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Rs. 280 crore Vaishali (Ghaziabad)-Anand Vihar(Delhi) Metro line constructed on special interest of C.M. dedicated to people

Posted on 14 July 2011 by admin

  • Project fully financed by GDA
  • About 60000 travellers to be benefited by the project
  • Work on linking Dilshad Garden (Delhi) with Mohan Nagar (Ghaziabad) in progress
  • State Government approves RRTS project for high speed train between Delhi and Meerut

The Vaishali (Ghaziabad)-Anand Vihar(Delhi) Metro line project, constructed on the special interest of the Hon’ble Chief Minister

Ms. Mayawati ji, was dedicated to the people today. The project is very important for the people living in Ghaziabad and adjoining areas. Owing to her pre-scheduled programmes, Ms. Mayawati ji could not come to attend the programme. She sent Mr. Swami Prasad Maurya, State Panchayati Raj Minister to represent her and congratulate the residents of Ghaziabad. The project, costing Rs. 280 crore, is fully financed by Ghaziabad Development Authority.

Mr. Swami Prasad Maurya, on the occasion, said that it was the top priority of the Hon’ble Chief Minister ji to implement projects in the interests of deprived sections of the society by adopting the policy of ‘Sarvajan Hitai, Sarvajan Sukhai’. It is a result of Hon’ble Chief Minister ji’s efficient leadership and her foresight that this project has been translated into reality with the joint efforts of GDA and DMRC. It is a historic step for the development of this area. He said that he was feeling elated as the Hon’ble Chief Minister ji had chosen him to represent her at such an important programme.

The project is another milestone of all round development taking place within the State under the leadership of Hon’ble Chief Minister ji. This project would benefit daily commuters, women, students, office-going people, labourers, traders etc. Besides, the tourists would also be benefited by it. Now, after Noida, another important city of Uttar Pradesh viz. Ghaziabad would also be connected with Delhi through the Metro Network.

About 60000 passengers would travel from proposed Vaishali and Kaushambi Metro stations everyday. This project would benefit a large area of Ghaziabad including Vaishali and Kaushambi and it would boost the social and economic development of this area. The UP Government had also prepared an extension plan of Metro Rail in Noida and it had been finalised. When completed, it would provide Metro Rail service to the entire area.

Similarly, U.P. Government has given its consent for the implementation of RRTS project for high speed train from Delhi to Meerut and this traffic facility under RRTS project will be available between Delhi and Meerut in future. With the construction of RRTS high speed rail facility will be available in Ghaziabad, Modinagar, Meerut and nearby rural areas owing to which multi-dimensional development of the area would take place.

Various development works have been done with the efforts of Ghaziabad Development Authority and other departments of the State Government in Ghaziabad city during last four years, which include—broadening of roads, improvement of cross-roads, Ganga Water Supply under drinking water system, STP and construction of bridges at several places. Ghaziabad has done a great job in the direction of making the city green and about five lakh saplings have been planted during last four years. Several new parks have been developed. Besides it, efforts are being made for new roads, development of ring-road and construction of new bridge over Hinden river, which will remove the traffic problem of Ghaziabad.

Uttar Pradesh Government is also committed to remove the residential problem of the people. Under hi-tech and integrated township scheme, two hi-tech city and seven integrated city schemes are being developed on 10,000 acre of land in Ghaziabad in which nearly 12 lakh people would be resided. In these schemes, 40,000 EWS and LIG buildings, 1.5 lakh buildings of other category, schools, colleges, three fire-stations, nursing homes, hospitals and sports grounds facilities would be available.

Metro project work is in progress to connect Dilshad Garden (Delhi) to Mohan Nagar (Ghaziabad) under the second phase of the project. After coming of metro in Ghaziabad, it is also necessary to run feeder buses to connect metro from different areas, so that more and more people could be benefited by metro facility. This work will be done on priority basis.

On the historic occasion of dedicating this ambitious project of Hon’ble Chief Minister Ms. Mayawati ji, Panchayati Raj Minister again congratulated to the people of Ghaziabad and nearby areas on behalf of Hon’ble Chief Minister ji and himself.

It may be recalled that construction of corridor has been done jointly by Ghaziabad Development Authority and DMRC from Anand Vihar (New Delhi) to Vaishali (Ghaziabad). An expenditure of about Rs. 280 crore has been made on the construction of 2.75 km. corridor. Stations have been also constructed at two places—Kaushabi and Vaishali.

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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माननीया मुख्यमंत्री जी ने डा. सचान की मृत्यु के प्रकरण में पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगायी

Posted on 14 July 2011 by admin

  • और सम्बन्धित मामला तुरन्त सी.बी.आई. से जांच कराने हेतु निर्देंशित किया।
  • यह प्रकरण आज ही सी.बी.आई. को भेज दिया गया है।

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी ने आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर आहूत वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक में डा. वाई.एस. सचान की मृत्यु के प्रकरण की विवेचना की समीक्षा की।  माननीया मुख्यमंत्री जी ने बैठक में जानना चाहा कि जब डा. सचान के परिवार के सदस्य इस मामले की सी.बी.आई. जांच चाहते हैं तो प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को इस प्रकरण की जांच सी.बी.आई. को सुपुर्द करने में क्या कठिनाई है।

माननीया मुख्य मंत्री जी ने पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को फटकार लगाते हुए सख्त निर्देश दिये कि डा. योगेन्द्र सिंह सचान की हिरासत में संदिग्ध परिस्थितयों में हुई मृत्यु के प्रकरण को विवेचना हेतु सी.बी.आई. को संदर्भित कर दिया जाय। उन्होंने कहा कि डा. सचान की मृत्यु के प्रकरण की विवेचना राज्य सरकार द्वारा पारदर्शिता के साथ किये जाने के बावजूद भी पिछले कई दिनों से विभिन्न स्तर पर राज्य सरकार की छवि को खराब किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि उनकी सरकार ने अपराधियों के प्रति कभी भी कोई रियायत नहीं दिखायी तथा कानून को अपने हाथ में लेने वाले बड़े से बड़े पदों पर आसीन या पहुँच वाले व्यक्तियों को भी नहीं बख्शा है।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उनकी तथा उनकी सरकार की हमेशा यह प्रतिबद्धता रही है कि अपराधियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिये तथा जो भी दोषी हो उनके विरूद्ध कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था के मामले में उनकी सरकार कभी भी कोई समझौता नहीं करती। यही कारण है कि बहुजन समाज पार्टी के मंत्री, विधायक अथवा सांसद ने भी यदि कोई अपराध किया तो ऐसे लोगों के विरूद्ध भी प्रदेश सरकार द्वारा बेहिचक कानून के मुताबिक कार्यवाही की गयी है।

ऐसी स्थिति में माननीया मुख्यमंत्री जी का यह मानना है कि अपराध एवं अपराधियों के प्रति सरकार के सख्त रूख को देखते हुए डा. सचान के परिवार वालों को राज्य सरकार पर यह भरोसा होना चाहिए था कि यदि डा. सचान की हत्या की गयी है तो उसमें लिप्त सभी दोषियों को जरूर पकड़ा जायेगा। परन्तु चूंकि डा. सचान के परिवार वालों ने राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं किया इसीलिए राज्य सरकार की ओर से मा0 उच्च न्यायालय में विशेष टीम (S.I.T.) द्वारा प्रकरण की विवेचना किये जाने का सुझाव दिया गया था।

परन्तु इसके बावजूद भी चूंकि डा. सचान के परिवार वाले यह चाहते हैं कि इस प्रकरण को विवेचना हेतु सी.बी.आई. को सौंपा जाय।  अतः मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को इस आशय के सख्त निर्देश दिये गये कि डा. सचान की मृत्यु के प्रकरण को सी.बी.आई. को तत्काल संदर्भित किया जाय। माननीया मुख्यमंत्री जी ने पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आड़े-हाथों लेते हुए डा. सचान के परिवार वालों की मंशा के अनुरूप शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं।

माननीया मुख्यमंत्री जी द्वारा सी.बी.आई. से यह भी आशा की गयी है कि सी.बी.आई. इस सम्पूर्ण प्रकरण में निष्पक्ष रूप से जांच करके सच को जल्दी ही उजागर करेगी और यदि डा. सचान की हत्या की गयी है तो वास्तविक दोषियों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करेगी।

मा0 मुख्यमंत्री जी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा उक्त प्रकरण को सी.बी.आई. को संदर्भित करने का निर्णय इसलिए लिया गया है कि जिससे डा. सचान के परिवार के सदस्य आश्वस्त हों तथा पूरे समाज एवं देश को यह ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की बी.एस.पी. सरकार आपराधिक मामलों में किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं करती है तथा उनकी सरकार की यह सर्वोच्च प्राथमिकता एवं प्रतिबद्धता है कि किसी भी अपराध के दोषियों को, पीड़ितों की भावना तथा सन्तोष के मुताबिक सजा मिले।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने सी.बी.आई. की क्षमता एवं कुशलता पर विश्वास जताते हुये यह अपेक्षा की है कि इस संवेदनशील प्रकरण में सी.बी.आई. द्वारा पारदर्शिता के साथ जांच की जायेगी एवं कोई राजनीतिकरण नहीं किया जायेगा।

इसके साथ ही माननीया मुख्यमंत्री जी ने यह भी सन्तोष जताया कि उनके द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों पर की गयी सख्ती के तुरन्त बाद ही डा. सचान की मृत्यु का प्रकरण आज ही सी.बी.आई. जांच के लिए भेज दिया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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माननीया मुख्यमंत्री जी ने फतेहपुर की रेल दुर्घटना में 24 व्यक्तियों की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया

Posted on 11 July 2011 by admin

fatehpur-pix-july-10-dpfa-2मृतकों के परिवारजनों को एक लाख, गम्भीर रूप से घायलों को 50 हजार व मामूली रूप से घायलों को 25 हजार रुपये देने की घोषणा की
माननीया मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर वरिष्ठ मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्य तथा मुख्य सचिव दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य देख रहे हैं

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी ने जनपद फतेहपुर में आज हुई रेल दुर्घटना में 24 व्यक्तियों की मृत्यु होने तथा सैकड़ों यात्रियों के घायल होने पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुर्घटना में मृत लोगों के परिजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये तथा गम्भीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये व मामूली रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपये देने की घोषणा की है।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने दुर्घटना की सूचना प्राप्त होते ही वरिष्ठ मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्य तथा प्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनूप मिश्र को तत्काल दुर्घटना स्थल के लिए रवाना कर दिया। श्री मौर्य और श्री मिश्र मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य अपनी देख-रेख में करा रहे हैं। श्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जिला चिकित्सालय, फतेहपुर जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने घायलों को उपलब्ध करायी जा रही चिकित्सीय सुविधाओं का निरीक्षण किया।

fatehpur-pix-july-10-dpfa-31उल्लेखनीय है कि आज फतेहपुर के मलवां रेलवे स्टेशन के पास कालका मेल दुर्घटनाग्रस्त हो गयी, जिसमें सवार 24 यात्रियों की मृत्यु हो गयी तथा लगभग 180 लोग घायल हो गये। घायलों को उपचार के लिए जनपद फतेहपुर के जिला अस्पताल, प्राइवेट नर्सिंग होम्स और कानपुर भेजा गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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बी0एस0पी0 सरकार के प्रति कांग्रेस के नेतृत्व वाली यू0पी0ए0 सरकार का रवैया पूरी तरह असहयोगात्मक और सौतेला

