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125 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित चित्र प्रदर्शनी प्रशासनिक सभा से प्रजातांत्रिक सभा तक का उद्घाटन किया

Posted on 05 January 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज यहां डाॅ0 राममनोहर लोहिया उद्यान में उत्तर प्रदेश विधान मण्डल की 125 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित चित्र प्रदर्शनी प्रशासनिक सभा से प्रजातांत्रिक सभा तक का उद्घाटन किया। उत्तरशती रजत जयंती समारोह के तहत आयोजित यह चित्र प्रदर्शनी 10 जनवरी, 2013 तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।
04-january-2013इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान मण्डल की ऐतिहासिक एवं गौरवशाली परम्परा रही है। 08 जनवरी, 1887 को इलाहाबाद के थाॅर्नहिल मेन मेमोरियल भवन से लेजिस्लेटिव काउन्सिल की प्रथम बैठक से शुरु होकर लोकतांत्रिक परम्पराओं को आगे बढ़ाने वाली यह यात्रा आज तक जारी है। लखनऊ में स्थाई विधान भवन बनने तक मेमोरियल भवन कई महत्वपूर्ण एक्ट एवं विधेयक बनाए जाने का साक्षी रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरशती रजत जयंती समारोह के माध्यम से लोग विधान मण्डल की इस गौरवशाली ऐतिहासिक परम्परा अवगत हो सकेंगे। इससे पूर्व उन्होंने डाॅ0 राम मनोहर लोहिया के चित्र पर माल्यापर्ण भी किया।
विधान मण्डल भवन की प्रतिमूर्ति के रूप में स्थापित चित्र प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश के सभी राज्यपालों, विधानसभा अध्यक्षों एवं मुख्यमंत्रियों की फोटो के साथ-साथ मेमोरियल भवन में बने एक्ट एवं विधेयकों का उल्लेख भी किया गया है। इसके अलावा छतर मंजिल, मेमोरियल भवन आदि के भी चित्र लगाए गए हैं।
इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष श्री माता प्रसाद पाण्डेय, राजस्व मंत्री श्री अम्बिका चैधरी, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री शाहिद मंज़ूर, प्रोटोकाॅल राज्यमंत्री अभिषेक मिश्र, पूर्व सांसद भगवती सिंह, पूर्व मंत्री श्री अशोक कुमार बाजपेई सहित कई जनप्रतिनिधि तथा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव सिंचाई श्री दीपक सिंघल, प्रमुख सचिव सूचना संजीव मित्तल, सचिव पर्यटन श्री मनोज कुमार, लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल, निदेशक सूचना प्रभात मित्तल एवं अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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उ0प्र0 विधान मण्डल के 125 वर्ष

