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जनहित के सभी मोर्चे पर पूरी तरह विफल मायावती सरकार - सुबोध श्रीवास्तव

Posted on 12 May 2010 by admin

लखनऊ - मायावती सरकार के बीते तीन वर्ष जनता की उम्मीदों के धराशायी होने के वर्ष थे। प्रदेश की सुश्री मायावती सरकार जनहित के सभी मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। बसपा सरकार के इस पूरे तीन वर्ष में सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के बजाय `मायावती-परिजन हिताय और बसपा नेता सुखाय´ के लक्ष्य को चरितार्थ किया गया है।

उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुबोध श्रीवास्तव ने आज यहां जारी बयान में कहा कि प्रदेश का हर वर्ग चाहे वह किसान हो, मजदूर, वकील, शिक्षक हो, राज्य कर्मचारी अथवा महिलाएं हों, इस निरंकुश और तानाशाही शासन में इनके द्वारा जनतान्त्रिक तरीके से आवाज उठाने के जो भी प्रयास हुए उसे दमन और उत्पीड़न के जरिए दबाने का कार्य किया गया है। विश्वविद्यालयों में छात्रसंघों के चुनाव जानबूझकर न कराकर छात्रों के जनतान्त्रिक अधिकारों पर कुठाराघात किया जा रहा है। कानून और व्यवस्था की स्थिति रसातल में चली गई, क्योंकि माफियाओं और अपराधी तत्वों को बसपा सरकार में पुरस्कृत किया जाता रहा। मन्त्रिमण्डल में अपराधियों और माफियाओं की भरमार हो गई। जबरन धन उगाही के लिए निरीह लोगों के खून तक बहाये गये। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने वाले नामजद आरोपियों को लालबत्ती दे दी गई, लेकिन आज तक एक भी घर जलाने वाले अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया गया। प्रदेश में कई जगह साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया गया और सुश्री मायावती के नेतृत्व में बसपा सरकार साम्प्रदायिक शक्तियों के हाथों में खेलती रही।

मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि खुद को दलितों का हितैषी बताने वाली बसपा सरकार दलितों का मान-सम्मान, विशेषकर महिलाओं का मान-सम्मान सुरक्षित रख पाने में असफल साबित हुई है। केन्द्र की जनकल्याणकारी योजनाओं में प्रदेश सरकार को हजारों करोड़ रूपये मिले। लेकिन घपले, घोटाले और ऊपर से नीचे तक फेले भ्रष्टाचार के चलते आम लोगों को उन केन्द्रीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया। जब कांग्रेस पार्टी ने केन्द्रीय योजनाओं के धन में प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत दिये तो मजबूर होकर मायावती सरकार को 29 जिले के 41 अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करनी ही पड़ी।

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सुश्री मायावती की सरकार में पानी और बिजली को लेकर आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। किसानों को गावों में बिजली नहीं मिल रही है। नहरों मे टेल तक पानी नहीं पहुंचता। किसानों को खाद नहीं मिलती। और यहां तक कि केन्द्र द्वारा घोषित गेहूं के समर्थन मूल्य के बजाय उन्हें अपना गेहूं बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामो में बेंचना पड़ रहा है क्योंकि राज्य में गेहूं खरीद की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। शिक्षा के अधिकार कानून को प्रदेश में लागू करने के लिए, जिसमें गरीब बच्चों विशेषकर दलितों और वंचितों के बच्चों का भविष्य सुधारने का लक्ष्य है, के लिए सुश्री मायावती ने पैसा न होने का झूठा बहाना बनाया, परन्तु स्मारकों, पार्कों, मूर्तियों को सजाने संवारने में फिजूलखर्ची करके सरकारी खजाने के हजारों करोड़ रूपये बर्बाद किये गये। प्रदेश में विकास पूरी तरह अवरूद्ध हो गया है। अपहरण, अवैध वसूली और सरकारी उत्पीड़न के कारण बड़े उद्योगपति उ0प्र0 की तरफ रूख करने से घबराते हैं। यही कारण है कि न तो नये बिजली लग रहे हैं और न ही नये उद्योग धंधे पनप रहे हैं। परिणाम यह है कि बेरोजगारों की फौज बढ़ती जा रही है। 18हजार पुलिसकर्मियों की नौकरियां छीनने का प्रयास तक किया गया।

मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि कुल मिलाकर सुश्री मायावती के नेतृत्व में बसपा सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में जनता इतनी ऊब गई है कि वह इस सरकार से निजात पाने का मौका तलाश रही है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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