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आचार संहिता अनुपालन के लिए वीडियो अवलोकन टीम का गठन

Posted on 12 March 2014 by admin

जिला निर्वाचन अधिकारीजिला मजिस्ट्रेट मनीषा त्रिघाटिया ने लोक सभा सामान्य निर्वाचन 2014 में आदर्श आचार संहिता का पूर्णत: अनुपालन सुनिशिचत कराने हेतु वीडियो निगरानी टीमों से प्राप्त सी.डी. तथा क्यू शीट के अवलोकन व परीक्षण हेतु वीडियो अवलोकन टीम का गठन किया है । इस टीम में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र वार तीन-तीन अधिकारियोंकर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। आगरा लोक सभा क्षेत्र के लिए चारों विधान सभाओं तथा फतेहपुर सीकरी लोक सभा क्षेत्र के लिए पांचो विधान सभाओं में अधिकारियोंकर्मचारियों की नियुकित की गर्इ है।
उन्होंने बताया कि गठित टीमें प्रतिदिन प्राप्त सीडी तथा क्यू शीट को देखेगी। क्यू शीट में अंकित विवरण का मिलान सीडी में वीडियोग्राफी किये गये विवरण से इस टीम द्वारा किया जायेगा तथा सीडी अवलोकन के पश्चात अपनी रिपोर्ट लेखा टीम तथा सहा0 व्यय प्रेक्षक को प्रस्तुत करेगी उक्त वीडियों अवलोकन टीम तत्काल प्रभाव से अपना कार्य प्रारम्भ करेगी।
वीडियो अवलोकन टीम मीडिया के चैनलों पर चुनाव प्रचार संबंधी दिखाये गये विज्ञापनोंंखवरों का नियमित अवलोकन किया जायेगा और इन चैनलों पर हुए चुनाव प्रचार संबंधी खवरों के सम्बन्ध में पूर्ण विवरण नियमित रूप से अंकित किया जायेगा तथा इसकी एक-एक प्रति जिला निर्वाचन अधिकारी, रिर्टनिंग आफीसर एवं सहायक व्यय प्रेक्षक को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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एक शिक्षित महिला दो परिवारो को जोड़ती है। बिना महिला के समाज व परिवार की कल्पना नही की जा सकती हैं उक्त उदगार मुख्यचिकित्सा अधिकारी डा0 के0 वी0 सिंह ने अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर ब्यक्त किया।

Posted on 10 March 2014 by admin

जिला क्षय रोग कार्यालय में जिला एडस नियन्त्रण सोसायटी  व प्रताप सेवा समिति के संयुक्त तत्वाधान में अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि शिव भी पार्वती के विना अधूरे है। जब तक दोनो का सहयोग नही होगा सृषिट  की रचना नही हो सकती। डा0 जय प्रकाश ने कहा कि महिलायें ही  एच0 आर्इ0 वी0 के दरो मे कमी ला सकती है। पुरूष प्रधान देश में  अब भारत नही रह गया है। बलिक अब महिलाओं को पूर्ण रूप से सहभागिता दी गयी है। डा0 वी0 के0 सिंह जिला एडस  अधिकारी ने  कहा जनपद में  कन्या के दरो में कमी आती जा रही है। कुछ दिन बाद सिथति भयावह हो जायेगी । संस्था सचिव विजय विद्राही ने बताया कि  केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड द्वारा प्रत्येक जनपद में अन्तराष्ट्रीय महिला सप्ताह  का आयोजन किया जा रहा है। आज महिलाओं को नये भारत के लिये कन्या भ्रूणहत्या को रोकने के लिये महिलाओ मे अब निर्णायक की भूमिका मे खड़ी है। वे पुरूषो  से किसी भी कार्य में पीछे नही रह गयी है। सुमन पाल ने कहा कि हमें याद रखना होगा कि हमे जन्म देने वाली महिला भी मा होती है।जिसके गोद में सबकुछ सीखते है। इसलिये महिला स्वयं सशक्त है। गोष्ठी में स्वर्ण लता, सरिता यादव, विधि, संजय सिंह आदि ने विचार रखे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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देश की 42 फीसद आबादी बच्चों पर आधारित ?

