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Archive | पर्यावरण

एक लाख पौधे लगायेगा वैश्य फेडरेशन

Posted on 09 August 2012 by admin

आॅल इण्डिया वैश्य फेडरेशन ने इस वर्ष उत्त्तर प्रदेश में एक लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने आज इस बावत संगठन के सभी पदाधिकारियों व जिलाध्यक्षों को लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिये।
संगठन की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष अनूप अग्रवाल ने बताया कि ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन से उत्पन्न विसंगतियों पर संगठन ने चिन्ता व्यक्त की है। प्रदूषण नियंत्रण व प्राकृतिक संसाधनों का मितव्ययितापूर्ण दोहन करने के लिए जागरुकता फैलाने तथा प्रतिवर्ष भारी संख्या में वृक्षारोपण कराने की योजना बनी है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को वैश्य समाज अपना नैतिक व सामाजिक दायित्व मानकर इस अभियान का शुभारम्भ कर रहा है। इसके लिए जिलेवार लक्ष्य निर्धारित कर वृक्षारोपण अभियान आरम्भ करने तथा लगाये गये पौधों की समुचित देखभाल करने के निर्देश जिला इकाईयों को भेज दिये गये हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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2369.14 लाख रुपये के बजट से 2178 हेक्टेयर में वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया

Posted on 07 August 2012 by admin

प्रदेश में सामाजिकी वानिकी योजना ग्राम वासियों को प्रकाष्ठ, ईधन एवं चारा-पानी तथा लघु वन उपज की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु संचालित हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 2369.14 लाख रुपये के बजट से 2178 हेक्टेयर में वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सामाजिकी वानिकी योजना के अन्तर्गत समस्त जनपदों में वृक्षारोपण हेतु उपलब्ध ग्राम समाज एवं सामुदायिक भूमि तथा अवनत वन भूमि पर वृक्षारोपण कराया जा रहा है। अनुसूचित जाति के समुदाय को लाभ पहुचाने हेतु स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान तथा अनुसूचित जनजाति के लिये ट्राइबल सबप्लान के लिये बजट का प्राविधान किया गया है, जिससे उन्हें दैनिक पारिश्रमिक के अतिरिक्त जलौनी लकड़ी, फलफूल तथा पशुओं के लिये चारा पानी सुविधाजनक ढंग से उपलब्ध हो सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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मुख्यमंत्री ने पर्यावरण बचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया

Posted on 07 June 2012 by admin

हम सभी को पर्यावरण को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए-मुख्यमंत्री

cm-in-environment-day1उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने लोगों से पर्यावरण बचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरण बचेगा, तो हमारा जीवन बचेगा। उन्होंने यह भी कहा है कि जीवन के लिए जरूरी है कि पर्यावरण शुद्ध रहे।
मुख्यमंत्री आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यहां डाॅ0 राममनोहर लोहिया पार्क में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम के अवसर पर उपस्थित जनमानस को सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने क्रोजि़या का एक पौधा रोपित किया। कार्यक्रम का आयोजन एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र द्वारा किया गया था।
श्री यादव ने कहा कि कार्बन फुट प्रिन्ट और क्योटो प्रोटोकाॅल बड़े मुद्दे हैं, लेकिन आम नागरिक होने के नाते हम सभी को अपने-अपने स्तर पर पर्यावरण को शुद्ध रखने के प्रयास करना चाहिए। समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार ने लखनऊ में डाॅ0 राममनोहर लोहिया पार्क का विकास कराया, जो अत्यन्त सुन्दर है। इस पार्क के निर्माण के दौरान कोई पेड़ काटा नहीं गया और पारिजात और हिमचम्पा जैसे दुर्लभ पौधे लगाए गए। इसके विपरीत प्रदेश की पिछली सरकार वृक्षों के पीछे पड़ी थी। तत्कालीन सरकार को जहां मौका मिला, वहां उसने पत्थर लगवाये। पिछली सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड क्षेत्र में कराए गए वृक्षारोपण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कई सौ करोड़ रूपये के पौधे रोपित कर दिए गए और जब उसकी जांच हुई तो मौके पर पेड़ों की डालियां लगा दी गयीं।
वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट में लखनऊ में ’जनेश्वर मिश्र पार्क’ का निर्माण कराये जाने के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की कोशिश रहेगी कि इस पार्क को डाॅ0 राममनोहर लोहिया पार्क के समान अथवा इससे बेहतर बनाया जाए। उन्होंने नगर के छोटे-छोटे पार्काें की सफाई और सौन्दर्यीकरण पर ध्यान देने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सम्बन्धित अधिकारी पार्काें को बेहतर और सुन्दर बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गेहूं खरीद कार्यक्रम को उन्होंने परखा था, भविष्य में वे इस कार्य को भी देखेंगे। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे पर्यावरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ भवनों की शोभा भी बढ़ाते हैं। वृक्षारोपण कार्यक्रम में बच्चों की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बच्चों को शामिल करना निश्चित रूप से सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण की रक्षा के लिए समझ प्राप्त होगी।
इस अवसर पर भूमि विकास एवं जल संसाधन मंत्री श्री ओम प्रकाश सिंह, विधान परिषद सदस्य श्री राजेन्द्र चैधरी, मलिहाबादी आम की प्रजातियांे में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदमश्री हाजी कलीमउल्ला, वरिष्ठ अधिकारीगण व अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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विष्व पर्यावरण दिवस