Posted on 02 January 2013 by admin

प्रशासनिक सभा से प्रजातांत्रिक सभा तक
प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन एवं आवश्यक राजस्व संग्रह के उद्देश्य से ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने समय-समय पर जरूरत के अनुसार कम्पनी के नियमों एवं नीतियों में परिवर्तन किया। प्रारम्भिक दौर में कम्पनी ने बम्बई, मद्रास और बंगाल से ही कमेटी के सदस्यों द्वारा प्रशासन की शुरुआत की, किन्तु सुदृढ़ प्रशासन की आवश्यकता को देखते हुए ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा वर्ष 1833 में चार्टर ऐक्ट लागू करके गवर्नर जनरल पद का सृजन किया गया। वर्ष 1834 में चैथी प्रेसीडेंसी स्थापित की गई और इलाहाबाद को राजधानी बनाया गया तथा वहाँ के किले को मुख्यालय बनाकर व्यवस्था का क्रियान्वयन प्रारम्भ किया गया। इस राज्य का नाम नार्थ वेस्टर्न प्राॅविंसेज एण्ड अवध रखा गया।
1857 की क्रान्ति से उत्पन्न स्थितियों से निपटने एवं स्वाधीनता आन्दोलन को दबाने के उद्देश्य से 1861 में इण्डियन काउन्सिल ऐक्ट पारित किया गया, जिसमें राज्य लेजिसलेटिव काउन्सिल के गठन का प्रस्ताव पारित हुआ और उसमंे भारतीय प्रतिनिधित्व की बात कही गई। भारतीय आन्दोलनकारियों एवं स्वाधीनता की मांग पर अडिग महापुरुषों की बदौलत कम्पनी के लेजिसलेटिव काउन्सिल में भारतीयों को अधिकार मिल सका। पं0 मदन मोहन मालवीय ने तो यहां तक कह दिया था कि प्रतिनिधित्व का अधिकार दिये बिना सरकार को टैक्स लेने का अधिकार नहीं है, किन्तु ईस्ट इण्डिया कंपनी ने पूर्ण नियंत्रण अपने पास ही रखा। कौंसिल के शुरुआती सदस्यों में 5 अंग्रेज अधिकारी व 4 भारतीय प्रतिनिधि सम्मिलित थे। ऐक्ट में संशोधन करके सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई, जिसमें से अधिकांश गैर सरकारी थे। जन प्रतिनिधि व जनता के बीच कोई लोकतांत्रिक सम्बन्ध नहीं था। मुस्लिम मतदाताओं को अपना प्रतिनिधि चुनने के लिये पृथक निर्वाचन क्षेत्र का प्राविधान किया गया। वर्ष 1920 तक कौंसिल के सदस्यों की संख्या 123 कर दी गई।
जनवरी 1887 से अगस्त 1920 तक विधान मण्डल की कुल 38 बैठकें हुईं, जिनमें कुल 39 विधेयक प्रस्तुत किये गये और 4 बार राज्य सरकार का बजट पेश हुआ। थार्नहिल-मेन मेमोरियल भवन में 14 प्रस्ताव, मेयो मेमोरियल भवन में 18 प्रस्ताव, म्योर सेंट्रल कालेज में 3 प्रस्ताव तथा गवर्नमेंट हाउस में 3 प्रस्ताव पारित हुए।
एक अप्रैल 1937 को उत्तर प्रदेश में विधान सभा का गठन हुआ जिसमें सदस्यों की संख्या 228 निर्धारित की गई, किन्तु स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उ0प्र0 विधान सभा का स्वरूप परिवर्तित हुआ और वर्तमान में विधान सभा की सदस्य संख्या 404 है, जिसमें से 335 सामान्य और 85 अनुसूचित जाति के सदस्य हैं। विधान परिषद की सदस्य संख्या 108 है।
लेजिस्लेटिव असेम्बली का नाम विधानसभा और लेजिस्लेटिव कौंसिल का नाम विधान परिषद पड़ा। स्वंतत्रता प्राप्ति के उपरांत भारतीय संविधान में 16 के स्थान पर 3 प्रकार के प्रतिनिधित्व का प्राविधान किया गया, जो कि सीधे जनता द्वारा चुन कर विधान सभा में भेजे जाते हैं। भारत की संविधान सभा में शुरुआती चरण में विधान सभा द्वारा 16 सदस्य चुनकर भेजे गये जिनमें सर्वश्री रफी अहमद किदवई, नवाब मोहम्मद इस्माइल खान, महाराज कुमार अमीर हैदर खान, पं0 जवाहर लाल नेहरू, पं0 गोविन्द बल्लभ पंत, डाॅ0 एस0 राधाकृष्णन, आचार्य जे0बी0 कृपलानी, श्रीमती सुचेता कृपलानी, श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित, हरगोविन्द पंत, हरिहर नाथ शास्त्री, डाॅ0 कैलाश नाथ काटजू, फिरोज गांधी, कमलापति त्रिपाठी, गोविन्द मालवीय, श्री प्रकाश, राजा जगन्नाथ बख्श सिंह, पदमपत सिंहानिया एवं पुरुषोत्तम दास दण्डन सम्मिलित हैं।
जिन दिनों संविधान सभा के लिए 55 सदस्य निर्वाचित किये गये उन दिनों मुस्लिम और सामान्य समुदाय के सदस्यों के निर्वाचन की अलग-अलग व्यवस्था थी। संविधान सभा के लिए 8 मुस्लिम तथा 47 सदस्य सामान्य समुदाय से निर्वाचित घोषित किये गये।
संविधान सभा के लिये निर्वाचित सदस्यों में आचार्य जे0बी0 कृपलानी, यू0पी0 के ऐसे सदस्य थे, जिनके भाषण से संविधान सभा की कार्यवाही 9 दिसम्बर, 1946 को पूर्वाह्न 11ः00 बजे आरम्भ हुई थी। उनके प्रस्ताव से डाॅ0 सच्चिदानन्द सिन्हा अस्थायी सभापति चुने गये और डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद को भी स्थायी सभापति चुने जाने के लिये आचार्य जी ने ही प्रस्ताव रखा था। दोनों प्रस्तावों का विरोध नहीं हुआ था। यू0पी0 के सदस्य श्री रफी अहमद किदवई और राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन, संविधान सभा की नियम समिति (रूल्स आॅफ प्रोसीजर कमेटी) के सदस्य थे तथा श्रीप्रकाश फाइनेंस एवं स्टाॅफ कमेटी और श्री मोहन लाल सक्सेना हाउस कमेटी के निर्विरोध सदस्य निर्वाचित हुए थे।
‘कैबिनेट मिशन’ ने 16 मई, 1946 को यह सुझाव दिया था कि संविधान सभा में भारतीय रियासतों और राजाओं के 93 प्रतिनिधि रखे जायें। 21 दिसम्बर, 1946 को श्री के0एम0 मुन्शी ने संविधान सभा में 6 सदयों का नाम देते हुए एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया कि यही सदस्य, सभा की एक समिति के लिए नामों का चयन करेंगे जो ‘चैम्बर आॅफ प्रिंसेज’ की ओर से गठित ‘निगोशियेटिंग कमेटी’ से विचार विमर्श करके सभा के लिये उनकी सीटें निर्धारित किये जाने पर विचार करेगी। यू0पी0 से निर्वाचित पं0 जवाहर लाल नेहरू इस समिति के सदस्य थे।
स्वतंत्रता प्राप्ति के 65 वर्षों के उपरान्त भी जिस जनता के अधिकार प्राप्ति के लिये, समृद्धि व विकास के लिये अनेक महापुरुषों ने अपना बलिदान तक दे दिया था, वह अधिकार जनता को अभी भी प्राप्त नहीं हो सका है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनता द्वारा प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा में गये। जनता के हितों के लिये विधेयक भी बनाये गये। देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिये नियम व कानून भी बनाये गये, परन्तु ठीक प्रकार से क्रियान्वित नहीं किये जा सके। विगत कुछ वर्षों में समाजवाद की नीतियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने जनता को शिक्षित व उन्नत बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया है, जिससे जनता अपने प्रतिनिधि चुनते वक्त अपने बुद्धि और विवेक का परिचय दे सके। प्रदेश की वर्तमान सरकार ने वास्तव में भारत को गांवों का देश मानते हुए फसलों का सही दाम निर्धारण, स्वस्थ भारत के लिये बच्चों को दोपहर का भोजन, गांवों केे विद्युतीकरण, साईकिल आवंटन, मेधावी छात्रोें को लैपटाॅप वितरण, बोरोजगारी भत्ता, गांवों में ही महीने में 20 से 25 दिन तक रोजगार प्रदान करने की प्रक्रिया, उच्च शिक्षा प्रदान करने की उत्तम व्यवस्था, मुफ्त में शिक्षा की पुस्तकें, कन्याधन, छात्र-छात्राओं की जरूरत की वस्तुएं सरकार मुहैया करा रही है। इस प्रकार समाज के सभी वर्गों के सदस्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं क्रियान्वित की गई हैं, जिससे कि प्रदेश का विकास सम्भव हो।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आज राजभवन में प्रदेश के राज्यपाल श्री बी0एल0 जोशी को गुलदस्ता भेंट कर नववर्ष की शुभकामनायें दी

Posted on 01 January 2013 by admin

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औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उद्योग बन्धु को सुदृढ़ीकरण

Posted on 01 January 2013 by admin

प्रक्रिया में सरलीकरण, समयबद्धता व पारदर्षिता सुनिष्चित की जायेगी।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेष यादव के दिषा-निर्देंषन में प्रदेष में औद्योगिक विकास को तीव्र गति देने के उद्देष्य से उद्यमियों की समस्याओं के शीघ्र निराकरण हेतु समयबद्ध व पारदर्षी व्यवस्था लागू की गयी है।
नयी अवस्थापना एवं औद्योगिक नीति के तहत उद्योग बन्धु का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है जिसके अंतर्गत निवेष मित्र के माध्यम से उद्यमियों को मिल रही सुविधाओं/अनुभूतियों की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जा रहा है ताकि स्वीकृतियों को प्राप्त करने में पारदर्षिता लायी जाय तथा समयबद्ध स्वीकृति सुनिष्चित की जाय। वर्तमान में 75 जनपदों में ‘‘निवेष मित्र’’ व्यवस्था लागू की गयी है।
उद्योग बन्धु को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देष्य से उद्योगों के साथ-साथ अवस्थापना सुविधाएॅं उपलब्ध कराने वाले उपक्रमों की समस्याओं का निराकरण एवं अनुश्रवण जिला, मण्डल एवं राज्य स्तर की बैठकों में किये जाने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही उद्योग बन्धु की बैठकें समयबद्ध रूप से आयोजित किये जाने पर बल दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेष यादव ने सभी विभागों के कार्यकलापों में पारदर्षिता व समबद्धता सुनिष्चित करने पर बल दिया है। इस क्रम में भारत सरकार की ई-विज योजना को प्रदेष में और अधिक सुदृढ़ता से लागू किया जा रहा है। निवेष मित्र व्यवस्था को भी इसके साथ सम्बद्ध कर लागू किया जायेगा। साथ ही संबंधित विभागों को भी इससे जोड़ा जायेगा।
इसके अतिरिक्त औद्योगिक विकास से संबंधित विभागों में प्रक्रियाओं का सरलीकरण करते हुए उनमें ई-गवर्नेन्स को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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बायोमैट्रिक नामांकन का शुभारम्भ

