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Archive | अयोध्या

श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे दुव्र्यवहार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त

Posted on 06 January 2012 by admin

श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने श्रीराम जन्मभूमि पर दर्षन को लेकर स्थानीय सुरक्षा कर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे दुव्र्यवहार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राम भक्तों के दर्षन हेतु अनुकूल वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए। सुरक्षा के नाम पर आतंकियों जैसा व्यवहार आचरण के विपरीत है।

श्री दास श्रीराम जन्मभूमि पर राम लला का दर्षन करने वृन्दावन के श्री काठिया बाबा आश्रम, रमणरेती से पहुंचे आधा दर्जन काठिया संतों को रोके जाने पर नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने बताया संतों की अपनी परम्परा है उसी परम्परा के अन्तर्गत कोई कमर में मूंझ का आंडबन्द लगाता है कोई डोरी पहनता है और कोई काठ का आंडबन्द लगाता है। काठिया संतों द्वारा आंडबन्द काठ का पहना जाता है। रामलला के दर्षन के समय सुरक्षा कर्मियों ने उनके आंडबन्द पहनने मात्र पर दर्षन करवाने से मना कर दिया। उन्होनंे कहा श्रीराम लला का दर्षन करना प्रत्येक संत-धर्माचार्य और राम भक्तों का मौलिक अधिकार है। संत परम्परा पर किसी को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। आये दिन श्रद्धालुओं द्वारा यह षिकायत मिलती आ रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि पर तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा उनसे दुव्र्यवहार किया जाता है।

उन्होंने कहा सुरक्षा के नाम पर आतंकियों जैसा व्यवहार उचित नहीं है। षासन प्रषासन सुरक्षा मानकों में सुधार लाये और ऐसे सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जाये जिन्हें व्यवहारिक ज्ञान हो, क्योंकि अयोध्या एक धार्मिक और पौराणिक नगरी है देष के कोने कोने से विभिन्न पंथ और सम्प्रदायों के आचार्य, महामण्डलेष्वर, श्रीमहंत, महंत तथा विभिन्न भाशा-भाशी क्षेत्रों के राम भक्त अपने आराध्य का दर्षन पूजन करने आते हैं यहाॅं से वह ऐसा संदेष न लेकर जाये जो अयोध्या की गरिमा के विपरीत हो।

काठिया संत केषव दास ने बताया कि हमारे साथ गोपाल दास, ललिता षरण, प्राण वल्लभ, मदनदास, गोपाल दास त्यागी आदि संत थे। वृन्दावन स ेचल कर मकरसंक्रान्ति का स्नान करने गंगासागर जा रहे थे। अयोध्या प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली है इस कारण दर्षनार्थ यहाॅं आये लेकिन सुरक्षा के नाम पर हम सबके साथ किया गया व्यवहार दुखद रहा। आत्म पीडा पहुची है भगवान राम लला सुरक्षा अधिकारियों को सद्बुद्धि दे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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मजहब के आधार पर आरक्षण की घोशणा संविधान प्रदत्त नहीं हैं

Posted on 03 January 2012 by admin

विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ने आज यहाॅं कहा कि मजहब के आधार पर आरक्षण की घोशणा संविधान प्रदत्त नहीं हैं। यह एक और विभाजन का रूप ले सकता है। मुस्लिम समाज को यह समझना होगा कि वह  बिकाऊ न बने।

श्रीराय कारसेवकपुरम् में प्रमुख पदाधिकारियों के बीच अपने विचारों को व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा जिन महापुरूशों ने संविधान की रचना की यहाॅं तक कि प्रथम प्रधानमंत्री ने भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने का कभी समर्थन नहीं किया लेकिन दुर्भाग्य है कि वर्तमान सरकार ने धर्म आधारित आरक्षण की घोशणा कर देष एवं संविधान को तार-तार कर दिया। उन्होनंे कहा इससे समाज में घृणा का भाव पैदा होगा। अल्पसंख्यक में जैन, बौद्ध, पारसी, सिक्ख भी आते हैं परन्तु उनमें वर्गीकरण नहीं हैं कहने का तात्पर्य यह है कि यह आरक्षण केवल मुस्लिम समाज के तुश्टिकरण के लिए है।

उन्होंने कहा मुस्लिम समाज को समझना चाहिए कि उसका राजनीतिक तुश्टिकरण के चलते बाजारूकरण कर दिया गया है वह बाजारू न बने इसपर मुस्लिम समाज को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कानून साम्पदायिकता को रोकने वाला नहीं बल्कि उन तत्वों को बढावा देने वाला होगा जो राश्ट्र में हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त रहते है। उन्होंने अयोध्या में विगत दिनों श्रीराम जन्मभूमि परिसर में तुलसी पौधे उखाडे जाने के प्रकरण पर भी ़ क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि उसे झाड-झंखाड नहीं समझना चाहिए प्रभु श्रीराम और हिन्दू समाज के अन्य देवी देवताओं के भोग में प्रसाद में प्रयुक्त होने वाली तुलसी हमारे लिए देवतुल्य है। श्री राय ने कहा झाड-झंखाड कह कर उखडवाने की सलाह देने किसी सिरफिरे के दिमाग की ही उपज हो सकती है। षासन-प्रषासन को सावधानी बरतनी चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए।  इस अवसर पर विहिप के केन्द्रीय मंत्री पुरूशोत्तम नारायण सिंह, कारसेवकपुरम् प्रभारी प्रकाष अवस्थी, सुरेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र कुमार  आदि उपस्थित रहे।

