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आजाद भारत में स्थापित स्मारकों के लिए सबसे मशहूर मुकाम अपनी नई पहचान के साथ पयर्टकों का स्वागत करने के लिए तैयार :: लखनऊ

Posted on 09 October 2010 by admin

नफ़ासत, नज़ाकत, अदब और तहजीब के लिए पूरी दुनिया में मशहूर लखनऊ प्रदेश की राजधानी होने के साथ-साथ आजाद देश में स्थापित अनकों स्मारकों के लिए अब जाना जाने लगा है।

कुछ समय पहले तक देश-विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी यहां लखनऊ नवाबों द्वारा बनाये गये इमामबाड़ों आदि को देखने के लिए आते थे। लेकिन अब बदली पहचान के साथ लखनऊ में एक नया बदलाव भी नज़र आ रहा है। यहां एक नई आकाश रेखा उभरी है, जिसने दुनिया भर में एक अलग पहचान दी है। माननीया मुख्यमन्त्री जी ने गैर बराबरी वाली सामाजिक व्यवस्था को बदल कर समतामूलक समाज की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अनेक महान सन्तों, गुरूओं व महापुरूशों के सम्मान में स्मारक, संग्रहालय, मूर्तियां व पार्क का निर्माण कराया है, जो अब स्वयं में वास्तु कला के अनुपम नमूने होने के साथ-साथ भारतीय सभ्यता की आत्मा एवं निर्माण कला के कई आयामों को भी प्रदिशZत करते हैं। इसके साथ ही लखनऊ में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए अनेक परियोजनाएं तेजी से मूर्त रूप ले रही है, जिसके चलते देश के सबसे बड़े प्रदेश की राजधानी का कायाकल्प हो चुका है। जिसकी मिसाल पूरे देश में मिलना मुिश्कल है।

अब स्थिति यह है कि देश के कोने कोने से भारी संख्या में लोग लखनऊ में स्मारकों, संग्रहालयों व पार्कों आदि को देखने आने लगे हैं। देश में दलित व पिछड़े वर्गों में समय समय पर जन्में महापुरूषों के सम्मान में निर्मित ये स्मारक देश के करोड़ों उपेक्षित वर्गों के लोगों के लिए आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बन चुके हैं, जिन्हें देखकर सर्वजन समाज के लोग गौरव का अनुभव करते है। इसके अलावा नवाबी दौर की ऐतिहासिक इमारतों को देखने वाले अन्य पर्यटकों के लिए यह स्मारक और पार्क आदि आकर्षण के नए केन्द्र बन कर उभरे हेैं। लगभग प्रति दिन ही इन स्मारकों में बड़ी तादाद में लोगों की आमद-रफ्त देखी जा सकती है।

shri-kanshiram-smarak-sthalगौर तलब है कि मुख्यमन्त्री जी द्वारा पिछले वर्ष 25 जून को डॉ0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल द्वार, डॉ0 भीमराव अम्बेडकर विहार, समतामूलक चौक, सामाजिक परिवर्तन गैलरी, डॉ0 भीमराव अम्बेडकर स्मारक दृश्य स्थल, डॉ0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतिबिम्ब स्थल, सामाजिक परिवर्तन संग्रहालय, मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल का लोकार्पण किया गया था।

यह सभी स्मारक वास्तु कला की दृिश्ट से अनोखे ही कहे जायेगे। मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल का गुम्बद अब देश का सबसे बड़ा गुम्बद है, जिसका निर्माण अपने आप में इंजीनियरिंग का एक नमूना है। इसी तरह सामाजिक परिवर्तन संग्रहालय के दोनो गुम्बद भी इंजीनियरिंग एवं स्थापत्य कला की वििशश्ट उपलब्धियों के रूप में आज जाने जाते हैं।

इसके अलावा बौद्ध विहार शान्ति उपवन का भी गत 25 जून को लोकार्पण किया गया था। ये सभी आज आस्था और पर्यटन के महत्वपूर्ण स्थल बन गये हैं।

लखनऊ शहर के मध्य कोई विशाल एवं भव्य ग्रीन इको गार्डन न होने के कारण शहरवासियों द्वारा इसकी लगातार जरूरत महसूस की जा रही थी।  इसे ध्यान में रखते हुए लखनऊ शहर के बीचो-बीच मान्यवर श्री कांशीराम जी इको गार्डन का भी विकास प्रारम्भ हो गया है। ग्रीन इको गाडेZन के विकसित हो जाने पर लखनऊ शहर में एक ऐसा अदुभुत और मनोहारी गार्डेन विकसित होगा, जो न केवल देश भर में बल्कि दुनिया भर में अब तक स्थापित किये गये इको गार्डेनों में अनोखा होगा।

आने वाले समय में लखनऊ अपनी नई पहचान के साथ पयर्टकों की मेहमान-नवाजी के लिए तैयार है।

कुछ प्रमुख स्थलों की वास्तु कला विशिष्टताएं निम्नवत् हैं:-

डॉ0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल

लखनऊ में गोमती नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित Þडा0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थलß 107 एकड़ (4,33,417 वर्ग मीटर) क्षेत्रफल में निर्मित है। आगन्तुक के मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर शिलापट टेक्स्ट पैनल के साथ-साथ खूबसूरत ग्रेनाइट स्तम्भों का रास्ता भी दिखता है, जो सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किये गये स्तम्भों की याद दिलाते है। इसके बाद विस्तृत कॉम्प्लेक्स में दर्शकों के लिए चार मुख्य आकर्षण स्थल हैं।

Þबाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर स्मारकß अपने विस्तृत कमल (पद्म) रूप में कॉम्प्लेक्स का मुख्य आकर्षण है। 6.5 एकड़ (27,004 वर्ग मीटर) के क्षेत्रफल में उठी हुई सतह पर इस संरचना में चार Þचैत्य पोर्ट्लß हैं। खूबसूरत उत्तरी पोट्Zल से दर्शक घुसने पर अपने को गुलाबी मकराना संगमरमर द्वारा निर्मित स्थल में पाता है। मुख्य गुम्बद की छतरी के अन्दर और नीचे स्मारक का केन्द्रीय चैम्बर है, जहां बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर के जीवन की विविध अवस्थाओं को कांस्य की चित्रावली प्रदर्शित करती है। इसके बाद, चैम्बर में दर्शक आगे बढ़ने पर बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर की कांस्य मूर्ति को, जैसा कि अब्राहम लिंकन की मूर्ति लिंकन मेमोरियल, वाशिंगटन में है, के रूप में, बैठे हुए देखता है।

स्मारक से बाहर निकलने पर दर्शक डा0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन संग्रहालय के दो स्तूपों की तरफ बढ़ता है, जो 2.5 एकड़ (11,008 वर्ग मीटर) के क्षेत्रफल में ऊंची डबल नींव पर स्थित हैं, दो गुम्बद (प्रत्येक 100 फीट से अधिक के व्यास) सुप्रसिद्ध सन्तों, गुरूओंं और प्रेरक महापुरूषों का देवालय है, जिन्होंने ऐतिहासिक काल से लेकर अब तक सामाजिक समानता के लिए संघर्ष किया। गुम्बदों जो आन्तरिक तौर पर कांसे से निर्मित है, की छतरी के नीचे इन महापुरूषों और स्वप्नदृष्टाओं की संगमरमर की मूर्तियां हैं, जबकि सटी हुई दीवारों पर इन महापुरूषोें द्वारा सामाजिक परिवर्तन के लिए किये गये आन्दोलन में उनकी भागीदारी का उल्लेख है।

तीसरा मुख्य स्थान 04 एकड़ (16,260 वर्ग मीटर) क्षेत्रफल में स्थित विस्तृत सामाजिक परिवर्तन गैलरी है। एक तरफ ऊंची विशाल दीवार और और दूसरी ओर खूबसूरत स्तम्भ श्रेणियों से घिरी इस अर्द्ध चक्राकार मुक्ताकाशी गैलरी में कई मूर्तियां और भित्ति चित्र हैं। इस अर्द्धचक्र के केन्द्र में ऊंचाई पर बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति स्थित है।

सामाजिक परिवर्तन गैलरी से दर्शक के उत्तर की तरफ आगे बढ़ने पर बगल में 62 हाथियों की मूर्तियों की गैलरी हैै, जिसके शीर्ष पर स्मारक का चौथा मुख्य हिस्सा है। Þप्रतिबिम्ब स्थलß जो पूरे कॉम्प्लेक्स का प्रतिनिधित्व करता है, बहुजन समाज के प्रेरक नेताओं, बी0एस0पी0 के संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी और उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमन्त्री व सामाजिक परिवर्तन की आधुनिक शिल्पकार सुश्री मायावती जी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

आगे ऊंचे प्लेटफार्म पर पिरामिड के समान Þडा0 भीमराव अम्बेडकर स्मारक दृश्य स्थलß से समूचे डा0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल का विहंगम दृश्य दिखायी पड़ता है।

स्मारक के अन्दर कई छोटी किन्तु महत्वपूर्ण संरचनाएं स्थित है। इसमें Þबुद्ध स्थलß में भगवान गौतम बुद्ध की चतुर्मुखी प्रतिमा और श्रद्धांजलि स्वरुप 21.60 मीटर (71 फीट) ऊंचा Þसामाजिक परिवर्तन स्तम्भß सम्मिलित हैं। Þसामाजिक परिवर्तन स्तम्भß स्थल के प्रवेश द्वार के नजदीक स्थित है जिसे ऐतिहासिक अशोक स्तम्भ के समान चुनार पत्थर से निर्मित किया गया है। यह स्तम्भ सबसे ऊंचे इन स्तम्भों में से डेढ़ गुना अधिक ऊंचा है।
बगल में, 2.5 एकड़ (9446 वर्ग मीटर) के क्षेत्रफल में स्थित जमीन पर कॉम्प्लेक्स के एक अभिन्न हिस्से, प्रशासनिक ब्लॉक और जनसुविधा परिसर को विकसित किया गया है, जो जनसुविधाओं से युक्त कॉम्प्लेक्स है।

