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अजन्मी बेटी का मां के नाम पत्र

Posted on 08 May 2010 by admin

इस लेख को पढ़ने के बाद मुझे यकीन है कि कोई भी महिला कभी भूण हत्या नही करेगी

भ्रूण हत्या पर कटाक्ष करते हुए अजन्मी बेटी का मां के नाम पत्र

मैं खुश हूं और भगवान से प्रार्थना करती हूं कि आप भी सुखी रहें। यह पत्र मैं इसलिये लिख रही हूं क्योंकि मैने एक सनसनीखेज खबर सुनी है जिसे सुनकर सिर से पांव तक कांप उठी।

स्नेहदात्री मां! आपको मेरे कन्या होने का पता चल गया है और आप मुझ मासूम को जन्म लेने से से रोकने जा रही हैं। यह सुनकर मुझे तो यकी नही नहीं हुआ। भला मेरी प्यारीप्यारी कोमल ह्रदया मां ऐसा कैसे कर सकती है कोख में पल रही अपनी लाडली के सुकुमार शरीर नश्तरों की चुभन एक मां कैसे सह सकती है?

पुण्यशीला मां! बस, आप एक बार कह दीजिये के यह जो कुछ मैने सुना है वह सब झूठ है। दरअसल यह सब सुनकर मै दहल सी गई हूं। मेरे तो हाथ भी इतने कोमल है कि इनसे डाक्टर की क्लीनिक की तरफ जाते वक्त आपकी चुन्नी ज़ोर से नहीं खींच सकती ताकि आपको रोक लूं। मेरी बांह भी इतनी पतली और कमजोर है कि इन्हें आपके गले में डालकर लिपट भी नहीं सकती।

मधुमय मां! मुझे मारने के लिये आप जो दवा लेना चाहती हैं वह मेरे नन्हें से शरीर को बहुत कष्ट देंगी। स्नेहमयी मां! उससे मुझे दर्द होगा। आप तो देख भी नहीं पायेंगी कि वह दवाई आपके पेट के अन्दर मुझे कितनी बेरहमी से मार डालेगी। डाक्टर की हथौड़ी कितनी क्रूरता से मेरी कोमल खोपड़ी के टुकड़े-टुकड़े कर डालेगी। उसकी कैंची मेरे नाज़ुक-नाज़ुक हाथ पैरों को काट डालेगी। अगर आप यह दृश्य देखती तो ऐसा करने को कभी सोचती भी नहीं।

सुखमयी मां! मुझे बचाओ कृपा करो, दयामयी मां! मुझे बचाओ वह दवा मुझे आपके शरीर से इस तरह फिसला देगी जैसे गीले हाथों से साबुक की टिकिया फिसलती है। भगवान के लिये मां। ऐसा मत करना। मैं यह पत्र इसालिये लिख रही हूं क्योंकि अभी तो मेरी आवाज़ भी नहीं निकलती। कहूं भी तो किससे और कैसे? मुझे जन्म लेने की बड़ी ललक है मां! अभी तो आपके आंगन में मुझे नन्हें-नन्हें पैंरों से छम-छम नाचना है, आपकी ममता भरी गोद में खेलना है।
चिन्ता नहीं करों मां! मैं आपका खख्र नहीं ब़ाऊंगी। मत लेकर देना मुझे पायल, मैं दीदी की छोटी पड़ गई पायल पहन लूंगीं। भैया के छोटे पड़ गये कपड़ों से तन ढ़क लूंगीए मां! बस एक बार -एक बार मुझे इस कोख से निकालकर चांदतारों से भरे आपके आसमान तले जीने का मौका तो दीजिये। मुझे भगवान की मंगलमय सृष्टि का विलास तो देखने दीजिये।

मैं आपकी बेटी हूं , आपकी लाडली शहज़ादी। मुझे अपने घर में आने दो मां! बेटा होता तो आप पाल लेती फिर मुझमें क्या बुराई है? क्या आप दहेज के डर से मुझे नहीं चाहती, ना्-ना आप दहेज से मत डरना यह सब कुछ भुलावा है। कुछ कोशिश आप करना, कुछ मैं करुंगी। बड़ी होकर मैं अपने पैरों में खड़ी हो जाऊंगी,फिर दहेज क्या चीज़ है? इसका भय तो फुर्र हो जायेगा। देखना, मेरे हाथों पर भी मेंहदी रचेगी, शगुनकारी डोली निकलेगी और आपके आंगन से चिड़िया बनकर मैं उड़ जाऊंगी। आज अभी से मुझे मत उड़ाइये। मैं आपका प्यार चाहती हूं।

एक बेटे के लिये कई मासूम बेटियों की बलि देना कहां तक उचित है? आखिर यह महापाप भी तो आप और आपके चहेते बेटे के सिर पर ही चढ़ेगा। ना्-ना ऐसा कभी मत होने देना, मां…..मेरी प्यारी मां। अब कृपा करके मुझे जन्म दे दीजिये। मुझे मत मारिये, अपनी बगल की डाल पर फूल बनकर खिल जाने दीजिये।

zia-h1

Zia-ul Haq

+919935019243

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