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न तो डंडे रंगें गये न चने भिगोये गये ………फिर भी गुडि़या मना ली गयी

Posted on 13 August 2013 by admin

न तो डंडे रंगें गये न चने भिगोये गये
………फिर भी गुडि़या मना ली गयी

न तो डंडे रंगें गये न चने भिगोये गये न अखाड़े खोदे गये न तो दांव लगाये फिर भी गुडि़या मना ली गयी। बेचारी गुडि़या का श्रृंगार ही नहीं हुआ तो वह पिटती कहां से। चने और उड़द की दाल बाजार से आयी नहीं तो वह पिसती कहां से। गुलगुले और ठोकसा भी कड़ाही में नाचने को तरस गये। बेचारे नाग देवता को गाय का दूध ही कहां से मिले जब घर के दरवाजे से नाॅंद व खूंटे ही गायब हैं? गाय के गोबर से घरों की लिपाई अब किस्से कहानी में ही होगी।
‘गुडि़या’ अर्थात नाग पंचमी भारतीय संस्कृति के संवाहक पर्वों की श्रंखला का प्रथम सोपान है।
जिस दिन आये नाग
उस दिन गायें फाग
यानी नाग से फाग तक की अटूट श्रृंखला में पर्व हमारे संस्कारों को सहेजनें का काम करते थे। अब धीरे-धीरे सभी तीज त्योहार केवल रस्म अदायगी भर रह गये हैं। नाग पंचम के दिन सुबह से गुडि़यों का श्रृंगार शुरू हो जाता। बच्चे अपने डंडे रंगने में व्यस्त रहते। बड़े लोग अखाड़े खोदने व कबड्डी के पाले बनाने में लग जाते और बूढ़े दांव की बारीकी बताते। यह सब घर के आंगन के बाहर की बात थी। भीतर मातायें कोने-कोने की सफाई व दरवाजे को गोबर से लिपाई करने के बाद प्रत्येक कमरों में गाय का दूध छिड़कती।कटोरी भर कर दूध और चावल नाबदान के पास रखा जाता था। मान्यता है कि नाग देव प्रत्येक घरों में नाबदान के रास्ते आंगन तक आकर दूध पीते हैं। चने की दाल व उड़द की दाल पीसने के लिए अलग सिल बट्टे धाये जाते थे। घरों से पकवान बनने की भीनी सुगन्ध से पूरा वातावरण भर जाता था। खीर, पूड़ी, कचैड़ी, बरा, कढ़ी, चावल, गुलगुला, ठोकवा, दालपूरी, सब्जी तैयार होते-होते दोपहर हो जाती। इस बीच लड़कियों का झुण्ड तालाबों की ओर गीत गाती हुई अपनी-अपनी गुडि़यों की विदाई के लिए चल पड़ती तो पीछे-पीछे बच्चों का झुण्ड भी रंग बिरंगे डंडे लहराता अपनी ‘वीरता’ को आतुर होकर चलता। गुडि़या तालाब के किनारे दोनों पक्ष एकत्र हो जाते तब गुडि़यों की विदाई हेाती। उन्हें तालाब में प्रवाहित किया जाता और बच्चे डंडे लेकर तालाब में कूद पड़ते। गुडि़यों की निर्ममता से पिटाई ‘विदाई’ होती। बाहर निकलकर बहनों के हाथ से चने का प्रसाद व दक्षिणा ‘दो आने/चार आने’ लेकर डंडोुं को भी तालाब में फेंककर चले आते फिर वे अखाड़ों व खेल के मैदान में देर तक बने रहते। घर में बने विविध व्यंजन बूढ़ों की प्रतीक्षा करते।शाम ढलने से पूर्व ही दरवाजे पर लगी नीम की डालें इठलाने लगती। उन पर झूले पड़ जाते और कजरी गीतों की धुन से गांव की गलियां, झंकृत हो उठती। इस बीच नाई, धोबी, लुहार, कुम्हार, धरिकार व हलवाहों का परिवार अपने-अपने किसान के घर बायन के लिए जाता उनकी खूब आवाभगत होती और घर में बने सभ्ीा व्यंजन उन्हें सम्मान पूर्वक परोसे जाते। सामाजिक समरसता व परस्पर भाई चारे की यह संास्कृतिक विरासत अब लुप्त हो गयी है। घरों के सामने से नीम क्या गायब हो गई अन्य पेड़ों की डालें भी झूले के लिए तरस रही हैं।‘बायन’ की प्रथा खत्म हो गयी। अखाड़ों से दांव गांव से बाहर हो गये। सावनी गीतों की धुन में घुन लग गया। माताओं बहनों को अब केवल टी.वी. पर ही सुनकर संतोष कर लेना पड़ता है। ग्रामीण खेलों की शुरूआत भी नागपंचमी से ही होती थी जो अब बीते दिनों की बात हो गयी है। जितने अधिक ‘राजनैतिक दल’ बनते जा रहे हैं ‘गांव’ उतने ही भागों में बंटता जा रहा है। गांव से ‘पायलागी’ और ‘जैरमी’ पूरी तरह गायब हो गयी है। अब हमने विकास जरूर कर लिया है किन्तु मानवीय मूल्यों और रिश्तों की विरासत खो चुके हैं।
अल्हैत और लठैत गांव से गुम हो गये। अब गांवों में आल्हा की धुन कहीं सुनने को नहीं मिलती। आल्हा-उदल की कथा वीरता की पर्याय मानी जाती है जिसे सुनने के लिए अब केवल कैसेटों का सहारा लिया जाता है। तीन-चार दशक पूर्व तक आल्हा की पुस्तकें गांव के मेलों में भ्ीा बिकती थी। अब न केवल आल्हा गीत बल्कि अनेक लोक गीतों की परम्परा भी लुप्त होती जारही है। लोकगीतों के लेखकों व गायकों का बहुत सम्मान था किन्तु अब ऐसा नहीं है।
-डा0 भगवान प्रसाद उपाध्याय
9455324157