इससे पूर्व विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय महामंत्री का अयोध्या रेलवे स्टेषन पर वसिश्ठ पीठ के महंथ डा.राघवेष दास वेदान्ती के नेतृत्व में महामंत्री बनने के उपरान्त पहली बार अयोध्या आने पर स्वागत किया। इस अवसर पर प्रकाष अवस्थी, राम लाल के सखा त्रिलोकी नाथ पांडेय, षरद षर्मा, अषोक पाठक, आचार्य इन्द्रदेव, दुर्गा प्रसाद, राम षंकर, राधे ष्याम गुप्त, पवन तिवारी आदि उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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हिन्दू संगठनों, संत-धर्माचार्यो तथा उनके उत्सव और कार्यक्रमों को प्रतिबन्धित करने का पूरा मन बना चुकी है

Posted on 18 December 2011 by admin

श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिश्ठ सदस्य व पूर्व सांसद डा0राम विलास दास वेदान्ती ने कहा कि कांग्रेस सरकार खिसक गए मुस्लिम समाज का वोट प्राप्त करने के लिए हिन्दू संगठनों, संत-धर्माचार्यो तथा उनके उत्सव और कार्यक्रमों को प्रतिबन्धित करने का पूरा मन बना चुकी है। जिसका ताजा उदाहरण बाबा रामदेव के रामलीला मैदान प्रकरण  पर आयी रिपोर्ट से स्पश्ट हो चुका है। कांग्रेस देष को एक बार 1947 के विभाजन की स्थिति में लाकर खंडित करने का शडयंत्र कर रही है। साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम 2011 इसी शडयंत्र का एक हिस्सा है। अभी तक देष के प्रधानमंत्री ने इस पर अपनी तरफ से देष को आष्वस्त नहीं किया कि वह इस अधिनियम के बारे क्या करने वाले है। देष का हिन्दू समाज आषंकित है कि इस कानून के बनने से हिन्दू अपने ही देष में अपराधी बन जायेगा। 2012 के जनवरी-फरवरी माह के बीच इस विशय को लेकर छिड सकता है राश्ट्रव्यापी आन्दोलन। इससे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चाहिए कि वह प्रस्तावित अधिनियम को वापस लेते हुए देष से माफी मांग लें।

श्री वेदान्ती दिल्ली में साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम 2011 के विरोध में संत-धर्माचार्यो द्वारा 11, 12 दिसम्बर को आयोजित हो चुके संत समागम में लिए गए निर्णय के उपरान्त प्रेस को जारी अपने बयान में चर्चा करते हुए कहा साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम 2011 सरकार इसी सत्र में लाना चाहती थी लेकिन भ्रश्टाचार और मंहगाई के कारण संसद के पटल पर यह नहीं आ सका लेकिन संसय के बादल अभी छटे नहीं है।  सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गठित राश्ट्रीय सलाहकार परिशद (एन.ए.सी.) की मंषा अभी साफ नहीं हुई है।  उन्होंने कहा इस कानून से हिन्दू समाज की धार्मिक परम्पराआंे को जहाॅं हानि पहूंचाने का शडयंत्र हो रहा है वहीं राश्ट्र विरोधी तत्वों का विरोध करने वाले संगठनों को प्रतिबन्धित करने का कुचक्र रचा जा रहा है। अल्पसंख्यकों केनाम पर हिन्दू मुस्लिम और दलित इनको तीन भागों में बाॅंट कर फिर मुस्लिमों को दलितों के साथ मिलाकर देष को तोडने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा ऐसा कानून बनाने वाली नेषनल एडवाइजरी कमेठी को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए और देष के प्रधानमंत्री को इस विशय में तत्काल माफी मांगना चाहिए। अन्यथा संत-धर्माचार्यो के नेतृत्व में देष का हिन्दू वर्श 2012 के जनवरी-फरवरी, माह के बीच राश्ट्रव्यापी आन्दोलन छेडेंगे। इससे पूर्व प्रयाग में माघ मेले के दौरान संत-धर्माचार्यो की उपस्थिति में एक बार पुनः मंथन होगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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गो-सुरक्षा एवं संवर्धन विशय पर एक गोश्ठी