Posted on 07 July 2011 by admin

  • केन्द्र के पक्षपात पूर्ण रवैये का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है
  • पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार को लगभग 21 हजार करोड़ से अधिक का केन्द्रांश समय से नहीं मिला
  • संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्यों को मिलने वाली धनराशि कोई खैरात नहीं
  • प्रदेश सरकार के बार-बार अनुरोध के बावजूद केन्द्र सरकार ने 80 हजार करोड़ रु0 के विशेष आर्थिक सहायता पैकेज के बारे में कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया

बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की बी0एस0पी0 सरकार के प्रति कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र की यू0पी0ए0 सरकार का रवैया पूरी तरह असहयोगात्मक और सौतेला है। उन्होंने कहा कि केन्द्र के पक्षपात पूर्ण रवैये का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि केन्द्र सरकार के स्तर पर लम्बित राज्य की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी देने में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। जो योजनायें मंजूर की जा चुकी हैं, उन योजनाओं के लिये केन्द्र सरकार धनराशि आबंटित करने में या तो दिक्कतें पैदा करती है अथवा इसे देर से जारी करती है।

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार को विभिन्न योजनाओं में अनुमन्य लगभग 21 हजार करोड़ रु0 के केन्द्रांश की धनराशि समय से मिल जानी चाहिए थी। इस धनराशि को यथा समय अवमुक्त न किये जाने के कारण विकास तथा जनहित के कार्य प्रभावित हुए। इसके बावजूद कांग्रेसी नेता बार-बार उत्तर प्रदेश को अधिक धनराशि दिये जाने का ढिढ़ोरा पीटकर यह जताने की कोशिश करते है कि जैसे केन्द्र सरकार ने प्रदेश के लिए अपने खजाने का मुंह खोल दिया है। सभी जानते हैं कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्यों को मिलने वाली धनराशि कोई खैरात नहीं होती। सच तो यह है कि केन्द्र सरकार के पास जो धनराशि करों के रूप में एकत्र होती है वह, राज्यों से ही आती है। इसलिए इस धनराशि पर राज्यों का संवैधानिक अधिकार है और राज्यों के मध्य इसका वितरण मानकों के आधार पर होता है।

पार्टी प्रवक्ता ने बताया कि मई 2007 को बी0एस0पी0 की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने के बाद से ही केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश को समय से केन्द्रांश उपलब्ध नहीं कराया गया। आंकड़े गवाह हैं कि वित्तीय वर्ष 2007-08 में 4,935 करोड़ रुपये, वर्ष 2008-09 में 3,266 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2009-10 में 7,320 करोड़ रुपये एवं वित्तीय वर्ष 2010-11 में 5,864 करोड़ रुपये का केन्द्र सरकार से प्राप्त होने वाला केन्द्रांश, राज्य सकार को समय पर प्राप्त नहीं हुआ है। इस प्रकार पिछले चार वर्षों में ही, 21,385 करोड़ रूपये के केन्द्रांश की धनराशि तो समय से अवमुक्त ही नहीं की गयी।

बी0एस0पी0 प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के लोग एक सोची समझी साजिश के तहत यह भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं कि केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों को शिथिल कर प्रदेश को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जा रही है, जो कि पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अगर वाकई प्रदेश की चिंता है तो उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रदेश की योजनाओं के सम्बन्ध में केन्द्र के स्तर पर लम्बित धनराशि को अवमुक्त कराना चाहिए।

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2010-11 में राज्य सरकार को 5864 करोड़ रुपये का केन्द्रांश मिलना था। जिसमें विभिन्न मुख्य सेक्टर/योजनाओं जैसे-राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का अवशेष केन्द्रांश 295.51 करोड़ रुपये, पीएमजीएसवाई का अवशेष केन्द्रांश 691.17 करोड़ रुपये, बाढ़ नियंत्रण का अवशेष केन्द्रांश 232.11 करोड़ रुपये तथा राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 201.48 करोड़ रुपये का केन्द्रांश राज्य सरकार को उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी प्रकार कृषि विभाग से जुड़ी योजनाओं के लिए 224.68 करोड़ रुपये की धनराशि भी उपलब्ध नहीं करायी गयी।

पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति से जुड़े 283.87 करोड़ रुपये तथा अल्पसंख्यक कल्याण से सम्बन्धित योजनाओं की 317.46 करोड़ रुपये की धनराशि भी नहीं उपलब्ध करायी गयी है। इसके अलावा न्याय विभाग से सम्बन्धित 40.50 करोड़ रुपये, समादेश क्षेत्र विकास से जुड़ी योजनाओं की 117.15 करोड़ रुपये, नगर विकास से सम्बन्धित योजनाओं की 228.57 करोड़ रुपये तथा पंचायती राज से सम्बन्धित येाजनाओं के अवशेष केन्द्रांश के 93.35 करोड़ रुपये भी राज्य सरकार को नहीं दिये गये।

प्रवक्ता ने कहा कि बी0एस0पी0 सरकार के प्रति केन्द्र की यू0पी0ए0 सरकार का असहयोग पूर्ण रवैया वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी जारी है। उन्होंने कहा कि ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2011-12 में विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत लगभग 11,444 करोड़ रूपये केन्द्रांश अवमुक्त किया जाना था जिसके सापेक्ष अब तक 2,044 करोड़ रूपये ही अवमुक्त किये गये हैं और लगभग 9,400 करोड़ रूपये की केन्द्रीय सहायता जारी नहीं की गई है।

प्रवक्ता ने कहा कि पक्षपातपूर्ण रवैये के तहत केन्द्र सरकार ने 65 जिलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2011-12 में मिलने वाली अपग्रेडेशन की लगभग 4 हजार करोड़ रूपये से अधिक की धनराशि के प्रस्तावों पर अभी तक स्वीकृति प्रदान नहीं की है, जबकि राजस्थान सहित अन्य राज्यों के प्रस्ताव मंजूर किये जा चुके हैं। इसके अलावा 29 जनपदों के रूरल रोड प्रोजेक्ट के अन्तर्गत लगभग 401 करोड़ रूपये के प्रस्तावों पर भी केन्द्र सरकार ने अभी तक स्वीकृति नहीं दी है।

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि केन्द्रीय बिक्रीकर क्षतिपूर्ति के मद में उत्तर प्रदेश सरकार ने केन्द्रीय बिक्रीकर क्षतिपूर्ति पैकेज के आधार पर वर्ष 2007-08 से वर्ष 2009-10 के लिए लगभग 2,528 करोड़ रूपये का क्लेम केन्द्र सरकार को प्रस्तुत किया था। महालेखाकार द्वारा सत्यापित इस क्लेम का भारत सरकार ने शत-प्रतिशत भुगतान नहीं किया और केवल 118.87 करोड़ रूपये का तदर्थ भुगतान किया गया।

प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी इलाकों के संतुलित और सम्पूर्ण विकास के लिए राज्य सरकार ने 17 जुलाई, 2007 को 80,000 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक सहायता पैकेज का प्रस्ताव केन्द्र के समक्ष रखा था, इसमें लगभग 11,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव बुन्देलखण्ड क्ष़्ोत्र के और 36,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पूर्वांचल क्षेत्र के विकास हेतु सम्मिलित किये गये थे। उन्होंने कहा कि यह दोनों इलाके भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के शिकार हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि केन्द्र की सरकार योजनाओं के माध्यम से केवल श्रेय ले रही है जबकि उनके कार्यान्वयन में राज्य के भी संसाधन लगते हैं। उदाहरण के तौर पर सर्व शिक्षा अभियान में उपलब्ध होने वाली धनराशि का उपयोग करने के लिये 25 प्रतिशत धनराशि राज्य द्वारा लगायी जाती है। अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति दिये जाने की वचनबद्धता पूर्ण रूपेण केन्द्र सरकार की है, परन्तु आवश्यक संसाधन राज्यों को उपलब्ध नहीं कराये गये हैं। पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति पर ही राज्य सरकार की लगभग 2500 करोड़ रूपये की देनदारी भारत सरकार पर हो गयी है।

प्रवक्ता ने इस बात पर अफसोस जताते हुए कहा कि राज्य सरकार के अनेकों बार अनुरोध करने के बावजूद केन्द्र सरकार ने विशेष आर्थिक सहायता पैकेज के सम्बन्ध में अभी तक कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा माननीया मुख्यमंत्री जी ने केन्द्र सरकार से बुन्देलखण्ड क्षेत्र की गम्भीर समस्याओं का उल्लेख करते हुए इस क्षेत्र के लिए विशेष क्षेत्र प्रोत्साहन पैकेज स्वीकृत करने के साथ-साथ केन्द्रीय सेक्टर की परियोजनाओं में प्राथमिकता देने तथा अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया था, जिसे भी स्वीकार नहीं किया गया है।

प्रवक्ता ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत पूर्व में बने स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं-चारदीवारी, शौचालय, विद्युतीकरण तथा पेयजल व्यवस्था के लिए भारत सरकार से धनराशि मांगी जाने के बावजूद भी पिछले वर्षों में धनराशि उपलब्ध नहीं करायी गयी है। इसी प्रकार राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत वर्ष 2010-11 में भारत सरकार से 98.52 करोड़ रु0 ही केन्द्रांश के रूप में प्राप्त हुए, इस मद का 201.48 करोड़ रु0 राज्य सरकार को नहीं दिया गया है। प्रदेश के विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों आदि के वेतन पुनरीक्षण के क्रम में एरियर भुगतान के मद में भारत सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान लगभग 856 करोड़ रूपये की धनराशि राज्य सरकार को उपलब्ध नहीं करायी है।

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि मनरेगा में भारत सरकार से 7700 करोड़ रु0 मांगे गये थे, किन्तु केन्द्र द्वारा मजदूरी बजट के रूप में वित्तीय वर्ष 2009-10 में केन्द्रांश के रूप में 7084 करोड़ रु0 अनुमोदित किये गये, जिसके विरूद्ध मात्र 5318.7 करोड़ रु0 की धनराशि उपलब्ध करायी गयी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उन चुनिन्दा राज्यों में हैं जहां मनरेगा की धनराशि के त्वरित हस्तान्तरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर रखे आंकड़ों में स्पष्ट है कि इस योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर रहा है।

