Archive | सुलतानपुर

फिर हुआ दलित बालिका के साथ बलात्कार

Posted on 07 July 2011 by admin

सूबे की मुखिया जितना अपराध एवं बलात्कार जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही हैं उतना ही समाज में लोग बेखौफ हो कर कानून की धज्जियाॅ उड़ा रहे हैं। रक्षक भी भक्षक  की भूमिका निभा रहा है। चाहे झाॅसी में पुलिस कर्मचारी की दो बेटियों का बलात्कार उसी थाने में तैनात कर्मचारियों द्वारा किया जाना हो या फैजाबाद  व सीतापुर में दुराचार का प्रयास का मामला हो। चाहे पुलिस हो या आम नागरिक दोनों ही बलात्कार की घटना का अंजाम देने में नहीं चूक रहे हैं।
इसी तरह की घटना जनपद के थाना घम्मौर के अन्तर्गत ग्राम अमेठा में एक दलित बालिका मंजू पुत्री राम आसरे दोनो नाम काल्पिनिक, के साथ उसी गांव के चन्द्र प्रकाश उम्र 30  वर्ष एंव हंशराज 18 वर्ष ने जबरन बलात्कार किया। पुलिस ने पिता की शिकायत पर बलात्कारी चन्द्र प्रकाश एवं हंशराज को गिरफ्तार कर जेल भेज कर दिया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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शिक्षक को गोली मार की हत्या,हत्यारा फरार

Posted on 07 July 2011 by admin

थाना गोसाईगंज अन्तर्गत ग्राम उमरी के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को उसी गांव के प्रधान ने गोलीमार कर हत्या कर दी। हत्या कर हत्यारा  ग्राम प्रधान फरार हो गया। जिसे पुलिस संभावित जगहों पर दविश डाल रही।

प्राप्त सूचना के अनुसार उमरी गांव के शिक्षक मनोज सिंह पुत्र अभयराज सिंह निवासी ग्राम कीरी  उम्र 28 वर्ष को विद्यालय में एमडीएम भोजन केा लेकर उसी गांव के प्रधान रवि शुक्ला पुत्र राम लखन शुक्ला ने गोली मार कर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि एमडीएम के मामले को लेकर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मंजू सिंह एवं सहायक अध्यापक मनोज सिंह मध्यान भोजन केा लेकर सजग रहना ही मनोज की हत्या का कारण बना। प्रधानाध्यापिका मंजू सिंह चाहती थी कि बच्चांे का मध्यान भोजन की गुणवत्ता सही रहे। जबकि ग्राम प्रधान  एमडीयम को अपने तरीके से चलाना चाहता था और इसी कारण से आये दिन तू-तू मैै-मै हेाती रहती थी, जिसकी शिकायत प्रधानाध्यापिका ने जिलाधिकारी एंव जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखित सूचना दी थी। जिस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाध्यापिका के नाम एकल खाता संचालन करने का अधिकार दे दिया था। इस कार्यवाही पर ग्राम प्रधान और चिढ़ गया।

बताते चले कि मनोज सिंह मृतक आश्रित कोटे से सहायक अध्यापक के पद पर कार्य करता था। बच्चों का मध्यान भोजन बनाने के लिये गैस खत्म होने पर ग्राम प्रधान से गैस की मांग की थी। ग्राम प्रधान ने आज प्रातः मनोज सिंह को अपने घर पर गैस के लिए पास  बुक लाने को कहा, जिस पर आज मनोज सिंह अपने एक साथी अजय यादव के साथ ग्राम प्रधान के घर पर पहुंचा  तो रवि शुक्ला ने मनोज सिंह  के ऊपर फायर झोंक दिया। गोली लगने से मौके पर ही मनोज सिंह की मौत हो गयी। सूचना पर पहुॅची पुलिस गोसाईगंज ने लाश केा अपने कब्जे में लेकर जिला अस्पताल  पास्टमार्टम के लिए भेज कर रवि शुक्ला के खिलाफ धारा 307 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर हत्यारे  की खोज मे जुट गयी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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नौकरशाही व्यवस्था से सरकार बनी अपंग

