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उपसंभागीय अधिकारी दलालों के माध्यम से कोड बाॅट कर रहे उगाही

Posted on 10 August 2011 by admin

कोड के आधार पर उप संभागीय परिवहन विभाग में धनउगाही व भ्रष्टाचार किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जिससे ओवर लोडिंग गाड़ियों को कोड बॅांटकर दलाल व विभागीय अधिकारी मालामाल हो रहे हैं।  विस्वश्त सूत्रों द्वारा जानकारी मिली है कि कोड सुविधा प्राप्त करने के लिए हर ट्रक मालिकों को विभाग द्वारा निर्धारित कोड खरीदना जरूरी होता है। बिना कोड के चल रहे ओवर लोडिंग गाड़ियों को पकड़ कर अधिकारी अपना गुडवर्क दिखा देते हंै। इस गोरखधन्धें में राजस्व हानि तो हो रही है साथ ही अरबांे रूपये की लागत से बनी सड़क मानक से कई गुना अधिक लदे माल की ट्रक के आवागमन होने से गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं। उप संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों का जिम्मा है कि ओवर लोड ट्रक कत्तई न चलने पाये, ओवर लोडिंग पाये जाने पर ट्रकों के खिलाफ कार्यवाही की जाय, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। ओवर लोड ट्रकों का संचालन धडल्ले से किया जा रहा है, ट्रकें वही पकड़ी जाती है जो परिवहन विभाग द्वारा जारी गोपनीय कोड नहीं खरीदता। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ओवर लोड ट्रकों के पांसिग का कोड बन्धुआ स्थित मस्जिद के सामने उमर के होटल से लेकर जिले में हर जगह होटलों, ढाबांे पर आसानी से मिल जाता है। लखनऊ वाराणसी राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर तो कई ऐेसे होटल हंै, जहां पूरे उत्तर प्रदेश का कोड पल भर में मिल जाता है। करना यह होता है कि ट्रक चालक कोड बेचने वालांे के पास पहुंचता है तेा वह उसे रूपया देकर अपना गाड़ी नम्बर उसे लिखवा देता है। उसके बाद कोड बेचने वाला व्यक्ति ट्रक चालक को विजटिंग कार्ड पर कोड लिखकर थमा देता है,यह फिर यही कोड गाड़ी के कागजात पर लिख देता है। तयशुदा तिथि पर दलाल अपनी लिस्ट विभागीय अधिकारियों कोे पहुंॅचा देते हैं। चेकिंग के दौरान जब गाड़ियाॅ रोकी जाती हैं, तो वाहन चालक कोड का जिक्र कर देते हैं। इतने पर भी बात नही बनती दलाल द्वारा भेजी गयी लिस्ट से मिलान किया जाता है।,
यदि उक्त गाड़ी नम्बर लिस्ट मे ंपायी जाती है तो माल कितना भी अधिक लदा हो केाई कार्यवाही नहीं होगी, लेकिन कोड न मिलने की स्थिति में लम्बा जुर्माना तय है। सूत्रों से पता चला है कि इस गोरखधन्धे में हर महीने लाखों रूपये की कमाई आसानी से हो जाती है। बेचे गये कोड का कुछ पैसा दलाल भी पा जाते हंै। अकूत कमाई के चलते कोड बेचने वालो की लम्बी लाइन है। इस अकूत कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहंुचता है। जिसकी वजह से अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्व कोई कार्यवाही नहीं होती। इस गोरखघन्धें में परिवहन विभाग के कर्मचारियों के सगे सम्बन्धी ही इस गोरख धन्धे में चार चांद लगा रहे हंै। यह गोरखधन्धा जिला ही नही बल्कि सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश मे धडल्ले से चल रहा है। सेटिंग-गेटिंग कर हर जिले की कोड की मोनोपोली दलाल हासिल कर लेते हैं। सूत्रांे का तो यह भी कहना है कि यदि पुलिस विभाग  के अधिकारी कागजातों की जांच व ओवरलोडिंग ट्रक चालकों से पूछ ताछ की जाय तो इस गोरखधन्धे का खुलाशा आसानी से हो जायेगा, क्योंकि ट्रक चालक तो यह कोड मुफ्त में न लेकर हजारों रूपये देकर खरीदते हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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फोटो युक्त निर्वाचक नामावली के प्रति डीएम सख्त