प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस का हाथ गरीबों के साथ का नारा पूरी तरह छलावा है, क्योंकि चुनाव समाप्त होने के बाद यह नारा कांग्रेस पार्टी को याद नहीं रहता। यह इस बात से और भी स्पष्ट है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के संबंध में अभी भी वर्ष 2002 की सूची के आधार पर सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। राज्य सरकार के बार-बार अनुरोध के बाद भी इस सूची में न तो संशोधन किया गया है और न ही राज्य सरकारों को संशोधन की अनुमति दी गयी है, जबकि केन्द्र सरकार द्वारा गठित तेंदुलकर एवं सक्सेना समिति ने सभी प्रदेशों में बी0पी0एल0 परिवारों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने की संस्तुति की है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस तथा मिट्टी के तेल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर बीएसपी पूरे देश में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन शुरू करेगी

Posted on 26 June 2011 by admin

  • माननीया मुख्यमंत्री जी ने देश में अभी कुछ दिन पहले पेट्रोल व कल डीजल, रसोई गैस एवं मिट्टी के तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी की निन्दा करते हुए इन कीमतों को तत्काल वापस लेने के लिए केन्द्र सरकार से मांग की
  • उत्तर प्रदेश के मामले में केन्द्र सरकार तथा अन्य सभी विरोधी पार्टियों द्वारा अपनाया जा रहा रवैया दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है
  • इन दोनों मुद्दों तथा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस तथा मिट्टी के तेल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर बीएसपी पूरे देश में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन शुरू करेगी

उत्तर प्रदेश की मा0 मुख्य मंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी ने आज महाराष्ट्र प्रदेश के मुम्बई के चैम्बूर स्थित बीएसपी कार्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन एवं निरीक्षण किया। उन्होंने इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से पार्टी को और मजबूत तथा इसका जनाधार बढ़ाने के लिए पूरी मेहनत से जुटने की अपील की।

प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने बीएसपी कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर केन्द्र सरकार द्वारा कल डीजल, रसोई गैस तथा मिट्टी के तेल की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी किये जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि कांगे्रस पार्टी की यूपीए सरकार द्वारा अभी कुछ दिन पहले पेट्रोल तथा कल डीज़ल, रसोई गैस तथा मिट्टी के तेल के दामों में जो बढ़ोत्तरी की है, उससे हर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर महंगाई बढ़ेगी, जिसका सीधा प्रभाव देश के गरीब एवं मध्यम वर्ग एवं छोटे-छोटे कारोबार में लगे लोगों और खासतौर से किसानों पर पडे़गा और यह केन्द्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने डीज़ल, रसोई गैस व मिट्टी के तेल के दामों में बढ़ोत्तरी के बारे में जो फैसला लिया है, उसकी बीएसपी सरकार घोर निन्दा करती है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस बढ़ोत्तरी को वापस लेने के लिये केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखेगी।

प्रवक्ता ने यह बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने यह भी कहा कि शराब, सिगरेट, तम्बाकू एवं अन्य विलासिता की चीजों के दाम बढ़ाए जाने चाहिए, जिनका इस्तेमाल देश की आम जनता नहीं, बल्कि ज्यादातर अमीर लोग ही करते हैं। ताकि ये देश के गरीब एवं मध्यम वर्गों के लोगों के उपर महंगाई की मार और ज्यादा न पड़ सके।

मा0 मुख्य मंत्री जी ने कहा कि आबादी के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और जब यहां बीएसपी की सरकार बनने लगी है और खासतौर से यह सरकार एक दलित की बेटी के नेतृत्व में चल रही है, तब से विरोधी पार्टियों को आसानी से हजम नहीं हो रही है।

प्रवक्ता ने कहा कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने उत्तर प्रदेश में हाल में घटी कुछ घटनाओं को लेकर भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा रिपार्ट मांगे जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि देश के दूसरे राज्यों में इस तरह की घटनाओं के होने पर केन्द्र सरकार चुप्पी साधे रहती है। इससे साफ जाहिर है कि यूपीए सरकार उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को बदनाम करने की एक मुहिम चला रही है। इसके साथ ही इससे कांगे्रस पार्टी की यूपीए सरकार दलित विरोधी मानसिकता से बुरी तरह ग्रसित नजर आ रही है।

प्रवक्ता ने बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी यह भी कहा  कि देश के अन्य राज्यों, खासतौर से कांगे्रस शासित प्रदेशों में आए दिन बड़ी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं तथा महिलाओं के साथ लगातार अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, लेकिन कांगे्रस समेत सभी विपक्षी दलों को ये घटनाएं दिखायी नहीं पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कांगे्रस शासित महाराष्ट्र राज्य में कुछ महीने पहले एक अतिरिक्त जिलाधिकारी को तेल माफियाओं ने दिन-दहाड़े जिन्दा जला दिया था और अभी हाल में ही एक वरिष्ठ पत्रकार की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गयी। इसी प्रकार कांगे्रस शासित हरियाणा राज्य में पुलिस थाने में ही 14 जून, 2011 को एक दलित लड़की के साथ बलात्कार किया गया जिसमें दो पुलिस वाले शामिल थे। इसके अलावा हरियाणा में ही एक एस0आई0 को सरेआम गोली से उड़ा दिया गया।

प्रवक्ता ने बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने कहा कि हरियाणा में कानून-व्यवस्था की स्थिति इस कदर बदतर हो गयी है कि पुलिस की मौजूदगी में भीड़ ने एक व्यक्ति को जिन्दा जला डाला। इसी तरह भाजपा के सहयोग से चलायी जा रही बिहार सरकार में लोगों की जघन्य हत्याएं लगातार हो रही हैं, किन्तु विपक्षी दलों को ये सब घटनाएं दिखायी नहीं पड़ रही हैं। मा0 मुख्य मंत्री जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की बीएसपी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर आधारहीन आरोप लगाने से पहले कांगे्रस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को कांगे्रस शासित तथा भाजपा को अपनी पार्टी की सरकारों वाले प्रदेशों में दलितों, महिलाओं तथा समाज के कमजोर वर्गों पर होने वाली आपराधिक घटनाओं पर भी एक निग़ाह ज़रूर डाल लेनी चाहिए।

प्रवक्ता ने कहा कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने कहा कि जब कांगे्रस शासित प्रदेशों में गम्भीर आपराधिक घटनाएं होती हैं तो उन सरकारों के खिलाफ़ केन्द्र की यूपीए सरकार कोई नोटिस जारी नहीं करती और न ही उनसे कोई रिपोर्ट मांगी जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा हर आपराधिक घटना के विरूद्ध निष्पक्ष तरीके से कठोर कदम उठाये जाने के बाद भी केन्द्र सरकार द्वारा अक्सर रिपोर्ट मांगी जाती रहती है। इसके साथ-साथ पूरे देश भर में मीडिया के माध्यम से इसका खूब प्रचार भी कराया जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि कांगे्रस एवं अन्य विरोधी दलों को देश में एक दलित मुख्य मंत्री के नेतृत्व में चल रही बहुजन समाज पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार  उनकी जातिवादी मानसिकता के चलते उनके गले नहीं उतर पा रही है।

प्रवक्ता ने बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने यह भी कहा कि कांगे्रस शासित दिल्ली राज्य में प्रतिदिन महिलाओं के साथ जुल्म-ज्यादती की घटनाएं हो रही हैं। आंकड़ों को देखा जाए तो दिल्ली बलात्कार की राजधानी बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में महिलाओं की इज्जत-आबरू सुरक्षित नहीं है और दिल्ली सरकार द्वारा इस तरह की घटनाओं में कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की जा रही है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून-व्यवस्था के हर मामले में तेजी से कठोर कार्यवाही करते हुए दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा है तथा बीते चार वर्षों में कानून-व्यवस्था के प्रति आम जन-मानस का भरोसा जीतने में कामयाबी हासिल की है।

प्रवक्ता ने यह भी बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की निग़ाह में अपराधी सिर्फ अपराधी है, चाहे वह कितना शक्तिशाली व प्रभावशाली क्यों न हो, उसकी सही जगह सिर्फ जेल है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा हर मामले में अपराधियों के खिलाफ की गयी कड़ी कार्यवाही की विरोधी दलों द्वारा सराहना न करके राज्य सरकार को बदनाम करने और राजनीतिक लाभ लेने का घिनौना जो प्रयास किया जा रहा है। यह एक दलित विरोधी मानसिकता नहीं है तो और क्या है? साथ ही सभी विपक्षी दल राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर गलत ठहराने का अनर्गल प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये सभी दल अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होंगे। इतना ही नहीं, बल्कि सभी विरोधी दल विधान सभा के आम चुनाव को नज़दीक देखते हुए अपने राजनीतिक लाभ के लिये घिनौने तरीके से मुद्दे तलाशने की होड़ में घटिया बय़ानबाजी एवं सरकार पर झूठे आरोप लगाने पर हमेशा उतारू रहते हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने यह भी कहा है कि सभी विपक्षी दलों में राज्य सरकार पर झूठे एवं घटिया आरोप लगाने की जो होड़ मची हुई है, उसके पीछे का सच उत्तर प्रदेश की जनता अच्छी तरह जानती है। विपक्षी पार्टियों को राज्य सरकार द्वारा जनता के हित में किये जा रहे तमाम कल्याणकारी एवं विकास कार्य नज़र नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांगे्रस समेत सभी विपक्षी दल अपनी सरकारों के कार्यकाल के दौरान यहां जघन्य अपराधों एवं दलित, पिछड़ों, धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों को याद न करके प्रदेश में जबरदस्ती कानून-व्यवस्था के खराब होने का झूठा आरोप लगाते रहते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि मा0 मुख्य मंत्री जी ने इन सब बातों को मद्देनजर रखते हुए खासतौर से अपने देश में आम जनता की रोजमर्रा की जरूरी आवश्यकताओं की चीजों की जो कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और जिसके कारण महंगाई भी लगातार बढ़ रही है, के मुद्दे को गम्भीरता से लेने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के प्रति केन्द्र सरकार एवं अन्य सभी विरोधी पार्टियों का जो दलित विरोधी रवैया नजर आता है, इन दोनों मुद्दों को लेकर उनकी पार्टी बहुत जल्दी ही पूरे देश भर में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन शुरू करेंगे और इस आन्दोलन के तहत पूरे देश में विभिन्न स्तर पर धरना प्रदर्शन आदि किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धरना प्रदर्शन की निश्चित तारीख जल्द ही घोषित कर दी जाएगी।

प्रवक्ता ने बताया कि इस मौके पर मा0 मुख्य मंत्री जी ने पार्टी कार्यालय का उद्घाटन एवं निरीक्षण करके महाराष्ट्र बीएसपी स्टेट यूनिट को बधाई दी। इसके साथ ही उन्हांेंने कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों को बहुजन समाज पार्टी को महाराष्ट्र में मज़बूत बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिये।
उन्होंने इस अवसर पर महाराष्ट्र के मीडिया बन्धुओं के सुरक्षा की मांग करते हुए दिवंगत पत्रकार श्री जे0 डे0 के परिजनांे के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति एवं संवेदना व्यक्त की।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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माननीया मुख्यमंत्री जी ने मुजफ्फरनगर की घटना में विधायक श्री शहनवाज राणा का नाम जुड़ने के कारण उन्हें पार्टी सदस्यता से निलम्बित किया

