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भू-जल सम्पदा के कुशल प्रबंधन एवं नियोजन के लिए अधिनियम लाया जायेगा

Posted on 15 December 2017 by admin

भू-जल उपभोक्ताओं के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा
लखनऊः 15 दिसम्बर, 2017
प्रदेश में भूगर्भ जल के संरक्षण एवं प्रबन्धन हेतु ग्राउण्ड वाटर (मैनेजमेन्ट एण्ड रेगुलेशन) बिल-2017 तैयार किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा परिचालित माॅडल ग्राउण्ड वाटर (सस्टेनेबल मैनेजमेन्ट) बिल-2016 में प्रदेश की स्थानीय आवश्यकताओं एवं भूगर्भ जल परिस्थितियों को समावेश करते हुए बाटम-अप-अप्रोच पर प्रदेश में एक्ट लागू करने कार्यवाही की जा रही है।
यह जानकारी आज यहां प्रमुख सचिव, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल, श्रीमती मोनिका एस0 गर्ग ने दी। उन्होंने बताया कि भू-जल सम्पदा के कुशल प्रबंधन एवं नियोजन करने के लिए इस अधिनियम को लाने की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 172 विकास खण्ड समस्याग्रस्त है। इनमें से 113 विकासखण्ड अतिदोहित, 59 विकासखण्ड क्रिटिकल एवं 45 विकासखण्ड सेमीक्रिटिकल श्रेणी में वर्गीकृत किए गये हैं। वर्ष 2000 में समस्याग्रस्त विकासखण्डो की संख्या मात्र 45 थी जो लगभग नौ गुना बढ़कर वर्तमान में 172 पहुंच चुकी है।
श्रीमती गर्ग ने बताया कि बिल में प्रस्तावित प्राविधानों के अनुसार भूगर्भ जल के व्यवसायिक, औद्योगिक एवं थोक उपभोक्ताओं को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इनके लिए भूजल निकास की सीमा निश्चित होगी। भूजल निकास की मात्रा के अनुसार शुल्क वसूल किया जायेगा। भूजल निकासी हेतु इन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जारी किये जायेंगे। जनता की सहूलियत के लिए कृषि एवं अन्य घरेलू उपभोक्ता को केवल आनलाइन सूचना ही देनी होगी।
प्रमुख सचिव ने बताया कि बिल में भूजल प्रदूषण की रोकथाम, स्वविनियमन, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, जल भराव की रोकथाम इत्यादि के उपाय किये गये हैं। भूजल एक्ट में वर्णित प्राविधानों के उल्लंघन की स्थिति में दण्ड की व्यवस्था का भी प्रस्ताव किया गया है। बिल में अंकित प्राविधान में किसी भी विवाद के निपटारे हेतु भूजल शिकायत निवारण प्रकोष्ठ की भी व्यवस्था की गयी है।

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