Posted on 03 July 2011 by admin

सामन्तवादी विचार धाराआंे से निजात पाने के लिये प्रदेश की जनता ने जिस बसपा सरकार को सिर आखों पर विठाया आज वही जनता नौकरशाही व्यवस्था से त्रस्त अपने बुरे दिन पर आसूं बहा रही है। जिसकी सुध लेने वाला कोई नही है, प्रदेश की बसपा सरकार चाहे जितने लोकलुभावने कल्याणकारी योजनायंे लागू कर द,े परन्तु सरकार की नौकरशाही व्यवस्था प्रदेश को अपंग बना दिया है। कटघरे में खड़ी माया सरकार में कोई ऐसे तहसील व थाना दिवस नही है जहाॅ फरियादियांे की लम्बी कतारंे न लगती हों परन्तु समस्याओं का समाधान धरातल पर कितना होता है यह तथ्य किसी से छिपा नही है। माया सरकार के बेलगाम अफसर की कार्यगुजारियांे के चलते सुप्रिम कोर्ट ने ग्रेटर नोयडा भूमि अधिग्रहण सम्बन्धित विषयों पर छीछा लेदर कर दी।  इन दिनों देश के चैथे स्तम्भ से लेकर गरीब, ग्रामीण जनता तक सभी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे है। बेलगाम अधिकारी राजनैतिक महत्वाकांक्षा, सफेद पोषाक नेताओ के चलते नियम कानून को ताख पर रख कर एक सूत्रीय कार्यक्रम  धन उगाही का चला रहे हैं। जिसकी आॅड़ में उन्हंे प्रतिदिन लाखों रूपये की आमदनी हो रही हैे। भ्रष्टाचार के मकड़जाल में स्वास्थ्य विभाग, परिवन विभाग, विपणन विभाग,आबकारी विभाग, समाज कल्याण विभाग कृषि विभाग, जिला आपूर्ति विभाग, नगर पालिका, वन विभाग, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, मुख्य रूप से विकास विभाग आदि विभागों मे लूट खसोट का धन्धा फलीभूत हो रहा है, जहां अपात्र व्यक्ति उक्त योजनाओं का लाभ छद्दम नीति अपना कर लाभ उठाने मे कामयाब हो रहे हैं, वहीं पात्र व्यक्तियांे को  सरकारी योजनाएं दूर की कौड़ी सावित हो रही हंै। चुनाव सन्निकट देख सम्बन्धित विभाग के अधिकारी व कर्मचारी नियम कानून को ताख पर रख कर एक सूत्रीय कार्यक्रम के तहत सुविधा शुल्क की हेरा फेरी में लगे रहते हैं। विधवा पेशंन,बृद्वा पंेशन, भ्ूामि आवटंन, दाखिल खारिज, वरासत, आदि में दलालो के माध्यम से जो धन उगाही की जा रही है वह किसी राजनैतिक व विभागीय अधिकारी से छिपी नही हंै। जनता का हो रहा शोषण पर सभी चुप्पी साध अपनी राजनैतिक रोटियाॅ सेकने में मशगूल हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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भू-माफियाओं के आगे न्याय बना बौना

Posted on 03 July 2011 by admin

ऽ    जून मांह मे सिविल न्यायालय बन्द, भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी की शह पर भू-माफियाओं ने ढाया जुल्म
ऽ    हदबन्दी प्रकिया के अभाव में हो रहा यह खेल

शासन की मंशा सबको लुभावने न्याय दिलाने के लिये प्रयासरत तो जरूर है, परन्तु भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारियों व भू-माफियाआंे द्वारा किया जा रहा कृत्य  न्याय को बौना साबित कर रहा है। ग्रामीण अंचलो में हदबन्दी प्रक्रिया लागू न किया जाना तथा जून माहं मे सिविल न्यायालय का काम काज ठप रहना, गोलबन्द दंवगो के लिये बरदान साबित हुआ है। ऐसे में कई ग्राम पंचायतेा में जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरित्रार्थ हो रही है।