Posted on 10 August 2011 by admin

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विधान सभा फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली के निरन्तर पुनरीक्षण एंव आगामी 25 अगस्त तक घर-घर सत्यापन का कार्य के परिप्रेक्ष्य में जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी एंव तहसीलदारों साथ समीक्षा बैठक हुई।
बैठक में घर-घर सत्यापन के दौरान पुनरीक्षण मे अपमार्जित हुए मतदाताओं के शत-प्रतिशत सत्यापन कराये जाने का निर्देश दिया,पुनरीक्षण में परिवर्तन की भी संख्या कम होने के कारण उप जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा असन्तोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिया गया कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में अकिंत होने से न छूट पाये। सुपरवाइजरों की माइनीटरिंग करें और किसी भी प्रकार कठिनाईयों का निस्तारण तुरन्त करें। तहसीलदार जयसिहपुर द्वारा अवगत कराया गया कि परिवर्धन,अपमार्जन,सन्शोधन तथा पहचान पत्र बनाने का कार्य ठेकेदार द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि द्वारा किया जा रहा है। जिस पर उपजिला निर्वाचन अधिकारी डा. पिंकी जोवेल द्वारा बेण्डर को अतिरिक्त कम्प्यूटर सहित आपरेटर लगवाकर प्रतिदिन के कार्यो को सम्पादित कराये जाने हेतु ठेकेदार को नोटिस जारी किये जाने एवं बुलाये जाने हेतु निर्देश दिया गया। बूथ लेविल आफीसर के बैंक खाता संख्या एकत्र किये जाने के सम्बन्ध मंे जानकारी की गयी और निर्देशित किया गया कि बी.एल.ओं के 1000 प्रति बी.एल.ओं की दर से जो धन राशि जनपद हेतु आवंटित की गयी है। उसे बीएलओ के खाते में जमा कराया जाय और कहा कि किसी भी सिफ्टेड मतदाता का नाम अपमार्जित किये के पूर्व उस पर नियमानुसार नोटिस जारी कर सुनवाई करते हुए निर्वाचक रजिष्टीकरण अधिकारी अथवा सहायक निर्वाचक रजिष्टीकरण अधिकारी के आदेश के उपरान्त ही कार्यवाही की जाय।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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राष्ट्रीय एकता सम्मेलन को सफल बनाने की अपील-राही

Posted on 10 August 2011 by admin

जिला कांग्रेस द्वारा प्रांतीय स्तर पर 20 अगस्त को राजीव गांधी जन्म दिवस पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय एकता सम्मेलन का जायजा लेने जनपद पहंुचे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामलाल राही ने पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी समेत तमाम प्रातींय व राजकीय नेताओं नेतृत्व में अधिक से अधिक पार्टी कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचे ओर राष्ट्रीय एकता सम्मेलन को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त है आगामी चुनाव में पार्टी का मुद्दा राष्ट्रीय एकता ही रहेगा। इस मौके पर जिलाध्यक्ष अजय सिंह, विवेक मिश्रा, रामेश्वर प्रसाद, नेतम भारतीय आदि मौजूद रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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अधिवक्ता एवं पत्रकार प्रमोद षुक्ला का निधन

