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राज्यपाल ने सूचना विभाग की पत्रिका नया दौर के अटल विशेषांक का विमोचन किया

Posted on 09 September 2018 by admin

अटल जी की कविताओं का उर्दू अनुवाद एक अच्छी पहल है - राज्यपाल
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लखनऊ: 09 सितम्बर, 2018
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित मासिक उर्दू साहित्य पत्रिका ‘नया दौर’ के ‘अटल विशेषांक’ का आज राजभवन में विमोचन किया। माह अगस्त 2018 के विशेषांक में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी पर एक विशेष परिशिष्ट प्रकाशित किया गया है जिसमें अटल जी की कवितायें तथा उनके लेखों को उर्दू में अनुवाद करके प्रकाशित किया गया है। इस विशेष परिशिष्ट में 34 गैर मुस्लिम समकालीन उर्दू कवि एवं लेखकों की उत्कृष्ट रचनाओं का भी समावेश किया गया है। इस अवसर पर निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश डाॅ0 उज्जवल कुमार, नया दौर पत्रिका के सम्पादक श्री सुहैल वहीद, उर्दू प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव आकाशवाणी श्री प्रतुल जोशी, श्री प्रवेश मलिकजादा, श्री तारिक कमर, श्री रफत नईम, श्री सलीम अहमद, श्री वकार रिज़वी सहित अन्य विशिष्टजन भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने विमोचन के पश्चात अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि अटल जी की कविताओं का उर्दू अनुवाद एक अच्छी पहल है। विशेषांक में श्री रत्न सिंह, श्री गुलजार दहेलवी, श्री खुशबीर सिंह ‘शाद’, सुश्री नलिनी विभा, श्री कृष्ण भावुक, श्री सिया सचदेवा व अन्य गैर मुस्लिम कवियों एवं लेखकों की कृतियों को शामिल करके यह बताने का अच्छा प्रयास किया गया है कि उर्दू केवल मुस्लिमों की भाषा नहीं है। हिन्दी के बाद देश भर में उर्दू दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। वास्तव में उर्दू भाषा हिन्दी की छोटी बहन है। उर्दू में अनुवादित अटल जी की कविताओं को उर्दू भाषियों तक पहुंचाने का ‘नया दौर’ ने सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि समाज के सामने यह लाने की जरूरत है कि भाषायें एक-दूसरे को जोड़ने का माध्यम हैं।
श्री नाईक ने अटल बिहारी वाजपेयी से अपने पांच दशकों के संबंध का उल्लेख करते हुये कहा कि अटल जी की सहजता उनकी विशेषता थी और उन्हें लोगों को अपना बनाने की कला आती थी। कविता पढ़ने का उनका विशेष अंदाज था। स्वर्गीय अटल जी की विशेषता है कि लखनऊ से सांसद रहते हुये वे तीन बार प्रधानमंत्री बने पर उन्होंने लखनऊ में अपना कोई निजी मकान नहीं बनाया। प्रधानमंत्री रहते हुये राजभवन को उनके आतिथ्य का अनेक बार अवसर मिला। राज्यपाल ने बताया कि 1994 में जब उन्हें कैंसर हुआ तब वे कई संसदीय समितियों के अध्यक्ष, सदस्य तथा चीफ व्हिप थे तथा अटल जी विपक्ष के नेता थे। अपनी बीमारी की जानकारी देते हुये अटल जी को अपना इस्तीफा सौपा की ‘पता नहीं कब आऊंगा या नहीं आऊंगा, इसलिये अपना इस्तीफा दे रहा हूँ।’ अटल जी ने जिम्मेदारी दूसरों को देते हुये प्रोत्साहित करने की दृष्टि से मुझसे पूरे विश्वास से कहा कि ‘आपको आना ही पड़ेगा।’ राज्यपाल ने कहा कि ऐसे कठिन समय पर प्रोत्साहित करना कोई अटल जी से सीखे। उन्होंने कहा कि अटल जी उन्हें देखने कई बार मुंबई भी आये।
सूचना निदेशक डाॅ0 उज्जवल कुमार ने राज्यपाल का स्वागत करते हुये कहा कि नया दौर पत्रिका काफी लोकप्रिय है। लगभग 3,500 प्रतियाँ प्रतिमाह प्रकाशित की जा रही हैं। स्वर्गीय अटल जी पर आधारित यह विशेषांक उर्दू साहित्य के शोधार्थियों के काम आयेगा। उन्होंने नया दौर की सम्पादकीय टीम की सराहना भी की।
श्री सुहैल वहीद सम्पादक नया दौर ने विशेषांक के बारे में अपने विचार रखते हुये बताया कि इस अंक में आॅस्कर, ग्रेमी अवार्ड एवं दर्जनों अन्य पुरस्कार प्राप्त करने वाले विश्व विख्यात गीतकार गुलजार की भी ‘ऩज्में’ इस अंक में प्रकाशित की गयी हैं।

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