इन तत्वों के साथ-साथ प्रवेश चौक, विस्तृत अग्र प्रांगण, बड़ी हाथी गैलरी, कांस्य के फव्वारे, चुनार पत्थर से बनायी गई मजबूत चारदीवारी, रास्ते, प्राकृतिक दृश्य और विस्तृत खुला स्थान Þडा0 भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थलß की सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं।

मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल

इस गरिमापूर्ण और भव्य स्मारक की कल्पना मान्यवर श्री कांशीराम जी के जीवन और कार्यों को समर्पित एक उपयुक्त श्रद्धांजलि के रुप में की गई है। 60 एकड़ (2,42,811 वर्ग मीटर) में विकसित इस कॉम्पलेक्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा-इसका मुख्य स्मारक भवन मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक है, जिसे 2.5 एकड़ (10,500 वर्ग मीटर) में निर्मित किया गया है। इसका ऊंचा क्यूपोला (बनचवसं) जिसका व्यास 125 फीट है, इस प्रकार के विस्तृत निर्माण मेें से एक है। 177 फीट ऊंंचा यह स्मारक लखनऊ के आकाश वृृत्त पर काबिज है। यह संरचना जिसे दीघZ आयु के उद्देश्य से ठोस समूह और स्टेनलेस स्टील द्वारा निर्मित किया गया है, अभियान्त्रिकी का उत्कृष्ट नमूना है। बाह्य हिस्सा बंसी पहाड़पुर के रेतीले पत्थर और आन्तरिक गुलाबी मकराना संगमरमर और कांसे से निर्मित है।

संगमरमर आच्छादित मुख्य चैम्बर के अन्दर मान्यवर श्री कांशीराम जी और उनकी एकमात्र राजनैतिक उत्तराधिकारी उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमन्त्री बहन कु0 मायावती जी की 18 फीट ऊंची कांसे की प्रतिमाएं है। इस प्रेरक स्मारक में 6 विस्तृत कांसे के भित्ति चित्र स्थित हैं, जिसमें श्रद्धांजलि स्वरुप बहुजन नायक के जीवन और उनकी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है।

भवन के पाश्र्व में 30 विस्तृत हाथियों की मूर्तियों से युक्त गलियारे हैं। 4 कांसे के फव्वारे (30 फीट ऊंचे), ग्रेनाइट स्तम्भ और स्मारक अभिलेख इस भव्य वास्तुकला की संरचना को पूर्ण करते हैं।


बौद्ध विहार शान्ति उपवन

31 एकड़ (1,25,710 वर्ग मीटर) के क्षेत्रफल में विकसित किया गया यह उपवन, जो कि लगभग 1.2 कि0मी0 की लम्बाई में है और शारदा नहर तथा वीआईपी रोड के पाश्र्व में है। इस उपवन के एक किनारे पर संरचनाएं और विस्तृत बगीचे हैं।

इस कॉम्पलेक्स का मुख्य आकर्षण केन्द्रीय स्तम्भ श्रेणियां है, जिसमें भगवान गौतम बुद्ध की चतुमुZखी संगमरमर प्रतिमा स्थित है। इसके पाश्र्व में मेल खाती हुयीं मान्यवर श्री कांशीराम जी और उनकी एकमात्र राजनैतिक उत्तराधिकारी उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमन्त्री बहन कु0 मायावती जी की प्रतिमाएं हैं।

स्तम्भ श्रेणी के दोनों ओर 2 संरचनाएं हैं जिसमें से एक में ध्यान कक्ष और विस्तृत पुस्तकालय है जबकि दूसरी संरचना में आवासीय मठवासियों के लिये आवासीय कॉम्पलेक्स है। पश्चिम की ओर विस्तृत बगीचे और सार्वजनिक स्थल हैं जिनकी दूरी कानपुर रोड पर बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर चौराहे तक है। बगीचे, लॉन, फव्वारे (3 कांस्य और 1 पत्थर), रास्ते, जाली और विस्तृत बोधि वृक्षारोपण-इस कॉम्पलेक्स के अन्य आकर्षण हैं।
आगन्तुकों और स्टाफ के लिये पािर्कंग क्षेत्र, जन व अवस्थापना सुविधाअों तथा इनका रख-रखाव और प्रशासनिक ब्लॉक का निर्माण बगल में 1.5 एकड़ (5,561 वर्ग मीटर) क्षेत्रफल मेें किया गया है, जो कॉम्पलेक्स का एक अभिन्न हिस्सा है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती जी ने देश की जनता से पुन: साम्प्रदायिक सौहार्द एवं हर मामले में शान्ति व्यवस्था बनाये रखने की पुरजोर अपील की साथ ही उन्होंने कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के आदेश दिये

Posted on 01 October 2010 by admin

केन्द्र सरकार श्रीराम जन्म भूमि/बाबरी मिस्जद वाद में
मा0 उच्च न्यायालय के यथा स्थिति बनाये रखने के निर्णय
का पूरी सख्ती से क्रियान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित कराये

अयोध्या के अति संवेदनशील मामले में केन्द्र द्वारा
बरती गई लापरवाही से यदि प्रदेश में कानून व्यवस्था
की स्थिति बिगड़ी, तो केन्द्र सरकार पूरी तरह जिम्मेदार

माननीया मुख्यमन्त्री जी ने केन्द्र सरकार से विवादित
स्थल पर विभिन्न एजेिन्सयों की  मदद से
कड़ी नज़र रखे जाने की पुरजोर अपील की

सरकार सभी धमो के लोगों की बिना पक्षपात के उनकी जान-माल एवं मजहब की पूरी हिफाजत करने के लिए कटिबद्ध

मेरी सरकार में सभी धर्मों के लोग खास तौर से मुस्लिम समाज अपनी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार से चिन्तित न हो

प्रदेश की जनता किसी के भी उकसावे और बहकावे में न आये तथा किसी के भी भड़काऊ बयानों से गुमराह न हो

उत्तर प्रदेश की माननीया मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती जी ने केन्द्र सरकार से श्रीराम जन्म भूमि/बाबरी मिस्जद वाद में कल मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ पीठ द्वारा यथा स्थिति बनाये रखने के आदेश का पूरी सख्ती से क्रियान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि निर्णय को दृष्टिगत रखते हुए अयोध्या के विवादित स्थल पर तीन महीने तक यथा स्थिति बनाये रखने के लिए केन्द्र सरकार अपनी जिम्मेदारी का पूरी गम्भीरता के साथ निर्वहन करे।

माननीया मुख्यमन्त्री जी आज यहंा अपने सरकारी आवास पर मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा इस अति संवेदनशील मामले में थोड़ी भी लापरवाही बरतने की स्थिति में यदि विवादित स्थल पर कोई भी नई गतिविधि शुरू होती है और जिसके चलते यदि उत्तर प्रदेश या पूरे देश में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की ही होगी। उन्होंने केन्द्र सरकार से इस मामले को पूरी गम्भीरता से लेने और विवादित स्थल पर विभिन्न एजेिन्सयों कीे मदद से कड़ी नज़र रखने की पुरजोर अपील की है।
सुश्री मायावती जी ने मा0 उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय की तरफ ध्यान आकृष्ट करते हुए यह भी कहा कि श्रीराम जन्मभूमि/बाबरी मिस्जद के विवादित स्थल तथा उसके आस-पास की लगभग 67 एकड़ भूमि ष्ज्ीम  ।बुनपेपजपवद वि ब्मतजंपद ।तमं ंज  ।लवकीलं ।बज 1993ष् के अन्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई थी और वर्तमान में इस समस्त भूमि का प्रबन्धन, प्रशासन तथा सुरक्षा केन्द्र सरकार द्वारा ही की जा रही है। इसलिए यह विवादित स्थल एवं उससे लगी हुई भूमि केन्द्र सरकार के नियन्त्रण में है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती भी दी गई थी। जिस पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्रीराम जन्मभूमि/बाबरी मिस्जद के विवाद एवं विवादित  भूमि के अधिग्रहण को लेकर `इस्माइल फारूकी´ की याचिका पर दिनांक 24 अक्टूबर सन् 1994 को एक निर्णय पारित किया गया था। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिये थे कि विवादित स्थल का प्रबन्धन व प्रशासन तथा सुरक्षा का प्रबन्ध केन्द्र सरकार द्वारा ही किया जायेगा।

माननीया मुख्यमन्त्री जी ने कहा कि इसके अलावा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस निर्णय में यह निर्देश भी दिये थे कि विवादित क्षेत्र के सम्बन्ध में लिम्बत मुकदमों में जो भी फैसला सुनाया जायेगा, उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी केन्द्र सरकार की होगी तथा केन्द्र सरकार ही माननीय न्यायालय के निर्णय का अनुपालन कराये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के लिए बाध्य होगी। अर्थात् माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के अनुसार माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कल पारित किये गये  निर्णय  के क्रियान्वयन का समस्त दायित्व केन्द्रीय सरकार पर है।

सुश्री मायावती जी ने कहा कि मा0 उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अभी अन्तिम नहीं है। क्योंकि मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड एवं हिन्दू महासभा ने फैसले के दिन ही मा0 उच्च न्यायालय के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। इसे ध्यान में रखकर उन्होंने पुलिस एवं प्रशासन के हर स्तर के सभी अधिकारियों को आज निर्देश दिये हैं कि जब तक मा0 सर्वोच्च न्यायालय मा0 उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय पर रोक नहीं लगा देता तब तक इस प्रकरण को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कड़ी नज़र रखें और हर स्तर पर सतर्क रहे।

माननीया मुख्यमन्त्री जी ने आज पुन: प्रदेश की जनता से साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने की अपील करते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ उनकी सरकार बहुत सख्ती से पेश आयेगी। उन्होंने प्रदेश की जनता को पुन: विश्वास दिलाते हुए कहा कि उनकी सरकार प्रदेश में कानून-व्यवस्था खराब करने की कोशिश करने वाले तत्वों से बहुत सख्ती से निपटेगी। उन्होंने प्रदेश के सभी धर्मों के लोगों और खास तौर से मुस्लिम समाज को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार में वे अपनी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार से चिन्तित न हों। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सभी धमोेZं के लोगो की बिना भेद-भाव के उनकी जान-माल एवं मजहब की हिफाजत करने के लिए कटिबद्ध है।

