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द्वितीय दिवस:तृतीय अंतरराष्‍ट्रीय टॉक्‍सीकोलॉजी कॉनक्‍लेव, आईटीसी-2017

Posted on 07 November 2017 by admin

अंतर्राष्ट्रीय विष विज्ञान सम्मेलन के दूसरे दिन विनियामक विषविज्ञान और कम्प्यूटेशनल विषविज्ञान पर परिचर्चा हुई।
dsc_5645सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर) के मुख्य वैज्ञानिक डॉ॰ पूनम कक्कड ने अपने व्याख्यान, “विनियामक विष विज्ञान में मौजूदा चुनौतियों का सामना करने के लिए समेकित दृष्टिकोणों” में सुरक्षा मूल्यांकन के लिए सिलिको / इन विट्रो टेस्ट सिस्टम में हाल ही में विषाक्तता के पारंपरिक मार्करों से प्रतिमान बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया। इन तकनीकों से कम समय के साथ साथ जन्तु प्रयोग को भी कम किया जा सकेगा। डॉ॰ शेखर चेलूर, अनुसंधान निदेशक, ऑरिगेन डिस्कवरी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, बेंगलुरु ने छोटे अणु ऑन्कोलॉजी ड्रग्स की खोज और विकास में शामिल प्रक्रियाओं का वर्णन करते हुए सभा को बताया कि टॉक्सिकोलजिक पैथोलॉजी प्रारंभिक उम्मीदवार दवा की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और नेतृत्व के माध्यम से इसके विकास का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि विषविज्ञान के कारणों से ऑन्कोलॉजी दवा के उम्मीदवार के विकास को रोकने का निर्णय एक जटिल और सूक्ष्म प्रक्रिया है। छोटे अणुओं के दवाओं के विकास पर एक प्रस्तुति “इंडियन सबमिशन एंड फाइलिंग फॉर बायोसिमिलर्स” ल्यूपिन लिमिटेड, पुणे के डॉ॰ विशाल पवित्राकर द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशिष्ट विनियामक मार्गों का मूल्यांकन, जो आईएनडी जमा करने की आवश्यकताओं का निर्धारण करता है, प्रक्रिया को कम समय में अधिक मजबूती से कर सकता है। विभिन्न क्षेत्रों के विनियामक आवश्यकताओं के बीच अंतर पर भी चर्चा हुई। श्री के एस त्यागराजन ने भारतीय कृषि के सामने आने वाली कई चुनौतियों के लिए शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित करने की मांग की। उन्होने कहा कि अधिक प्रभावी नियमों के विवेकपूर्ण उपयोग के साथ एग्रोकेमिकल्स का प्रयोग कीट प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता हैं।
प्रस्तुतियों के पश्चात सभी वक्ताओं और अन्य आमंत्रित विशेषज्ञों के बीच एक पैनल में चर्चा हुई। चर्चा में मानव स्वास्थ्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होने के लिए एक अधिक मजबूत और सुगम नियामक वातावरण पर ज़ोर दिया गया और इसको सक्षम बनाने के लिए उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच व्यापक सहयोग पर बल दिया गया।

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