समिति द्वारा यह संस्तुति भी की गई है कि वे छात्र ही चुनाव लड़ने के लिए अनुमन्य होंगे, जिनका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं होगा। प्रत्याशी के विरुद्ध किसी न्यायालय में आपराधिक मुकदमा न चला हो अथवा उसे किसी आपराधिक मामले में सजा न सुनाई गई हो। विश्वविद्यालय द्वारा उसके विरुद्ध कोई अनुशासनिक कार्रवाई न की गई हो। लिंगदोह समिति की संस्तुतियों में यह भी उल्लिखित है कि यदि किसी प्रत्याशी द्वारा किसी भी शर्त अथवा व्यय की अधिकतम सीमा का उल्लंघन किया जाता है, तो उसका चुनाव निरस्त किया जा सकता है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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प्रदेश सरकार जनता को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए कटिबद्ध: मुख्यमंत्री

Posted on 23 August 2012 by admin

cm-photo-ambulance-service-2उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा गरीबों को उत्कृष्ट एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने बेहद कम समय में बहुत अच्छे और जनहितकारी बदलाव किए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएँ गरीब जनता को उपलब्ध कराने के प्रति पिछली सरकार का रवैया बेहद नकारात्मक था। उस दौरान स्वास्थ्य विभाग में जो कुछ घटित हुआ उससे विभाग को उबारने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान सरकार को बहुत मशक्कत करनी पड़ रही है।
मुख्यमंत्री ने यह विचार आज अपने सरकारी आवास 5, कालिदास मार्ग पर आयोजित उत्तर प्रदेश एंबुलेन्स सेवा के शुभारम्भ पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला है कि एम्बुलेन्स चलाने पर जो पैसा लगता है वह गरीबों से नहीं लिया जायेगा। उन्हें यह सुविधा फ्री उपलब्ध कराई जायेगी। साथ ही, अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती के लिए देय 35 रुपये भी गरीबों से नहीं लिए जायेंगे, क्योंकि सरकार स्वास्थ्य सुविधाएँ मुफ्त उपलब्ध करवाना चाहती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ बहुत ही खस्ता हालत में मिली हैं। अस्पतालों में डाॅक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाइयों तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं/उपकरणों इत्यादि की बहुत कमी है। प्रदेश सरकार इन कमियों को शीघ्रातिशीघ्र दूर करने पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज जिस एम्बुलेन्स सेवा का शुभारम्भ किया गया है, वह इसी प्रयास की एक कड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए कटिबद्ध है। सरकार जनता से किए गए वादों के प्रति पूरी तरह से सजग है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से पूरी शक्ति से निपटा जायेगा।
cm-photo-ambulance-service-1श्री यादव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सीधे जनता से जुड़ा है। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई पर और अधिक बल दिया जायेगा और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि वहां किसी भी प्रकार की गंदगी न हो। साथ ही, अस्पतालों में अच्छी दवाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी।
गरीबों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के प्रति अपनी कटिबद्धता रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो मेडिकल काॅलेज किन्हीं कारणोंवश बन्द हो गये थे उन्हें जल्द से जल्द चालू कराया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में पैरामेडिकल काॅलेज स्थापित करने पर ध्यान केन्द्रित कर रही है ताकि प्रदेश में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी न रहे। उन्होंने कहा कि मौजूदा पैरामेडिकल काॅलेजों को पुनर्जीवित किया जाएगा, साथ ही नए पैरामेडिकल काॅलेज भी स्थापित किए जाएंगे।
श्री यादव ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा आवश्यकताओं यथा मार्ग दुर्घटना, दैवीय आपदा, हृदयाघात इत्यादि के मरीजों की सुविधा के लिए आगामी सितम्बर माह से ‘इमरजेन्सी मेडिकल ट्रांसपोर्ट सर्विस’ लागू की जाएगी। इस सेवा का टोल फ्री नम्बर 108 होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों के अन्तर्गत संचालित सभी एम्बुलेन्स को एकीकृत करके जनता की सुविधा के लिए उनका उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस सेवा के लिए भी एक टोल फ्री नम्बर निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने अत्यन्त अल्प समय में स्वास्थ्य विभाग में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री, राज्यमंत्री तथा प्रमुख सचिव को बधाई दी।
ज्ञातव्य है कि आज मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एम्बुलेन्स सेवा के अन्तर्गत 200 एम्बुलेन्सों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। ये एम्बुलेन्स प्रदेश के सभी जिलों में भेजी गई हैं ताकि जरूरतमंद व्यक्तियों को इस सेवा के माध्यम से समय से सरकारी चिकित्सालय तक पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर, 2012 तक एम्बुलेन्स की संख्या बढ़कर 972 हो जायेगी, जिससे प्रदेश के ब्लाॅक स्तर तक एम्बुलेन्स सेवा मुहैया कराई जा सकेगी।
एम्बुलेन्स सेवा के शुभारम्भ कार्यक्रम को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री अहमद हसन, लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री श्री शिवपाल सिंह यादव ने भी सम्बोधित किया। दोनों ही मंत्रियों ने अपने सम्बोधन में प्रदेश की गरीब जनता को उत्कृष्ट एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ निशुल्क उपलब्ध कराने की बात कही है। इस मौके पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्री शंखलाल माझी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री श्री अम्बिका चैधरी, श्री पारसनाथ यादव, श्री वकार अहमद शाह, श्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, श्री राम गोविन्द चैधरी, श्री फरीद महफूज किदवई, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री संजय अग्रवाल, एन0आर0एच0एम0 के मिशन डायरेक्टर श्री मुकेश मेश्राम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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सरकार पहले से ही किसानों की समस्याएं निबटाने के मामले में गम्भीर है और कई निर्णय भी इस सम्बन्ध में लिए जा चुके हैं