Posted on 25 June 2011 by admin

  • श्री राणा को पार्टी के किसी कार्यक्रम में बुलाने और सम्मिलित होने पर रोक
  • घटना की जांच के लिए एस0टी0एफ0 को निर्देशित किया गया
  • माननीया मुख्यमंत्री जी ने हमेशा महिलाओं के विरूद्ध अत्याचार की घटनाओं के मामलों में कड़ा रूख अपनाया

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी ने मुजफ्फरनगर की घटना में बिजनौर के विधायक श्री शहनवाज राणा का नाम जुड़ जाने के कारण उन्हें पार्टी सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया है। उन्होंने यह निर्देश भी दिए हैं कि भविष्य में श्री राणा को पार्टी के किसी कार्यक्रम में न तो बुलाया जाए और न ही सम्मिलित किया जाए।

प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह श्री कुंवर फतेह बहादुर ने आज यहां एनेक्सी स्थित मीडिया सेन्टर में पत्रकारों से वार्ता के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि घटना की जांच के लिए एस0टी0एफ0 को निर्देशित किया गया है, ताकि दोषियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की जा सके। उन्होंने कहा कि 22 जून, 2011 को श्री गौरव जैन निवासी शाहदरा, दिल्ली द्वारा थाना सिविल लाइन, जनपद मुजफ्फर नगर में तहरीर देकर बताया गया कि 21/22 जून की रात में लगभग 01ः00 बजे मुजफ्फरपुर नगर बाईपास स्थित हिमालयान फिलिंग स्टेशन पेट्रोल पम्प पर उनके तथा उनकी महिला मित्रों के साथ कुछ लोगों द्वारा छेड़खानी तथा अभद्रता की गयी तथा महिला मित्रों के साथ दुराचार का प्रयास किया गया।

श्री जैन द्वारा दी गयी तहरीर के आधार पर 22 जून, 2011 को थाना सिविल लाइन, जनपद मुजफ्फर नगर में आई0पी0सी0 की धारा 377/2011 धारा-364/376/511/342/395/397/323/504/506 में एफ0आई0आर0 दर्ज कर विवेचना प्रारम्भ की गयी। विवेचना से इस घटना में शामिल दिलशाद पुत्र महमूद, मसरूर अहमद पुत्र ममनून अली, रागिब पुत्र शाहिद का नाम आने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। घटना में प्रयुक्त एक मारूती वैगन-आर कार नम्बर-एच0 आर0-26ए0ई0-0489 सिल्वर कलर की भी बरामद की गयी। इसके अलावा श्री दिलशाद के कब्जे से उसकी लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद की गयी।

प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि विवेचना से प्रकाश में आया कि घटना में जिन सुरक्षा कर्मियों की संलिप्तता पायी गयी है, वे मा0 विधायक, बिजनौर श्री शाहनवाज राणा एवं उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष, मुजफ्फरनगर श्रीमती इन्तखाब राणा के सुरक्षा कर्मी हैं। इसके साथ ही इस घटना के लिए जिन अन्य लोगांे केे ऊपर आरोप लग रहे हैं और घटना में जो गाड़ी प्रयुक्त की गयी है, वह भी इन्हीं से सम्बन्धित है। उन्होंने बताया कि इनके सुरक्षा कर्मी हेड कान्सटेबल श्री नरेन्द्र कुमार खोखर एवं कान्सटेबल श्री जर्रार हुसैन को निलम्बित कर हिरासत में ले लिया गया है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि माननीया मुख्यमंत्री जी ने कानून द्वारा कानून का राज स्थापित करके प्रदेश में भयमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त, अपराधमुक्त, अन्यायमुक्त तथा विकासयुक्त वातावरण बनाये जाने पर हमेशा बल दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों के जंगलराज को खत्म करने के लिए माननीया मुख्यमंत्री जी ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए तथा अनेक कड़े कदम भी उठाये, ताकि प्रदेश में अमन-चैन कायम हो सके। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा खूंखार अपराधियों, गुण्डों व माफियाओं पर लगातार शिकंजा कसा गया और उनके विरूद्ध कानून सम्मत सख्त से सख्त कार्यवाही की गयी।

प्रमुख सचिव ने बताया कि माननीया मुख्यमंत्री जी ने अपनी पार्टी संगठन के पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों व मंत्रियों को हमेशा हिदायत दी कि पूर्व की सरकारों के शासनकाल में उनके सांसदों, विधायकों, मंत्रियों तथा पार्टी पदाधिकारियों द्वारा जो आचरण किया जाता रहा था। उस प्रकार का आचरण उनकी पार्टी के लोगों द्वारा कतई नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उन्हें बी0एस0पी0 के पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों व मंत्रियों द्वारा गड़बड़ी किए जाने या कानून तोड़ने की शिकायतें मिली, ऐसे सभी मामलों में माननीया मुख्यमंत्री जी द्वारा सख्त कार्यवाही की गयी। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर का यह प्रकरण अत्यन्त गम्भीर है क्योंकि माननीया मुख्यमंत्री जी ने हमेशा महिलाओं के विरूद्ध अत्याचार की घटनाओं अथवा उनके शोषण के मामलो को लेकर कड़ा रूख अपनाया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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राज्य सरकार डाॅ0 वाई0एस0 सचान की मृत्यु के समस्त पहलुओं की गहनता से छानबीन कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध-माननीया मुख्यमंत्री जी

Posted on 24 June 2011 by admin

  • प्रकरण में लापरवाही बरतने के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार जेलर, डिप्टी जेलर, प्रधान बंदी रक्षक एवं दो बंदी रक्षक निलम्बित
  • जुडीशियल मजिस्टेªट ने प्रकरण के समस्त  पहलुओं की जांच प्रारम्भ की
  • पांच डाक्टरों के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया गया तथा  पूरी प्रक्रिया की निरंतर वीडियोग्राफी कराई गई

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी ने कहा है कि राज्य सरकार डाॅ0 वाई0एस0 सचान की मृत्यु की घटना के समस्त पहलुओं की गहनता से छानबीन कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस घटना को लेकर विरोधी दलों द्वारा की जा रही बयानबाजी तथा सरकार पर आरोप लगाये जाने के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि विरोधी दल तथ्यों की जानकारी किये बिना सरकार पर आरोप लगाने लगते है। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों ने भट्टा-परसौल एवं लखीमपुर के मामले में भी रेप के आरोप लगाये थे।  इस सम्बन्ध में मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में यह आरोप सत्य नहीं पाया गया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किसी महिला/बच्ची से रेप के आरोप को खारिज कर दिया है।

मंत्रिमण्डलीय सचिव श्री शशांक शेखर सिंह ने आज एनेक्सी स्थित मीडिया सेन्टर में पत्रकारों से वार्ता के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि डाॅ0 सचान की मृत्यु पर राज्य सरकार ने गम्भीर रूख अपनाते हुए इस प्रकरण में लापरवाही बरतने के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार जेलर श्री जे0पी0श्रीवास्तव, डिप्टी जेलर श्री सुनील कुमार सिंह, प्रधान बंदी रक्षक श्री बाबू राम दुबे एवं बंदी रक्षक श्री अनिल कुमार त्रिपाठी व श्री रामनरायन तिवारी को निलम्बित कर उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी है।

श्री सिंह ने कहा कि डा0सचान के शव का पंचायतनामा मजिस्ट्रेट द्वारा परिवार की उपस्थिति में किया गया तथा पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। शव के पोस्टमार्टम के लिए 5 डाक्टरों का एक बोर्ड गठित किया गया तथा निरंतर वीडियोग्राफी कराते हुए पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया सम्पन्न की गई। डाक्टरों द्वारा शव का विसरा सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के सदस्य मौजूद रहे। जिनमें डा0सचान का एक डाक्टर भाई भी सम्मिलित था।

मंत्रिमण्डलीय सचिव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर कुल 9 चोटें पायी गयीं। 8 चोटें धारदार हथियारों से थीं, जिसमें 2 गर्दन पर, 2 दाहिनी कोहनी पर, 2 बायीं कोहनी पर, एक दाहिनी जांघ के ऊपरी हिस्से पर, एक बायीं कलाई पर थीं। इसके अतिरिक्त गले में एक फन्दे का निशान गर्दन के चारों ओर था। अधिक रक्तस्राव से मृत्यु हुई। मृत्यु पोस्टमार्टम होने से एक दिन के अन्दर हुई थी।

श्री सिंह ने कहा कि डाॅ0 सचान की मृत्यु के समस्त पहलुओं की बारीकी से जांच के लिए मा0 जिला जज से जुडीशियल मजिस्ट्रेट नामित करने का अनुरोध किया गया और जुडीशियल मजिस्टेªट द्वारा जांच प्रारम्भ कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि 05 अप्रैल, 2011 को श्री राजेन्द्र सिंह, संयुक्त निदेशक, महानिदेशालय परिवार कल्याण, लखनऊ की तहरीर पर डा0 वाई0एस0सचान सहित तीन व्यक्तियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार से सम्बन्धित मुकदमा पंजीकृत हुआ था। जिनमें उन तीनों की गिरफ्तारी तत्काल की गयी थी। इस सम्बन्ध में उन्होंने गत् 07 अप्रैल को प्रेस कांफ्रेंस में समस्त तथ्य रखे थे।

श्री सिंह ने कहा कि पूछताछ के दौरान डा0वाई0एस0सचान ने बताया कि उनके द्वारा एन0आर0एच0एम0 के तहत सरकारी धन का फर्जी बिल वाउचर बनाकर गबन किया गया, जिसके अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध है। साक्ष्य संकलन के क्रम में गत् 8 अप्रैल व 13 अप्रैल को डा0सचान की पुलिस कस्टडी रिमांड स्वीकृत की गयी। दोनो बार उनके द्वारा सीने में दर्द की शिकायत किये जाने पर उन्हे बलरामपुर अस्पताल लाया गया। अस्पताल से ही पुलिस कस्टडी रिमांड का समय समाप्त होने पर जेल भेज दिया गया, जिसके फलस्वरूप उनसे पूछताछ संभव नही हो पाई।

मंत्रिमण्डलीय सचिव ने कहा कि 10 जून, 2011 को पुनः डा0 सचान को 24 घंटे के पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर, उनसे की गयी पूछताछ में डा0 सचान ने बताया था कि उनके द्वारा एन0आर0एच0एम0 में किये गये घोटाले को लेकर डा0बी0पी0सिंह उनके पीछे पड़े थे। इससे वे काफी तनाव व दबाव में आ गये व 29 मार्च, 2011 को सिविल अस्पताल में भर्ती होने गये थे। परन्तु कुछ समय बाद ही उन्हे अस्पताल से इलाज के पश्चात छुट्टी दे दी गयी।