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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गाय व साॅडों की दयनीय हालत

Posted on 10 August 2013 by admin

दिनांक 08.08.2013 की बीती रात सैक्टर 10 रामलाल वृद्धाश्रम के निकट एक साॅड को जली हुई अवस्था में पाया गया, देखने से पता चला कि उस पर किसी व्यक्ति ने द्वेशभाव से तेजाब फेंका है जिससे वह अत्यन्त बुरी दशा में पाया गया। ऐसी घटना राम लाल वृद्धाश्रम के निकट पहली नहीं। इससे पहले भी यही घटना हो चुकी है। इस पर खेद जताते हुये आगरा क्षेत्रीय विकास संरक्षण समिति के संस्थापक हरि प्रसाद सारस्वत ने कहा कि नगर निगम से इनकी देखभाल नहीं हो रही तो वह राम लाल गौशाला भेज दें। ताकि उनकी देखभाल अच्छी से हो सके। प्रशासन की अनदेखी सहन नहीं की जायेगी। edited-sand
विष्णु शर्मा अध्यक्ष ने कहा कि जीव जन्तु कल्याण बोर्ड को ध्यान देना चाहिये, नगर निगम ने आवारा पशुओं के लिए बनाई है वह जगह कहाॅ है।
संस्था के संरक्षक पुष्पेन्द्र त्यागी ने बताया कि सांॅड के ना होने से इनकी प्रजाति खत्म हो जायेगी, जानवरों  की ऐसी स्थिति देखकर बड़ा दुख होता है
रामलाल गउ शाला के अध्यक्ष नन्दकिशोर शर्मा ने कहा गाय व साॅडों की हालत इतनी दयनीय है। कि आये दिन ऐसी घटनाऐं शहर में होती हैं।इन घटनाओं की जिम्मेदारी नगर निगम व प्रशासन की होनी चाहिए। समिति के सभी सदस्यों ने दुख जताया और प्रशासन से इनकी सुरक्षा की मांग की।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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जिले के कर्मचारी अधिकारी पैसे पैसे के लिए मोहताज