Posted on 22 August 2012 by admin

भारतीय किसान यूनियन के एक प्रतिनिधि मण्डल ने आज मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव से उनके 5-कालिदास मार्ग स्थित आवास पर भेंटकर उन्हें 14 सूत्री मांग पत्र पेश किया। मुख्यमंत्री जी ने मांगों पर विचार एवं कार्यवाही का आश्वासन देते हुए बताया कि सरकार पहले से ही किसानों की समस्याएं निबटाने के मामले में गम्भीर  है और कई निर्णय भी इस सम्बन्ध में लिए जा चुके हैं। प्रतिनिधि मण्डल मेें भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चै0 राकेश टिकैत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राजेश चैहान एवं बलराम लम्बरदार, राष्ट्रीय महासचिव श्री राजपाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष श्री दीवान चन्द्र चैधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार के साथ श्री धर्मेन्द्र एवं श्री हरनाम वर्मा भी शामिल थे। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री राजेन्द्र चैधरी भी मुख्यमंत्री जी के साथ थे।
cm-photo-21-august-2012 भाकियू प्रतिनिधि मण्डल ने गन्ने का लाभकारी मूल्य 390 रूपए प्रति कुंतल घोषित किए जाने, जनपद स्तर पर किसान पंचायत का आयोजन, सूखा प्रभावित क्षेत्र के किसानों को 6 माह के कर्ज का ब्याज एवं बिजली बिल माफ करने, 15000 रूपए राहत राशि देने, किसान आयोग गठित करने, किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमें वापस लेने, कृषि विभाग को सक्रिय करने, दो एकड़ तक के किसान को बीपीएल श्रेणी में रखने, क्षतिग्रस्त टंªासफार्मर तुरन्त बदले जाने और बुंदेलखण्ड केे लिए विशेष राहत की मांग की। प्रतिनिधि मण्डल ने गिरते भूजल स्तर पर चिन्ता जताई और खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश जैसे मसलों पर किसानों की चिन्ता से भारत सरकार को अवगत कराने और बंधक जमीन से कुछ हिस्सा कर्जे के लिए बेचने देने की भी मांग की।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने प्रतिनिधि मण्डल को बताया कि सरकार ने किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, आपदा प्रभावित किसानों को 5 लाख रूपए की राहत देने, फसल बीमा योजना का लाभ देने, 65 वर्ष के ऊपर छोटे किसानों को पेंशन देने तथा गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कराने संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसानों को बिजली आपूर्ति में बाधा न हो न हो इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में अलग से फीडर लाइन का का निर्णय लिया है। किसानों को समय से और उचित दर पर खाद मिलती रहे इसके लिए पहले से खाद का भण्डारण कर लिया गया है। सहकारी समितियों को सक्रिय बनाया जा रहा है। उन्होने कहा किसानों का 50 हजार रूपए तक का कर्ज माफ करने और सरकारी नलकूप तथा नहरों से किसानों को मुफ्त सिंचाई सुविधा देने के संबंध में श्ीाघ्र ही कार्यवाही षुरू होगी।
मुख्यमंत्री जी ने फिर यह बात दुहराई कि समाजवादी पार्टी गांव-गरीब और खेती को अपनी प्राथमिकता में रखती है। उसका मानना है कि जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा तब तक देश और प्रदेश सम्पन्न नहीं हो सकता है। समाजवादी पार्टी उपज का लागत मूल्य तय करने तथा किसानों की समस्याओं के निबटारे के लिए एक किसान आयोग बनाने का वायदा अपने चुनावी घोषणा पत्र में कर चुकी है। किसानों की फसल के संरक्षण के लिए भण्डारण क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
किसान प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री जी से कहा कि वे सब उनके साथ है और किसानों को उनसे बहुत आशाएं है। उन्होने राज्य सरकार द्वारा अब तक किसानों के हित में उठाए गए कदमोें की प्रशंसा की। श्री राकेश टिकैत ने स्व0 चै0 महेन्द्र सिंह टिकैत एवं नेताजी के प्रगाढ़ संबंधों को जिक्र करते हुए कहा कि इन्होने सदैव किसान हितो की चिन्ता की।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री बी0एल0 जोशी तथा मुख्यमंत्री