Posted on 01 January 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एन0पी0आर0) में बायोमैट्रिक नामांकन का शुभारम्भ करते हुए कहा कि इस कार्य में लगे लोगों को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एन0पी0आर0 के द्वितीय चरण में पांच वर्ष तथा उससे अधिक आयु के सामान्य रूप से निवास करने वाले सभी व्यक्तियों के बायोमैट्रिक नामांकन (फोटोग्राफ, उंगलियों के निशान एवं आंखों की पुतलियों की छवि) का कार्य किया जाएगा।
pr-essमुख्यमंत्री ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर अपना तथा अपने परिवार का बायोमैट्रिक नामांकन कराने के बाद इस कार्य में लगे लोगों से कहा कि सभी सम्बन्धित व्यक्तियों को एक विशिष्ट पहचान नम्बर/आधार नम्बर प्रदान करने से देश एवं प्रदेश के लिए कल्याणकारी योजना बनाने एवं सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा बायोमैट्रिक नामांकन सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को पात्रांे तक पहुंचाने में उपयोगी सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सहयोग करते हुए अपने क्षेत्रों में स्थापित बायोमैट्रिक कैम्प में जाकर अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों की आवश्यक जानकारी एवं फोटोग्राफ दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि कैम्प में बायोमैट्रिक नामांकन के दौरान अपना पहचान पत्र जैसे राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, ड्राईविंग लाइसेन्स एवं के0वाई0आर0 (नो योर रेजिडेन्स) फार्म में दर्ज अभिलेखों की मूल प्रति अवश्य साथ में लाएं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एन0पी0आर0 कार्य में लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा इस कार्य को पूरी निष्ठा एवं लगन के साथ समय से पूरा किया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि देश/प्रदेश की सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा सरकारी योजनाओं/कार्यक्रमों के लाभों और सेवाओं को बेहतर करने के लिए व्यापक पहचान डाटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एन0पी0आर0) नाम दिया गया है। इसे स्थानीय (ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम स्तर पर तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर), तहसील/नगर/जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाएगा। प्रदेश में भारत की जनगणना 2011 के प्रथम चरण के दौरान (16 मई से 30 जून, 2010 की अवधि) प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर सभी परिवारों/व्यक्तियों के सम्बन्ध में विशिष्ट प्रकार की सूचनाएं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अनुसूची पर एकत्रित की जा चुकी हैं। द्वितीय चरण में आज से प्रदेश में बायोमैट्रिक नामांकन एन0पी0आर0 में दर्ज करने की शुरुआत की गई है।
इस अवसर पर सांसद श्रीमती डिम्पल यादव, मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव सूचना श्री संजीव मित्तल, निदेशक जनगणना श्रीमती नीना शर्मा, जिलाधिकारी लखनऊ
श्री अनुराग यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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नववर्ष 2013 पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनकी सुख-समृद्धि की मंगल कामना की

Posted on 31 December 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नववर्ष 2013 पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनकी सुख-समृद्धि की मंगल कामना की है। आज यहां जारी एक शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को खुशहाल राज्य बनाने के लिए नये वर्ष में सभी के सहयोग की कामना की है। उन्हांेने आशा व्यक्त की कि शांति के इस माहौल में राज्य उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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प्रदेश सरकार द्वारा उल्लेखनीय प्रयास किये गये (Year Ender 2012)