Posted on 02 August 2013 by admin

जनपद के कोषागार पर जिलाधिकारी का भी नियंत्रण नही रह गया है अब मुख्यमंत्री ही सुधार सकते है अपने कर्मचारियों की पेमेंन्ट व्यवस्था ।
गौरतलब हो कि जब से सरकार ने ई-पेमेन्ट व्यवस्था लागू की है तब से जिले के कर्मचारी अधिकारी पैसे पैसे के लिए मोहताज हो गये है और उसके लिए नये नये रास्ते निकाल रहे है जाहिर है कि कर्मचारियों को तीन तीन माह से वेतन नही मिला हो और परिवार लम्बा हो बच्चे पढ़ने लिखने खाने पीने वाले हो या भाडे का मकान हो तो कोई कैसे इस मंहगाई मे जीवित रहेगा और तो और कोषागार के बाबुओ का कोई ठिकाना नही है कि इस माह पैसा बैंक खाते मे डाल ही दे तो ऐसे मे कर्मचारी क्या करेगा उसे कौन सा दुकानदार आखिर कब तक उधार देगा ?
बच्चो का एडमीशिन बिना पैसे के कौन से स्कूल मे होगा, कर्मचारी की पत्नी का बिना पैसा ईलाज कौन डाक्टर करेगा अब तो सरकारी अस्पताल मे भी बिना पैसा ईलाज नही होता तो कर्मचारी क्या करें । काम के बदले पैसा ले और हो भी रहा है कुछ ऐसा ही राज्य सरकार के मुखिया और डी.एम. सुलतानपुर को पैसे व वेतन की समस्या आडे आती ही नही वो क्या जाने एक सरकारी चपरासी के परिवार की पीडा जबकि जिले मे सीट सम्भालते ही कोषागार का चार्ज लेने वाली डी.एम. उस दिन के बाद शायद ही कभी कोषागार गई हो ? उन्हे शायद यह भी नही मालूम की पेंशनरों को आज भी माह की १० ता० के बाद ही पेशन मिलती है कर्मचारियों को मिलने वाला डी.ए. बिना पैसे के शायद ही किसी पेंशनर को मिलता हो ।
जब कर्मचारियों को वेतन आन लाईन सेंड करने मे तीन माह से छरू माह लगता है तो सोचा जा सकता है कि क्या हालात है कोषागार के कोषागार अधिकारी को उनको क्लर्क कुछ समझते ही नही है जब मन करता है नजराना मिल जाता है तो सीट पर बैठते है वरना आप खोजते रहियें दिन पर दिन महीने पर महीने बीतते रहेगें वेतन नही जायेगा ।
ऐसे में ज्यादातर कर्मचारी अपनी सीटो पर काम के बदले अनाज की तर्ज पर काम के बदले नजराना ढूढते मिल जायेगे आखिर क्या करें किससे कहे मुख्यमंत्री ने कसम खाई है कि सुलतानपुर के हालात व प्रशासनिक व्यवस्था नही सुधारेगें न जिम्मेदारो को कुछ कहेगें चाहे कर्मचारी बिना वेतन भीख मांगे या जनता से घूस मांगे जिले को किसी तरह चलाने पर अमादा है सरकार । ऐसे मे जनता कर्मचारी सभी त्रस्त है ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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बाटला हाउस कांड पर न्यायालय के निर्णय पर खुशी