माननीया मुख्यमन्त्री जी ने आशा व्यक्त की है कि अयोध्या प्रकरण में सभी धर्मों के लोगो ने जिस धैर्य एवं संयम तथा सूझ-बूझ के साथ अभी तक अपना दृष्टिकोण रखा है उसी प्रकार आगे भी बनाये रखेंगे। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगो को किसी के उकसाने तथा भड़काऊ बातों के चक्कर में नहीं आना चाहिए और कानून पर पूरा भरोसा रखकर प्रदेश में भारतीय संविधान की गरिमा को हर हाल में बनाये रखना चाहिए।

सुश्री मायावती जी ने कहा कि मीडिया ने भी इस अति संवेदनशील  मुद्दे पर पूरे देश में सूझ-बूझ व संयम के साथ अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्पक्षता के साथ निभाया है। जिसके चलते उत्तर  प्रदेश सहित पूरे देश में अमन-चैन एवं शान्ति व्यवस्था को बनाये रखने में भी सभी सरकारों को काफी मदद मिली। उन्होंने इसके लिए अपनी पार्टी तथा सरकार की ओर से मीडिया का  आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जतायी कि इसी प्रकार भविष्य में भी मीडिया का सहयोग पूरे देश को मिलता रहेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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राज्यपाल एवं मुख्यमन्त्री ने ईदगाह पहुंचकर मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकबाद दी

Posted on 11 September 2010 by admin

लखनऊ -  उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री बी0एल0 जोशी तथा मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने आज ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर ऐशबाग स्थित ईदगाह जाकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर राज्यपाल ने लोगों को ईद की बधाई देते हुए मुस्लिम समुदाय की समृद्धि और उन्नति की कामना की।
मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों को ईद-उल-फितर की हार्दिक मुबारकबाद दी। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों की खुशहाली, तरक्की और बेहतरी की कामना भी की।

इसके पूर्व ईदगाह के नायब इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने नमाज पढ़वाई। उन्होंने ईद की नमाज अदा करने आये मुसलमानों को सम्बोधित करते हुए मुल्क और समाज की खुशहाली एवं तरक्की के साथ-साथ पूरी दुनिया में अमन-चैन के लिए खुदा से दुआएं मांगीं।

इस अवसर पर कैबिनेट मन्त्री एवं अध्यक्ष, राज्य हज समिति श्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मुख्यमन्त्री जी के सूचना सलाहकार श्री मोहम्मद जमील अख्तर, मन्त्रिमण्डलीय सचिव श्री शशांक शेखर सिंह, अपर मन्त्रिमण्डलीय सचिव श्री नेत राम, प्रमुख सचिव सूचना श्री विजय शंकर पाण्डेय, मुख्यमन्त्री के सचिव श्री नवनीत सहगल तथा श्री अनिल सन्त, सूचना निदेशक श्री अजय कुमार उपाध्याय, इमाम ईदगाह हजरत मौलाना अबू तैय्यब अहमद मियां फरंगी महली, मौलाना नईमुर्रहमान, मौलाना मुश्ताक, श्री फारूख खान, श्री मोहम्मद उस्मान, श्री रिजवान अहमद, श्री सिराज अहमद खां सहित शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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नये जनपदों के लिए सृजित किये गये समस्त पदों को तत्काल भरा जाये

Posted on 10 September 2010 by admin

धान खरीद की सभी तैयारियां समय से करने के सख्त निर्देश

सरकारी अस्पतालों में किये जाने वाले ऑपरेशनों की स्थिति में तुरन्त सुधार लाया जाये

अपेक्षित समय में नर्सो की नियुक्ति बिना किसी देरी के करने के निर्देश

लखनऊ  -   उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने कहा है कि इस वर्ष खरीफ में रिकार्ड उत्पादन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करायी जायें। उन्होंने कहा है कि जिन जनपदों में कम वर्षा के कारण बुआई प्रभावित हुई है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कम पानी वाले फसलों के बीज उपलब्ध कराया जाये, ताकि खरीफ के उत्पादन में कमी न रहे। इसी प्रकार जिन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण फसलें नष्ट हो गई हैं, वहां पानी उतरने के बाद देर से बोई जाने वाली फसलों के बीज किसानों को मुहैया कराये जायें।

मुख्यमन्त्री ने यह निर्देश आज उस समय दिये जब योजना भवन में आयोजित प्रमुख सचिवों/सचिवों की बैठक के उपरान्त कैबिनेट सचिव श्री शशांक शेखर सिंह, मुख्य सचिव श्री अतुल कुमार गुप्ता तथा अपर कैबिनेट सचिव श्री नेत राम ने बैठक के  निष्कर्षो से उन्हें अवगत कराया।

सुश्री मायावती ने कृषि विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि खरीफ के दौरान उर्वरक की उपलब्धता हर हालत में बनायी रखी जाये। नेपाल से लगी सीमा में खाद की तस्करी की चर्चा करते हुए उन्होंने निर्देश दिये कि इसे कठोरता से रोका जाये तथा यह भी सुनिश्चित किया जाये कि नेपाल से लगे प्रदेश के जनपदों में मांग से अधिक उर्वरक उपलब्ध न करायी जाये। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आंकड़ो में भारी अन्तर है, इससे स्पष्ट है कि किसानों को मृदा परीक्षण की रिपोर्ट समय से नहीं मिल रही है। उन्होंने निर्देश दिये कि मृदा परीक्षण के निश्चित समय बाद किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड सुलभ करा दिये जाये। उन्होंने कहा कि यद्यपि इस वर्ष किसानों को पिछली बार की अपेक्षा 50 फीसदी अधिक फसली ऋण का वितरण किया गया है, परन्तु अभी इसमें सुधार की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों को लक्ष्य के अनुरूप किसान क्रेडिट कार्ड शिविर लगाकर वितरित किये जाने चाहिए।

मुख्यमन्त्री ने किसानों की आय दोगुनी करने की राज्य सरकार की योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक फसल के बाद आंकलन कराया जाये कि किसानों की आमदनी में कितनी वृद्धि हुई। इसके लिए आवश्यक मापदण्ड भी तय किये जायें। उन्होंने प्रमुख सचिव कृषि को निर्देश दिये कि किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की प्रगति तथा उनके क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लेने के लिए वे स्वयं सप्ताह में दो दिन गांवों का भ्रमण करें। सहकारी समितियों को मजबूत करने के लिए वैद्यनाथन कमेटी की संस्तुतियों के अनुरूप केन्द्र सरकार से धनराशि प्राप्त करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी समितियो के माध्यम से किसानों को आवश्यक कृषि निवेश आदि की सुविधा सुलभ करायी जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि धान खरीद की प्रभावी व्यवस्था की जाये और इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूरी कर ली जायें। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त एवं लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने हिदायत दी कि धान क्रय के समय किसानों का उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि किसानों के हित में राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों के पुनर्वास के लिए नई नीति घोषित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस नीति के तहत किसानों को समुचित लाभ दिलाया जाये। उन्होंने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले किसानों का पूरा विवरण एकत्रित करने के भी निर्देश दिये।

सुश्री मायावती ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि बाढ़ से हुई क्षति का आंकलन प्राथमिकता से कराया जाये। बाढ़ से पीड़ित लोगों को नियमानुसार अहेतुक सहायता का वितरण भी शीघ्र किया जाये। इसके अलावा बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त मार्गो एवं आधारभूत सुविधाओं की मरम्मत जल्द करायी जाये। उन्होंने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की बीमारी फैलने से रोकने के लिए चिकित्सा विभाग तथा पशुपालन विभाग को त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बीमारी फैलने पर अपर निदेशक स्वास्थ्य सीधे जिम्मेदार होंगे।

मुख्यमन्त्री ने सरकारी अस्पतालों की कार्य-प्रणाली की समीक्षा करते हुए कहा कि इसमें और अधिक सुधार की आवश्यकता है। उन्होनें अस्पतालों में किये जाने वाले ऑपरेशनों की स्थिति में तुरन्त सुधार लाने का निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में नर्सो की काफी कमी है जिन्हें तत्काल भरने की व्यवस्था की जाये। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरी क्षमता से उपयोग करने के निर्देश देते हुए कहा कि आम जनता को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जानी चाहिए।

सुश्री मायावती ने उ0प्र0 मुख्यमन्त्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए तैयार की गई समय-सारणी का कठोरता से पालन किया जाये। उन्होंने कहा कि इस योजना में लाभार्थियों के चयन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि समय-समय पर इस योजना की समीक्षा मौके पर शासन स्तर के अधिकारी भेजकर करायी जाये।    बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा को स्कूलों में शिक्षकों की कमी की चर्चा करते हुए मुख्यमन्त्री ने निर्देश दिये कि शिक्षकों के पदों को भरने की कार्यवाही तेज की जाये। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के छात्रों की समस्याओं को गम्भीरता से लेेते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिये हैं कि प्रभावित क्षेत्रों के बोर्ड के छात्रों के पंजीयन के लिए पर्याप्त समय दिया जाये। उन्होंने बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के भी निर्देश दिये हैं। मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में खाद्य-पदार्थो की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे समय रहते इनके स्टाक की समीक्षा प्रत्येक दशा में सुनिश्चित करें।

ग्राम्य विकास विभाग एवं मनरेगा की समीक्षा करते हुए सुश्री मायावती ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ गुणवत्ता के साथ लाभार्थियों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब जनता से जुड़ी इन योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर ग्राम सभाओं में सोलर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था शीघ्र करायी जाये। नहरों में सिल्ट सफाई के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा विस्तृत कार्य-योजना तैयार की जाये और इसकी सूचना शासन को भी उपलब्ध करायी जाये। उन्होंने कहा कि नहरों की सफाई के समय में शासन के वरिष्ठ अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सिल्ट सफाई के कायोंZ का आकिस्मक निरीक्षण सुनिश्चित करें। वृक्षारोपण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्य को पूरी गम्भीरता से लिया जाये। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 21 लाख पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है, उसी प्रकार की योजना विन्ध्याचल क्षेत्र के लिए भी तैयार की जाये। इसके अलावा उन्होंने नये जनपदों में सृजित किये गये सभी पदों को तत्काल भरने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमन्त्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि उनके स्तर से भेजे गये लिम्बत संदर्भो पर की गई कार्यवाही की सूचना उन्हें शीघ्र उपलब्ध करायी जाये। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया कि वे केवल जिला एवं तहसील मुख्यालय पर ही विकास योजनाओं आदि का आकिस्मक निरीक्षण करने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर योजनाओं का स्थलीय सत्यापन करें तथा लाभार्थियों से भी मुलाकात कर फीडबैक प्राप्त करें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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राज्य वन विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश के गठन को मंजूरी

