Archive | कानपुर

1500 गरीब परिवारों का अपने घर का सपना जल्द ही सच

Posted on 21 April 2010 by admin

महानगर के 1500 गरीब परिवारों का अपने घर का सपना जल्द ही सच होने वाला है। इन गरीबों को प्रदेश सरकार की काशीराम शहरी आवास योजना के तहत सवा दो-दो लाख के फ्लैट मुफ्त मिलेंगे। केडीए द्वारा इनका निर्माण किया जाएगा।केडीए के उपाध्यक्ष राम स्वरूप ने बताया कि नगर के सजारी क्षेत्र में काशीराम आवास योजना के तहत 1504 फ्लैट बनाए जाएंगे। इन फ्लैटों को चार मंजिला बनाने की योजना है। यह पूरा निर्माण क्षेत्र 94 ब्लाकों में बांटा जाएगा। यहां पर पार्क, समुदायिक केंद्र, बाजार, और स्कूल की भी सुविधा उपलब्ध होगी। यह योजना एक साल में पूरी कर ली जाएगी।उन्होंने बताया कि इस जमीन पर कुछ काश्तकार कब्जा कर खेती कर रहे थे। जिसे मुख्य अभियंता और तहसीलदार को भेज कर वापस ले लिया गया है और निर्माण के लिए कार्य आदेश जारी कर दिया गया है। एक मई से फ्लैट बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अभी तो जमीन को समतल कराने का कार्य चल रहा है। इन फ्लैट के निर्माण में लगभग 24 करोड़ का खर्च आएगा। इन आवासों को डूडा के तहत गरीबों को आवंटित किया जाएगा। यह फ्लैट उन्हीं गरीब परिवारों को दिये जाएंगे जिनका बीपीएल या अंत्योदय कार्ड बना होगा।

अवनीश अग्निहोत्री कानपुर।(उत्तर प्रदेश).

Vikas Sharma
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Ph-09415060119

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तंगी ने लिए छात्रा के प्राण

Posted on 21 April 2010 by admin

गुरुवार रात एक छात्रा ने आर्थिक तंगी के चलते फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।गोविन्द नगरा थाना क्षेत्र की केनाल कालोनी में स्व. रामदास का परिवार निवास करता है। सात साल पहले रामदास की मृत्यु हो जाने के बाद उसकी पत्नी उर्मिला सब्जी बेज कर किसी तरह से परिवार का भरण पोषण करती है। उसकी छोटी पुत्री मोनी (13) राजकीय विद्यालय में कक्षा आठ में पढ़ती थी।पुलिस ने बताया कि कल शाम करीब छह बजे मोनी की मां सब्जी बेचने को बाजार गई थी। मां के जाने के बाद उसने अपनी छोटी बहन देवकी को बगल के घर में खेलने को भेज दिया। शायद बहन के जाने के बाद ही मोनी ने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। क्योंकि रात दस बजे जब उसकी मां बाजार से वापस लौटी तो उसने कमरे में मोनी को दुपट्टे के सहारे फांसी पर लटका हुआ पाया।बेटी को फांसी पर लटका हुआ देखकर उसके होश उड़ गये। चीख पुकार सुन कर मोहल्ले वाले भी वहां आ पहुंचे। मोनी की मां ने बताया कि मोनी अपने जीवन में बहुत कुछ करना चाहती थी। वह कहती थी मां एक दिन इस टूटे-फूटे घर की जगह बहुत बड़ा महल बनेगा। वह हमेशा परिवार को एक विशेष दर्जा दिलाने की बात करती थी। लेकिन आर्थिक बदहाली के कारण कभी-कभी उदास भी हो जाती थी। पुलिस ने भी मोनी की आत्म हत्या के पीछे आर्थिक तंगी की बात स्वीकार की.

अवनीश अग्निहोत्री कानपुर।(उत्तर प्रदेश).


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Dr. Ram Gopal Yadav (National General Secretary,Samajwadi Party) addressing a Samajwadi Party’s “Pichda Varg Mahasammelan ” at Phool Bagh Ground , Kanpur on 19-04-2010

Posted on 19 April 2010 by admin

19-04-bDr. Ram Gopal Yadav (National General Secretary,Samajwadi Party) addressing a Samajwadi Party’s “Pichda Varg Mahasammelan ” at Phool Bagh Ground , Kanpur on 19-04-2010.Dr. Ram Gopal Yadav(National General Secretary,Samajwadi Party)

19-04-c1

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वकीलों की पहचान का काम शुरू

Posted on 16 April 2010 by admin

कानपुर में दो दिन पहले वकीलों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष के बाद वकीलों ने जिला कचहरी में अपनी हड़ताल जारी रखी। उधर इस मामले में पुलिस ने उन वकीलों की पहचान का काम शुरू कर दिया है, जिनके द्वारा कथित तौर पर किए गए पथराव के बाद हंगामा हुआ। इस बीच वकीलों और पुलिस प्रशासन के बीच समक्षौते के प्रयास भी शुरू हो गये हैं।कानपुर के डीआईजी प्रेम प्रकाश ने संवाददाताओं को बताया कि जिन वकीलों ने पथराव और हंगामा किया था, उनकी पहचान का काम शुरू हो गया है। इसके लिये हंगामे के दौरान बनाई गई वीडियो फिल्म की सहायता ली जा रही है।उन्होंने बताया कि जिन वकीलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, उनकी सूची भी तैयार कराई जा रही है। ऐसे कुछ वकीलों के नाम पुलिस के पास पहुंच गये है, जो इस पथराव और हंगामे में शामिल थे।प्रकाश ने बताया कि आज वरिष्ठ वकीलों का एक दल पुलिस के अधिकारियों से मिलने आया था और उन्होंने शांति बनाये रखने के लिये पुलिस को हर तरह से सहयोग देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके बाद एक शांति समिति का भी गठन किया गया है, जिसमें करीब 20 वकील तथा पुलिस अधिकारी शामिल होंगे।इस मामले के विरोध में वकीलों ने कल अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी, इस लिये आज कचहरी परिसर में पूरी तरह से सन्नाटा छाया रहा और चारों तरफ केवल पुलिसकर्मी ही नजर आये।

अवनीश अग्निहोत्री

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पुलिस वकील संघर्ष के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति शुरू ………..