Posted on 09 August 2011 by admin

9spn-03अधिवक्ताओं व पत्रकारों ने की षोक सभा

सेन्ट्रल बार एसोसिएषन की एक षोक सभा राजीव सभागार में बृजेष चन्द्र मिश्रा की अध्यक्षता तथा जदुवीर सिंह के संचालन मंे हुई, जिसमें अधिवक्ता प्रमोद कुमार षुक्ला, के आकस्मिक निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए गहरा दुःख व संवेदना प्रकट की गयी और ईष्वर से प्रार्थना की कि वह दिवंगत आत्मा को स्वर्ग में षान्ति प्रदान करें तथा उनके षोक संतृप्त परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की क्षमता प्रदान करें। षोक सभा में निर्णय लिया गया कि उक्त षोक में आज अधिवक्तागण न्यायालयों में न्यायिक कार्य नहीं करेंगे। प्रमोद अधिवक्ता के साथ पत्रकार भी थे। उनका निधन पर कौषलेन्द्र मिश्र, गायत्री प्रकाष अवस्थी, राजीव मिश्र, आषुतोष षर्मा, अभिषेक सिंह, संजय मिश्रा, फरीद अंसारी, सोनू कष्यप ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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बीमारी व गरीबी से तंग अधेड़ फांसी पर झूला

Posted on 09 August 2011 by admin

बीमारी और अर्थिक तंगी से परेशान एक अधेड़ व्यक्ति ने सोमवार को रात फासी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार को सुबह उसका शव कमरे में लटका मिला।
कोतवाली क्षेत्र स्थित महमंद गढ़ी निवासी 55 वर्षीय रामविलास फेरी लगाकर किसी तरह अपने परिवार का जीविका चला रहा था। इधर वह कई माह से बीमार चल रहा था। दवा पर इतना खर्च था कि वह झेलने की कूबत नहीं रखता था। इसके चलते वह बेहद परेशान था।
गत रात करीब नौ बजे उसने खाना खाया और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। मंगलवार की सुबह आठ बजे वह सो कर नहीं उठा तो उसका पुत्र रवि दरवाजा खुलवाने गया। दरवाजा नहीं खुला तो उसने खिड़की से झांककर देखा और पाया कि उसके पिता मृत अवस्था में सीलिंग फै न से लटके हुए हैं। उसने शोर मचाया तो परिवार वाले तथा पड़ोसी भी दौड़ पड़े। कोतवाली पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर लाश को नीचे उतारा। रामविलास ने रस्सी से फांसी लगाई थी।
उसके पुत्र रवि ने पुलिस को बताया कि उसके पिता बीमार थे और उनका मानसिक संतुलन भी ठीक नहीं था। मृतक की पत्नी, दो पुत्र तथा चार पुत्रियां इस घटना के बाद से स्तब्ध हैं। सारे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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बसपा का सभी सीटों पर कब्जा होगा-नरेश

Posted on 09 August 2011 by admin

बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एंव संासद नरेश अग्रवाल ने कहा कि 2012 में होने वाले चुनाव बसपा जिले की फिर आठो सीटो जीतकर  अपना विजयी अभियान जारी रहेगा। पत्रकारो से बात चीत के दौरान उन्होनें कहा कि विपक्ष आरोप लगा रहा हैंै जब कि बसपा सरकार विकाश के नाम पर कांशीराम शहरी योजना बिजली की पूर्ति तथा अपराथी करण पर अंकूश लगाकर प्रदेश की जनता को राहत दी अग्रवाल जीने बताया कि जिलों में  सेन्ट्रल स्कूल के लिये ग्राम मलिहामाऊ के पास जमीन का चयन किया गया हैं। हमारी ताकत हमारी हरदोई की जनता हैं। और मै हमेशा  इसका आभारी रहूँगा।
बसपा आर्डिनेटर ने धोषित किया प्रत्याशी-जुगुल किशोर, मल्लाँवा, रजनित में ऊँट किस करवंट बदलेगा ये किसी ने नही सोचा था। पटेल गेस्ट हाउस में पूर्व ब्लाक प्रमुख ब्रजेश वर्मा को प्रभारी विधान सभा के साथ मल्लाँवा प्रत्याशी हाईकमान द्वारा बनाये जाने घोषणा करते हुए। कोआडिनेटर और सांसद जुगल किशोर ने कहा कि प्रदेश मुखिया बहन मायावती ने जहाँ गुन्डाराज खत्म करने के लिए सख्त अनुशासन बनाया उन्होनें अपने सांसद और विधायकों को भी नही बक्सा जुगुल किशोर ने क्षेत्रिय विधायक सतीश वर्मा पे प्रहार करते हुए कहा कि फाईनेन्स कंम्पनी का पैसा देने की बात कही परन्तु सतीश वर्मा ने हल्के में लिया  और पार्टी छोड़कर सपा में चलेगए। पहले विधान सभा की सदस्यता से त्याद पत्र दें। फिर सदस्यता ग्रहण करें। बैठक में बसपा जिला अघ्यक्ष शिदत्त सिंह सांसद  अशोक रावत विधायक नितिन अग्रवाल विधायक राजेस्वरी एमएलसी अब्बदुल हन्नान जिला प्रभारी नेकपाल भारतीय, ब्रजेश वर्मा की भीड़ का सफर विधान सभा तक कितना तया करेगा ये 2012 बतयेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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जिला सुरक्षा संगठन पर मुझे पूरा भरोसा: एसपी