Posted on 07 March 2014 by admin

हमारे राज्यों के मुख्यमंत्री और उच्च न्यायालयों की चुप्पी से एक सवाल उत्पन्न होता है कि आप सर्वगुण सम्पन्न हैं कि जब आप अपने परिवार की बेहतरी के लिये सोचते हैं शेष बच्चों के विषय में आपकी ये रायसोच क्यों नही? हम केवल आज अपने राज्य उत्तर प्रदेश की बात करते हैं। लेबर एक्ट बन जाने के बाद तथा बच्चा मज़दूरी को प्रतिबनिधत किये जाने के बाद भी केवल पशिचमी उत्तर प्रदेश के पांच जनपदों में लगभग दो लाख बच्चे विभिन्न उधोगों, दुकानों, प्रतिष्ठानों तथा रेहडी व ठेली आदि पर कार्य करते देखे जा रहे हैं। यहां तक कि कूडा उठाने से लेकर आतिशबाजी का सामान बनाने के खतरनाकजोखिम भरे कार्यों में भी 8 साल से लेकर 18 साल तक के बच्चे कार्य कर रहे हैं। इन बच्चों को मजदूरी के नाम पर 50 रूप्या से 100 रूपया रोज तक मिलता है तथा जब यें किसी दुर्घटना का शिकार होते हैं तो इनके इलाज का खर्च इनके माता पिता या पडौसी उठाते हैं। हमारा स्थानीय प्रशासन बच्चों के संरक्षण के मामले में पूर्णतया विफल है। केवल जग दिखावे को लम्बे-लम्बे भाषण और विज्ञपितयां, बाल दिवस 14 नवम्बर के अवसर पर स्थानीय स्तर पर व राज्य स्तर पर जारी किये जाते हैं परन्तु अमल मात्र उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत भी नही है। हमारे पशिचमी उत्तर प्रदेश की जेलों में जो बाल अपराधी कैद हैं, उनके साथ भी व्यस्क आदमियों जैसा व्यवहार किया जाता है, उनसे भी जेल में मेहनत करायी जाती है। हमारी जेलों में बच्चों के स्तर को सुधारने के लिये प्रशिक्षण की सुविधाएंशिक्षा की सुविधा उपलब्ध नही है। यदि कोर्इ कैदी बच्चा बीमार होता है या वो मानसिक रूप से कमजोर है तो उसके इलाज के लिये भी जेल प्रशासन के पास उचित बन्दोबस्त नही है। जिला प्रशासन समय-समय पर जेल का निरीक्षण कराता है परन्तु बालकों की दुर्दशा पर जिला प्रशासन के जिम्मेदारों की कभी नजर नही जाती। यदि हालात ऐसे ही रहे और पूरे उत्तर प्रदेश के बच्चों पर और जो बच्चे श्रम के कार्यों मेंजेल में कैद हैं, उनके सुधार के लिये उचित कदम नही उठाये जाते तो माननीय पूर्व चीफ जसिटस अल्तमश कबीर के मुताबिक देश में अफरा तफरी का माहौल पैदा होने में कोर्इ देर नही लगेगी। हमें अपने देश के सर्वोच्च पद पर आसीन रहे माननीय पूर्व चीफ जसिटस अल्तमश कबीर के सन्देश को दिल की गहरार्इयों से लेना चाहिये था तथा पूर्व में दिये गये उस सम्मानित और गम्भीर वक्तव्य पर ठोस कार्यवाही अपने स्तर से शुरू कर देनी चाहिये थी? परन्तु हमें यहां यह लिखते हुए शर्म महसूस हो रही है कि बैठक में मौजूद किसी भी सम्मानित पदाधिकारी ने इस ओर एक साल बाद भी नज़र नही दौडार्इ? अगर हमारे देश में होन वाली महत्वपूर्ण व्यकितयों की महत्वपूर्ण बैठकों के परिणाम इसी प्रकार जनता के सामने आयेगें तो आप खुद नतीजा निकाले कि इस देश का भविष्य क्या होगा?
पिछले साल बच्चों से सम्बनिधत मामलात के निज़ाम को चुस्त दुरूस्त बनाने के अपने मकसद को जनता के सामने ज़ाहिर करते हुए देश के पूर्व चीफ जसिटस आली जनाब अल्तमश कबीर ने प्रदेश के मुख्यमंत्रियों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीशों के एक अहम सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा था कि देश की 42 फीसदी आबादी बच्चों पर आधारित है तथा हमें बच्चों के इन्साफी निज़ाम को मज़बूत बनाने की बेहद ज़रूरत है। जनाब कबीर ने कहा कि बच्चों की देखभाल और उनको बेहतर संरक्षण प्राप्त नही हो पा रहा है। इन हालात में बच्चों का भविष्य हमारे देश में दुखदायी बनने लगा है। आपने कहा कि अगर बच्चों की देखभाल और उनको बेहतर संरक्षण नही दिया जायेगा तो देश में अफरातफरी का वातावरण उत्पन्न हो जायेगा। उन्होने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि जो बच्चे देश का भविष्य हैं उनपर ध्यान नही दिया जा रहा है। आपने कहा कि हम नशीले पदार्थों की आदतों से दो चार हैं तथा इस गम्भीर समस्या पर हमने कोर्इ बेहतर कदम आज तक नही उठाया है। आपने कहा कि हममे से कितने हैं कि जिन्होने बच्चों की वर्तमान हालत पर गौर किया है और जो गौर कर रहे हैं। आपने कहा कि ये समस्या भविष्य की एक बहुत बडी शकित और आबादी का एक तिहायी से ज्यादा है। आपने कहा कि हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद ज्यादातर बच्चे उचित सुविधाओं से वंचित हैं। आपने कहा कि बच्चों का इनसाफ निज़ाम दुनियाभर के देशों की ओर से एक बडी डील का परिणाम है और उस पर पूरी शकित के साथ अमल किया जाना बेहद जरूरी है। पूर्व चीफ जसिटस अल्तमश कबीर ने कहा कि हमारे बच्चे अच्छी तालीम से सरफराज हैं और वें इलियट क्लास से हैं लेकिन बाकी मान्दा (बाकी हिन्दुस्तान के बच्चे) के बारे में क्या किया गया है? उन्होने कहा कि दस से पद्रंह साल की उम्र इस वक्त नयी नस्ल के लिये अधिक अफरा तफरी का कारण होगी अगर बच्चों की परवरिश का खास ख्याल नही रखा गया और उनको सही संरक्षण नही दिया जाता तो देश के हालात दुखदायी हो सकते हैं।
हमारे देश के चीफ जसिटस प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित सात अप्रैल 2013 की महत्वपूर्ण बैठक में अपने सम्बोधन में देश के पूर्व चीफ जसिटस उपरोक्त बातें कहते सुने गये। बैठक में मौजूद सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायधीशों व उनके प्रतिनिधियों ने पूर्व चीफ जसिटस के सम्बोधन को गम्भीरता पूर्वक सुना तथा उनपर अमल करने का वचन दिया। परन्तु खेद की बात है कि एक साल बीत जाने के बाद भी देश के किसी भी राज्य ने इस ओर ध्यान नही दिया। देश के न्यायालयों में बालकों के सम्बन्ध में जो अपराधिक मामले दर्ज हैं और जेलों में बन्द बालकों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है उस पर भी प्रदेश सरकारोंउच्च न्यायालयों ने कोर्इ ध्यान अभी तक नही दिया है। होना यह चाहिये था कि एक माह के भीतर माननीय पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर के सम्बोधन को सभी राज्योें के मुख्यमंत्रीउच्च न्यायालय गम्भीरतापूर्वक लेते और तीस दिन के भीतर न्यूनतम 20 प्रतिशत सुधार कार्य बालकों को इन्साफ दिलाने के मामले में कर के दिखाते। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे सम्मानित पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली में आयोजित उपरोक्त बैठक में जो वक्तव्य दिया है, उस वक्तव्य पर देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए और रिटायरमेन्ट के बाद भी कायम रहेगें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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अपराधियों में खलबली, मनोज कुमार ने अपराधों पर अंकुश लगाने को कहा