Posted on 07 June 2012 by admin

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परषुराम सेवा समिति ने आज 5-6-2012 विष्व पर्यावरण दिवस  के दिन को गोमती नगर के विनम्र खण्ड 2के   पार्क मे पेड लगवाने का कार्यक्रम सुबह 6 बजे बच्चों के द्वारा सम्पन्न कराया।

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कहीं पृथ्वी डूब न जाए

Posted on 03 June 2012 by admin

मनुष्य और पर्यावरण का परस्पर संबंध काफी पुरना और गहरा है। मानव की उत्पत्ति प्रकृति की गोद में हुई और मानव, माँ प्रकृति का दोहन करने लगा या यूँ कहे उस पर निर्भर रहकर विकसित होने लगा। जंगल के फल, फूल, पत्ते व जीव जंतु उसके जीवन के आधार बने। मानव संस्कृति के विकास एवं अस्तित्व के लिए पर्यावरण या प्रकृति का संरक्षण कितना अवश्यक है, अब दुनिया को समझ में आने लगा है। पर्यावरण ठीक है तो हम है।
आने वाले 30-40 सालें में हो सकता है कि अंटार्कटिका के ऊपर कई किलोमीटर बर्फ की ग्लेशियर पिघल कर समुद्र में आ जाए, तो समुद्र की सतह कई मीटर ऊंची हो जाएगी, फिर दुनिया में हाहाकार मच जाएगा। कलकत्ता, मुंबई और बांग्लादेश डूब जाएंगे, लेकिन यह सब कुछ इतना जल्दी नही होगा और न ही इन सब घटनाक्रमों की गारंटी दी जा सकती है। घटनाक्रम का रूख बदल सकते हैं। यह मानना है जाने-माने वैज्ञानिक और नेशनल रिसर्चर प्रोफेसर यशपाल का। पर्यावरण के प्रति असंवेदनशीलता के भयावह परिणाम दिनो दिन बढ़ता तापमान, आंधी-तूफान और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा की बड़ती संख्या हमें चेतावनी दे रही है, ग्लोबल वार्मिग के सवाल पर वैज्ञानिक में मतभेद है। जहां कुछ का मानना है कि तापमान बढ़ रहा है, वही कुंछ का कहना है कि यदि 4-5 डिग्री सेंटीगे्रड तापमान बढ़ा भी हो तो इससे ग्लोबल वार्मिंग का कयास नही लगाया जा सकता, क्योंकि पृथ्वी के दीर्घकालिक इतिहास मंे 4-5 डि.सें. टेम्परेचर बढ़ना भूविज्ञानियों की निगाह बहुत कुछ आकलन नही किया जा सकता । प्रो. यशपाल का तर्क है कि इतिहास के आइने में पृथ्वी को देखें, तो हजारों साल में पृथ्वी का तापमान इधर से उधर नही हुआ, जबकि ज्वालामुखी का विस्फोट भी हुआ लेकिन जब से मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन शुरू किया, तब से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हुआ। पिछले 60 वर्षो में जितनी तेजी से औद्योगिकरण हुआ है, उतनी ही तेजी से कार्बन डाई-आक्साइड की मात्रा में भी वृद्धि हुई है। यह अजीब विडम्बना है कि भारत में जहां 30 प्रतिशत भू-भाग पर वन होना चाहिए, वहां मात्र 15 प्रतिशत भू-भाग पर ही वन है। इनमें भी बहुत से वन दिनों-दिन साफ होते जा रहे है। ऐसी हालत में तापमान का बढ़ना कोई आश्चर्य की बात नही है।
प्रो. यशपाल की तरह भारतीय सूचना तकनीकी संस्थान (इलाहाबाद) के अध्यक्ष रहे पद्मभूषण प्रो. अजीत राम वर्मा भी मानते है कि कोयला और पेट्रोल के अधिकाधिक उपयोग करने से वायुमंडल में कार्बन डाई-आक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिसके कारण पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि हो रही है। प्रो. वर्मा के अनुसार वायुमंडल में कार्बन डाई-आक्साइड की मात्रा में वृद्धि होने से पृथ्वी का तापमान घटेगा। यदि वायुमंडल में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा 0.3 से