Posted on 20 August 2012 by admin

6श्री अखिलेश यादव ने आज ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर ऐशबाग स्थित ईदगाह जाकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने लोगों को ईद की बधाई देते हुए मुस्लिम समुदाय की समृद्धि और उन्नति की कामना की। राज्यपाल ने कहा कि हजरत मोहम्मद ने बेसहारा लोगों की मदद करने और झूठ से बचने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद की यह शिक्षा सभी तक पहुंचनी चाहिये। उन्होंने कहा कि इस्लाम का मर्म दूसरों का दुःख बांटने का है।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों को ईद-उल-फितर की हार्दिक मुबारकबाद दी। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों की खुशहाली और तरक्की की कामना करते हुए कहा कि ईद के इस मुबारक मौके पर पूरे देश और प्रदेश में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और कौमी एकता को और अधिक मजबूत बनाना होगा।
इसके पूर्व, ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने नमाज पढ़वाई। उन्होंने ईद की नमाज अदा करने 7आये मुसलमानों को सम्बोधित करते हुए मुल्क और समाज की खुशहाली एवं तरक्की के साथ-साथ पूरी दुनिया में अमन-चैन के लिए खुदा से दुआएं मांगीं। इस अवसर पर शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
ईदगाह पर लोगों को ईद की बधाई देने के उपरान्त मुख्यमंत्री टीले वाली मस्जिद पहुंचे और वहां के इमाम मौलाना फ़ज़्लुर्रहमान वायज़ी तथा मुस्लिम समाज के अन्य गणमान्य लोगों को ईद की हार्दिक बधाई दी।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अहमद हसन, मौलाना कल्बे सादिक, मौलाना कल्बे जव्वाद, श्री मोहम्मद एबाद, श्री बुक्कल नवाब, श्री नियाज तथा श्री अम्मार रिजवी के आवास पर जाकर उन्हें ईद की बधाई दी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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सरकार जनाकाँक्षाओं पर खरी उतरेगी - मुख्यमंत्री