श्री सिंह ने कहा कि डा0बी0पी0सिंह हत्याकांड के सम्बन्ध में तीन व्यक्तियों को 17 जून, 2011 को एस0टी0एफ0 द्वारा गिरफ्तार किया गया था। इस सम्बन्ध में उसी दिन प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से मीडिया को सारे तथ्यों की जानकारी देते हुए यह भी बताया गया था कि इन लोगों ने पूछताछ के दौरान डा0बी0पी0सिंह की हत्या में अपनी संलिप्तता को स्वीकार की थी और पुलिस को यह भी बताया कि डा0सचान के कहने पर ही डा0सिंह की हत्या की घटना को इन लोगों ने अंजाम दिया था।

मंत्रिमण्डलीय सचिव ने कहा कि गिरफ्तार अभियुक्तों के बयान के आधार पर 20 जून को डा0सचान का बयान जेल में जाकर लेने हेतु अनुमति माननीय न्यायालय से मांगी गई थी। प्रार्थना स्वीकृत होने के पश्चात 21 जून को जेल में जाकर डा0सचान का बयान अंकित किया गया। 22 जून को डा0सचान की पुलिस कस्टडी रिमांड हेतु आवेदन किया गया। इस सम्बन्ध में आज माननीय न्यायालय में सुनवाई होनी थी। उन्होंने कहा कि जेल महानिरीक्षक ने 22 जून को बताया कि परिवार कल्याण के सी0एम0ओ0 डा0बी0पी0सिंह की हत्या के आरोपी डिप्टी सी0एम0ओ0 डा0सचान जिला जेल के अस्पताल के प्रथम तल के बाथरूम में मृत हालत में मिले। जेल अधीक्षक एवं जेल डाक्टर ने बताया कि डा0सचान के सम्बन्ध में जानकारी तब हुई, जब जेल अस्पताल में डा0सचान गिनती के दौरान अनुपस्थित पाये गये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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माननीया मुख्यमंत्री जी ने महिलाओं के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की कड़े शब्दों में निन्दा की और गहरा दुःख व्यक्त किया

Posted on 21 June 2011 by admin

  • माननीया मुख्यमंत्री जी का महिलाओं के साथ बलात्कार एवं अन्य अपराधिक घटनाओं को देखते हुये दण्ड प्रक्रिया संहिता में संशोधन करने का निर्णय
  • बलात्कार के मुकदमों का फैसला 6 महीने में तथा बलात्कार के अपराधियों को जमानत न देने की व्यवस्था
  • उत्तर प्रदेश में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354 को गैर-जमानती घोषित करने का निर्णय
  • 27 जून को माननीया मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक आहूत
  • बैठक में माननीया मुख्यमंत्री जी अधिकारियों को आपराधिक तत्वों के विरूद्ध एक माह का विशेष अभियान चलाने के निर्देश देंगी
  • विरोधी पार्टियांे को घिनौनी राजनीति करने की बजाय सामाजिक जागरूकता पैदा करनी चाहिए जिससे वारदातों की पुनरावृत्ति न हो

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी ने कहा है कि महिलाओं के साथ बलात्कार एवं अन्य अपराधिक घटनाओं को देखते हुये उनकी सरकार ने दण्ड प्रक्रिया संहिता में जरूरी संशोधन करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बलात्कार के मुकदमों में 6 महीने के अन्दर फैसला करने तथा बलात्कार के अपराधियों को तब तक जमानत न दिये जाने की व्यवस्था की जायेगी जब तक कि बलात्कारी यह न साबित करें कि वह दोषी नहीं है। उन्होंने कहा कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 एवं 439 में इस आशय के संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन संशोधनों से सम्बन्धित अध्यादेश महामहिम श्री राज्यपाल जी को प्रेषित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का यह मानना है कि कानून में किये जा रहे इन बदलावों से समाज पर व्यापक असर पड़ेगा तथा महिलाओं के विरूद्ध हो रहे जघन्य अपराधों में काफी हद तक कमी आयेंगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यह निर्णय भी लिया है कि महिलाओं की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला करने के अपराध से सम्बन्धित भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354 को उ0प्र0 में गैर-जमानती घोषित किया जाये, जो कि अभी तक जमानतीय है। उन्होंने कहा कि इस आशय का अध्यादेश भी महामहिम श्री राज्यपाल को प्रेषित किया जा रहा है। इस संशोधन से भी महिलाओं के विरूद्ध होने वाले अपराधों में अवश्य ही कमी आयेगी, तथा इससे अपराधियों को भी जरूर सबक मिलेगा।

माननीया मुख्यमंत्री जी आज अपने सरकारी आवास पर मीडिया से वार्ता करते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर विरोधी पार्टियों द्वारा किये जा रहे दुष्प्रचार के सम्बन्ध में राज्य सरकार का पक्ष रख रही थीं। उन्हांेने प्रदेश में महिलाओं के विरूद्ध हाल ही में हुई कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए बच्चियों तथा महिलाओं के साथ हुई आपराधिक घटनाओं पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने प्रभावित महिलाओं एवं बच्चियों के परिवारजनों को आश्वासन दिया कि दोषियों के विरूद्ध उनकी सरकार सख्त कार्यवाही करेगी।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों और विशेष रूप से सपा के शासनकाल के दौरान महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित सर्वसमाज के कमजोर व गरीब वर्गों के विरूद्ध जुल्म ज्यादती की कोई सुनवाई नहीं होती थी। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सन् 2007 में उनकी पार्टी की सरकार द्वारा कार्यभार ग्रहण के तत्काल बाद पूर्ववर्ती सरकार के कारनामों से दुःखी एवं पीड़ित लोगों को, उनकी जायज शिकायतों सम्बन्धी एफ0आई0आर0 लिखवाने का विशेष अवसर प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा न्याय दिलाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के दौरान लगभग 10 हजार एफ0आई0आर0 दर्ज कराई गईं, जिसमें महिलाओं द्वारा दर्ज करायी गयी एफ0आई0आर0 की संख्या लगभग 1460 थी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में एफ0आई0आर0 दर्ज होने के बावजूद निश्चित रूप से कुछ महिलायें ऐसी भी रही होंगी, जिन्होंने लोक-लाज के कारण एफ0आई0आर0 दर्ज कराने में संकोच किया होगा।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में हर मामले में कानून द्वारा कानून का राज स्थापित करने का पूरा प्रयास किया है और इसमें उनकी सरकार को काफी हद तक कामयाबी भी मिली है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा इस बात पर जोर देती हंै कि सभी प्रकार के अपराधियों, विशेषकर महिलाओं एवं नाबालिगों के साथ अपराध करने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में कोई इस प्रकार का कृत्य करने की हिम्मत न कर सके। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये हैं कि ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने अथवा अपराधियों को बचाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को भी कतई बख्शा न जाय।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अभी हाल ही में, प्रदेश के कुछ जिलों में बच्चियों व महिलाओं के साथ जो भी गम्भीर वारदातें हुई हैं। उनमें उनकी सरकार कुछ हद तक पुलिस एवं प्रशासन तन्त्र की लापरवाही के साथ-साथ जिन भी लोगों ने बच्चियों व महिलाओं के साथ घिनौनी हरकत की है। उनके खराब चरित्र को भी काफी हद तक जिम्मेदार मानती है। उन्होंने कहा कि इस बात को गम्भीरता से लेते हुये उनका सभी विरोधी पार्टियों से यह भी कहना है कि वे इन वारदातों की आड़ में घिनौनी राजनीति करने की बजाय समाज में ऐसेे लोगों की करतूतों को उजागर करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी वारदातों की फिर से पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए विरोधी पार्टियों को प्रदेश में सामाजिक जागरूकता पैदा करनी चाहिये। उन्होंने कहा आम लोगों में यह बात जरूर पैदा करनी चाहिये कि जिन परिवारों में चरित्रहीन व वाहियात किस्म के लोग हैं, उनमें उनके परिवार के लोग अच्छे संस्कार पैदा करें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भी अपने संगठन को तैयार करने के साथ-साथ इस ओर भी जरूर ध्यान देंगी।    इसी प्रकार प्रदेश में जो एन0जी0ओ0 कार्य कर रहे हैं उन्हें भी इस दिशा में जरूर पहल करनी चाहिये।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में जिन लोगों ने महिलाओं व बच्चियों के साथ घिनौनी हरकत की है, उनके खिलाफ सरकार काफी सख्त से सख्त कार्यवाही करेगी, उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के साथ आगे ऐसी घिनौनी हरकत न हो, इसके लिए ऐसे तत्वों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए उन्होंने इसी महीने 27 जून को लखनऊ में सभी जिलों, मण्डलों, जोन एवं सरकार के पुलिस व प्रशासन तन्त्र के अधिकारियों की अति महत्वपूर्ण बैठक बुलायी है, इस बैठक की वह स्वयं अध्यक्षता करेंगी। उन्होंने कहा कि बैठक में प्राथमिकता के आधार पर खासतौर से महिलाओं व बच्चियों के साथ किसी भी प्रकार का कोई उत्पीड़न न हो, इसके लिए वे अधिकारियों को यह निर्देश देंगी कि इस मामले में  प्रदेश के हर थाना क्षेत्र में थानों के इन्चार्जों की देखरेख में एक महीने का विशेष अभियान चलायें। इस अभियान में ऐसे गलत लोगों की सूची तैयार करके, उन्हें पहले सुधारने का हर सम्भव प्रयास किया जाये और यदि वे नहीं सुधरते हैं तो ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही की जाये।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऐसे लोग जिनका चरित्र ठीक नहीं है, उनकी राज्य में अब खैर नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सख्त निर्देंश दिये जायेंगे कि प्रदेश के किसी भी जिले में यदि कोई भी गम्भीर वारदात होती है तो इसके बारे में जिम्मेदार अधिकारी शीघ्र सही तथ्यों के बारे में सरकार के साथ-साथ स्थानीय मीडिया को भी समय से जानकारी दंे। उन्होंने मीडिया से भी यह अपील की कि वह भी किसी गम्भीर घटना के बारे में सम्बन्धित अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए थोड़ा इन्तजार करें। उन्होंने कहा कि कभी-कभी चैनलों में पहले समाचार दिखाने की होड़ में बिना तथ्यों की पुष्टि किये गलत रिपोर्ट दिखा दी जाती है, जिससे आम जनता में गलत फहमी पैदा होती है, जिसका कानून-व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया को  लोकतन्त्र का चैथा स्तम्भ माना जाता है और इस प्रकार के प्रसारण से उसकी गरिमा पर भी कुछ हद तक बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस मामले में मीडिया उनकी सरकार को सहयोग करेगा। उन्हांेने अधिकारियों को भी सख्त निर्देंश दिये हैं कि वे मीडिया के साथ सहयोग करें।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हाल की घटनाओं के सम्बन्ध में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उनकी सरकार पर आरोप लगाने वालों को उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य है, इसलिए इसकी समस्याएं भी बड़ी है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एन0सी0आर0बी0) की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में महिलाओं के विरूद्ध हुए अपराधों में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि एन0सी0आर0बी0 द्वारा दिये गये आंकड़ों की जानकारी मीडिया सहित सभी विपक्षी दलों को है, फिर भी उनकी सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा आभास दिलाया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ सर्वाधिक अपराध हो रहे है।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एन0सी0आर0बी0 के आंकड़ों के अनुसार प्रति लाख जनसंख्या पर उत्तर प्रदेश में अपराध की संख्या 11.9 है, जबकि कांग्रेस शासित आन्ध्र प्रदेश में 30.7, हरियाणा में 21.9, राजस्थान में 26.2 तथा दिल्ली में 23.9 अपराध दर्ज किये गये। इसी प्रकार बी0जे0पी0 शासित गुजरात में महिलाओं के साथ अपराधों की संख्या 13.9 तथा मध्य प्रदेश में 22.3 हैं। इसके अलावा महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति कांग्रेस एवं बी0जे0पी0 शासित प्रदेशों की तुलना में काफी बेहतर है। उन्होंने कहा कि अगर बलात्कार की घटनाओं का आंकड़ा देखा जाये, तो उत्तर प्रदेश में बलात्कार की अपराध दर 0.9 है जबकि आन्ध्र प्रदेश में 1.4, असम में 5.3, छत्तीसगढ़ में 4.0, मध्य प्रदेश में 4.2, हरियाणा में 2.5, राजस्थान में 2.3 तथा दिल्ली में 2.6 हैं।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन आंकड़ों का विवरण देने का मतलब यह है कि उत्तर प्रदेश की कुछ घटनाओं को लेकर हाय-तौबा मचाने वाले विरोधी दलों को अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्यों में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को भी देख लेना चाहिए। इसके अलावा जहां तक सपा के नेताओं द्वारा दिये गये बयानों की बात है तो यहां के लोगों को इस पार्टी के शासनकाल के दौरान महिलाओं के साथ हुए अत्याचार और पूरे प्रदेश में व्याप्त गुंडाराज को लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को वे दोहराना नहीं चाहती लेकिन सपा के नेताओं को उनकी सरकार पर अंगुली उठाने का कोई हक नहीं है।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इसके बावजूद लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि उनकी सरकार ने कानून-व्यवस्था के मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आपराधिक मामलों में सख्त से सख्त कार्यवाही की है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में ज्यादातर अपराधियों को बचाने की कोशिश की जाती थी और यदि किसी दबाव में या दिखाने के लिए कार्यवाही करना जरूरी होता था तो अधिकांश मामलों में बेकसूर लोगों को ही बलि का बकरा बना दिया जाता था।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हाल ही में प्रदेश के कुछ जनपदों में कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें जरूर हुईं है, लेकिन ऐसी घटनाओं के सम्बन्ध में सच्चाई बाहर आने से पहले ही विपक्षी दलों द्वारा घिनौनी राजनीति शुरू कर दी जाती है तथा हाल की इन कुछ घटनाओं को लेकर विपक्षी पार्टियों द्वारा की जा रही बयानबाजी वास्तव में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनकी सरकार को बदनाम करने की कोशिश है। इसके बावजूद उन्होंने सभी विपक्षी दलों से इस बाबत आग्रह किया कि वे ऐसी संवेदनशील घटनाओं पर राजनीति न करें और मानवता के आधार पर सरकार की मदद करें, जिससे कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो सके। उन्होंने कहा कि हाल में घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के सम्बन्ध में उनकी सरकार द्वारा तेजी से कार्यवाही की गयी है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से सम्बन्धित कई अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और जिन मामलों में पुलिस के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा लापरवाही बरती गयी, वहां उनके विरूद्ध भी काफी सख्त कार्यवाही की गयी।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन घटनाओं को लेकर इसकी आड़ में जो लोग यहाँ जंगलराज होने की बात कह रहे हैं, उन्हें वे बताना चाहती हैं कि यदि उनकी सरकार में वास्तव में जंगलराज व्याप्त होता तो फिर अयोध्या प्रकरण में आये फैसले के तुरन्त बाद ही उ.प्र. के साथ-साथ पूरे देश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो जाती। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार उनके शासन में नामी बड़े-बड़े डकैत व अन्य अपराधी पुलिस मुठभेड़ में नहीं मारे जाते, जिन्होंने पूर्व की सरकारों में यहाँ हाहाकार मचाया हुआ था। जिन्हें राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त था। ऐसे लोग इन्हीं की आड़ में यहाँ घिनौनी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विधान सभा के आमचुनाव नजदीक आते हुये देखकर अपने राजनैतिक फायदे के लिए यहाँ सभी विरोधी पार्टियों के लोग प्रदेश में जंगलराज होने की बात बढ़ा-चढ़ाकर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों के ये सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य सचिव के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए आज कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार के संदर्भ में माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हांेने इसे काफी गम्भीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि यद्यपि उन्हें पूरा भरोसा है कि मुख्य सचिव एक जिम्मेदार और गम्भीर अधिकारी हैं। इसलिए वे इस प्रकार की बात नहीं कहंेगे, फिर भी उन्होंने इस मामले में मुख्य सचिव से लिखित जानकारी मांगी है और वे इसकी स्वयं छान-बीन करायेंगी। उन्होंने कहा कि इस किस्म का गैर-जिम्मेदाराना बयान सही मायने में समाजवादी पार्टी की सरकार में इस पार्टी की ओर से श्री शिवपाल सिंह यादव जैसे लोग नोएडा में उनकी सरकार के रहते हुये बड़ी तादाद में नाबालिग बच्चियों के मिले कंकाल के मामले में इसे मामूली सी घटना बताकर दे सकते हैं। इसी प्रकार केन्द्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण देश में लगातार बढ़ रही मँहगाई जैसे अति संवेदनशील मुद्दे पर भी केन्द्र की सरकार में महत्वपूर्ण मन्त्रालयों मंे बैठे हुये, उनके वरिष्ठ मन्त्री लोग भी इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना बयान दे सकते हैं कि वे कोई ज्योतिषी नहीं हैं और न ही उनके पास कोई जादू की छड़ी है जिसको घुमाकर देश में बढ़ रही मँहगाई को फौरन कम कर दें।