कम होती, तो पृथ्वी का तापमान अधिका होता। वायुमंडल में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा 0.3 प्रतिशत है और इसी कारण मानव जीवन के लिए 20 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान संभव हो सकता है। प्रकृति की रची हुई पृथ्वी के चारों तरफ का वायुमंडल अद्भुत है। इस वायुमंडल की एक महत्वपूर्ण गैर ओजोन है, जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को सोख लेती है, लेकिन इसकी भी हालत अच्छी नही है। प्रो. वर्मा के अनुसार मनुष्य द्वारा एयर कंडीशनर व पलास्टिक उद्योग में उपयोग किए जाने वाले क्लोरोफ्लोरो कार्बन के लीक होने से ओजोन परत का लगातार क्षरण हो रहा है। श्री वर्मा  के अनुसार प्रकृति द्वारा बनाए गए ओजोन परत के क्षरण से सौर मंडल से खतरनाक पराबैंगनी किरणों पृथ्वी पर पहुचने लगेंगी, जिससे त्वचा कैंसर व कई अन्य बीमारियां फैलेंगी। श्री वर्मा का मानना है कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए मनुष्य को चाहिए कि प्रकृति द्वारा बनाए वायुमंडल से छेड़छाड़ न करें व इसे अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रयास करें, तभी पृथ्वी पर मानव जीवन कायम रह सकेगा।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना अपनी मौत का इंतजाम खुद करने के बराबर है। जानकार मानते है कि जलवायु परिवर्तन से मानवता को उतना ही खतरा है, जितना कि परमाणु हथियारों की बढ़ती होड़ से हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के असर से सालाना करीब तीन लाख लोग मर रहे है। इनमें से ज्यादातर विकासशील देशों के होते है। ग्लोबल हा्रमैनिटेरियन फोरम की रिपोर्ट मंे आगाह किया गया है कि धरती के तापमान में लगातार वृद्धि होने से 30 करोड़ लोग प्रभावित वृद्धि होने से 30 करोड़ लोग प्रभावित वृद्धि होने से 30 करोड़ लोग प्रभावित है। 2030 तक यह संख्या दोगुनी हो सकती है। पर्यावरण को नुकसान से मानवता को खतरे पर यह पहली विस्तृत रिपोर्ट है। फोरम के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने दुनिया के सभी देशों से इस ओर ध्यान देने की अपील की हा्रूमन इंपैक्ट रिपोर्ट क्लाइमेेट चेंज- द एनाटमी आफ ए साइलेंट क्रइसिस नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल जिस देश को जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा खतरा है, वह है आस्ट्रेलिया। रिपोर्ट के आंकड़े चैकाने वाले है। इसके मुताबिक 10?906 से 2005 के बीच धरती का तापमान 0.74 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। हाल के दशकों में यह बढ़ोत्तरी उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2100 तक तापमान न्यूनतम दो डिग्री सेल्सियस बढ़ने के आसार है। इतनी वृद्धि सुनने में भले मामूली लगती हो, पर असल में यह बेहद विनाशकारी होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल मरने वाले तीन लाख लोगांे में 99 फीसदी विकासशील देशों के होते है। दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन में इनका योगदान महज एक फीसदी है। रिपोर्ट में चेताया गया कि जलवायु परिवर्तन से इस सहस्राब्दी क ेलिए तय आठ विकास लक्ष्य (मिलोनियम गोल्स) भी प्रभावित हो सकते है। इन लक्ष्यों में 2015 तक गरीबी खत्म करना, भूखमरी मिटाना, शिशुओं की मृत्यु दर को घटाना और एड्स सहित तमाम जानलेवा बीमारियों को फैलने से रोकना शामिल है।