Posted on 07 March 2014 by admin

अपराधिक घटनाओं को देखते हुए आर्इपीएस अधिकारी तथा जनपद के कप्तान मनोज कुमार ने सभी जिला स्तर के थानों में तैनात अपने थाना प्रभारियों को सीनीयर दारोगाओं को तथा हैड कान्सटेबलों को सीधे तौर पर निर्देश जारी किये हैं कि तुरन्त अपराधों पर कन्ट्रोल करें तथा अपराधियों को घेरने की कार्यवाही तेजी के साथ अन्जाम दें। यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि जनपद में प्रतिदिन छ: वारदातें लूटपाट, हत्या और संघर्ष की होने लगी हैं। जो भी अधिकारी यहां आया है, वह राजनीतिक दबाव में रहकर कार्य करता है। नतीजे के तौर पर अपराधों पर कन्ट्रोल करना असंभव रहता है। परन्तु जबसे शासन ने आर्इपीएस अधिकारी डाक्टर मनोज कुमार को सहारनपुर में पुलिस कप्तान बनाकर भेजा है और यहां आने के बाद जिस तरह से डा. मनोज कुमार ने थाना प्रभारियो को निर्देश देकर अपराधों पर अंकुश लगाने को कहा है, उसके परिणाम बेहतर आने लगे हैं। सुबह से शाम तक पुलिस कप्तान के कैम्प कार्यालय और निवास पर जो शिकायत कर्ता पहुंचते हैं, उनकी शिकायतों का निस्तारण भी समय से किया जाना डा. मनोज कुमार की योग्यता को साबित करता है। डा. मनोज कुमार के आने से माफियाओं तथा अपराधिक प्रवृतित वाले असामाजिक तत्वों में खलबली मची है। एक जनपद को छोडकर दूसरे जनपद में जाकर अपराध करने वालों पर भी पुलिस ने एसएसपी के चलते शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस गश्त बढा दी गयी है। पुलिस बल जहां भी रहता है, मुस्तैदी के साथ रहता है। छोटी से छोटी घटना को डा. मनोज कुमार अपने संज्ञान में लेकर स्वयं अपने स्तर से कार्यवाही करने के आदेश जारी कर रहे हैं। कोर्इ भी थाना प्रभारी अब अकारण थाने से नदारद नही मिलता बलिक काम के समय प्रभारी थाने पर मौजूद मिलते हैं। सहारनपुर में एक दशक से यह परम्परा चली आ रही थी कि थाना प्रभारी सुबह एक घण्टे के लिये थाने पर आते थे और उसके बाद नदारद हो जाते थे लेकिन डा. मनोज कुमार की कार्यशैली देखकर सभी थाना प्रभारी थाने पर या थाने के आसपास ही अपनी डयूटी पर मुस्तैद नजर आते हैं। समाचार पत्र कुछ भी लिखें तथा विपक्षी कुछ भी कहें परन्तु जबसे डीआर्इजी रघुवीर लाल और पुलिस कप्तान डा. मनोज कुमार सहारनपुर मुख्यालय पर आये हैं, तबसे अपराधिक घटनाओ में बहुत कमी आयी है तथा पुलिस के सभी अंग सक्रिय हैं। किसी भी तरह की घटना होने पर पुलिस बल तथा पुलिस के कुछ अधिकारी तुरन्त घटना स्थल पर पहुंच जाते हैं। खबर के लिखे जाने तक यहां डीआर्इजी अच्छे कामों के लिये मशहूर हैं वहीं हमारे पुलिस कप्तान आर्इपीएस अधिकारी डा. मनोज कुमार भी अपराधियों के विरूद्व अभियान छेडने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। डा. मनोज कुमार की अपराधों को रोकने के लिये जिस कदर भी प्रशंसा की जाये वह कम हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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फसलो को खरपतवारो से मुक्त कराना होगा।