Posted on 14 December 2011 by admin

राश्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिश्ठ प्रचारक व अखिल भारतीय गो-सेवा प्रमुख षंकर लाल जी  ने आज यहाॅं कहा प्रत्येक वर्श 2.50 करोड़ गोवंष की निर्मम हत्या की जा रही है जिसके कारण जीव, जंगल, जमीन और पर्यावरण को हानि पहुंच रही है। इसको बचाने के लिए अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गए तो हमारे अस्तित्व पर ही खतरा उत्पन्न हो जायेगा।
श्री लाल कारसेवकपुरम् में गो-सुरक्षा एवं संवर्धन विशय पर एक गोश्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।  गोश्ठी का संचालन राश्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह प्रान्त प्रचारक मुकेष जी ने किया। इस अवसर पर श्री षंकर लाल ने कहा 60 वर्श पूर्व इस देष में किसान आत्म हत्या नहीं करते थे क्योंकि जल, जमीन और जंगल उनके आय के साधन हुआ करते थे। कृशि, पषु एवं मनुश्य एक दूसरे के पूरक थे। दुर्भाग्य है कि यहाॅं कि सरकारी नीतियों के कारण यह चक्र टूट गया जिसके कारण आज किसान आत्म करने के लिए मजबूर है। उन्होंने कहा देष को संबृद्धषाली बनाने के लिए गौआधारित कृशि की पुनः आवष्यकता है। अच्छी देषी नस्ल की गोवंष तैयार करना उसके द्वारा गौ-चिकित्सा केन्द्र, गौ-आधारित कृशि, गौ-आधारित ऊर्जा का निर्माण, गोचर भूमि का संरक्षण एवं गो-संवर्धन के द्वारा हम यह कार्य कर सकते है।
उन्होंने बताया देष में विष्व मंगल गो-ग्राम यात्रा गत वर्श निकाली गयी यात्रा के बाद 500 नई गोषालाओं का निर्माण हुआ एवं लाखों लोग गोपालक बनकर गाय का पालन कर रहे है।  उन्होंने कहा प्रत्येक प्रान्त में प्रषिक्षण केन्द्र तथा गो-अनुसंधान की स्थापना की जा रही है। आज गोपालक परिवार एक गोवंष से 100/-प्रतिदिन घर बैठे आमदनी कर रहा है।  उन्होंने कहा जर्सी नस्ल के दूधारू पषु से प्राप्त दूध को पीने वाले मनुश्य अप्रत्यक्ष रूप से जहर का सेवन कर रहे है। उनका परिवार संस्कारवान कभी नहीं हो सकता है। रसायनिक खादों से पौधे जहरीले होते जा रहे हैं जिसके कारण इन पौधों का सेवन करने वाले जीव और उन जीवों के मांस को खाने वाले तक इस जहर के षिकार हो रहे है। गिद्धों की विलुप्तता का कारण भी यही है। पर्यावरण की सुरक्षा भी गौ-वंष से जुडा विशय है। उन्होंने बताया कि देषी गाय के 720 लीटर दूध से एक तोला स्वर्ण भस्म प्राप्त होता है। उन्होंने बताया ऊर्जा के क्षेत्र में भी गोवंष आधारित जनरेटर, ट्रैक्टर, टयूबबेल आदि के संचालन को विकसित किया जा चुका है जो देष के राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेष, महाराश्ट्र जैसे राज्यों में सफलता पूर्वक काम रहे है।
उन्होंने कहा गाय को मांॅ मानकर हम इसकी सुरक्षा एवं संवर्धन के लिए अबिलम्ब अगर संकल्पित नहीं हुए तो गाय चित्रों पर ही रह जायेगी आने वाली पीढियाॅं हमको कोसेंगी।
क्षेत्रीय गौरक्षा प्रमुख-विहिप श्री वसुदेव पटेल ने गोअनुसंधान केन्द्रों की स्थापना पर बल देते हुए बताया कि प्रदेष में अनेक स्थानों गोवंष से प्राप्त गोमूत्र एवं गोबर के द्वारा पंचगव्य औशधियाॅं तथा दैनिक उपयोगी एवं कीटनियंत्रक आदि बनाये जा रहे है।
इस अवसर पर डा.अनिल मिश्र प्रान्त कार्यवाह, कारसेवकपुरम् प्रभारी प्रकाष अवस्थी, डा.लाल बहादुर सिंह, विभाग प्रचारक राम चन्द्र, सर्वेष जी, श्री राम गोषाला के हरी राम गुप्त, अषोक पाठक, सेवा प्रमुख वीरेन्द्र कुमार, रवि कुमार, कमल बाबा, सुभाश पांडेय आदि अनेक गोसेवक एवं गोपालक उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में सम्पूर्ण राजनीति को हिला कर रख दिया