Posted on 31 December 2012 by admin

इलाहाबाद में आयोजित कुम्भ मेले के दौरान सुदृढ़ पुलिस व्यवस्था हेतु प्रदेश सरकार द्वारा उल्लेखनीय प्रयास किये गये है। गृह विभाग द्वारा इस सिलसिले मे 25 करोड़ रुपये की धनराशि का बजट प्राविधान किया। कुम्भ मेला क्षेत्र में सुदृढ़ पुलिस की व्यवस्था के लिए सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में एक कोतवाली और 29 रिपोर्टिंग पुलिस चैकी के सृजन का निर्णय लिया गया है। कुक/कहार के चतुर्थ श्रेणी के 538 अतिरिक्त पदों का सृजन कर संविदा के आधार पर भरे जाने का निर्णय लिया गया है।
कुम्भ मेले में आवागमन की सुगमता हेतु ’’एकीकृत कंट्रोल रुम’’ (कम्पोजित कन्ट्रोल रुम) की स्थापना तथा मेले पर निगरानी रखने हेतु वाच टावर भी बनाये जा रहे है। कुम्भ मेला स्थल तक पहुंचने के लिए विभिन्न मार्गो पर ’’वेरियेबिल यातायात संकेतक’’ भी लगाये जा रहे है ताकि तीर्थयात्रियों को मेलास्थल तक पहुंचने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। दूसरे स्थानों से आने वाले पुलिसकर्मियों व सुरक्षा बलों के ठहरने आदि की समुचित व्यवस्था हेतु पुलिस लाइन इलाहाबाद में 4 मंजिला बैरक के निर्माण को मंजूरी प्रदान की गयी है। कुम्भ मेले में स्नान करने वाले तीर्थ यात्रियों की सुविधा हेतु जल पुलिस की समुचित व्यवस्था की गयी है। विभिन्न प्रकार के मोटर बोट की व्यवस्था तथा फ्लोटिंग प्लेटफार्म भी उपलब्ध होगा। आकस्मिक परिस्थितियो से निपटने हेतु जीवन रक्षक जैकेट आदि की भी समुचित व्यवस्था रहेगी।
प्रदेश में घटित होने वाले जघन्य अपराधों में पुलिस द्वारा तत्परतापूर्ण कार्यवाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जघन्य अपराध मानीटरिंग सिस्टम (Heinous Crime Monitoring System) नामक एक साफ्टवेयर तैयार कर लागू किया गया है। इसके अन्तर्गत विशेष अपराध की श्रेणी में आने वाले जघन्य अपराधों का ब्यौरा तथा उसमें हुई विवेचना की प्रगति का ब्यौरा भी जिला पुलिस के अधिकारियों द्वारा कम्प्यूटर पर दर्ज किया जा रहा है। किसी भी थाने में हुये जघन्य अपराध की घटना एवं उसमे हुई पुलिस की कार्यवाही की आॅन लाइन समीक्षा जिले, रेंज, जोन व पुलिस महानिदेशक के मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा तत्परता से करने मे इस नई व्यवस्था से मदद मिली है। इन अपराधों में प्रभावी कार्यवाही हेतु स्थानीय पुलिस को वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन मिलने से इस कार्य में अभूतपूर्व तेजी आयी है जिसका असर  अपराध नियत्रंण पर पड़ना शुरु हो गया है।
व्यक्तिगत सुरक्षा हेतु दिये गये शस्त्रों के दुरुपयोग को शासन द्वारा अत्यंत गम्भीरता से लेते हुए लाइसेंसी असलहों को व्यक्तिगत सुरक्षा के अलावा शादी-विवाह, विजयी जुलुसो, सार्वजनिक प्रदर्शनों आदि में खुशी जाहिर करने के दौरान प्रदर्शित करने एवं फायरिंग करने की प्रवृत्ति पर कड़ाई से रोक लगाने के निर्देश दिये गये है। साथ ही ऐसे मामलो में आयोजकों के विरुद्ध भी यथोचित विधिक कार्यवाही के भी निर्देश दिये गये है। जनपदों में जारी शस्त्र लाइसेंसो का कम्प्यूटरीकरण व डाटावेस एनआईसी के सहयोग से तैयार किया जा रहा है तथा उक्त कार्य के अन्तर्गत 11.5 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंसो का विवरण अपलोड किया जा चुका है।
पुलिस कार्यवाही अथवा मुठभेड़ के प्रकरणों में होने वाली जांच में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये जिनमें कहा गया कि जांच के दौरान संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस कार्यवाही के बारे में केवल पुलिस द्वारा बताई गयी स्थितियों के अनुरुप ही जंाच के बजाय आवश्यक पुष्टिकारक साक्ष्यों को भी अवश्य संज्ञान में लिया जाय। यह भी निर्दश दिये गये है कि शिकायतकर्ता जो कि पीडित पक्ष का कोई निकटस्थ परिजन भी हो सकता है, से मौखिक अथवा लिखित साक्ष्य लेने का प्रयास किया जाय ताकि उस साक्ष्य के प्रति परीक्षण से जांच के सही निष्कर्ष सामने आ सके।
अपराधों में हो रही विवेचना को प्रभावी बनाये जाने हेतु वैज्ञानिक विधियों के उपयोग पर वर्तमान सरकार द्वारा विशेष बल दिया जा रहा है। इसके अन्तर्गत लैंगिक उत्पीड़न, शिशु हत्या व अन्य मामलों में प्रयुक्त किये जाने वाले निर्धारित चिकित्सा विधिक परीक्षण प्रोफार्मा, घटनास्थल निरीक्षण फार्म, डीएनए सैम्पुल कलेक्शन फार्म के प्रारुप को पुनरीक्षित कर इसे और अधिक व्यवहारिक बनाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए अभी तक जो प्रारुप प्रचलित था वह अत्यन्त पुराना था और उसमें फोरंेसिक साइंस के संबंध में जो नई तकनीक थी उसे उल्लखित करने का स्थान नही था। नये प्रारुप में घटनास्थल की फोटोग्राफ, स्क्रैच मय स्केल, वीडियोग्राफी आदि के संबंध में भी पूरी जानकारी देने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु जैसे डीएनए सैम्पुल टेस्ट आदि के लिए भी पुराने फार्म में स्थान नही था।
इस कार्य के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ के वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम फार्म, मेडिको लीगल फार्म, इंजरी रिपोर्ट फार्म, घटनास्थल निरीक्षण फार्म एवं डी0एन0ए0 निरीक्षण फार्म का नया प्रारुप तैयार किया गया है। घटनास्थल प्रबन्धन एवं अपराध अन्वेषण नामक दो पुस्तके विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों की मदद से तैयार कर पीटीसी मुरादाबाद के सहयोग से प्रकाशित करायी गयी है। इन पुस्तकों का क्षेत्राधिकारी स्तर पर प्रथम चरण में वितरण शुरु कर दिया गया है। साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस एवं गृह विभाग की बेवसाइड पर भी फार्म एवं तकनीकी जानकारी अपलोड कर दी गयी है, जो पुलिस के उच्चाधिकारियों, विवेचनाधिकारियों, चिकित्सकों, अभियोजन अधिकारियों आदि के लिए बहुत उपयोगी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फोरेंसिक साइंस की नई तकनीकों को सम्मिलित करने के साथ ही प्रदेश के हर जिले में आधुनिकतम सुविधायुक्त पोस्टमार्टम हाउस बनाने का निर्णय लिया गया। जिन जिलो मे पोस्टमार्टम हाउस जर्जर हालत मे हैं वहां शीघ्र ही उनको दुरूस्त किया जायेगा तथा जहां अभी नही बने हैं वहां नये निर्मित कराये जायेंगे।