Posted on 09 August 2011 by admin

1जिला सुरक्षा संगठन जैसे संगठन जिले में  मौजूद होने पर मुझे पूरा भरोसा है कि यदि कभी जिले में कोई बात होती है तो इस संगठन के सदस्यों के माध्यम से किसी भी हालात पर काबू पाया जा सकता है। उक्त बातें जिला सुरक्षा संगठन के पदेन अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक गोविन्द अग्रवाल ने मीत एसोसिएट्स पर संगठन की आयोजित एक विशेष बैठक में बोलते हुए व्यक्त की।
श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि एक समय था जब मैं यहा सीओ के रूप में था तब उस समय शहर में बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए अच्छे लोगों को ढूंढ़ा जा रहा था तो बहुत मुश्किल से लोग मिले थे, किन्तु आज जिला सुरक्षा संगठन के गठन से वह नौबात नहीं आने पायेगी। उन्होंने आगे कहा कि हम लोग सरकारी सेवा में रहकर सुरक्षा प्रदान करने का काम करते हैं, किन्तु इस संगठन से जुड़े लोग अपने काम को छोड़कर जिले में अमनचैन कायम करने का निःस्वार्थभाव से जो कार्य कर रहें है उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस संगठन के माध्यम से हम आपसी झगड़ों को भी सुलझाने का काम करेंगे तो हमारा जिला अनहोनी घटनाओं से बच सकेगा। पुलिस अधीक्षक श्री अग्रवाल ने कहा कि आगे से जब भी संगठन की बैठक हो तो उस क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों को भी बुलाया जाये जिससे उनकी मौजूदगी में जो बातें होे वह भी आपस में तालमेल बनाने में सहयोगी बन सकें।
संगठन में महासचिव सरदार बलदेव सिंह ने कहा कि संगठन सद्भाव, सुरक्षा व समन्वय को ध्यान में रखकर कार्य करता है। इसकी स्थापना 2001 में हुई थी। संगठन के लोग जब भी समाज को जरूरत पड़ी तो खड़े होकर आने वाले समस्याओं का मुकाबला कर शांत व्यवस्था बनाने में अपनी अहम् भूमिका निभाई है।
इस बैठक मंे संगठन के संयोजक सुन्दरलाल टण्डन, उपाध्यक्ष कमलनयन पाण्डेय, सचिव जनसम्पर्क डाॅ0 नैय्यर रजा ज्ैादी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन कार्यालय सचिव राधेश्याम गुप्ता व धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष नरेश माहेश्वरी ने किया। बैठक में सभासद उषा श्रीवास्तव, डाॅ0 अनिल पाण्डेय, अशोक अग्रवाल, भुलईराम गुप्ता, मो0 इलियास, अरूण जायसवाल, विजय विद्रोही, अशोक जायसवाल, रामचन्द्र गुप्ता, सतीश तिवारी, मो0 राशिद, मो0 जाहिद, डाॅ0 अब्दुल मन्नान आदि मौजूद रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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जनपद की समस्त तहसीलों में भ्रष्टाचार हावी