तमाम विकसित देशों में आस्ट्रेलिया पर जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है। बीते 15 सालों में बढ़तें तापमान और बारिश में कमी से यहां भीषण सूखा पड़ा। एक अनुमान के मुताबिक हर साल जलवायु परिवर्तन के कारण करीब 125 अरब डालर का वित्तीय नुकसान होता है। दुनिया पर मंडरा रहे जलवायु परितर्वन के खतरे से निपटने के लिए राज्य में कागजी घोड़े दौड़ रहे है। पर अमल जुम्मेदरी एक दूसरी पर टालते रहने की परम्परा का परिणाम है कि प्रदूषण के मामले में हमेशा ही हम गच्चा खाते रहे है। देश की लाईफ लाईन गंगा नदी की हालत बताती है कि आने वाले कल कैसा होगा?
वर्ष 2006 में सपा सरकार द्वारा सूबे की आब-ओ-हवा को दुरूस्त करने की गरज से राज्य की पहली पर्यावरण नीति का मसौदा तैयार किया गया था। सरकार गई तो पर्यावरण नीति का मसौदा तैयार किया गया था। सरकार गई तो पर्यावरण नीति को भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया। अब जबकि पुनः सपा की सरकार है और पर्यावरण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पसंदीदा विषय है। यही नही विभाग के मुखिया भी वही है। ऐसे मंे सवाल यह है कि क्या पर्यावरण नीति को हरी झंडी मिल पाएगी ?
पर्यावरण नीति लागू होने के बाद विभागों के लिए यह जरूरी होगा कि वह बजट का कुछ अंश पर्यावरण के लिए खर्च करें। यही नही विभागीय योजनाओं को पर्यावरण संगत बनाया जाए। विकास योजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों के बेहिसाब इस्तेमाल पर रोक लगे।
केवल गंगा ही नही रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में वरूणा 44.6 वीओडी और 1.34 लाख जीवाणुओं सहित गंगा मंे मिल रही है। मेरठ मंे काली व हिंडन प्रदेश की सर्वाधिक प्रदूषित नदियां है। इनमें घुलित आॅक्सीजन की मात्रा जीरो है। पानी में पुलिस आक्सीजन उसकी गुणवत्ता का संकेत है। काली में बीओडी 90.7 मिलीग्राम के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि जीवाणु 2.77 लाख मिले है। हिंडन में भी बीओडी 39 मिलीग्राम पाया गया है। सहारनपुर में हिंडन का बीओडी 18.2 और नोयडा में 34.5 के स्तर में दर्ज किया गया है। यहां जीवाणुओं की संख्या भी लाखों में पाई गई है, जबकि नदी जल में आक्सीजन शून्य है।  प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक और अनमोल वस्तु इस दुनिया में उपलब्ध होता है जिसे जल के नाम से जाना जाता है। जल के बिना जीवन संभवन नही है। इसीलिए तो कहा जाता है कि जल ही जीवन है।
‘गंगे व यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिम् कुरू।।’
अनादिकाल से मनुष्य के जीवन में नदियों के जल का महत्व रहा है। विश्व की प्रमुख संस्कृतियाँ नदियों के किनारें ही विकसित हुई है। भारत में सिधु घाटी की सभ्यता इसका ज्वलंत उदाहरण है। भारत का प्राचीन सांस्कृतिक इतिहास गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मला नदियों के तट के इतिहास से जुड़ हुआ है। माना जाता है कि सरस्वती नदी के तट पर वेदों की ऋचाएँ रची गई है। तमसा नदी के तट पर क्रौंच वध की घटना ने रमणीयता नदियों के किनारे पनपी और नगर सभ्यता का वैभव नदियों के किनारे ही बढ़ा। बड़े से बड़े धार्मिक अनुष्ठान नदियों के पास करने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है।