माननीया मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इसी तरह से विभिन्न पार्टियों के संगठन में उच्च पदांे पर बैठे हुये लोग भी अपने विरोधियों पर अक्सर आये दिन ऐसी बयानबाजी करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी व सरकार मंे किसी भी स्तर के पदाधिकारी व अधिकारी का किसी भी मामले में गैर-जिम्मेदाराना बयान कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की जुल्म-ज्यादती करने वाले लोगों को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जायेगा। इस मामले में, वे गलत कार्य करने पर अपनी पार्टी के लोगों तक को भी नहीं छोड़ती हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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किसान पंचायत में किसानों द्वारा उठायी गयी बिजली, खाद, बीज, गेहॅू खरीद आदि से सम्बन्धित विभिन्न समस्याओं के निस्तारण हेतु आदेश जारी

Posted on 19 June 2011 by admin

किसानों की समस्याओं के निस्तारण में किसी  तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी
राज्य सरकार किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी
किसान प्रतिनिधियांे ने उनकी समस्याओं के शीघ्रता से निस्तारण के लिए राज्य सरकार की सराहना की

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि गत् 02 जून, 2011 को लखनऊ में आयोजित किसान पंचायत के दौरान किसानों द्वारा उठायी गयी विभिन्न समस्याओं जैसे - खाद-बीज, ऊर्जा, सिंचाई, गेहंू खरीद, सड़क आदि का निस्तारण प्राथमिकता से सुनिश्चित करते हुए इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा आवश्यक आदेश जारी कर दिये गये हैं। इस तरह राज्य सरकार द्वारा किसानों की समस्याओं के निस्तारण में शीघ्रता एवं संवेदनशीलता प्रदर्शित किये जाने पर भारतीय किसान यूनियन ने इसकी सराहना की है।

प्रवक्ता ने बताया कि किसान पंचायत में बिजली से सम्बन्धित अधिकंाश समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित करते हुए आदेश जारी किये जा चुके हैं। किसान पंचायत में किसानों ने 7.5 हार्स पावर से कम के भी पम्प सेट के कनेक्शन के ऊर्जीकरण के लिये मांग की गयी थी। इस संबंध में आदेश जारी किये जा चुके हैंै। इसके अलावा बिना मीटर के विद्युत आपूर्ति वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं के विद्युत के बिल के भुगतान के लिए पासबुक उपलब्ध कराने व पोस्ट आफिस में बिल जमा करने की सुविधा के लिए भी आदेश जारी किये जा चुके हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि किसानों ने ट्रांसफार्मर के लोड की जांच कराने तथा उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर स्थापित करने तथा अवैध कनेक्शन को नियमित करने के लिए देय धनराशि बी0पी0एल0 श्रेणी के लिए 250 रूपये एवं ए0पी0एल0 श्रेणी के लिए 500 रूपये प्रति कनेक्शन देने की मांग की थी। राज्य सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सरकार द्वारा आवश्यक निर्देश जारी किये गये हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि बिजली विभाग से संबंधित एक अन्य बिन्दु जिसमें जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने में विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा उत्पीड़न न करने की मांग की गयी थी। इस संबंध में हर माह समीक्षा करने तथा किसानों का उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध ठोस कार्यवाही करने की व्यवस्था की गयी है तथा इससे संबंधित आदेश भी सम्बन्धित अधिकारियों को दे दिये गये हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि किसानों ने ट्रांसफार्मर की खराब गुणवत्ता में सुधार, सामान्य योजना में पम्प सेट के कनेक्शन के लिए इन्सूलेटर, क्रास आर्म आदि उपलब्ध कराने, ट्रांसफार्मर की सुरक्षा किये बिना ही फर्जी भुगतान के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने, कृषि क्षेत्र के उपभोक्तओं की मृत्यु की दशा में कनेक्शन उनके उत्तराधिकारी के नाम हस्तान्तरित करने की व्यवस्था सरल बनाने एवं ट्यूबवेल के नये कनेक्शन जारी करने की व्यवस्था आसान बनाने के लिए एस0डी0ओ0 को अधिकृत किये जाने संबंधी मांग को स्वीकार करते हुए आदेश जारी कर दिये गये हैं। ऊर्जा विभाग से सम्बन्धित शेष समस्याओं के निस्तारण के लिए तेजी से कार्यवाही की जा रही है।

प्रवक्ता ने बताया कि किसानों की कुछ समस्यायें सहकारिता विभाग से सम्बन्धित थी। जिसके अन्तर्गत प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में सदस्य बनाने तथा किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान की बात उठायी गयी थी, के सम्बन्ध में समस्त जिला सहायक निबंधक, सहकारी समितियों तथा सचिव/महाप्रबंधकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिये गये हैं। इसके अलावा राज्य सहकारी ग्राम विकास बैंक दीर्घकालीन ऋण कृषकों को कम ब्याज पर उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही भी तेजी से की जा रही है। इसके अतिरिक्त गेहॅू खरीद के लिए आवश्यक धनराशि जनपदों को आवंटित कर दी गयी है।

