देश की राजनीतिक पार्टियों ने अपने तथाकथित देश की समस्याओं का हवाला देकर देश में चली आ रही वशोZ से पुरानी अलग राज्य की मांगों को हसियें पर रख दिया है। जनता के नुमाइन्दे जब तक चुनाव नहीं जीतते वो अलग प्रान्त की मांग के साथ जीते है उसी के बल पर चुनाव जीतते है लेकिन चुनाव जीतने के साथ ही वो पार्टी की गाइड लाइन पर चलने लगते है और पार्टी के मुद्दे ही उनके मुद्दे बनते है। पार्टी की नीतियों को ही जनता के गले उतारना शुरू कर देते हैं जो वशोZ से परम्परा चली रही है। जब सभी अपने-अपने सपनों को संजोने में बावस्ता है। तब नेशनल फ्रेन्ट फार न्यू स्टेट्स के मंच से हम उन अलग राज्यों के मुद्दे को राज्य सरकार और केन्द्र सरकार तक पहुचाना चाह रहे है जिनका संघशZ वशोZ से है और जिनकों लेकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार भी अपनी स्वीकृति समय समय पर स्वीकृति दे चुकी है। तेलंगाना को अलग प्रान्त बनाने की घोशणा आधी रात को देश के गृह मन्त्री ने की थी। बुन्देलखण्ड की मांग को जायज ठहराते हुए उ0प्र0 की मुख्यमन्त्री ने स्वयं माना है कि उ0प्र0 को प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था की उन्नति के मद्देनज़र रखते हुए तीन अलग प्रान्तों में बांटना होगा। बुन्देलखण्ड, पूर्वाचंल और हरित प्रदेश के सांसद राहुल गांधी का भी यही मानना है कि बुन्देलखण्ड अत्यन्त ही पिछड़ा इलाका है। इसका विकास होना अत्यन्त आवश्यक है। विकास के लिये जो योजनायें/परियोजनायें दे रहे है पर उनका सुचारू रूप से क्रियान्वयन कैसे हो इसकी व्यवस्था वो नही दे पा रहे है क्योंकि व्यवस्था का जिम्मा राज्य सरकार का है जो केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। राहुल गांधी लगातार बुन्देलखण्ड के विकास को लेकर चिन्तित है। अलग राज्य बनाने की बात पर हर मुलाकात में न नही कहते है उनकी मुस्कुराहट बुन्देलखण्ड का दर्द बयां करती है। विदर्भ राज्य पर सिवाय सेना के विरोध के किसी अन्य पार्टी का कोई विरोध नहीं है। सभी राजनेतिक दल यही चाहते है कि विदर्भ राज्य का निर्माण हो। गोरखालैंण्ड की समस्या पर सरकार ने अलग गोरखालैण्ड काउंसिल बना दी है। हरित प्रदेश का निर्माण होते-होते रह गया। पूर्वाचंल राज्य के लिये लालू यादव और प्रधानमन्त्री जी ने स्वयं अपनी सभाओं मेें कहा है।
नेशनल फ्रन्ट ने इन्हीं राज्यों की मांग करने वालों को अपनी ताकत देने का फैसला किया है जो सम्भावित है। नेशनल फ्रन्ट इस स्थिति में अपने आपकों नही मानता कि अन्य राज्योें की मांगों को न स्वीकारें। सबकी मांगे सही एवं जायज हैं। पर ऐसा हमारा मानना है कि सम्मेलन के लिये लखनऊ ऐतिहासिक नरग नेशनल फ्रन्ट ने इसलिये चुना है कि जिस प्रदेश की मुख्यमन्त्री प्रदेश का विभाजन विकास के लिये कर रही है वही से हम विकास के लिये गुहार लगा रहे है। राज्यों को बनाने की बात शुरू करें। नेशनल फ्रन्ट फार न्यू स्टेट्ट सामूहिक आवाज बनकर केन्द्र और राज्यों में अपनी मांग उठाना चाहता है। छोटे राज्यों की भूमिका देश में किसी से छिपी नहीं है। जब जब नये राज्य देश में बने है वो आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था में विकास का स्वरूप बने है। हम सब एक है, भारत ही हमारा देश है पर हमारी पहचान अलग है। इस पहचान को हमें पहचानना है। महासम्मेलन में पूर्वाचंल के राज्य के हिमायती सांसद अमर सिंह, बुन्देलखण्ड के मुक्तिमोर्चा के राश्ट्रीय अध्यक्ष राजा बुन्देला, तेलंगाना राज्य निर्माण अभियान के नेता, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट पी0 निरूप रेड्डी, विदर्भ राज्य के लिये आन्दोलन चला रहे गजानन्द अहमदावादकर, गोरखालैंण्ड के मुनीश तवांग ने सम्मेलन में छोटे राज्यों के औचित्य पर चर्चा की। छोटे राज्यों के समर्थन करने वाले और सैकड़ों शुभचिन्तकों ने सम्मेलन में सहभागिता कर आन्दोलन को मजबूत बनाने में अपनी हिस्सेदारी का एहसास कराया। सम्मेलन में विदर्भ के सांसद राजू शेट्टी, पूर्वाचंल से अरविन्द सिंह, डा0 हरदेव सिंह तेलंगाना के बसन्त कुमार व बृजेश सम्मेलन के कोआर्डिनेटर बृजमोहन मिश्रा, मृदुल सारस्वत आदि लोग उपस्थित रहे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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