Posted on 20 October 2011 by admin

untitled-12विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय अध्यक्ष अषोक सिंहल ने कहा श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में सम्पूर्ण राजनीति को हिला कर रख दिया। मंदिर निर्माण में एक मात्र बाधक सेक्यूलरवादी हैं।  संसद में राम जन्मभूमि निर्माण के निमित्त अगर प्रस्ताव लाया जाता है तो तमाम राजनीतिक दलों में ऐसे सांसद हैं जो इसका समर्थन करेंगे। लेकिन सोनिया गांधी से ऐसा सम्भव नहीं है, क्योंकि वह रोम भक्त हैं राम भक्त नहीं।
श्री सिंहल अयोध्या के रामघाट स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्यषाला का निरीक्षण करने के उपरान्त समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा विगत 4 वर्शो से मंदिर निर्माण का कार्य रूका हुआ था। धन की समस्या सामने थी। अनेक लोग मंदिर निर्माण के लिए व्यक्तिगत रूप से सहयोग के लिए तत्पर थे लेकिन मंदिर निर्माण सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सहयोग से होना है। उन्होंने कहा देष के प्रमुख संत-धर्माचार्यो से मिलकर यह निवेदन अवष्य किया जायेगा कि वह इस पुनीत कार्य में भी अपना सहयोग प्रदान करें।
उन्होंने एक प्रष्न के उत्तर में कहा कि मंदिर निर्माण के लिए विदेषो से दान तथा निर्माण के लिए सोने-चाॅंदी के ईंट प्राप्त किए यह ऐसे लोगों के दिमाग की उपज है जो आध्यात्मिकता एवं राश्ट्रीयता के विरोधी है। उन्होंने एक अन्य प्रष्न के उत्तर में कहा 30 सितम्बर को न्यायिक फैसला आने के बाद हिन्दू समाज का विष्वास और भी दृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा राम ने सदैव जोडने का काम किया लेकिन वर्तमान के तथाकथित सेक्यूलरवादी समाज को तोडने का काम कर रहे है। श्रीराम जन्मभूमि के आन्दोलन ने भारत की राजनीति को हिला कर रख दिया। संसद में अगर प्रस्ताव आता है तो मुस्लिम सांसद भी मंदिर निर्माण का समर्थन करेंगे ऐसा मुझे विष्वास है लडाई तो सेक्यूलरवादियों के द्वारा खडी की जा रही है। भारत का प्रधानमंत्री इस देष पर मुस्लिमों का प्रथम अधिकार बता रहे हैं। यह सब वोट बैंक की कुत्सित राजनीतिक का हिस्सा है इससे किसी का भला तो नहीं होगा इस देष का नुकसान अवष्य हो जायेगा। श्री सिंहल ने एक अन्य प्रष्न के उत्तर में कहा सोनिया गांधी रोम की भक्त हैं वह राम की भक्त नहीं इसलिए मंदिर निर्माण के कार्यो में वह रोडा डाल रही है।
उन्होंने कहा अब तक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के वर्तमान कार्यो पर लगभग 20 करोड रूपये का व्यय हो चुका है। षीघ्र ही श्रीराम जन्मभूमि न्यास के सदस्यों के साथ बैठक बुलाई जायेगी और आगे की कार्ययोजना को मूर्त रूप प्रदान किया जायेगा। श्री सिंहल ने राम सेवकपुरम् में स्थित दूसरी कार्यषाला का भी अवलोकन कर उसे षीघ्र चालू करने का निर्देष दिया। इस अवसर पर उनके साथ श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिश्ठ सदस्य व पूर्व सांसद डा.राम बिलास दास वेदान्ती, दिगम्बर अखाडा के महंत और मंदिर आन्दोलन के षिखर पुरूश महंत रामचन्द्र दास परमहंस के षिश्य सुरेष दास, विहिप के संयुक्त महामंत्री चम्पत राय उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मंत्र सिद्धी से कठिन से कठिन कार्य सम्पन्न हो जाते हैं