Posted on 04 September 2010 by admin

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिद् की बैठक में निम्न निर्णय लिए गए

लखनऊ -  उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिद् ने आज राज्य वन विकास अभिकरण के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। साथ ही मन्त्रिपरिद् ने राज्य वन विकास अभिकरण का गठन सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के अन्तर्गत किए जाने तथा सोसाइटी के मेमोरेण्डम ऑफ एसोसिएशन एवं नियमावली को भी अनुमोदित कर दिया है।

गौरतलब है कि प्रदेश में वन क्षेत्रों के कुछ भागों का संरक्षण संवर्धन एवं विकास स्थानीय ग्रामवासियों के साथ सहभागी प्रबन्धन से किया जा रहा है। इसके लिए वित्त पोण राश्ट्रीय वनीय कार्यक्रम के तहत राश्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकीय विकास बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। अब इस कार्यक्रम के संशोधित संचालन मार्ग निर्देश में राज्य स्तर पर वन विकास अभिकरण के गठन करने के निर्देश हैं।

प्रस्तावित राज्य वन विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश के समस्त प्रभागों के वन विकास अभिकरणों के संघ के रूप में कार्य करेगा। पूर्व में प्रभागों द्वारा वन विकास अभिकरण के प्रस्ताव भारत सरकार को अलग-अलग प्रेशित किए जाते थे। वर्तमान निर्देश के अनुसार समस्त वन प्रभागों से सम्बन्धित प्रस्ताव संहत रूप से भारत सरकार को प्रेशित किया जाना है। पूर्व में भारत सरकार द्वारा वित्त पोण सीधे प्रभाग स्तरीय वन विकास अभिकरण को किया जाता था। अब नए मार्ग निर्देश के अनुसार प्रदेश स्तर पर धनरािश भारत सरकार द्वारा राज्य वन विकास अभिकरण को उपलब्ध करायी जायेगी।

लघु उद्यमियों, विशिष्ट हस्तिशल्पियों व निर्यात प्रोत्साहन हेतु संचालित पुरस्कार योजनायें बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर देने का निर्णय

मन्त्रिपरिषद ने लघु उद्यमियों, विशिष्ट हस्तशिल्पियों तथा निर्यात प्रोत्साहन हेतु संचालित पुरस्कार योजनाओं का नामकरण बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी जैसे महानुभावों के नाम पर किये जाने का निर्णय लिया है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना अब `बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना` के नाम से जानी जायेगी। विशिष्ट हस्त शिल्पियों को दिये जाने वाला प्रादेशिक पुरस्कार योजना भी अब `बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर विशिष्ट हस्तशिल्पी प्रादेशिक पुरस्कार योजना` के नाम से होगी। इसी प्रकार निर्यात पुरस्कार योजना का नाम `मान्यवर श्री कांशीराम निर्यात पुरस्कार योजना` कर दिया गया है।

ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य हैं। प्रदेश के लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा प्रदेश के लघु उद्यमियों को लघु उद्योग पुरस्कार, हस्तशिल्पियों को हस्तशिल्प पुरस्कार एवं निर्यातकों को निर्यात पुरस्कार दिये जाने की योजना विद्यमान है। राज्य सरकार ने इन पुरस्कारों को बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर तथा मान्यवर श्री कांशीराम जी जैसे महानुभावों की स्मृति स्वरूप, इनके नाम पर संचालित करने का फैसला किया है। इन महानुभावों का देश व समाज के उन्नयन में बहुमूल्य योगदान रहा है। मन्त्रिपरिद के निर्णय से जहां एक ओर  इन पुरस्कार योजनाओं का मान बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर इन पुरस्कारों को पाने वाले व्यक्ति स्वयं को गौरवािन्वत महसूस करेंगे।

कृशि विश्वविद्यालयों एवं डीम्ड विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के शिक्षकों/समकक्षीय संवर्ग को पुनरीक्षित वेतनमान देने का निर्णय

मन्त्रिपरिद् ने आज कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ, फैजाबाद, कानपुर एवं इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इन्स्टीट्यूट (डीम्ड विश्वविद्यालय) इलाहाबाद के शिक्षकों/समकक्षीय संवर्ग को छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वेतनमान पुनरीक्षित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
मन्त्रिपरिद् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार शिक्षकों/समकक्षीय संवर्ग के वेतनमानों का 01 जनवरी, 2006 से पुनरीक्षण कृषि मन्त्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 13 मार्च, 2009 के अनुसार होगा। वेतनमानों का पुनरीक्षण उन्हीं मामलों में अनुमन्य होगा, जिनमें 01 जनवरी, 2006 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिद के देय वेतनमान पा रहे थे। पुनरीक्षण वेतनमान का लाभ 01 जनवरी, 2006 से देय होगा तथा अन्य भत्ते उसी प्रकार दिए जायेंगे, जैसा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को स्वीकृत किये जाते हैं।

मन्त्रिपरिद् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार नए वेतनमानों में नोशनल फिक्सेशन कर भुगतान 01 दिसम्बर, 2008 से देय होगा। पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर भुगतान के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया है कि 01 जनवरी, 2006 से 30 नवम्बर, 2008 तक के अवशेश/अन्तरवेतन का भुगतान तभी अनुमन्य होगा, जब आई0सी0ए0आर0 (भारत सरकार) दिनांक 01 जनवरी, 2006 से दिनांक 31 मार्च, 2010 तक की अवधि के एरियर के व्यय भार का 80 प्रतिशत वहन करने के लिए सहमति प्रदान करते हुए इस हेतु देय धनरािश अवमुक्त कर दे। देय अवशेश धनराशि का आधा भुगतान वर्ष 2010-11 में एवं शेश आधा भुगतान वर्ष 2011-12 में किया जायेगा। भुगतान की पद्धति राज्य कर्मचारियों के समान ही होगी।

अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु शिक्षण शुल्क का निर्धारण
मन्त्रिपरिषद द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं ( इन्जीनियरिंग कालेज) में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में वर्तमान में लागू शुल्क दरों को संशोधित किये जाने के प्रस्ताव को मन्जूरी प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार सरकार द्वारा अनुदानित समस्त अभियन्त्रण संस्थाओं में, एन0आर0आई कोटे की पांच प्रतिशत सीटों को छोड़ते हुए शिक्षण सत्र 2010-11 से बी0 टेक, बी0 आर्क, बी0फार्मा आदि के लिये 40 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार एम0सी0ए0, एम0बी0ए0, एम0टेक के लिए 25 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। इस शुल्क में छात्रावास शुल्क तथा परीक्षा शुल्क सम्मिलित नहीं है। छात्रावास शुल्क संस्थाओं द्वारा नियमानुसार अपनी अधिशाशी समिति के माध्यम से निर्धारित की जायेगी। परीक्षा शुल्क प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित किया जायेगा।

यह शुल्क ऐसे छात्रों से लिया जायेगा, जो शिक्षण सत्र 2010-11 में प्रवेश लेंगे। शिक्षण सत्र 2010-11 से पूर्व के छात्रों पर पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। पिछले शिक्षण सत्र में प्रवेश लेने वाले ऐसे छात्र जो या तो फेल हो गये हैं या किसी अन्य कारण से परीक्षा नहीं दे सके हैं और पुन: सत्र 2010-11 में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेते हैं, उन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू होगी।

एन0आर0आई0 की अधिकतम पांच प्रतिशत सीटों पर अधिकतम शुल्क 07 हजार यू0एस0 डॉलर प्रति छात्र प्रति वर्ष होगा। इसके अलावा प्रवेश के समय छात्रों से एक बार पांच हजार रू0 की धनराशि प्रतिभूति के रूप में ली जायेगी, जो पाठ्यक्रम के अन्तिम वर्ष के समाप्त होते ही सम्बंधित छात्र को नियमानुसार वापस कर दी जायेगी।

राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस का निर्धारण भविश्य में आवश्यकता/औचित्य को देखते हुए संस्थान की प्रशासकीय परिद द्वारा किया जायेगा।
ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में बी0टेक0, बी0आर्क तथा बी0 फार्मा पाठ्यक्रमों हेतु 25 हजार रू0 प्रति छात्र प्रतिवर्ष, समस्त स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम हेतु 17 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष तथा एन0आर0 आई0 सीट हेतु पांच हजार यू0 एस0 डॉलर प्रति छात्र प्रतिवर्ष फीस वर्ष 2003 में निर्धारित की गई थी। अभियन्त्रण संस्थाओं को प्राप्त होने वाला अनुदान वर्ष 1998-99 से फ्रीज है। पिछले सात वर्षो में मुद्रा स्फीति की दरों तथा विभिन्न उपकरणों एवं अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में हुई वृद्धि एवं छठे वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू किये जाने से वित्तीय भार में हुई बढोत्तरी को दृिश्टगत रखते हुए राज्य सरकार ने पूर्व निर्धारित शुल्क को पुनरीक्षित करने का फैसला किया है।
01 अप्रैल, 2005 के पूर्व राज्य सरकार के अधीन किसी पेंशनयुक्त सेवा संवर्ग में नियुक्त ऐसे कर्मी जो 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पेंशनयुक्त सेवा में नियुक्त हों, को पुरानी परिभाशित लाभ पेंशन योजना से आच्छादित माने जाने की अनुमति

उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिद ने आज राज्य कर्मचारियों की पेंशन से सम्बन्धित एक मसले पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसके तहत ऐसे सभी कर्मचारी जिन्होंने राज्य सरकार की अथवा ऐसे समस्त शासन के नियन्त्रणाधीन स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं, जिनमें राज्य कर्मचारियों की पेंशन योजना की भान्ति पेंशन योजना लागू थी और उनका वित्त पोशण राज्य सरकार की समेकित निधि से किया जाता है, की पेंशनयुक्त सेवा में 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात राज्य सरकार की अथवा शासन के नियन्त्रणाधीन उक्त उिल्लखित स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं की पेंशनयुक्त सेवा में अपनी पूर्व सेवा से कार्यमुक्त होकर अथवा तकनीकी त्यागपत्र देकर नियुक्त होते हैं, तो उसी पेंशन योजना से आच्छादित माने जायेंगे, जिस पेंशन योजना से वे दिनांक 01 अप्रैल, 2005 के पूर्व आच्छादित थे।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात नई भर्तियों से आने वाले कर्मियों पर नई परिभाशित अंशदायी पेंशन योजना अनिवार्य रूप से लागू किया है।
उत्तर प्रदेश सचिवालय खान-पान निगम का नाम परिवर्तित कर उ0प्र0 सचिवालय सत्कार सेवा संस्था किया गया

मन्त्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सचिवालय खान-पान निगम के नाम को परिवर्तित कर उ0प्र0 सचिवालय सत्कार सेवा संस्था किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
बायो पेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स, इको फ्रेण्डली व बीज शोधक रसायनों पर वर्ष 2010-11 में अनुदान दिये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मन्त्रिपरिषद ने बायोपेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स तथा इको फ्रेण्डली एवं बीज शोधक रसायनों पर वर्ष 2010-11 में अनुदान दिये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया है। यह अनुदान वित्तीय वर्ष 2009-10 की भान्ति दिया जायेगा।
मन्त्रिपरिषद के फैसले के अनुसार लघु एवं सीमान्त कृशकों को बायो पेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स पर 90 प्रतिशत तथा इको फ्रेण्डली रसायनों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इस श्रेणी के कुल लाभार्थियों में 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।

अनुसूचित जाति/जन जाति के कृषकों को बायोपेस्टीसाइड्स तथा बायो एजेन्ट्स पर 90 प्रतिशत तथा इको फ्रेण्डली रसायनों पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इस श्रेणी के कुल लाभार्थियों में भी 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।
बीज शोधक रसायनों पर कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य होगा।  25 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति/जनजाति के होंगे जिनमें महिला लाभार्थी 30 प्रतिशत होंगी।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा बायोपेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स तथा इको फ्रेण्डली एवं बीज शोधक रसायनों की खपत में बढ़ोत्तरी के लिए इन पर अनुदान की योजना लागू की गई। इस योजना के लागू होने से फसलों में कीट/रोग नियन्त्रण की नई तकनीक को बढ़ावा मिला है।
उ0प्र0 अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2010 प्रख्यापित

मन्त्रिपरिषद ने उ0प्र0 अधिनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2010 प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) संवर्ग एक अधीनस्थ अराजपत्रित सेवा है, जिसमें राजकीय विद्यालयों में विभिन्न विषयों का अध्यापन कार्य सम्पादित करने वाले सहायक अध्यापक/सहायक अध्यापिका के पद सम्मिलित है। इस वर्ग के शिक्षकों के लिए उ0प्र0 अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 तथा उसका प्रथम संशोधन 1992 प्रख्यापित की गई थी।

नियम-8 (यथा संशोधित) में प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी के अध्यापकों के विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती की शैक्षिक अहर्तायें निर्धारित हैं। सीधी भर्ती के वर्तमान अहर्ताओं में डा0 शकुन्तला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा प्रदत्त बी0एड0 (विशेष शिक्षा) की अहर्ता को कतिपय पदों की सीधी भर्ती की अहर्ता में सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित था। यह संशोधन विकलांगों को सेवा योजन का अवसर प्रदान किये जाने के उद्देश्य से किया गया था।

सीधी भर्ती की प्रक्रिया सम्बन्धी नियमों में आवेदन पत्र के साथ ली जाने वाली फीस निर्धारित है। वर्तमान में यह फीस अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के अभ्यर्थियों के लिए 5 रूपये तथा अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए 15 रूपये निर्धारित है। यह फीस अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 40 रूपये तथा अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 100 रूपये प्रस्तावित किया गया।

उत्तर प्रदेश वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर अग्रिम अनुमन्य किए जाने का निर्णय

मन्त्रिपरिद् ने आज उत्तर प्रदेश वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर राज्य कर्मचारियों को भवन निर्माण/क्रय, भवन मरम्मत/विस्तार, मोटर कार/मोटर साइकिल/स्कूटर/मोपेड तथा व्यक्तिगत कम्प्यूटर क्रय हेतु अग्रिम अनुमन्य किए जाने की मंजूरी प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिद् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार भवन निर्माण/क्रय हेतु वेतन बैण्ड में 34 माह का वेतन या अधिकतम रूपये 7.50 लाख अथवा भवन की लागत, जो भी कम हो, भवन मरम्मत/विस्तार हेतु वेतन बैण्ड में 34 माह का वेतन या अधिकतम रूपये 1.80 लाख अथवा विस्तार की लागत, जो भी कम हो, को अनुमति प्रदान कर दी गई है। इसी प्रकार मोटर कार अग्रिम हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 19,530 या अधिक की पात्रता निर्धारित की गई है। मोटर साइकिल/स्कूटर हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 8,560 या अधिक तथा मोपेड/आटो साइकिल हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 5,060 या अधिक पाने वाले कर्मचारियों को अग्रिम देने का निर्णय लिया गया है। साइकिल हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 9,300 या कम की पात्रता निर्धारित की गई है। व्यक्तिगत कम्प्यूटर अग्रिम हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 14,880 या अधिक पाने वाले कर्मियों की पात्रता निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है।

ज्ञातव्य है कि विभिन्न अग्रिमों की अधिकतम अनुमन्य राशियों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। अग्रिमों से सम्बन्धित यह सभी निर्णय केन्द्र सरकार के वर्तमान में लागू नियमों के आधार पर लिए गए हैं।

विभिन्न विभागों, नागर निकायों, आवास-विकास परिद एवं विकास प्राधिकरणों में कार्यरत वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को विनियमित करने का निर्णय

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद की बैठक में विभिन्न विभागों, नागर निकायों, आवास-विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में वशZ 1991 के पूर्व नियुक्त/कार्यरत समस्त वर्कचार्ज एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विनियमित करने का निर्णय लिया गया है।

मन्त्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार विभिन्न विभागों में नियुक्त/कार्यरत समस्त वर्कचार्ज तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अधिसंख्य पद सृजित किये जायेंगे। इस निर्णय से सरकार पर लगभग 20 करोड़ रूपये का वार्शिक अतिरिक्त व्यय भार आयेगा।

इसी प्रकार नागर निकायों, आवास-विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में कार्यरत समस्त वर्कचार्ज तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जिनकी नियुक्ति 1991 से पहले की है, को सम्बंधित संस्थाओं में अधिसंख्य पद सृजित करते हुए विनियमित किया जायेगा। इन कर्मियों के विनियमितीकरण से स्थानीय निकायों एवं विकास प्राधिकरणों पर लगभग 60 करोड़ रूपये का वार्शिक अतिरिक्त व्यय भार आयेगा, जिसे सम्बंधित निकाय/प्राधिकरण द्वारा वहन किया जायेगा।

ज्ञातव्य है कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में लगभग 10 हजार वर्कचार्ज तथा 9़800 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्ष 1991 के पहले से कार्यरत है। इसी प्रकार नागर निकायों में लगभग 03 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, आवास-विकास परिशद तथा विभिन्न प्राधिकरणों में लगभग 03 हजार वर्कचार्ज और एक हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्ष 1991 से पूर्व कार्य कर रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों में से अधिकांश को मा0 उच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशो के तहत न्यूनतम वेतन तथा उस पर देय भत्ता प्रदान किया जा रहा है। यह भी ज्ञातव्य है कि शासन द्वारा 29 जून, 1991 के पश्चात् दैनिक वेतन अथवा वर्कचार्ज पर नियुक्ति प्रतिबन्धित है।

राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 5200-20200 रू0 वेतन बैण्ड तथा 1800 रूपये का ग्रेड-पे देने का निर्णय

सरकार के इस निर्णय से 3 लाख कर्मचारी लाभािन्वत होंगे

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के तहत केन्द्र सरकार की भान्ति 5200-20200 रूपये वेतन बैण्ड तथा 1800 रूपये का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया गया है।

मन्त्रिपरिषद के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 03 लाख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च वेतन बैण्ड का लाभ मिलेगा, जिस पर लगभग 350 करोड़ रूपये का वार्शिक व्यय भार आयेगा। भारत सरकार की भान्ति राज्य सरकार द्वारा समस्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तात्कालिक प्रभाव से नई भर्ती नहीं करने का निर्णय लिया है।

ज्ञातव्य है कि वर्तमान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 रूपये का वेतन बैण्ड तथा 1300 रूपये ग्रेड पे रिप्लेसमेंट के रूप में दिया जा रहा है। वेतन समिति द्वारा यह संस्तुति की गई थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 का वेतन बैण्ड दिया जाय तथा ग्रेड पे 1300 रूपये से बढ़ाकर 1400 रूपये किया जाये तथा इनके ऊपर वाले वेतन में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिनकी संख्या लगभग 30 हजार होगी, को केन्द्र सरकार की भान्ति 5200-20200 वेतन बैण्ड एवं 1800 ग्रेड पे के रूप में दिया जाये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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सरकार व पार्टी किसानों की जमीन को जबरिया अधिग्रहण किए जाने के सख्त खिलाफ

Posted on 03 September 2010 by admin

मुख्यमन्त्री ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन के अतिरिक्त विभिन्न सुविधाएं देने का निर्णय लिया

प्रभावित कृषकों को 33 साल के लिए 20 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से वार्षिकी प्रतिवर्ष 600 रूपये की बढ़ोत्तरी के साथ दी जायेगी, जो भूमि के प्रतिकर के अतिरिक्त होगी

वार्षिकी न लेने पर प्रभावित किसान को एकमुश्त 02 लाख 40 हजार प्रति एकड़ की दर से पुनर्वास अनुदान

भूमि अधिग्रहण करने की स्थिति में 25 प्रतिशत के समतुल्य कम्पनी द्वारा अधिग्रहित जमीन के शेयर प्राप्त करने का विकल्प किसानों को उपलब्ध होगा