Posted on 20 August 2012 by admin

मुख्यमंत्री ने चार्टर्ड एकाउण्टेन्सी के छात्रों को संबोधित किया

up-cm-national-convention-for-ca-student-iउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा कि अवस्थापना सुविधाओं विशेष रूप से सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवश्यक सुधार करते हुए सरकार प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए गम्भीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश का चैमुखी विकास नहीं होगा, तब तक देश में खुशहाली नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के वित्तीय संसाधन सीमित हैं, इसलिए पी0पी0पी0 के आधार पर अवस्थापना सुविधाओं का विकास तथा सड़क निर्माण कराए जाएंगे। सरकार सड़कों के निर्माण में लगभग 50-60 हजार करोड़ रुपए का निवेश कराने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार अच्छी सड़कों को विकास और खुशहाली का मूल मंत्र मानती है।
मुख्यमंत्री आज यहां गोमतीनगर के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में बोर्ड आफ स्टडीज, आई0सी0ए0आई0, सी0आई0आर0सी0, आई0सी0ए0आई0 (लखनऊ शाखा) तथा सी0आई0सी0ए0एस0ए0 (लखनऊ शाखा) के तत्वावधान में आयोजित ‘नेशनल कन्वेन्शन फार सी0ए0स्टूडेण्टस् 2012’ के अवसर पर चार्टर्ड एकाउण्टेन्सी के छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे।
श्री यादव ने कहा कि सत्ता में आने पर उनकी सरकार को बिजली सहित अन्य अवस्थापना सुविधाएं एकदम जर्जर अवस्था में मिली हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित बड़े बिजली घरों का पी0एल0एफ0 सिर्फ 40-50 प्रतिशत है, जबकि इसे काफी अधिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य सरकार गम्भीरता से प्रयास कर रही है।
विधानसभा चुनाव 2012 में मिली अभूतपूर्व सफलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी के सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों ने कड़ी मेहनत की, जिसका प्रतिफल हमें पूर्ण बहुमत के रूप में मिला। उन्होंने उपस्थित छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि इसी प्रकार कड़ी मेहनत करके वे भी जीवन में अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफलता का मूलमंत्र कड़ी मेहनत है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आन्दोलन के दौरान समाजवादियों ने हर क्षेत्र में गैरबराबरी को खत्म करते हुए खुशहाली लाने का सपना देखा था। समाज से हर प्रकार की गैरबराबरी, चाहे वह आर्थिक हो अथवा शैक्षिक, समाप्त होने के बाद ही देश तरक्की करेगा और चारों ओर खुशहाली आएगी। राज्य सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के प्रबल समर्थन से पूर्ण बहुमत में आई है। प्रदेश सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए सारे प्रयास करेगी और जनहित में निर्णय लेगी और इसी उद्देश्य से अपनी नीतियों का निर्धारण करेगी, ताकि प्रदेश खुशहाल बने। सरकार सभी चुनौतियों का सामना दृढ़ता से करेगी।
चार्टर्ड एकाउण्टेन्सी के छात्रों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि यहां हो रहे विचार मंथन से छात्रगण लाभान्वित होंगे और अच्छे अनुभव लेकर लौटेंगे। चार्टर्ड एकाउण्टेन्सी में आई0टी0 के प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर तथा सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है और इसमें लगातार सुधार भी हो रहा है। पूरे विश्व में इस क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग हो रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में कम्प्यूटर और आई0टी0 का उपयोग करते हुए और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएँ। आई0टी0 के प्रयोग से कई राज्यों ने अपने यहां के टैक्सेशन सिस्टम में व्यापक सुधार किए हैं।
उन्होंने कहा कि इस कन्वेन्शन की थीम स्वामी विवेकानंद का विचार - ‘अराइज, अवेक एण्ड स्टाॅप नाॅट टिल दि गोल इज़ रीच्ड’ है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने ही कहा था - ‘आई डोण्ट चूज़ दि बेस्ट, बेस्ट चूज़ेज़ मी’। उन्होंने छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के इसी विचार पर ध्यान केन्द्रित करते हुए वे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें, ताकि सफलता उनके कदम चूमे।
इससे पूर्व प्रोटोकाॅल राज्य मंत्री श्री अभिषेक मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रगण मेहनत कर अपने लक्ष्यों को हासिल करें। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ हैं और रोजगार के अवसर विश्व स्तर पर हैं।
आई0सी0ए0आई0 की ओर से वाॅइस चेयरमैन श्री सुबोध अग्रवाल ने लखनऊ में संस्था का एक ‘स्टेट आॅफ दि आर्ट’ स्टडी सेण्टर स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने का मुख्यमंत्री से निवेदन किया, जिसपर मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति दी। इस अवसर पर उन्होंने एक स्मारिका का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर कन्वेन्शन कमेटी के सदस्यगण सर्वश्री नीलेश, मुकेश सिंह कुशवाहा, नितिन व्यास, कन्वेन्शन कन्वीनर्स सर्वश्री राजीव शर्मा, अविचल एस0एन0कपूर तथा श्री राजेश श्रीवास्तव, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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हाईटेक प्रोस्थेटिक सेण्टर का उद्घाटन किया