Posted on 19 October 2011 by admin

untitled-26 दिसम्बर,1992 को श्रीराम जन्मभूमि पर खडा कलंकित ढांचा 5 घंटे में मंत्र सिद्धी के कारण ही समाप्त हुआ। कलंक से मुक्ति और मंदिर के मार्ग का प्रषस्त होने का कार्य अनुश्ठान से ही संभव होगा। यह विचार विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय अध्यक्ष श्री अषोक सिंहल ने आन्ध्र प्रदेष से आकर अयोध्या के कारसेवकपुरम में अखण्ड विश्णुसहस्रनामजप के साधको के बीच व्यक्त किया।
17 अक्टूबर से श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के निमित्त आन्ध्र प्रदेष से आये अनुश्ठान कर्ताओं ने प्रातः 4 बजे से विश्णुसहस्रनाम का अखण्ड पाठ प्रारम्भ कर दिया है। यह पाठ 24 दिसम्बर प्रातः पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न होगा।  पाठ के दूसरे दिन आयोजित साधक सम्मेलन में श्री सिंहल ने कहा सर्वदेव अनुश्ठान से लोक मंगल कारी वातावरण का निर्माण हुआ है। देष के विभिन्न भागो से आये अनुश्ठानकर्ताओं की तपस्या का परिणाम रहा कि श्री हनुमान जी का 6 दिसम्बर को प्रकटीकरण हुआ और कलंकित ढांचा अप्रत्याक्षित रूप से समाप्त हो गया।  उन्होंने कहा ईसाई और इस्लाम ईष्वर को सातवें आसमान पर मानते हैं जबकि हिन्दू समाज ईष्वर का कण-कण में सर्वत्र विद्यमान मानकर पूजा करता है। हिन्दू समाज में धारणा है कि हाथ की छोटी ऊँगली को भी पकड कर हम ब्रह्म को पकड लेतेे हैं अर्थात् वह भगवान को प्राप्त कर लेता है। जबकि अन्य धर्मावलम्बी इसके विपरीत सोचते हैं।  उन्होनंे कहा हिन्दू समाज में सम्प्रदाय अनेक हैं लेकिन उसमें किसी भी प्रकार अन्य धर्मा की तरह विवाद नहीं है।
श्री सिंहल ने कहा श्रीराम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला का भव्य मंदिर निर्माण करने के लिए एक धर्मयोद्धा की तरह समाज को खडा होना होगा। न्यायालय में यह विशय चल रहा है जो एक लम्बी प्रक्रिया है भारत के समस्त राजनीति दल हिन्दू भावनाओं का आदर करते हुए इसके समाधान के लिए बडी सोच अपनायें। उन्होंने कहा श्रीराम जन्मभूमि के निर्माण से राश्ट्रीय स्वाभिमान का पुनर्जागरण होगा।  स्वतंत्रता प्राप्ति के पष्चात् गुलामी के प्रतीक चिन्हों का समाप्त करने का कार्य नया नहीं है। गुलामी का चिन्ह हटा कर सोमनाथ के मंदिर की पुनप्र्रतिश्ठा की गयी। जिसमें प्रथम राश्ट्रपति बाबू राजन्दे प्रसाद स्वयं उपस्थित रहे थे। इसी प्रकार अंग्रेजों के द्वारा खडे किए गए गुलामी के चिन्हों को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समाप्त किया गया। तो श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए ऐसी सोच क्यों नहीं अपनायी जा रही। उन्हांेने कहा जिस ईष्वरीय कार्य को लेकर विष्व हिन्दू परिशद चला है उसको पूर्णता अवष्य प्राप्त होगी।
इस दौरान आन्ध्र प्रदेष से आये स्वामी सच्चिदानन्द तीर्थ ने कहा प्रभू श्रीराम जन-जन के हृदय में विराजमान है। भगवान विश्णु महामानव के रूप में अवतरित होकर अयोध्या जैसी पूण्य भूमि को अपनी लीला एवं कर्मभूमि बनाया उनके मंदिर निर्माण के लिए राजनैतिक दुराग्रह से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए। स्वामी षंकरानन्द सरस्वती ने कहा अनुश्ठान एक ऐसा मार्ग है जो परमात्मा को भी दुर्गम कार्यो को पूर्ण करने के लिए विवष करा देता है। मंदिर का निर्माण अवष्य होगा और संकल्प पूर्ति का मार्ग प्रभु ही प्रषस्त करेंगे।
इस अवसर पर अन्तर्राश्ट्रीय संगठन महामंत्री दिनेष चन्द्र, संयुक्त महामंत्री चम्पत राय, केन्द्रीय मंत्री पुरूशोत्तम सिंह, राजेन्द्र सिंह पंकज, कारसेवकपुरम् प्रभारी प्रकाष अवस्थी, त्रिलोकीनाथ पांडेय, देवेन्द्र सिंह, प्रो.कृश्णमूर्ति सहित लंगभग सवा सौ साधक उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्यषाला को पुनः विधिवत् वैदिक रीति से हवन-पूजन कर प्रारम्भ किया

Posted on 02 October 2011 by admin

श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर पत्थर तरासी के लिए 1990 में स्थापित की गयी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्यषाला को पुनः विधिवत् वैदिक रीति से हवन-पूजन कर प्रारम्भ किया गया।  इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महन्त नृत्यगोपाल दास तथा विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय संगठन महामंत्री दिनेष चन्द्र ने षिलाओं का पूजन कर उन्हें तरासी के लिए कारीगरों के हाथों में सौंपा।

01-4सितम्बर 1990 में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर श्रीराम जन्मभूमि न्यास द्वारा अयोध्या के रामघाट में न्यास कार्यषाला की स्थापना पूर्व न्यास अध्यक्ष साकेतवासी परमहंस रामचन्द्र दास जी महाराज तथा विष्व हिन्दू परिशद के  तत्कालीन महामंत्री मान्यवर अषोक सिंहल के मार्गदर्षन में प्रारम्भ किया गया। कार्यषाला 2007 तक अनवरत पाशाण तरासी के कार्य में तत्पर रही। दिसम्बर 2007 में अपरिहार्य के कारण बन्द करनी पडी थी। 30 सितम्बर,2010 को उच्चन्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा आये निर्णय के बाद मंदिर आन्दोलन समर्थकों में उत्साह बढ़ा और यह संत-धर्माचार्यो ने महसूस किया कि षेश पत्थरों की तरासी का कार्य पुनः प्रारम्भ होना चाहिए।  इस सन्दर्भ में दिल्ली तथा अयोध्या में संत-धर्माचार्यो व श्रीराम जन्मभूमि न्यास के पदाधिकारियों ने अयोध्या के वैदिक विद्वान पं0कमला कान्त षास्त्री से मुहूर्त निकलवाया जिसकी तिथि षारदीय नवरात्री के 1 अक्टूबर तय की गयी।  जिसका विधिवत् हवन पूजन के साथ कार्य प्रारम्भ हुआ।

