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देश के तपे-तपाए नेतृत्व को संसद की चौखट से बाहर रखने के लिए सक्रिय है तत्व- सपा

Posted on 24 March 2010 by admin

लखनऊ -   नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद श्री अहमद हसन एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री राजेन्द्र चौधरी का प्रेस कान्फ्रेस में जारी वक्तव्य मे कहा कि महिला आरक्षण बिल के पीछे छिपी  अंतरराष्ट्रीय साजिश के सम्बंध में जब से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव ने संकेत किया है तब से उन पर तमाम ताकतें हमलावर हो उठी हैं। देश के तपे-तपाए नेतृत्व को संसद की चौखट से बाहर रखने के लिए जो तत्व  सक्रिय है वे सामाजिक न्याय के सिद्धान्त के विरोधी और संसद की गरिमा को गिराने में लगे हुए है।

तीन चुनावो के बाद लोकसभा में पुरूषो की भागीदारी नगण्य हो जायेगी। नौजवानों के लिये लोकसभा के दरवाजे हमेशा के लिए बन्द हो जायेगें। ऐसी स्थिति में बेरोजगार नौजवान सड़को पर सीटी बजाते फिरेगें। श्री मुलायम सिंह यादव की भावना को न समझकर उनके शब्दों को तोड मरोड़ कर अर्थ का अनर्थ करने वाले वे लोग है जिनका गांव गरीब से कोई मतलब नहीं है। भारतीय समाज की सच्चाई यह है कि आज भी बड़ी संख्या में गांव के झोपड़ों में रहने वाली महिलाओं के पास एक धोती छोड़कर दूसरी धोती नहीं होती है। वे कुपोशण की शिकार हैं और उनके बच्चे नंगे घूमते हैं।   श्री मुलायम सिंह की चिन्ता के केन्द्र में ये महिलाएं हैं जो हर तरह से वंचित एवं शोषित है। उनकी तकलीफें अभिजात्य वर्ग की महिलाएं नहीं महसूस कर सकती है। उन्हें जब राजनीति में, सत्ता में भागीदारी मिलेगी तभी हिन्दुस्तान की आधी आबादी की आवाज सुनाई देगी।

समाजवादी आन्दोलन ने सदैव महिलाओं को विशेष अवसर देकर आगे बढ़ाने का सपना देखा है। श्री मुलायम सिंह यादव भी चाहते हैं कि हर स्थिति में पिछड़ी, मुस्लिम तथा दलित महिलाओं के साथ न्याय हों। उन्हें हर जगह उचित एवं सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिले। श्री यादव ने संसद में  इसी की मांग उठाई। महिलाओं की भागीदारी के नाम पर संसद में केवल बड़े घरानो की ही महिलाओं की उपस्थिति न रहे, समाज के मुसलमान, पिछड़े वर्ग तथा दलित की महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा तभी असली भारत की आवाज संसद में गूंजेगी।

भाजपा और कांग्रेस के अलावा कुछ वामपन्थियों के भी उनके सुर में सुर मिला लेने से एहसास होता है कि इस देश में अभी निहित स्वार्थो की जकड़न कितनी मजबूत है। इन अंग्रेजी परस्त दलों में इस विशय पर एकता अस्वाभाविक नहीं क्योंकि वे राजनीति को अपनी अभिजात्य शैली से ही चलाने के आदी हैं। कांग्रेस ने 50 साल से ज्यादा देश पर शासन किया किन्तु गांव-गरीब और खासकर दलित, पिछड़ो एवं मुस्लिम महिलाओं की उसने घोर उपेक्षा की है। भाजपा तो प्रारम्भ से ही महिला विरोधी मानसिकता से ग्रस्त रही है और उसे उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देने से परहेज रहा है। वह सिर्फ शहरी महिलाओं तक केंद्रित रही है। बसपा ने तो हमेशा ही महिलाओं का उत्पीड़न किया है उनके शासनकाल में महिलाओं के साथ सत्तारूढ़ दल के नेताओं द्वारा बलात्कार एवं दहेज उत्पीड़न  की घटनाएं देश में उत्तर प्रदेश प्रथम हैं।

श्री मुलायम सिंह यादव ने सदैव महिलाओं को सर्वाधिक सम्मान एवं महत्व दिया है। जेन्डर बजटिंग और कन्या विद्या धन योजना, छात्राओं को यूनीफार्म आदि की व्यवस्था श्री यादव के मुख्यमन्त्रित्वकाल में हुई थी। श्री यादव ने हमेशा बेजुबानो की राजनीति की है और बेसहारा के लिए लड़ाइयां लड़ी हैं। दलित, पिछड़ी और मुस्लिम महिलाएं किसी बहकावे में आने वाली नहीं है। क्योकि वे भलीभन्ति जानती हैं कि श्री मुलायम सिंह यादव ही उनके हितों के लिए संसद और सड़क पर आवाज उठाते रहे हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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