Posted on 20 August 2012 by admin

up-cm-with-abhishek-mishra-1उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आज यहाँ पी0एण्डओ0 रीहैब इण्डिया के हाईटेक प्रोस्थेटिक सेण्टर का उद्घाटन किया। इस सेण्टर में विकलांग जन के लिए आधुनिक कृत्रिम अंगों को तैयार किया जाएगा। उद्घाटन के मौके पर प्रोटोकाॅल राज्य मंत्री श्री अभिषेक मिश्र भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने प्रोस्थेटिक कृत्रिम अंगों तथा विकलांग जन के पुनर्वास के सम्बन्ध में सेण्टर द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने कुशीनगर के श्री कन्हैया गुप्ता से भी मुलाकात की, जिनके बाएं पैर में आधुनिक प्रोस्थेटिक कृत्रिम अंग पी0एण्डओ0 रीहैब के नई दिल्ली सेण्टर में लगभग 15 दिन पूर्व लगाया गया था।
इस अवसर पर विशेष सचिव मुख्यमंत्री श्री जुहेर बिन सगीर, विशेष कार्याधिकारी मुख्यमंत्री श्री जगदेव सिंह सहित अन्य अधिकारी, पी0एण्डओ0रिहैब इण्डिया के निदेशक श्री नीरज सक्सेना, महाप्रबन्धक श्री आशीष सिंह सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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प्रदेश को विकास के रास्ते पर तेजी से आगे ले जाने के लिए राज्य सरकार ने हर स्तर पर बड़े फैसले लिए: मुख्यमंत्री