Posted on 07 August 2011 by admin

शासनादेशों की उड़ रही है धज्जियां, मनचाहे स्थानों पर कर दी जाती है नियुक्ति

राजस्व विभाग प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण धुरी है। इसीलिये प्रदेश शासन ने इसकी देखरेख और नियन्त्रण का जिम्मा उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद को सौंपकर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भी इस विभाग पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिये हैं। जिसके लिये बकायदा प्रत्येक जिले में एक अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की तैनाती और उसके साथ प्रत्येक तहसील के काम काज में सीधा दखल रखने के लिये उप जिलाधिकारी भी तैनात किये हैं परन्तु यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि जितनी चाक चैबन्द व्यवस्था राजस्व विभाग की शासन ने कर रखी है उसमें उतना ही भ्रष्टाचार बढ़ा है। आम आदमी तहसीलों में पनपे भ्रष्टाचार से कराह रहा है। किसी स्तर पर भी पीड़ित और प्रताड़ित पक्ष की सुनवायी नहीं हो रही है।
जनपद शाहजहांपुर में पुवायां, तिलहर, जलालाबाद एवं सदर चार तहसीलें हैं। इन तहसीलों में आज कल सर्वाधिक भीड़ आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने वालों की हैं। क्योंकि सभी अभिभावकों को स्कूलों में छात्रवृत्ति पाने के लिये आय, जाति प्रमाणपत्रजमा करना आवश्यक है। इसके अलावा हैसियत प्रमाण पत्र, वृद्धावस्था, विकलांग पेंशन व कांशीराम आवास आवंटन के आवेदनों का काम भी लगातार चलता ही रहता है। जिन लोगों को तहसील में काम पड़ जाये उन्हें दिन में तारे दिखाई पड़ने लगते हैं। क्योंकि तहसीलों में बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। राजस्व कर्मी तो आम आदमी से वसूली करते ही रहते हैं। लेकिन तहसीलों में वकीलों से ज्यादा संख्या में तो काबिज दलाल और मुंशी आवेदकों को ठग रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी आम आदमी को हो रही इस असुविधा पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
यू ंतो प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने जनहित गारन्टी कानून लागू कर हर काम की समय सीमा और उसका शुल्क तय कर दिया है परन्तु तहसीलों में कार्यरत राजस्व कर्मी प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की महत्वाकांक्षी योजना जनहित गारन्टी कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा 20 दिन निर्धारित कर रखी है। परन्तु शायद ही किसी आवेदक को समय सीमा से प्रमाण पत्र मिल पाता हो।
तहसील कर्मचारियों द्वारा आवेदन पत्रों के साथ डाक से प्रमाण पत्र भेजने के लिये 25/- मूल्य का स्पीड पोस्ट लिफाफा लगवाया जा रहा है। जबकि स्थानीय स्पीड पोस्ट 12/- मूल्य के डाक टिकट पर स्वीकार्य है। इसके अलावा एकल खिड़की पर प्रत्येक आवेदन पत्र के साथ बीस रूपये का शुल्क लिया जा रहा है। साथ ही यदि किसी अभिभावक को अपने दो या तीन बच्चों के लिये आय, जाति या निवास प्रमाण पत्र बनवाना हो तो प्रत्येक में अलग-अलग शपथ पत्र लगवाया जा रहा है। जबकि एक आवेदन पत्र में मूल शपथ पत्र तथा शेष में शपथ पत्र की छायाप्रति लगवायी जा सकती है। लेकिन आम आदमी को हो रही इस असुविधा की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को लिखित शिकायत की जा चुकी है।
इस सबके साथ ही तहसील में कार्यरत लेखपालों के कारिन्दे भी जांच के नाम पर आवेदकों से धन उगाही कर रहे हैं। तहसील सदर में वकीलों से ज्यादा अपंजीकृत मुंशियों व दलालों की भरमार है जो आवेदकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। जिला स्तर पर शिकायत करने के बाद भी तहसील परिसर में दलाल और अपंजीकृत मुंशी आज तक नहीं हटाये गये हैं। इन सब बातों को यदि छोड़ भी दिया जाये तो उसके बाद भी तहसील सदर में गदर मचा हुआ है। जहां प्रत्येक सीट पर बैठा अधिकारी और कर्मचारी केवल धन उगाही में व्यस्त है। आम आदमी की सुविधासे उसे कोई सरोकार नहीं है।
