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जनेश्वर के बाद कमजोर हुयी है समाजवादी आंदोलन की वैचारिक ताकत: शिवपाल

Posted on 04 August 2017 by admin

डॉ राम मनोहर लोहिया के अनन्य शिष्य, प्रखर समाजवादी और छोटे लोहिया के नाम से मशहूर जनेश्वर मिश्र के न रहने पर समाजवादी आंदोलन की वैचारिक ताकत कमजोर हुयी है। जनेश्वर जी पहले डॉ लोहिया फिर जयप्रकाश नारायण और बाद में लोकबंधु राजनारायण और मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर समाजवाद और लोकतंत्र को मजबूत करते रहे।

3b870e25-36ff-4ac5-b31a-f0eefb0f10feआज शुक्रवार को महान समाजवादी चिन्तक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राममनोहर लोहिया के अनन्य अनुयायी जनेश्वर मिश्र की जयंती की पूर्व संध्या के उपलक्ष्य में वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव ने “छोटे लोहिया“ के व्यक्तित्व व कृतित्व पर केन्द्रित ई-बुक http://www.janeshwarji.in का विमोचन किया। इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए श्री यादव ने जनेश्वर मिश्र को याद करते हुए कहा कि जनेश्वर मिश्र आचार्य नरेन्द्रदेव-डा० लोहिया व लोकनायक जयप्रकाश की समाजवादी विचारधारा के युगप्रवर्तक थे। उनके अनुसार गरीबों के आँसू पोंछना ही समाजवाद है। जनेश्वर जी की कमी धन-दौलत व सुविधाओं के पीछे नहीं भागे। वे संसद व राजपथ पर आम जनता के दुःख-दर्द-दंश व चुभन की सशक्त आवाज थे। वे नई पीढ़ी के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पठन-पाठन व अध्ययन-चिन्तन पर काफी जोर देते थे।

श्री यादव ने कहा कि छोटे लोहिया से नई पीढ़ी विशेषकर युवा समाजवादियों को सैद्धान्तिक प्रतिबद्धता की सीख लेना चाहिए। वे मुलायम सिंह के साथ “कवच“ की भाँति रहे। छोटे लोहिया पर ई-बुक से जनेश्वर जी के बहाने नई पीढ़ी भारत के गौरवशाली इतिहास से अवगत होगी। जनेश्वर जी जीवनपर्यन्त समाजवादियों की एका के लिए प्रयत्नशील रहे। समाजवादी विचारधारा को निरन्तर मजबूती प्रदान करना ही छोटे लोहिया को दी गई हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

समाजवादी चिन्तक व चिन्तन सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने कहा कि जनेश्वर जी समाजवादियों में घटती वैचारिक अभिरूचि पर काफी चिन्तित रहा करते थे। वे चाहते थे कि राजनीतिक शिक्षण-प्रशिक्षण से निकले युवा आगे आयें और समाज व राजनीति में व्याप्त विकृतियों को दूर करें। चिन्तन सभा लोहिया-स्मृति दिवस (12 अक्टूबर) से विचारशालाओं की श्रृंखला चलायेगी।

ई-बुक का प्राक्कथन जनेश्वर जी के शिष्य शिवपाल सिंह यादव ने लिखा है। इसमें सर्वश्री मुलायम सिंह यादव, बृजभूषण तिवारी, मोहन सिंह, न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, प्रो० सत्यमित्र दूबे, राजीव राय, अंजना गुप्ता के लेख हैं।

रिचर्चा में प्रख्यात इतिहासकार डा० पंकज कुमार, अम्बेडकर सभा के अध्यक्ष डा० लालजी निर्मल, समाजवादी मोहम्मद शाहिद, अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष फरहत हसन (फरहत मियाँ), मजदूर नेता आर०बी० शुक्ला, प्रभानंद यादव, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, युवा नेता राजीव गुप्ता, देवी प्रसाद यादव, राकेश यादव दंत-चिकित्सक डा० सुनील, हर्षवर्धन, वरिष्ठ नेता रघुनन्दन काका, श्यामदेव यादव, अमरेश प्रताप सिंह, लैकफेड के चेयरमेन कुंवर वीरेन्द्र सिंह समेत कई युवा सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

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