विदित हो इन दिनो अधिकतर ग्राम पंचायतो में सबसे बडी समस्या मघ्यम वर्गीय व गरीब तबके के लोगों की है, जहां गेालबन्द दंवगो की तिरछी निगाहें हेाते ही मुशीबतों का पहाड टूट पड़ता है। पीड़ित परिवार के लोग दर-दर की ठोकरे खां व तिरस्कृत होने के उपरान्त भी न्याय की आश संजोये आला अधिकारियों के चैखट पर हाजिरी देते रहे है। भू संक्रमणीय हो या पटटे की, बैनामे दार हो या पुस्तैनी आबादी, सभी जगहांे पर भूमाफियाओं की निगाहें लगी रहती हंै। जहां अवसर पाते ही भूमाफिया नाना प्रकार के हथकण्डे अपना उल्लू सीधा करने का प्रयास करते हंै। असफल होने पर भूमि विवाद अदालत की चैखट तक पहंुचा देते हैं। तत्पश्चात यहीं से शुरू होता है भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी तथा भू-माफियाओं का असली खेल।

सूत्रों अनुसार दर्जनो ऐसे मामले प्रकाश मे आये जिसमे सारे साक्ष्य व कागजात भू राजस्व अभिलेखों मे दर्ज होने के उपरान्त भी पात्र कब्जेदार सुविधा शुल्क अदा करने के अभाव में भ्रष्ट अमला अधिकारियो के केाप भाजन के शिकार हुये हैं। जहंा स्थानीय थाना पुलिस खाकी वर्दी का हनक दिखा निर्दोषों को बलि का बकरा बना दोषियों से मेाटी रकम वसूल कर उनकी पूरी मदद में जुट जाते हैं। सूत्रों की माने तो जनपद के अधिकंाश थाना व तहसील दिवसों पर शिकायतों की लम्बी फेहरिस्त रही है, जिसमे सबसे ज्यादा विवाद नाली,खडन्जा, नजूल भूमि, बन्जर, आबादी आदि जमीनो से सम्बन्धित रहा, परन्तु मौके पर निदान शून्य के बराबर ही हुआ। बताते चले कि कुडवार, धम्मौर, केातवाली देहात, लम्भुआ, हलियापुर बलीपुर, अखण्डनगर, जयसिंहपुर, मोतिगरपुर, दोस्तपुर, अलीगंज आदि थाना क्षेत्रा अन्र्तगत कई ऐसे मामले आये जिसमे स्थानीय थाना पुलिस की मदद से जून माह में बन्द सिविल न्यायालय के  बन्द के चलते आबादी, बन्जर, परती आदि जमीनों पर अबैध कब्जा व निर्माण कराया गया। इसी कड़ी में थाना कुडवार अराजकतत्वों व अपराधियों केा संरक्षण देने में सबसे आगे रहा। धरावां गावं मे जमीन के छप्पर का विवाद, बेला में दलित उत्पीड़न का विवाद, ललित मोहन मिश्रा के पैतृक कंओं पर अबैध कब्जे करने का विवाद, सोहगौली के कामापुर गांव में पिण्टू बढ़ई को पुलिस उत्पीड़न के बल दवंगो द्वारा घर को कब्जा करने का प्रयास आदि मामले प्रमुख हैं, वहीं  एक दैनिक समाचार के पत्रकार रामशंकर चैरसिया के परिवार पर जानलेवा हमला के उपरान्त विपक्षियो से भारी धनउगाही के बल अपराधियो को सरंक्षण देना प्रमुख रहा। उक्त घटनाओं से सम्बन्धित पीड़ितों ने न्याय की फरियाद जनपद के उच्चाधिकारियो से की है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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विभागीय दलालों के चंगुल में मुख्य जनसुविधा केन्द्र