तहसील सदर में नायब तहसीलदार के चार पद सृजित हैं परन्तु केवल दो नायब तहसीलदार कार्यरत है। जिन के पास एक-एक क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार भी है। कानूनगो राजस्व निरीक्षक के छह पद हैं लेकिन मात्र दो राजस्व निरीक्षक कार्यरत हैं। चार पदों पर लेखपालों को अतिरिक्त प्रभार देकर उन्हें राजस्व निरीक्षक बना दिया गया है। जिसमें तहसीलदार और उप जिलाधिकारी ने बड़ा खेल खेला है। जमौर क्षेत्र में एक ऐसे लेखपाल को प्रभारी राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनाती दी गई है जिसकी सर्विस बुक में पांच एडवर्स इन्ट्री हैं। इसके अलावा अभी तक एक वर्ष पूर्व घुसगवां गांव में फर्जी पट्टे का मामला प्रकाश में आने पर इन महाशय को निलम्बित भी किया जा चुका है। सुरेन्द्र सिंह नामक इस लेखपाल द्वारा अपने राजस्व निरीक्षक प्रभारी कार्यकाल में जो फर्जी पट्टा किया गया उसमें लेखपाल महरम सिंह सिंह के साथ-साथ तत्कालीन तहसीलदार राजमणि के साथ राजस्व निरीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह को भी निलम्बित किया गया। लेकिन इन महाशय की घुसपैठ और कलाकारी के परिणामस्वरूप बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के इन्हें जमौर का प्रभारी राजस्व निरीक्षक बना दिया गया।
इससे भी बड़ा यदि कमाल देखना है तो ददरौल क्षेत्र के प्रभारी राजस्व निरीक्षक हरी सिंह पर नजर डालें तो यह महाशय अजीजगंज क्षेत्र क ेलेखपाल हैं और ग्राम बबौरी इलाका मरेना मजरा बनकटा के निवासी हैं। इनके सगे भाई अमौरा गांव के प्रधान हैं और यह जनबा अपने मूल निवास क्षेत्र के गांव के प्रभारी राजस्व निरीक्षक हैं जबकि शासनादेश यह है कि कोई भी लेखपाल अपने ब्लाक में नियुक्ति नहीं पा सकता परन्तु यहां शासनादेश की खुली धज्जियां सड़ाई जा रही हैं।
तहसीलदार सदर मधुसूदन आर्य ने अभी हाल ही में एक दर्जन लेखपालों का इधर से उधर किया है जिसमें मात्र एक लेखपाल कृपाशंकर सक्सेना को तो प्रशासनिक आधार पर तथा दो को 12 वर्ष का कार्यकाल एक ही क्षेत्र में होने के कारण हटाया। जबकि आठ लेखपालों को स्वयं की मांग पर उन्हें मनचाहे क्षेत्रों में तैनाती दी गई। स्वयं की मांग पर नियुक्ति दिये जाने का आधार क्या है ? इस अर्थ प्रधान युग में सहज ही समझा जा सकता है। स्वयं की मांग पर लेखपाल अवधेश सक्सेना को शहर क्षेत्र में चैथी बार नियुक्ति दी गई। इससे पूर्व वह दो बार शहर खास दक्षिणी और एक बार शहर खास उत्तरी क ेलेखपाल रह चुके हैं। शहर में लेखपालों को मोटी कमाई होती है इसीलिये वह तहसीलदार को चढ़ावा चढ़ाकर मनमाही जगहों पर नियुक्तियां पा रहे हैं। इसमें शासनादेशों की अनदेखी की जाती है। रमन लाल मिश्र विकलांग लेखपाल है। एक वर्ष का अवकाश काटने के बाद स्वंय की मांग पर चैढ़ेरा गांव के लेखपाल पद पर नियुक्ति पाये हैं। इन्हें नजदीकी क्षेत्र में तैनात किया जाना चाहिये था परन्तु आर्थिक दृष्टि से कमाऊ क्षेत्र का चार्ज इन्हें स्वयं की मांग पर दिया गया।
तहसील सदर में सारा खेल रजिस्ट्रार कानूनगो राजेन्द्र कुमार मिश्र द्वारा खेला जा रहा है जो दुबारा इस तहसील में इसी पद पर नियुक्ति पाये हैं और सदर क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। रजिस्ट्रार कानूनगो के साथ साथ सहायक भूलेख अधिकारी के मलाईदार पद का अतिरिक्त प्रभार भी इन्हीं के पास ही है। मालबाबू के पद पर दुबारा आसीन हुये अशोक मिश्रा भी सबसे ज्यादा माल काट रहे हैं। डाक से भेजे जाने वाले प्रमाण पत्रों का सुविधा शुक्ल लेकर एकल खिड़की से ही दे दिये जाने से इन्हें दोहरी कमाई हो रही है। एक तो नकद सुविधा शुल्क मिल रहा है। दूजे 25/- मूल्य के डाक टिकट का लिफाफा भी इन्हीं की जेब में जाता है जो पुनः बिक्री हो रहा है। तहसील सदर में मचे इस गदर को देखने वाला कोई नहीं है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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बाल विकास परियोजना - अधिकारियों के लिए बनाया मजाक