Posted on 07 March 2014 by admin

उपनिदेशक (कृषि रक्षा) सहारनपुर मण्डल सहारनपुर ने किसानो को अवगत कराया है कि फसलो में प्रतिवर्ष कीट रोग, खरपतवारो तथा चूहो आदि द्वारा लगभग 15 से 20 प्रतिशत की क्षति होती है। जिसमें लगभग 33 प्रतिशत खरपतवारो से, 26 प्रतिशत रोगो से, 20 प्रतिशत कीटो से, 7 प्रतिशत भण्डार के कीटो से, 6 प्रतिशत चूहो से तथा 8 प्रतिशत जिसमें अन्य कारक समिमलित है।
इस प्रकार प्रतिवर्ष फसलो को लगभग 15 से 20 प्रतिशत होने वाली क्षति में सर्वाधिक एक तिहार्इ क्षति खरपतवारो द्वारा होती है। खरपतवारो द्वारा मृदा में डाले गये उर्वरको, पोषक तत्वो का सीधे उपयोग करने से मुख्य फसल को इसकी उपलब्धता कम हो जाती है जिससे न केवल फसल उत्पादन में कमी आती है बलिक उत्पादन लागत में अधिक वृद्वि हो जाती है। यदि कृषि उत्पादन बढाना है तथा किसानो की उत्पादन लागत में कमी लाते हुए आय में वृद्वि करनी है तो प्रत्येक दशा में फसलो को खरपतवारो से मुक्त कराना होगा।
उन्होने सभी किसानो को निम्न संस्तुतियो के अनुसार रबी-2013-14 में खरपतवार नियन्त्रण करने हेतु सलाह दी है कि गेहूं और जौ की फसलो में खरपतवारो के नियन्त्रण हेतु आर्इसोप्रोटूरान 75 प्रतिशत डब्लू0पी 1.25 कि0ग्रा0हैक्टेअर अथवा सल्फोसल्फयूरान 75 प्रतिशत डब्लू0जी0 3.3 ग्राम(2.5 यूनिट)हैक्टेअर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवार्इ के 20 से 25 दिन बाद छिडकाव करें तथा चना, मटर व मसूर की फसल में खरपतवारो के नियन्त्रण हेतु पैण्डामैथलीन 30 प्रतिशत 3.3 लीटर प्रति हैक्टेटर अथवा एलाक्लोर 50 प्रति0 र्इ0सी0 4 लीटर प्रति हैक्टेअर बुवार्इ के 3 दिन के अन्दर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रयोग करे। इसके अतिरिक्त रार्इसरसो की फसल में खपतवार नियन्त्रण हेतु पैण्डामैथलीन 30 प्रतिशत 3.3 लीटर प्रति हैक्टेअर बुवार्इ के तीन दिन के अन्दर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।
कीटरोग से सम्बनिधत प्रत्येक जानकारी के लिये विकास खण्ड में सिथत कृषि रक्षा इकार्इ जिला स्तर पर विकास भवन में जिला कृषि रक्षा अधिकारी तथा मण्डल स्तर पर उप निदेशक कृषि रक्षा बेरीबाग सहारनपुर कार्यालय में सम्पर्क कर सकते है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मुख्यमंत्री ने जनपद कन्नौज में 35 करोड़ 17 लाख रुपये की 30 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया

Posted on 04 March 2014 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने आज जनपद कन्नौज सिथत के0के0 इण्टर कालेज मैदान में 35 करोड़ 17 लाख रुपये लागत की कुल 30 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग द्वारा 24 करोड़ 70 लाख 81 हजार रुपये की लागत से निर्मित 10 सड़क, मण्डी परिषद द्वारा 8 करोड 35 लाख 83 हजार रुपये से निर्मित 10 सड़क, सिंचार्इ विभाग द्वारा डा0 राम मनोहर लोहिया नवीन नलकूप परियोजना के अन्तर्गत 2 करोड़ 10 लाख 90 हजार रुपये से निर्मित 10 नलकूपों का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही 8 करोड़ 4 लाख 35 हजार रुपये की लागत से निर्मित होने वाली 16 सड़कों का शिलान्यास भी किया गया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी सरकार प्रदेश के किसानों, गरीबों, अल्पसंख्यकों, नौजवानों, छात्रों सहित हर वर्ग के विकास के लिये तत्पर हैं। प्रदेश सरकार द्वारा कन्या विधाधन योजना, बेरोजगारी भत्ता, हमारी बेटी-उसका कल योजना के माध्यम से नौजवानों तथा अल्पसंख्यक छात्राओं के बेहतर भविष्य के लिए सुविधाएं मुहैया करार्इ जा रही हैं। नि:शुल्क लैपटाप उपलब्ध कराकर प्रदेश सरकार ने शहर व गांवों के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी पर आने का अवसर प्रदान किया है। कौशल विकास मिशन में अभी तक  30 लाख से अधिक नौजवानों ने अपना पंजीकरण कराया है। इस योजना में प्रशिक्षण प्राप्त करके प्रदेश के युवा बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
श्री यादव ने कहा कि जब किसान खुशहाल होगा तो देश खुशहाल होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को समय पर खाद, बीज उपलब्ध कराने के साथ ही मुफ्त सिंचार्इ, किसान क्रेडिट कार्डो के माध्यम से सस्ता लोन जैसी सुविधाएं मुहैया करार्इ हैं। कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अन्र्तगत दी जाने वाली धनराशि को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। प्रदेश सरकार की पहल पर अमूल, राज्य के कर्इ स्थानों पर दुग्ध प्रसंस्करण इकार्इयां लगा रहा है, जिससे प्रदेश में दुग्ध व्यवसाय बढ़ेगा व किसानों को लाभ पहुंचेगा।
प्रदेश में कराए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद कन्नौज के साथ ही पूरे प्रदेश में सड़क, बिजली, पुलों के निर्माण कराये जा रहे हैं। लखनऊ में यातायात को बेहतर और सुचारु बनाने के लिए मेट्रो रेल परियोजना शुरू की जा रही है। जनपद बलिया में एक ऐसा पुल बनाने की योजना है, जिसके माध्यम से बिहार की राजधानी पटना, प्रदेश से सीधे जुड़ जाएगी। जनपद कन्नौज में तिर्वा फाटक से लेकर उर्मदा तक फोरलेन सड़क बनवायी जा रही है। उन्हाेंने कहा कि नि:शुल्क चिकित्सा, दवार्इ, एक्स-रे, पैथालाजिकल जांच  तथा समाजवादी एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करायी गयी हैं।
इस मौके पर माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री श्री विजय बहादुर पाल, विधायक श्री अनिल दोहरे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता दोहरे, विधायक छिबरामऊ श्री अरविन्द यादव व अन्य जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपसिथत थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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भारत सरकार के सहयोग से अब पासपोर्ट बनवाना होगा आसान

Posted on 03 March 2014 by admin

भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पासपोर्ट सेवा केन्द्र की सकि्रयता के चलते भविष्य में नागरिकों के लिये पासपोर्ट बनवाना सरल हो जायेगा। आज प्रदेश भर के नागरिकों को एलआर्इयू, पुलिस और तहसील स्तर की जांच के अतिरिक्त आवेदन के साथ संलग्न प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रकि्रया के कारण पासपोर्ट आवेदन करने के छ: माह पश्चात बडी मशक्कत के बाद प्राप्त हो रहा है जिसकारण नागरिकों को अनावश्यक रूप से कठिनार्इ का सामना करना पड रहा है। पिछले चार सालों से लखनऊ क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी एवं गाजियाबाद क्षेत्रीय पासपोर्ट के कार्यालयों के दर्जनो चक्कर काटने के बाद भी हज पर जाने वाले हाजियों को समय पर पासपोर्ट न मिलने के कारण प्रदेश के सैेंकडों लोग हज न कर पाने से वंचित रह गये थे। इसी प्रकार लेबर या अन्य कार्यों के लिये विदेश जाने वाले भारतीय नागरिक पासपोर्ट समय पर जारी न होने के कारण विदेश नही जा पाते जिस कारण उनके परिवार को हर तरह से जबरदस्त आर्थिक हानि उठानी पडती है। पशिचम उत्तर प्रदेश व मध्य उत्तर प्रदेश के अधिकतर नागरिक लेबरवाहन चालकपेन्टरफीटरशिक्षा तथा टैकिनकल स्टाफ के रूप में खाडी के देशों में नौकरी के लिये जाना पसन्द करते हैं। हर माह खाडी के देशों से उक्त कार्यों में संलिप्त ठेकेदार एडवांस वीजा लेकर देश में आते हैं तथा उपरोक्त लेबर से या आवेदकों से साक्षात्कार के पश्चात पासपोर्ट तलब करते हैं। आवेदकसाक्षात्कार देने वाले नागरिक पासपोर्ट जल्दी बनवाने की शर्त पर इन्टरव्यू पास कर लेते हैं तथा ठेकेदारों को एडवांस भी अदा कर  देते हैं। परन्तु जब वह पासपोर्ट के लिये आवेदन करते हैं तथा समस्त वांछित प्रमाणपत्र आवेदन के साथ  क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत करते हैं तो प्रमाण पत्रों की जांच के उपरान्त उनकी एलआर्इयू जांच तथा पुलिस जांच करार्इ जाती है। स्थानीय स्तर पर जहां का आवेदक निवासी होता है जांच वहीं भेजी जाती है। दो दो जांचों से निकलकर आवेदक एक माह बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से सम्पर्क करता है तो मालूम होता है कि  जांच अभी प्राप्त नही हुर्इ है। भारत सरकार ने इसी कठिनार्इ को मददेनजर रखते हुए ड्रीम प्रोजेक्ट पासपोर्ट सेवा योजना शुरू करके आवेदकों को लाभ पहुंचाने का जो कार्य किया है उससे आवेदकों को पासपोर्ट बनवाना अब आसान हो जायेगा। इस स्कीम के तहत अब पासपोर्ट कार्यालयों को रिपोर्ट आनलाइन पुलिस प्रशासन द्वारा प्राप्त हुआ करेगी। इन हालात में जो लम्बा समय डाक द्वारा जांच रिपोर्ट आने में लगता है वह बच जायेगा तथा तहसील स्तर से एमरजेन्सी पासपोर्टतत्काल पासपोर्ट बनवाने हेतु जो पत्ररिपोर्ट एसडीएमपुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा क्षेत्रीय पासपोर्ट विभाग को डाक से भेजी जाती है तथा बाद में इसका सत्यापन भी होता है इस योजना के तहत वें काम भी अब आन लार्इन हो जायेगा जिस कारण पासपोर्ट आवेदकों को पासपोर्ट मिलना सरल होगा।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयो से जोडने का कार्य शुरू हो चुका है फिलहाल लखनऊ हैडक्वार्टर से पांच पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों को आनलार्इन कर दिया गया है कुल 54 जनपदों को आनलाइन किया जाना है जिसके ऊपर कार्य तेजी के साथ शुरू कर दिया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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पत्रकारिता पर राष्ट्रीलय संगोष्ठीी रू जवाहर लाल नेहरू ग्राम भारती विश्विविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से