01-2 इस अवसर पर पत्रकारों के बीच श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष व  मणिराम दास छावनी के महन्त नृत्यगोपाल दास महाराज ने कहा प्रभु श्रीराम साक्षात् धर्म के अवतार हैं। उन्होंने उत्तर से दक्षिण व पूरब से पष्चिम को जोडकर समरसता का भाव प्रकट किया। जिसके कारण सम्पूर्ण समाज एक सूत्र में बंधा। 1984 में प्रारम्भ हुआ श्रीराम जन्मभूमि का आन्दोलन भी विष्व के विभिन्न भाशा प्रान्त और सम्प्रदाय में विभाजित हिन्दुओं को एक मंच पर लाकर धर्म एवं सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के प्रति संकल्पबद्ध किया। उन्होंने कहा राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण में रूकावट पैदा की जा रही है। लेकिन हिन्दू समाज का विष्वास है कि हनुमान जी की कृपा से मार्ग में आने वाली बाधायें अवष्य दूर होंगी। उन्होंने कहा उच्च न्यायालय का फैसला आ चुका है सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक प्रक्रियायें चल रही हैं। लेकिन सरकार की अदूरदर्षिता के कारण विलम्ब होता जा रहा है जो राश्ट्र एवं धर्म के हित में नहीं है इसलिए हम सबकी मांग है कि संसद में प्रस्ताव पारित कर मंदिर निर्माण का मार्ग सोमनाथ की तर्ज पर पूरा किया जाये। उन्होनंे एक प्रष्न के उत्तर में कहा मंदिर निर्माण का 65 प्रतिषत कार्य पूरा हो चुका है षेश पर आज से कार्य प्रारम्भ किया जा रहा है।
विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय संगठन महामंत्री दिनेष चन्द्र ने कहा संत धर्माचार्यो के मार्गदर्षन में श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का मार्ग अवष्य होगा। उन्होंने कहा तथाकथित सेक्यूलरवादी षक्तियाॅं मार्ग में चाहे जिस प्रकार का अवरोध उत्पन्न करें राश्ट्र के स्वाभिमान और हिन्दू समाज के सम्मान से जुडा हुआ यह विशय अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद ही रूकेगा। संतों का मंत्र एवं विहिप का तंत्र सदैव समाज के साथ संकल्पबद्ध होकर इस ईष्वरीय कार्य को पूर्ण करने के लिए अपने जीवन का हर क्षण समर्पित कर चुका है। वसिश्ठ पीठाधीष्वर पूर्व सांसद डा.राम बिलास दास वेदान्ती ने कहा श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन पर हनुमान जी की सदैव कृपा रही है। श्रीराम जन्मभूमि न्यास कार्यषाला का पुनः प्रारम्भ होना उन्हीं की कृपा का प्रसाद है।

01-5 इससे पूर्व कार्यषाला में याज्ञिक विधिविधान से पं.कमलाकान्त षास्त्री के मार्गदर्षन में हवन-पूजन हुआ तत्पष्चात् षिलाओं पर नक्काषी का कार्य प्रारम्भ किया गया।

इस अवसर पर गोलाघाट के महन्त सियाकिषोरी षरण, बडा भक्तमाल के महन्त कौषल किषोर दास, संत गोपाल दास, सनकादिक आश्रम के महन्त कन्हैया दास, महामंण्डलेष्वर सीताराम त्यागी, महामण्डलेष्वर प्रेम षंकर दास, महन्त कृश्णाचार्य, महन्त रामावतार दास, हनुमान गढी के महन्त राम कुमार दास, महन्त मनमोहन दास, महन्त विसम्भर दास, महन्त बृज मोहन दास, महन्त कमलादास, राम कृपाल दास, ष्याम सुन्दर दास, विहिप के संयुक्त महामंत्री चम्पत राय, केन्द्रीय मंत्री पुरूशोत्तम सिंह, कारसेवकपुरम् प्रभारी प्रकाष अवस्थी, रामसखा त्रिलोकी नाथ पांडेय, वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य इन्द्रदेव मिश्र, आचार्य दुर्गा प्रसाद एवं नारद, स्थानीय विधायक लल्लू सिंह, कार्यषाला निरीक्षक अन्नूभाई सोमपुरा, सहायक गिरीषभाई सोमपुरा, धर्म प्रसार प्रमुख सुरन्दे सिंह, कमल बाबा सहित अनेक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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सामूहिक हनुमान चालिसा का पाठ