Posted on 07 August 2011 by admin

खुलेआम बाजार मंे बिक रहा है पोषाहार

शासन द्वारा चलायी जा रही महात्वाकांक्षी योजना बाल विकास परियोजना को अधिकारियों ने मजाक बनाकर रख दिया है। जहां शासन इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च कर रही है वहीं इस योजना में लगे अधिकारी इसका दुरुपयोग कर पोशाहार को धड़ल्ले से खुले बाजार में बिकवा रहे हैं।
बाल विकास योजना के अन्तर्गत क्षेत्र में 116 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की नियुक्ति है। जिन पर उन्हें छह वर्ष के बच्चों को कुपोशण से बचाने व प्रारम्भिक शिक्षा देने के साथ गर्भवती महिलाओं की देखरेख व टीकाकरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है, परन्तु यहां क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि विद्यालय में बनवाये गये आंगनबाड़ी कक्ष कार्यकत्रियों केे अभाव में सूने पड़े रहते हैं और उन कक्षों में अराजक तत्व अपना डेरा जमाये रहते हैं। क्योंकि आज इन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। बताते हैं कि उक्त योजना में अधिकांष कार्यकत्री अमीर घराने की महिलायें हैं। क्षेत्र में जाना क्या अपने घरों से भी नहीं निकलती है और पोषाहार का उठान उनके पति या अन्य लोग लाकर अधिकारियों से सांठ-गाठ कर लेते हैं और सीधे बाजार में बेच देते हैं। कार्यकत्रियों के पतियों ने उनके नाम से चेक बुक जारी करा रखी हैं। जिस पर फर्जी हस्ताक्षर कर पोषाहार का पैसा भी डकारने में लगे हुए हैं। इस गोलमाल में प्रशासनिक अधिकारी अपना पूरा रोल अदा कर रहे हैं। केन्द्र संचालित कर रहे फर्जी लोग जमकर पोषाहार की लूट खसोट करने पर अमादा हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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कोड बाॅट कर उपसंभागीय अधिकारी दलालों के माध्यम से कर रहे उगाही