Posted on 26 February 2014 by admin

पत्रकारिता पर राष्ट्रीलय संगोष्ठीी रू जवाहर लाल नेहरू ग्राम भारती विश्विविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से इलाहाबाद के सीमैट सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीजय संगोष्ठीस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रोण् बीके कुटियालए प्रोण् राममोहन पाठकए प्रोण् सूर्य प्रसाद दीक्षितए बीएचयू की प्रोण् श्रद्धा सिंहए दूरदर्शन और आकाशवाणी के कार्यक्रमों की सलाहकार डॉण् नीरजा माधवए प्रोफेसर अर्जुन तिवारीए अवधेश प्रताप सिंह विश्व विद्यालय रीवा के पत्रकारिता विभाग के अध्युक्ष डॉण् दिनेश कुशवाहाए वरिष्ठि पत्रकार रतिभान त्रिपाठीए इलाहाबाद विश्वनविद्यालय के हिंदी विभाग के डॉण् सूर्य नारायण सिंहए डॉण् अलीम अहमदए इफ्को फूलपुर के महाप्रबंधक मुकुल श्रीवास्तरव और कई अन्यभ जाने माने वक्ताबओं ने भाग लिया तथा अपने सारगर्भित विचार व्य्क्त  किए।
संगोष्ठी  के समापन सत्र में मुख्यत अतिथि के रूप में इफ्को के महाप्रबंधक मुकुल श्रीवास्तीवए विशिष्टर अतिथि के रूप में वरिष्ठा पत्रकार रतिभान त्रिपाठीए विश्व विद्यालय के कुलपति प्रोण् केपी मिश्रए प्रति कुलपति प्रोण् एससी तिवारीए कुलसचिव डॉण् पीके तिवारीए वि‍श्व विद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यरक्ष डॉण् हिमांशु शेखर सिंह शामिल हुए। समापन सत्र में ही विश्व विद्यालय की ओर से प्रकाशित की गई स्माारिका का विमोचन भी किया गया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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अराइज एशिया कप 2014′

Posted on 24 February 2014 by admin

बिजली के सामानों के उधोग में अग्रणी और एलर्इडी टेलीविजन के एक अग्रणी निर्माता, अराइज इंडिया लिमिटेड ने एशिया के सबसे बडे क्रिकेट टूर्नामेंट  एशिया कप के टाइटिल स्पांसरशिप अधिकार हासिल कर लिए हैं। इस प्रमुख क्रिकेट टूर्नामेंट का नाम अब अराइज एशिया कप - 2014 होगा।
इस उपमहाद्वीप में क्रिकेट का मुकाबला 25 फरवरी से बांग्लादेश में खेला जाएगा जहां भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान क्षे«ाीय सर्वोच्चता के लिए भिडेंगे। 11 एक दिवसीय अंतरर्राष्ट्रीय मैच वाले इस टूर्नामेंट में एक राउंड रोबिन फामर्ैट होगा जिसमें प्रत्येक टीम एक दूसरे से एक बार खेलगी और दो सर्वश्रेष्ठ टीमें 8 मार्च 2014 को एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बनने के लिए प्रतिष्ठा वाली प्रशंसा के लिए मुकाबला करेगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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आर्इपीसी की धारा 498 की तरह ही आर्इपीसी की धारा 376 का गलत इस्तेमाल

