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कांग्रेस स्थापना के 125वें गौरवशाली वर्ष

Posted on 27 May 2010 by admin

कांग्रेस स्थापना के 125वें गौरवशाली वर्ष में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रंखला में आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ0 रीता बहुगुणा जोशी की अध्यक्षता में “धर्मनिरपेक्षता एवं साम्प्रदायिक सद्भाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का योगदान´´ विषय पर एक विचार गोष्ठी, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से “कन्वेंशन सेंटर´´ निकट छत्रपति शाहू जी महराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ में सम्पन्न हुई। विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय अल्पसंख्यक एवं कम्पनी मामले मन्त्री श्री सलमान खुर्शीद उपस्थित रहे। विचारगोष्ठी में प्रख्यात इतिहासकार प्रो0 स्वराज बसु, गांधी दर्शन एवं स्मृति संस्थान की निदेशक डॉ0 सविता सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 आर.पी.सिंह ने अपने विचार रखे।  कार्यक्रम का संचालन पूर्व मन्त्री डॉ0 अम्मार रिजवी ने किया तथा देश व प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब और सांझी विरासत पर प्रकाश डाला।

उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुबोध श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम की शुरूआत झण्डारोहण से हुआ। इसके उपरान्त गोष्ठी में आमन्त्रित अतिथियों एवं मौजूद सभी वरिष्ठ नेताओं ने पं0 जवाहर लाल नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। तत्पश्चात चार विभिन्न धर्मों के जानी-मानी हस्तियों ने डॉ0 रीता बहुगुणा जोशी के साथ दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की।

कार्यक्रम के शुरू में ही सेंट टेरेसा स्कूल की शिक्षिकाओं द्वारा “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा´´ गायन प्रस्तुत किया गया।

संगोष्ठी को गांधी दर्शन एवं स्मृति संस्थान की निदेशक डा0 सविता सिंह ने गोष्ठी का विषय परिचय कराते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्वरूप हमेशा से ही साम्प्रदायिक ताकतों के विरूद्ध संघर्ष करने से ही निखरा है। पं0 नेहरू ने 1944 में ही जेल में जब `डिस्कवरी आफ इण्डिया´ लिखी तो उसमें कई पृष्ठों में केवल सेक्युलर विचारधारा को स्पष्टता के साथ परिभाषित किया गया था और आजाद भारत के लिए इसकी अहमियत पर प्रकाश डाला गया था।

प्रख्यात इतिहासकार प्रो0 स्वराज बसु ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू जैसे नेता धर्मान्धता के खिलाफ थे। गांधी, नेहरू और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अन्य विद्वानों के विचारों ने धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिक सद्भाव के विचारों को आकार दिया जो कि कांग्रेस के विभिन्न आन्दोलनों, जैसे-स्वदेशी, स्वशासन, खिलाफत आदि में प्रतिबिंबित हुए और इस तरह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तहत राष्ट्रवादी आन्दोलन की मुख्य विचारधारा बन गए। उन्होने कहा कि आज का वर्तमान राष्ट्रीय नेतृत्व भी इन्हीं मूल्यों और सिद्धान्तों के प्रति समर्पित है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 आर.पी.मिश्रा ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता के बजाय सर्व-धर्म-समभाव की भावना राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है। उन्होने कहा कि हर धर्म नैतिक मूल्यों की स्थापना और आपसी मेल-मिलाप को बढ़ावा देने की बात करता है। इसलिए धर्म से निरपेक्ष कैसे रहा जा सकता है। उन्होने कहाकि कांग्रेस की अब तक की विरासत मूलत: सर्वधर्मसमभाव पर आधारित रही है, उसे संजोए रखने की आवश्यकता है और इसी से देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्य रखी जा सकती है।

कांग्रेस विधानमण्डल दल के नेता श्री प्रमोद तिवारी ने गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि आपसी भाईचारे और सद्भाव के जरिए कांग्रेस पार्टी लोगों के दिलों में बस चुकी है और इसी के माध्यम से देश की एकता और अखण्डता मजबूत की जा सकती है।

केन्द्रीय अल्पसंख्यक एवं कम्पनी मामले मन्त्री श्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि द्विराष्ट्रीय का जो सिद्धान्त है उसकी प्रासंगिकता पर मोहम्मद अली जिन्ना के जीवनकाल में ही सवालिया निशान लग गया था। उन्होने कहा कि भातर ऐसा मुल्क है जहां बहादुरशाह जफर के नेतृत्व में 1857 की आजादी की जंगल में हिन्दू-मुस्लिम ने और सभी मजहब और जातियों के लोगों ने मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की थी। बहादुर शाह जफर एक ऐसे देशभक्त मुगल शासक थे जिन्हें अपने मुल्क की सरजमीं पर दो गज जमीं तक भी नहीं मिल सकी। उन्होने कहा कि देश का इतिहास हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई की क़ुर्बानियों की कहानी कहता है और आजादी की लड़ाई भी कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में लड़ी गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास और जो क़ुर्बानियों आजादी की लड़ाई और आजादी के बाद दी है उससे इस देश को धर्मनिरपेक्ष स्वरूप मिला है। उन्होने कहा कि आजादी की लड़ाई में हिन्दुस्तान के मुसलमानों का विशेष योगदान रहा है। देश की आजादी की लड़ाई के दौरान ही यह तय हो गया था कि देश का स्वरूप सेक्युलर होगा। डॉ0 जोशी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शहादत में आरएसएस के हाथ होने की ओर संकेत करते हुए कहा कि गांधी जी के सपनों के अनुरूप भारत को कुछ लोग नहीं बनने देना चाहते थ इसीलिए उनकी हत्या की गई। उन्होने कहा कि ऐसी ताकतों को हमें लगातार परास्त करना होगा।

मुख्य प्रवक्ता श्री श्रीवास्वत ने बताया कि मदर टेरेसा कालेज के बच्चों ने गांधी जी की प्रिय प्रार्थना. इपकम पूजी उम … भी प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अन्त में प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुबोध श्रीवास्तव ने इस विचार गोष्ठी में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के आये हुए प्रोफेसरों और जाने-माने बुद्धिजीवियों को गोष्ठी में शिरकत करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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