फिरौती के लिए अपहरण के 6 मामलों में एसटीएफ ने 24 अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिनमें गेल के अपहृत इंजीनियर शान्ती स्वरुप तथा नोएडा से अपहृत इंजीनियर एस0एन0 सिंह की सकुशल रिहाई महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। लखनऊ के अलीगंज थानाक्षेत्र से ढाई महीनों से लापता अमृताशुं त्रिपाठी को सकुशल बरामद किया गया। बाराबंकी से अपहृत वैभव गुप्ता के अपहरण की घटना का अनावरण कर 3 अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। गाजियाबाद से श्री पुनीत अग्रवाल के अपहरण की घटना का अनावरण कर 6 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया तथा अन्य सामान्य के अलावा फिरौती की रकम में से 5 लाख 40 हजार रुपये की भी बरामदगी की गयी है।
अपराध नियंत्रण के लिए पकड़ंे गये अपराधियों को उनके अपराध की सजा दिलाने पर वर्तमान सरकार द्वारा विशेष रुप से बल दिया जा रहा है। अपराधियों के मुकदमों की प्रभावी पैरवी एवं उसकी गहन समीक्षा की व्यवस्था लागू की गयी है। चिन्हित दुर्दान्त अपराधियों को सजा दिलाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक तथा अपर पुलिस अधीक्षक को एक-एक एवं पुलिस क्षेत्राधिकारियों को 2-2 अपराधियों के मामले सौपे गये है ताकि वह इन चिन्हित अपराधियों के सभी मुकदमों की प्रभावी ढंग से पैरवी कर सके। ऐसे पूरे प्रदेश भर में 6577 बड़े अपराधियों के 9136 मुकदमें छाटे गयें है। उनकी प्रभावी पैरवी हेतु उठाये गये इन कदमों से अभी तक निर्णित वादों में 50 प्रतिशत से अधिक मुकदमों में अपराधियों को सजा दिलायी गयी है।
अभियोजन निदेशालय द्वारा चिन्हित किये गये कुख्यात अपराधियों के अभियोगों के शीघ्र निस्तारण हेतु प्रयास किये जा रहे है जिसकी समीक्षा नियमित रुप से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की जा रही है। अभियोजन विभाग नें प्रत्येक सोमवार को 22 जनपदों की वीडियो कांफे्रसिंग के माध्यम से तथा माह के प्रथम सप्ताह के सोमवार को 72 जनपदों की वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से शीघ्र अभियोजन के लिए चिन्हित महत्वपूर्णवादों/साक्षीगणों की समीक्षा का सिलसिला शुरु किया है। साथ ही अन्य जनपदों के परिक्षेत्रवार संबंधित अभियोजन विभाग के अपर निदेशकों एवं संयुक्त निदेशकों द्वारा संबंधित जनपदों की वीडियांे कांफ्रेसिंग द्वारा समीक्षा की जा रही है।
अभियोजन विभाग के अधिकारियों के कार्यो में गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक माह अभियोजन संवर्ग के अधिकारियों को विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों यथा डा0 भीमराव अ0पु0 अकादमी मुरादाबाद, डा0 राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय लखनऊ, न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंघान संस्थान लखनऊ, विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ एवं भारतीय प्रबंध संस्थान, लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। अब तक लगभग 500 अभियोजकों को उक्त विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाया जा चुका है।
यातायात प्रबंधन के सम्बन्ध में अधिकारियों को रूचि लेकर कार्य करने की निर्देश दिये गये है। साथ ही यातायात प्रबन्धन निधि से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्पीड राडार विद बिल्ट इन कैमरा एण्ड वीडियो प्रिंटर, बे्रेथ इनालईजर विद प्रिंटर, स्मोक मीटर, गैस एनालाइजर, लाउड हेलर, फ्लोरोसेंट सेफ्टी जैकेट, फ्लोरिसेंट सेफ्टी ग्लब्स, फ्लोरोसेंट सेफ्टी बेल्ट, मल्टी परपज सेफ्टी वार टार्च, डेलीनेटर, बोलार्ड/ट्रैफिक कोन, मोबाइल, वैरियर एवं फोल्डिंग मोबाइल पैरियर आदि यातायात उपकरण क्रय किये जाने के निर्देश दिये गये है। इन उपकरणों से यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
प्रदेश के प्रमुख नगरों में सुदृढ़ यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में विशेष प्रयास शुरु किये गये है। प्रदेश के पाॅच प्रमुख महानगरों कानपुर नगर, लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ में कम्प्यूटरीकृत यातायात संकेतकों की स्थापना कराये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके प्रथम चरण में लखनऊ को पायलट पे्राजेक्ट के रूप में लिया गया है। शहर के चिन्हित 70 चैराहों पर सी0सी0टी0वी0 कैमरा अधिस्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इलाहाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, आगरा व कानपुर में भी प्रमुख चैराहों पर सी0सी0टी0वी0 लगाये जायेगें। सड़क दुर्घटनाओं आदि की सूचना देने हेतु स्थापित टोल फ्री ट्रैफिक हेल्पलाइन 1073 को चालू करा कर मोबाइल सेवा से भी जोड़ा जा रहा है।
अग्निशमन विभाग को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाये गये है। इसके अन्तर्गत पहली बार वाहन एवं उपकरण खरीदनें की बड़े पैमाने पर व्यवस्था की गयी है, ताकि किसी भी जिले में अग्निशमन कार्यो हेतु वाहनों एवं उपकरणों की कमी न रहे। इसके लिए लगभग 60 करोड़ रुपये की धनराशि दी गयी है। लखनऊ के गोमतीनगर में फायर स्टेशन के निर्माण हेतु 1 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की धनराशि प्रदान की गयी है। 36 नये अग्निशमन केन्द्रांे को विभिन्न तहसीलों, कस्बों व स्थानोें पर चिन्हित किया गया है। जहाॅ पर नये अग्निशमन केन्द्रों की स्थापना पर शासन द्वारा विचार किया जा रहा है। साइबर अपराध प्रदेश में साइबर अपराधों के अनावरण एवं संलिप्त अभियुक्तों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए दो साइबर इकाईयों की स्थापना आगरा एवं लखनऊ में की गयी है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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वर्ष 2012- उत्तर प्रदेश में नई सरकार का गठन (Year Ender 2012)