Posted on 02 August 2013 by admin

भारतीय जनता युवा मोर्चा केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार भाजयुमो के जिलाध्यक्ष आशुतोष सिंह के आह्वान पर कार्यव्रहृम अध्यक्ष प्रवीण मिश्र तथा आकाश जायसवाल एवं प्रदीप यादव के संयोजकत्व मे बाटला हाउस कांड पर न्यायालय के निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुये तथा केन्द्र सरकार एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनियां गाधी के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया गया । edited-dscn25351
कार्यव्रहृम की अध्यक्षता करते हुए प्रवीन मिश्र ने कहा कि न्यायालय के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि बटला हाउस कांड फर्जी एनकाउन्टर न होकर आंतकवाद विरोधी अभियान था । इस मौके पर सेक्टर प्रमुख आशीष सिंह रानू ने कहा कि अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि इस अभियान मे मारे गये इंस्पेक्टर एम.सी.शर्मा शहीद थे और मारे गये आतंकवादियों की पैरवी करने वाले दिग्विजय सिंह व अन्य कांग्रेस नेताओं को देश से माफी मांगनी चाहिए । इस अवसर पर भाजयुमों कार्यकर्ता सुपर मार्केट कार्यालय से शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुए केन्द्र सरकार एवं आतंकवादी विरोधी नारा लगाते हुए कलेक्ट्रेट के सामने पुतला दहन किया गया ।
इस अवसर पर डा० एम.पीत.सिंह, रामचन्द्र मिश्र, विजय त्रिपाठी, विजय मिश्र, श्याम बहादुर पाण्डेय, नीलेश, विमलेश, विवेक श्रीवास्तव, अशोक यादव, सुमित श्रीवास्तव, धर्मेन्द्र वर्मा, गिरीश, नन्दन, लालेन्द्र प्रताप, शिवम सिंह, प्रशान्त, सुशील दूबे, गुडडू, रत्नेश, जयकृष्ण पाण्डेय, विजय सिंह रघुवंशी, प्रीति शर्मा, कोकिला तिवारी, संतबक्श सिंह चुन्नू, दिनेश चैरसिया, मंगरु प्रजापति, अखिलेश जायसवाल, सतपाल सिंह, सुरेन्द्र, गौतम, धर्मेन्द्र, रवि श्रीवास्तव, उमा सिंह, समेत अनेक कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे ।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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मनरेगा संविदा कर्मी भुखमरी के कगार पर

Posted on 02 August 2013 by admin

जनपद के मुख्य विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक की गैर जरुरी अंडगे बाजी से भुखमरी के कगार पर पहुंच गये मनरेगा संविदा कर्मी।
गौरतलब हो कि जिले मे न तो शासन का कोई महत्व है न सरकार का जो अधिकारी जहां बैठा है वहां का संविधानबिद स्वयं बन बैठा है उसके अधीन कर्मी शोषित और पीडित है । मनरेगा के सैकडो संविदा कर्मी इनकी  हठ धर्रि्मता और स्वेच्छा चारिता की त्रासदी का नमूना बन चुके है न सरकार सुन रही है न मंडलायुक्त । विकास कार्यो की समीक्षा बैठका कागजी और औपचारिकता बन चुकी है ।
सोचा जा सकता है कि मनरेगा कर्रि्मयों को जब वेतन ही नही मिलेगा तो वो कैसे विकास कार्यो की निगरानी करेगें या सरकार के आदेश को मरेगे । एक दो माह हो तो मांग जांचकर चल जायेगा मगर एक वर्ष पूरा वेतन न दीजिए और किसी कर्मचारी या सेवक से काम लीजिये तो इसे क्या कहा जायेगा । इसे मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव स्वयं अपनी भाषा मे प्रसारित करें तो जनता और कर्मी समझे कि यह कार्य कौन सी के अन्र्तगत आती है । जिले के मुख्य विकास अधिकारी और स्वयंभू पी.डी. अपना तो वेतन उठा ही रहे है और इन बेचारे संविदा कर्मियों को इनके संवैधानिक अधिकार काम के बदले वेतन से क्यो और किस स्वार्थ मे वंचित किये है ?  जिनमें एक सैकडा तकनीकी सहायक, तेरह ए.पी.ओ. १३ कम्प्यूटर आपरेटर, तेरह एकाउंटटेंट आज शासना देश होते हुए भी भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके है ।
ऐसा नही है कि शासना देश न हो ग्राम्य विकास सचिव मनोज सिंह द्वारा जारी शासना देश ७६५३/३८-७-२०१०-१०एन आर टी जी ए / ०५ टी सी-११-११-२०१० को प्रभावी रहते हुए भी जिले के अधिकारी मनरेगा कर्मियों से तेजी और गुणवत्त्ता तो चाहते है मगर वेतन देने में कौन से मंत्री ने इन्हे भूख मारने का आदेश दिया है ? क्या मुख्य मंत्री या मुख्य सचिव ने इनके वेतन वितरण पर रोक लगाई है ? यह बताने वाला कोई नही है आखिर ये मनरेगा कर्मी प्रधान व सेकरेट्री के भ्रष्टाचार का सी.डी.ओ. और पी.डी. नही है ? या मनरेगा योजना जिले मे फेल हो जाये तो इसका दोषी कौन है ?