Posted on 16 April 2010 by admin

पुलिस वकील संघर्ष के बाद वकीलों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति शुरू हो गयी है। सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता वकीलों से मिल कर सहानुभूति जता रहे हैं और उनपर हुए लाठी चार्ज की निंदा कर रहे हैं।उधर, दूसरी ओर महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण जिला कोर्ट वैसे भी बंद है और उसपर वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रखी है इस लिये जिला कचहरी में सन्नाटा छाया हुआ है केवल पुलिस के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी ही कचहरी और उसके आस पास दिख रहे हैं।वकीलों पर हुये पुलिसिया लाठीचार्ज की निंदा करने में कोई भी राजनीतिक दल पीछे नहीं है और वह वकीलों से मिल कर उन्हें समर्थन देने की बात कह रहे है। केन्द्रीय कोयला राज्य मंत्री और कानपुर के सांसद श्रीप्रकाश जायसवाल भी उर्सला अस्पताल में भर्ती घायल वकीलों को देखने गये और उन्होंने इस लाठीचार्ज की निंदा की। जायसवाल अस्पताल में भर्ती बार एसोसिएशन के घायल महामंत्री नरेश त्रिपाठी से भी मिले और उनका हाल चाल जाना।समाजवादी पार्टी के नेताओं के अनुसार शनिवार शाम पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव भी कानपुर पहुंच रहे हैं और वह घायल वकीलों से अस्पताल में मुलाकात करेंगे।कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी सहित सभी पार्टियों के नेता रोजाना अखबारों के दफ्तरों में वकीलों पर लाठी चार्ज की निंदा के बयान भेज रहे है और अस्पताल में जाकर वकीलों से मिल रहे हैं तथा उन्हें आश्वासन दे रहे है कि उनकी पार्टियां वकीलों के साथ उनकी हर लड़ाई में उनके साथ है।

अवनीश अग्निहोत्री

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बच्चों से बचकाना मजाक……..

Posted on 16 April 2010 by admin

बच्चे जो 6 से 14 साल के हैं, वे शायद इस अधिनियम के बारे में नहीं जानते। बस, कोई एक मास्टर या शिक्षामित्र उन्हें मर्जी-बेमर्जी घेरकर स्कूल ले जायेगा। लेकिन वे वहां क्या करेंगे, कैसे पढ़ेंगे? ये बड़े सवाल हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अगर शिक्षामित्रों के भरोसे किसी तरह स्कूल चल रहे हैं तो नगर क्षेत्र में एक स्कूल में एक शिक्षक का भी औसत नहीं है। प्रदेश में सरकारी प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में लगभग पौने तीन लाख पद खाली हैं। शिक्षा अधिकार अधिनियम में दिये गये शिक्षक व छात्र अनुपात की अनिवार्यता पर अधिकांश जिले खरे नहीं उतरते। इकलौते शिक्षक को एक साथ पांच कक्षाओं के लिए ही चपरासी, शिक्षक व प्रधानाध्यापक की ड्यूटी निभानी पड़ती है। मिड डे मील वितरण, चखकर उसकी रिपोर्ट देने, पुस्तकों का वितरण व भवन निर्माण जैसे भी काम करने पड़ते हैं। कानपुर शहर में पंजीकृत 432 स्कूलों में 105 शिक्षकों की कमी में बंद हो चुके हैं। शेष 327 स्कूलों के लिए 327 शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं। 30 स्कूल एक-एक शिक्षामित्र के हवाले हैं। 295 स्कूल एकल शिक्षक हैं। जूनियर के 49 स्कूलों में मात्र 60 शिक्षक हैं। इस तरह गायब हुए शिक्षक कानपुर, इलाहाबाद, आगरा, वाराणसी, लखनऊ, अलीगढ़ जैसे बड़े शहरों में बीते 20 सालों से शिक्षक-शिक्षिकाएं सेवानिवृत्त तो हो रहे हैं, परंतु नियुक्तियां नहीं हुई। इन जनपदों को विशिष्ट बीटीसी के शिक्षक भी नहीं मिले, न ही ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से शिक्षकों का स्थानांतरण या समायोजन हुआ।

अधिनियम में व्यवस्था
प्राथमिक :
बच्चों की संख्या : शिक्षकों की संख्या

60 तक : 2

61 से 90 : 3

91 से 120 : 4

101 से 150 : 5 व प्रधानाध्यापक (विशेष : शिक्षक-छात्र अनुपात 1: 40)

जूनियर : प्रति कक्षा एक शिक्षक

शिक्षक छात्र अनुपात - 1: 35

नगर की तस्वीर
प्राथमिक स्कूल
पंजीकृत : 432

कुल संचालित : 327

बंद हो गये : 105

शिक्षक : 327

शिक्षा मित्र : 200

प्रति स्कूल शिक्षक : 01

छात्र-शिक्षक औसत : अनियमित

प्रधानाध्यापक : स्थायी कहीं नहीं

जूनियर स्कूल

स्कूलों की संख्या : 49

शिक्षकों की संख्या : 60

प्रति स्कूल औसत : 2 से भी कम

प्रधानाध्यापक : कहीं नहीं

बड़ी कमी : विज्ञान, गणित के शिक्षक नहीं

post by-Ashok Agnihotri

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