प्रभावित मूल काश्तकारों को अधिग्रहीत भूमि की 07 प्रतिशत भूमि आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित होगी,
आवंटित भू-खण्ड का क्षेत्रफल न्यूनतम 120 वर्गमीटर व अधिकतम सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सीमा तक दिया जायेगा

प्रभावित किसानों को भू-खण्डों के आवंटन में 17.5 प्रतिशत आरक्षण

भूमि अधिग्रहण को लेकर बनाई गई उत्तर प्रदेश की नई नीति पूरे देश की सबसे प्रगतिशील नीति

अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को हरियाणा से बेहतर सुविधाएं

लखनऊ -  उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने देश के किसानों की हर मामले में बदहाली व नक्सलवाद की समस्या के लिए केन्द्र में अभी तक जो भी सरकारें बनी हैं उनको पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि भूमि अध्याप्ति कानून में व्याप्त खामियों के चलते ही आज देश के किसानों को आए दिन सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार व पार्टी किसानों की जमीन को जबरिया अधिग्रहण किए जाने के सख्त खिलाफ हैं।

मन्त्रिमण्डलीय सचिव श्री शशांक शेखर सिंह आज लाल बहादुर शास्त्री भवन स्थित मीडिया सेन्टर में मा0 मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती जी द्वारा लिए गए निर्णयों  की पत्रकारों को जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मा0 मुख्यमन्त्री जी ने भूमि अधिग्रहण, किसानों के पुनर्वास से जुड़े सभी मुद्दों पर गम्भीरता से विचार करते हुए भविष्य में किसानों के पुनर्वास के लिए एक नई व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत आगे भूमि अधिग्रहण किए जाने की स्थिति में प्रभावित किसानों को विभिन्न सुविधाएं दिए जाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमन्त्री जी ने निर्णय लिया है कि नई नीति के तहत प्रत्येक किसान जिसकी भूमि अधिग्रहीत की जा रही है, को 33 साल के लिए 20 हजार रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से वार्षिकी (।ददनपजल) दी जायेगी, जो भूमि के प्रतिकर के अतिरिक्त होगी। 20 हजार रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की वार्षिकी पर प्रति एकड़ प्रति वर्ष 600 रूपये की निश्चित दर से वृद्धि की जायेगी, जो प्रत्येक वर्ष जुलाई माह में देय होगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान वार्षिकी नहीं लेना चाहता है तो उसे एकमुश्त 02 लाख 40 हजार प्रति एकड़ की दर से पुनर्वास अनुदान दिया जायेगा। किसी कम्पनी के लिए भूमि अधिग्रहण करने की स्थिति में 25 प्रतिशत के समतुल्य कम्पनी द्वारा अधिग्रहित जमीन के शेयर प्राप्त करने का विकल्प किसानों को उपलब्ध होगा।

मुख्यमन्त्री जी ने यह भी निर्णय लिया है कि जिन परियोजनाओं में लैण्ड फॉर डेवलपमेन्ट के लिए भूमि अधिग्रहीत की जा रही है, उनमें प्रभावित मूल काश्तकारों को अधिग्रहीत भूमि की 07 प्रतिशत भूमि आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित की जायेगी। इस आवंटित भू-खण्ड का क्षेत्रफल न्यूनतम 120 वर्गमीटर तथा अधिकतम सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सीमा दिया जायेगा। प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहीत भूमि पर आवासीय योजना क्रियािन्वत किए जाने की स्थिति में अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को भू-खण्डों के आवंटन में 17.5 प्रतिशत आरक्षण भी प्रदान किया जायेगा।

मुख्यमन्त्री जी ने कहा कि इस सम्बन्ध में हरियाणा की मिसाल देकर कांग्रेस पार्टी तारीफ करते थकती नहीं है, लेकिन सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने प्रदेश के किसानों को हरियाणा से बेहतर सुविधाएं देने की व्यवस्था की गई है। जबकि हरियाणा में प्रत्येक प्रभावित किसान को भूमि प्रतिकर के अतिरिक्त 15 हजार प्रति एकड़ प्रतिवर्ष वार्षिकी 33 वर्षो तक दिया जायेगा, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह दर 20 हजार रूपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष है, जो 33 वर्षो तक दी जायेगी। हरियाणा में इस  वार्षिकी पर 500 रूपये प्रतिवर्ष की वृद्धि की व्यवस्था है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह वृद्धि 600 रूपये प्रतिवर्ष की गई है। हरियाणा में  वार्षिकी के सापेक्ष एकमुश्त भुगतान का कोई प्राविधान नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश में  वार्षिकी न लेने पर 02 लाख 40 हजार प्रति एकड़ एक मुश्त भुगतान का प्राविधान किया गया है।

मुख्यमन्त्री ने कहा है कि हरियाणा में कम्पनी के लिए अधिग्रहण के मामले में कम्पनी के शेयर देने का कोई प्राविधान नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश में एकमुश्त धनराशि का 25 प्रतिशत, को शेयर के रूप में लेने का विकल्प होगा। इसके अलावा लैण्ड फॉर डेवलपमेन्ट योजना में काश्तकारों को अधिग्रहित भूमि का 07 प्रतिशत आवासीय परियोजना हेतु देने का प्राविधान किया गया है। हरियाणा में इस तरह की व्यवस्था प्रकाश में नहीं आयी है। इस प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए भूमि अधिग्रहण की  जो नई नीति लागू की गई है, वह पूरे देश की सबसे प्रगतिशील नीति है।

मुख्यमन्त्री जी ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण से भूमिहीन हो रहे किसानों के प्रत्येक परिवार को पांच साल तक कृषि मजदूरी के समतुल्य 01 लाख 85 हजार रूपये से एकमुश्त मजदूरी दिए जाने के आदेश 17 अगस्त, 2010 को दिए जा चुके हैं। राज्य सरकार का यह स्पष्ट निर्णय है कि यदि अलीगढ़ जनपद (टप्पल) के किसान टाउनशिप नहीं चाहते हैं तो, टाउनशिप नहीं बनेगी। उन्होंने कहा है कि जहां तक अलीगढ़ और आगरा के किसानों की जमीन सम्बन्धी समस्या का प्रश्न है, राज्य सरकार ने इन किसानों की समस्याओं का समाधान कर दिया है। इन किसानों को समुचित मुआवजा दे दिया गया है और वह मान भी गये थे, लेकिन अब तो सरकार विरोधी तत्वों द्वारा ही इसकी आड़ में कानून-व्यवस्था को खराब करने का प्रयास किया गया। अभी भी भोले-भाले किसानों को गुमराह करके कानून-व्यवस्था को खराब करने की कोशिश में हैं।

मुख्यमन्त्री जी का सदैव से यह कहना रहा है कि देश में किसानों की हर मामले में बदहाली के लिए और इसके साथ ही देश के उद्योगपतियों को आंख मून्द कर फायदा पहुंचाने व उनके लिए वनभूमियों का अंधा-धुन्ध दोहन के कारण फैले ´´नक्सलवाद´´ के लिए भी केन्द्र की सभी सरकारें जिम्मेदार हैं। इसके अलावा मा0 मुख्यमन्त्री जी ने भूमि अध्याप्ति अधिनियम में संशोधन किए जाने की किसानों की मांग का पूरा समर्थन किया था। साथ ही उन्होंने देश के किसानों का इसी अधिनियम में संशोधन की मांग को लेकर संसद को घेरने के कार्यक्रम का भी समर्थन किया था।

मुख्यमन्त्री ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम-1894 में संशोधन की मांग लम्बे समय से की जा रही है, परन्तु किसान विरोधी एवं उद्योगपतियों के हित साधक केन्द्र सरकारों ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया और इस मामले पर लगभग छ: दशकों से चुप्पी मारे बैठी रहीं। वह हमेशा से इस बात की पक्षधर रहीं हैं कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में आए दिन कानून के बल पर लम्बे समय से भूमि अध्याप्ति अधिनियम के माध्यम से किसानों की जमीन हथियाने की प्रवृत्ति के कारण आज देश के किसानों को आए दिन सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

मुख्यमन्त्री ने कहा है कि उनकी सरकार ने हमेशा किसानों के हितों का संरक्षण किया है और किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए हर सम्भव कदम उठाये हैं। उनका किसानों के मामले में स्पष्ट मत है कि किसानों की खुशहाली के बगैर देश की प्रगति सम्भव नहीं है। भूमि अधिग्रहण से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान तथा प्रभावित किसानों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन के अलावा आज नई नीति के तहत मुख्यमन्त्री जी द्वारा घोषित की गई अतिरिक्त सुविधाओं के फलस्वरूप निश्चित रूप से प्रदेश के किसानों को फायदा पहुंचेगा।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना हेतु आज जो ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, उनकी मिसाल सम्भवत: अन्य किसी प्रदेश में नहीं है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव सूचना श्री विजय शंकर पाण्डेय भी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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चित्रकूट में भाजपा का चिन्तन शिविर का नितिन गडकरी ने किया शुभारम्भ

Posted on 28 August 2010 by admin

भाजपा के कई दिग्गज नेताओं व मन्त्रियों का लगा जमावडा

1-4चित्रकूट- भाजपा का तीन दिनी चिन्ता शिविर दीनदयाल शोध संस्थान परिसर प्रारम्भ हुआ । शिविर का विधिवत उद्धाटन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने किया।

इसके अलावा राश्ट्रीय संगठन मन्त्री रामलाल जी, उत्तर प्रदेश संगठन मन्त्री नगेन्द्र जी,म0प्र मुख्य मन्त्री शिवराज सिंह चौहान, म0प्र0 संगठन मन्त्री माखन, व अन्य राज्यों के संगठन मन्त्री और प्रान्त संगठन मन्त्री सहित भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी, चन्द्रप्रकाश खरे, लवकुश चतुर्वेदी, राम औतार तिवारी इस अभ्यास वर्ग की शुरुवात में शामिल रहे।

पहले दिन विभिन्य राज्यों से आये पदाधिकारीयों ने चर्चा की । आगे आने वाले चुनाव और अयोध्या मुद्दे को देखते हुये चिन्तन शिविर महत्वपूर्ण माना जा रहा है इसमें देश सभी राज्यों से संगठन मन्त्री के रुप में 185 सदस्य प्रमुख रुप से हिस्सा लेगे।

