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राज्यपाल से मिले विधि विद्यार्थी

Posted on 09 November 2017 by admin

स्वयं को स्थापित करने के लिये कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है - श्री नाईक
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लखनऊ: 9 नवम्बर, 2017
aks_7588उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक से आज राजभवन में टी0आर0सी0 लाॅ कालेज, सतरिख, बाराबंकी के छात्र-छात्राओं ने भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री चन्द्रप्रकाश, टी0आर0सी0 कालेज के अध्यक्ष श्री उमेश चन्द्र चतुर्वेदी, सचिव डाॅ0 सुजीत चतुर्वेदी, निदेशक श्री अश्वनी गुप्ता सहित फैकल्टी के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। अध्यक्ष श्री उमेश चन्द्र चतुर्वेदी ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह व अंग वस्त्र भेंट करके सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने विधि के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘आप सब विधि के विद्यार्थी हैं जहाँ आपको भारत का संविधान पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाता है। ज्ञान और शिक्षा पूंजी के समान हैं जिनसे लाभ उठाकर विद्यार्थी अपना भविष्य स्वयं तय कर सकते हैं। स्वयं को स्थापित करने के लिये कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेक 39(क) में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया गया है।’ विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र वकालत का पेशा, न्यायिक अधिकारी बनकर, विधि शिक्षण, प्रशासनिक सेवाओं या कारपोरेट क्षेत्र में अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी को न्याय शीघ्र मिले यह देखने का काम न्यायालय, वहाँ के अधिकारी-कर्मचारी और वकीलों का है।
श्री नाईक ने कहा कि केवल किताबी कीड़ा न बने बल्कि ज्ञानार्जन के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व एवं स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। दीर्घकाल तक काम करने के लिए व्यक्तित्व विकास के साथ स्वास्थ्य का अच्छा होना जरूरी है। राज्यपाल ने व्यक्तित्व विकास के चार मंत्र बताते हुए कहा कि सदैव प्रसन्नचित रह कर मुस्कराते रहंे, दूसरों के अच्छे गुणों की प्रशंसा करें और अच्छे गुणों को आत्मसात करने की कोशिश करें, दूसरों को छोटा न दिखाए तथा हर काम को और बेहतर ढंग से करने का प्रयास करें। उन्होंने ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ श्लोक का उद्धृत करते हुए कहा कि निरंतर प्रयास करने वाले को ही सफलता मिलती है।
राज्यपाल ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने 1958 में मुंबई के के0सी0 लाॅ कालेज से नौकरी करते हुए विधि की डिग्री प्राप्त की। प्रत्यक्ष रूप से वे न्यायालय में वकील की हैसियत से तो नहीं गए लेकिन तीन बार विधायक तथा पांच बार सांसद रहते हुए कानून कैसे बनता है इसका अनुभव उन्हें है। उन्होंने छात्रों को राज्यपाल के दायित्व के बारे में विस्तार से बताया तथा यह भी कहा कि सामाजिक क्षेत्र में काम करने वालों के जीवन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही जरूरी है। इसी दृष्टि से वेे विधायक, सांसद रहते हुए तथा उसके बाद भी अपना वार्षिक कार्यवृत्त जनता के समक्ष रखते हैं। उन्होंने कहा कि राजभवन में रहते हुए भी यह क्रम जारी है।
श्री नाईक ने विद्यार्थियों को अपने वार्षिक कार्यवृत्त ‘राजभवन में राम नाईक 2016-17’ की प्रति भी भेंट की।

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