देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता पुरस्कार - देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता पुरस्कार

Posted on 16 April 2010 by admin

नई  दिल्ली, शुक्रवार, 16 अप्रैल, 2010

देश भर के 13 स्कूली बच्चों को बाल भारती निबंध प्रतियोगिता-2009 के पुरस्कार दिए गए। प्रथम पुरस्कार के लिए दिल्ली की संस्कृति रावत, दूसरे पुरस्कार के लिए वर्धा, महाराष्ट्र के ओम कन्हैया बजाज और तीसरे पुरस्कार के लिए जोधपुर, राजस्थान की निधि शुक्ला के निबंध को चुना गया। इस मौके पर अन्य 10 को सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए। तेरह विजेता बच्चों में से दस दिल्ली से बाहर के हैं। इनमें वर्धा, जोधपुर, नरसिंहपुर (म.प्र.), बड़वानी (म.प्र.), जयपुर, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड), सिरसा (हरियाणा), कानपुर (उ.प्र.), हैदराबाद (आ.प्र.), जमशेदपुर (झारखंड) जैसे दूर शहरों के प्रतियोगी शामिल हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तमन्ना फाउंडेशन की अध्यक्ष और शिक्षाविद श्रीमती श्यामा चोना ने विजेताओं को पुरस्कार बांटे।

वर्ष 2006 से हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता में इस बार करीब एक हजार बच्चों ने भाग लिया। इस प्रतयोगता में ‘टीवी कार्यक्रमों में बच्चों की भूमिका- उचित या अनुचित’ विषय पर देश भर के छात्रों ने अपने रचनात्मक निबंध भेजे। उनका मूल्यांकन चयन समिति ने किया। 

इस मौके पर गणित जैसे विषय पर हिंदी में रोचक पुस्तकें लिखने वाले श्री आइवर यूशिएल की पुस्तक ‘खेल है गणित’ का विमोचन भी किया गया। बाल मनोविज्ञान को समझते हुए बच्चों के लिए गणित को रोचक बनाने के तरीके इस पुस्तक में हैं। लेखक ने अनेक कठिन लगने वाले प्रश्नों के हल ढूंढने की तरकीबें भी पुस्तक में बताई हैं जो न केवल रोचक हैं बल्कि खेल-खेल में बच्चों के मन से गणित का डर दूर करती है।

पिछले 62 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रही बाल भारती सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत प्रकाशन विभाग की एक उत्कृष्ट मासिक पत्रिका है। मनोरंजक और ज्ञानवर्धक होने के साथ ही यह बच्चों और किशोरों की प्रतिभा के विकास के लिए रचनात्मक अभियान भी चलाती रही है। वार्षिक निबंध और चित्रकला प्रतयोगिताएं और दूसरी गतिविधियां इसी अभियान का हिस्सा हैं जो बच्चों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा देती हैं। इसमें पाठकों को सक्रिय रूप से शामिल करने की कोशिश लगातार जारी है। बदलते समय के साथ पत्रिका का कलेवर, प्रस्तुतीकरण बदला है। फिर भी पत्रिका की कीमत सिर्फ आठ रुपए है। संभवतः देश की सबसे पुरानी हिंदी की लोकप्रिय बाल पत्रिका बाल भारती की प्रसार संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। 

कार्यक्रम में  अतिथियों का स्वागत प्रकाशन  विभाग की अपर महानिदेशक  श्रीमती वीना जैन ने किया। हर वर्ग और और भाषा-भाषी के लिए किफायती दरों पर पठनीय सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ प्रकाशन विभाग हर माह 13 भारतीय भाषाओं में राष्ट्रीय विकास को दर्शाती ‘योजना’ पत्रिका छापता है। इसके अलावा विभाग हिंदी और अंग्रेजी में ग्रामीण विकास की पत्रिका ‘कुरुक्षेत्र’, तथा हिंदी, और उर्दू में साहित्यिक पत्रिका ‘आजकल’ का प्रकाशन भी करता है।

 


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
E-mail :editor@bundelkhandlive.com
Ph-09415060119

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