भाजपा अध्यक्ष गडकरी ने इस कार्यक्रम की शुरुवात की और आगे आने वाले विधान सभा चुनाव में जोर देते हुुये पार्टी की मजबूती के लिये विशेश बल दिया। दो साल के अन्दर होने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाने व पिछले लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा को अभ्यास वर्ग के रुप में भाजपा का चिन्ता शिविर की शुरुवात की।

इसके बाद भाजपा अध्यक्ष व म0प्र0 मुख्यमन्त्री सहित कई मन्त्री ग्रामोदय विश्व विद्यालय में नाना जी के छठमासिक श्राद्व कार्यक्रम में शामिल हुये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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प्रख्यात साहित्यकार प. हरि ओम शर्मा `हरि´ द्वारा लिखित पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ का भव्य विमोचन

Posted on 26 August 2010 by admin

भावी पीढ़ी के लिए संजीवनी बूटी साबित होगी पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´– डा. दिनेश शर्मा, मेयर, लखनऊ

लखनऊ- प्रख्यात साहित्यकार पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ द्वारा लिखित एवं युवा पीढ़ी को सकारात्मक विचारों के साथ शून्य से शिखर पर पहुंचने की प्रेरणा देने वाली पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ का भव्य विमोचन सी.एम.एस. गोमती नगर ऑडिटोरियम में तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट के बीच उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि डा. दिनेश शर्मा, मेयर, लखनऊ व अन्य विशिष्ट अतिथियों ने पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ के मार्गदर्शक व पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ के पूज्य माता-पिता श्री मिहीलाल शर्मा व श्रीमती रेशम देवी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से `विमोचन समारोह´ का विधिवत उद्घाटन किया। जाने-माने शिक्षाविद् व सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गांधी ने समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर जहां एक ओर बड़ी संख्या में लेखकों, कवियों, प्रशासनिक अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों, कानूनविदों व लखनऊ के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया तो वहीं दूसरी ओर मंचासीन साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता जगत के मूर्धन्य विद्वानों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा में चार चान्द लगा दिये। विशिष्ट अतिथियों के रूप में पधारे श्री वीरेन्द्र सक्सेना, सूचना आयुक्त, उ.प्र., श्री के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष, ऑल इण्डिया फेडरेशन ऑफ विर्कंग जर्नलिस्ट, श्री शिव शंकर त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इण्डिया स्माल न्यूजपेपर एसोसिएशन, डा. (श्रीमती) विनीता कामरान, प्रधानाचार्या, सी.एम.एस. डिग्री कालेज, श्री के. एस. अटोरिया, आई.ए.एस, श्री उमेश चन्द तिवारी, आई.ए.एस. आदि का पुस्तक प्रेमियों ने जोरदार स्वागत किया। समारोह की संचालनकर्ता एवं सी.एम.एस. प्रधानाचार्या सुश्री अर्चना पाण्डे की सुमधुर एवं ओजस्वी वाणी ने इस समारोह को कभी न भूलने वाला ऐतिहासिक गौरव प्रदान किया। इससे पहले समारोह का शुभारम्भ बदायूं से पधारे प्रख्यात विद्वान डा. गौरी शंकर शर्मा एवं उनके शिष्यों द्वारा प्रस्तुत `ईश वन्दना´ व संस्कृत के श्लोकों द्वारा भारतीय संस्कृति के वातावरण में हुआ।

समारोह का संचालन करते हुए प्रख्यात वक्ता सुश्री अर्चना पाण्डे ने पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तक सिर्फ युवाओं व किशोरों के लिए प्रेरणास्रोत ही नहीं है अपितु यह समाज के हर वर्ग, हर आयु के लोगों को आदर्श सामाजिक व्यवस्था से रूबरू कराती है और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन की बुलिन्दयों को छूने का हौसला देती है। सुश्री पाण्डे ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से पं. शर्मा ने युवा पीढ़ी के विचारों को विस्तृत स्वरूप देने का अभिनव प्रयोग किया है। किशोरों व युवाओं को नई राह दिखाने वाली यह प्रेरणादायी व संग्रहणीय पुस्तक सामाजिक सरोकारों पर भी पैनी नज़र रखती है एवं समाज के प्रत्येक सदस्य को जीवन के उच्चतम सोपानों पर कदम रखने का सपना दिखाकर उसको मंजिल पर पहुंचने की राह दिखाती है। 70 लेखों व 330 पृष्ठों में रंगीन साज-सज्जा वाली इस पुस्तक में अंग्रेजी भाषा के सरल, सहज व आत्मीय भाव से शब्दों का चयन किया गया है जो बरबस ही पाठक की मन व आत्मा को झकझोर देते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ के विमोचन अवसर पर आप सभी पुस्तक प्रेमियों का उमड़ा जन-समूह इस बात का प्रमाण है कि इस पुस्तक ने लखनऊवासियों के दिलो-दिमाग में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर ली है तथापि आने वाले दिनों में पूरे देश में इसकी गूंज सुनाई देगी।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डा. दिनेश शर्मा, मेयर, मेयर, लखनऊ ने अपने सम्बोधन में कहा कि पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ किशारों व युवाओं के लिए `संजीवनी बूटी´ की तरह है जो कि युवा पीढ़ी के दिलो-दिमाग पर अमिट छाप छोड़ेगी व सामाजिक विकास में रचनात्मक योगदान हेतु प्रेरित करेगी। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक किशोर व युवा पीढ़ी को एक नई राह दिखाने वाली प्रेरणादायी पुस्तक है, जो पारिवारिक-सामाजिक तानेबाने को और मजबूती प्रदान करेगी। वरिष्ठ पत्रकार के. विक्रम राव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि पं. शर्मा का लेखन सदैव से ही प्रभावशाली रहा है। आपकी सरल, सुबोध लेखन शैली ही आपकी अपनी पहचान है जो पाठकों को उत्साह से भर देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक निश्चित रूप से अपने नाम को सार्थक कर दुनिया भर को भारत की सभ्यता व संस्कृति से रूबरू करायेगी।

सूचना आयुक्त, श्री वीरेन्द्र सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि आज हमारे देश को ऐसे ही प्ररेणादायी लेखकों की जरूरत है। आजकल बाजार में गन्दा व अश्लील साहित्य भरा पड़ा है और साफ सुथरे रोचक साहित्यिक लेखों का अभाव है। ऐसे में पं. शर्मा ने प्रेम व भाईचारे को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि यह संग्रहणीय पुस्तक सामाजिक सरोकारों पर भी पैनी नज़र रखती है और समाज के प्रत्येक सदस्य को नई राह दिखाती है। प्रख्यात शिक्षाविद् व क्वालिटी विशेषज्ञ डा. (श्रीमती) विनीता कामरान, प्रधानाचार्या, सी.एम.एस. डिग्री कालेज ने कहा कि पं. शर्मा लेखन के माध्यम से समाज की जो सराहनीय सेवा कर रहे हैं, वह अतुलनीय है। आज समाज को ऐसे ही पथ-प्रदर्शकों की जरूरत है जो आने वाली पीढ़ी को ऊर्जा व उत्साह को समाज के रचनात्मक विकास हेतु प्रेरित कर सके।book-release-ceremony2

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद् व सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गांधी ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों का हादिZक स्वागत करते हुए कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आप सबके स्वागत का अवसर मिल रहा है। पं. शर्मा जी पिछले 37 वर्षो से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं एवं देश भर में उनके लेख, कविताएं व कहानियां नियमित प्रकाशित होते रहते हैं। इस लम्बी समयावधि में उन्होंने सदैव रचनात्मक व सकारात्मक दृष्टिकोण को ही प्राथमिकता दी है और यही कारण है कि पं. शर्मा सिर्फ लेखक ही नहीं अपितु बच्चों के लिए एक मार्गदर्शक भी हैं। डा. गांधी ने कहा कि आज जहां चारों ओर पैसा कमाने व भौतिकता की अंधी दौड़ में आगे निकलने की होड़ लगी हुई है, वहीं अपनी मौलिक संस्कृति व स्वस्थ परम्पराओं को हम बहुत पीछे छोड़ आये हैं। पं. शर्मा जी की यह पुस्तक हमें आधुनिकता के इस स्वप्न से झकझोर के जगाकर वास्तविकता से हमारा पुन: परिचय कराने का कार्य करती है और हमें आपने जीवन मूल्यों, अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सचेत करती है, जिन्हें पूरा किए बिना हम प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने का सपना भी नहीं देख सकते।

पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ के लेखक पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ ने इस अवसर पर उपस्थित  गणमान्य नागरिकों व बुद्धिजीवियों का हादिZक स्वागत करते हुए कहा कि आप सभी की उपस्थिति ने मेरा मनोबल व उत्साह दो गुना नहीं अपितु सौ गुना कर दिया है। हरि ओम शर्मा को पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ बनाने वाले तो आप ही हैं। मैं आप सभी का तहे दिल से स्वागत व अभिनन्दन करता हूं। पं. शर्मा ने कहा कि पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ की प्रेरणा मुझे अपने पूज्य माता-पिता स्व. श्री मिहीलाल शर्मा व श्रीमती रेशम देवी से मिली और यह उन्हीं के आशीर्वाद का सुफल है कि आज इसका विमोचन हो रहा है। इस अवसर पर पं. शर्मा ने अपनी अगली पुस्तक `जड़, जमीन, जहान´ की चर्चा करते हुए घोषणा की कि इस पुस्तक का विमोचन भी डा.दिनेश शर्मा जी के कर कमलों द्वारा व डा. जगदीश गांधी की छत्रछाया में 15 फरवरी 2011 को सम्पन्न होगा। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक परिवार को जोड़ने वाली, माता-पिता, बच्चों को अपने कर्तव्य बोध से अवगत कराने वाली व सामाजिक संस्कारों से जुड़ी पुस्तक है।

पुस्तक विमोचन समारोह के अवसर पर प्रख्यात कवियत्री श्रीमती रमा आर्य `रमा´ ने रचना के माध्यम से आदर्श सामाजिक व्यवस्था की पुरजोर अपील की। इसके अलावा पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ के लेखन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आधारित मल्टीमीडिया प्रजेन्टेशन ने भी दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया।