Posted on 19 September 2011 by admin

श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण में आने वाली न्यायिक बाधाओं को दूर करने के लिए  साधू-संत व सद्ग्रहस्थ रामभक्त 30 सितम्बर को पूरे देष भर में एक साथ हनुमत षक्ति का आवाहन करते हुए सामूहिक हनुमान चालिसा का पाठ करंेगे। हनुमान चालिसा का पाठ अपने-अपने मठ-मंदिरों तथा ग्राम और मुहल्लों के किसी एक सार्वजनिक स्थल पर होगा।
श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष व श्रीमणिरामदास छावनी के महन्थ नृत्यगोपाल दास जी महाराज ने आज सम्पूर्ण भारत के समस्त संत-धर्माचार्यो तथा सद्ग्रहस्थों से अपील की है कि विगत वर्श 2010 के सितम्बर माह में उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने अयोध्या में विराजमान भगवान रामलला की जन्म भूमि को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया था। इसका एक वर्श पूर्ण हो रहा है। फैसले से पूर्व पूरे देष भर में हनुमत षक्ति जागरण अनुश्ठान समिति के माध्यम से हनुमान जी का आवाहन किया गया था जिसका परिणाम समाज के सामने रहा। उन्होंने कहा प्रत्येक अच्छे कार्य के मार्ग में बाधायें अवष्य आ जाती है। लेकिन हिन्दू समाज को विचलित होने आवष्यकता नहीं है क्योंकि उसका मार्गदर्षन और उसके कश्टों का निवारण साक्षात् हनुमान जी स्वयं कर रहे है।
उन्होंने कहा 30 सितम्बर के दिन प्रातः 10 बजे लोग सामूहिक रूप से एक दिवसीय हनुमान चालीसा का 11 पारायण अवष्य करें। जिससे प्राप्त होने वाली आध्यत्मिक ऊर्जा से सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित श्रीराम जन्मभूमि के इस मुकदमें का षीघ्र निपटारा हो।
उन्होंने कहा अयोध्या में विराजमान प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण अवष्य होगा। देष की सामूहिक दृढ इच्छा षक्ति के आगे राजनीतिक षक्तियों को भी झुकना पडेगा। उन्होनंे कहा यह विशय राश्ट्र के उत्थान और धार्मिक जीवन मूल्यों की रक्षा का है। श्रीराम साक्षात् धर्म, संस्कृति एवं आदर्ष के प्रतीक हैं। प्रभु श्रीराम के अनन्य सेवक पवन पुत्र श्रीहनुमान जी का पूर्ण सहयोग इस कार्य को अवष्य प्राप्त होगा।
श्री दास ने विष्व हिन्दू परिशद के षीर्श पदाधिकारियों, देष के प्रमुख संत-धर्माचार्यो से इस संबंध में दूरभाश पर वार्ता कर उन्हें अपने स्तर से इस कार्यक्रम को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए मंत्रणा कर 30 सितम्बर को सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम की घोशणा की।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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देष के संत धर्माचार्य अब आर-पार की लडाई लडेंगे