Posted on 07 August 2011 by admin

कोड के आधार पर उप संभागीय परिवहन विभाग में   धनउगाही व भ्रष्टाचार का बोलबाला है। कोड बॅांटकर दलाल व अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। कोड सुविधा के लिये हर ट्रक मालिकों को खरीदना जरूरी होता है। बिना कोड के चल रहे ओवर लोड गाड़ियों को पकड कर अधिकारी अपना गुडवर्क दिखा देते हंै। इस गोरखधन्धें में राजस्व हानि तो हो रही है साथ ही अरबो रूपये की लागत से बनी सड़क मानक से कई गुना अधिक लदे माल की ट्रक पार होने से गड्ढों में तब्दील हो जाती है। उप संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों का जिम्मा है कि ओवर लोड ट्रक कत्तई न चलने पाये, ओवर लोडिंग पाये जाने पर ट्रक के खिलाफ कार्यवाही की जाय, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उल्टी है। ओवर लोड ट्रकों का संचालन धडल्ले से किया जा रहा है, ट्रकें वही पकड़ी जाती है जो परिवहन विभाग द्वारा जारी गोपनीय कोड नहीं खरीदता। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ओवर लोड ट्रकों के पांसिग का कोड बन्धुआ स्थित मस्जिद के सामने उमर के होटल से लेकर जिले में हर जगह होटलों ढाबो पर आसानी से मिल जाता है। लखनऊ वाराणसी राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर तो कई ऐेसे होटल हंै, जहां पूरे उत्तर प्रदेश का कोड पल भर में मिल जाता है। करना यह होता है कि ट्रक चालक कोड बेचने वालांे के पास पहुंचता है तेा वह उसे रूपया देकर अपना गाड़ी नम्बर उसे लिखवा देता है। उसके वाद कोड बेचने वाला व्यक्ति ट्रक चालक को विजटिंग कार्ड पर कोड लिखकर थमा देता है,यह फिर यही कोड गाड़ी के कागजात पर लिख देता है। तयशुदा तिथि पर दलाल अपनी लिस्ट विभागीय अधिकारियों कोे पहुंॅचा देते हैं। चेकिंग के दौरान जब गाड़ियाॅ रोकी जाती है तो वाहन चालक कोड का जिक्र कर देते हैं। इतने पर भी बात नही बनती दलाल द्वारा भेजी गयी लिस्ट से मिलान किया जाता है।,
यदि उक्त गाड़ी नम्बर लिस्ट मे ंपायी जाती है तो माल कितना भी अधिक लदा हो केाई कार्यवाही नहीं होगी, लेकिन कोड न मिलने की स्थिति में लम्बा जुर्माना तय है। सूत्रों से पता चला है कि इस गोरखधन्धे में हर महीने लाखों रूपये की कमाई आसानी से हो जाती है। बेचे गये कोड का कुछ पैसा दलाल भी पा जाते हंै। अकूत कमाई के चलते कोड बेचने वालो की लम्बी लाइन है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि इस अकूत कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहंुचता है। जिसकी वजह से अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्व कोई कार्यवाही नहीं हेाती। इस गोरखघन्धें में परिवहन विभाग के कर्मचारियों के सगे सम्बन्धी ही इस गोरख धन्धे में चार चांद लगा रहे हंै। यह गोरखधन्धा जिला ही नही बल्कि सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश मे धडल्ले से चल रहा है। सेटिंग-गेटिंग कर हर जिले की कोड की मोनोपोली दलाल हासिल कर लेते हैं। सूत्रांे का तो यह भी कहना है कि यदि पुलिस विभाग  के अधिकारी कागजातों की जांच व ओवरलोडिंग ट्रक चालकों से पूछ ताछ की जाय तो इस गोरखधन्धे का ख्ुालासा आसानी से हो जायेगा, क्येाकि ट्रक चालक तो यह कोड मुफ्त में न लेकर हजारों रूपये देकर खरीदते है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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September 2026
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