समारोह के संयोजक श्री प्रवीण शुक्ला ने बताया कि पं. हरि ओम शर्मा `हरि´ द्वारा पूर्व में लिखी गई पुस्तक `जागो, उठो, चलो´ बेहद लोकप्रिय रही, जिसने किशोरों व युवाओं का खूब मार्गदर्शन किया। इस प्रेरणादायी पुस्तक का लोकार्पण प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन सिंह ने किया था जबकि नेपाल की जनता के लिए इस पुस्तक का लोकार्पण नेपाल के तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्री पुष्प कमल दहल प्रचण्ड ने काठमाण्डू में आयोजित एक भव्य समारोह में किया था जबकि मारीशस की जनता के लिए इसी पुस्तक का लोकापर्ण मारीशस के राष्ट्रपति महामहिम सर् अनिरुद्ध जगन्नाथ ने किया था। श्री शुक्ला ने बताया कि हिन्दी साहित्य की अतुलनीय सेवा के लिए पं. शर्मा को विभिन्न प्रतििष्ठत पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। वर्ष 1984 में `पत्रकार गौरव सम्मान´, वर्ष 2007 में `सागरिका सम्मान´ एवं `साहित्य मनीषी सम्मान´, वर्ष 2008 में `साहित्य सागर सम्मान´, वर्ष 2009 में `प्रकृति रत्न सम्मान´ एवं `साहित्य रत्न सम्मान´ एवं वर्ष 2010 में `साहित्य श्री सम्मान´ के अलावा अन्य सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। श्री शुक्ला ने विश्वास व्यक्त किया कि पं. हरि की पुस्तक `जागो, उठो, चलो´ की देश-विदेश में अभूतपूर्व सफलता के बाद अब उनकी दूसरी पुस्तक `अवेक, एराइज, असेन्ड´ भी सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित करेगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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अधिवक्ता गरीबों, पीड़ितों और शोषितों को न्याय दिलाने में मदद करें - सतीश चन्द्र मिश्रा

Posted on 21 August 2010 by admin

बच्चे राष्ट्र की धरोहर हैं - अध्यक्ष, राज्य सलाहकार परि

लखनऊ -     उत्तर प्रदेश राज्य सलाहकार परिद के अध्यक्ष श्री सतीश चन्द्र मिश्रा ने कहा है कि अधिवक्ता को गरीबों, पीड़ितों और शोषितों को न्याय दिलाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि कानूनी किताबें अधिवक्ताओं को मुकदमों की तैयारी करने में बेहद मददगार होती हैं, इस कार्य में पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

श्री मिश्रा आज बख्शी का तालाब तहसील परिसर में नवनिर्मित जस्टिस त्रिवेणी सहाय मिश्र अधिवक्ता पुस्तकालय भवन के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए विधि विशयक पुस्तकों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तकालय वकीलों तथा विधि छात्रों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे पुस्तकालय को समृद्ध बनाने में हर सम्भव मदद करेंगे।

राज्य सलाहकार परिद के अध्यक्ष ने आज ही जस्टिस त्रिवेणी सहाय शिक्षा निकेतन, इटौंजा तथा महाराजा टीकन नाथ शिक्षा निकेतन, मुसपिपरी के भवन का लोकार्पण भी किया। इसी कार्यक्रम में उन्होंने आदर्श नगर योजना के अन्तर्गत नगर पंचायत, इटौंजा के वार्ड संख्या-7, 3, 2 तथा 9 में इण्टर लॉकिंग सर्फेस ड्रेन, के0सी0 ड्रेन, आर0सी0सी0 ड्रेन कवर तथा वार्ड संख्या-8 में बिटुमिन रोड, सर्फेस ड्रेन तथा नगर पंचायत, बख्शी का तालाब की पेयजल योजना का भी शिलान्यास किया।

जस्टिस त्रिवेणी सहाय शिक्षा निकेतन परिसर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार सभी की शिक्षा के लिए कटिबद्ध है और अपने सीमित संसाधनों से हर सम्भव प्रयास कर रही है। इसके साथ ही संविधान निर्माता डॉ0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी ने जो शिक्षा के माध्यम से स्वावलम्बन की परिकल्पना की थी, उसको साकार करने के लिए बच्चों, खासतौर से समाज के दबे-कुचले एवं वंचित वर्गों को शिक्षित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा निकेतन बच्चों में अच्छे संस्कारों का विकास करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा और इस क्षेत्र के दूर-दराज के बच्चे यहां शिक्षित होकर राश्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके पूर्वजों की कर्म भूमि रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस क्षेत्रों से शिक्षा के लिए किया गया छोटा सा प्रयास नििश्चत रूप से आस-पास की जनता के लिए उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि बच्चे राश्ट्र की धरोहर हैं।

इस अवसर पर प्रदेश के नगर विकास, पर्यावरण एवं मनोरंजन कर मन्त्री श्री नकुल दुबे मौजूद थे। बख्शी का तालाब तहसील में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के महाधिवक्ता श्री ज्योतिन्द्र मिश्रा, नगर आयुक्त सहित गणमान्य नागरिक एवं शासन एवं प्रशासन के वरिश्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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सरकार की प्राथमिकताओं को नज़रअन्दाज करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा

Posted on 18 August 2010 by admin

राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने तथा विकास कार्यों को गति को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जनता की स्थानीय समस्याओं के समाधान की व्यवस्था को और भी प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस बात पर असन्तोष व्यक्त किया कि आज भी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्यायें लेकर लखनऊ आते हैं, इससे स्पष्ट है कि जनपद स्तर पर उनकी सभी समस्याओं का प्रभावी निदान नहीं हो रहा है।
मुख्यमन्त्री आज यहां तिलक हाल में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था तथा विकास कार्याें के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा कर रही थीं। लगभग दो घण्टे की बिन्दुवार विस्तृत समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

मुख्यमन्त्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि उन्होंने पहली समीक्षा बैठक में सरकार की प्राथमिकताएं तय करते हुए निर्देश दिए थे कि अन्यायमुक्त, अपराधमुक्त, भयमुक्त तथा विकासयुक्त वातावरण बनाकर कानून द्वारा कानून का राज कायम करने को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने पुन: स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कानून व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती है और इस मामले में कोई समझौता नहीं करती। उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि सरकार की इन प्राथमिकताओं को नज़रअन्दाज करने वालो को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनता से सीधे संवाद कायम करके उनकी समस्याओं का समाधान करें तथा अपने क्षेत्र के बारे में पूरी जानकारी भली-भान्ति रखें। उन्होंने कहा कि यदि इसमें कोई िढलाई बरती गई तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

सुश्री मायावती ने कहा कि आगे आने वाले महीनों में विभिन्न त्यौहार, पंचायती चुनाव एवं अन्य संवदेनशील मामलों को देखते हुए कानून-व्यवस्था पर कड़ी निगाह रखी जाए। उन्होंने संवेदनशील स्थलों का पहले से ही चिन्हीकरण करके कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से सभी मुकम्मल तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौके पर निर्णय लेने में विलम्ब के कारण अक्सर स्थिति खराब हो जाती है, इसलिए इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामले जमीन-जायदाद से जुड़े होते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में तुरन्त कार्यवाही करके बड़ी घटनाओं को रोका जाना चाहिए।

उन्होंने साम्प्रदायिक स्थिति उत्पन्न होने पर वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश दिए। उन्होंने थाना एवं तहसील दिवस को प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को थानों का नियमित निरीक्षण भी करते रहना चाहिए।

मुख्यमन्त्री ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जेलों के निरीक्षण गहनता से किए जाने चाहिए तथा सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों पर निगाह रखी जाए। उन्होंने कहा कि जेल में निरूद्ध बिन्दयों की प्रकृति के अनुरूप पर्याप्त सतर्कता बरती जानी चाहिए।

सुश्री मायावती ने कहा कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा अनेकों जनहित की योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनका पूरा-पूरा लाभ लोगों को मिलना चाहिए। क्योंकि यह योजनाएं खासतौर से गरीब तबके के लोगों के लिए ही चलायी जा रही हैं और इन योजनाओं में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार अक्षम्य होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे-सावित्री बाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना, मान्यवर श्री कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना, डॉ0 अम्बेडकर ग्राम सभा विकास योजना, उत्तर प्रदेश मुख्यमन्त्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना भी गरीबों, बालिकाओं तथा आम जनता से सीधे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं का लाभ जनता को दिलाने पर बल दिया।
मुख्यमन्त्री ने विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित अवधि के अनुसार बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग से जुड़ी हुई समस्याओं का तत्परता से निदान किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि व्यापारियों, कर्मचारियों तथा किसानों से जुड़ी हुई समस्याओं के प्रति सभी लोग संवेदनशील रहें तथा इनकी सभी समस्याओं का त्वरित एवं गुणवत्तापरक निदान सुनिश्चित किया जाए।

सुश्री मायावती ने किसानों की समस्याओं की चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनकी समस्याओं का तत्परता से निस्तारण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित मामलों के सम्बन्ध में किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए नये दिशा-निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों के हित सुरक्षित करने के लिए और भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित मामलों को तत्परता से निपटाने के लिए दो स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि मण्डल स्तर पर मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित होगी, जिसमें छ: सदस्य होंगे तथा राज्य स्तर पर प्रमुख सचिव, गृह की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें तीन सदस्य होंगे। ।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि अब प्रत्येक माह की 10 तारीख को शासन स्तर पर होने वाली समीक्षा बैठक में डी0एम0 और एस0एस0पी0 भी उपस्थित रहेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता के लिए चलाये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ उन्हें अवश्य दिलाया जाए। उन्होंने आगाह किया कि विकास कार्याें में भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अभी भी अधिकारियों के स्तर से लापरवाही बरतने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, यह स्थिति अच्छी नहीं है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें मिलने पर उनकी जवाबदेही तय कर कठोर कार्यवाही की जायेगी।

बैठक में समस्त जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, उपमहानिरीक्षक, मण्डलायुक्त तथा पुलिस महानिदेशक सहित प्रमुख विभागों के प्रमुख सचिव/सचिव उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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