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-सुरेन्द्र अग्निहोत्री
राजसदन- 120/132
बेलदारी लेन, लालबाग, लखनऊ।
मो0ः 9415508695

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पर्यावरण को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा

Posted on 03 June 2012 by admin

सहयोग परिवार तकनीकी शिक्षण संस्थान के निदेशक राज किशोर पासी ने कहा कि हरे पेड़ों की कटान, सड़कों पर बढ़ती वाहनों की संख्या व अंधाधुंध इलेक्ट्रानिक वस्तुओं के उपयोग से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। यही कारण है कि मौसम का मिजाज बिगड़ता जा रहा है। जो हमारे समाज के लिए खतरनांक है। इस समस्या के हल के जिए हम सभी को मिलजुल कर उपाय करना होगा। श्री पासी रविवार को सरोजनीनगर के स्कूटर्स इण्डिया चैराहा स्थित एस.पी. इस्टीट्यूट आफ कम्प्यूटर एजूकेशन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित पोस्टर, निबंधन, स्लोगन व सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के मौके पर प्रतिभागियों को सम्बोधित कर रहे थे।
इस मौके पर श्री पासी ने कहा कि पर्यावरण के कुदरती नियमों से छेड़छाड़ किये जाने के चलते मौसम में बदलाव हो रहा है। इससे जहां फसलों की पैदावार कम हो रही है, वहीं नई-नई बीमारियां घर कर रही है। उन्होंने कहा कि वनों की अंधाधुंध  कटाई से बाढ़ और बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। मिट्टी की कटाव व जमाव क्षमता की निर्वहनीयता में कमी आती है। इसके चलते जल स्रोतां के स्थायित्व पर असर पड़ता है। हर वर्ष वनों की अंधाधुंध कटाई से तकरीबन 80 अरब मीट्रिक टन कार्बन वातावरण में उत्सर्जित हो रहा है। श्री पासी ने कहा कि आधुनिक परिवेश में इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों के उपयोग में बेतहासा वृद्धि हो रही है। जिससे पर्यावरण के साथ मानवीय स्वास्थ्य और स्वभाव में बदलाव जैसे विपरीत प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। पर्यावरण संकट रोकने के लिए हमारा खान-पान, आचार-विचार और जीवन का आधार स्वावलंबी होना चाहिए। इस मौके पर श्री पासी ने प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चों को आगामी पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक-एक पेड़ लगाने की शपथ दिलाई।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
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‘पृथ्वी दिवस’ के उपलक्ष्य में सी.एम.एस. के नन्हें-मुन्हें छात्रों ने निकाली विशाल रैली