प्रवक्ता ने बताया कि कृषि विभाग से संबंधित किसानों की समस्याओं पर तेजी से कार्यवाही करते हुए ज्यादातर मामलों में आदेश जारी कर दिये गये हैं और अवशेष मामलों में कार्यवाही प्रगति पर है। प्रवक्ता ने बताया कि किसानों ने खाद का मूल्य हरियाणा के बराबर किये जाने की मांग की थी। इस संबंध में ए0सी0टी0एन0 टैक्स हटाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही नकली खाद, बीज व कीटनाशकों की बिक्री पर प्रभावी रोकथाम के लिए समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि किसान मेले आयोजित करने के लिए समस्त मण्डलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इसके अलावा जी0एम0 बीज तथा बीज अधिनियम से संबंधित प्रकरणों पर सरकार द्वारा गम्भीरता से विचार किया जा रहा है और इसके पश्चात राज्य सरकार द्वारा अपना पक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा एग्रो से सम्बन्धित गेहूॅ भुगतान की समस्या के समाधान के लिए एम0डी0, यू0पी0 एग्रो को तत्काल भुगतान किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि बनरोजों से फसलों की सुरक्षा तथा इनसे होने वाली हानियों को रोकने के लिए समस्त जिलाधिकारियों को आवश्यक लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिये गये हैं। इसके साथ ही किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह की 22 तारीख को प्रातः 10 से 12 बजे तक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में किसान बैठक आयोजित करकेे उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए आदेश जारी कर दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि जनपद मुजफ्फरनगर में ट्रैक्टर के मूल्य पर कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इसके अलावा किसानों को बैंक से के्रडिट कार्ड दिलाने के लिए समस्त जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिये गये हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि किसानों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए रजवाहों तथा माइनरों की सफाई व्यवस्था बेहतर कराने, खासतौर से अलीगढ़ में नहर पटरी को पक्का कराने की मांग उठाई थी। उन्होंने बताया कि नहरों व रजवाहों का सफाई कार्य का सत्यापन फ्लाइंग स्कावाड के माध्यम से  करायी जा रही है। इसके अलावा चोगम्मा नहर के अवशेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है।

प्रवक्ता ने आगे यह भी बताया कि किसानों ने गण्डक परियोजना को पूरी क्षमता से चलाने तथा पुनरीक्षित परियोजना पर शीघ्र कार्य कराने जाने की मांग उठाई थी। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में परियोजना को ए0आई0बी0पी0 के अन्तर्गत वित्त पोषण हेतु प्रस्ताव केन्द्रीय जल आयोग भारत सरकार को भेजा जा चुका है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 60 करोड़ रूपये का बजट प्राविधान राज्य सरकार द्वारा रखा गया है। परन्तु भारत सरकार द्वारा ए0आई0बी0पी0 के अन्तर्गत स्वीकृत न होने के कारण अभी तक वित्तीय स्वीकृति निर्गत नहीं की गयी है। इस परियोजना के पूर्ण हो जाने से 1.73 लाख हेक्टेयर की सिंचन क्षमता सृजित होगी।

प्रवक्ता ने बताया कि हथिनीकुण्ड बैराज पर हरियाणा के साथ जल बंटवारे पर बातचीत कर अधिक जल उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराने के मामले में केन्द्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि इस बैराज का संचालन हरियाणा के सिंचाई विभाग से न कराकर केन्द्रीय जल आयोग के देखरेख में कराया जाए। इसके साथ ही भदरी रजवाहा प्रतापगढ़ के कई बार टूटने से जलमग्न होने की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि 02 जून, 2011 को आयोजित किसान पंचायत में माननीया मुख्यमंत्री जी ने एक-एक किसानों से सीधी बातचीत करके उनकी समस्याओं के बारे में फीडबैक लिया थी और सम्बन्धित अधिकारियों को इनके तत्काल समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिये थे। उन्होंने यह भी निर्देश दिये थे कि गेहूं खरीद में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं होनी चाहिए तथा किसानों को उनकी उपज के वाजिब मूल्य का समय से भुगतान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने गन्ना किसानों की समस्याओं तथा गन्ना मूल्य भुगतान के मामलों का निपटारा शीघ्र किये जाने के निर्देश दिये थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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UPA: The most corrupt Government since independence

Posted on 04 June 2011 by admin

Resolution on Corruption of the UPA Government

The Government of UPA II under the Prime Ministership of Dr. Manmohan Singh has completed its second year in office. On the said occasion both the UPA Chairperson Smt. Sonia Gandhi and Dr. Manmohan Singh declared their resolve to take strong action against the menace of corruption. Nothing could be more ironical as this hollow declaration was being made in the backdrop of one of the own erstwhile Ministerial colleague, a senior Congress Member of Parliament and the daughter of the leader of an important constituent of the UPA detained in Tihar Jail on serious charges of massive corruption. It is indeed very important that these arrests were possible only because of a very assertive campaign by the opposition notably the BJP, vigilant media and lastly because of  monitoring by the Courts mainly the Supreme Court. Obviously, Dr. Manmohan Singh or, his Government cannot claim any credit because in stead of taking action he had given certificate of innocence to some of them. It is evident that Dr. Manmohan Singh presides over the most corrupt Government since independence. It lacks transparency, there is collusion at high level, no checks and balances and there is virtual collapse of system where scam after scam and scandal after scandal has become the order of the day. In fact, the Prime Minister maintained a “conspiracy of silence”, “culpability of inaction”, and “guilty of gross indifference” when nations wealth was being plundered by the then Minister right under his nose by a massive abuse of system and yet Dr. Manmohan Singh looked the other way. The silence of all powerful Smt. Sonia Gandhi was too conspicuous.

The series of scams and plunder of nation’s wealth are indeed long. However, some of the more prominent one are being mentioned.

Scam in the issue of License and Allocation of 2G Spectrum
The massive corruption in the allotment of 2G licenses in the Ministry of Telecommunication, Government of India, would remain the most shameful saga in the history of independent India. It is a copybook case of abuse and manipulation of system, misrepresentation and deception whereby selected few were favoured in the grant of license and precious spectrum, obviously, for a huge price. The facts are now too well known as to how when applications for licenses were publicly notified to be invited till 01/10/2007 then an artificial cut-off date of 25/09/2007 was created subsequently and all the applications filed between 25/09/2007 and 01/10/2007 were summarily rejected. The Prime Minister kept quiet when the rules of the game were changed after the game had begun. This was adversely commented by the Court.

The Prime Minister again kept quiet when the then Minister Mr. Raja openly flouted the direction of Dr. Manmohan Singh in his letter dated November 02, 2007 insisting for transparent mechanism for correct price of spectrum as in the year 2007 it was sought to be sold at the 2001 price when the teledensity in the country had increased manifold. The nation is entitled to know as to why as the head of the Government the Prime Minister did not intervene and stopped the entire process when licenses along with spectrum were being sold for a price in blatant violation of all the norms. Is he not clearly guilty of omission for which he has to account for 120 licenses were issued and spectrum allotted in a single day wherein many ineligible companies were also granted licences.

What is shocking is that in spite of a regular CBI case having been registered already, Dr. Manmohan Singh made a public statement on 26 Oct. 2009 that allegation against the then Telecom Minister Mr. A Raja was not correct. What kind of message he was giving to the CBI which directly works under him. When the Supreme Court took over the monitoring of investigation the same former Minister was among first to be arrested.

The Prime Minister has to answer to the nation as to why he allowed a scam of this magnitude to occur in spite of various objections raised by responsible quarters from time to time. On the contrary he continued to give certificate of innocence to the then Minister A. Raja till the middle of 2010. The role of the then Finance Minister Mt. P. Chidambaram also raises a lot of questions. Earlier the department of finance in accordance with cabinet resolution of 2003 was insisting that there must be a transparent mechanism for determination of spectrum pricing including public option. Surprisingly Mr. Chidambram on January 15, 2008 curiously, reportedly  took the position that as the licenses and spectrum have been allotted already on January 10, therefore the matter be treated as closed. Why this gross violation of cabinet norms at great cost to the nation. Obviously Mr. Chidambram has to answer many questions which requires proper investigation about his own role. Smt. Sonia Gandhi has also a lot to answer. As the Chairperson of the UPA and the President of Congress Party having the most decisive influence in the Government, what about her own responsibility when the nation’s wealth was being plundered in a Government of which she is the supreme leader.

When the CAG prepared a Comprehensive Audit Report on the Issue of License and Allocation of 2G Spectrum and calculated that the presumptive loss of price in the allocation of spectrum is almost 1.76 lacs crores then every attempt was made to condemn this finding and the present Telecom Minister Mr. Kapil Sibal publicly claimed in the Parliament that there has been Zero loss. Now, the CBI too during the course of investigation has found the loss running into thousands and thousands of crores and that too on an ad-hoc basis. The extent of loss prima-facie can be judged from the fact that in the 3G spectrum auction the Government against the target of 35,000 Crores earned a huge benefit of approximately 67,000 Crores and another Rs. 38000 crores by auctioning spectrum for broadband wireless access services. In spite of this the Prime Minister did not order any review as far as the 2G scam was concerned.

When Dr. Murali Manohar Joshi as the Chairman of the Public Accounts Committee was examining the matter, then initially Dr. Manmohan Singh himself praised Dr. Joshi as a seasoned Parliamentarian and senior leader, who was doing a good job. He surprisingly offered to present himself before the Committee. However, when the committee led by Dr. Joshi decided to summon the Cabinet Secretary and the Secretary of the Prime Minister for questioning then all Parliamentary and Constitutional norms were abused in a process guided by many Central Ministers in order to frustrate any questioning. It is evident that this Government has a lot to hide. Now Dr. Joshi has submitted his report to the Speaker of the Lok Sabha. The same be presented to the Parliament on the first day of the next session and also be made public.

Now the role of present Textile Minister Mr. Dayanidhi Maran who was the Telecom Minister from May 2004 to May 2007 has also come for serious scrutiny. He insisted and Dr. Manmohan Singh willingly obliged that spectrum pricing shall be taken out of the purview of Group of Ministers on the curious argument that there has been an agreement with the DMK. It had disastrous consequences for the country. Now, there are serious allegations that a particular mobile company was given undue favour after a foreign company purchased 74% equity in the said company, and thereafter allegedly it invested heavily through a subsidiary company in the family run business ventures of Mr. Maran. Apart from glaring conflict of interest and abuse of authority it was evident that Government decisions were up for sale if one is willing to pay the price/bribe. Obviously, his role also needs to be investigated.

