Categorized | लखनऊ.

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का सही ज्ञान होने से दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से किया जा सकता है -जावेद उस्मानी

Posted on 24 October 2017 by admin

लखनऊ-23 अक्टूबर 2017, मुख्य सूचना आयुक्त उ0प्र0 श्री जावेद उस्मानी ने कलेक्टेªेट स्थित डा0ए0पी0जे0अब्दुल कलाम सभागार में जनपद लखनऊ के जन सूचना अधिकारियों तथा प्रथम अपीली अधिकारियों के एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। श्री उस्मानी ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 एक क्रान्तिकारी कदम है जिसमे जनता को सशक्त बनाया गया है कोई भी नागरिक अब सरकारी कार्यालयों से सूचना प्राप्त कर सकता है। गुड गर्वेनेन्स की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है इससे सरकारी कार्यो में पारदर्शिता एवं जवाबदेही और भ्रष्टाचार को दूर करने में मदद मिलेगी।
उन्होने कहा कि जन सूचना अधिकारियों की मंशा सूचना उपलब्घ कराने की होनी चाहिए इसमे किसी प्रकार की अड़चन नही डालनी चाहिए। उन्होने कहा कि पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण का पहला चरण जनवरी 2016 से प्रारम्भ किया गया था जो पूरा हो गया है, अब दूसरे चरण में लखनऊ , आगरा एवं मेरठ मण्डलों के जनपदों में प्रशिक्षण चलाया जायेगा जिसमे आज लखनऊ जनपद में आयोजित यह पहला कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। उन्होने कहा कि सूचना देना जन सूचना अधिकारियों का प्रमुख दायित्व है ठोस आधार एवं विधिक कारणों पर ही सूचना देना मना कर सकते है अन्यथा अर्थ दण्ड के भागीदार बनेंगे। प्रथम अपीलीय अधिकारी दोनो पक्षों को निर्धिारित समय तिथि पर सूचित कर विवेकपूर्ण ढंग से सुव्याख्यात्मक आदेश पारित करें ताकि सूचना आयोग को मामले में निर्णय लेने में अनावश्यक देरी न हो।
उन्होने कहा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी पर जुर्माने का प्राविधान नही है लेकिन लापरवाह एवं जुम्मेदारी से बचने वाले अपीलीय जन सूचना अधिकारियो के विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्म्क कार्यवाही किये जाने हेतु शासन को लिखा जायेगा। उन्होने कहा कि अपीलीय अधिकारी को निर्णय लेने में कहीं कोई दिक्कत हो तो अपने उच्च एवं अधीनस्थ अधिकारियों से सहायता / जानकारी हेतु पत्र लिखें। उन्होने कहा कि यह दिखना चाहिए कि अपीलीय अधिकारी द्वारा अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन किया गया है। अर्थ दण्ड के बारे में बताया कि यह जन सूचना अधिकारी के द्वारा सूचना न देने पर उसके वेतन से कटेगा और शासन स्तर पर इसकी समीक्षा किये जाने हेतु आयोग ने पत्र भी लिखा है। अर्थ दण्ड लग जाने के बाद भी प्रकरण समाप्त नही होगा और जन सूचना अधिकारी को आवेदक को सूचना देने का प्रकरण चलता रहेगा।
उन्होने कहा कि जन सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 तथा जल सूचना का अधिकार नियमावली 2015 का भली भांति अनुशीलन कर लिया जाये, तो सूचना देने में कोई कठिनाई नही आयेगी। उन्होने बताया कि आयोग में इस समय 37 हजार पुराने प्रकरण अपील मे लम्बित हैं जिन्हे अगले एक वर्ष में 20 हजार पर लाया जायेगा। आयोग को प्रति वर्ष लगभग 30 हजार मामले आते है, प्रकरणों के निस्तारण को गति देते हुए प्रयास हे कि आने वाले समय में उसी वर्ष में निस्तारित हो जायें। आयोग के प्रशिक्षक श्री राजेश मेहतानी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से आये हुए प्रथम अपीलीय जन सूचना अधिकारियों/ जन सूचना अधिकारियो को विस्तृत रूप से जानकारी दी।
इस अवसर पर सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह विष्ट, मण्डलायुक्त श्री अनिल गर्ग, आयोग के सचिव श्री उदयवीर सिंह यादव, जिलाधिकारी श्री कौशलराज शर्मा, सहित जनपद के सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.

Advertise Here

Advertise Here

 

October 2026
M T W T F S S
« Sep    
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
-->









 Type in