Posted on 07 August 2011 by admin

केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम 2011 को समाप्त कराने के लिए देष के संत धर्माचार्य अब आर-पार की लडाई लडेंगे। संत-धर्माचार्यो की अयोध्या के कारसेवकपुरम् में आवष्यक बैठक के तहत इस अधिनियम को काला कानून बताते हुए राश्ट्र जागरण करने का आवाहन किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष मंहत नृत्यगोपाल दास जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संतों ने कहा केन्द्र सरकार हिन्दू समाज का दमन करने के लिए अन्तर्राश्ट्रीय शडयंत्रकारी षक्तियों से मिल गयी है।
कारसेवकपुरम् के भारत कल्याण प्रतिश्ठान में प्रातः 10 बजे से आयोजित एक दिवसीय बैठक को विष्व हिन्दू परिशद के अन्तर्राश्ट्रीय अध्यक्ष श्री अषोक सिंहल ने संबोधित करते हुए कहा हिन्दू समाज का अस्तित्व इस पृथ्वी पर रहेगा यह विचारणीय प्रष्न है? जिस प्रकार का साम्प्रदायिक एवं लक्षित अधिनियम को पास कराने के लिए केन्द्र सरकार उतावली है उससे प्रतीत होता है कि इस देष पर ईसाई साम्राज्यवादी षक्तियों का प्रभाव जड जमा चुका है। उन्होनंे कहा षीतकालीन संसद सत्र में इसे पास कराने का भरपूर प्रयास होगा जिसे सफ    ल नहीं होने दिया जाये। संतों और धर्माचार्यो का अपमान और भ्रश्टाचार मंे आकंठ ठूबी कांग्रेस की यह सरकार हिन्दू समाज को इस पृथ्वी से समाप्त करने का लगातार कुचक्र रच रही है। गंगा, गऊ और गायत्री और भारतीय संस्कृति इसके रहते हुए सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए इसे बदलने की आवष्यकता है। और यह तभी संभव होगा जब देष के 100 करोड हिन्दूओं को जागृत कर उनके स्वाभिमान को झंकृत किया जायेगा। जब-जब देष की संत षक्ति ने कोई निर्णय लिया है तो उसकी सफलता में साक्षात् ईष्वरीय षक्ति ने सहयोग किया। इस प्रकार के काले कानून का हश्र भ्रूण हत्या के समान होगा।
पूर्व सांसद व श्रीरामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डा.रामबिलासदास वेदान्ती ने कहा केन्द्र सरकार हिन्दू विरोध की पराकाश्ठा पार कर चुकी है। साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा को लागू कराने के प्रयास में स्वयं सोनिया गांधी का हाथ है वह अपने इटली के एजेन्डे को इस देष में लागू कराने में तत्पर है। जिस राश्ट्रीय सलाहकार परिशद की वह अध्यक्ष है उसमें अधिकतर सदस्य हिन्दुओं का विरोध करने वाले हैं। उनके द्वारा प्रस्तावित यह कानून कैसे सर्वमान्य हो सकता है। इससे पूर्व विष्व हिन्दू परिशद के संयुक्त महामंत्री चम्पतराय ने श्रीराम जन्मभूमि की अदालती कार्यवाई की अद्यतन स्थिति पर प्रकाष डालते हुए साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम के प्रत्येक बिन्दुओं पर विस्तार पूर्वक संतों के बीच में रखा।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे महंत नृत्यगोपालदास महाराज ने कहा राश्ट्रीय सलाहकार परिशद का विरोध पूरे देष में किया जाना चाहिए। साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम राश्ट्र हित में नहीं अन्तर्राश्ट्रीय साजिषों के तहत ईसाई व मुस्लिम हित इस देष में थोपने का प्रयास है। उन्होंने कहा अब अल्पसंख्यक षब्द की व्याख्या होनी चाहिए। कौन हैं अल्पसंख्यक? और उनकी जनसंख्या कितनी है? क्या देष के विभिन्न भागों में जहाॅं पर हिन्दूओं की सुख्या 20 प्रतिषत है उनको अल्पसंख्यक माना गया फिर दूसरे संप्रदाय के 25 करोड लोगों की आबादी को कैसे अल्पसंख्यक माना जाये? साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम को कानूनी जामा पहनाने से पूर्व राश्ट्रव्यापी जन जागरण किया जायेगा। बैठक को सद्गुरू सदन गोलाघाट के महन्त सिया किषोरी षरण, सनकादिक आश्रम के महंत कन्हैया दास, सियाराम किला के महंत करूणानिधानषरण, रंग मंहल के महंत रामषरणदास, महामंडलेष्वर प्रेम षंकर दास, महामंडलेष्वर सीताराम त्यागी, रामायणी रामषरणदास, महंत राम अवतार दास, महंत रामकृश्णदास, नृसिंहदास, रामायणी रामषंकरदास, महंत राजीव लोचनषरण, महंत बृजमोहन दास आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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प्रेस वार्ता श्री अषोक सिंहल - अयोध्या

Posted on 07 August 2011 by admin

विहिप अध्यक्ष श्री सिंहल ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा देष में विदेषों से 42 हजार करोड रूपया आया जिसका दुरूपयोग धर्मान्तरण के कार्याे में किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी अपने धर्मगुरू पोप के एजेन्डे को लेकर देष को खंडित करने का प्रयास कर रही हैं। उनके इस अभियान को संत-धर्माचार्य और उनके मार्गदर्षन में चलने वाले विहिप कार्यकर्ता सफल नहीं होने देंगे।
श्री सिंहल कारसेवकपुरम् में आयोजित साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम में आये हुए संतों की बैठक के उपरान्त प्रेस को सम्बोधित करते हुए एक प्रष्न के उत्तर में कहा देष में देवत्व सम्पत्तियों का सद्पयोग होना चाहिए देवता की सम्पत्ति पर मंदिर का ही अधिकार है। श्री सिंहल ने कहा संत-धर्माचार्य अगर निर्णय लेंगे तो देवता की सम्पत्ति को बचाने के लिए भी जनान्दोलन खडा किया जायेगा।  उन्होने देष में हो रहे बडे-2 घोटालों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा प्रधानमंत्री भी इसके लिए सीधे जिम्मेदार हैं।  उन्होंनें आषंका व्यक्त करते हुए कहा देष में इमरजेन्सी की स्थिति पैदा की जा रही है। साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा अधिनियम के द्वारा लाखों हिन्दूओं को अभियुक्त बनाने का शडयंत्र किया जा रहा है।
श्री सिंहल ने अन्ना हजारे के जन लोक पाल बिल का समर्थन तो किया लेकिन यह भी कहा कि श्री हजारे को सबको साथ में लेकर चलना चाहिए ताकि सरकार बाबा रामदेव की भाॅंति उनके आन्दोलन को कुचल न सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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