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भारत की आध्यात्मिक और संास्कृतिक गंगा नदी पर संकट है - डा0 राजेन्द्र सिंह

Posted on 15 November 2018 by admin

गंगा जी भारत की जीवन धारा रही है, संास्कृतिक, धार्मिक, आस्था, आध्यात्म का केन्द्र रही है गंगा। लेकिन आज सरकार इसको व्यवासायिक नदी बनाने में लगी हुई है। सरकार की नीतियो के कारण नगरंो, कारखानों का प्रदूषित जल पहले ही गंगा में जा रहा था अभी नये जल परिवहन मार्ग से गंगा नदीं का पूरा पर्यावरणीय और पारिस्थतिकी तंत्र बिगड़ जायेगा। इसके कारण गंगा में पाये जाने वाले जीव जन्तु और जैव विविधता का अस्तित्व खतरे में होगा। जिसका गंगा के दोनों किनारो पर बसे शहरो और गंावो की आबादी के स्वास्थय पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा। जिसके कारण भारत की आथर््िाक स्थति और समाजिक संस्कृति में तेजी से गिरावट होगी। चूकि गंगा जी हमारे सम्पूर्ण जीवन के साथ जुड़ी हुई है। इसलिए जीवन के सभी पक्षो को प्रभावित करती है। भारत को यदि हम पुनः गौरव शाली स्थति में लौटाना चाहते है तो गंगा के पुराने अस्तित्व को लाना होगा। आज गंगा के पानी से किडनी, कैसर, लीवर, चर्मरोग आदि बढ़ रहे है पहले इसी के जल से यह रोग ठीक होते थे। क्योकि गंगा में पाये जाने वाले बायोफाज, विलक्ष्ण प्रदूषण नाशिनी शक्ति का प्रभाव रखता था। गंगा को बचाने के लिए भारत के सभी धर्मो के लोगो को आगे आना होगा क्योकि गंगा सबका कल्याण करने वाली नदी रही है। img_3123
गंगा के सच्चे पुत्र स्वामी सांनन्द जी ने गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए अपने प्राणो का बलिदान कर दिया है। उनके सपने को साकार करने के लिए विगत 30 सितम्बर से गौमुख से गंगासागर तक गंगा सद्भावना यात्रा शुरू की गयी है जो देश के विभिन्न शहरो और गांवो में होती हुई 14 जनवरी 2019 को गंगा सागर में समाप्त होगी। या़त्रा का उद्देश्य समाज को गंगा की वास्तविक परिस्थति और उसके बिमारी के कारणो को जन जन तक पहुचाना है।
आज गंगा के बारे में झूठ बोला जा रहा है गंगा की अविरलता और निर्मलता के नाम पर सिर्फ सौन्दर्यीकरण किया जा रहा है। याद रखिये यदि गंगा नहीं रही तो भारतीय संस्कृति खतरे में पड़ जायेगी। गंगा ए क्लास नदी है जिसमें 62 प्रतिशत प्रवाह सुनिश्चित होना चाहिए तभी गंगा की अविरलता और निर्मलता सुनिश्चित होगी।

गंगा सद्भावना यात्रा का नेतृत्व कर रहे आजादी बचाओ आन्दोलन की अगुवाई करने वाले रामधीरज भाई, आर शेखर, अरिवन्द भाई, आलोक भाई ने बताया यात्रा के तहत उत्तर प्रदेश में गंगा के किनारे के सभी शहरो और कस्बो से होती हुई यात्रा बनारस पहुचेगी। यात्रा के अब तक के पडाव रूद्रप्रयोग, हरिद्वार, ऋषिकेश मेरठ , सहारनपुर, शामली, मुज्जफर नगर गढमुक्तेश्वर, बरेली, शहजहाॅपुर, इलाहाबाद, सोनभद्र, मऊ, कानपुर , बलिया, आजमगढ, गोरखपुर, बस्ति, फैजाबाद, आयोध्या होते हुए आज लखनऊ पहुची।

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