Posted on 30 June 2011 by admin

कलेक्टेªट स्थित जनसुविधा केन्द्र अवैध कमाई का अड्डा बन चुका है। जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनसुविधा केन्द्र में कार्यरत कर्मचारी प्रमाण पत्र के लिये जनता को गणेश परिक्रमा करा रहे हैं। अगर दलालों के माध्यम से न जाय तो प्रमण पत्र देरी से मिलता है। जल्दी प्रमाण पत्र उन्हीं को मिलता है जो अलग से चढ़ावा देते हैं।

सनद रहे कि जुलाई का महीना आने वाला है। अभिभावक को ऐसी समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। शिक्षण संस्थान में दाखिले के लिये प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। जिसका भर पूर लाभ उठाया जा रहा है। ज्ञात हो कि अभी करीब डेढ़ महीना पहले नगर स्थित एक समाज सेवी जन सुविधा केन्द्र चलाने वाले ने मुख्य सचिव से एल0आर0सी0 रवीन्द्र उपाध्याय की शिकायत की थी। लेकिन अब तक कार्यवाही नही हुई। सनद रहे कि शिकायत में समाज सेवी ने एल0आर0सी0 बाबू के खिलाफ गम्भीर आरोप लगाये थे। इसी क्रम में बताते चलें कि पूर्व में जन सुविधा केन्द्र से सम्बंधित शिकायत जिलाधिकारी से भी की जा चुकी है। लेकिन जनसुविधा केन्द्र पर तैनात एल0आर0सी0 बाबू और उनके दलालों की टीम दिनों दिन जन सुविधा केन्द्र में पैर पसारते जा रहे हैं। इन सभी की दलाली का काम बदस्तूर बढ़ोत्तरी की ओर अग्रसित है। जिससे आहत होकर अब तक कई जनसुविधा केन्द्र बन्द हो गये। फ्रंचायजी मालिकों ने कान पकड़ते हुए तौबा कर ली कि इन दलालों के मध्य में सरकारी काम लेकर काम किया जाना उनके बस का नही। अब जो कुछेक फ्रंचायजी बाकी बची हुई हैं और प्रमाण पत्र वगैरा का काम कर रही है उनका भी हाल बद से बत्तर हैै। सारी जानकारी होने के बावजूद अधिकारी मौन क्यों है? इसका जवाब तो देने वाला कोई नही है। लेकिन इतना जरुर समझ में आता है कि चुप्पी साधे प्रशासनिक अधिकारियों को प्रतिमाह कलेक्ट्रेट के जनसुविधा केन्द्र से प्रति माह बंधी माहवारी पहुंच रही है तो यह बेचारे कार्यवाही कैसे करें। चैकाने वाला मामला यह है कि यह सभी कुछ वहां पर हो रहा है कि जहां से कुछ मीटर की दूरी पर जिलाधिकारी साहिबा भी बैठती है। क्या उन तक यह बातें नहीं पहुंचती?

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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पत्रकारों की सुरक्षा के कानून बनाये जाने की मांग

Posted on 30 June 2011 by admin

पत्रकार एशोसिएसन का प्रतिनिधि मण्डल शीघ्र मिलेगा महामहिम राष्ट्रपति से

पत्रकार एशोसिएशन (उ0.प्र0) की मासिक बैठक प्रेस क्लब सुनतानपुर में आज अपराह्न 2 बजे सम्पन्न हुई। जिसमें पत्रकारों पर चतुर्दिक हो रहे हमले की कटु शब्दों में निन्दा की गई। पत्रकार एशोसिएसन के प्रान्तीय उपाध्यक्ष  अम्बरीश मिश्र ने कहा कि मुम्बई में वरिष्ठ प्त्रकार जे0डे0 की हत्या, लखनऊ में पत्रकारों का पुलिसिया उत्पीड़न, जगह-जगह पत्रकार असुरक्षित है। इसके लिए  पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाया जाय अन्यथा लोकतन्त्र का चैथा स्तम्भ जर्जर हो जायेगा। सभी पत्रकारों ने उनका समर्थन करते हुए यह निर्णय लिया कि पत्रकारों का एक प्रतिनिधि मण्डल इसकंे लिए महामहिम राष्ट्रपति से मिलेगा। बैठक में  में अन्य बिन्दुओं पर भी चर्चा हुई। जिसमें जितेन्द्र श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, बृजेश उपाध्याय, अतुल श्रीवास्तव, राजेन्द्र यादव, सुनील सिंह राठौर, विष्णु कुमार द्विवेदी, अमित द्विवेदी, जितेन्द्र मौर्या, अनिल मिश्रा, आशुतोष मिश्र सहित दर्जनों पत्रकार शामिल रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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इंटरनेट लाटरी की गिरफ्त में नगर

