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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लखनऊ में सीएनजी की कमी को संज्ञान लेते हुए गंभीर चिंता जाहिर की

Posted on 04 August 2017 by admin

जनहित याचिका संख्या 17424/2017 के तहत सूचीबद्ध।

· माननीय उच्च न्यायालय ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया कि इस प्रकरण में उचित निर्देश 10 दिनों के अन्दर प्राप्त कर न्यायालय को अवगत कराएँ।

श्री प्रशांत कुमार, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय ने मंगलवार (1 अगस्त) को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की थी , जिसे आज जनहित याचिका संख्या 17424/2017 के तहत सूचीबद्ध कर लिया गया ।

माननीय उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए विपक्षीगण के अधिवक्ताओं को सुना व उन्हे निर्देश दिया कि इस प्रकरण में उचित निर्देश 10 दिनों के अन्दर प्राप्त कर न्यायालय को अवगत कराएँ। इस प्रकरण की नियत स्थिति 17.08.2017 है।

लखनऊ में व्याप्त सी.एन.जी. की आपूर्ति समस्या को आज प्रशान्त कुमार अधिवक्ता द्वारा जनहित याचिका दायर कर उच्च न्यायालय का ध्यान लखनऊ के निवासियों की तरफ आकर्षित किया और निवेदन किया की इस जनहित प्रकरण में माननीय न्यायालय हस्तक्षेप कर केन्द्र सरकार उ0प्र0 सरकार, ग्रीन गैस, लिमिटिड तथा गेल इण्डिया लिमिटेड को निर्देश दिया जाये कि लखनऊ में महीनों से बन्द सी.एन.जी. पम्पों को खुलवाया जाए तथा वर्तमान में लखनऊ जनपद में 29000 पंजीकृत वाहनों के सापेक्ष अतिरिक्त सी.एन.जी. स्टेशनों को खोला जाए।

अधिवक्ता द्वारा तर्क रखा गया कि वर्ष 2009 में पंजीकृत वाहनों की संख्या 6000 थी जिसके सापेक्ष 4 सी.एन.जी. पम्प थे। इसके सापेक्ष 2017 में पंजीकृत वाहन 29000 हो चुके हैं जबकि वर्तमान में 12 सी.एन.जी. पम्प हैं जिनमेें से दो सी.एन.जी. पम्प जो की जून 2017 से बन्द पड़े हैं।अधिवक्ता ने तर्क रखा है कि वर्ममान में सी.एन.जी. वाहनों की संख्या लगभग 29000 है अतः इनके लिए न्युनतम 24 सी.एन.जी. पम्पों की आवश्यकता है।

श्री प्रशांत कुमार, एडवोकेट, उच्च न्यायालय ने सड़क पर चलने वाले सीएनजी वाहनों की संख्या को ध्यान में रखते हुए नए सीएनजी स्टेशन खोलने के लिए संबन्धित अधिकारियों को निर्देश देने की भी अपील की, क्योंकि सड़क पर नए वाहनों के अनुपात में सीएनजी स्टेशनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई और इस कारण से लंबे समय से सीएनजी की भरी कमी बनी हुई है। सीएनजी की उपलब्धता जल्द से जल्द बढ़ाने की जरूरत है।

लखनऊ सीएनजी गैस की गंभीर लाजिस्टिक कमी का सामना कर रहा है। शहर में जहां सड़क परिवहन का पूरा बेड़ा लगभग सीएनजी पर निर्भर है, इस प्रकार की कमी सार्वजनिक परिवहन के लिए घातक साबित हो रही है। विद्यालय की बस/ वैन मालिकों की हाल में हुई हड़ताल इस मामले को अच्छी तरह से दर्शा रही है।

यह केवल सीएनजी की उपलब्धता की समस्या नहीं है, बल्कि वितरण की भी समस्या है। लखनऊ शहर में सीएनजी पाइपलाइन द्वारा आती है, लेकिन ईंधन वितरण इकाइयों की कमी की वजह से इतनी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। लगभग 29,000 पंजीकृत सीएनजी वाहनों और काफी संख्या में अपंजीकृत सीएनजी वाहनों की सीएनजी मांग को पूरा करने के लिए (ग्रीन गैस लिमिटेड के) केवल 12 सीएनजी पंप ही मौजूद हैं जिससे यह शहर गंभीर लाजिस्टिक संकट का सामना कर रहा है। हमारे पास सीएनजी है लेकिन हम इसे जनता के बीच वितरित करने में असमर्थ हैं। यह मामला सरकार की ढुलमुल नीति से और भी गंभीर होता जा रहा है।

ग्रीन गैस को लखनऊ और आगरा शहर में गैस प्रदान करने के उद्देश्य से शामिल किया गया था। लेकिन जीजीएल इस कार्य में बुरी तरह से असफल रही है। अपनी स्थापना के 12 साल बाद भी जीजीएल लखनऊ में केवल 12 सीएनजी पंप शुरू कर सकी है।

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के कई निर्णय हैं जिसमें यह अनिवार्य किया गया है कि मेट्रो/ बड़े शहरों में वाहनों (सार्वजनिक परिवहन) में सीएनजी/ वैकल्पिक ईंधन का प्रयोग किया जाना चाहिए। सरकार ने भी सार्वजनिक परिवहन बेड़े को सीएनजी में बदलने के लिए कदम उठाए हैं। ईंधन के रूप में सीएनजी को पूरी प्रणाली द्वारा भारी तरीके से प्रचारित किया जा रहा है। हालांकि, उपभोग के लिए सीएनजी की अनुपलब्धता से ये सारे प्रयास असफल हो जाते हैं।

सीएनजी कार मालिकों द्वारा सीएनजी प्राप्त करने के लिए एक या डेढ़ घंटे इंतजार करना सामान्य बात हो गई है। इसी प्रकार ऑटो और कामर्शियल वाहनों को इससे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है जो कभी-कभी 6-7 घंटे का इंतजार हो जाता है। यदि उन्हें ईंधन प्राप्त करने के लिए 6-7 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है तो वे कब अपने वाहनों को सड़क पर चलाएँगे और कब वे पैसे कमाएंगे। अतः 28-29 जुलाई की हड़ताल को देखते हुए

इस मामले को सुलझाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकार और जीजीएल कोई भी कदम नहीं उठा रहे हैं और अतः नागरिकों के पास न्यायालय जाने के अलावा कोई भी विकल्प नहीं बचा है। न्यायालय हमेशा उन मामलों के लिए सहयोगी रहा है जो नागरिकों की मदद करते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा करते है और इस समय इसकी ही अपेक्षा की जाती है। यदि माननीय उच्च न्यायालय का आदेश सकारात्मक है तो वह लखनऊ के नागरिकों के लिए उद्धारक होगा और आने वाले समय में बिना लाइन में लगे और बिना इंतजार किए सीएनजी भरवाने का रास्ता बन सकता है।

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