Posted on 15 August 2012 by admin

up-cm-akhilesh-yadav-in-vidhan-sabha-in-independence-flag-ceremany-11उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने देश की आजादी की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह अवसर स्वाधीनता संग्राम सेनानियों और महान राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मौके पर हम सभी को चिन्तन करना चाहिये कि जिन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हमने आजादी हासिल की थी, उन्हें पाने की दिशा में हम कितना आगे बढ़े हैं।
मुख्यमंत्री आज यहां विधान भवन में ध्वजारोहण के पश्चात उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नमन करते हुए कहा कि गांधी जी ने अहिंसा और सत्य के रास्ते पर चलकर देशवासियों को नेतृत्व प्रदान कर आजादी का बिगुल फूंका, जिसके फलस्वरूप भारत विदेशी शासन से मुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में प्रदेश ने देश का नेतृत्व किया था, इसलिए राज्य की जनता के लिए यह विशेष महत्व का अवसर है। सन् 1857 में आजादी की पहली लड़ाई उत्तर प्रदेश से ही प्रारम्भ हुई थी, जिसमें अनगिनत देशभक्तों ने कठिन यातनायें सहीं और अपना सब कुछ बलिदान कर दिया।
श्री यादव ने कहा कि आजादी के बाद देश ने विभिन्न क्षेत्रों में शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं और समूचे विश्व में अनेक भारतीयों ने देश का नाम रोशन किया है, किन्तु आज भी तमाम ऐसे लक्ष्य हैं, जिन्हें पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सका है। उत्तर प्रदेश, जो कभी विकास में देश का अग्रणी प्रदेश हुआ करता था, मानव संसाधन की दृष्टिकोण से देश का सबसे बड़ा राज्य है। इसके बावजूद पिछले चार-पांच वर्षों से उत्तर प्रदेश तरक्की की दौड़ में काफी पीछे छूट गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश में भय एवं अविश्वास के वातावरण को समाप्त कर राज्य में लोकतंत्र बहाल करने और आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए सतत् प्रयास कर रही है। प्रदेश को विकास के रास्ते पर तेजी से आगे ले जाने के लिए राज्य सरकार ने हर स्तर पर बड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निवेश के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने के लिए गम्भीरता से प्रयास कर रही है।
श्री यादव ने जनता को यह विश्वास भी दिलाया कि जिन उम्मीदों के साथ उसने उनकी पार्टी को सत्ता सौंपी है, उस पर खरा उतरने के लिए राज्य सरकार कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि उनके लिए सत्ता एक माध्यम है, प्रदेश को विकसित और खुशहाल बनाने का। समाजवाद के माध्यम से गैरबराबरी को समाप्त कर तथा सभी वर्गाें को आपसी भाईचारे के सूत्र में पिरोकर हम तमाम चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले शहीदों के त्याग को याद रखना होगा। इन महापुरुषों के प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्री यादव ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद दर 6.2 प्रतिशत है, जिसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए 02 लाख 110 करोड़ 61 लाख रुपये का बजट पारित कराया, जो अब तक का सबसे बड़े आकार का बजट है। यह धनराशि पिछले बजट से 18 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के तेजी से विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा नई कृषि नीति, समग्र चीनी नीति, बायोटेक्नोलाॅजी नीति तथा रिन्यूएबिल ऊर्जा नीति तैयार की जा रही है। इसके अलावा नई औद्योगिक नीति, उच्च शिक्षा नीति, सूचना प्रौद्योगिकी नीति तथा आवास एवं पुनर्वास नीति भी तैयार कर लागू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण कृषि क्षेत्र का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। कृषि क्षेत्र के लिए बजट में 05 हजार 432 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सरकार द्वारा कृषि उपजों कीे भण्डारण क्षमता में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गन्ना, रबी एवं खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त उर्वरक एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराने तथा सिंचाई की नई परियोजनाओं के साथ-साथ वर्षाें से लम्बित सिंचाई की निर्माणाधीन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के आर्थिक संसाधन सीमित हैं। इसलिए सरकार ने अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए निजी क्षेत्र की मदद लेने का फैसला लिया है। सरकार कई परियोजनाओं का कार्य पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पी0पी0पी0) माॅडल पर शुरू करा चुकी है। उन्होंने कहा कि कि गति दोगुनी करने से आर्थिक विकास तीन गुना हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए आगरा-लखनऊ के बीच उच्च स्तरीय एक्सप्रेस-वे तथा गाजियाबाद में नाॅर्दन पेरीफेरल रोड पी0पी0पी0 के तहत बनाई जायेगी। इसके साथ ही समस्त जिला मुख्यालयों को फोर लेन सड़कों से जोड़ने का निर्णय भी लिया गया है।
श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के विकास में बिजली के महत्व को अच्छी तरह से समझती है। इसीलिए उनकी सरकार बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए शुरू से गम्भीर है। विद्युत उत्पादन में निजी क्षेत्र का भी सहयोग लिया जायेगा। प्रदेश सरकार नगरों के विकास एवं यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए भी संजीदगी से कार्य कर रही है। वर्तमान राज्य सरकार ने इस वर्ष सड़कों और पुलों के निर्माण की नई योजनाओं के लिए लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
up-cm-akhilesh-yadav-in-vidhan-sabha-in-independence-flag-ceremany1मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी सरकार बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। 12वीं पास छात्राओं के लिए कन्या विद्या धन योजना चलाने का निर्णय लिया गया है। सभी वर्गें की लड़कियों की मुफ्त चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग की पढ़ाई का फैसला भी प्रदेश सरकार ने लिया है। सरकार 10वीं पास छात्रों-छात्राओं को टैबलेट कम्प्यूटर और 12वीं पास विद्यार्थियों को लैपटाॅप निःशुल्क वितरण का कार्य शीघ्र शुरू करने जा रही है। इसी प्रकार, बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिये जाने के लिए 1100 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं।
श्री यादव ने कहा कि सरकार ने गरीब परिवारों की महिलाओं को दो-दो साड़ी तथा वृद्धजनों को एक-एक कम्बल दिये जाने के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। ऐसे गरीब, जो गरीबी रेखा के नीचे की सूची में नहीं हैं, उनके लिए रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना शुरू की गई है। इसके तहत 400 रुपये प्रति माह प्रति लाभार्थी को दिये जायंेगे। प्रदेश के रिक्शा चालकों की आजीविका को आसान बनाने के लिए उन्हें अत्याधुनिक रिक्शे दिये जायेंगे। हमारी सरकार जमीन गिरवी रखकर कर्ज लेने वाले किसानों का 50 हजार रूपये तक का कर्ज माफ करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की है। केन्द्र सरकार को रायबरेली में एम्स की स्थापना हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आवश्यकता और आबादी को देखते हुए केन्द्र सरकार से पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड तथा रूहेलखण्ड क्षेत्रों में भी एम्स खोलने का अनुरोध किया है। इसके अलावा हृदय रोग तथा गुर्दा रोग जैसी गम्भीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए प्रदेश के समस्त राजकीय मेडिकल काॅलेजों, चिकित्सा संस्थानों तथा चिकित्सा विश्वविद्यालयों में पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की गई है।
श्री यादव ने कहा कि ग्रामीण इलाकों का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके मद्देनजर पिछड़े राजस्व ग्रामों के चहँुमुखी विकास के लिए डाॅ0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना तथा लोहिया ग्रामीण आवास योजना प्रारम्भ की र्गइं हैं। इसके अलावा जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना संचालित करने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार अल्पसंख्यकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए बजट में 02 हजार 74 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है। प्रदेश के बुनकरों को राहत प्रदान करने के लिए उनके पावर लूम की बिजली के बकाया बिलों के एकमुश्त भुगतान के लिए सरकार ने 127 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछड़े वर्ग के समग्र विकास के लिए चल रही विभिन्न योजनाओं के लिए इस वर्ष लगभग 01 हजार 620 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है, जो पिछले वर्ष से 40 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए आवश्यक है अमन-चैन का वातावरण और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था। इसके लिए प्रदेश पुलिस बल को आधुनिक बनाना आवश्यक है, जिसके लिए सरकार ने इस वर्ष पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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राज्य सरकार प्रदेश की विद्युत व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कटिबद्ध: मुख्यमंत्री