Posted on 31 December 2012 by admin

महिलाओं की सहायता हेतु प्रदेश में पहली बार शुरु हुई 1090 महिला हेल्पलाइन

वर्ष 2012 उत्तर प्रदेश के लिए व्यवस्था परिवर्तन का साल रहा जब 15 मार्च, 2012 को प्रदेश की नई सरकार ने मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में कार्य शुरु किया। अपराध नियंत्रण के लिए पहली बार तकनीकी का बड़े पैमाने पर प्रयोग शुरु किया गया है। वीडियो कांफ्रेसिंग का उपयोग कर जिले के अधिकारियों से निरन्तर सम्पर्क रखकर उनका मार्गदर्शन किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि गुण्डे जिले के बाहर हो तथा अपराधी जेल के भीतर। पुलिसबल का मनोबल ऊॅचा रखने के लिए जहाॅ हर सम्भव प्रयास हो रहे है, वहीं जनता से बदसलूकी एवं गैर कानूनी कामों में लिप्त पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही भी शुरु की गयी है।
छात्राओं, कामकाजी लड़कियों और महिलाओं को आये दिन आने वाले अश्लील एसएमएस, एमएमएस और फेक काल्स से हो रहे एक नये तरह से मानसिक उत्पीड़न से राहत दिलाने हेतु प्रदेश में पहली बार वूमेन पावर लाइन 1090 की ऐतिहासिक शुरुआत की गयी। वीमेन पावर लाइन पर अब तक मिली 61 हजार से अधिक शिकायतों में से 14 हजार से अधिक मामले छेड़छाड़ व आपत्तिजनक संवादों से संबंधित रहे, जिसमें से 10 हजार से अधिक शिकायतों को पंजीकृत किया गया, तथा 8 हजार से अधिक शिकायतों का शिकायतकर्ता की अपेक्षाओं के अनुरुप पूर्णतयाः समाधान कर लिया गया है। सरकार के इस कदम से महिलाओं में एक नये आत्मविश्वास का संचार हुआ है। चारो ओर इसकी केवल सराहना ही नही रही है अपितु कई राज्य इस सफल माॅडल को अपनाने के लिए इस सेवा से जुड़े अधिकारियो के संपर्क मे भी है।
महिला उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के प्रति प्रदेश सरकार विशेष रुप से संवेदनशील है तथा ऐसे मामलों में तत्परता से कार्यवाही हो रही है। यहां तक कि नाबालिग लड़कियों से बलात्कार जैसे अपराधों को अति संवेदनशील मानते हुए ऐसे प्रकरणों में रासुका जैसी सख्त कार्यवाही भी की गयी है। मुरादाबाद, सहारनपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, प्रतापगढ़ एवं फर्रुखाबाद में ऐसे 8 प्रकरणों में रासुका के अन्तर्गत भी कार्यवाही की गयी है, जिनमें से एक प्रकरण कों माननीय उच्च न्यायालय के एडवाइजरी बोर्ड द्वारा अब तक कन्फर्म भी किया जा चुका है। ऐसे प्रकरणांे में अपराधियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी अभियोजन की कार्यवाही भी की गई है। बरेली जिले के थाना भूता क्षेत्र में 10 वर्ष की एक बालिका के साथ हुयी बलात्कार व हत्या की घटना में प्रभावी पैरवी कर अभियुक्त को फाॅसी की सजा दिलाने में भी सफलता मिली है। गैंग रेप के मुकदमों की सरकार द्वारा मानीटरिंग शुरु की गयी है तथा प्रदेश भर में ऐसे केसों की सूची तैयार करायी जा रही है। ऐसे मुकदमों का ट्रायल प्राथमिकता के आधार पर कराये जाने की रणनीति पर अमल शुरु कर दिया गया है।
प्रदेश की अपराध स्थिति को नियंत्रण करने एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु प्रदेश में पुलिस महानिरीक्षक जोन की पुरानी व्यवस्था पुनः लागू करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से जोन में जोनल आई0जी0, परिक्षेत्र में रेंज डीआईजी तथा जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक के पदों की पुरानी व्यवस्था को बहाल किया गया।
प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करने हेतु गुण्डा टैक्स, रंगदारी या उद्योगों एवं व्यापारी क्षेत्रों में अवैध वसूली की शिकायतें प्रकाश में आने पर संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट व जिला पुलिस प्रभारी को उत्तरदायी बनाया गया है। जनसमस्याओं व शिकायतों का स्थानीय स्तर पर ही निस्तारण किये जाने हेतु सभी विभागों में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने कार्यालय पर मंगलवार तथा रविवार को छोड़कर शेष कार्यदिवसों में पूर्वान्ह 10 से 12 बजे तक अनिवार्य रुप से उपस्थित रहकर जनता की समस्याओं व शिकायतों को सुनकर उनका निस्तारण करनें के निर्देश दिये गये है।
गृह एवं पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण की दिशा में कई कदम उठाये गये है। गृह विभाग के नियंत्रण कक्ष को और अधिक प्रभावी एवं चुस्त-दुरुस्त बनाये जाने हेतु उसका आधुनिकीकरण किया गया है। कारागारों एवं न्यायालयों के मध्य में वीडियो कांफ्रेसिंग की व्यवस्था, आपदा प्रबन्ध हेतु अग्निशमन सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी नई पहल की गयी है। पुलिस की कार्यपद्धति में सुधार के दिशा में भी कदम उठाये गये है। भीड़ नियंत्रण के लिए गैर घातक हथियारों (नाॅन लीथल वीपेन्स) की व्यवस्था किये जाने पर विशेष बल दिया गया है।
वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेश की आम जनता को एक सुरक्षित परिवेश प्रदान करना, साम्प्रदायिक सौहार्द कायम रखना, संगठित एवं पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कर अपराधों पर पूर्ण नियंत्रण रखना है जिससे प्रदेश में विकास का बेहतर माहौल तैयार हो। सबके प्रति न्याय करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए प्रदेश सरकार कृत संकल्प है। अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण भी वर्तमान सरकार की प्रतिबद्धता है।
वर्तमान सरकार की अपराध नियंत्रण की नीति घटित घटनाओं का सही पंजीकरण, पंजीकृत अपराधों की समयबद्ध गुणात्मक विवेचना तथा न्यायालयों में वादों की प्रभावी पैरवी किया जाना है। प्रमुख सचिव गृह एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा मण्डलीय समीक्षा के दौरान अपराध एवं कानून व्यवस्था के अलावा इसकी भी विशेष रूप से समीक्षा की जा  रही है। अपर महानिदेशक कारागार, अपर महानिदेशक अभिसूचना तथा अपर महानिदेशक अभियोजन भी बैठको में अपने विभागीय कार्यो की समीक्षा करते है।
पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक चुस्त-दुरुस्त व प्रभावी बनाये जाने हेतु प्रयास शुरू किये गये है। पुलिसकर्मियों की अपने निवास स्थान से दूर तैनाती के कारण उनके जीवन में आ रही व्यावहारिक कठिनाईयों को मानवीय दृष्टिकोण से परखते हुए प्रदेश सरकार ने नई पहल करते हुए निर्णय लिया कि आरक्षी एवं मुख्य आरक्षी का स्थानान्तरण उनके गृह जनपद के पड़ोसी जिलों में किये जाने पर लगी पाबंदी नही रहेगी। इस निर्णय को लाखों पुलिसकर्मियों के बीच अल्प समय में लागू करना एक अत्यत कठिन व चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसके लिए पहली बार पुलिस विभाग में तकनीकी का प्रयोग करते हुए कम्प्यूटर आधारित स्थानान्तरण माड्यूल साफ्टवेयर CBTM का सहारा लिया गया। इसके फलस्वरुप विभिन्न जोन व रेंज को छोडकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय द्वारा प्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार एक साथ 3 चरणों में कुल साढ़े 33 हजार से अधिक पुलिस कर्मियो को उनके गृह जनपद के आस-पास तैनाती कर प्रदेश सरकार ने पुलिसकर्मियों को बडे पैमाने पर राहत देकर नई कार्यसंस्कृति विकसित करने की अभिनव पहल की है। बड़े पैमाने पर एक साथ किये गये तबादलो की विशेषता यह रही कि किसी भी पुलिस कर्मी को न तो पुलिस महानिदेशक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े और न ही किसी को सिफारिश के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।
पुलिस विभाग में लम्बे समय से रुकी हुई पदोन्नतियों की प्रक्रिया को सभी स्तर पर बृहद रुप से शुरु किया गया। प्रान्तीय पुलिस सेवा सवर्ग में कार्यरत 61 अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति की कार्यवाही संघ लोक सेवा आयोग में विभागीय चयन समिति की बैठक कराकर सम्पन्न की गयी। इससे लम्बे समय से प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे 61 पी0पी0एस अधिकारी आई0पी0एस0 बन गये।
प्रान्तीय पुलिस सेवा संवर्ग में कार्यरत अधिकारियों की कोटिक्रम सूची को अद्यावधिक एवं संशोधित किया गया है। साथ ही अपर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपाधीक्षक के विभिन्न श्रेणियों में कार्यरत अधिकारियों को प्रोन्नति वेतनमान मंजूर किया गया है।
प्रान्तीय पुलिस सेवा संवर्ग के 18 अधिकारियों को अपर पुलिस अधीक्षक विभिन्न वेतनमानों में, 6 पुलिस उपाधीक्षक से अपर पुलिस अधीक्षक, 6 पुलिस उपाधीक्षक से पुलिस उपाधीक्षक ज्येष्ठ वेतनमान, 122 निरीक्षक/प्रतिसार निरीक्षक/दल नायक पद से पुलिस उपाधीक्षक पद पर प्रोन्नतियां प्रदान की गयी है।
प्रदेश के पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा विभिन्न पदों पर 3741 अराजपत्रित पुलिस कर्मियो को विभागीय प्रोन्नति प्रदान की गई। इसके अन्र्तगत 3240 मुख्य आरक्षियों एवं आरक्षियो को विभागीय परीक्षा के माध्यम से उपनिरीक्षक ना0पु0 रैकर पद पर प्रोन्नति प्रदान कर प्रशिक्षण पर भेजा गया है। इसके अलावा ज्येष्ठता के आधार पर 49 लीडिंग फायरमैन/फायर सर्विस चालकों को अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के पद पर, 11 कर्मियों को अग्निशमन अधिकारी के पद पर, 207 कर्मियों को लीडिंग फायरमैन के पद पर, 234 आरक्षी सशस्त्र पुलिस को मुख्य आरक्षी के पद पर प्रोन्नतियां प्रदान की गयी है।
उपनिरीक्षक से निरीक्षक के पद पर 50 प्रतिशत चयन वरिष्ठता व 50 प्रतिशत परीक्षा के आधार पर किये जाने हेतु उ0प्र0 उपनिरीक्षक एवं निरीक्षक सेवा नियमावली 2008 में आवश्यक संशोधन हेतु शासन द्वारा विचार किया जा रहा है। मुख्य आरक्षी तथा उपनिरीक्षक पद के लिए विभागीय परीक्षा के अन्तर्गत 10 किमी0 की अर्हता को कम किये जाने के संबंध में आरक्षी एवं मुख्य आरक्षी नियमावली 2008 में संशोधन विचाराधीन है।
अग्निशमन विभाग में उपनिदेशक तकनीकी के 3 रिक्त पदों पर पदोन्नतियां प्रदान की जा चुकी है। प्रोन्नति सवंर्ग के 9 रिक्त मुख्य अग्निशमन अधिकारी के पदों पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से कार्यवाही की जा रही है।
ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी से संयुक्त निदेशक अभियोजन के 25 पदों, अभियोजन अधिकारी से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी के 140 रिक्त पदों तथा अभियोजन अधिकारी के 378 पदों पर कुल 543 राजपत्रित अधिकारियों को पदोन्नतियां प्रदान की गयी। सहायक अभियोजन अधिकारी एवं अभियोजन अधिकारी के पद पर 441 अभियोजकों को ए.सी.पी. का लाभ अनुमन्य कराया गया तथा 805 राजपत्रित अधिकारियों की अन्तिम ज्येष्ठता निर्धारित की गयी।
शासन द्वारा पुलिस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की विशेष जोखिम भरे कार्य के दौरान अदम्य साहस एवं वीरता प्रदर्शित करते समय मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में संशोधन किया गया है।
पुलिस बल को और सुदृढ़ तथा गतिशील बनाने के उद्देश्य से आय-व्ययक में गत वर्ष के बजट प्राविधान रू0 8205.00 करोड़ से बढ़ाकर वर्तमान वित्तीय वर्ष में रूपये 10378.00 करोड़ किया गया हैै। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के अन्तर्गत पी0ए0सी0 के लिए 6457 बुलेट पू्रफ जैकेट 1925 बुलेट प्रूफ पटका तथा 150 वीडियो कैमरा क्रय किये गये है। कुम्भ मेला हेतु पी0ए0सी0 के लिए 58 टेंट भी क्रय किये गये है। अच्छे गोताखोरों की कुम्भ मेले के दौरान उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पी0ए0सी0 के इतिहास में पहली बार 10 तैराकों को गोताखोरी का विशेष प्रशिक्षण ‘‘डीप वाटर डाइविंग’’ Sea explorer institute Kolkata से कराया गया है। इसके अलावा 20 अन्य तैराकों को भी प्रशिक्षित कराने के निर्देश दिये है।
नगर निकाय चुनाव 2012 चुस्त-दुरूस्त पुलिस व्यवस्था के फलस्वरूप सकुशल, शान्तिपूर्वक, निष्पक्ष व हिंसा रहित सम्पन्न हुए। नगर निकाय चुनाव में विगत चुनाव की अपेक्षा बहुत ही कम मतदान केन्द्रों पर पुर्नमतदान हुआ। अक्टूबर मास में जनपद गौतमबुद्वनगर में आयोजित इण्डियन ग्राण्ड प्रिंक्स फार्मूला-वन-रेस सुदृढ़ पुलिस व्यवस्था के कारण सकुशल सम्पन्न हुए। साथ ही सभी प्रमुख मेले, उत्सव एवं त्योहार शांतिपूर्वक सम्पन्न हुए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए: मुख्यमंत्री

