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योग से निरोग पथ पर विश्व - डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय

Posted on 20 June 2018 by admin

लखनऊ 20 जून 2018, भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि योग भारत की प्रचीन परम्परा का अमूल्य उपहार है जो मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि शास्वत सांस्कृतिक परम्पराओं के संवाहक के रूप में हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कालजयी प्रयास से योग को विश्व स्वीकार्यता प्राप्त हुई और तीन वर्ष पूर्व विश्व इतिहास रचते हुए सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयः के भाव को लेकर विश्व धरा पर योग की ध्वनि गंूजी। डा. पाण्डेय ने कहा कि योग शरीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के विकारों का शमन करता है वह लोग जो योग का विरोध कर रहे है उन सभी को मनोविकार दूर करने के लिए योग करना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि योग शरीरिक स्वास्थ्य से चित्तवृत्तिनिरोधः का मार्ग है। जो चित्त में चंचल वृत्तियों के प्रवेश को रोकता है। सर्वे सन्तु निरामयः की भारतीय अवधारणा के साथ पूरे विश्व को निरोगी करने के लिए प्रधानमंत्री मा. नरेन्द्र मोदी जी ने महर्षि पतंजलि के योग सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अथक प्रयास किया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने मोदी जी के विचारों और प्रयासों को मान्यता देकर 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रारम्भ कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को विश्व मान्यता दी है। यह हम सभी भारतीयों को गर्वित करता है। योग विचार, संयम और पूर्णता प्रदान करता है। मोदी जी को भारतीय विधा से विश्व परमार्थ के सफल प्रयास के लिए बधाई।
डा. पाण्डेय ने कहा कि जहां एक ओर समूचें विश्व ने जाति, पंथ, मजहब से परे जनकल्याण को स्वीकार किया वहीं भारत में राजनीतिक विद्वेष के पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग योग का विरोध करते रहते है। योग भारतीय मूल्यों की विश्व को सौगात है। क्षिप्त, मूढ़ विक्षिप्त, निरूद्ध और एकाग्र यह पांच चित्त की वृत्तियां है। क्षिप्त, मूढ व विक्षिप्त वृत्तियों को चंचल होने से रोकना ही योग है। जो लोग योग का विरोध कर रहे है उनके चित्त की वृत्तियां योग करने से ही दुरूस्त होंगी। विपक्ष की विडम्बना है कि वह तुष्टिकरण की राजनीति करते-करते इस मुकाम पर पहुॅच गई है कि भारतीय गौरव गरिमा और जनकल्याण के कार्यो का भी विरोध करने लगी है। योग को पूरे विश्व में स्वीकार्यता मिली है भारत का जन-जन योग से निरोग की यात्रा पर अग्रसरित है। विपक्ष को भी विरोध त्याग करके योग करना चाहिए।

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