Posted on 30 June 2011 by admin

बक्षें नही जायेगें संचालक व संलिप्त पुलिसकर्मीः डी0आई0जी0

लाटरी के खेल से न जाने कितने घर भुखमरी की भेंट चढ़ गये । जो बचें भी हैंे वह पाई-पाई के माहताज हो चले । इस दौरान न जाने कितनी सरकारें आईं और गईं लेकिन किसी एक  भी सरकार ने लाटरी के खेल पर लगाम कसने की नही सोंची। हां अपने पहले कार्यकाल में अन्य प्राथमिकताओं में से एक प्राथमिकता पर अमल करते हुए बसपा सुप्रिमों मायावती ने अवश्य रोक लगा दिया था। जो उनके कार्यकाल के बाद भी थमा रहा। लेकिन वर्तमान में माया सरकार में एक बार फिर नई तकनीकि के साथ लाटरी का खेल शुरु हो चला है। जिसमें अवैध ढ़ग से इस खेल को चलाने वालों को पुलिसिया संरक्षण मिल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों थाना कोतवाली नगर अन्र्तगत खैराबाद, बाधमण्डी, नंदनी काम्लेक्स व नेशनल सिनेमा रोड पर स्थित कई काम्पलेक्सों में खुलेआम अवैध ढ़ग से इंटरनेट लाटरी का खेल बद दस्तूर जारी है। भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो इंटरनेट लाटरी का यह खेल चार पांच माह पहले भी शहर में अपनी पैठ बना चुका था। जिसमें पुलिस के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद इंटरनेट लाटरी चलाने वाले कई रंगे हाथ धरे गये थे। इस पुलिसिया पकड़ धकड़ के बाद एकाएक इंटरनेट लाटरी के खेल पर बैन लग गया था। लेकिन इंटरनेट लाटरी माफियाओं ने एक बार फिर से यह खेल बाजार में पहुंचा दिया है। दरअसल मामला यह है कि जिन अधिकारियों ने खेल पर प्रतिबंध लगाया था लाटरी माफियाओं ने इस बार उन्हीं अधिकारियों को हमवार कर लिया है। सूत्रों तो यहां तक बताते हैं कि पुलिस के उच्चाधिकारी चलाये जा रहे इस खेल के पीछे प्रमिमाह लाखों का वारा न्यारा कर रहे हैं। इस बाबत डी0आई0जी0 रेंज फैजाबाद ने दूरभाष पर बताया कि उनके संज्ञान में इस तरह की कोई सूचना नही है। हां अब सूचना मिलने के बाद इस प्रकरण को गम्भीरता से लिया जायगा। जल्द ही छापेमारी कराकर आरोपियों को सलाखोें के पीछे भेजा जायगा। यही नही उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकरण में पुलिस के अधिकारियों की संलिप्तता मिली तो उन्हें भी बक्शा नही जायगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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लोकपाल के लिये जद्दोजहद, जनसूचना की कद्र नहीं!

