उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डाॅ0 मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आहूत राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना में मूल ढांचागत सुविधाओं के विकास को वरीयता प्रदान करते हुए 8.5 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि कृषि के लिए 4.9, उद्योग के लिये 7.1 तथा सेवा क्षेत्र के लिए 10.9 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त करने के लिए लगभग 16.70 लाख करोड़ रूपये निवेश की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में किये गये प्रयासों से निवेश में इजाफा होगा। यदि भारत सरकार का सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ तो राज्य सरकार इस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त कर लेगी।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर चिन्ता व्यक्त की कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में जहां केन्द्र हेतु सकल बजटरी सपोर्ट में वृद्धि की गई है, वहीं दूसरी ओर राज्यों को केन्द्रीय सहायता के रूप में मिलने वाली सकल बजटरी सपोर्ट में कमी कर दी गयी है। इससे राज्यों की विकास योजनाएं प्रभावित होंगी। राज्यों के वित्तीय संसाधन पहले ही सीमित हैं, जिन्हें एफ0आर0बी0एम0 एक्ट के माध्यम से और भी सीमित कर दिया गया है। उन्हांेने आग्रह किया कि राज्यों को भी केन्द्र की भांति अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए एफ0आर0बी0एम0 में फलेक्सीबिलिटी दी जानी चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए ऐसे सभी कार्यकलापों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता में भी वृद्धि हो। उन्होंने देश में दूसरी हरित क्रान्ति लाने की चर्चा करते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ऊसर, बीहड़, बंजर एवं जल भराव की समस्याग्रस्त भूमि को सुधार कर खेती योग्य बनाने की योजना शुरु की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा गन्ना मूल्य 170 रुपए प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया है, जबकि राज्य सरकार ने चीनी मिलों को होने वाली सकल आय तथा किसानों की गन्ना उत्पादन की लागत को दृष्टिगत रखते हुए किसानों को उचित मूल्य देने के उद्देश्य से राज्य समर्थित मूल्य 280 रुपए प्रति कुन्तल निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय से गन्ना किसानों को लगभग 21,500 करोड़ रुपए का भुगतान प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कृषि विकास के लिए किसानों को सस्ते दर पर ऋण मुहैया कराने की मांग करते हुए कहा कि कृषि विविधीकरण के क्षेत्रों में राज्य सरकार ने 10 प्रतिशत से अधिक विकास दर प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रबन्ध किए हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार से नयी तकनीक उपलब्ध कराने, अवस्थापना सुविधाओं के विस्तार तथा विपणन समर्थन पर विशेष बल दिये जाने का आग्रह किया। प्रदेश में 90 प्रतिशत से अधिक लघु एवं सीमांत श्रेणी के किसानों की संख्या को दृष्टिगत रखते हुए उन्होंने केन्द्र सरकार से डीजल के दामों में वृद्धि न करने का अनुरोध किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में सुधार और नलकूपों के लिए बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु स्वतंत्र फीडर लाइन योजना के लिए केन्द्र से वित्त पोषण किये जाने के लिए सहयोग की अपेक्षा भी की।
श्री यादव ने बताया कि प्रदेश में सुदृढ़ अवस्थापना व्यवस्था की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए लखनऊ से आगरा तक आठ लेन प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि सभी जिला मुख्यालयों को चार लेन सड़कों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करते हुए लखनऊ से बहराइच होते हुए नेपाल सीमा पर रुपईडीहा तक तथा गोरखपुर से वाराणसी सड़क को चार लेन करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने भारत सरकार से सहयोग की अपेक्षा की है। उन्होंने राज्य में पर्यटन विकास की असीम सम्भावनाओं के दृष्टिगत कुशीनगर तथा आगरा के निकट अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थापित करने में केन्द्र की भागीदारी आवश्यक बताई।