Posted on 24 February 2014 by admin

केन्द्र सरकार के मन्त्री कपिल सिब्बल द्वारा तहलका के एडीटर तरूण तेजपाल के पक्ष में दिया गया बयान कि महिलाओं की अस्मत से सम्बनिधत आर्इपीसी की धारा 376 का दहेज उत्पीडन से सम्बनिधत आर्इपीसी की  धारा 498 की तरह ही गलत इस्तेमाल हो रहा है पर खासा बवाल हुआ है। इसमें कोर्इ दो राय नही कि कपिल सिब्बल का बयान अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। जिन लोगों ने न्याय की गरिमा को बनाये रखा तथा जिनकी वजह से न्यायपालिका आज भी स्वतन्त्र एवं विश्वसनीय स्तम्भ के रूप में पूरे विश्व में लोहे के सतून की मानिन्द नजर आ रही है। भारत की उस न्यायपालिका के पूर्व मुख्य न्यायधीश सर्वोच्च न्यायालय (नर्इ दिल्ली)  जसिटस अलतमश कबीर ने भी जसिटस ए. के. गांगुली के खिलाफ एक युवती द्वारा लगाये गये आरोप को गम्भीरता से लेते हुए प्रेस को निर्भिकता पूर्वक यह बयान दे डाला कि मुझे यह विश्वास नही होता कि एके गांगुली जैसा काबिले एहतराम जसिटस ऐसा कुकृत्य करने का साहस भी कर सकता है। न्यायपालिका में अल्तमश कबीर का नाम एक ऐसा नाम है कि जो वास्तव में न्याय से जुडा है। आपने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद को सुशोभित करते हुए जो निर्णय दिये उनका एक महत्व है। अल्तमश कबीर ने दिग्गज राजनेताओं तथा केन्द्र सरकार के दबाव को न मानकर संविधान में उल्लेखित धाराओं का शत प्रतिशत पालन किया तथा अपने आदेश ठीक उसी प्रकार जारी किये कि जो आर्इपीसी और सिविल धाराओं के अन्तर्गत किया जाना अत्यन्त जरूरी था। हम जब कपिल सिब्बल की बात करते हैं तो हमे जसिटस अल्तमश कबीर के विचारों को भी सामने रखना होगा।केन्द्र सरकार ने महिलाओं तथा सामाजिक संगठनों के दबाव में आकर एक दशक पूर्व दहेज से सम्बनिधत वादों के सख्ती से निपटारे हेतु आर्इपीसी में एमेन्डमेन्ट करके जिस तरह से दहेज की धाराओं को सख्त किया उसका नतीजा यह हुआ कि 12 साल से लेकर 90 साल का बूढा भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिये गये। छोटे-छोटे घरेलू झगड़ों पर भी 498 का प्रयोग होने लगा तथा समाज में सम्बन्ध विच्छेद एवं परिवार बंटवारे के मामलों में तेजी से बढोतरी हुर्इ और आपसी समझौतों में कमी महसूस की गयी। लगातार दहेज से सम्बनिधत उक्त धारा का दुरूपयोग होने का अहसास जब केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं नेताओंं को होने लगा और जनता में हाहाकार मचा तब माननीय सुप्रीेम कोर्ट को पुन: एक आदेश जारी करना पडा जिसके अनुसार दहेज से सम्बनिधत मामालों पर कार्यवाही जांच के बाद ही सुनिशिचत की गयी। पुलिस को निर्देशित किया गया कि बिना छानबीन के एवं ठोस शहादतों के बाद ही दहेज की धाराओं में गिरफ्तारी की जाये। तब जाकर मनगढन्त दहेज की घटनाओं में बेतहाशा कमी आयी। उक्त कथन से साबित हुआ कि जिस प्रकार दहेज प्रकरण के मामलों में आर्इपीसी की धाराओं का दुरूपयोग किया गया उसी प्रकार महिलाओं की अस्मत से जुडे मामलों में भी किसी हद तक नही बलिक दामिनी काण्ड 2012 के बाद से बहुत हद तक दुरूपयोग होना आम बात हो गया है। जब तहलका के चीफ एडीटर तरूण तेजपाल के साथ कार्य करने वाली सहकर्मी जो लगातार दो साल से तरूण तेजपाल के साथ काम कर रही थी, यह इल्जाम लगाती है कि काफी समय पूर्व उसके साथ तथा उसकी अस्मत के साथ खेला गया उसी बात से यह साबित हो गया है कि यह केवल षडयन्त्र है। यदि किसी महिला के साथ छेडछाड अथवा कुकृत्य किया जाता है तो उसकी रिपोर्ट पीडिता द्वारा एक सप्ताह के भीतर सम्बनिधत थाने को की जानी जरूरी है। यही चलन अंग्रेजों के कार्यकाल से चला आ रहा है परन्तु आर्इपीसी की धाराओं में लचक होने के कारण तथा अधिवक्ताओं को न्यायालयों द्वारा छूट दिये जाने के परिणामस्वरूप कोर्इ भी व्यकितमहिला अपने साथ किये गये दुव्र्यवहार एवं अत्याचार से सम्बनिधत शिकायत सम्बनिधत थाने अथवा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में तीन माह पश्चात भी प्रस्तुत करके प्रतिवादी को प्रताडित करने का कार्य करती है तो उससे यह झलकने लगता है कि इस शिकायत में कहीं न कहीं झोल अवश्य है। जिस व्यकित कोमहिला को किसी से शिकायत है तो वह एक सप्ताह के भीतर अपनी शिकायत क्यूं दर्ज नही करा रही है? और   यदि एक सप्ताह के पश्चात शिकायत की जा रही है तो उससे साबित होता है कि यह किसी षडयन्त्र का हिस्सा है। तरूण तेजपाल जैसे व्यकित को जो कि धन, सैलिब्रेटी और शकित में देश के 50 लोगों की लिस्ट में शामिल हैं वह ऐसा करेगा यह हर बुद्विजीवी की समझ से बाहर की बात है। अभी