Posted on 30 June 2011 by admin

राजधानी दिल्ली से लेकर देश भर में कभी अन्ना हज़ारे समर्थक तो कभी बाबा की बटालियन सड़क पर उतर विद्रोह का बिगुल बजाती दिखाई दी। सभी लोकपाल विधेयक को पास कराने और काले धन को वापस लाने के लिये सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल बैठे थे। जिला स्तर पर वह दागी चेहरे भी अन्ना और बाबा का परचम थामें नजर आये जो लोकपाल के पास होने के बाद इसकी गिरफ्त में आ सकते हैं। कुछेक तो ऐसे हैं जिन्होंने माननीय के मदों से धन स्वीकृति कराकर अपनी जेब भर डाली। इस सब के बावजूद यह सभी लोकपाल के हिमायती बनकर शासन-प्रशासन और सरकार की नींद उड़ाने में मस्त है। लेकिन जनता के हित में बने जनसूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की आज किस तरह सरकारी तंत्रों में अर्थी निकाली जा रही है क्या इनमें से किसी एक ने यह सोंचा कि इस रुख पर भी सड़कों पर उतर कर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाय? एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया, जहां ब्लाक दूबेपुर के बंधुआकला निवासी गजेन्द्र प्रताप सिंह ने सी0डी0ओ0 और फिर डी0एम0 से इण्डिया मार्का हैण्डपम्प लगाये जाने से सम्बंधित जन सूचना मांगी जो मुहैया नही हो सकी। अब उसने यही सूचना कमिशनर से मांगी है।

उल्लेखनीय है कि विकासखण्ड दूबेपुर अन्र्तगत उघपुर बंधुआकला निवासी गजेन्द्र प्रताप सिंह ने 31 मार्च 2011 को मुख्य विकास अधिकारी से जनसूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत यू0पी0 एग्रो के खिलाफ उगाही का आरोप मढ़ते हुए लिखा है कि एग्रो संस्था की ओर से लगाये अधिकतर हैण्डपम्पों में पांच से छह हाजर रुपयें का सुविधा शुल्क लिया गया। गजेन्द्र ने सी0डी0ओ0 से सूचना मांगी कि एग्रो संस्था ने क्या मानक के अनुरुप हैण्डपम्प लगाये। एक हैण्डपम्प के बाद दूसरे हैण्ड पम्प को लगाये जाने का मानक क्या है? ग्राम मोहली में आवश्यकता से अधिक हैण्डपम्प लगाये गयें हैं जिसकी वहां आवश्यकता नही थी? आखिर यह किस के आदेश पर लगाया गया। उक्त समस्त सवालों का जवाब सी0डी0ओ0 की ओर से न दिये जाने पर गजेन्द्र ने इन्हीं सवालों का जवाब डी0एम0 सुलतानपुर से मांगा। यहां भी अवधि पूर्ण हो जाने के बाद जवाब न मिलने पर गजेन्द्र ने अब कमिशनर फैजाबाद से सूचना मांगते हुए पत्र भेजा है। उसने यह भी कहा कि वह क्रमानुसार जवाब न मिलने की दशा में मुख्यमंत्री तक से सूचना मांगेगा। खैर गजेन्द्र को सूचना का जवाब कब और कैसे मिलेगी यह कहा जाना जल्दबाजी होगा। लेकिन इतना तो साफ है कि लोकपाल के नाम पर देश और यहां नंगा नाच करने वाले दागी जो सामने है उस पर जद्दोजहद न कर उसकी बात कर रहें हैं जिसका दूर दूर तक अता पता नहीं है। ऐसा शायद इसलिये है कि इन सभी को जनता के हित से सरोकार नही है इनको अपनी नेतागीरी और अपने नाम की परवाह है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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पारादीप फास्फेट्स लि0 क्राप सेमिनार का आयोजन

Posted on 23 June 2011 by admin

भारत की अग्रणी उर्वरक कम्पनी पारादीप फास्फेट्स लि0  द्वारा सेमरी बाजार में क्राप सेमिनार ाि आयोजन किया गया जिसमें कृषकों को सम्बोधित करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एम0बी0सिंह ने धान की अधिक उपज कैसे ली जाये एंव कम लागत से उत्तम उपज लिया जाये, की जानकारी दी।

