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राज्यपाल से मिले भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी

Posted on 08 September 2017 by admin

प्रशासनिक अधिकारी समग्रता से विचार करें तो बड़ा परिवर्तन हो सकता है - राज्यपाल
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पारदर्शिता एवं जवाबदेही के लिए स्वमूल्यांकन जरूरी है - श्री नाईक

aks_3998उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक से आज राजभवन में भारतीय प्रशासनिक सेवा वर्ष 2016 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भेंट की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी लखनऊ के महानिदेशक श्री कुमार अरविन्द सिंह देव, प्रमुख सचिव श्री राज्यपाल सुश्री जूथिका पाटणकर, सचिव श्री राज्यपाल श्री चन्द्रप्रकाश, अपर निदेशक उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी श्री रमाकांत पाण्डेय एवं श्री संजय कुमार सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारी कार्यपालिका के प्रमुख घटक के रूप में कार्य करते हैं। बदलते परिवेश में यह देखा गया है कि प्रशासनिक सेवा में इंजीनियरिंग एवं मेडिकल के छात्र स्थान प्राप्त कर रहे हैं, जबकि पूर्व में वाणिज्य एवं कला संकाय के छात्र प्रशासनिक सेवा में ज्यादा होते थे। तकनीक एवं प्रौद्योगिकी के युग में विकास की दृष्टि से टेक्नोक्रेट्स का प्रशासनिक सेवा में आना अधिक महत्व का है। जनसेवा के लिए प्रशासनिक सेवाएं उचित माध्यम हैं। प्रशासनिक अधिकारी समग्रता से विचार करें तो बड़ा परिवर्तन हो सकता है। उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर टीम भावना से काम करने की जरूरत है।
श्री नाईक ने कहा कि शासकीय सेवा में जवाबदेही जरूरी है। अपने काम का लेखा-जोखा स्वयं रखें। इससे कार्य निष्पादन में सुधार का भी अवसर मिलता है। अपने कार्य के स्वमूल्यांकन से पारदर्शिता बनाये रखने में सहायता मिलती है। समय से काम निपटाने की प्रवृत्ति विकसित करें तथा कार्यालय छोड़ने से पहले कल क्या करना है, इस पर भी विचार करें। अपने कार्य का नियमित हिसाब रखने से एक ओर कार्यक्षमता बढ़ती है तो दूसरी तरफ लम्बित काम भी पूरे हो जाते हैं। कुछ नया करने की दृष्टि बनायें जिससे अलग पहचान बने। उन्होंने कहा कि कार्य निष्पादन में कार्य और समय का प्रबंधन सबसे महत्व का होता है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी के लिए व्यवहार कुशल होना आवश्यक है। अधीनस्थों की कमियों को सार्वजनिक रूप से इंगित न करके व्यक्तिगत रूप से सुधारने का प्रयास करें। जनता से सम्पर्क बनाये रखें। योग्य और नियम संयत काम करें। नियम विरूद्ध कार्य न करें बल्कि विनम्रता से मना कर दें। छोटी-छोटी बातों का अपना महत्व होता है इसलिए उन पर भी गंभीरता से विचार करें। राज्यपाल ने व्यक्तित्व विकास एवं जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए चार मंत्र बताते हुए कहा कि सदैव मुस्कुराते रहें, दूसरों की सराहना करना सीखें, दूसरों की अवमानना न करें क्योंकि यह गति अवरोधक का कार्य करती हैं, अहंकार से दूर रहें तथा हर काम को अधिक अच्छा करने पर विचार करें। उन्होंने ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ को उद्धृत करते हुए कहा कि सफलता का मर्म निरन्तर आगे बढ़ने में है।
राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने तीसरे वार्षिक कार्यवृत्त ‘राजभवन में राम नाईक 2016-17’ की प्रति भी भेंट की। इस अवसर पर अकादमी के महानिदेशक श्री कुमार अरविन्द देव ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा राज्यपाल का जीवन परिचय पढ़कर सुनाया। अकादमी के अपर निदेशक श्री रमाकांत पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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