इस मौके पर मुख्यमंत्री द्वारा बताया गया कि औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने और अपेक्षित निवेश जुटाये के लिए राज्य सरकार ने अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति, 2012 बनायी है, जिसमें पूर्वांचल एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्रों में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्राविधान किये गये है। अवस्थापना सुविधाओं के विकास में निजी क्षेत्र की सहभागिता को इस नीति का प्रमुख अंग बनाया गया है। उन्होंने बताया कि विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 16000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत क्षमता सृजित करने की परियोजनाओं पर कार्य शुरु कर दिया गया है, परन्तु कोयले की व्यवस्था न होने के कारण इन परियोजनाओं में प्रगति नहीं हो पा रही है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाली 7 विद्युत परियोजनाओं हेतु कोयला आवंटन के अनुरोध पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा तत्काल कोयला आवंटन की व्यवस्था करने की मांग की।
श्री यादव ने शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि देश को साक्षर बनाने के लिए विशेष प्रयास किये जाएं। उन्होंने विभिन्न वर्गों के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए बिना किसी भेदभाव के छात्रवृत्ति की व्यवस्था करने का अनुरोध किया ताकि सभी वर्गों के लोग विकास प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकंें। रायबरेली में एम्स की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के निर्णय की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल तथा रूहेलखण्ड क्षेत्र में भी एम्स जैसे संस्थान स्थापित किये जाने चाहिए। उन्होंने जापानी इंसेफलाइटिस की रोकथाम के लिए गम्भीर प्रयास करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए समग्र बहुआयामी, समयबद्ध योजनाएं लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी रोकथाम के लिए मेडिकल रिसर्च, सम्पूर्ण चिकित्सीय कवरेज के साथ-साथ चिकित्सीय व सामान्य नगरीय अवस्थापना सुविधाओं हेतु शत-प्रतिशत तकनीकी एवं वित्तीय सहायता केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश में कैंसर इलाज के लिए आधुनिकतम चिकित्सालय खोलने में केन्द्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा करते हुए एड्स कन्ट्रोल के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदेश को दी जा रही आर्थिक एवं तकनीकी सहायता में भी बढ़ोत्तरी की जरूरत बतायी।
मुख्यमंत्री ने व्यवसायिक शिक्षा को नई दिशा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आई0टी0आई0, पाॅलीटेक्निक कालेजों की संख्या एवं स्तर में आमूल चूल परिवर्तन किया जाए। उन्होंने राज्य की व्यापकता एवं जनसंख्या के दृष्टिगत कम से कम दो और इण्डियन इंस्टीट्यट आॅफ टेक्नाॅलाॅजी (आई0आई0टी0) स्थापित किये जाने की मांग की। महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में ‘कन्या विद्या धन योजना’, ‘हमारी बेटी उसका कल योजना’ तथा ‘पढ़ें बेटियां, बढ़े बेटियां योजना’ लागू की गयी है। इसके अतिरिक्त छात्र-छात्राओं में कम्प्यूटर शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाने के लिए हाईस्कूल पास बच्चांें को निःशुल्क टैबलेट पी0सी0 तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण बच्चों को निःशुल्क लैपटाॅप उपलब्ध कराये जाने की महत्वाकांक्षी योजना प्रारम्भ की गयी है। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों को राहत देने के लिए रानी लक्ष्मी बाई पेंशन योजना भी शुरु की गयी है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की वजह से नौजवानों के गिर रहे मनोबल को बनाये रखने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 1000 रुपए प्रतिमाह की दर से बेरोजगारी भत्ता दिये जाने की व्यवस्था की गयी है।
श्री यादव ने केन्द्र पुरोनिधानित योजनाओं पर गठित श्री बी0के0चतुर्वेदी समिति की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए तत्काल लागू किये जाने की मांग की। उन्होंने बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल तथा मध्य उत्तर प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए इनके त्वरित विकास के लिए विशेष व्यवस्था किये जाने का अनुरोध भी किया। उन्होंने बुन्देलखण्ड क्षेत्र हेतु स्वीकृत पैकेज को नाकाफी बताते हुए इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को राष्ट्रीय समस्या के रूप में स्वीकार करते हुए समुचित संसाधन उपलब्ध कराये जाने की अपेक्षा की।
बैठक में विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्रीगण सहित उत्तर प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री नवीन चन्द्र बाजपेयी, मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव वित्त श्री आनन्द मिश्रा, प्रमुख सचिव योजना श्री संजीव नायर, स्थानिक आयुक्त उ0प्र0 श्री नीरज कुमार गुप्ता आदि उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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