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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धनपतगंज पर जल भराव से लोगो ने रोड जाम किया ।

Posted on 30 July 2013 by admin

थाना कूडेभार अन्तर्गत हलियापुर कूरेभार रोड पर विकास खण्ड धनपतगंज विकास खंड मुख्यालय पर जल भरवा से आजिज आकर आखिर मे लोगो ने रोड जाम कर दी दिया जिससे जनपद की सडक पर आवागमन आधित हो गया । सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगो को समझाया जाम स्थल पर देर से पहुंचे तहसीलदार सदर ने उग्र भीड़ को समझाकर आश्वासन दे जाम खुलवाया ।
कूडेभार हलियापुर स्थित धनपतगंज बाजार विकास खण्ड मुख्यालय तथा आस पास के गांव जलभराव की चपेट मे है सैकडो बीघे खेत जलमग्न है यही नही इस सडक पर स्थित एस.बी.आई., केनरा बैंक, बैंक आफ बडौदा  तथा विकास खंड मुख्यालय के सामने थोडी बरसात से ही अच्छा जलभराव हो जाता है जिससे दर्जनो लोग दुर्घटना ग्रस्त हो गये है ।
समस्या को लेकर ग्राम वासियों व क्षेत्रीय लोगो ने प्रार्थना पत्र देकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की थी परन्तु समस्या हल न होते देख लोगो का आव्रहृोश बढ गया और सोमवार को हजारो लोगो ने जाम लगा दिया जाम की सूचना पर थानेदार मय फोर्स आकर लोगो को समझया व जिला प्रशासन को भी अवगत कराया और तहसीलदार सदर ने पहुंचकर लोगो अस्वासन की घुटटी पिला कर जान झुडाई जाम ५ घंटे से लगा रहा ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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विद्युत विभाग की लापरवाही से पिता पुत्र की मौत ।

Posted on 30 July 2013 by admin

जनपद के कुडवार थानान्र्तगत खैचिला ग्राम सभा मे विद्युत विभाग की लापरवाही से पिता पुत्र की असमय जान चली गई ।
प्राप्त जानकारीनुसार कुडवार थाने के खैचिला ग्राम सभा मे सोमवार प्रातरू खेत की टयूवबेल पर धान के खेत मे काम कर रहे पिता राम अचल यादव ५० वर्ष अपने काम मे जुटे थे कि उन्होने देखा कि उनका पुत्र राकेश यादव १९ वर्ष मेड के किनारे छटपटा रहा था और उसके पैर के पास बिजली का तार टूटा पडा था उसे बचाने दौडा पिता भी बिजली के टूटे तार की चपेट मे आ गया आस पडोस के लोगो ने गुहार पर पहुंचे मगर उनकी विद्युत प्रवाह के चलते एक न चली विभाग को मोबाईल से सूचना दी गई तब जाकर लाईन बंद की गई । मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया ।
वही दूसरी घटना कुडवार थानान्तर्गत फैजूमुआ का पुरवा निवासी दिनेश विश्वकर्मा के घर मे चल रहे फर्राटा पंखे तार पर जो कि जमीन पर पडा था उसके अबोध बच्चे छुटकउहृ ४ वर्ष का पैर पड गया उसे करंट ने चिपका लिया आनन  फानन मे बिजली का कनेक्सन काटा गया और बच्चे को स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया जहां डाक्टरो ने जांचो परान्त मृत घोषित कर दिया ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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गौरीशंकर के धाम पर भोले बाबा