Posted on 27 April 2011 by admin

पृथ्वी के संरक्षण का अलख जगाया सी.एम.एस. छात्रों ने

लखनऊ, 21 अप्रैल। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर कैम्पस के प्री-प्राइमरी के नन्हें-मुन्हें छात्र आज ‘पृथ्वी दिवस’ के उपलक्ष्य में विशाल रैली निकालकर विश्व वसुन्धरा के संरक्षण का अभूतपूर्व अलख जगाया एवं पर्यावरण व वन्य जीवन के संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की पुरजोर अपील की। सी.एम.एस. छात्रों की यह विशाल रैली आज प्रातः सी.एम.एस. गोमती नगर कैम्पस से प्रारम्भ होकर चिड़ियाघर पर सम्पन्न हुई जहाँ चिड़ियाघर की निदेशिका श्रीमती रेनू सिंह ने पर्यावरण एवं पृथ्वी सुरक्षा अभियान हेतु उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर सी.एम.एस. छात्रों ने अपने विद्यालय कैम्पस को ‘नो पाॅलीथीन जोन’ घोषित किया एवं पाॅलीथीन का उपयोग न करने का संकल्प  लिया।
 इस विशाल रैली में नन्हें-मुन्हें छात्रों का उत्साह देखते ही बनता था तथापि नर्सरी व के.जी. के नन्हें-मुन्हें छात्रों द्वारा पृथ्वी व पर्यावरण हेतु नारा लगाना एवं प्रेरणादायी पोस्टर व स्लोगन का प्रदर्शन अपने आपमें एक अभूतपूर्व दृश्य था। ‘नर्चर नेचर फार द फ्यूचर’, ‘पल्यूशन पल्यूशन, ग्रीन इज द सल्यूशन’, ‘वी लव आॅवर मदर अर्थ’, ‘रिसाइकिल, रिड्यूज, रीयूज’, ‘से यस टु पेपर बैग्स’, ‘थिंक ग्रीन’, ‘गो ग्रीन’ जैसे प्रेरणादायी संदेशों ने सड़क के दोनों किनारे बड़ी संख्या में पर खड़े नागरिकों को खूब आकर्षित किया एवं सभी ने तालियां बजाकर नन्हें बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इस रैली की खास बात रही कि बच्चों ने अपने हाथों से बनाये स्वनिर्मित लगभग एक हजार पेपर बैग्स लोगों एवं दूकानदारों को वितरित कर पालीथीन बैग का उपयोग नहीं करने का संदेश दिया, जिससे मनुष्यों के साथ साथ पृथ्वी पर रहने वाले वन्य प्राणियों की भी सुरक्षा हो सके।
 उत्साह व उमंग से लबरेज सी.एम.एस. छात्रों की यह विशाल रैली चिड़ियाघर पहुँचकर एक विशाल सभा में परिवर्तित हो गई। इस अवसर पर चिड़ियाघर की निदेशिका श्रीमती रेनू सिंह ने कहा कि वह सी.एम.एस छात्रों के पर्यावरण एवं पृथ्वी सुरक्षा अभियान से अत्यन्त प्रभावित हुई हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सी.एम.एस. छात्रों का यह प्रयास निश्चित ही जनमानस में साफ-सुथरी तथा हरी-भरी धरती को निर्मित करने का उत्साह जगायेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रदूषण की समस्या आज संसार की जटिल समस्याओं में एक है और इस बारे में प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए एवं इसमें अपना योगदान देना चाहिए। हम सभी को मिलकर धरती को हरा-भरा और खुशहाल बनाना है।
 सी.एम.एस. गोमती नगर की प्रधानाचार्य सुश्री मंजीत बत्रा ने कहा कि इस रैली के माध्यम से हमारा प्रयास रहा है कि नन्हें-मुन्हें बच्चे पर्यावरण एवं धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिए वन्य प्राणियों का महत्व समझे सकें एवं बचपन से ही उनके मन में अपनी धरती, वन्य प्राणी एवं अपने भविष्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो सके। सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग की विश्वव्यापी समस्याओं को देखते हुए सी0एम0एस0 अपने छात्रों को पर्यावरण का सजग प्रहरी बनाने को कृतसंकल्पित है। पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक जागरूकता अभियानों एवं प्रतियोगिताओं में विद्यालय के छात्र बढ-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। यही कारण है कि सी0एम0एस0 छात्रों ने पढ़ाई में सर्वोच्च कीर्तिमान बनाने के साथ ही साथ सामाजिक जागरूकता की भी अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है।

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पर्यावरण विरोधी नीति और उससे प्रदेश को हुई क्षति की महामहिम राज्यपाल से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जॉच किए जाने की मांग

Posted on 02 July 2010 by admin

लखनऊ -  समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता  राजेन्द्र चौधरी ने एक बयान में कहा है कि प्रदेश की मायावती सरकार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अन्तर है। जनता को बरगलाने के लिए एक जुलाई को मन्त्रिमण्डल की बैठक में पेड़ों की अवैध कटान पर दस हजार रूपए जुर्माने और प्रति हरे पेड़ की कटान के लिए आवेदन के साथ 100 रूपए का लाइसेंस शुल्क लगाने का निर्णय कर  यह दिखाने की कोशिश की है कि उसे प्रदेश के पर्यावरण एवं हरित क्षेत्र की बहुत चिन्ता है जबकि हकीकत यह है कि इनका सर्वाधिक विनाश इसी सरकार में हुआ है। इससे ऋतु  चक्र बदला है और लोगों की जिन्दगी बेहाल हुई है। समाजवादी पार्टी बसपा सरकार की पर्यावरण विरोधी नीति- रीति और उससे प्रदेश को हुई क्षति की महामहिम राज्यपाल से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जॉच किए जाने की मांग करती है।