Posted on 15 August 2012 by admin

मुख्यमंत्री का बायोमास पर आधारित बिजली संयंत्रों की स्थापना पर बल

up-cm-biomassउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था सुधारने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है, क्योंकि विद्युत के बगैर प्रदेश का चैमुखी विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विद्युत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगी तो उसका सकारात्मक प्रभाव जनजीवन तथा उद्योगों पर पड़ेगा और प्रदेश में खुशहाली आएगी।
मुख्यमंत्री ने उक्त विचार मंगलवार को यहां शास्त्री भवन, एनेक्सी में बायोमास पावर प्लांट के सम्बन्ध में किए गए प्रस्तुतीकरण के लिए आयोजित बैठक में व्यक्त किए। गैर-परम्परागत स्रोतों के माध्यम से प्रदेश का ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के छोटे-छोटे बिजली संयत्र जगह-जगह स्थापित किए जाएं तो विद्युत की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है। साथ ही इस प्रकार से उत्पादित ऊर्जा हमारे वातावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद करेगी, क्योंकि इनमें धान की भूसी, पैडी स्ट्राॅ, पल्स स्ट्राॅ, डंठल, सरसों के सूखे पौधों, गोबर तथा अन्य कृषि-वन अवशेषों जैसे लैण्टना ग्रास इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि इसमें ईंधन के रूप में बहुत से कृषि अवशेषों का प्रयोग होता है, इसलिए इन संयत्रों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं और लोगों को काम मिलता है। साथ ही, कृषि अवशेषों का मूल्य भी मिलता है, जिससे ग्रामीण लोगों की आय में वृद्धि होती है।
श्री यादव ने गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों पर आधारित बिजली संयत्रों की स्थापना पर पुनः बल देते हुए कहा कि पारम्परिक बिजली संयत्रों की स्थापना तथा उनसे विद्युत उत्पादन होने में काफी समय लग जाता है। अतः छोटे बायोमास विद्युत संयंत्रों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर विद्युत समस्या से निजात मिल सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि आधारित प्रदेश है, ऐसे में यहां पर बायोमास की उपलब्धता बहुलता में है। अतः इस बायोमास का प्रयोग करते हुए प्रदेश में प्रचुर मात्रा में गैर-परम्परागत ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोमास ईंधन के जलने से बनने वाली राख का उपयोग ईंट बनाने में किया जाता है। इससे ईंट बनाने पर बड़ी मात्रा में रोजगार सृजन हो सकता है और लोगों को काम दिया जा सकता है।
श्री यादव ने गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस कार्य में तेजी लाई जाए और ऐसे बिजली संयंत्र कहां-कहां स्थापित किए जा सकते हैं, उनका एक सर्वे कर लिया जाए।
बैठक में प्रोटोकाॅल राज्यमंत्री अभिषेक मिश्रा, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चन्द्र बाजपेयी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त अनिल कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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