Posted on 30 July 2013 by admin

स्थानीय तहसील का जनवारीनाथ धाम और शाहपुर स्थित गौरीशंकर के धाम पर क्षेत्रवासी भोले बाबा त्रिपुरारी सदा शिवशंकर को प्रसन्न करने के लिए आस्था के साथ जल चढाते है।
इस पवित्र मास जिसे शिव भक्त सावन या शिवमास भी कहते है उनकी पसंदीदा चीजे भी उन्हे जल के साथ अर्पित करते है । मन्दार पुष्प, धतूरा, भांग की डाली, बिल्वपत्र भगवान भोले भण्डारी को अति प्रिय बताया गया है ।
बिल्वपत्र के विषय मे भोलेभक्तो की जनश्रुति है कि इसको माता लक्ष्मी ने उत्पन्न किया  किम्बदन्ती है कि जगत के पालन हार भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी ने सावन मास मे संकल्प लिया कि प्रतिदिन एक हजार एक श्श्व्ेत कमल पुष्प शिवबाबा को अर्पित करुंगी।
जब उन्होने स्वर्णपात्र मे श्वेत कमल पुष्प को गिनकर रखा और मंदिर पहुंची तो उन्होने देखा उसमे से तीन पुष्प कम थे। वे संकल्प को पूर्ण करने के लिये परेशान हो उठी और बचे कमल पुष्पो पर जल का छीटा मारा पात्र व पुष्प पर जल पडते ही कमलो से एक पौधे का प्रादुर्भाव हुआ और इस पौधे मे त्रिदल की तरह अनगिनत पत्त्ते थे।
इन्ही पत्त्तो को तोडकर माता लक्ष्मी ने शिवलिंग पर चढाया तब से ये त्रिदल पत्त्ते माता लक्ष्मी की शिव की भक्ति की आस्था के कारण भोले भण्डारी गौरी शंकर को प्रिय हो गये यह पौधा बिल्व वृक्ष स्थानीय भाषा मे बेल का पेड व पत्त्ते बिल्वपत्र कहलाये।
एक मान्यता और भी है कि माता लक्ष्मी को लोग सदा जागृत मानते है इसलिये उनकी कृपा से उत्पन्न बिल्व वृक्ष व बिल्वपत्र भी हमेशा जागृत रहता है। यह एक दिन तोड़कर कई दिन शिव को अर्पित किया जा सकता है ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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आजादी की लडाई के लिए न्योता