We hope that all the ramifications of this scam would be properly examined by the Joint Parliamentary Committee (JPC) and guilty would be punished in the trial. The compulsion of the coalition politics cannot be allowed to degenerate into the coalition of the corrupt. * The BJP demands that the responsibility of such a glaring case of fraud and corruption cannot be blamed only to an ally of the UPA (DMK). There are people sitting at very senior and top positions in the Government who facilitated and colluded in this loot. Obviously, their role also needs to be investigated and the investigative agency must be given full freedom to do so.

Loot of Common Wealth in the organisation of Commonwealth Games
The organisation of any international games is an occasion for achievement, celebration and rejoicing. Though, our sportsman did the nation proud yet in the organisation of Commonwealth Games held in Delhi few months ago the nation had to suffer international shame and global outrage because of monumental corruption. The BJP particularly our President Shri Nitin Gadkari has very commendably exposed the entire loot in the Commonwealth Games with facts and figures in different parts of the country. Today, Mr. Suresh Kalmadi is in jail along with many of his associates of the organising committee. But, obviously, the buck does not stop with him. He is only one of the players and the rot runs deep. * Every file was approved by the Cabinet, Cabinet sub committee, Group of Ministers, Concerned Ministry, Expenditure Finance Committee, PMO and lastly even the Prime Minister.

The Prime Minister appointed a High Level Committee (HLC) headed by Mr. V. K. Shunglu (former CAG) and publicly declared that action would be taken in the light of his report. The fifth report once again confirmed that there were gross acts of omission and commission which facilitated undue gains to the contractors leading to wasteful expenditure and heavy loss to the Government. The report finds glaring irregularities in the award of contracts because there was a conspiracy from the very beginning to cause deliberate delay in the completion of the project in time, escalate the cost, seek more fund and award contracts at a very high cost because of short time span available. The committee has also severely commented against the role of the Government of Delhi headed by Smt. Shiela Dixit who concentrated all financial power in her hand, the various agencies like DDA, CPWD etc. as also the reckless acts of corruption of the organising committee headed by Mr. Kalmadi. Whether it was the commonwealth village, the renovation/construction of stadiums, the award of telecast right and even in the purchase of Air conditioners, chairs for the stadium to toilet papers; there was massive corruption every where.

The report specifically mentions that “the malaise runs deep and cannot be dismissed as a one of aberration for which relatively junior functionaries alone can be held responsible. Officers of the organisation concerned who were involved would have to identified on the basis of further investigation and suitable action be taken”. The committee further notes that “ there was a method in the madness and undue delay on projects was perhaps a deliberate attempt at higher levels to create a sense of panic with a view to giving undue advantage to all concerned”.

The total loss of taxpayers’ money because of massive corruption is about 70,000 crores in the organisation of Commonwealth Games. It is too well known that in the approval and the grant of financial sanctions some officers of the PMO were also involved. In stead of taking any action now the Delhi Chief Minister Mrs. Shiela Dixit has publicly rejected the report and the Prime Minister is again maintaining a conspicuous silence. The BJP demands as recommended by Shunglu Committee that all those sitting at higher levels be identified, their role be investigated and they be suitably punished. * The BJP further demands that the CBI must examine the role of the Delhi Government and also that of the Chief Minister Smt. Sheila Dixit in the Commonwealth Games Scam. Their culpability too is indeed obvious.

Compromising the Institutional Integrity of central Vigilance Commission (CVC)
The UPA Government surpassed all limits of propriety in forcing the  appointment of P J Thomas as the Central Vigilance Commissioner who is the Chairperson of the Commission. He had an admitted tainted record because he was charge sheeted in a corruption case relating to import of palmolein, which was pending for trial before a Court in Kerala. The committee entrusted to make recommendations apart from the Prime Minister and the Home Minister also included the Leader of the Opposition in the Lok Sabha. Smt. Sushma Swaraj specifically objected to the recommendation of Mr. Thomas because he was accused in a corruption case. The Home Minister wrongly represented that he has been cleared. The request of Smt. Swaraj to postpone the consideration even for a day to ascertain the facts or, alternatively to appoint any one else was also turned down. Both the Prime Minister and the Home Minister forced the appointment of Mr. Thomas. It is to be noted that earlier as Telecom Secretary he had protested against the audit by the CAG over the issuance of 2G licenses on the ground that it was a policy decision and not subject to audit. What happened thereafter is too well known.

The CVC is an integrity institution. The Supreme Court while considering the challenge to his appointment found to its surprise that many noting between the year 2000 and 2004 of the DOPT recommending initiation of penalty proceeding against Mr. Thomas was not brought to the notice of the selection commission. The Court held that when institutional integrity in question and that too of a vigilant body like the CVC, the touchstone should be public interest and that the personal integrity has “certainly a co-relationship with institutional integrity”. The Court accordingly held that there was no fairness in the procedure and if one member dissents then the majority overruling it must give reasons for its disagreement.

Dr. Manmohan Singh as the Prime Minister and as the Chairman of the Selection Committee was directly responsible for forcing the appointment of tainted officer as CVC to act as a watchdog against corruption. He is yet to clarify why he sought to overrule a very legitimate objection of Smt. Sushma Swaraj, the Leader of Opposition (LS) against Mr. Thomas.

Adarsh Cooperative Society Scam
This was again a copybook case of corruption. The Adarsh Cooperative Society was given prime land under the control of Defence Ministry ostensibly to build flat for the Kargil heroes and their widows in a prime costly area in Mumbai. However, it was grabbed by politicians and bureaucrats through manipulations and fraud. All the rules were manipulated with malafide intention to change the land use when Ashok Chavan was the Revenue Minister and Vilasrao Deshmukh was the Chief Minister. * Even the role of Mr. Sushil Kumar Shinde, former Chief  Minister and Present Union Minister is equally suspect. The beneficiaries included many relatives of the high profile Congress politicians including former Chief Ministers.

But for the outrage in the entire country over the insult and humiliation to the memory of the Kargil heroes even such a shameful scam would not have been allowed to be investigated fairly. Yet, there are doubts still because as reported in the media the file concerning the possession and control of plot by the Defence Department, surprisingly has become traceless. * Even the file granting environmental clearance has become traceless in the Union Ministry of Environment.

Antrix Corporation Ltd -Devas Multimedia Scam
Another scam was reported in the Department of Space, a department directly under the charge of Prime Minister. In 2005 Antrix corporation Ltd, commercial arm of ISRO launched two satellite for Devas Multimedia and gave large benefit of unrestricted use of 70 MHz of scarce S-band over a twenty years period including mobile telephony for a meagre Rs. 1000 Crores without auction or, determination of reasonable price. This is important because last year the Government earned Rs. 67719 Crores by auctioning 15MHz of similar air waves for 3G mobile services and Rs. 38000 crores by auctioning spectrum for broadband wireless access services. No approval of the Government was taken nor, any monitoring done as to how such an irregular deal was allowed to take place. A decision to terminate the deal was taken only in July 2010 after five years of the deal. Only after a massive campaign in the country in view of the loss to the national exchequer, the deal was finally terminated in February 2011. Much before this termination the officers of the Devas Multimedia were in touch with high Authorities in the Government including in the PMO.

The Department of Space comes directly under the charge of the Prime Minister. When confronted with Gross irregularity his reply was the same as usual, he did not know about it or was not told about it. It seems odd and curious that alibi of lack of knowledge has become the constant theme whenever he is confronted with any irregularity. Dr. Manmohan Singh should we presume that you don’t do any monitoring or, you are in the habit of looking the other way, whenever any wrong or corruption takes place.

Black Money of Indian nationals laying in Foreign Banks

There is a great sense of outrage in the country over the gross indifference of the Government of India in taking earnest and effective steps in recovery of black money of Indian nationals deposited in foreign banks which are fruits of crime and corruption. Earlier, when the issue was highlighted by the BJP Parliamentary Leader Shri L K Advani in the last Lok Sabha election it was it was called an election stunt by Congress. Later on it was announced that meaningful steps would be taken after coming to power. The series of adverse comments which the Supreme Court has occasion to make against the inaction of the Government in a PIL relating to the issue itself exposes the lack of seriousness of the Government. We only hear announcements of constitution of study by a multidisciplinary committee and a five pronged strategy against black money. These are just phoney declaration without any meaningful intent to execute a time bound programme to unearth black money and share with the people of the country the details of accounts holders abroad. The USA in spite of double taxation regime could use the leverage of its economy to force the Swiss Bank Authorities to reveal the names of tax defaulters. India is no more a third world economy but an emerging economic power house having strong voice in G-20 nations. What prevents the Government from using this leverage? * United Nations Convention against corruption which became effective in December 2005 was reportedly ratified by India only last week. This is an important tool for developing comprehensive response to global corruption. But for the strong monitoring by the Supreme Court the Enforcement Directorate and other Agencies would not have been allowed to honestly prosecute the case of Hasan Ali who had many foreign accounts having huge funds flow and who is in tax default to the tune of about 76,000 crores. The reason is obvious, in interrogation of the accused persons, allegations have also been made against some important Congress leaders.

Scam after Scams keep on appearing with alarming regularity in this government.  The large scale irregularity in the export and import of food grain is too well known. How large quantity of food grain rotted in various godowns of the food corporation of India and common people suffered is also known to all. Now, there are reports and allegations of massive scam in the allocation of coal blocks to private parties. This includes the period when Dr. Manmohan Singh himself was the Coal Minister. Precious coal blocks were allotted in favour of private parties having questionable records and plans only on papers.

The above are only some of the glaring illustrations of massive corruption of both the UPA I and UPA II Government. Without doubt the Government headed by Dr. Manmohan Singh has witnessed the largest numbers of corruption related scams since independence. * The country witnessed the most shameful experience of Dr. Manmohan Singh Government surviving the vote of confidence by bribing some Members of Lok Sabha. Till date no meaningful or punitive action has been taken against those who are guilty. The entire UPA Government was at the beck and Call of Ottavio Quatrocchi in bailing him out of the Bofors Scandal only because he had frequent entry into the Gandhi household. How upon patent misrepresentation of a Government Law Officer, his London bank account containing the bribe money of Bofors Scandal, was released is too well known. Both the Prime Minister and Smt. Sonia Gandhi cannot escape their own responsibility in the suffering of India because of these scams. They need to come out clean. The nation is entitled to draw its own conclusions.

The BJP will continue to fight against and expose the series of scam and scandals that has become the defining features of the UPA Government. It has already undertaken all India campaign against the corruption and scams of the UPA in the past. The BJP demands that all the black money of Indians deposited in various foreign banks which are profits of crime and corruption must be brought back to India in a time bound manner by taking adequate, prompt and pro-active steps. It is equally important that all those including high and mighty, who are involved in various scams of the UPA Government must be prosecuted.

It is evident that Dr. Manmohan Singh government has lost all the moral authority to govern the country because the way it has permitted the plunder of National wealth which has brought shame suffering and humiliation to India and Indians. It has lost popular legitimacy and forefited the right to rule the country.

The BJP gives a clarion call to the people of the country to decisively agitate against the cancer of large scale corruption unleashed by the UPA Government which is eating into the vitals of the national polity, in order to ensure that those guilty regardless of their stature an authority are held accountable and are punished.

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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