श्री चौधरी ने कहा है कि जुलाई में वन महोत्सव के तहत वृक्षारोपण का लम्बा चौड़ा कार्यक्रम जारी किया जाना औपचारिक कर्मकाण्ड बन गया है। इस वर्ष वन विभाग ने 3 करोड़ पौध लगाने का ऐलान किया है। कई अन्य विभागों के भी इसमें शामिल होने से इस वर्ष 8.5 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह सब कागजी खानापूरी के अलावा कुछ और नहीं है। दिखावे के ऐसे कार्यक्रमों की हकीकत फारेस्ट सर्वे आफ इण्डिया की रिपोर्ट से खुल जाती है जिसके अनुसार उत्तर प्रदेश में हरित क्षेत्र  में निरन्तर गिरावट आती जा रही है। वन से इतर हरियाली में हाल के वर्षो में गिरावट 9.6 प्रतिशत से नीचे 9.01 प्रतिशत आंकी गई है। राज्य में वर्ष 2005 में, जब श्री मुलायम सिंह यादव की सरकार थी, 3.40 प्रतिशत (8,203 वर्ग किलोमीटर) हरियाली वृद्धि आंकी गई थी, ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र में हरियाली अब 7,381 वर्ग किलोमीटर (3.06 प्रतिशत) रह गई है।       श्री मुलायम सिंह यादव के समय लगाए गए लाखों पेड़ उजाड़ दिए गए जिससे यह गिरावट आई है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में करोड़ों पेड़ मुख्यमन्त्री की निजी महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ा दिए गये हैं। राजधानी सहित पूरे प्रदेश में लगे हरे पेड़-पौधों को बेरहमी से काट डाला गया।  पार्को,स्मारकों के निर्माण के नाम पर वृक्षविनाश कार्यक्रम पूरी गति से चलाया गया। सड़क किनारे लगे वृक्षों की अधाधुंध कटान के फलस्वरूप मीलों तक छाया का नाम नहीं रह गया है।

श्री राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि प्रदेश में हरियाली का विनाश कार्यक्रम चूंकि मुख्यमन्त्री के इशारों पर हुआ है और अब वही घड़ियाली आंसू बहाती हुई वृक्ष कटान के लिए लाइसेंस फीस और जुर्मानें का प्राविधान कर रहीं है तो सर्वप्रथम उनको ही इन अवैध कार्यो के लिए नोटिस दिया जाना उचित होगा। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सनक की भेंट चढ़े करोड़ों  पेड़ों की अवैध कटान के लिए प्रति पेड़ उनसे हर्जाना लिया जाना चाहिए। महामहिम राज्यपाल को भी यह देखना चाहिए कि प्रदेश की वन सपन्दा और हरियाली के विनाश से पर्यावरण में पैदा असन्तुलन और उसके फलस्वरूप ऋतु चक्र बदलने से जो असामान्य जीवन स्थिति बनी है उसका आकलन एक स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष जॉच एजेंसी से कराया जाए और मुख्यमन्त्री ने जो क्षति पहुंचाई है उसके लिए उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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अवैध बालू खदानों की गोपनीय जांच होने पर ही लग सकेगी लगाम

Posted on 14 March 2010 by admin

चित्रकूट - जिले में अवैध बालू खनन का कारोबार रुकने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। जिसके कारण लीज पर खदान लेने वालों को तो घाटा हो ही रहा है साथ ही साथ सरकार को भी अच्छी खासी चपत लग रही है। फिर भी प्रशासनिक अधिकारी इस ओर से अपनी आंखे मून्दे हुए है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय जांच करा बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में जिले में मन्दाकिनी, पयस्वनी व यमुना नदी के किनारे बसे लगभग एक सैकड़ा  गांवों में बालू माफियाओं का अवैध कारोबार दिनोदिन जोर पकड़ता जा रहा है। सूत्रो की माने तो सरकारी विभागों द्वारा ग्रामीण विकास के निर्माण कार्यों में सम्बंधित लोग सस्ती दर पर लोकल बालू का प्रयोग करने में जुटे हुए हैं। जिससे  इस अवैध करोबार को बढ़ावा मिल रहा है। बिना किसी परेशानी के अच्छी कमाई होने के कारण बाहुबली इस धंधे में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं इस अवैध कारोबार के चलते जहां एक ओर  खदानों को सरकारी पट्टे में लेने वाले ठेकेदारों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार को भी लाखों रुपये की चपत लग रही है। सूत्र बताते हैं कि अवैध कारोबारियों के हौसले तो इतने बुलन्द है कि वे अवैध खनन कर निकाली गई बालू का बाकायदा डम्प कर अच्छी खासी रकम कमा रहा है। सूत्रो की माने तो पहाड़िया के पास बागै नदी की अवैध बालू, मऊ में, ओबरी के पास, सेमराड़ी नाले के पास, भैसोधा गांव में कई बीघे जमीन में अवैध बालू डम्प है। इसी तरह दहिनी, कुल्लू खेड़ा आदि स्थानों मे भी अवैध रूप से निकाली गई बालू डम्प है।

सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि इन सबकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को है इसके बावजूद भी किसी प्रकार की कार्रवाई न होना सम्बंधित अधिकारियों की सन्दिग्ध भूमिका को दर्शाता है। समाज वादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राज बहादुर यादव तो यहां तक कहते हैं कि कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद भी जिले में अवैध बालू खनन का कारोबार दिनोदिन फलफूल रहा है। इतना ही सम्बंधित अधिकारी खुद भी मानते हैं कि इस कारोबार में कई राजनेता और रसूख वाले लोगों का हाथ होता है जिससे कार्रवाई करने में मुश्किल होती है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्री यादव ने  प्रदेश सरकार से इस अवैध कारोबार में लगे लोगों की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की है।

संदीप गौतम

080525834

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उपेक्षित हैं क्रेशर उद्योग में काम करने वाले मजदूर

Posted on 09 March 2010 by admin

बिना मास्क लगाए ही करते हैं मशीनों में काम

चित्रकूट - जिले के भरतकूप और उसके आसपास इलाके में संचालित क्रेशर उद्योग से जहां पूरे क्षेत्रा का वातावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं दूसरी ओर मशीनों में काम करने वाले मजदूर भी तमाम तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। लेकिन मालिकों को बस अपनी जेबें भरने की फिक्र रहती है। जबकि नियमत: इस तरह के उद्योगों में काम करने वाले लोगों की पूरी जिम्मेदारी मालिकानों पर होती है। और मजदूरों का समय-समय पर चिकित्सीय परीक्षण भी कराया जाना आवश्यक होता है।

गौर तलब है कि जिले में मौजूद छोटी-छोटी पहाड़ियों पर ग्रेनाइट पत्थर का अच्छा खासा भण्डार होने के चलते भरतकूप और आसपास इलाके में  क्रेशर उद्योग भली प्रकार से फलफूल रहा है।  स्थानीय लोगों के  अलावा अन्य जनपदों से आकर कई उद्यमियों ने  भी यहां  क्रेशर उद्योग लगाया और मोटी कमाई करने लगे।  वर्तमान समय में लगभग दो दर्जन से अधिक क्रेशर संचालित हो रहे हैं। परन्तु इन उद्योग पतियों द्वारा नियमों की अनदेखी की खुलेआम की जा रही है। सूत्रो की माने तो पट्टे की खदानों से महंगे दामों  में पत्थर खरीदने के बजाए ज्यादातर क्रेशर उद्योग मालिक क्षेत्र में चल रही अवैध खदानों से निकलने वाले पत्थरों को खरीदते हैं। जिससे यहां अवैध पत्थर खदानों को बढ़ावा तो मिल ही रहा है साथ ही  पहाड़ भी खोखले होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि  मशीनो गिट्टी व बालू बनाते समय निकली धूल से आसपास इलाके का पूरा वातावरण को  प्रदूषित हो जाता है। लोग बताते हैं कि जब क्रेशर मशीने चलती हैं उस समय सांस लेना भी दूभर हो जाता है। इसके अलावा इन मशीनों मे काम करने वाले  मजदूर को मास्क भी नहीं उपलब्ध कराया जाता। जिसके कारण धूल व गन्दगी से उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। जबकि सूत्र बताते हैं कि इस प्रकार के धंधों मे काम करने वाले मजदूरों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाना अति आवश्यक है। लेकिन क्रेशर उद्योग मालिक  मशीनों में काम करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लोगों ने जिलाधिकारी से इस ओर ठोस कदम उठाने की मांग की है।

श्री गोपाल

09839075109

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