Posted on 30 July 2013 by admin

देश के प्रख्यात समाजसेवी व जनतंत्र मोर्चा के संयोजक अन्ना हजारे ने सुलतानपुर मे दलीय व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि देश के संविधान मे पक्ष और पार्टियों का जिव््राहृ नही है । २६ जनवरी १९५० मे जब प्रजातंत्र आया तो उसी दिन पक्ष और पार्टियो का अस्तित्व खत्म हो जान चाहिए था । संसद में जनता अपना प्रतिनिधि चुनकर भेज सकती है ।
महात्मा गांधी ने उसी समय कहा था कि अब लोकतंत्र आ गया है । कांग्रेस पार्टी बर्खास्त करे किन्तु ऐसा नही हुआ । तब से आज तक पार्टियों के प्रतिनिधि संसद पहुंच रहे है और सत्त्ता से पैसा और पैसा से सत्त्ता की होड शुरु हो गई है । इन पार्टियों ने न सिर्फ दागियों का टिकट दिया बल्कि उनके लिए प्रचार भी किया । उन्होने कहा कि आज दिल्ली की संसद मे १६३ दागी सांसद है । तथा ३५ मंत्रियों मे १५ पर आरोप तय है । अपने सम्बोधन में अन्ना हजारे ने कहा कि जन लोकपाल और जन लोकतंत्र के बाद वह किसानो के लिए संघर्ष करेंगें ।
उनके पिछले आन्दोलन मे सरकार ने आश्वासन देने के बाद भी दो साल हो गया । जनलोक पाल बिल पास नही किया । वह देश भर मे लोकशिक्षा व लोक जागरुकता के लिए जनतंत्र यात्रा निकाले हुए है जों पंजाब से शुरु होकर उत्त्तर प्रदेश मे पहुंचा है । उन्होने गरीबो के १२ रुपये भोजन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सांसदो को यात्रा, मेडिकल,आवास सभी निरूशुल्क उपलब्ध होने के बाद भी पचास हजार के वेतन की क्या जरुरत है । इन सांसदो का वर्ष २००६ मे वेतन पांच हजार रुपये था । किन्तु इसके बाद संसद मे बिल पेश कर वेतन पचास हजार कर दिया गया ।
पहलें सांसद उसे पहले कम करें श्री हजारे ने कहा अपनी २६ वर्ष की उम्र के उनके जीवन मे एक ऐसा दौरा आया जब वह आत्महत्या करने के कगार पर थे । इसी बीच उन्हे स्वामी विवेकानन्द की एक पुस्तक मिली जिसने जीवन जीना सिखा दिया । उन्होने कहा कि युवावस्था मे यह संकल्प ले लिया था कि देश और समाज के लिए काम करेंगें और आजीवन विवाह नही करेंगें । आज ७५ वर्ष की अवस्था मे पहुचने तक कोई दाग नही लग सका अन्यथा देश के राजनेता आन्दोलन न चलते देते ।  इसके पूर्व उनकी टीम के संतोष सरोज ने सम्बोधित करते हुए कहा कि अन्ना टीम जनता को दूसरी आजादी की लडाई के लिए न्योता देने आये है ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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बार एसोसिएसन सुलतानपुर संघ के पदो पर मतदान

Posted on 30 July 2013 by admin

बार एसोसिएसन सुलतानपुर संघ के २३ पदो पर चुनाव के लिए सोमवार को मतदान हुआ । १३६७ मतदाताओं मे से कुल ११६७ अधिवक्ता सदस्यो ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया । मतदान के लिए कुल चार बूथ बनाये गये थे । प्रथम बूथ पर ३१२ मत, द्वितीय बूथ पर ३२५ मत, तृतीय २७५ मत, चतुर्थ बूथ पर २५७ मत पडे ।
अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय संघर्ष दिखायी पडा तथा सूत्रो के अनुसार महासचिव पद पर चतुष्कोणीय लडाई होने की उम्मीद है । अन्य पदो पर ज्यादातर एकतरफा स्थिति देखने को मिली । २३ पदो के लिए हुए मतदान की मतगणना शाम ४.३० बजे तक हुआ । वरिष्ठ उपाध्यक्षपद के लिए सुरेन्द्र कुमार व बैतुल्ला खां तथा मध्यम उपाध्यक्ष पद के लिए रवी प्रकाश पाण्डेय, धीरेन्द्र प्रताप सिंह, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए बजरंग द्विवेदी, सज्जाद हुसैन के बीच सीधी लडाई के संकेत सामने आये है ।
वहीं सह सचिव खुर्शीद क्लब पद के लिए राजेश सिंह तथा सह सचिव प्रशासन पद पर संजय सिंह, समीर पाण्डेय के बीच ज्यादा संघर्ष दिखायी पडा ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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