Posted on 30 December 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आज माउण्ट ऐलिजाबेथ अस्पताल, सिंगापुर में सामूहिक दुष्कर्म से पीडि़त लड़की की मौत पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
आज यहां जारी एक शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने मृत लड़की की आत्मा की शांति की कामना करते हुए ईश्वर से उसके परिवारीजनों को इस दुःख को सहने की क्षमता प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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बारहवीं पंचवर्षीय योजना में मूल ढांचागत सुविधाओं के विकास को वरीयता प्रदान करते हुए 8.5 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया

Posted on 28 December 2012 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डाॅ0 मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आहूत राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना में मूल ढांचागत सुविधाओं के विकास को वरीयता प्रदान करते हुए 8.5 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि कृषि के लिए 4.9, उद्योग के लिये 7.1 तथा सेवा क्षेत्र के लिए 10.9 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त करने के लिए लगभग 16.70 लाख करोड़ रूपये निवेश की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में किये गये प्रयासों से निवेश में इजाफा होगा। यदि भारत सरकार का सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ तो राज्य सरकार इस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त कर लेगी।
up-cm-in-new-delhiमुख्यमंत्री ने इस बात पर चिन्ता व्यक्त की कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में जहां केन्द्र हेतु सकल बजटरी सपोर्ट में वृद्धि की गई है, वहीं दूसरी ओर राज्यों को केन्द्रीय सहायता के रूप में मिलने वाली सकल बजटरी सपोर्ट में कमी कर दी गयी है। इससे राज्यों की विकास योजनाएं प्रभावित होंगी। राज्यों के वित्तीय संसाधन पहले ही सीमित हैं, जिन्हें एफ0आर0बी0एम0 एक्ट के माध्यम से और भी सीमित कर दिया गया है। उन्हांेने आग्रह किया कि राज्यों को भी केन्द्र की भांति अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए एफ0आर0बी0एम0 में फलेक्सीबिलिटी दी जानी चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए ऐसे सभी कार्यकलापों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता में भी वृद्धि हो। उन्होंने देश में दूसरी हरित क्रान्ति लाने की चर्चा करते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ऊसर, बीहड़, बंजर एवं जल भराव की समस्याग्रस्त भूमि को सुधार कर खेती योग्य बनाने की योजना शुरु की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा गन्ना मूल्य 170 रुपए प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया है, जबकि राज्य सरकार ने चीनी मिलों को होने वाली सकल आय तथा किसानों की गन्ना उत्पादन की लागत को दृष्टिगत रखते हुए किसानों को उचित मूल्य देने के उद्देश्य से राज्य समर्थित मूल्य 280 रुपए प्रति कुन्तल निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय से गन्ना किसानों को लगभग 21,500 करोड़ रुपए का भुगतान प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कृषि विकास के लिए किसानों को सस्ते दर पर ऋण मुहैया कराने की मांग करते हुए कहा कि कृषि विविधीकरण के क्षेत्रों में राज्य सरकार ने 10 प्रतिशत से अधिक विकास दर प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रबन्ध किए हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार से नयी तकनीक उपलब्ध कराने, अवस्थापना सुविधाओं के विस्तार तथा विपणन समर्थन पर विशेष बल दिये जाने का आग्रह किया। प्रदेश में 90 प्रतिशत से अधिक लघु एवं सीमांत श्रेणी के किसानों की संख्या को  दृष्टिगत रखते हुए उन्होंने केन्द्र सरकार से डीजल के दामों में वृद्धि न करने का अनुरोध किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में सुधार और नलकूपों के लिए बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु स्वतंत्र फीडर लाइन योजना के लिए केन्द्र से वित्त पोषण किये जाने के लिए सहयोग की अपेक्षा भी की।
श्री यादव ने बताया कि प्रदेश में सुदृढ़ अवस्थापना व्यवस्था की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए लखनऊ से आगरा तक आठ लेन प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि सभी जिला मुख्यालयों को चार लेन सड़कों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करते हुए लखनऊ से बहराइच होते हुए नेपाल सीमा पर रुपईडीहा तक तथा गोरखपुर से वाराणसी सड़क को चार लेन करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने भारत सरकार से सहयोग की अपेक्षा की है। उन्होंने राज्य में पर्यटन विकास की असीम सम्भावनाओं के दृष्टिगत कुशीनगर तथा आगरा के निकट अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थापित करने में केन्द्र की भागीदारी आवश्यक बताई।
इस मौके पर मुख्यमंत्री द्वारा बताया गया कि औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने और अपेक्षित निवेश जुटाये के लिए राज्य सरकार ने अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति, 2012 बनायी है, जिसमें पूर्वांचल एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्रों में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्राविधान किये गये है। अवस्थापना सुविधाओं के विकास में निजी क्षेत्र की सहभागिता को इस नीति का प्रमुख अंग बनाया गया है। उन्होंने बताया कि विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 16000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत क्षमता सृजित करने की परियोजनाओं पर कार्य शुरु कर दिया गया है, परन्तु कोयले की व्यवस्था न होने के कारण इन परियोजनाओं में प्रगति नहीं हो पा रही है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाली 7 विद्युत परियोजनाओं हेतु कोयला आवंटन के अनुरोध पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा तत्काल कोयला आवंटन की व्यवस्था करने की मांग की।
श्री यादव ने शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि देश को साक्षर बनाने के लिए विशेष प्रयास किये जाएं। उन्होंने विभिन्न वर्गों के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए बिना किसी भेदभाव के छात्रवृत्ति की व्यवस्था करने का अनुरोध किया ताकि सभी वर्गों के लोग विकास प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकंें। रायबरेली में एम्स की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के निर्णय की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल तथा रूहेलखण्ड क्षेत्र में भी एम्स जैसे संस्थान स्थापित किये जाने चाहिए। उन्होंने जापानी इंसेफलाइटिस की रोकथाम के लिए गम्भीर प्रयास करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए समग्र बहुआयामी, समयबद्ध योजनाएं लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी रोकथाम के लिए मेडिकल रिसर्च, सम्पूर्ण चिकित्सीय कवरेज के साथ-साथ चिकित्सीय व सामान्य नगरीय अवस्थापना सुविधाओं हेतु शत-प्रतिशत तकनीकी एवं वित्तीय सहायता केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश में कैंसर इलाज के लिए आधुनिकतम चिकित्सालय खोलने में केन्द्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा करते हुए एड्स कन्ट्रोल के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदेश को दी जा रही आर्थिक एवं तकनीकी सहायता में भी बढ़ोत्तरी की जरूरत बतायी।
मुख्यमंत्री ने व्यवसायिक शिक्षा को नई दिशा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आई0टी0आई0, पाॅलीटेक्निक कालेजों की संख्या एवं स्तर में आमूल चूल परिवर्तन किया जाए। उन्होंने राज्य की व्यापकता एवं जनसंख्या के दृष्टिगत कम से कम दो और इण्डियन इंस्टीट्यट आॅफ टेक्नाॅलाॅजी (आई0आई0टी0) स्थापित किये जाने की मांग की। महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में ‘कन्या विद्या धन योजना’, ‘हमारी  बेटी उसका कल योजना’ तथा ‘पढ़ें बेटियां, बढ़े बेटियां योजना’ लागू की गयी है। इसके अतिरिक्त छात्र-छात्राओं में कम्प्यूटर शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाने के लिए हाईस्कूल पास बच्चांें को निःशुल्क टैबलेट पी0सी0 तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण बच्चों को निःशुल्क लैपटाॅप उपलब्ध कराये जाने की महत्वाकांक्षी योजना प्रारम्भ की गयी है। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों को राहत देने के लिए रानी लक्ष्मी बाई पेंशन योजना भी शुरु की गयी है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की वजह से नौजवानों के गिर रहे मनोबल को बनाये रखने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 1000 रुपए प्रतिमाह की दर से बेरोजगारी भत्ता दिये जाने की व्यवस्था की गयी है।
श्री यादव ने केन्द्र पुरोनिधानित योजनाओं पर गठित श्री बी0के0चतुर्वेदी समिति की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए तत्काल लागू किये जाने की मांग की। उन्होंने बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल तथा मध्य उत्तर प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए इनके त्वरित विकास के लिए विशेष व्यवस्था किये जाने का अनुरोध भी किया। उन्होंने बुन्देलखण्ड क्षेत्र हेतु स्वीकृत पैकेज को नाकाफी बताते हुए इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को राष्ट्रीय समस्या के रूप में स्वीकार करते हुए समुचित संसाधन उपलब्ध कराये जाने की अपेक्षा की।
बैठक में विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्रीगण सहित उत्तर प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री नवीन चन्द्र बाजपेयी, मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव वित्त श्री आनन्द मिश्रा, प्रमुख सचिव योजना श्री संजीव नायर, स्थानिक आयुक्त उ0प्र0 श्री नीरज कुमार गुप्ता आदि उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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