मामला अखबारों की सुर्खियों में ही है कि तरूण तेजपाल के बाद एक और अधिवक्ता इन्टर्न ने सम्बनिधत काबिले एहतराम और अपने आप में व्यवहार कुशल होने के साथ साथ न्याय प्रिय जसिटस एके गांगुली पर यह आरोप मढ दिया कि जब वें इन्टर्न का कार्य गत वर्ष दिसम्बर 2012 में दामिनी काण्ड के दौरान दिल्ली में कर रही थी तो उस समय जसिटस एके गांगुली ने उसको भी अपनी बाहों में भर लिया था और अब उसको इस बात का अहसास हुआ कि उसके साथउसकी अस्मत के साथ खिलवाड किया गया। जिसकी बाबत उसने एक ब्लाग पर अपनी शिकायत प्रस्तुत की तथा टवीटर पर जनता को अपनी बाबत परिचित कराया। सवाल यह पैदा होता है कि जब एके गांगुली जैसा व्यकित कि जिसकी बाबत पूर्व मुख्य न्यायाधीश जसिटस अल्तमश कबीर यह कह चुके हैं कि इस शिकायत पर मैं किसी भी सूरत में यकीन नही कर सकता उसके अतिरिक्त एके गांगुली स्वयं सख्ती से इन आरोपों का खण्डन कर चुके हैं। स्वयं इस मामले को हार्इप्रोफार्इल परिसिथतियों में मुख्य न्यायाधीश जसिटस सदाशिवम ने तीन जजों की एक कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं उसके बावजूद भी चन्द राजनेताओं द्वारा और सामाजिक संगठनों द्वारा एके गांगुली के विरूद्व माहौल तैयार करना इस तथ्य को उजागर करता है कि एके गांगुली भी उसी तरह साजिश का शिकार हुए हैं कि जिस तरह से पिछले माह तरूण तेजपाल को शिकार बनाया गया है। यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि देश के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन तथा समाज में सम्मानित कहे जाने वाले उधोगपतियों तथा राजनेताओं को कठघरे में खडा करके जो तहलका तरूण तेजपाल ने पूरे विश्व में मचाया। जिसके विरूद्व वें प्रमाण जनता के सामने लाये गये वें व्यकित हर हाल में तरूण तेजपाल से बदला लेने की फिराक में था। तरूण तेजपाल के यहां जिस सहकर्मी को पच्चीस हजार रूपये मासिक तनख्वाह मिलती हो यदि देश का कोर्इ राजनेताउधोगपति उस महिला को पांच करोड का लालच दे दे तो वह अपने भविष्य की चिंता को देखते हुए चिन्तामुक्त होकर किसी के भी विरूद्व कोर्इ भी शिकायत दर्ज कराने से नही हिचकिचायेगी? ठीक इसी प्रकार जसिटस एके गांगुली ने भी  दर्जनों ऐसे मुकदमात में आदेश दिये हैं कि जो उधोगपतियोंराजनेताओं से सम्बनिधत थे भला ये कैसे भूल सकते हैं कि जिनके खिलाफ जसिटस एके गांगुली ने निर्णय सुनाया हो वह जसिटस गांगुली को भूल जाये। परिणामस्वरूप इस तरह की जितनी भी घटनाएं सेलिब्रेटियों के साथ घट रही हैं उनके पीछे एक घिनौनी साजि़श काम कर रही है। हमारी माननीय सर्वोच्च न्यायालय से विनती है कि जिस प्रकार दहेज के मामलों में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकारराज्य सरकारों तथा पुलिस को निर्देशित किया है और जिस प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सख्त निर्देशोें के बाद दहेज प्रकरणों के मामलों में कमी आयी है उसी तरह महिलाओं की अस्मतछेडछाड से सम्बनिधत प्रकरणों के बाबत भी माननीय सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकारराज्य सरकार और सम्बनिधत पुलिस को सख्त दिशा निर्देश जारी करने चाहियें ताकि बिना जांच किये तथा बिना ठोस सबूत जुटाये मात्र शिकायत कर्ता की शिकायत पर किसी की भी गिरफ्तारी को प्रतिबनिधत किया जाये। दिसम्बर 2012 दामिनी काण्ड के बाद सामाजिक संस्थाओं नेराजनेताओं ने वाबेला मचाकर केन्द्र सरकार को महिलाओं की अस्मत से सम्बनिधत शिकायतों पर जिस ठोस कानून बनाने पर विवश किया है आज वही कानून भारत के सम्मानित नागरिकों के लिये और सम्मानित नागरिकों की आनबान के लिये भारी आफत बना हुआ है। कल को केन्द्र सरकार में ऊंचे पदों पर आसीन किसी भी व्यकित के विरूद्व कोर्इ भी स्वार्थी तत्व इसी तरह का आरोप किसी भी महिला द्वारा लगवा सकता है। उल्लेखनीय है कि दो दशक पूर्व एक केन्द्रीय मंत्री पर भी एक महिला ने भी इसी प्रकार आरोप लगाकर उन्हे अपमानित करने का काम अन्जाम दिया था। कठिन छानबीन के उपरान्त यह मालूम पडा कि यह सब षडयन्त्र माफियाओं ने केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ रचा था। इतना सबकुछ होने के बावजूद यदि अभी भी केन्द्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के सम्मानित न्यायाधीश इस ओर से सचेत नही हुए तो जिस तरह से दहेज की धाराओं का दुरूपयोग होता रहा है ठीक उसी तर्ज पर बलिक उससे भी खतरनाक परिसिथतियों में धारा 376 का प्रयोग जारी रहेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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