कम्पनी के उपप्रबन्धक विपणन प्रसार लखनऊ श्री बी0,नंदा ने कृषको को धान की फसल की असल सुरक्षा एंव धान में होने लगने वाले खरपतवार से सुरक्षा के लिए नाशक दवा पेट्रीला क्लोर 500 एमएल  प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करने की सलाह दी।

साथ ही धान की फसल में लगने वाले कीड़ो के प्रकोप से सम्पूर्ण समाधान के लिए रत्नाजेन्ट के प्रयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कम्पनी के क्षेत्रीय अधिकारी श्री ए0के0 मिश्रा ने कृषकों को उन्नत फसल के लिए मिट्टी परीक्षण एंव फास्फो जिप्सम के बारे में जानकारी दी। मिट्टी में सल्फर एंव कैल्शियम की कमी होने के कारण इसकी पूर्ति सबसे सस्ते स्रोत फास्फो जिप्सम जिसमें 15ः सल्फर एंव 20ः कैल्शियम व सूक्ष्म तत्व होने की वजह से सभी प्रकार की फसलों में 10ः से 15ः तक अधिक उपज होती है, इससे कम लागत में अधिक उत्पादन किसानों को मिलता है।
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कम्पनी के क्षेत्रीय प्रबन्धक विपणन श्री ए0पी0 सिंह ने कृषको को आश्वस्त किया कि वे फसल चक्र अपना कर एंव संतुलित खाद प्रयोग करके अपने उत्पादन में वृद्वि करें तथा अधिक लाभ अर्जित करें। उन्होने कृष्कों को कार्बोनिक खाद उपयोग करने की विशेष सलाह दी।

उक्त कार्यक्रम में दिनेश सिंह, जय भारत मिश्रा , सभामणि मिश्रा सहित 225 किसान उपस्थित थे। अन्त में अशोक ब्रद्रर्श के अशोक अग्रवाल द्वारा किसानो के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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जबतक थाने व पोस्ट बिकेंगे तबतक भ्रष्टाचार खत्म होने की बात सोचना बेमानी

Posted on 21 June 2011 by admin

प्रदेश की बसपा सरकार में थाने व चैकियाॅ जब तक बिकेंगी तब तक भ्रष्टाचार को खत्म होने की आशा  लोगों का करना बेमानी होगी। दिन दहाड़े अपराध होना, मारपीट और चेन स्केचिंग होना बाद में एफआईआर होने के बाद भी पुलिस द्वारा समझौता करने का दबाव डालना इसका सबूत है। प्रशासन हो या शासन सब का कमीशन बॅधा होना, आये दिन अधिकारियों का, पत्रकारों की माफियाओं द्वारा हत्या होना  बाद में लीपापोती होना सब भ्रष्टाचार जीता जागता नमूना है। रजिस्ट्री विभाग हो या तहसील,पुलिस चैकी हो  या थाना सब जगह बिना सुविधा शुल्क दिये बिना कल्याण होना नहीं है। थाने के थानेदार हों या किसी भी विभाग के प्रमुख अधिकारी सब इस बात को दबी जबान से स्वीकारतें हैं कि घोटाला या गलत कार्य करने के लिए हम मजबूर हो जाते हैं। सूत्रों द्वारा ज्ञात हुआ है कि थानों में तैनाती के लिए बोली लगाई जाती है। नो इण्ट्री में ट्रकों व ट्रैक्टरों का शहर में प्रवेश होना स्वयं कानून बनाना व तोड़ना इसका प्रमाण है। थाने में एफआईआर का न लिखना बाद में लिखना यह भी भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करती है। कुछ अधिकारियों ने अपना नाम गुप्त रखने पर बताया कि प्रत्येक माह एक बॅधी रकम निश्चित समय पर नियत स्थान पर  पहुॅचाना होता है। जिस माह हमारे स्तर पर देरी हुई नहीं कि हमारा स्थानान्तरण होना निश्चित है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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