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उत्तर प्रदेश में ईज़ आॅफ डूइंग बिज़नेस में सुधार हेतु कार्य में आई तेजी

Posted on 15 September 2017 by admin

ऽ सभी विभागों को उद्यम व व्यापार से संबंधित सुधारों को सितम्बर के अन्त तक लागू करना होगा
ऽ सभी विभाग उद्योग व व्यापार से संबंधित सेवाओं को उ.प्र. जनहित गारण्टी अधिनियम में सम्मिलित करें-मुख्य सचिव, राजीव कुमार
ऽ उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लागू करेगा ‘आॅनलाइन स्वीकृति प्रबन्धन एवं अनुश्रवण प्रणाली’

dsc_4646_r2_c1उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 04 जुलाई, 2017 को नई औद्यौगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति-2017 को घोषित करने के बाद अब राज्य सरकार ने व्यापार करने में सहजता (इज़ आॅफ डूइंग बिज़नेस) को बेहतर बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों पर विशेष बल देते हुए इस दिशा में कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
इस सन्दर्भ में आज यहां मुख्य सचिव, श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में लगभग 20 विभागों की एक अतिमहत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई।
विदित हो कि भारत सरकार के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा विश्व बैंक की सहभागिता में इसी वर्ष अप्रैल में बिज़नेस रिफाॅर्म ऐक्शन प्लान-2017 जारी किया था, जिसको सभी राज्यों द्वारा लागू किया जाना है।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिवों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि बिज़नेस रिफाॅर्म ऐक्शन प्लान 2017 के अन्तर्गत निर्दिष्ट-12 सुधार क्षेत्रों की नियामक प्रक्रियाओं, नीतियों, प्रणालियों आदि से संबंधित सभी संस्तुतियों को इस माह (सितम्बर) के अन्त तक लागू कर दिया जाये। उन्होंने कहा कि आर्थिक व सामाजिक विकास के लिये निवेश व औद्योगिक विकास अनिवार्य है, अतः व्यापार करने में सहजता (इज़ आॅफ डूइंग बिज़नेस) को बेहतर बनाने के लिए समयबद्ध व त्वरित कार्यवाही की आवश्यकता है, जिससे राज्य में निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे अपने विभाग के अन्तर्गत उद्योग व व्यापार से संबंधित सेवाओं को निर्धारित समय-सीमा के साथ उ.प्र. जनहित गारण्टी अधिनियम में सम्मिलित कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों द्वारा निवेशकों को सुगमता व पारदर्शिाता से जानकारी उपलब्ध कराने हेतु अपनी वेबसाइट को अपडेट करना होगा।
बिज़नेस रिफाॅर्म ऐक्शन प्लान 2017 के अन्तर्गत श्रम नियमन, संविदा, सम्पत्ति का रजिस्ट्रªेशन, निरीक्षण प्रक्रिया में सुधार, सिंगल विण्डो सिस्टम, भूमि उपलब्धता एवं आवंटन, निर्माण स्वीकृति, पर्यावरण, कर, जानकारी की पारदर्शिता उपलब्धता तथा क्षेत्र-विशेष के उद्यमों से संबंधित सुधारों को सम्मिलित किया गया है।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, डाॅ. अनूप चन्द्र पाण्डे ने बताया कि राज्य सरकार व्यापार करने में सहजता (इज़ आॅफ डूइंग बिज़नेस) में गुणात्मक सुधार लाने के लिए कटिबद्ध है।
श्रम विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण कदम के तहत सभी श्रम अधिनियमों के अन्तर्गत संयुक्त निरीक्षण का प्राविधान किया गया है। साथ ही स्व-प्रमाणन तथा तृतीय पक्ष द्वारा सत्यापन का प्राविधान भी किया गया है। अब उद्योगों द्वारा केवल एक एकीकृत एनुअल रिटर्न फाइल करना होगा।
बैठक में सूचित किया गया कि सिंगल विण्डो के सिद्धांत को लागू करने की दिशा में उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ‘आॅनलाइन स्वीकृति प्रबन्धन एवं अनुश्रवण प्रणाली लागू करेगा, जिसको उद्योग विभाग द्वारा तैयार कराये जा रहे नवीन सिंगल विण्डो सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास श्री आलोक सिन्हा, सचिव, औद्योगिक विकास, श्रीमती अलकनंदा दयाल तथा वाणिज्य कर, ऊर्जा, श्रम, वन, आवास, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, शहरी विकास, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन सेवा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक निर्माण विभाग, राजस्व, खाद्य सुरक्षा एवं औषधीय प्रशासन, स्टाॅम्प एवं रजिस्ट्रेशन आदि विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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